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                <title>cheetah - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कूनो नेशनल पार्क में 5 चीता शावकों का जन्म : आबादी बढ़कर 35 हुई, यादव ने कहा- प्रोजेक्ट चीता के लिए यह गर्व और खुशी का पल</title>
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                        <![CDATA[कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से लाई गई चीता आशा ने पांच शावकों को जन्म दिया है। पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने इसे प्रोजेक्ट चीता की बड़ी सफलता बताया। इसके साथ भारत में जन्में जीवित शावकों की संख्या 24 और कुल चीता आबादी 35 हो गई। इसे वन्यजीव संरक्षण के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया गया।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/birth-of-5-cheetah-cubs-in-kuno-national-park-population/article-142285"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(2)16.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से आई चीता आशा ने 5 चीता शावकों का जन्म दिया है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने यह जानकारी दी। मंत्री ने कहा कि प्रोजेक्ट चीता के लिए यह बहुत गर्व और खुशी का पल है, क्योंकि नामीबियाई चीता आशा दूसरी बार मां बनी और उसने कूनो नेशनल पार्क में पांच शावकों को जन्म दिया। 5 नये शावकों के साथ भारत में पैदा हुए जीवित शावकों की संख्या 24 हो गई है। भारतीय धरती पर चीतों का 8वीं बार सफल जन्म हुआ है। यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पर्यावरण के प्रति जागरूक नेतृत्व में शुरू की गई और पोषित भारत की चीता संरक्षण यात्रा में महत्वपूर्ण है।</p>
<p>यादव ने इस विकास को एक सामूहिक प्रयास बताते हुए कहा कि यह खुशी की उपलब्धि अथक प्रयास कर रहे फील्ड स्टाफ और पशु चिकित्सकों के अटूट समर्पण, कौशल और प्रतिबद्धता का एक शानदार प्रमाण है। उनके आने से भारत में चीतों की कुल आबादी अब 35 हो गयी है। मंत्री ने भविष्य के लिए आशा व्यक्त करते हुए कहा कि आशा और उसके शावक फलें-फूलें और इस परियोजना को और भी बड़ी सफलता की ओर ले जाएं। उन्होंने इस क्षण को भारत में वन्यजीव संरक्षण के लिए वास्तव में एक ऐतिहासिक और दिल को छू लेने वाला क्षण बताया।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Feb 2026 16:53:04 +0530</pubDate>
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                <title>चीता लाने से पहले शेरगढ़ सेंचुरी में जैव विविधता का होगा वैज्ञानिक विश्लेषण, सेंचुरी में कीट-पतंगों से दीमक तक पर होगी रिसर्च </title>
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                        <![CDATA[ यह अध्ययन तय करेगा कि आने वाले वर्षों में यहां के जंगल को किस दिशा में विकसित किया जा सकता है।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/before-bringing-in-cheetahs--a-scientific-analysis-of-the-biodiversity-will-be-conducted-in-shergarh-sanctuary--and-research-will-be-carried-out-on-everything-from-insects-to-termites-in-the-sanctuary/article-130683"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/y-of-news-(4)12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शेरगढ़ सेंचुरी में अब जंगल की हर धड़कन को समझने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने यहां के जंगल, वन्यजीवों और पारिस्थितिकी तंत्र की गहराई से वैज्ञानिक अध्ययन शुरू करवा रही है। यहां लंबे समय से चीता पुनर्वास की मांग की जा रही है, ऐसे में चीता लाने से पहले जंगल की जैव विविधिता का बारीकी से अध्ययन कर डेटा बेस तैयार किए जाने की तैयारी की जा रही है। यह पहला मौका है जब इस अभ्यारण्य के हर हिस्से, घने पेड़-वनस्पतियां, दुर्लभ पक्षियों, प्राकृतिक जल स्रोतों, कीट-पतंगों से लेकर मिट्टी में रहने वाले दीमक तक का गहराई से अध्ययन किया जा रहा है। रिसर्च कार्य के लिए वन्यजीव विभाग कोटा ने वर्कआॅर्डर भी जारी कर दिया है। </p>
<p><strong>10 हजार हैक्टेयर में होगा अनुसंधान </strong><br />वाइल्ड लाइफ कोटा के डीएफओ अनुराग भटनागर ने बताया कि शेरगढ़ में करीब 10 हजार हेक्टेयर के जंगल में डीप रिसर्च की जाएगी। इससे विभाग को न केवल आॅथेंटिक डाटा मिलेगा बल्कि जंगल के उचित प्रबंधन और पर्यावरण की प्लानिंग में भी सकारात्मक मदद मिल सकेगी। नतीजन, भविष्य में चीता पुनर्वास योजना जैसी संभावनाओं पर ठोस निर्णय लिए जा सकेंगे।</p>
<p><strong>इन 11 बिंदुओं पर होगी स्टडी</strong><br />- टरमाइट और टरमेटोरियम की गिनती: जंगल में कितनी तरह की दीमक प्रजातियां हैं और कितने बाम्बी (टरमेटोरियम) मौजूद है। यदि, अधिक बाम्बी मिलती है तो इसका मतलब होगा कि जंगल स्वस्थ है। <br />मधुमक्खियों की प्रजातियां: शेरगढ़ सेंचुरी में कितनी तरह की मधुमक्खियां हैं, किस पेड़ पर छत्ते बनते हैं और कितने छत्ते मौजूद हैं।<br />- शिकारी पक्षी (रैपटर्स): यहां कौन-कौन से शिकारी पक्षी हैं, वे किन पेड़ों पर रहते हैं और उनकी संख्या कितनी है।<br />- प्राकृतिक जल स्रोत: जंगल में कितने जल स्रोत हैं और किन स्थानों पर प्राकृतिक रूप से पानी भरता है।<br />- सूखे पेड़ों की संख्या: मृत पेड़ों की गणना होगी, जिनमें कई जीव अपना घोंसला बनाते हैं।<br />- डेन ट्री या गुफा वाले पेड़: पेड़ों के खोखले हिस्सों की पहचान की जाएगी, जिनमें मॉनिटर लिजर्ड या सियार जैसे जीव रहते हैं। <br />- पुराने विशाल पेड़ : जंगल में 200-300 वर्ष पुराने पेड़ों की पहचान की जाएगी। <br />- पुनरुत्थान: स्वत: पनपने वाले पेड़ों की गिनती और विदेशी प्रजातियां जैसे लेंटाना या सूबबुल से हो रहे प्रभाव का भी किया जाएगा।  <br />- वाइल्ड फ्रूट्स: जंगल में कौन-कौन से जंगली फल हैं और कौन से जानवर उनका सेवन करते हैं।<br />-  पक्षियों का विश्राम व्यवहार: कौन से पक्षी दिन में और कौन से रात में किस पेड़ पर विश्राम करते हैं। <br />- पक्षियों का विश्राम व्यवहार: कौन से पक्षी दिन में और कौन से रात में किस पेड़ पर विश्राम करते हैं। <br />- कीट-पतंगे, मच्छर और मक्खियां: कौन से फूलों वाले पौधों के आसपास यह पाए जाते हैं और किन समयों पर सक्रिय होते हैं।</p>
<p><strong>90 दिन जंगल में रहकर अध्ययन करेगी रिसर्च टीम </strong><br />डीएफओ भटनागर ने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया के लिए 10 लाख रुपए का बजट जारी किया गया है। जिसमें से 8.5 लाख रुपए का वर्क आॅर्डर जारी हुआ है।  टीम के 10 सदस्य 90 दिन तक जंगल में रहकर वैज्ञानिक अध्ययन करेंगे। उन्हें आवश्यक संसाधन भी वहीं उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि वे लगातार काम कर सकें। यह अध्ययन न केवल शेरगढ़ की जैव विविधता का साइंटिफिक डेटा तैयार करेगा बल्कि यह भी तय करेगा कि आने वाले वर्षों में यहां के जंगल को किस दिशा में विकसित किया जा सकता है।</p>
<p><strong>वैज्ञानिक जर्नल में प्रकाशित होने पर रिसर्च को मिलेगी मान्यता</strong><br />उन्होंने बताया कि रिसर्च के लिए बायोलॉजिस्ट की टीम तैयार की गई है, जो पेड़-पौधे, पक्षियों, प्राकृतिक जल स्रोतों, कीट-पतंगों से दीमक तक का अनुसंधान करेगी।  हालांकि, इस स्टडी के डाटा को तभी मान्यता मिलेगी जब यह किसी प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल में प्रकाशित होगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो संबंधित एजेंसी की सिक्योरिटी राशि जब्त कर ली जाएगी।</p>
<p><strong>वैज्ञानिक डेटा से होगा भविष्य की प्लानिंग</strong><br />यह रिसर्च न केवल शेरगढ़ अभ्यारण्य की पर्यावरणीय स्थिति को समझने में मदद करेगी बल्कि भविष्य में चीता या अन्य वन्यजीव पुनस्थापन योजनाओं की दिशा भी तय करेगी। राजस्थान के लिए यह महत्वपूर्ण प्रयास है, जिससे वैज्ञानिक आधार पर जंगल के प्रबंधन की दिशा तय होगी। शेरगढ़ में जैव विविधता की डीप स्टडी कार्य किया जा रहा है।  <br /><strong>- अनुराग भटनागर, डीएफओ वन्यजीव विभाग कोटा  </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Oct 2025 16:04:07 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>चीता बसाने को 42563 हैक्टेयर वनखंड को वाइल्ड लाइफ में शामिल करने की तैयारी</title>
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                        <![CDATA[शेरगढ़ सेंचुरी से सटे बारां-झालावाड़ व कोटा के तीन वनखंडों को वन्यजीव के अधीन करने का मामला।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/preparation-to-include-42563-hectares-of-forest-block-in-wildlife-to-settle-cheetah/article-102185"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/257rtrer46.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती में चीता बसाने के लिए  शेरगढ़ सेंचुरी से सटे बारां, झालावाड़ व कोटा वनमंडल के तीन वनखंडों का 42 हजार 563.52 हैक्टेयर वनभूमि को वन्यजीव विभाग के अधीन किए जाने की तैयारी है। इसके लिए वाइल्ड लाइफ कोटा  डीसीएफ ने संभागीय मुख्य वनसंरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक मुकुंदरा टाइगर रिजर्व को प्रस्ताव भेजा है। जिसमें शेरगढ़ सेंचुरी से सटे बारां, झालावाड़ व कोटा वनमंडल के अधीन वनखंडों को चीता लैंडस्केप के रूप में डवलप किए जाने की बात कही गई है। ताकि, भविष्य में यहां चीता  बसाया जा सके और उसके अनुकूनल हैबीटाट विकसित हो सके। </p>
<p><strong>बारां-झालावाड़ व कोटा के इन वनखंडों को शेरगढ़ से जोड़ने की तैयारी</strong><br />वन्यजीव विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, झालावाड़ के 16 वनखंड जिसका क्षेत्रफल 2892.14 हैक्टेयर है। इसी तरह बारां वनमंडल के दो वनखंड, जिनका क्षेत्रफल 11830.37 है और कोटा वनमंडल का 1 वनखंड जिसका क्षेत्रफल 1806.88 हैक्टेयर है। इन  तीनों वनमंडलों का कुल 42 हजार 563.52 हैक्टेयर वनखंडों को वन्यजीव विभाग के अधीन किए जाने को लेकर वन्यजीव डीएफओ अनुराग भटनागर ने सीसीएफ कोटा को प्रस्ताव भेजा है। हालांकि, सीसीएफ कार्यालय में इस प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। </p>
<p><strong>चीतों का हैबीटॉट होगा विकसित  </strong><br />कोटा वन्यजीव विभाग के डीएफओ अनुराग भटनागर ने बताया कि बारां, झालावाड़ व कोटा वनमंडल के तीन वनखंड, जिनका क्षेत्रफल 42 हजार 563.52 हैक्टेयर है। यह तीनों वनखंड शेरगढ़ सेंचुरी से सटे हैं, जो चीता लैंडस्केप की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इसे  वन्यजीव विभाग के अधीन किया जाना चाहिए ताकि यहां चीतों का बेहतर हैबीटाट विकसित किया जा सके। क्योंकि, शेरगढ़ अभयारणय चीतों के अनुकूल  है लेकिन चीतों के लिहाज से इसका क्षेत्रफल छोटा है। ऐसे में बारां, झालावाड़ व कोटा के यह तीनों वनखंडों को शेरगढ़ सेंचुरी में शामिल कर लिया जाए  तो 52 हजार 444.12 हैक्टेयर का चीता लैंडस्केप डवलप हो सकता है। </p>
<p><strong>जंगल और वन्यजीवों की बढ़ जाएगी सुरक्षा</strong><br />डीएफओ भटनागर ने बताया कि 42 हजार 563.52 हैक्टेयर वनभूमि वर्तमान में बारां, झालावाड़ व कोटा वनमंडल के अधीन है। लेकिन, वन्यजीव प्रबंधन के लिहाज से यहां बेहतर कार्य नहीं हुआ। ऐसे में इस क्षेत्र को वाइल्ड लाइफ के अधीन कर दिया जाए तो  जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा पुख्ता हो जाएगी। साथ ही ग्रासलैंड, वैटलैंड व वाटर प्वाइंट विकसित होंगे। सुरक्षा दीवार बनेगी। जिससे वन्यजीवों व जंगल की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हो सकेंगे। वर्तमान में इस क्षेत्र में पिछले 15-20 वर्षों में वन्यजीव संरक्षण एवं प्रबंधन की दृष्टि से कोई विशेष कार्य नहीं हुए हैं। यदि इस क्षेत्र में भविष्य में चीता इन्ट्रोड्यूज किया जाता है, तो यह इस पूरे क्षेत्र के लिए बहुत श्रेयकर होगा। चीता को बसाए जाने के क्षेत्र में यह एक महत्वपूर्ण कार्य होगा।</p>
<p><strong>4 साल पहले कूनों की टीम ने किया था सर्वे  </strong><br />डीएफओ अनुराग भटनागर ने बताया कि चीता लैण्डस्कैप के सर्वे के लिए 23 नवम्बर 2020 को वन्यजीव संस्थान देहरादून के डॉ वाई.वी. झाला की टीम ने शेरगढ़ सेंचुरी का निरीक्षण किया था। टीम में तत्कालीन मुकुंदरा सीसीएफ एस.आर. यादव भी शामिल थे।  यादव ने सर्वे के बाद 22 जनवरी 2021 को शेरगढ सेंचुरी से लगते हुए वन मण्डल बारां, झालावाड, एवं कोटा के वनखण्डों को जोड़कर चीता लैण्डस्कैप बनाने के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा था। इन तीनों जिलों के वन मण्डलों का क्षेत्रफल 425.64 वर्ग किलोमीटर नापा गया था। वर्तमान में उक्त  वनखण्ड टेरिटोरियल वन मण्डलों के अधीन है। इन वनखण्डों को वन्यजीव मण्डल के अधीन कर दिया जाए तो वन्यजीवों का बेहतर प्रबंधन हो सकता है। इसके अलावा शाकाहारी वन्यजीव, आॅगमेन्टेशन, ग्रासलैंड व वेटलैंड डवलपमेन्ट वन्यजीव प्रबन्धन कार्य कराये जाए तो यह क्षेत्र चीता लैण्डस्कैप एवं वन्यजीवों के प्रबन्धन के लिए मील का पत्थर साबित होगा। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कोटा वन्यजीव विभाग द्वारा शेरगढ़ से सटे बारां-झालावाड़ व कोटा वनमंडल के 42 हजार 563.52 हैक्टेयर के वनखंड़ों को वाइल्ड लाइफ में शामिल करने का प्रस्ताव भेजा है। यह चीता लैंडस्केप बनाने, हैबीटाट इम्प्रूमेंट व बेहतर वन्यजीव प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। हालांकि, इस प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है।<br /><strong>- रामकरण खैरवा, संभागीय मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक वन विभाग कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Jan 2025 13:19:42 +0530</pubDate>
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                <title>अबकी बार मुकुंदरा में चीते आबाद करने पर जोर</title>
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                        <![CDATA[ दक्षिण अफ्रीका से तीसरी खेप के रूप में संभवत जो चीते लाए जाएंगे, उन्हें मध्यप्रदेश में चंबल नदी पर बने गांधी सागर बांध के वन्यजीव अभयारण्य में छोड़े जाने का विचार है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/this-time-the-emphasis-is-on-populating-leopards-in-mukundhra/article-57367"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/cheetah.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। दक्षिणी अफ्रीका से एक बार फिर चीते आयात करके भारत में बसाया जाने की संभावना के बीच राजस्थान में कोटा जिले के कोटा-झालावाड़ जिले में विस्तृत मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में चीते बसाने की मांग फिर जोर पकडऩे लगी है।</p>
<p>ताजा मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण अफ्रीका से तीसरी खेप के रूप में संभवत जो चीते लाए जाएंगे, उन्हें मध्यप्रदेश में चंबल नदी पर बने गांधी सागर बांध के वन्यजीव अभयारण्य में छोड़े जाने का विचार है। पूर्व में भी दो बार दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से लाकर भारत में चीते बसाए गए थे लेकिन वन्यजीव एवं पर्यावरण प्रेमियों के आरोप के अनुसार दोनों ही बार मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के चीते बसाने की ²ष्टि से नैसर्गिक दावेदार होने के बावजूद केंद्र सरकार ने राजनीतिक आधार पर मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में  स्थित कूनो नेशनल पार्क में यह चीते आबाद किए गए। कुल 20 चीते वहां आबाद किए गए थे जिनमें से नौ चीतों की अब तक मौत हो चुकी है। </p>
<p>संभवत: दक्षिण अफ्रीका से तीसरी खेप के रूप में चीते आयात किए जाने की मीडिया रिपोर्ट के आधार पर सोशल मीडिया में भारतीय जनता पार्टी के सांसद वरुण गांधी ने उठाए सवाल खड़ा करते हुए कहा कि अफ़्रीका से चीतों को आयात करना और उनमें से नौ को विदेशी भूमि में मरने की अनुमति देना न केवल क्रूरता है, बल्कि लापरवाही का भयावह प्रदर्शन है। हमें इन शानदार प्राणियों की पीड़ा में योगदान देने के बजाय अपनी लुप्तप्राय प्रजातियों और आवासों के संरक्षण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। विदेशी जानवरों की यह लापरवाह खोज तुरंत समाप्त होनी चाहिए, और हमें इसके बजाय अपने मूल वन्यजीवों के कल्याण को प्राथमिकता देनी चाहिए।</p>
<p>17 सितम्बर को आज ही के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी ने अपने 72वें जन्मदिन के मौके पर पिछले साल अपनी $िफतरत के अनुरूप देशी-विदेशी मीडिया का जमावड़ा लगाकर कूनो अभयारण्य में नामीबिया से खरीद कर लाए गए चीते छोड़कर जमकर वाहवाही लूटी। दूसरी खेप में भी अफ्रीकी चीते लाकर कूनो में ही आबाद किए गए। पहली खेप में नामीबिया से लाए गए 8 चीतों को कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा था। 18 फरवरी को दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीतों को कूनो में छोड़ा गया था। यानी कुल 20 चीते लाए गए थे। इनमें से अब तक 9 चीतों की मौत हो चुकी है।</p>
<p>सांगोद से कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक भरत सिंह कुंदनपुर केन्द्र सरकार पर चीते बसाने के मामले में भी राजनीति करने का आरोप लगाते रहे हैं। भरत सिंह ने भाजपा के जनप्रतिनिधियों को अपने इस निम्न स्तर की संकीर्ण सोच से उबरने की सलाह देते हुए यहां तक कह चुके है कि यह सही है कि चीते तो बीजेपी को वोट देने से रहे, लेकिन यदि बीजेपी के यह नेता वन एवं वन्यजीवों के बारे में अपनी समझ को विकसित कर दरा अभयारण्य क्षेत्र में चीते बसा दे तो निश्चित रूप से इससे क्षेत्र में पर्यटन का विकास होगा, बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार मिलेगा, होटल- ट्यूरिज्म-ट्रांसपोर्ट जैसे क्षेत्रों में निवेश के अवसर मिलने से सैकड़ों परिवार लाभान्वित होंगे तो बीजेपी नेताओं के पास अपनी उपलब्धियां गिना कर इन जीते-जागते लोगों से वोट हासिल करने का हक तो होगा ही। इस नाते ही यह नेता राजनीति करे ले तो मुझे तो इसमें भी कोई आपत्ति नहीं है।</p>
<p>ज्ञातव्य है कि भारत ने साल 1952 में खुद को चीता विलुप्त देश घोषित कर लिया था। वर्ष 1947 में देश आजाद हुआ और दुर्भाग्य से उसके पांच वर्ष बाद ही देश एक नायाब वन्यजीव चीता से भी मुक्त हो गया।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 Sep 2023 17:02:08 +0530</pubDate>
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                <title>कूनो राष्ट्रीय उद्यान में शावक की मौत</title>
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                        <![CDATA[मध्यप्रदेश के चंबल संभाग के श्योपुर जिले में स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान में आज दोपहर एक चीते के एक शावक की मौत हो गयी]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/cub-dies-in-kuno-national-park/article-46442"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/photo-size-630-400-(6)1.png" alt=""></a><br /><p>मुरैना। मध्य प्रदेश के चंबल संभाग के श्योपुर जिले में स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान में आज दोपहर एक चीते के एक शावक की मौत हो गयी। यह शावक कूनो पार्क प्रबंधन की मॉनिटरिंग के दौरान बीमार मिला था और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ जसवीर सिंह चौहान ने इसकी पुष्टि की है।</p>
<p>आधिकारिक सूत्रों के अनुसार नामीबिया से लाई गई मादा चीता ज्वाला (सियाया) ने बीते 24 मार्च को ही पार्क में 4 शावकों को जन्म दिया था। अब पार्क में अब कुल 17 चीते और 3 शावक बचे हैं। पिछले साल से अब तक 3 चीतों और एक शावक की मौत हो चुकी है। सूत्रों के अनुसार कूनो राष्ट्रीय उद्यान में बीते दो माह के अंतराल में 3 चीतों की मौत के चलते मायूसी छाई हुई थी। इसी बीच सियाया (ज्वाला) ने बीती 24 मार्च को 4 शावकों को जन्म दिया था। मदर्स डे पर चारों शावक अपनी मां संग अठखेलियां करते नजर आए थे। इन तस्वीरों ने कूनो प्रबंधन से लेकर केंद्र सरकार तक को राहत पहुंचाई। मगर अब एक शावक की मौत ने प्रबंधन को चिंता में डाल दिया है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 May 2023 17:44:29 +0530</pubDate>
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                <title>कूनो नेशनल पार्क: शातिर चीते ओबान की छीनी आजादी, बड़े बाड़े में किया गया कैद</title>
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                        <![CDATA[कूनो नेशनल पार्क प्रबंधन सूत्रों के अनुसार पिछले महीने 21 मार्च को पवन उर्फ ओबान को खुले जंगल में छोड़ा गया था। चीता पवन जंगल की सीमा लांग रहा था। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/vicious-cheetah-snatched-freedom-of-oban-now-imprisoned-in-big/article-43811"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/शीर्षक-रहित-(630-×-400-px)-की-कॉपी-(1).png" alt=""></a><br /><p>मुरैना। मध्य प्रदेश के चंबल संभाग के श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में रह रहे चीता ओबान (पवन) की पार्क प्रबंधन द्वारा आजादी छीन ली गयी है। पवन को वापस कूनो के बड़े बाड़े में कैद कर दिया गया है, जहां उसके साथ दो अफ्रीकी मादा चीते भी रहेंगे।</p>
<p>कूनो नेशनल पार्क प्रबंधन सूत्रों के अनुसार पिछले महीने 21 मार्च को पवन उर्फ ओबान को खुले जंगल में छोड़ा गया था। चीता पवन जंगल की सीमा लांग रहा था। मध्य प्रदेश के शिवपुरी और उत्तर प्रदेश के झांसी बॉर्डर तक पहुंच गया। वो बाघों के पास भी पहुंच गया था, जहां उसे जान का खतरा भी था। इसलिए उसे कूनो पार्क की टीम ने ट्रैंकुलाइज कर वापस कूनो के बड़े बाड़े में कैद कर दिया है।</p>
<p>सूत्रों ने बताया कि जंगल से निकलकर वह कभी गांवों में घुस जा रहा था, तो कभी उत्तर प्रदेश की सीमा में, इसे देखते हुए उसकी निगरानी कर रही टीम ने यह तय किया है कि, उसे अब वापस खुला नहीं छोड़ा जाएगा। इसलिए उसे अब बेहोश करने के बाद वापस बाड़े में पहुंचा दिया गया है। इस बार उसके साथ दो मादा चीतों को भी रखा गया है।</p>
<p>आधिकारिक जानकारी के अनुसार कूनो नेशनल पार्क में इस समय 18 चीते और चार शावक है। 17 सितंबर को कूनो नेशनल पार्क में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने जन्मदिन के अवसर पर 8 चीते छोड़े गए थे। बाद में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते और लाए गये थे। इनमें से दो की मौत हो चुकी है। वहीं एक मादा चीता ने चार शावकों को जन्म भी दिया है।</p>
<p>कूनो नेशनल पार्क सूत्रों के अनुसार रविवार को जिस उदय नाम के चीते की मौत हुई थी, उसकी शुरूआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई है। इसमें उसकी मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट माना गया है, उसके अंगों के सैंपल को जांच के लिए भोपाल और जबलपुर भेजा गया है। वहां से रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चल पाएगा। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया करीब चार घंटे तक चली, इसमें डॉक्टरों ने उदय के हार्ट, किडनी, आंत, लंग्स और विसरा का सैंपल लिया जिसे जांच के लिये प्रयोगशाला भेजा जाएगा।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Apr 2023 16:03:37 +0530</pubDate>
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                <title>सेना का चीता हेलीकॉप्टर अरुणाचल प्रदेश में क्रैश </title>
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                        <![CDATA[हेलीकॉप्टर पश्चिमी बोमडिला में मांडला के निकट क्रैश हुआ है। हेलीकॉप्टर का पता लगाने के लिए खोजी दलों को तैनात किया गया है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/cheetah-helicopter-crashes-of-army-in-arunachal/article-40043"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/cheetah.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सेना का एक चीता हेलीकॉप्टर अरुणाचल प्रदेश के बोमडिला क्षेत्र में हादसे का शिकार हो गया। सेना के प्रवक्ता ने बताया कि चीता हेलीकॉप्टर ने सुबह अरुणाचल प्रदेश के बोमडिला से उड़ान भरी थी। सुबह नौ बजकर 15 मिनट पर हेलीकॉप्टर का संपर्क हवाई नियंत्रण से टूट गया। </p><p>प्रवक्ता ने कहा कि हेलीकॉप्टर के पायलट के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं मिली है। यह बताया जा रहा है कि हेलीकॉप्टर पश्चिमी बोमडिला में मांडला के निकट क्रैश हुआ है। हेलीकॉप्टर का पता लगाने के लिए खोजी दलों को तैनात किया गया है।<br /></p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Mar 2023 15:59:39 +0530</pubDate>
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                <title>राष्ट्रीय अभयारण्य में छोड़े दक्षिण अफ्रीका से लाए गए 12 चीते </title>
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                        <![CDATA[ अब अभ्यारण्डय में चीतों की संख्या बढ़कर 20 हो गयी है। दक्षिण अफ्रीका गई टीम सुबह भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से चीतों को लेकर पहुंची।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/12-cheetah-released-in-kuno-national-sanctuary/article-37630"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/46546546538.jpg" alt=""></a><br /><p>श्योपुर। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कूनो राष्ट्रीय अभयारण्य में दक्षिण अफ्रीका से लाए गए 12 चीते छोड़े है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार अभ्यारण्य में छोड़े गए चीतों में 7 नर और 5 मादा हैं। अब अभ्यारण्डय में चीतों की संख्या बढ़कर 20 हो गयी है। </p>
<p>दक्षिण अफ्रीका गई टीम सुबह भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से चीतों को लेकर पहुंची। वहां डॉक्टर के परीक्षण होने के बाद उन्हें कूनो अभ्यारणय लाया गया। इन चीतों को वन्य जीव विशेषज्ञों की टीम देखरेख करेगी और इनकी देखरेख निगरानी के लिये कूनो अभ्यारण्य परिक्षेत्र में 6 वाच टावर बनाये गए हैं।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Feb 2023 14:28:51 +0530</pubDate>
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