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                <title>caste discrimination - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>caste discrimination RSS Feed</description>
                
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                <title>प्रधानमंत्री बालेन शाह का बड़ा फ़ैसला : दलितों पर सदियों से हो रहे अत्याचार के लिए मांगेंगे माफ़ी, सामाजिक संगठनों ने की भेदभाव-विरोधी कानूनों को सख्ती से लागू करने की मांग</title>
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                        <![CDATA[नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने दलित समुदाय पर सदियों से हुए अत्याचारों के लिए औपचारिक माफी का ऐलान किया है। सरकार की 100-सूत्रीय कार्ययोजना के तहत 15 दिनों में विशेष सुधार कार्यक्रम शुरू होंगे। सामाजिक संगठनों ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया है, हालांकि जाति-आधारित भेदभाव को जड़ से मिटाने के लिए अभी सख्त कानूनी क्रियान्वयन की चुनौती बरकरार है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/prime-minister-balen-shahs-big-decision-will-apologize-for-centuries/article-149015"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/balen-shah.png" alt=""></a><br /><p>काठमांडू। नेपाल में प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के देश के दलितों पर सदियों से हो रहे अत्याचार को लेकर माफी मांगने के ऐलान का आम लोगों, सामाजिक संगठनों ने दिल खोल कर स्वागत किया है। गौरतलब है कि नेपाल में दलित समुदाय को दशकों से देश की राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक संरचनाओं से व्यवस्थित रूप से बाहर रखा गया है। उनको पीढ़ियों से, सामाजिक जगहों और सरकारी तंत्र, दोनों में ही गंभीर अन्याय और अमानवीय व्यवहार का सामना करना पड़ा है।</p>
<p>सदियों से चले आ रहे इस उत्पीड़न को स्वीकार करते हुए, प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के नेतृत्व वाली नयी सरकार ने अपने 100-सूत्रीय कार्ययोजना के हिस्से के तौर पर, दलितों और ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर पड़े समुदायों से औपचारिक रूप से माफी मांगने और 15 दिनों के भीतर उनके उत्थान के लिए विशेष सुधार कार्यक्रमों की घोषणा करने का फैसला किया। उनके इस ऐलान का दलित समुदाय के नेताओं, समाज सुधार के लिए काम करने वाले संगठनों ने खुशी का इजहार किया है। उन्होंने यह भी कहा है कि यह सही दिशा में उठाया गया कदम है लेकिन यह अपने आप में पर्याप्त नहीं है।</p>
<p>स्थानीय मीडिया काठमांडू पोस्ट ने लिखा है कि यह एक दुर्लभ और महत्वपूर्ण क्षण है। फिर भी, वास्तविक बदलाव लाकर इस माफी को सार्थक बनाना, कहने में जितना आसान है, करने में उतना ही मुश्किल है। उल्लेखनीय है कि नेपाल ने 1963 में एक नए राष्ट्रीय कानून के ज़रिए छुआछूत को खत्म कर दिया था, लेकिन इसके कमज़ोर क्रियान्वयन के कारण हाशिए पर पड़े समूहों के साथ भेदभाव जारी रहा। बाद में, 1990 के संविधान ने छुआछूत को फिर से गैर-कानूनी और दंडनीय अपराध घोषित किया। साल 2006 की अंतरिम संसद ने भी नेपाल को छुआछूत-मुक्त देश घोषित किया।</p>
<p>इसके अलावा, 2011 में, सरकार ने 'जाति-आधारित भेदभाव और छुआछूत अधिनियम' पेश किया। 2015 के संविधान ने अनुच्छेद 40 के तहत उनके अधिकारों की गारंटी दी, जिसमें सभी सरकारी निकायों में उनके प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के साथ-साथ कानूनी सुरक्षा के प्रावधान भी शामिल थे। ये कानून महत्वपूर्ण और आवश्यक थे। फिर भी, इन कानूनी सुधारों के बावजूद, दलितों की स्थिति में बड़े पैमाने पर कोई बदलाव नहीं आया।</p>
<p>अखबार ने यह भी लिखा है कि यह बेहद खराब स्थिति सरकार से सिर्फ़ एक दिखावटी कदम से कहीं ज़्यादा की मांग करती है—खासकर उस सरकार से जिसे हाल के चुनावों में सुधारों के लिए लोगों का ज़बरदस्त समर्थन मिला है। सरकार के पास हाशिए पर पड़े समूहों का जीवन बेहतर बनाने की बहुत बड़ी ताकत है। इसलिए, भेदभाव-विरोधी कानूनों को सख्ती से लागू करना, हाशिए पर पड़े समूहों की शिक्षा और रोज़गार के बाज़ारों तक पहुँच बढ़ाना, और जाति-आधारित हिंसा के लिए ज़िम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराना बहुत ज़रूरी है। इसका मतलब यह भी है कि राजनीति में उनका प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाए। लेकिन, बदकिस्मती से, मौजूदा सरकार के मंत्रिमंडल में भी सिर्फ़ एक दलित सदस्य है और संसद में सिर्फ़ 17 दलित सांसद हैं, जबकि 134 सांसद 'खास' समुदाय से हैं, जो ऐतिहासिक रूप से एक दबदबा रखने वाला समूह रहा है।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 18:42:04 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>राहुल गांधी का केंद्र पर हमला: बोले-बड़े पदों पर कमजोर वर्ग की हिस्सेदारी हो सुनिश्चित, दलित और आदिवासी कर्मचारियों के साथ भेदभाव करने का लगाया आरोप</title>
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                        <![CDATA[लोकसभा विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संस्थानों में बहुजन समाज की कम भागीदारी पर चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मेरिट और प्रदर्शन के बहाने दलित-आदिवासी कर्मचारियों की पदोन्नति रोकी जाती है। राहुल ने आरक्षण से आगे बढ़कर नीतिगत सुधारों की मांग की है ताकि उच्च पदों पर पिछड़े वर्गों को समान हक मिल सके।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/rahul-gandhi-attacked-the-centre-said-ensure-that-weaker/article-148426"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/rahul.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि देश के संस्थानों में बहुजन समाज की बड़े पदों पर हिस्सेदारी कम है और उनकी उचित भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए आरक्षण से आगे बढ़कर नीतिगत सुधार किए जाने चाहिए। राहुल गांधी ने सोमवार को सोशल मीड़िया एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उनसे मिलने जब भी किसी संस्थान या संगठन के लोग आते हैं तो सबकी शिकायत यही रहती है कि उनके संस्थान में वरिष्ठ पदों पर कमजोर वर्ग के लोगों की हिस्सेदारी नहीं के बराबर है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "हाल ही में जनसंसद में ग्रामीण बैंक के एससी-एसटी वेलफेयर एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान भी यह बात सामने आई कि प्रोन्नति में रोस्टर नियम होने के बावजूद दलित और आदिवासी कर्मचारियों के साथ भेदभाव किया जाता है। कभी प्रदर्शन तो कभी मेरिट के नाम पर उनकी तरक्की रोकी जाती है, जबकि आवाज उठाने पर दूरदराज क्षेत्रों में तबादले जैसी कार्रवाई भी की जाती है।"</p>
<p>राहुल गांधी ने कहा कि आरक्षण के चलते इन समुदायों को प्रारंभिक स्तर पर नौकरियां तो मिल जाती हैं, लेकिन उच्च पदों तक पहुंचना नीतिगत भेदभाव के कारण लगभग असंभव बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस अन्याय के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा ताकि हर वर्ग को संस्थाओं में समान भागीदारी मिल सके।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 15:55:22 +0530</pubDate>
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                <title>राज्यसभा में उठी CA के हितों की रक्षा के लिए कानून बनाए जाने की मांग, विपक्ष के हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही स्थगित</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[नई दिल्ली में राज्यसभा में सीए हितों हेतु विशेष कानून की मांग उठी। शिक्षक भर्ती में आयु छूट, कार्यस्थल भेदभाव, विश्वविद्यालय दर्जा और श्रमिक आंदोलन मुद्दे रहे।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/demand-for-making-law-to-protect-the-interests-of-ca/article-142868"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(3)1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। चार्टर्ड अकाउंटेंटों (सीए) के हितों की रक्षा के लिए विशेष कानून बनाये जाने की मांग गुरुवार को राज्यसभा में उठायी गयी। कांग्रेस के विवेक तन्खा ने शून्यकाल के दौरान यह मामला उठाते हुए कहा कि सीए सरकार की विशेष रूप से वित्तीय योजनाओं के क्रियान्यवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं लेकिन हाल के दिनों में सीए के कामकाज को विभिन्न एजेन्सियों द्वारा प्रभावित किये जाने के मामले सामने आये हैं। इससे सीए और उनके उपभोक्ताओं की निजता का हनन हो रहा है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सरकार को अपने देश में काम करने वाले भारतीय सी ए और सी ए कंपनियों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है। इसके लिए उन्होंने सी ए के हितों की रक्षा के लिए विशेष कानून बनाये जाने की मांग की। कांग्रेस की ही रंजीत रंजन ने दिल्ली सरकार के स्कूलों में  शिक्षकों की भर्ती में महिलाओं को आयु सीमा में मिलने वाली छूट को बहाल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार की ओर से गत दिसम्बर में महिलाओं को शिक्षक भर्ती में आयु सीमा में मिलने वाली छूट को बंद कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह छूट महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए दी गयी थी। केन्द्रीय विद्यालयों और हरियाणा में अभी भी महिलाओं को शिक्षक भर्ती में आयु सीमा में छूट दी जा रही है। उन्होंने कहा कि देश भर में शिक्षक भर्ती में महिलाओं की आयु सीमा एक समान की जानी चाहिए।  </p>
<p>सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कार्यस्थलों पर जातीय भेदभाव का मुद्दा उठाते हुए कहा कि ओड़शिा में एक आंगनवाड़ी केन्द्र का इसलिए बहिष्कार किया जा रहा है क्योंकि इसमें एक दलित महिला काम करती है। एक विशेष समुदाय के लोगों ने इस केन्द्र का बहिष्कार करते हुए अपने बच्चों को वहां भेजना बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 14,15 और 17 का उल्लंघन है और सरकार को इसे गंभीरता से लेते हुए कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। </p>
<p>बीजू जनता दल के देवाशीष सामंतराय ने ओडिशा के रेवनशॉ विश्वविद्यालय को केन्द्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिये जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि राज्य में अभी केवल एक ही केन्द्रीय विश्वविद्यालय है। उन्होंने कहा कि राज्य में बडी संख्या में आदिवासी आबादी है और इस विश्वविद्यालय से इस समुदाय के लोगों को विशेष फायदा होगा। भाजपा की दर्शना ङ्क्षसह ने उत्तर प्रदेश में चीतों के संरक्षण की संभावनाओं पर विचार करने की मांग की। </p>
<p>सीपी आई ( एम) के जॉन ब्रिटास ने देश में आज किसान और श्रमिक आंदोलन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह हडताील नयी श्रम संहिता से लेकर मनरेगा की बहाली को लेकर की जा रही है उन्होंने कहा कि केवल भारतीय मजदूर संघ को छोड़कर सभी  ट्रेड यूनियन इसमें हिस्सा ले रही हैं। उन्होंने कहा कि इन आंदोलनों में अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते में भारत की संप्रभुता पर हमले को लेकर भी विरोध किया जा रहा है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Feb 2026 14:07:04 +0530</pubDate>
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                <title>भाजपा राज में दलितों पर बढ़े अत्याचार,जातिगत भेदभाव भी बढ़ा : कांग्रेस</title>
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                        <![CDATA[मीडिया में इमेज मेकिंग में व्यस्त राजस्थान सरकार इन घटनाओं को गंभीरता से ले]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/atrocities-on-dalits-increased-under-bjp-rule-caste-discrimination-also/article-78931"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/congress-logo-(3).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। झुंझुनूं में शराब माफियाओं के दलित युवक को पीट पीटकर हत्या करने के मामले में पीसीसी चीफ गोविन्द डोटासरा और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भजनलाल सरकार पर निशाना साधा है।</p>
<p>डोटासरा ने कहा कि झुंझुनूं में शराब माफियाओं ने दलित युवक को इतनी निर्दयता से पीटा कि उसकी मृत्यु हो गई। भाजपा सरकार में दलितों पर अत्याचार और जातिगत भेदभाव निरंतर बढ़ रहा है, भाजपा स्वभाव से ही दलित विरोधी है। अपराध की घटनाओं से पूरे प्रदेश का यही हाल है, बदमाश बेखौफ और आमजन में भय व्याप्त है।</p>
<p>पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि सूरजगढ़, झुंझुनू में शराब माफिया द्वारा एक दलित युवक की पीट-पीटकर हत्या एवं उसका वीडियो बनाकर वायरल करना राजस्थान में सरकार और पुलिस के कमजोर होते इकबाल का प्रतीक है। आए दिन प्रदेशभर से ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं। प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद दलितों के खिलाफ अपराध तेजी से बढ़े हैं। मीडिया में इमेज मेकिंग में व्यस्त राजस्थान सरकार इन घटनाओं को गंभीरता से ले एवं आगे इनकी पुनरावृत्ति ना हो इसके लिए कार्य करें।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 May 2024 18:28:55 +0530</pubDate>
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                <title>जातिगत भेदभाव पर रोक लगाने वाला सिएटल बना पहला अमेरिकी शहर</title>
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                        <![CDATA[दिसंबर 2019 में, बोस्टन के पास ब्रैंडिस विश्वविद्यालय पहला अमेरिकी कॉलेज था जिसने अपनी गैर-भेदभाव नीति में जाति को शामिल किया।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/seattle-becomes-first-us-city-to-ban-racial-discrimination/article-37974"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/end.png" alt=""></a><br /><p>सिएटल। अमेरिका में सिएटल सिटी काउंसिल ने  शहर के भेदभाव-विरोधी कानूनों में जाति को शामिल किया है जिससे यह शहर जातिगत भेदभाव पर प्रतिबंध लगाने वाला पहला अमेरिकी शहर बन गया है।</p>
<p>जाति के आधार पर भेदभाव को गैरकानूनी घोषित करने का आह्वान, जन्म या वंश के आधार पर लोगों का एक विभाजन अमेरिका में दक्षिण एशियाई प्रवासी समुदायों के बीच तेजी बढ़ा है। पर इस आंदोलन को कुछ हिंदू अमेरिकियों से झटका भी मिल रहा है जो तर्क देते हैं कि इस तरह का कानून एक विशिष्ट समुदाय को बदनाम करता है।</p>
<p>मंगलवार को 6-1 मतों से पारित अध्यादेश के समर्थकों का कहना है कि जातिगत भेदभाव राष्ट्रीय और धार्मिक सीमाओं को पार कर जाता है तथा इस तरह के कानूनों के बिना, अमेरिका में कोई सुरक्षा नहीं होगी।</p>
<p>अध्यादेश एक विवादास्पद मुद्दा है, खासकर देश के दक्षिण एशियाई डायस्पोरा के बीच। समर्थकों का तर्क है कि इसकी आवश्यकता है क्योंकि जाति मौजूदा नागरिक अधिकारों की सुरक्षा के अंतर्गत नहीं आती है। उपाय का विरोध करने वाले समूहों का कहना है कि यह एक समुदाय को बदनाम करेगा जो पहले से ही पूर्वाग्रह से प्रेरित है।</p>
<p>समाजवादी और नगर परिषद में एकमात्र भारतीय अमेरिकी परिषद सदस्य क्षमा सावंत ने कहा कि अध्यादेश, जो उन्होंने प्रस्तावित किया था, एक समुदाय को अलग नहीं करता है, लेकिन यह बताता है कि जातिगत भेदभाव राष्ट्रीय और धार्मिक सीमाओं को कैसे पार करता है।</p>
<p>मंगलवार की नगर परिषद की बैठक से ठीक पहले इस मुद्दे के विभिन्न पक्षों के कार्यकर्ता सिएटल में पहुंचने लगे। पिछले सप्ताह की शुरुआत में, बैठक में बोलने के लिए 100 से अधिक लोगों ने अनुरोध किया था। मंगलवार की शुरुआत में, कई कार्यकर्ताओं ने ठंडे तापमान और हवा के झोंकों को झेलते हुए सिटी हॉल के बाहर लाइन लगाई ताकि उन्हें मतदान से पहले परिषद से बात करने का मौका मिल सके। पर परिषद ने बैठक में सार्वजनिक टिप्पणी को प्रतिबंधित कर दिया।</p>
<p>कैलिफोर्निया स्थित इक्वेलिटी लैब्स के संस्थापक और कार्यकारी निदेशक थेनमोझी साउंडराजन ने कहा कि सिएटल और उससे आगे के दलित कार्यकर्ताओं ने अध्यादेश के समर्थन में सिएटल सिटी हॉल में रैली की।</p>
<p>अमेरिका प्रवासन नीति संस्थान के अनुसार, विदेशों में रहने वाले भारतीयों के लिए अमेरिका दूसरा सबसे लोकप्रिय गंतव्य है। संस्थान का अनुमान है कि यू.एस. डायस्पोरा 1980 में लगभग 2,06,000 से बढ़कर 2021 में लगभग 27 लाख हो गया। ग्रुप साउथ एशियन अमेरिकन लीङ्क्षडग टुगेदर की रिपोर्ट है कि लगभग 54 लाख दक्षिण एशियाई अमेरिका में रहते हैं—2010 की जनगणना में गिने गए 35 लाख से अधिक। इनमें अधिकांश बंगलादेश, भूटान, भारत, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका के निवासी हैं।</p>
<p>पिछले तीन वर्षों में, कई कॉलेजों और विश्वविद्यालय प्रणालियों ने जातिगत भेदभाव को प्रतिबंधित करने के लिए कदम उठाए हैं।</p>
<p>दिसंबर 2019 में, बोस्टन के पास ब्रैंडिस विश्वविद्यालय पहला अमेरिकी कॉलेज था जिसने अपनी गैर-भेदभाव नीति में जाति को शामिल किया। कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी सिस्टम, कोल्बी कॉलेज, ब्राउन यूनिवर्सिटी और कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, डेविस सभी ने समान उपाय अपनाए हैं। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने अपने स्नातक छात्र संघ के साथ अपने अनुबंध के हिस्से के रूप में 2021 में छात्र श्रमिकों के लिए जाति सुरक्षा की स्थापना की।</p>
<p>सिएटल उपाय को समानता लैब्स और उनके जैसे अन्य दलित कार्यकर्ताओं के नेतृत्व वाले संगठनों का समर्थन प्राप्त था। समूहों का कहना है कि प्रवासी समुदायों में जातिगत भेदभाव प्रचलित है, जो आवास, शिक्षा और तकनीकी क्षेत्र में सामाजिक अलगाव तथा भेदभाव के रूप में प्रकट होता है, जहां दक्षिण एशियाई महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।</p>]]>
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                <pubDate>Wed, 22 Feb 2023 15:18:13 +0530</pubDate>
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                <title>पुजारी ने सांसी समाज के महिला पुरुषों को मंदिर में प्रवेश करने से रोका</title>
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                        <![CDATA[ चेनाराम ने बताया कि इस संबंध में कोतवाली पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस के पहुंचने के बावजूद भी एकबारगी पुजारी ने सांसी समाज के लोगों के मंदिर में प्रवेश पर एतराज किया। इसके बाद में पुलिसकर्मियों के समझाइश के बाद समाज के लोगों को पूजा अर्चना के लिए प्रवेश दिया गया। इस दौरान पुलिस का जाब्ता भी मौके पर तैनात रहा। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/churu/the-priest-prevented-men-and-women-of-sansi-community-from/article-37661"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/18churu5.jpg" alt=""></a><br /><p>चूरू। एक तरफ  जहां इंसान मंगल ग्रह पर पहुंचने के लिए प्रयासरत है तो दूसरी तरफ  इस सदी में भी जातियों को लेकर भेदभाव के मामले भी सामने आ रहे हैं।  शहर के वार्ड 59 में महाशिवरात्रि पर एक ऐसा ही मामला सामने आया। जहां सांसी समाज के लोगों को पूजा अर्चना करने से रोक दिया गया। मंदिर के पुजारी ने गेट बंद कर लिया और सांसी समाज की महिलाओं कोअंदर जाने से रोकने के लिए हंगामा शुरू कर दिया। सूचना के बाद कोतवाली पुलिस का जाब्ता मौके पर पहुंचा और पुजारी सहित सांसी समाज के लोगों को समझाइश की। एक तरफ  पुजारी सांसी समाज के लोगों को मंदिर में प्रवेश की बात पर अड़ा रहा तो दूसरी तरफ  सांसी समाज के लोगों ने भी मंदिर में पूजा करने के अधिकार को लेकर अपनी आवाज को मुखर किया। सांसी समाज के अध्यक्ष चेनाराम सांसी ने बताया कि महाशिवरात्रि का पर्व होने पर सांसी समाज के पुरुष और महिला भी मंदिर में पूजा अर्चना करने के लिए पहुंचे थे। इस दौरान वहां मौजूद मंदिर के पुजारी ने समाज के महिलाओं पुरुष को प्रवेश पर रोक ताला लगा दिया। उन्होंने बताया कि मंदिर के पुजारी का कहना था कि सांसी समाज के लोग ने अब तक पूजा के लिए मंदिर में प्रवेश नहीं किया है। मंदिर उनके पूर्वजों का बनाया हुआ है मरम्मत कार्य भी उन्हीं की ओर से कराया जाता है, इसलिए यह उनकी निजी संपत्ति है। चेनाराम ने बताया कि इस संबंध में कोतवाली पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस के पहुंचने के बावजूद भी एकबारगी पुजारी ने सांसी समाज के लोगों के मंदिर में प्रवेश पर एतराज किया। इसके बाद में पुलिसकर्मियों के समझाइश के बाद समाज के लोगों को पूजा अर्चना के लिए प्रवेश दिया गया। इस दौरान पुलिस का जाब्ता भी मौके पर तैनात रहा। </p>]]>
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                                            <category>चूरू</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Feb 2023 11:22:21 +0530</pubDate>
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