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                <title>unicef - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>लेबनान में युद्धविराम के बाद मारे गए 23 बच्चे, यूनिसेफ ने कहा- हिंसा और बच्चों के मानसिक तनाव को बढ़ा रहे हमले</title>
                                    <description><![CDATA[लेबनान में बच्चों पर युद्ध का कहर: यूनिसेफ के मुताबिक, 17 अप्रैल के युद्धविराम के बाद भी 23 बच्चों की मौत और 93 घायल हुए हैं। 2 मार्च से अब तक 200 बच्चों की जान जा चुकी है, जबकि 806 घायल हैं। लगातार हमलों से करीब 7.7 लाख बच्चे मानसिक तनाव झेल रहे हैं, बावजूद इसके संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/more-than-100-children-killed-after-ceasefire-in-lebanon-unicef/article-153768"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/unicef-(2).png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने कहा है कि 17 अप्रैल से लागू युद्धविराम के बाद से लेबनान में कम से कम 23 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि 93 बच्चे घायल हुए हैं। यूनिसेफ ने बुधवार को जारी बयान में कहा, स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, सीजफायर शुरू होने के बाद से अब तक कम से कम 23 बच्चे मारे गए और 93 घायल हुए हैं। दो मार्च से अब तक कुल 200 बच्चों की मौत और 806 बच्चे घायल हुए हैं, यानी औसतन हर दिन लगभग 14 बच्चे मारे गए या फिर घायल हुए हैं। बयान में यह भी कहा गया कि पिछले सात दिनों में ही लेबनान में हमलों में मारे गये और घायल बच्चों की संख्या 59 पहुंच गयी हैं। मंगलवार सुबह बेरूत के दक्षिण में एक कार पर हुए हमले में दो बच्चों और उनकी मां की मौत हुई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">संगठन ने कहा कि लगातार हो रहे हमले और हिंसा बच्चों के मानसिक तनाव को और बढ़ा रहे हैं। यूनिसेफ के अनुमान के मुताबिक, लगभग 7.7 लाख बच्चे बार-बार हिंसा, नुकसान और विस्थापन का सामना करने के कारण गंभीर मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। आधिकारिक तौर पर लेबनान और इजरायल के बीच युद्धविराम लागू है लेकिन इसके बावजूद इजरायल के विमान और तोपखाना रोजाना लेबनान के इलाकों पर हमले कर रहे हैं। वहीं, लेबनानी संगठन हिज्बुल्लाह सीमा क्षेत्र में इजरायली सैनिकों पर जवाबी हमले कर रहा है। इजरायल डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) नियमित रूप से हिज्बुल्लाह पर युद्धविराम उल्लंघन का आरोप लगाती रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';"> </span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 12:16:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आयुष्मान खुराना और यूनिसेफ ने भारत की पैरालंपिक टीम के समर्थन में कदम बढ़ाया!</title>
                                    <description><![CDATA[यूनिसेफ इंडिया के नेशनल एम्बेसडर आयुष्मान खुराना ने यूनिसेफ के साथ मिलकर भारतीय पैरालंपिक टीम के अदम्य साहस और अविचलित दृढ़ संकल्प को पहचानते हुए उनका समर्थन करने का आह्वान किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/ayushmann-khurrana-and-unicef-come-out-in-support-of-indias/article-88890"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/ayushman-khurana.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। बॉलीवुड के जानेमाने अभिनेता आयुष्मान खुराना और यूनिसेफ ने भारत की पैरालंपिक टीम के समर्थन में कदम बढ़ाया है। सामाजिक मुद्दों को उठाने और लोगों से जुड़ने की अपनी खासियत के लिए पहचाने जाने वाले आयुष्मान खुराना अब भारत की पैरालंपिक टीम का समर्थन कर रहे हैं, जो आज से पेरिस में आयोजित होने जा रहे 2024 ग्रीष्मकालीन पैरालंपिक्स के लिए रवाना हो रही है।</p>
<p>यूनिसेफ इंडिया के नेशनल एम्बेसडर आयुष्मान खुराना ने यूनिसेफ के साथ मिलकर भारतीय पैरालंपिक टीम के अदम्य साहस और अविचलित दृढ़ संकल्प को पहचानते हुए उनका समर्थन करने का आह्वान किया है। आयुष्मान खुराना ने हर नागरिक से इन अद्वितीय एथलीटों का समर्थन और जश्न मनाने की अपील की, जो अपनी हिम्मत और संकल्प से पूरे देश को प्रेरित कर रहे हैं।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">To our incredible Paralympic athletes - your dedication, resilience, and spirit inspire us all.<br /><br />You’ve shown the world that with determination and hard work, anything is possible. We’re cheering for you every step of the way!<br /><br />Stay connected with the Paralympic Team India and… <a href="https://t.co/8f8jMf7pne">pic.twitter.com/8f8jMf7pne</a></p>
— UNICEF India (@UNICEFIndia) <a href="https://twitter.com/UNICEFIndia/status/1828666821639131476?ref_src=twsrc%5Etfw">August 28, 2024</a></blockquote>
<p>

</p>
<p>आयुष्मान खुराना ने कहा कि हमारे पैरालंपिक चैंपियंस की अदम्य भावना हर किसी के लिए एक जीवंत उदाहरण है कि किसी भी चुनौती को अपने सपनों के रास्ते में नहीं आने देना चाहिए। ये एथलीट विशेष रूप से दिव्यांग बच्चों के लिए प्रेरणा हैं, जो यह याद दिलाते हैं कि कोई भी चुनौती अजेय नहीं है।यूनिसेफ इंडिया के नेशनल एम्बेसडर के रूप में, मैं यह समर्थन करता हूं कि सभी बच्चों को, चाहे उनका लिंग, आर्थिक या सामाजिक पृष्ठभूमि कोई भी हो, एक समावेशी और न्यायसंगत वातावरण प्राप्त हो, ताकि वे अपनी पूरी क्षमता का विकास कर सकें। आइए, हम सब मिलकर हमारे पैरालंपिक चैंपियंस का हौसला बढ़ाएं, जिससे वे बाधाओं को तोड़ते हुए इतिहास रच सकें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 28 Aug 2024 15:32:00 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते कुपोषण के मामले गहरी चिंता का विषय: UNICEF</title>
                                    <description><![CDATA[वेइच ने कहा कि यूनिसेफ इन चुनौतियों से निपटने के लिए फिजी के स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर काम कर रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/increasing-cases-of-malnutrition-in-the-pacific-region-are-a/article-85542"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/unicef.png" alt=""></a><br /><p>सुवा। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) के प्रशांत क्षेत्रीय प्रतिनिधि जोनाथन वेइच ने कहा कि क्षेत्र में पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर सामान्यत: स्थिर है, लेकिन देश में कुपोषण के बढ़ते मामले गहरी चिंता का विषय है। </p>
<p>फिजी ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन ने बताया कि वेइच ने फिजी और प्रशांत क्षेत्र में बच्चों के बीच कुपोषण और स्वास्थ्य के गंभीर मुद्दों को लेकर व्यापक चर्चा की और उन्होंने कहा कि अगर बच्चों को कम उम्र में उचित पोषण नहीं मिलता है, तो वे जल्दी मौत के शिकार हो सकते हैं।</p>
<p>अध्यक्ष ने कहा कि कुपोषण को पूरी तरह से टाला जा सकता है। वेइच ने कहा कि यूनिसेफ इन चुनौतियों से निपटने के लिए फिजी के स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर काम कर रहा है। </p>
<p>यूनिसेफ की कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसेल ने कहा कि माता-पिता को उचित पोषण के बारे में शिक्षित करना और यह सुनिश्चित करना कि बच्चों को आवश्यक पोषक तत्व मिलें, इस समस्या से निपटने के लिए महत्वपूर्ण कदम हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jul 2024 16:32:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>World Leader होने की झूठी मार्केटिंग करते हैं मोदी: डोटासरा</title>
                                    <description><![CDATA[डोटासरा ने यूनीसेफ रिपोर्ट की ख़बरों को साझा करते हुए कहा है कि 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी, विश्व गुरू, रिफार्म, परफॉर्मन जाने क्या-क्या झांसे देकर जनता को ठगते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/modi-dotasara-does-false-marketing-of-being-a-world-leader/article-82185"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/dotasra1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। यूनिसेफ की रिपोर्ट में भारत में बच्चों को पोषक आहार नहीं मिल पाने की रिपार्ट पर पीसीसी चीफ गोविन्द डोटासरा ने पीएम नरेंद्र मोदी पर खुद को वर्ल्ड लीडर का डंका बजाने पर जुबानी हमला बोला है।</p>
<p>डोटासरा ने यूनीसेफ रिपोर्ट की ख़बरों को साझा करते हुए कहा है कि 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी, विश्व गुरू, रिफार्म, परफॉर्मन जाने क्या-क्या झांसे देकर जनता को ठगते हैं। लेकिन सच ये है कि भारत उन 20 देशों में से एक है, जहां बच्चों को जरूरी पोषक आहार तक नहीं मिल रहे। प्रेस फ्रीडम से हंगर इंडेक्स तक हर जगह भारत पिछड़ा हुआ है लेकिन फिर भी मोदी को वर्ल्ड लीडर बताकर डंका बजने की झूठी मार्केटिंग जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Jun 2024 19:20:32 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पेयजल का संकट: पानी बचेगा तभी बचेगा जीवन</title>
                                    <description><![CDATA[यूनीसेफ  की रिपोर्ट यह भी कहती हैं कि 2050 तक भारत में मौजूद जल का 40 फीसदी हिस्सा खत्म हो चुका होगा। एशिया की 80 फीसदी आबादी खासकर पूर्वोत्तर चीन, पाकिस्तान और भारत इस संकट का भीषण सामना कर रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/drinking-water-crisis-life-will-be-saved-only-when-water/article-77886"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/t21rer-(12).png" alt=""></a><br /><p>दुनिया में पेयजल की समस्या दिनों दिन गहराती जा रही है। इसके बावजूद हम पेयजल को बचाने और जल संचय के प्रति क्यों गंभीर नहीं हैं। यह समझ से परे है। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि 2025 में दुनिया की चौदह फीसदी आबादी के लिए जल संकट एक बहुत बड़ी समस्या बन जाएगा। इंटरनेशनल ग्राउंड वाटर रिसोर्स असेसमेंट सेंटर के अनुसार पूरी दुनिया में आज 270 करोड़ लोग ऐसे हैं जो पूरे एक वर्ष में तकरीबन तीस दिन तक पानी के संकट का सामना करते हैं। संयुक्त राष्ट्र की मानें तो अगले तीन दशक में पानी का उपभोग यदि एक फीसदी की दर से भी बढ़ेगा, तो दुनिया को बड़े जल संकट से जूझना पड़ेगा। यह जगजाहिर है कि जल का हमारे जीवन पर प्रत्यक्ष तथा परोक्ष रूप से प्रभाव पड़ता है। यह भी कि जल संकट से एक ओर कृषि उत्पादकता प्रभावित हो रही है, वहीं दूसरी ओर जैव विविधता, खाद्य सुरक्षा और मानव स्वास्थ्य पर भी खतरा बढ़ता जा रहा है। विश्व बैंक का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के चलते पैदा हो रहे जल संकट से 2050 तक वैश्विक जीडीपी को छह फीसदी का नुकसान उठाना पड़ेगा। वैश्विक स्तर पर देखें तो पाते हैं कि दुनिया में दो अरब लोगों को यानी 26 फीसदी आबादी को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध नहीं है। पूरी दुनिया में 43.6 करोड़ और भारत में 13.38 करोड़ बच्चों के पास हर दिन की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त पानी नहीं है। यूनिसेफ की रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के चलते हालात और खराब होने की आशंका है। दुनिया में हर तीन में से एक बच्चा यानी 73.9 करोड़ बच्चे पानी की कमी वाले इलाकों में रह रहे हैं। इसके अलावा पानी की घटती उपलब्धता, अपर्याप्त पेयजल और स्वच्छता की कमी का बोझ चुनौतियों को और बढ़ा रहा है। दुनिया में वह शीर्ष 10 देश जहां के बच्चे पर्याप्त पानी से महरूम हैं, उसमें भारत शीर्ष पर है जिसके 13.38 फीसदी बच्चे पर्याप्त पानी से महरूम हैं। यूनीसेफ  की रिपोर्ट यह भी कहती हैं कि 2050 तक भारत में मौजूद जल का 40 फीसदी हिस्सा खत्म हो चुका होगा। एशिया की 80 फीसदी आबादी खासकर पूर्वोत्तर चीन, पाकिस्तान और भारत इस संकट का भीषण सामना कर रहे हैं। आशंका है कि भारत इसमें सर्वाधिक प्रभावित देश होगा। संयुक्त राष्ट्र ने भी इसकी पुष्टि की है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार शुद्ध पेयजल से जूझने वाली वैश्विक शहरी आबादी 2016 के 93.3 करोड़ से बढ़कर 2050 में 1.7 से 2.4 अरब होने की आशंका है। अगर शीघ्र इसका समाधान नहीं किया गया तो निश्चित तौर पर वैश्विक संकट और भयावह होगा।<br />पेयजल संकट की गंभीरता की ओर ग्लोबल कमीशन आन इकोनामिक्स आफ वाटर की रिपोर्ट संकेत करती हुई कहती है कि 2070 तक 70 करोड़ लोग जल आपदाओं के कारण विस्थापित होने को विवश होंगे। गौरतलब है दुनिया में दो अरब लोग दूषित पानी का सेवन करने को विवश हैं और हर साल जलजनित बीमारियों से लगभग 14 लाख लोग बेमौत मर जाते हैं। दुनिया में बहुतेरे विकसित देशों में लोग नल से सीधे ही साफ पानी पीने में सक्षम हैं। लेकिन हमारे देश में आजादी के 77 साल बाद भी ऐसा मुमकिन नहीं है कि लोग सीधे नल से साफ पानी पी सकें। असलियत में देश के मात्र तीन फीसदी परिवार ऐसे हैं जिनको नल से साफ जल मिल रहा है। यदि सभी को शुद्ध पेयजल मुहैय्या कराना सरकार की मंशा है तो उसे प्राकृतिक जल स्रोतों पर ध्यान देना होगा। इस तथ्य को सरकार भी नजरंदाज नहीं कर सकती कि देश के सभी जलस्रोत संकट में हैं। तालाब, पोखर, जलाशय बेरुखी के चलते बर्बादी के कगार पर हैं। देशभर में मौजूद तकरीब कुल 24,24,540 जल स्रोत हैं। इनमें से 23,55,055 यानी 97 फीसदी जल स्रोत ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। केवल 2.9 फीसदी जल स्रोत शहरी क्षेत्र में हैं। 45.2 फीसदी जल स्रोतों की कभी मरम्मत भी नहीं हुयी। देश में जलस्रोतों की हालत बहुत ही दयनीय है। कहीं वह सूखे हैं, कहीं निर्माण कार्य होने से इस्तेमाल में नहीं हैं, कहीं वह मलबे से भरे पड़े हैं। इनकी बदहाली में सबसे बड़ा कारण उनका सूखना, उनमें सिल्ट जमा होना, मरम्मत के अभाव में टूटते चला जाना अहम है। इसमें दो राय नहीं कि प्राकृतिक जल स्रोतों तथा नदी, तालाब, झील, पोखर, कुओं के प्रति सरकारी और सामाजिक उदासीनता एवं भूजल जैसे प्राकृतिक संसाधनों के अत्याधिक दोहन ने स्वच्छ जल का गंभीर संकट हमारे सामने खड़ा कर दिया है। सच यह है कि यदि सबको पीने  का शुद्ध जल मुहैय्या कराना है तो प्राकृतिक जलस्रोतों पर ध्यान देना होगा। वर्ल्ड वाटर रिसोर्स इंस्टीट्यूट की मानें तो देश को हर साल करीब तीन हजार बिलियन क्यूबिक मीटर पानी की जरूरत होती है। जबकि बारिश से भारत को अकेले 4000 क्यूबिक मीटर पानी मिलता है। भारत सिर्फ आठ फीसदी बारिश के जल का ही संचयन कर पाता है। यदि बारिश के पानी का पूर्णतया संचयन कर दिया जाये तो काफी हद तक जल संकट का समाधान हो सकता है। वर्षा जल संचयन-संरक्षण, प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण, उनका समुचित उपयोग और जल की बर्बादी पर अंकुश ही वह रास्ता है जो इस संकट से छुटकारा दिला सकता है।<br /><strong>ज्ञानेन्द्र रावत</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार है)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 May 2024 11:08:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>235 शहरों में से 175 शहरों में पीने योग्य पानी की आपूर्तिः पीएचईडी ने 20 साल बाद जारी किया सर्वे</title>
                                    <description><![CDATA[डॉ. अग्रवाल ने 'स्टेटस रिपोर्ट ऑन ड्रिंकिंग वाटर क्वालिटी इन अरबन टाउन्स ऑफ राजस्थान 2022-23' भी रिलीज की। उन्होंने कहा कि सतही जल आधारित 23 हजार करोड़ रूपए की पांच बड़ी पेयजल परियोजनाओं को मंगलवार को मंजूरी मिली है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/status-report-on-drinking-water-quality-in-urban-towns-2022-23/article-47322"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/whatsapp-image-2023-05-31-at-15.49.12.jpeg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। अतिरिक्त मुख्य सचिव, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग डॉ. सुबोध अग्रवाल ने कहा कि 2025-26 में प्रदेश के 1 करोड़ 7 लाख घरों में नल के माध्यम से पेयजल उपलब्ध होने लगेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अभी 75 प्रतिशत योजनाओं में सतही स्त्रोतों की उपलब्धता है। जल जीवन मिशन के तहत समस्त परियोजनाएं पूरी होने पर राजस्थान में 90 फीसदी पेयजल सतही स्त्रोतों से उपलब्ध होने लगेगा। </p>
<p>डॉ. अग्रवाल बुधवार को जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के रसायनज्ञों की राज्य स्तरीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। डॉ. अग्रवाल ने 'स्टेटस रिपोर्ट ऑन ड्रिंकिंग वाटर क्वालिटी इन अरबन टाउन्स ऑफ राजस्थान 2022-23' भी रिलीज की। उन्होंने कहा कि सतही जल आधारित 23 हजार करोड़ रूपए की पांच बड़ी पेयजल परियोजनाओं को मंगलवार को मंजूरी मिली है। उन्होंने पानी की गुणवत्ता जांच के लिए टेस्टिंग बढ़ाने के निर्देश दिए।</p>
<p>यूनिसेफ की स्टेट हैड इजाबेल बार्डम ने कहा कि सभी के पीने योग्य जल की उपलब्धता आज की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने वाटर हार्वेस्टिंग के लिए आधुनिक के साथ ही परंपरागत प्रणालियों के उपयोग की आवश्यकता जताई। उन्होंने उम्मीद जताई कि कार्यशाला के माध्यम से पानी की गुणवत्ता के संबंध में जरूरी कदम उठाने का रोडमैप तैयार हो सकेगा। उन्होंने कहा कि इस तरह की विश्लेषण रिपोर्ट प्रमुख कमियों की पहचान करने और राजस्थान में विशेष रूप से सबसे अधिक हाशिये पर रहने वालों के लिए सुरक्षित पेयजल की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए उचित उपाय करने में उपयोगी होगी। </p>
<p>रिपोर्ट की प्रशंसा करते हुए और राज्य भर में कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्टिविटी के कवरेज को बढ़ाने पर जोर देते हुए, बार्डेम ने कहा कि जल जीवन मिशन और अमृत 2.0 दोनों महत्वाकांक्षी सरकार के प्रमुख कार्यक्रम हैं जो क्रमशः ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 2024 तक सार्वभौमिक घरेलू जल कवरेज पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। मैं राजस्थान में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में घरेलू स्तर पर कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्टिविटी के कवरेज को बढ़ाने के लिए विभाग के ठोस प्रयासों को सराहना करती हूं। हालांकि, एक वर्ष के भीतर सभी शेष घरों को पानी के कनेक्शन के साथ कवर करने के लिए कवरेज की दर में तेजी लाने की आवश्यकता है।</p>
<p>अतिरिक्त मुख्य सचिव ने पानी की गुणवत्ता को लेकर रियल टाइम डेटा संग्रहण की सुझाव दिया ताकि स्टेटस रिपोर्ट के प्रकाशन की बजाय सीधे ही डेटा का इस्तेमाल किया जा सके।  </p>
<p>कार्यक्रम में मुख्य अभियंता (शहरी) के. डी. गुप्ता ने कहा कि भूजल स्तर लगातार तेजी से गिर रहा है। ऐसे में पीने योग्य जल उपलब्ध कराने के लिए विभाग द्वारा सतही स्त्रोतों पर आधारित पेयजल योजनाएं तैयार की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि स्टेटस रिपोर्ट का लाभ अभियंताओं, रसायनज्ञों एवं अरबन प्लानिंग से जुड़े अधिकारियों को मिलेगा। </p>
<p>कार्यक्रम की शुरूआत में स्टेटस रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर प्रकाश डालते हुए मुख्य रसायनज्ञ एच एस देवन्दा ने बताया कि प्रदेश के 235 शहरी क्षेत्रों का सर्वे इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए किया गया है। 89 कस्बों में पेयजल आपूर्ति सतही जल स्त्रोतों से, 79 में सतही एवं भूजल दोनों से तथा 76 कस्बों में सिर्फ भूजल आधारित है। उन्होंने बताया कि राज्य की समस्त 33 प्रयोगशालाएं एन.ए.बी.एल. मान्यता प्राप्त हैं। इन प्रयोगशालाओं के एन.ए.बी.एल. सर्टिफिकेशन की निरंतरता के लिए यूनिसेफ एवं नीरी के सहयोग से समय-समय पर रसायनज्ञों एवं अन्य कार्मिकों के लिए प्रशिक्षण आयोजित किए गए हैं।   </p>
<p>कार्यक्रम में पूर्व मुख्य रसायनज्ञ एस एस ढिंढसा ने पानी की गुणवत्ता से संबंधित आंकड़ों के संग्रहण को रिपोर्ट के रूप में प्रकाशित करने के कदम की सराहना की। यूनिसेफ के वाश अधिकारी नानक संतदासानी भी उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 May 2023 15:55:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जल संरक्षण का पाठ राजस्थान की पाठ्यपुस्तकों में शामिल किया जाए : महेश जोशी</title>
                                    <description><![CDATA[एक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य ने 107.93 लाख ग्रामीण परिवारों के बड़े आधार के मुकाबले 38% कवरेज हासिल कर लिया है और स्रोत स्थिरता के मुद्दे का जल्द ही जल सुरक्षा पर अधिकतम प्रभाव पड़ने की संभावना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-lesson-of-water-conservation-should-be-included-in-the/article-45815"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/pp1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जन स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) और भूजल विभाग, ने परामर्श कार्यक्रम आयोजित किया जिसमें महेश जोशी मुख्य अतिथि रहे। मंत्री महेश जोशी ने स्कूल की पाठ्यपुस्तक में जल संरक्षण पाठ शुरू करने की आवश्यकता पर जोर दिया।</p>
<p>पीएचईडी और यूनिसेफ राजस्थान द्वारा आयोजित राजस्थान में सोर्स सस्टेनेबिलिटी के लिए अभिसरण योजना और कार्यान्वयन पर राज्य स्तरीय परामर्श कार्यक्रम में बोलते हुए, महेश जोशी ने कहा कि पानी के उपयोग के अधिकार पर पाठ्यक्रम और अध्यायों को पेश करने की सख्त आवश्यकता है। विवेकपूर्ण उपयोग।  पानी एक ऐसी चीज है जो हमें छात्रों को स्कूल स्तर से ही सिखानी चाहिए, खासकर राजस्थान में जो पानी की कमी के लिए जाना जाता है। इस अवसर पर बोलते हुए, महेश जोशी ने वर्षा जल संचयन को राज्य भर के प्रमुख मुद्दो में से एक बताया और कहा कि इस मुद्दे को हल करने के लिए उपलब्ध संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की आवश्यकता है। यह सबसे उपयुक्त समय है। </p>
<p>जल शक्ति मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य ने 107.93 लाख ग्रामीण परिवारों के बड़े आधार के मुकाबले 38% कवरेज हासिल कर लिया है और स्रोत स्थिरता के मुद्दे का जल्द ही जल सुरक्षा पर अधिकतम प्रभाव पड़ने की संभावना है।</p>
<p>जल स्रोतों और सदियों पुरानी जल संचयन तकनीकों की स्थिरता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए यूनिसेफ राजस्थान की प्रमुख इसाबेल बार्डेम ने कहा कि विभिन्न सरकारी लाइन विभागों (पीएचईडी), वाटरशेड और मृदा संरक्षण के बीच एक अभिसरण दृष्टिकोण रखने की तत्काल आवश्यकता है,  भूजल विभाग) और नागरिक समाज संगठनों और अन्य हितधारकों के साथ सहयोगात्मक प्रयास आवश्यक है। वर्षों पुरानी पारंपरिक जल संचयन तकनीक जैसे वर्षा जल संचयन संरचनाएं, चेक डैम आदि आज भी बेहतर  प्रासंगिक हैं।</p>
<p>जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय स्थिरता के अंतर्संबंधों के बारे में बोलते हुए, इसाबेल ने कहा कि राजस्थान जलवायु परिवर्तन के लिए अत्यधिक संवेदनशील है, और हमें इन बदलते परिदृश्यों पर तुरंत प्रतिक्रिया देनी चाहिए। सूखा, अचानक बाढ़, और रेत के तूफान सीधे जल स्रोतों को प्रभावित करते हैं और साथ ही साथ उनकी मात्रा, गुणवत्ता को भी नियोजन में शामिल किया जाना चाहिए और जल जीवन मिशन जैसे प्रमुख कार्यक्रमों के तहत किए गए लाभ को सुनिश्चित किया जाना चाहिए। </p>
<p>राजस्थान में पिछले तीन दशकों में तेजी से भूजल की कमी, वर्षा के बदलते पैटर्न और बिगड़ती पानी की गुणवत्ता देखी गई है।  2022 में प्रकाशित केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में राजस्थान में भूजल निष्कर्षण 150% से अधिक है।  इसका मतलब है कि हम रिचार्ज की वार्षिक दर से कहीं अधिक भूजल निकाल रहे हैं। </p>
<p>वाटरशेड और मृदा संरक्षण विभाग की सचिव रश्मी गुप्ता ने जल स्रोतों की स्थिरता सुनिश्चित करने और संभावित स्लिप बैक से बचने के लिए विभिन्न संबंधित विभागों के बीच अभिसरण और तालमेल की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। </p>
<p>दिन भर चले विचार-विमर्श में पीएचईडी के वरिष्ठ फील्ड अधिकारी, भूगर्भ जल संसाधन विभाग और वाटरशेड और मृदा संरक्षण विभाग, पंचायती राज विभाग के राज्य स्तरीय अधिकारियों ने भाग लिया।  सत्र में नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।</p>
<p>तकनीकी विशेषज्ञ मनीष वासुजा, वॉश विशेषज्ञ, यूनिसेफ नई दिल्ली,  अजीत फडनीस, डायरेक्टर प्रिमूव, पुणे और ऋषभ हेमानी वॉश विशेषज्ञ, राजस्थान ने अन्य राज्यों के अनुभवों और स्रोत स्थिरता के लिए अपनाई जा रही विभिन्न रणनीतियों और प्रथाओं पर अपने विचार साझा किए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 May 2023 14:49:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>तुर्की, सीरिया में भूकंप से साढे आठ लाख बच्चे बेघर : यूनिसेफ</title>
                                    <description><![CDATA[विज्ञप्ति में कहा गया है, ''दक्षिणी तुर्की और सीरिया में आए दो विनाशकारी भूकंपों के एक महीने बाद, 8 लाख 50 हजार से अधिक बच्चे अपने क्षतिग्रस्त या नष्ट घरों से मजबूर होकर विस्थापित हो गए हैं।'']]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/85-million-children-left-homeless-by-earthquake-in-turkey-syria/article-39163"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/site-photo-size-(13)1.jpg" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। तुर्की और सीरिया में हाल ही में आए घातक भूकंपों के कारण 8 लाख 50 हजार से अधिक बच्चे विस्थापित हो रहे हैं। यूनिसेफ ने एक विज्ञप्ति में यह जानकारी दी। विज्ञप्ति में कहा गया है, ''दक्षिणी तुर्की और सीरिया में आए दो विनाशकारी भूकंपों के एक महीने बाद, 8 लाख 50 हजार से अधिक बच्चे अपने क्षतिग्रस्त या नष्ट घरों से मजबूर होकर विस्थापित हो गए हैं।''</p>
<p>''भूकंप और उनके बाद के दौरान मारे गए और घायल हुए बच्चों की संख्या की अभी तक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कई हजारों में होने की संभावना है।'' यूनिसेफ ने जोर देकर कहा कि क्षेत्र में बच्चों और परिवारों पर भूकंप का प्रभाव विनाशकारी रहा है। यूनिसेफ ने बताया कि सैकड़ों-हजारों लोगों को निराशाजनक स्थिति में छोड़ दिया गया है, जबकि कई परिवार अपना घर खो चुके हैं और अब अस्थायी आश्रयों में रह रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Mar 2023 11:20:45 +0530</pubDate>
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                <title>आयुष्मान खुराना यूनिसेफ इंडिया के नेशनल एम्बेसडर बने</title>
                                    <description><![CDATA[ इस अवसर पर आयुष्मान खुराना ने कहा कि यूनिसेफ इंडिया के साथ एक राष्ट्रीय दूत के तौर पर बाल अधिकारों की वकालत को आगे बढ़ाना वास्तव में मेरे लिए सम्मान का विषय है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/ayushmann-khurrana-becomes-the-national-ambassador-of-unicef-india/article-37743"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/p-131.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। यूनिसेफ इंडिया ने अभिनेता आयुष्मान खुराना को राष्ट्रीय दूत के तौर पर नियुक्त करने की घोषणा की है। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता इस अभिनेता ने हर बच्चे के जीवित रहने, फलने-फूलने, सुरक्षित रहने के अधिकारों को सुनिश्चित करने के साथ-साथ उनके फैसलों में उनकी आवाज को बढ़ावा देने के लिए यूनिसेफ के साथ हाथ मिलाया है। इस अवसर पर आयुष्मान खुराना ने कहा कि यूनिसेफ इंडिया के साथ एक राष्ट्रीय दूत के तौर पर बाल अधिकारों की वकालत को आगे बढ़ाना वास्तव में मेरे लिए सम्मान का विषय है। भारत में बच्चे व किशोर जिन मुददों का सामना कर रहे हैं, उनके प्रति मैं जुनूनी हूं। यूनिसेफ के सेलिब्रिटी एडवोकेट होने के नाते, मैंने बच्चों के साथ संवाद किया है और इंटरनेट सुरक्षा, अभद्र भाषा, तस्वीरों व धमकियों से इंटरनेट पर तंग करना, मानसिक स्वास्थ्य, और लैंगिक समानता पर बात की। यूनिसेफ के साथ इस नई भूमिका में, मैं बाल अधिकारों के लिए दृढ़ आवाज बनाए रखूगां, विशेषतौर पर सबसे अधिक संवेदनशील बच्चों के लिए, वो मुददे जो उन्हें सबसे अधिक प्रभावित करते हैं, उनके समाधान के समर्थन के लिए।’’ यूनिसेफ इंडिया की प्रतिनिधि सिंथिया मेककेफरी ने कहा कि मैं आयुष्मान खुराना का यूनिसेफ इंडिया के राष्ट्रीय दूत के तौर पर स्वागत कर प्रसन्न हूं। बीते दो सालों में यूनिसेफ के सेलिब्रिटी एडवोकेट के नाते आयुष्मान की दृढ़ प्रतिबद्वता ने बाल अधिकारों के संरक्षण के कार्य को बढ़ाने व गति देने में मदद की है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Feb 2023 10:36:26 +0530</pubDate>
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