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                <title>मातृभाषा का महत्व और अस्तित्व की रक्षा</title>
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                        <![CDATA[21 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में मनाया जाता है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/importance-and-survival-of-mother-tongue/article-144033"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)24.png" alt=""></a><br /><p>21 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में मनाया जाता है। वास्तव में यह दिवस दुनिया भर में भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा देने के साथ ही साथ विभिन्न मातृभाषाओं के संरक्षण के महत्व को समझाने के लिए समर्पित है। दूसरे शब्दों में कहें तो यह दिवस मातृभाषाओं के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देने, भाषाई विविधता और बहुभाषावाद को प्रोत्साहित करने,शिक्षा में मातृभाषा के महत्व को उजागर करने तथा लुप्त होती भाषाओं के प्रति जागरूकता फैलाने के क्रम में मनाया जाता है। मातृभाषा केवल संचार का ही माध्यम नहीं होती है, बल्कि यह व्यक्ति की पहचान, उसकी सनातन संस्कृति, परंपराओं और सोच का मुख्य आधार होती है। नेल्सन मंडेला का यह मानना था कि यदि आप किसी व्यक्ति से उस भाषा में बात करते हैं जिसे वह समझता है, तो वह उसके दिमाग में जाती है। यदि आप उससे उसकी मातृभाषा में बात करते हैं, तो वह उसके दिल तक पहुंचती है। यदि हम मातृभाषा के महत्व की बात करें तो मातृभाषा का महत्व अत्यंत व्यापक और गहरा होता है, क्योंकि यही भाषा व्यक्ति के जीवन की पहली सीख, भावनाओं की अभिव्यक्ति और सोचने समझने का आधार बनती है।</p>
<p><strong>मातृभाषा का संरक्षण : </strong></p>
<p>मातृभाषा के माध्यम से बच्चे दुनिया को आसानी से समझते हैं, इसलिए शुरुआती शिक्षा यदि अपनी भाषा में मिले तो ज्ञान अधिक प्रभावी ढंग से ग्रहण होता है और आत्मविश्वास भी बढ़ता है। यह भाषा व्यक्ति को उसकी संस्कृति, परंपराओं और पहचान से जोड़ती है तथा सामाजिक संबंधों को मजबूत बनाती है। मातृभाषा का संरक्षण केवल एक भाषा को बचाना नहीं, बल्कि पूरी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखना है और यही भी कारण है कि यूनेस्को सहित विश्व भर की संस्थाएं मातृभाषाओं के संरक्षण और उपयोग पर विशेष जोर देती हैं। आज बच्चे अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करते हैं तो उनकी समझ, रचनात्मकता और आत्मविश्वास अधिक मजबूत होता है। बहरहाल, यदि हम यहां पर इस दिवस के इतिहास की बात करें तो इस दिवस की शुरुआत यूनेस्को ने वर्ष 1999 में की थी और वर्ष 2000 से इसे वैश्विक स्तर पर मनाया जाने लगा। हर वर्ष इस दिवस की एक थीम रखी जाती है और अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस और इस साल की थीम क्रमशः सतत विकास के लिए भाषाओं को महत्वपूर्ण बनाएं, तथा बहुभाषी शिक्षा पर युवाओं की आवाज़,वर्ष 2026 की थीम रखी गई है। इस साल यानी कि वर्ष 2026 की थीम का मतलब यह है कि शिक्षा प्रणाली में कई भाषाओं, विशेष रूप से मातृभाषा, के महत्व को लेकर युवाओं के विचारों, उनके अनुभवों तथा विभिन्न सुझावों को महत्व दिया जाए।</p>
<p><strong>संयुक्त राष्ट्र के अनुसार :</strong></p>
<p>इस थीम का उद्देश्य यह बताना है कि जब बच्चों को शुरुआती शिक्षा,विशेषकर प्राथमिक शिक्षा उनकी अपनी भाषा में मिलती है तो उनकी समझ बेहतर होती है, उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और सीखने में रुचि भी अधिक रहती है। साथ ही, युवाओं को अपनी भाषाई पहचान और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के लिए प्रेरित करना भी इसका लक्ष्य है। वास्तव में आज के समय में शिक्षा नीतियों और व्यवस्थाओं में युवाओं की भागीदारी बहुत ही जरूरी है, क्योंकि वही भविष्य के समाज का निर्माण करते हैं। इसी सोच को बढ़ावा देने के लिए यूनेस्को हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के माध्यम से जागरूकता फैलाता है। मातृभाषा के संरक्षण और संवर्धन को लेकर आज वैश्विक और स्थानीय स्तर पर गहरी चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं। भाषा केवल संवाद का साधन नहीं, बल्कि किसी भी समाज की संस्कृति, स्मृति और पहचान की संवाहक होती है। जब एक मातृभाषा दम तोड़ती है, तो उसके साथ सदियों का पारंपरिक ज्ञान और अद्वितीय विश्वदृष्टि भी लुप्त हो जाती है।इस क्रम में संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, हर दो सप्ताह में एक भाषा विलुप्त हो जाती है और विश्व एक पूरी सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत खो देता है।</p>
<p><strong>विशेषज्ञों का अनुमान है :</strong></p>
<p>यूनेस्को के ही अनुसार, विश्व की लगभग 6,000 से अधिक भाषाओं में से करीब 43 प्रतिशत लुप्तप्राय की श्रेणी में हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि संरक्षण के ठोस प्रयास नहीं किए गए, तो इस सदी के अंत तक दुनिया की आधी भाषाएं गायब हो सकती हैं। यदि हम यहां पर भारत की स्थिति की बात करें तो एक सर्वे के अनुसार, पिछले 50 वर्षों में भारत ने अपनी लगभग 250 भाषाएं खो दी हैं। भारत में वर्तमान में लगभग 196 भाषाएं ऐसी हैं, जिन्हें यूनेस्को ने असुरक्षित माना है। यह चिंताजनक बात है कि आज के समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़त बनाने की होड़ में अंग्रेजी जैसी भाषाओं का प्रभुत्व बढ़ रहा है। भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाओं को मान्यता दी गई है, जिससे उन्हें प्रशासनिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक संरक्षण मिलता है। यह भाषाई विविधता की रक्षा का एक मजबूत आधार है। आज भाषाओं को सांस्कृतिक और साहित्यिक प्रोत्साहन दिया जा रहा है।लोकभाषाओं और बोलियों के उत्सव भी आयोजित किए जाते हैं, साहित्य सर्जन पुरस्कारों की भी व्यवस्था हमारे यहां है। अंत में यही कहूंगा कि मातृभाषा का संरक्षण केवल सरकार या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह एक व्यक्तिगत और सामाजिक कर्तव्य भी है।</p>
<p><strong>-सुनील कुमार महला</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Feb 2026 12:35:22 +0530</pubDate>
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                <title>कई प्राचीन भाषाएं लुप्त होने की कगार पर</title>
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                        <![CDATA[जो पारंपरिक ज्ञान और संस्कृतियों को प्रसारित और संरक्षित करते हैं। सांस्कृतिक विविधता और बहुभाषावाद को बढ़ावा देने के लिए प्रति वर्ष अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया जाता है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/many-ancient-languages-%E2%80%8B%E2%80%8Bon-the-verge-of-extinction/article-37828"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/q-66.png" alt=""></a><br /><p>भारत के साथ दुनिया के कई देशों में अब कई प्राचीन भाषाएं लुप्त होने की कगार पर हैं और हर दो सप्ताह में एक भाषा अपने साथ एक पूरी सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को ले जाने के लिए गायब हो रही है। बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक समाज अपनी भाषाओं के माध्यम से मौजूद हैं। जो पारंपरिक ज्ञान और संस्कृतियों को प्रसारित और संरक्षित करते हैं। सांस्कृतिक विविधता और बहुभाषावाद को बढ़ावा देने के लिए प्रति वर्ष अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया जाता है।</p>
<p>भाषाएं अपने जटिल निहितार्थ के साथ दुनिया भर में पहचान, संचार, सामाजिक एकीकरण, शिक्षा और विकास के लिए पृथ्वी और लोगों के लिए रणनीतिक महत्व रखती हैं। लगातार हो रहे वैश्विकरण के कारण भाषाएं और बोलियां खतरे में हैं,और पूरी तरह से गायब हो रही हैं। जब भाषाएं लुप्त होती हैं, तो उनके साथ दुनिया की सांस्कृतिक विविधता भी खत्म होने लगती हैं। और साथ ही परंपराएं, स्मृति, सोच और अभिव्यक्ति के अद्वितीय तरीके एक बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने के लिए मूल्यवान संसाधन भी खो जाते हैं। दुनिया में बोली जाने वाली अनुमानित 6-7 हजार भाषाओं में से कम से कम 43 प्रतिशत लुप्त प्राय: हैं। केवल कुछ सौ भाषाओं को वास्तव में शिक्षा प्रणालियों और सार्वजनिक डोमेन में जगह दी गई है और डिजिटल दुनिया में सौ से भी कम का उपयोग किया जाता है।</p>
<p>अकेले भारत में लगभग 22 आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त भाषाएं, 1635 मातृभाषाएं और 234 पहचान योग्य मातृभाषाएं हैं। अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस इस बात की याद दिलाता है कि भाषा हमें कैसे जोड़ती है, हमें सशक्त बनाती है और दूसरों को हमारी भावनाओं को संप्रेषित करने में हमारी मदद करती है। इसी ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस हर साल भाषाई और सांस्कृतिक विविधता और बहुभाषावाद को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है।</p>
<p>वर्ष 2023 अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस का विषय, बहुभाषी शिक्षा,  शिक्षा को बदलने की आवश्यकता ट्रांसफॉर्मिंग एजुकेशन समिट के दौरान की गई सिफारिशों के साथ संरेखित है, जहां स्वदेशी लोगों की शिक्षा और भाषाओं पर भी जोर दिया गया था। पिछले साल अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 2022 अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस का विषय, बहुभाषी सीखने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करना, चुनौतियां और अवसर था। अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस दुनियाभर में वर्ष 2000 से मनाया जा रहा है। इसकी घोषणा नवंबर 1999 में संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) के सामान्य सम्मेलन द्वारा की गई थी। यह बांग्लादेश द्वारा अपनी भाषा बांग्ला की रक्षा के लिए एक लंबे संघर्ष को भी याद करता है। 21 फरवरी, बांग्लादेशी लोगों द्वारा अपनी मातृभाषा के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक जड़ों की रक्षा के लिए किए गए आंदोलन की वर्षगांठ है। इतिहास में दुर्लभ घटनाओं में से एक इस आंदोलन में लोगों ने अपनी मातृभाषा के खातिर अपने जीवन का बलिदान दिया था। असल में जब 1947 में पाकिस्तान बनाए तो इसके दो क्षेत्र पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान में बांग्लादेश) और पश्चिमी पाकिस्तान संस्कृति, भाषा में पूरी तरह से अलग थे और यहां तक कि भूमि से भी जुड़े नहीं थे। वर्ष 1948 में पाकिस्तान सरकार ने उर्दू को एकमात्र राष्ट्रभाषा घोषित कर दिया। पूर्वी पाकिस्तान के बांग्ला मातृभाषीय लोगों ने इस फैसले का विरोध किया और बांग्ला को भी एक राष्ट्रीय भाषा का दर्जा देने की मांग की। इस आंदोलन को समाप्त करने के लिए पाकिस्तान सरकार ने सभी बैठक और रैली रद्द करवा दी। आदेशों की अवहेलना करते हुए ढाका विश्वविद्यालय के छात्रों ने बड़े पैमाने पर रैलियों की व्यवस्था जारी रखी। 21 फरवरी 1952 को प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने गोलीबारी करवा दी जिसमें 04 छात्रों ने अपनी जान गंवाई और कई घायल हुए। इसके बाद भी विरोध जारी रहा और 1956 में पाकिस्तान सरकार को बांग्ला को आधिकारिक भाषा का दर्जा देना पड़ा। जनवरी 1998 में एक बांग्लादेशी कैनेडियन नागरिक रफीकुल इस्लाम ने सयुंक्त राष्ट्र के जनरल को खत लिखकर दुनिया की लुप्त होती भाषाओं को बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाए जाने के लिए आग्रह किया और इसके लिए उन्होनें 21 फरवरी के दिन प्रस्ताव रखा। इसके बाद नवंबर 1999 में यूनेस्को ने 21 फरवरी को मातृभाषा दिवस मनाए जाने की घोषणा कर दी। 16 मई 2007 को संयुक्त राष्टÑ महासभा ने अपने प्रस्ताव ए/आरईएस/61/266 में सदस्य देशों से दुनिया के लोगों द्वारा उपयोग की जाने वाली सभी भाषाओं के संरक्षण और संरक्षण को बढ़ावा देने का आह्वान किया। </p>
<p>आज के समय में यह जागरूकता बड़ी है कि भाषाएं विकास में, सांस्कृतिक विविधता और सांस्कृतिक संवाद सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसी के साथ भाषाएं, आपसी सहयोग बढ़ाने और सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने में, समावेशी ज्ञान समाजों के निर्माण और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में और सतत विकास के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लाभों को लागू करने के लिए राजनीतिक इच्छा शक्ति को जुटाने में भी अपना योगदान देती हैं। -प्रकाश चंद्र शर्मा<br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>
<p> </p>
<p><br />अंतर्राष्टÑीय मातृभाषा दिवस विभिन्न तरीकों से मनाया जाता है। हालाँकिए उत्सव का मुख्य विचार मातृ भाषाओं के बारे में जागरूकता फैलाना और समावेशिता को प्रोत्साहित करना है। चूंकि बांग्लादेश का अंतर्राष्टÑीय मातृभाषा दिवस के साथ एक ऐतिहासिक संबंध हैए इसलिए यह दुखद गोलीबारी की याद में और उन शहीदों को सम्मानित करने के लिए मनाया जाता है जिन्होंने अपनी मातृभाषा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।<br />वैश्विक स्तर परए अंतर्राष्टÑीय मातृभाषा दिवस बहुभाषी शिक्षा के बारे में जागरूकता पैदा करने और प्रोत्साहित करने के लिए मौजूद है। कोई भी किसी भी संभावित क्षमता में भाग ले सकता हैए जैसे अंतर्राष्टÑीय मातृभाषा दिवस के बारे में विभिन्न विषयों पर शोध करनाए सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी साझा करना और बहुभाषावाद पर व्याख्यानए कार्यक्रम या कार्यशालाओं में भाग लेना। साहित्यिक कार्यक्रमों में भाग लेनाए विभिन्न भाषाओं में या अपनी मातृभाषा में लिखी गई फिल्मों और पुस्तकों को बढ़ावा देनाए मातृभाषा के उपयोग को प्रोत्साहित करना या एक नई भाषा सीखना इस दिन को मनाने के कुछ और तरीके हैं।<br />अंतर्राष्टÑीय मातृभाषा दिवस इस संदेश को प्रतिध्वनित करता है कि हमें कुछ भाषाओं के बारे में हमारे किसी भी पूर्वाग्रह को बदलना चाहिएए और हमारे ग्रह पर मौजूद कई अलग.अलग संस्कृतियों और परंपराओं को विकसित करने के लिए समावेशिता का वातावरण बनाना चाहिए। ऐसा करने सेए और अपनी मातृभाषा में व्यक्त करने की स्वतंत्रता का विस्तार करकेए रोजगार और विकास के अवसर पैदा होते हैंए और इस प्रकार सभी को अपनी संस्कृति और अपने देश के विकास में योगदान करने का अवसर मिलता है।</p>]]>
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                <pubDate>Tue, 21 Feb 2023 10:15:06 +0530</pubDate>
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