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                <title>semiconductor - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>semiconductor RSS Feed</description>
                
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                <title>राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना में संशोधन, नवीकरणीय ऊर्जा विनिर्माण को मिलेगा बढ़ावा </title>
                                    <description><![CDATA[राज्य सरकार ने RIPS-2024 के तहत नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को बड़ी राहत दी है। अब सोलर मॉड्यूल, सेमीकंडक्टर और बैटरी निर्माण इकाइयों को विशेष प्रोत्साहन मिलेगा। केवल मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों को पात्र माना जाएगा, असेंबलिंग को नहीं। इस निर्णय से राजस्थान में हरित ऊर्जा निवेश और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/amendment-in-rajasthan-investment-promotion-scheme-will-give-boost-to/article-151603"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/राजस्थान-सचिवालय.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना-2024 के तहत नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। वित्त विभाग (कर प्रभाग) द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह संशोधन तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। राज्य सरकार ने जनहित को ध्यान में रखते हुए योजना की उपधारा 7.3.1 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए यह निर्णय लिया है। संशोधन के तहत योजना की उपधारा 9.1 में “रिन्यूएबल्स मैन्युफैक्चरिंग” की परिभाषा को नया रूप दिया गया है। अब इसके अंतर्गत सोलर मॉड्यूल, सोलर पीवी सेल, इंटीग्रेटेड सोलर सेल एवं मॉड्यूल, सेमीकंडक्टर, सौर ऊर्जा भंडारण में प्रयुक्त बैटरियां तथा सोलर इलेक्ट्रिक चार्जिंग उपकरणों के निर्माण से जुड़ी इकाइयों को शामिल किया गया है।</p>
<p>स्पष्ट किया गया है कि केवल निर्माण इकाइयां ही पात्र होंगी, असेंबलिंग इकाइयां नहीं। इसके साथ ही योजना में “सोलर मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग” को नई औद्योगिक गतिविधि के रूप में जोड़ा गया है। इसमें फोटोवोल्टिक सेल की परतें तैयार करने, उन्हें जोड़ने, टफेंड ग्लास, लेमिनेशन, फ्रेम तथा जंक्शन बॉक्स के माध्यम से उपयोग योग्य मॉड्यूल तैयार करने की प्रक्रिया को शामिल किया गया है। सरकार के इस निर्णय से राज्य में हरित ऊर्जा निवेश और औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 15:59:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत-दक्षिण कोरिया संबंधों में नई उम्मीद : भारत परस्पर सम्बन्धों को 'भविष्योन्मुखी साझेदारी' में बदलने पर सहमत, हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर भी दोनों देशों का दृष्टिकोण समान</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने द्विपक्षीय संबंधों को 'भविष्योन्मुखी साझेदारी' में बदलने का संकल्प लिया। डिजिटल सेतु की घोषणा के साथ, दोनों देशों ने 2030 तक व्यापार को $50 अरब तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है। यह सहयोग सेमीकंडक्टर, एआई और जहाज निर्माण जैसे क्षेत्रों में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता को मजबूत करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/new-hope-in-india-south-korea-relations-india-agrees-to-transform/article-151121"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pm-modi4.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने सोमवार को यहां द्विपक्षीय मुद्दों पर व्यापक वार्ता कर दोनों देशों के संबंधों को 'भविष्योन्मुखी साझेदारी' में बदलने का संकल्प लिया और कहा कि भारत तथा दक्षिण कोरिया के बीच ये संबंध प्रौद्योगिकी, व्यापार और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा रणनीतिक हितों पर आधारित होंगे। बैठक के बाद संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि आठ वर्ष बाद दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति की यह भारत यात्रा, अत्यंत महत्वपूर्ण है और दोनों देशों के बीच के गहरे तालमेल को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्य, बाजार अर्थव्यवस्था और कानून के शासन के प्रति सम्मान दोनों देशों की मूल पहचान का हिस्सा है और हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर भी दोनों देशों का दृष्टिकोण समान है। भविष्य की रूपरेखा को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देश 'विश्वसनीय साझेदारी' को 'भविष्योन्मुखी साझेदारी' में बदलने को तैयार हैं। इन सबके आधार पर, पिछले एक दशक में हमारे संबंध अधिक गतिशील और व्यापक हुए हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, “ चिप्स से जहाज निर्माण, प्रतिभा से प्रौद्योगिकी और मनोरंजन से ऊर्जा तक हम सभी क्षेत्रों में सहयोग के नये अवसरों को साकार करेंगे। आज हम अगले दशक की सफलता की कहानियों की नींव रख रहे हैं।” बैठक की प्रमुख उपलब्धियों का विवरण देते हुए उन्होंने कहा कि इसमें 'भारत-कोरिया डिजिटल सेतु' की घोषणा महत्वपूर्ण है, जिसका उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमी कंडक्टर और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करना है। दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते को उन्नत कर 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया, जो पिछले वर्ष 25.7 अरब डॉलर था।</p>
<p>आधिकारिक सूचना के अनुसार यह बैठक श्री मोदी और श्री ली के बीच तीसरी आमने-सामने की मुलाकात थी, जो द्विपक्षीय संबंधों में तेजी को दर्शाती है। इस दौरान जहाज निर्माण, उभरती प्रौद्योगिकियों और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे क्षेत्रों में कई समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किये गये। वैश्विक चुनौतियों के संदर्भ में श्री मोदी ने कहा कि यह साझेदारी व्यापक महत्व रखती है और दोनों देश मिलकर शांति और स्थिरता का संदेश देते हैं। उन्होंने दक्षिण कोरिया के अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और हिंद-प्रशांत महासागर पहल में शामिल होने के निर्णय का स्वागत किया।</p>
<p>इससे पहले 19 से 21 अप्रैल तक की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर भारत पहुंचे राष्ट्रपति ली का राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और पीएम मोदी ने औपचारिक स्वागत किया। उन्होंने राजघाट जाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि भी अर्पित की। यह यात्रा भारत और दक्षिण कोरिया के बीच बहुआयामी साझेदारी को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, आर्थिक पूरकता और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते रणनीतिक सहयोग पर आधारित है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 18:40:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तकनीक एवं आर्थिक-रणनीतिक साझेदारी में भारत का बड़ा कदम, पैक्स सिलिका में हुआ शामिल, जानें कैसे और कहां होगा फायदा?</title>
                                    <description><![CDATA[भारत और अमेरिका ने 'पैक्स सिलिका' घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए। अश्विनी वैष्णव और अमेरिकी दूत सर्जियो गोर ने इसे तकनीकी नेतृत्व और युवा पीढ़ी के सुनहरे भविष्य के लिए ऐतिहासिक निवेश बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/indias-big-step-in-technology-and-economic-strategic-partnership-joining-pax/article-143892"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/pax-silica.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत और अमेरिका ने तकनीक एवं आर्थिक-रणनीतिक साझेदारी की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाते हुए शुक्रवार को पैक्स सिलिका घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किये। इस समझौते पर केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव और अमेरिका के आर्थिक मामलों के उप मंत्री जैकब हेलबर्ग की मौजदूगी में हस्ताक्षर किये गये।</p>
<p>भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने हस्ताक्षर समारोह में पैक्स सिलिका में भारत के औपचारिक प्रवेश की घोषणा की। उन्होंने इसे एक निर्णायक कदम करार दिया जो 21वीं सदी की आर्थिक और तकनीकी व्यवस्था को आकार देने में मदद करेगा। गोर ने हाल ही में संपन्न अंतरिम व्यापार समझौते का जिक्र करते हुए कहा कि यह समझौता केवल व्यापार प्रवाह और आयात शुल्क सूचियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दो महान लोकतंत्रों की एक साथ मिलकर निर्माण करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।</p>
<p>यह घोषणा भारत और अमेरिका के बीच गहरे होते रणनीतिक तालमेल को रेखांकित करती है, जो भारत को अगली पीढ़ी के आर्थिक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण साबित होगा। तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में, पैक्स सिलिका में भारत की भागीदारी को साझा समृद्धि, तकनीकी नेतृत्व और लोकतांत्रिक सहयोग में एक दीर्घकालिक निवेश के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p>अश्विनी वैष्णव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, विदेश मंत्री एस.जयशंकर और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल दृष्टिकोण के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने एआई इम्पैक्ट समिट और विकसित हो रही सिलिकॉन आपूर्ति शृखंला साझेदारी को संभव बनाने का श्रेय भी उनके नेतृत्व को दिया।</p>
<p>अश्विनी वैष्णव ने जोर देते हुए कि भारत 28 वर्ष की औसत आयु के साथ दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है। उन्होंने कहा, हम यहां केवल एक शिखर सम्मेलन आयोजित नहीं कर रहे हैं, हम भविष्य का निर्माण कर रहे हैं। हम युवा पीढ़ी के लिए नींव रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2047 में भी भारत की औसत आयु 37 वर्ष होगी, जो तकनीक और नवाचार के दम पर दशकों तक निरंतर विकास और अवसरों को सुनिश्चित करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 14:10:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत के टेक फ्यूचर की झलक ‘2NM चिप’: भारत पहली बार टेक्नोलॉजी के डिजाइन मैप पर मजबूती से उभरा, अश्विनी वैष्णव की उंगलियों के बीच दिखी 2ल्ले चिप  </title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 2एनएम चिप दिखाई। क्वालकॉम द्वारा भारत में डिजाइन यह उपलब्धि देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनने की दिशा में आगे बढ़ाती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/gadgets/glimpse-of-indias-tech-future-2nm-chip-india-emerged-strongly/article-142394"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)7.png" alt=""></a><br /><div>नई दिल्ली। हाल ही में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव की एक तस्वीर ने भारत के तकनीकी क्षेत्र में एक नई दिशा को चिह्नित किया है, जिसमें उनकी दो उंगलियों के बीच एक छोटी सी 2 नैनोमीटर चिप को देखा जा सकता है। यह चिप भारत के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी मील का पत्थर साबित हो सकती है, खासकर तब जब इसे दुनिया की सबसे बड़ी सेमीकंडक्टर निमार्ता कंपनियों में से एक, क्वालकॉम द्वारा बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद स्थित अपने इंजीनियरिंग केंद्रों में डिजाइन किया गया है। इस चिप के डिजाइन का सफल टेप-आउट (अंतिम डिजाइन चरण) हाल ही में घोषित किया गया है, जो भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि है।</div>
<div> </div>
<div><strong>2एनएम चिप क्या है और क्यों है खास?</strong></div>
<div> </div>
<div>2एनएम चिप को नेक्स्ट-जेनरेशन सेमीकंडक्टर तकनीकी के रूप में जाना जा रहा है। यह चिप ट्रांजिस्टर डेंसिटी (ट्रांजिस्टर की संख्या) के मामले में अत्यधिक प्रभावी हैं, जिससे अधिक डेटा प्रोसेसिंग और कम ऊर्जा खपत संभव होती है। विशेष रूप से, यह चिप्स मौजूदा 5एनएम और 3एनएम चिप की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करती हैं। आधिकारिक तौर पर दावा किया जा रहा है कि 2एनएम चिप का उपयोग होने के बाद ऊर्जा खपत में 45% तक की कमी आएगी। यह चिप न केवल स्मार्टफोन्स, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (अक), इंटरनेट ऑफ थिंग्स और अन्य स्मार्ट गैजेट्स में भी इस्तेमाल हो सकती हैं। </div>
<div> </div>
<div><strong>भारत के लिए यह सफलता क्यों महत्वपूर्ण है?</strong></div>
<div> </div>
<div>क्वालकॉम द्वारा 2एनएम चिप का विकास भारत में करना एक बहुत बड़ा कदम है। भारत, जो पहले से ही वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की ओर अग्रसर है, अब सेमीकंडक्टर डिजाइनिंग में भी खुद को स्थापित करने की ओर बढ़ रहा है। क्वालकॉम के अनुसार, भारत में स्थित बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई उनके लिए अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा इंजीनियरिंग टैलेंट पूल है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव का मानना है कि यह भारत के डिजाइन इकोसिस्टम की बढ़ती क्षमता का प्रमाण है।</div>
<div> </div>
<div><strong>इस चिप का प्रभाव</strong></div>
<div> </div>
<div>आने वाले समय में 2एनएम चिप का प्रभाव सिर्फ स्मार्टफोन्स तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इनका उपयोग कई अन्य क्षेत्रों में भी होगा:</div>
<div>स्मार्टफोन्स: आगामी प्रीमियम स्मार्टफोन्स में इन चिप का उपयोग किया जाएगा।</div>
<div>आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (अक): एआई ऐप्लिकेशंस के लिए यह चिप बहुत कारगर साबित हो सकती हैं, क्योंकि वे बड़े पैमाने पर डेटा प्रोसेसिंग में मदद करती हैं।</div>
<div>इंटरनेट ऑफ थिंग्स : स्मार्ट होम डिवाइस, स्मार्ट वियरेबल्स और अन्य उपकरणों में भी इन चिप का प्रभावी उपयोग होगा।</div>
<div>ऑटोमोटिव इंडस्ट्री: स्वचालित वाहन और कनेक्टेड कारों में भी इन चिप का इस्तेमाल हो सकता है, जो इन तकनीकों को और अधिक सक्षम बनाएगा।</div>
<div>डेटा सेंटर: 2एनएम चिप की ऊर्जा दक्षता और प्रोसेसिंग स्पीड डेटा सेंटर   ऑपरेशंस को अधिक प्रभावी बनाएगी।</div>
<div> </div>
<div><strong>भारत की तकनीकी क्रांति</strong></div>
<div> </div>
<div>भारत का सेमीकंडक्टर डिजाइनिंग क्षेत्र एक नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। क्वालकॉम जैसी कंपनियों के बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई में स्थापित इंजीनियरिंग केंद्रों में इस तकनीक का विकास भारत के बढ़ते तकनीकी सामर्थ्य का प्रतीक है। भारत के पास अब विश्व स्तरीय डिजाइनिंग टैलेंट, उच्च गुणवत्ता वाली इंजीनियरिंग टीम और विशाल मैन्युफैक्चरिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर है, जो उसे वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में प्रमुख खिलाड़ी बना सकता है। अगर भारत इस क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करता है, तो वह न केवल अमेरिका और चीन के समकक्ष खड़ा हो सकता है, बल्कि सेमीकंडक्टर डिजाइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में एक वैश्विक नेता के रूप में उभर सकता है।</div>
<div> </div>
<div><strong>2एनएम चिप अब तक कहाँ बन रही हैं?</strong></div>
<div> </div>
<div>2 नैनोमीटर चिप एक नई तकनीक हैं, जो सेमीकंडक्टर उद्योग में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हैं। अभी तक इस तकनीक पर काम कर रही कुछ प्रमुख कंपनियां और उनकी फैक्ट्रियां हैं, जहां यह चिप्स विकसित या निर्माण की प्रक्रिया में हैं।</div>
<div> </div>
<div>दुनिया की नंबर-1 चिप मैन्युफैक्चरर</div>
<div>लोकेशन: ताइवान</div>
<div>स्टेटस: सबसे आगे</div>
<div>उत्पादन: 2025 से</div>
<div>क्लाइंट्स लाइन में माना जा रहा है कि 18 के प्रोसेसर यहीं बनेंगे</div>
<div> </div>
<div><strong>दक्षिण कोरिया</strong></div>
<div> </div>
<div>टेक्नोलॉजी पर फोकस</div>
<div>लोकेशन: साउथ कोरिया</div>
<div>उत्पादन लक्ष्य: 2025</div>
<div> </div>
<div><strong>अमेरिका और यूरोप</strong></div>
<div> </div>
<div>अपनी 2एनएम तकनीक को 20ए / 18ए नाम से पेश कर रहा है</div>
<div> </div>
<div>लोकेशन: अमेरिका, जर्मनी, आयरलैंड</div>
<div>फोकस: हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, सर्वर और अक</div>
<div>स्टेटस: एडवांस टेस्टिंग स्टेज</div>
<div> </div>
<div><strong>अमेरिका - रिसर्च लेवल</strong></div>
<div> </div>
<div>कइट ने सबसे पहले 2ल्ले चिप का प्रोटोटाइप दिखाया</div>
<div>लोकेशन: न्यूयॉर्क रिसर्च लैब</div>
<div>उत्पादन नहीं, सिर्फ टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट</div>
<div>कइट की रिसर्च का फायदा ळरटउ और रें२४ल्लॅ को भी मिलता है</div>
<div>भारत में 2एनएम चिप कहां बन रही है?</div>
<div> </div>
<div>भारत में मैन्युफैक्चरिंग नहीं, लेकिन डिजाइन हो रहा है</div>
<div> </div>
<div>लोकेशन: बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई</div>
<div>काम: 2एनएम चिप का डिजाइन और टेप-आउट</div>
<div>मैन्युफैक्चरिंग: ताइवान या साउथ कोरिया में होगी</div>
<div>यह भारत के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है</div>
<div>2एनएम चिप बनाना इतना मुश्किल क्यों है?</div>
<div> </div>
<div><strong>टेक्नोलॉजी चैलेंज</strong></div>
<div> </div>
<div>एक मशीन की कीमत: 1.5 लाख करोड़ से ज्यादा</div>
<div>एक फैब प्लांट की लागत: 20-25 लाख करोड़।</div>
<div> </div>
<div><strong>2एनएम चिप के निर्माण की चुनौतियां</strong></div>
<div> </div>
<div>2एनएम चिप्स का निर्माण अत्यधिक जटिल प्रक्रिया है, क्योंकि इस तकनीक में बहुत छोटे ट्रांजिस्टर होते हैं जो मौजूदा तकनीकी प्रक्रियाओं की तुलना में बहुत अधिक सटीकता और अत्याधुनिक उपकरणों की आवश्यकता होती है। इसके निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री, जैसे कि हाई-प्रीसीजन मटेरियल और उन्नत पैटर्निंग तकनीक, चिप्स की निर्माण प्रक्रिया को और भी जटिल बनाती हैं।</div>
<div> </div>
<div><strong>भारत में 2एनएम चिप कब बनेगी?</strong></div>
<div> </div>
<div>भारत में अभी 2एनएम चिप नहीं बन रही, फिलहाल यह डिजाइन, टेस्टिंग में मजबूत हो रहा है</div>
<div>मैन्युफैक्चरिंग में आने में 5-7 साल लग सकते हैं।</div>
<div>अभी यह चिप केवल ताइवान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका में बन रही है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>गैजेट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 11:32:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संसद में राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू का अभिभाषण: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुनिया ने भारत का पराक्रम देखा, देश की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए मिशन सुदर्शन चक्र पर भी हो रहा काम</title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा बजट सत्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सरकार की सामाजिक न्याय, रक्षा उत्पादन, आर्थिक मजबूती, बुनियादी ढांचा, अंतरिक्ष प्रगति और रिकॉर्ड कृषि उत्पादन की उपलब्धियां गिनाईं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/president-draupadi-murmus-address-in-parliament-the-world-saw-indias/article-141026"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/murmu.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। लोकसभा के बजट सत्र की शुरूआत राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के अभिभाषण से हुई। राष्ट्रपति ने अभिभाषण की शुरूआत करते हुए कहा सरकार देश में सामाजिक न्याय के लिए प्रतिबद्व है। भ्रष्टाचार से निपटने में सरकार सफल र​ही है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुुर्मु ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुनिया ने भारत के सशस्त्र बलों के शौर्य को देखा है और सरकार देश की सुरक्षा सुदृढ करने के लिए मिशन सुदर्शन चक्र पर तेजी से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते को स्थगित किया जाना भी आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई का हिस्सा है। </p>
<p>राष्ट्रपति मुर्मु ने बुधवार को यहां संसद के बजट सत्र के पहले दिन दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि भारत न किसी को डराता है और न ही किसी से डरता है। उन्होंने कहा, गुरु तेग बहादुर जी ने हमें सिखाया है-भय काहू को देत नय, नय भय मानत आन यानी हम ना किसी को डराएं, और ना किसी से डरकर जिएं। उन्होंने कहा कि इसी निडर भावना से भारत ने सिद्ध किया है कि शक्ति का प्रयोग उत्तरदायित्व और विवेक के साथ किया जा सकता है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ऑपरेशन सिंदूर से विश्व ने भारतीय सेना का शौर्य और पराक्रम देखा है। हमारे देश ने अपने संसाधनों के बल पर आतंकियों के अड्डों को ध्वस्त कर दिया। मेरी सरकार ने कड़ा संदेश दिया कि भारत पर किसी भी आतंकी हमले का जवाब दृढ़ और निर्णायक होगा। सिंधु जल समझौते को स्थगित किया जाना भी आतंकवाद के विरुद्ध हमारी लड़ाई का हिस्सा है। देश की रक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए मिशन सुदर्शन चक्र पर भी काम हो रहा है।</p>
<p>राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि सरकार देश को हर क्षेत्र और विशेष रूप से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर और ठोस प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा, आज मेक इन इंडिया के विजन के साथ बने उत्पाद, दुनिया के अलग-अलग बाजारों तक पहुंच रहे हैं। स्वदेशी को लेकर भी देशवासियों में बहुत उत्साह है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में भारत का रक्षा उत्पादन डेढ़ लाख करोड़ रुपए को पार कर गया है और रक्षा निर्यात भी रिकॉर्ड 23 हजार करोड़ रुपए से ऊपर चला गया है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद,'मेड इन इंडिया डिफेंस प्लेटफॉर्म्स पर लोगों का भरोसा मजबूत हुआ है।</p>
<ul>
<li>वर्ष 2025 में डेढ़ लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का रक्षा उत्पादन हुआ।</li>
<li>सेमीकंन्डक्टर क्षेत्र में 10 नयी फैक्ट्रियां शुरू की जायेंगी।</li>
<li>क्रिटिकल मिनरल क्षेत्र में दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने के प्रयास किये जा रहे हैं ।</li>
<li>संकटों के बावजूद देश आर्थिक स्थिति मजबूत हुई ।</li>
<li>अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है।</li>
<li>ढांचागत निर्माण के क्षेत्र में नये कीर्तिमान स्थापित हुए है।</li>
<li>गरीबों को 32 लाख नये घर मिले हैं।</li>
<li>95 करोड़ देशवासियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया गया।</li>
<li>लखपति दीदी की संख्या दो करोड़ से ज्यादा हो गयी है, इसे जल्दी तीन करोड़ करने का लक्ष्य।</li>
<li>रिफॉर्म के मार्ग पर चल रही है सरकार।</li>
<li>वर्ष 2024-25 में खाद्यान्न और बागवानी का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ।</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 28 Jan 2026 12:02:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सेमीकंडक्टर मार्केट में आने वाला समय भारत का : भारतीय युवाओं के बीच तेजी से फैल रही सेमीकंडक्टर की तकनीक, रिपोर्ट में दी जानकारी</title>
                                    <description><![CDATA[अब भारतीय तकनीशियनों का एक समूह इस मामले में स्ववलंबी हो गया है और यह युवाओं केो बीच तेजी से फैल रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/the-time-coming-in-the-semiconductor-market-indias-information-in/article-110618"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/6622-copy65.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विश्व के सेमीकंडक्टर मार्केट में आने वाला समय भारत का होने वाला है। एक नई रिपोर्ट में इस बारे में बताया गया है। यह रिपोर्ट वित्तीय मामलों के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों  ने दी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत का सेमीकंडक्टर उद्योग बहुत तेजी से बढ़ने वाला है। सेमीकंडक्टर मतलब वो चिप जो मोबाइल, कंप्यूटर और गाड़ियों जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान में लगती है। शुरुआत में भारत ने ताइवान और जापान से सेमीकंडक्टर की तकनीक सीखने की कोशिश की। अब भारतीय तकनीशियनों का एक समूह इस मामले में स्ववलंबी हो गया है और यह युवाओं केो बीच तेजी से फैल रहा है। </p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सेमीकंडक्टर की मांग बहुत ज्यादा बढ़ने वाली है। साल 2025 तक यह मांग 54 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगी और 2030 तक यह बढ़कर 108 बिलियन डॉलर हो जाएगी। मतलब लगभग दोगुनी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत का सेमीकंडक्टर बाजार हर साल 15 फीसदी की दर से बढ़ेगा। इसे कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट कहते हैं। भारत में युवा लोग बहुत हैं। बिजनेस में भी आधुनिक चिप का इस्तेमाल बढ़ रहा है। सरकार भी मदद कर रही है। इसलिए भारत में सेमीकंडक्टर बाजार दुनिया के मुकाबले तेजी से बढ़ेगा। विशेषज्ञों की रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि  कि भारत में ही सेमीकंडक्टर बनाने की कोशिश की जा रही है। इससे साल 2030 तक करीब 13 बिलियन डॉलर की कमाई हो सकती है। <br />अभी भारत में दुनिया की सिर्फ 0.1 फीसदी सेमीकंडक्टर चिप बनती है। सेमीकंडक्टर बनाने के लिए जो मशीनें लगती हैं, उन पर भारत करीब 1 प्रतिशत खर्च करता है। लेकिन दुनिया में सेमीकंडक्टर की जितनी मांग है, उसका 6.5 प्रतिशत भारत में है। भले ही अभी भारत में कम चिप बनती हैं, लेकिन भविष्य में भारत एक बड़ा बाजार बनने वाला है।</p>
<p><strong>टैरिफ संकट के कारण चीन पीछे</strong><br />रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कई कंपनियां चीन से अपना कारोबार हटा रही हैं। इसकी वजह है टैरिफ (टैक्स) को लेकर अनिश्चितता। कुछ कंपनियां चाइना प्लस वन रणनीति के तहत चीन के बाहर भी अपना काम कर रही हैं। मतलब वो चीन के साथ-साथ किसी और देश में भी अपना काम कर रही हैं। टेक्नोलॉजी के सामान बनाने में चीन सबसे आगे है। लेकिन भारत में सॉफ्टवेयर और सर्विस देने वाले लोग बहुत ज्यादा हैं। सेमीकंडक्टर के मामले में भी भारत आगे है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत चिप डिजाइनर भारत में ही काम करते हैं। ये लोग दूसरी कंपनियों के लिए चिप डिजाइन करते हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 13 Apr 2025 14:29:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छोटी सी चिप पर चीन-अमेरिका में तनातनी</title>
                                    <description><![CDATA[सिलिकॉन से बनी इस बेहद छोटी चीज की अहमियत का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि कोविड काल में जब इनकी सप्लाई धीमी पड़ गई थी, तो दुनिया भर के लगभग 169 बड़े उद्योगों में हड़कंप सा मच गया था।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/tension-between-china-and-america-on-a-small-chip/article-38337"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/site-photo-size-(27).jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अमेरिका और चीन आमने-सामने हैं और ये तनातनी है एक छोटी से आकार की चीज के लिए, लेकिन इसका सिर्फ  साइज छोटा है, कारोबार की बात करें तो ये आज के समय में करीब सैंकड़ों अरब डॉलर से ज्यादा का मार्केट है। हम बात कर रहे हैं एडवांस्ड माइक्रोचिप या सेमीकंडक्टर की, सिलिकॉन का ये छोटा सा टुकड़ा बड़े देशों में वचर्स्व की जंग का कारण बनता जा रहा है। हालांकि, चीन-अमेरिका भले ही एक-दूसरे को पछाड़ने की होड़ में लगे लेकिन इस सेक्टर का असली खिलाड़ी कोई तीसरा ही है।</p>
<p><strong>कोविड काल में 169 बड़े उद्योगों में हडकंप</strong><br />सिलिकॉन से बनी इस बेहद छोटी चीज की अहमियत का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि कोविड काल में जब इनकी सप्लाई धीमी पड़ गई थी, तो दुनिया भर के लगभग 169 बड़े उद्योगों में हड़कंप सा मच गया था।  कंपनियों को अरबों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा था।</p>
<p><strong>500 अरब डॉलर से ज्यादा का मार्केट</strong></p>
<p>सेमीकंडक्टर दुनिया में चौथा सबसे ज्यादा ट्रेड होने वाला प्रोडक्ट</p>
<p>दुनिया के 120 देश भागीदार </p>
<p>सेमीकंडक्टर से ज्यादा ट्रेड सिर्फ क्रूड, मोटर व्हीकल व उनके कल-पुर्जों और खाने वाले तेल का ही होता है। </p>
<p>कोरोना से पहले साल 2019 में टोटल ग्लोबल सेमीकंडक्टर ट्रेड की वैल्यू 1.7 ट्रिलियन डॉलर पर पहुंच गई थी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Feb 2023 10:56:29 +0530</pubDate>
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