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                <title>कर्नाटक से पुनर्निर्वाचित मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्यसभा में ली शपथ, बोले- मानसून सत्र में सरकार को जवाबदेह बनाएगा विपक्ष, निर्वाचित आठ सदस्यों को राधाकृष्णन ने दिलायी शपथ</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को संसद भवन में राज्यसभा सदस्य के रूप में पुनः शपथ ली। उपराष्ट्रपति और सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने उन्हें शपथ दिलाई। विपक्ष के नेता के रूप में खरगे ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और 'इंडिया' गठबंधन का आभार जताते हुए मानसून सत्र में जनता के मुद्दों पर सरकार को घेरने का संकल्प जताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/mallikarjun-kharge-re-elected-from-karnataka-took-oath-in-rajya-sabha/article-158366"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/khare.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कर्नाटक से पुनर्निर्वाचित होने के बाद सोमवार को संसद भवन में राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली। राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण के बाद खरगे ने कहा कि राज्यसभा के सदस्य के रूप में दोबारा शपथ लेना उनके लिए गर्व और बड़ी जिम्मेदारी का विषय है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता के रूप में इस गरिमामयी सदन की सेवा जारी रखना उनके लिए सम्मान की बात है।</p>
<p>खरगे ने राज्यसभा के सभापति और उपसभापति हरिवंश के सहयोग और समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस सांसदों, पार्टी नेतृत्व, कार्यकर्ताओं और समर्थकों का भी धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके अटूट विश्वास और प्रोत्साहन ने सार्वजनिक जीवन और संसदीय यात्रा में हमेशा उनका साथ दिया है।</p>
<p>खरगे ने सभी राजनीतिक दलों के सदन नेताओं, विशेष रूप से इंडिया गठबंधन और विपक्ष के व्यापक सहयोग के लिए भी आभार जताया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आगामी मानसून सत्र में विपक्ष पहले से अधिक समन्वय के साथ सरकार को जवाबदेह बनाने का काम करेगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और विपक्ष जनता के ज्वलंत मुद्दों, आकांक्षाओं और आवाज़ को पूरी ईमानदारी, दृढ़ता और प्रतिबद्धता के साथ संसद में उठाते रहेंगे। उन्होंने कहा, "जनता की आवाज़ को बुलंद करना हमारी सर्वोच्च जिम्मेदारी है और मैं इसे पूरी निष्ठा के साथ निभाता रहूंगा।"</p>
<p>राज्य सभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित राज्यसभा के पुनर्निवाचित एवं नवनिर्वाचित आठ सदस्यों को राज्य सभा की सदस्यता की शपथ दिलायी। राज्यसभा सचिवालय की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार राधाकृष्णन ने संसद भवन में आयोजित सादे समारोहों में निर्वाचित सदस्यों को सदस्यता की शपथ दिलायी।</p>
<p>कर्नाटक से निर्वाचित खरगे के अलावा आज शपथ लेने वाले सात सदस्यों में गुजरात से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के जीतेन्द्र मेघजीभाई कंजारिया और श्री मानसिंह मेरामन परमार, कर्नाटक से भाजपा के एम. नागराजा, मध्य प्रदेश से भाजपा के तरूण चुघ, महाराष्ट्र से निर्वाचित हुए राष्ट्रवाद कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के राजेंद्र हीरालाल जैन, मणिपुर से भाजपा की अधिकारीमायुम शारदा देवी ऊर्फ मैमोम शारदा देवी और राजस्थान से निर्वाचित भाजपा की डॉ. अलका सिंह शामिल हैं। इन सात में से चार सदस्यों ने हिंदी में, एक ने कन्नड़ में, एक ने पंजाबी में और एक ने मणिपुरी भाषा में शपथ ली।</p>
<p>इस अवसर पर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, सदन के नेता एवं केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू, विधि और न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और राज्यसभा के सदस्य जयराम रमेश और प्रफुल्ल पटेल उपस्थित थे। राज्यसभा के महासचिव पी.सी. मोदी और सचिवालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।</p>
<p>खरगे ने सभापति के कक्ष में अलग से आयोजित समारोह में शपथ लेने के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि दोबारा राज्य सभा की शपथ लेना उनके लिए गर्व और बड़ी जिम्मेदारी का विषय है। उन्होंने कहा कि इस गरिमामयी सदन में विपक्ष के नेता के रूप में सेवा जारी रखना उनके लिए सम्मान की बात है। खरगे ने राज्यसभा के सभापति और उपसभापति हरिवंश के सहयोग और समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया।</p>
<p>उन्होंने कांग्रेस की नेता सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस सांसदों, पार्टी नेतृत्व, कार्यकर्ताओं और समर्थकों का भी धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके अटूट विश्वास और प्रोत्साहन ने सार्वजनिक जीवन और संसदीय यात्रा में हमेशा उनका साथ दिया है। खरगे के शपथ ग्रहण के अवसर पर कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी, लोक सभा सदस्य प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल भी मौजूद थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 14:07:47 +0530</pubDate>
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                <title>यूपी चुनाव से पहले कांग्रेस का सबसे बड़ा दांव, दलित नेता राजेंद्र पाल गौतम को सौंपी यूपी की कमान</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से ठीक पहले कांग्रेस ने दलित नेता राजेंद्र पाल गौतम को राष्ट्रीय महासचिव और यूपी प्रभारी नियुक्त किया है। अविनाश पांडे की जगह आए गौतम के जरिए पार्टी का लक्ष्य दलित और वंचित वोट बैंक को दोबारा साधना है। लोकसभा चुनाव 2024 के उत्साहजनक नतीजों के बाद कांग्रेस जमीन पर अपना आधार मजबूत करने में जुट गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congresss-biggest-bet-before-up-elections-handing-over-the-command/article-158310"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)-(7).png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में बड़ा सियासी दांव चला है। दलित नेता और पूर्व आप मंत्री राजेंद्र पाल गौतम को कांग्रेस का महासचिव बनाकर यूपी का प्रभारी नियुक्त किया गया है। उन्होंने ब्राह्मण नेता अविनाश पांडे की जगह ली है। इसे संगठन में रुटीन बदलाव नहीं, बल्कि दलित और वंचित तबकों को साधने की आक्रामक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि भाजपा के सवर्ण वोटरों की तरफ झुकाव के बाद दलित वोट बैंक में जगह खाली हुई है। 1980 के दशक के अंत तक दलित कांग्रेस के कोर वोटर थे, बाद में बसपा ने इस पर कब्जा कर लिया। लेकिन पिछले 7-10 साल में बसपा सत्ता की गंभीर दावेदार नहीं रही।</p>
<p>एक वरिष्ठ नेता ने कहा, "बसपा का ग्राफ गिरा है। हमें मौका दिख रहा है।" कांग्रेस को भरोसा 2024 लोकसभा नतीजों से मिला है। 2019 में सिर्फ रायबरेली सीट और 6.36% वोट शेयर के मुकाबले 2024 में कांग्रेस ने 17 में से 6 सीटें 9.46% वोट शेयर के साथ जीतीं। सपा-कांग्रेस गठबंधन ने भाजपा को यूपी में नंबर-2 पर धकेल दिया। भाजपा 2019 की 62 सीटों से घटकर 33 पर आ गई, सपा ने 37 सीटें जीतीं।</p>
<p>विधानसभा में कांग्रेस का सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा। 2017 में सपा से गठबंधन में 105 में से 7 सीटें जीतीं। 2022 में अकेले 399 सीटें लड़कर सिर्फ 2 सीटें- रामपुर खास और फरेंदा जीतीं, जो अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन था। एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा, "2024 में हमारा प्रदर्शन बेहतर रहा। सपा से गठबंधन की तस्वीर साफ नहीं है, लेकिन संगठन मजबूत करके हम गठबंधन की चर्चा में अपनी स्थिति बेहतर करेंगे। हमारे पास जमीन पर काम करने के लिए 5 महीने हैं।"</p>
<p>राजेंद्र पाल गौतम का कांग्रेस में कद तेजी से बढ़ा है। सितंबर 2022 में कांग्रेस जॉइन की, जून 2025 में एससी कांग्रेस विंग के अध्यक्ष बने और जून 2026 में यूपी जैसे बड़े राज्य के प्रभारी। बसपा से आप होते हुए कांग्रेस में आए गौतम को दलित राजनीति और जमीनी मोबिलाइजेशन का अनुभव है। चार्ज लेने के बाद गौतम ने कहा, "मैं एक हफ्ते में यूपी आऊंगा और पार्टी की रणनीति पर चर्चा करूंगा।" पार्टी के एक पदाधिकारी ने कहा, "यह संकेत है कि कुछ हफ्तों में प्रदेश संगठन में और बदलाव हो सकते हैं।" भाजपा का मजबूत संगठन है और उसने गैर-जाटव दलितों व गैर-यादव ओबीसी में भारी निवेश किया है। वहीं सपा यूपी में मुख्य विपक्षी दल बनी हुई है। कांग्रेस को 2027 में बसपा के कमजोर होने और सपा से सीट बंटवारे के बीच अपना दलित बेस दोबारा खड़ा करना होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:16:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अंकारा में हाई अलर्ट: नाटो शिखर सम्मेलन से पहले बड़ी कार्रवाई, IS समेत कई संगठनों से जुड़े 103 संदिग्ध गिरफ्तार </title>
                                    <description><![CDATA[तुर्की की राजधानी अंकारा में 7-8 जुलाई को होने वाले नाटो शिखर सम्मेलन से पहले सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ा आतंकवाद विरोधी अभियान चलाया है। सुरक्षा उपायों को कड़ा करते हुए आईएसआईएस और वामपंथी चरमपंथी संगठनों से जुड़े 100 से अधिक संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि कई अन्य को न्यायिक हिरासत में लिया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/high-alert-in-ankara-major-action-before-nato-summit-103/article-158131"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/arrested.png" alt=""></a><br /><p>अंकारा। नाटो शिखर सम्मेलन से पहले सुरक्षा के व्यापक अभियान के तहत तुर्की की राजधानी अंकारा में आतंकवादी संगठनों से संबंध होने के संदेह में 100 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, यहां सात-आठ जुलाई को नाटो राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों का शिखर सम्मेलन होना तय हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, अदालत के आदेश पर 103 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 26 अन्य को न्यायिक हिरासत में रखा गया है।</p>
<p>अंकारा के गवर्नर ने नाटो शिखर सम्मेलन से पहले अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किये हैं। इसके बाद 23 जून को इस अभियान को अंजाम दिया गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस जांच में कुल 225 लोगों को हिरासत में लिया गया है। इन पर आतंकवादी संगठनों, विशेष रूप से इस्लामिक स्टेट (आईएस/आईएसआईएस), कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ तुर्की/मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट (टीकेपी/एमएल), मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट कम्युनिस्ट पार्टी (एमएलकेपी) और रिवोल्यूशनरी पीपुल्स लिबरेशन पार्टी/फ्रंट (डीएचकेपी/सी) से संबंध होने का संदेह है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 13:02:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजभर का अखिलेश पर तंज, बोले- सपा प्रमुख किसी दिन पीडीए में ''ए'' का मतलब आतंकवादी न बता दें...</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के 'PDA' फॉर्मूले पर तीखा तंज कसा है। उन्होंने कहा कि अखिलेश बार-बार 'A' की परिभाषा बदल रहे हैं और डर है कि वे इसे 'आतंकवादी' न बता दें। उन्होंने अखिलेश की तुलना फिल्म 'राजा बाबू' के बदलते किरदारों से की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/rajbhar-took-a-jibe-at-akhilesh-and-said-some/article-158011"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/om.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव की पीडीए की परिभाषा पर तंज कसते हुये कहा कि उन्हे डर है कि अखिलेश  ए का मतलब 'आतंकवादी' न बता दें। राजभर ने गुरुवार को बयान जारी कर कहा, "अखिलेश जी ने आज अपने पीडीए की नई व्याख्या की। पीडीए में ए का मतलब आदिवासी है। ए को अल्पसंख्यक और अगड़ा वो पहले ही बता चुके हैं। डर ये लग रहा है कि अखिलेश जी किसी दिन कोई सम्मेलन करते हुए यह न कह दें कि ए का मतलब आतंकवादी भी होता है। वैसे भी उनकी सरकार अपने कार्यकाल के दौरान वाराणसी सीरियल ब्लास्ट, लखनऊ और फैजाबाद कोर्ट ब्लास्ट के आतंकवादियों के मुकदमे वापस ले चुकी है।"</p>
<p>उन्होंने कहा, "तुष्टीकरण की राजनीति में अपने पीडीए के ए के बारे में यह कह सकते हैं कि सपा के पीडीए का अर्थ 'अगड़ा, अल्पसंख्यक, आदिवासी, आतंकवादी' होता है।" राजभर ने फिल्मी अंदाज में तंज कसते हुए कहा, "अखिलेश जी की यह हरकतें देखकर मुझे गोविंदा जी की फिल्म 'राजा बाबू' याद आ रही है, जिसमें गोविंदा जी का किरदार कभी वकील, कभी डॉक्टर, कभी पुलिस अधिकारी और कभी नेता बनता है। सही मायने में कहा जाए तो अखिलेश जी भारतीय राजनीति के 'राजा बाबू' ही हैं।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 14:10:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ब्राह्मण कार्ड पर मायावती का बड़ा दांव, बोलीं- बसपा से बढ़ रही विरोधियों की बेचैनी, 2007 जैसा इतिहास दोहराने का दावा</title>
                                    <description><![CDATA[मायावती ने यूपी चुनाव के लिए बसपा की रणनीति का खुलासा किया है। ब्राह्मण और अपरकास्ट समाज को उम्मीदवार बनाने से विपक्षी दलों में बेचैनी है। बसपा प्रमुख ने दावा किया कि 2007 की तरह इस बार भी 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' के तहत पूर्ण बहुमत की सरकार बनेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/mayawatis-big-bet-on-brahmin-card-bsp-is-increasing-the/article-157700"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/mayawati-photo.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती ने आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की रणनीति का खुलासा करते हुए बड़ा सियासी दांव चला है। सोशल मीडिया एक्स पर एक बयान जारी करके मायावती ने कहा कि अपरकास्ट खासकर ब्राह्मण समाज को बसपा से जोड़कर उम्मीदवार बनाने की प्रक्रिया से समाजवादी पार्टी (सपा) समेत सभी विरोधी दलों में बेचैनी है। उन्होने कहा, "जब से बसपा ने अपरकास्ट समाज और उसमें से खासकर ब्राह्मण समाज को पार्टी का उम्मीदवार बनाना शुरू किया है, तब से सभी विरोधी पार्टियों में व खासकर समाजवादी पार्टी में उनकी नींद उड़ा देने वाली बेचैनी देखने को मिल रही है।"</p>
<p>उन्होंने दावा किया कि यह 2007 की तरह ब्राह्मण समाज के योगदान से बसपा को पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने जैसा ही नतीजा दे सकता है। बसपा प्रमुख ने कहा कि यूपी जैसे विशाल आबादी वाले प्रदेश में 'ब्राह्मण समाज का हित बसपा में ही सुरक्षित है'। उन्होंने याद दिलाया कि पार्टी ने 'सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय' के सिद्धांत को पहले पार्टी स्तर पर अमल करके और फिर सरकार बनने पर भी उन्हें भरपूर आदर-सम्मान के साथ-साथ हर स्तर पर पूरी-पूरी भागीदारी देकर साबित किया था।</p>
<p>मायावती ने आरोप लगाया कि दूसरी पार्टियों की सरकारों में इस वर्ग के लोग पिछले काफी समय से अपने आपको काफी उपेक्षित, असुरक्षित व ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक भाईचारे के आधार पर ब्राह्मण समाज बसपा से जुड़ रहा है और उन्हें आयरन लेडी नेतृत्व पर पूरा यकीन है कि बसपा सरकार बनने पर पहले की तरह ही हर स्तर पर भरपूर आदर-सम्मान दिया जाएगा। उन्होने स्पष्ट किया कि अपरकास्ट में से क्षत्रिय, वैश्य आदि व अन्य समाज के लोगों को भी 'जिसकी जितनी तैयारी, उसकी उतनी भागीदारी' के आधार पर चुनाव में उम्मीदवार बनाया जाएगा। इसकी तैयारी हर स्तर पर जारी है। </p>
<p>बसपा सुप्रीमो ने कहा कि बसपा दूसरी पार्टियों की तरह कुछ लोगों को 'लॉलीपॉप' थमाने की संकीर्ण व स्वार्थ की राजनीति नहीं करती, बल्कि पूरे समाज के हित व कल्याण की चिंता करना अपना संवैधानिक कर्तव्य मानती है। उन्होंने कहा कि बसपा की नीति व कार्यक्रम जनहित, अपराध नियंत्रण व कानून व्यवस्था के मामले में भी देश व जनहित में है। गौरतलब है कि 2007 के विधानसभा चुनाव में मायावती ने सोशल इंजीनियरिंग के तहत ब्राह्मण-दलित गठजोड़ बनाकर 206 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। अब एक बार फिर उसी फॉर्मूले पर पार्टी काम कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 14:14:00 +0530</pubDate>
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                <title>'छात्रों की गूंज' से सरकार को घेरेंगे राहुल गांधी, छात्रों-युवाओं से जुड़ने की अपील</title>
                                    <description><![CDATA[विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 'छात्रों की गूंज' अभियान की शुरुआत की है। उन्होंने युवाओं से पेपर लीक, महंगी फीस और रोजगार के खिलाफ इस मुहिम से जुड़ने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि छात्र ऑनलाइन याचिका पर हस्ताक्षर कर अपने सपनों को बचाने के लिए आवाज बुलंद करें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/rahul-gandhi-will-surround-the-government-with-the-echo-of/article-157332"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/rahul2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने छात्रों और युवाओं से उनके 'छात्रों की गूंज' अभियान से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा है कि यह पहल सस्ती शिक्षा, निष्पक्ष परीक्षा और सम्मानजनक रोजगार की मांग को सरकार तक पहुंचाने का माध्यम है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक संदेश में गुरुवार को कहा कि यदि किसी छात्र ने पेपर लीक, परीक्षा में धांधली या महंगी फीस का दर्द झेला है और यदि मौजूदा व्यवस्था ने उसके सपनों को तोड़ा है, तो 'छात्रों की गूंज' उसकी आवाज है। उनका कहना है कि यह केवल एक अभियान नहीं, बल्कि छात्रों और युवाओं की मांगों को सरकार तक पहुंचाने का जरिया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि छात्र और युवा अभियान से जुड़कर अपने सुझाव दे सकते हैं तथा ऑनलाइन याचिका पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस अभियान से जुड़ने वाला प्रत्येक हस्ताक्षर इस लड़ाई को ताकत देगा और जितने अधिक लोग इससे जुड़ेंगे, उतनी ही बुलंद आवाज उठेगी। कांग्रेस नेता ने बुधवार को राजस्थान के कोटा से 'छात्रों की गूंज' अभियान की शुरुआत की जिसके जरिए उनकी पार्टी द्वारा शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और रोजगार जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 13:20:58 +0530</pubDate>
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                <title>विधानसभा चुनाव से पहले जयंत चौधरी का मंथन आज: मेरठ-सहारनपुर के नेताओं संग करेंगे बैठक, बूथ कमेटियों के गठन पर चर्चा संभव</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय लोकदल (RLD) ने संगठन को मजबूत करना शुरू कर दिया है। पार्टी प्रमुख जयंत चौधरी आज दिल्ली में मेरठ और सहारनपुर मंडल के पदाधिकारियों के साथ चुनावी रणनीति और बूथ कमेटियों के गठन पर चर्चा करेंगे। सीटों के संभावित बंटवारे को लेकर भी पार्टी के भीतर मंथन जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/jayant-chaudharys-brainstorming-before-the-assembly-elections-today-he-will/article-157311"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(1)31.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले अब राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) ने भी संगठन को दुरुस्त करने की क़वायद शुरू कर दी है। इसी क्रम में रालोद के प्रमुख और केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी आज दिल्ली में पार्टी पदाधिकारियों की अहम बैठक लेंगे। सूत्रों की मानें तो बैठक में बूथ कमेटियों के गठन को लेकर चर्चा की जाएगी। यूपी विधानसभा चुनाव से पहले जयंत चौधरी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संगठन को मजबूत करने के लिए मंथन शुरू कर दिया है।</p>
<p>रालोद के सूत्रों ने बताया कि आज की बैठक में मेरठ और सहारनपुर मंडल के जिलाध्यक्ष शामिल होंगे। इसके साथ ही पार्टी के सांसद, विधायक और सहयोगी संगठनों के पदाधिकारी भी बैठक में मौजूद रहेंगे। माना जा रहा है कि जयंत चौधरी इन दोनों मंडलों की सियासी जमीन को परखेंगे और चुनावी रणनीति पर चर्चा करेंगे। यूपी विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही आरएलडी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। जयंत चौधरी लगातार जमीनी नेताओं से फीडबैक ले रहे हैं। पश्चिमी यूपी को रालोद का गढ़ माना जाता है। ऐसे में पार्टी यहां कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में संगठन की मजबूती, बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की सक्रियता और स्थानीय मुद्दों पर भी चर्चा होगी। जयंत चौधरी को आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अपनी सीटों में बड़ी कटौती का सामना करना पड़ सकता है जिसको लेकर पार्टी के भीतर अभी से मंथन शुरू हो गया है।</p>
<p>दरअसल, 2022 के विधानसभा चुनाव में रालोद ने 33 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और आठ सीटें जीती थीं। जिन सीटों पर जीत मिली थी उनमें छपरौली, थाना भवन, बुढ़ाना, सिवालखास, मीरापुर, पुरकाजी (एससी), शामली और सदाबाद शामिल हैं। इस चुनाव में 19 सीटों पर पार्टी दूसरे नंबर पर रही लेकिन इन 33 में से 25 सीटों पर अब भाजपा के विधायक हैं, इसलिए रालोद अब उन सीटों पर दावा नहीं कर सकती।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 12:58:31 +0530</pubDate>
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                <title>झारखंड राज्यसभा चुनाव: दो सीटों के लिए मतदान जारी, दूसरी सीट पर रोमांचक मुकाबला</title>
                                    <description><![CDATA[झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए गुरुवार सुबह 9 बजे से मतदान शुरू हो गया है। सभी 81 विधायक शाम 4 बजे तक अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। मैदान में तीन उम्मीदवार हैं, जिनमें झामुमो के बैजनाथ राम की जीत तय मानी जा रही है, जबकि दूसरी सीट के लिए मुकाबला दिलचस्प है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/jharkhand-rajya-sabha-elections-voting-continues-for-two-seats-exciting/article-157310"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/election-commission.png" alt=""></a><br /><p>रांची। झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए गुरुवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सुबह 9:00 बजे से मतदान शुरू हो गया। मतदान सुबह 9 बजे से विधानसभा के कमरा संख्या 042 स्थित न्यायाधिकरण हॉल में शुरू हुआ, जो शाम 4 बजे तक चलेगा। राज्य के सभी 81 विधायक अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। राज्यसभा चुनाव में तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के बैजनाथ राम, कांग्रेस के प्रणव झा और भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी शामिल हैं।</p>
<p>मतदान को लेकर विधानसभा परिसर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। राजनीतिक दलों की नजरें प्रत्येक विधायक के मतदान पर टिकी हुई हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने विधायकों को एकजुट बनाए रखने में जुटे हुए हैं। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार झामुमो उम्मीदवार बैजनाथ राम की जीत लगभग तय मानी जा रही है। वहीं दूसरी सीट के लिए मुकाबला दिलचस्प हो गया है। कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा और एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। अब मतदान समाप्त होने के बाद मतगणना और अंतिम परिणाम पर सभी की निगाहें टिकी हैं, जिससे यह साफ हो जाएगा कि झारखंड से राज्यसभा की दो सीटों पर कौन उम्मीदवार विजयी होकर संसद के उच्च सदन में पहुंचेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 12:05:29 +0530</pubDate>
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                <title>गाज़ा शांति रोडमैप योजना : हमास ने फ़िलिस्तीनी गुटों का जवाब संयुक्त राष्ट्र को सौंपा, ट्रंप योजना पर दिया सकारात्मक जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[हमास और अन्य फिलिस्तीनी गुटों ने गाजा शांति रोडमैप पर अपनी संयुक्त प्रतिक्रिया संयुक्त राष्ट्र को सौंप दी है। काहिरा बैठक के बाद तैयार इस रुख में मानवीय सहायता, सैन्य कार्रवाई रोकने, इजरायली सेना की पूर्ण वापसी और गाजा पुनर्निर्माण को पहले चरण में पूरी तरह लागू करने की मांग की गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/gaza-peace-roadmap-plan-hamas-submits-response-to-palestinian-factions/article-157021"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(1)19.png" alt=""></a><br /><p>काहिरा। फिलिस्तीनी संगठन हमास ने कहा है कि उसने गाजा शांति रोडमैप योजना पर फिलिस्तीनी गुटों की संयुक्त प्रतिक्रिया संयुक्त राष्ट्र के पश्चिम एशिया शांति प्रक्रिया के विशेष समन्वयक निकोलाय म्लादेनोव को सौंप दी है। हमास ने यमन की मीडिया को जारी बयान में कहा कि पिछले सप्ताह काहिरा में मिस्र, कतर और तुर्की के मध्यस्थों की मौजूदगी में विभिन्न फिलिस्तीनी गुटों के साथ कई दौर की बैठकें हुईं। इन बैठकों के बाद एक साझा राष्ट्रीय रुख तैयार किया गया, जिसे एक दिन पहले औपचारिक रूप से पेश कर दिया गया।</p>
<p>हमास ने कहा कि फिलिस्तीनी गुटों ने इस रोडमैप को "जिम्मेदारी और सकारात्मक सोच" के साथ देखा है। संगठन के अनुसार सभी गुटों ने इस बात पर जोर दिया कि योजना के पहले चरण को पूरी तरह लागू किया जाए, खासकर मानवीय सहायता व्यवस्था और गाजा पट्टी में फिलिस्तीनी जनता के खिलाफ सभी प्रकार की सैन्य कार्रवाई रोकने के मामले में। बयान में कहा गया, "फिलिस्तीनी गुटों ने राष्ट्रपति ट्रंप की योजना के दूसरे चरण को लागू करने संबंधी रोडमैप पर गंभीरता और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ विचार किया। उन्होंने पहले चरण के सभी प्रावधानों को पूरी तरह लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया, विशेष रूप से मानवीय सहायता और गाजा में सभी तरह की आक्रामक कार्रवाइयों को समाप्त करने के मुद्दे पर।"</p>
<p>हमास ने कहा कि गुटों ने रोडमैप में शामिल अन्य बिंदुओं पर भी अमल की मांग की है। इनमें प्रशासनिक समिति की तैनाती, गाजा से इजरायली सेना की पूर्ण वापसी और पुनर्निर्माण प्रक्रिया शामिल है। बयान में कहा गया, "फिलिस्तीनी गुटों ने इस बात पर भी जोर दिया कि रोडमैप में उल्लिखित प्रशासनिक समिति के प्रवेश, गाजा पट्टी से पूर्ण इजरायली वापसी और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को लागू किया जाए, ताकि फिलिस्तीनी जनता अपने राज्य की स्थापना और आत्मनिर्णय के अधिकार के लक्ष्य को हासिल कर सके।"</p>
<p>हमास ने बताया कि उसका प्रतिनिधिमंडल काहिरा में मध्यस्थों और अन्य फिलिस्तीनी गुटों के साथ आगे भी बैठकें जारी रखेगा, ताकि सहमति वाले बिंदुओं को लागू करने की दिशा में प्रगति हो सके। उल्लेखनीय है कि निकोलाय म्लादेनोव ने मई में "राष्ट्रपति ट्रंप की व्यापक गाजा शांति योजना के पूर्ण क्रियान्वयन के लिए रोडमैप" सार्वजनिक किया था। 15 बिंदुओं वाली इस योजना में सुरक्षा व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल की तैनाती, इजरायली सैनिकों की वापसी और युद्ध के बाद पुनर्निर्माण जैसे मुद्दे शामिल हैं। अक्टूबर 2025 से लागू युद्धविराम समझौते के तहत शुरुआती चरण में कैदियों की अदला-बदली, गाजा में मानवीय सहायता की आपूर्ति और कुछ इलाकों से इजरायली सैनिकों की आंशिक वापसी शामिल थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 18:32:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अल्बानिया: स्केनबेर्ग चौक आंदोलन बना व्यापक सत्ता-विरोधी प्रदर्शन, पीएम एदी रामा के इस्तीफे की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[अल्बानिया की राजधानी तिराना में जैरेड कुशनर की पर्यटन परियोजना के खिलाफ शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब बड़े राजनीतिक आंदोलन में बदल गया है। लगातार 10वें दिन सड़कों पर उतरे हजारों प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री एदी रामा के इस्तीफे की मांग की और सत्तापक्ष व विपक्ष दोनों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/albania-sch%C3%B6nberg-square-movement-becomes-massive-anti-establishment-protest-demanding-pm/article-156696"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/अलबनिया.png" alt=""></a><br /><p>तिराना। यूरोपीय देश अल्बानिया में एक संरक्षित तटीय क्षेत्र में प्रस्तावित पर्यटन विकास परियोजना के विरोध से शुरू हुआ आंदोलन अब एक व्यापक सत्ता-विरोधी आंदोलन में बदल चुका है। बुधवार रात राजधानी तिराना में लगातार 10वें दिन हजारों लोग सड़कों पर उतरे और प्रधानमंत्री एदी रामा के इस्तीफे की मांग की। रिपोर्ट के अनुसार प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार और मुख्य विपक्षी दल दोनों ही देश की राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों का समाधान करने में पूरी तरह विफल रहे हैं।</p>
<p>राजधानी तिराना के स्केनबेर्ग चौक पर भारी संख्या में प्रदर्शनकारी एकत्र हुए और वहां से संसद भवन की ओर मार्च किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने ‘रामा जेल में, बेरीशा जेल में’ के नारे लगाये। यहां ‘बेरीशा’ का संदर्भ पूर्व प्रधानमंत्री और वर्तमान में ‘डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ अल्बानिया’ के अध्यक्ष सालि बेरीशा से है, जिससे साफ है कि जनता सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों से नाराज है। यह विरोध प्रदर्शन मूल रूप से पीशे पोरो क्षेत्र और साज़ान द्वीप पर एक प्रस्तावित पर्यटन विकास परियोजना के खिलाफ शुरू हुआ था। यह परियोजना अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जैरेड कुशनर से जुड़े एक उद्यम द्वारा एक संरक्षित तटीय क्षेत्र में निवेश से संबंधित है। </p>
<p>पर्यावरण और स्थानीय हितों को लेकर शुरू हुआ यह विरोध अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है, जो सरकार की विभिन्न नीतियों और कानूनों को चुनौती दे रहा है। आंदोलन के दसवें दिन आयोजकों ने इसे एक राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन का रूप दिया। प्रदर्शनकारी नेताओं ने देश और विदेशों में रहने वाले सभी अल्बानियाई लोगों से इस रैली में शामिल होने का आह्वान किया था। इस रैली को जानबूझकर ‘लीग ऑफ प्रिजरेन’ की स्थापना की वर्षगांठ के दिन आयोजित किया गया था, जो 19वीं सदी की एक ऐतिहासिक घटना है और अल्बानियाई राष्ट्रीय एकता का एक बड़ा प्रतीक मानी जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 18:30:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>टीएमसी का संकट गहराया : कल्याण बनर्जी ने ममता को दिया अल्टीमेटम, अभिषेक के कारण पार्टी छोड़ने की दी धमकी</title>
                                    <description><![CDATA[तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक कलह खुलकर सामने आ गई है। वरिष्ठ सांसद और वकील कल्याण बनर्जी ने ममता बनर्जी को सीधा अल्टीमेटम दिया है। कोर्ट केस से हटाए जाने से नाराज कल्याण ने कहा कि अभिषेक बनर्जी के रहते वे पार्टी में नहीं रहेंगे। उन्होंने अभिषेक पर अहंकार और पार्टी बर्बाद करने का आरोप लगाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/tmcs-crisis-deepens-kalyan-banerjee-gives-ultimatum-to-mamata-threatens/article-156700"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/kalyan.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। चौतरफा संकटों से घिरी तृणमूल कांग्रेस अब एक और परेशानी में घिर गयी जब पार्टी के वरिष्ठ सांसद और देश के जाने-माने वकील कल्याण बनर्जी ने गुरुवार को पार्टी सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सीधा अल्टीमेटम दे दिया है। कल्याण बनर्जी ने दो टूक शब्दों में कहा है कि अब 'दीदी' को उनके और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के बीच किसी एक को चुनना होगा। संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कल्याण बनर्जी ने बेहद तल्ख लहजे में कहा, "दीदी को मेरे और अभिषेक बनर्जी के बीच फैसला करना होगा।" जब उनसे पूछा गया कि क्या वे पार्टी छोड़ने का संकेत दे रहे हैं, तो वरिष्ठ वकील ने स्पष्ट किया, "अगर अभिषेक बनर्जी उसी पद और उसी ताकत के साथ पार्टी में बने रहते हैं, तो मैं तृणमूल कांग्रेस में नहीं रहूंगा।"</p>
<p>इस बड़े राजनीतिक टकराव की मुख्य वजह पश्चिम बंगाल विधानसभा में कथित 'हस्ताक्षर जालसाजी' विवाद से जुड़े एक मामले में कानूनी पैरवी को लेकर पैदा हुआ विवाद है। कल्याण बनर्जी ने बताया कि वे बुधवार को कलकत्ता हाई कोर्ट में अभिषेक बनर्जी की ओर से दायर एक याचिका पर कानूनी सुरक्षा की मांग करने के लिए पेश हुए थे। अदालत ने उस दिन मामला नहीं लिया और गुरुवार को सुनवाई होनी तय थी। लेकिन कल्याण बनर्जी का आरोप है कि बुधवार की देर रात करीब 12:30 बजे उनके बेटे के पास एक फोन आया, जिसमें सूचित किया गया कि अब इस मामले में उनकी जगह वकील अयान भट्टाचार्य अदालत में जिरह करेंगे।</p>
<p>अपने पेशे का हवाला देते हुए बनर्जी ने कहा, "मैं ऐसा अहंकार बर्दाश्त नहीं कर सकता। मैं पिछले 45 सालों से वकालत के पेशे में हूँ और मैं इस तरह के रवैये को कतई स्वीकार नहीं करूँगा। जिनकी बात की जा रही है, वे मेरे बच्चों की उम्र के हैं। अगर उन्हें मुझ पर भरोसा नहीं था, तो उन्होंने पहले मुझसे इस मामले को संभालने के लिए क्यों कहा? मैं लंबे समय से जानता हूँ कि अभिषेक मुझ पर भरोसा नहीं करते, लेकिन वे इस तरह मुझ जैसे वरिष्ठ वकील का अपमान नहीं कर सकते। क्या मैं कोई कूड़ेदान हूँ?"</p>
<p>अनुभवी सांसद बनर्जी ने दावा किया कि तृणमूल के भीतर और कार्यकर्ताओं के बीच अभिषेक की लोकप्रियता लगातार खत्म हो रही है। उन्होंने कहा, "अभिषेक को अभी भी समझ नहीं आ रहा है कि जनता और पार्टी कार्यकर्ता उन्हें पसंद नहीं करते हैं। उन्होंने पार्टी को बर्बाद कर दिया है। उनकी वजह से मुझे भी 'चोर' ब्रांड किया जा रहा है। मैं कामाक स्ट्रीट का कोई अदना कार्यकर्ता नहीं हूँ जो इस अहंकार को सहन करूँगा।"</p>
<p>कल्याण बनर्जी ने यह भी दावा किया कि उन्होंने पहले भी ममता बनर्जी को पार्टी के 'नंबर-2' (अभिषेक) के इस व्यवहार और आचरण के बारे में सचेत किया था, लेकिन उस पर कोई सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई। ममता बनर्जी के साथ अपने दशकों पुराने संबंधों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, " अभिषेक दीदी के खून के रिश्तेदार हो सकते हैं, लेकिन हम लोगों ने भी पिछले 40-45 वर्षों से पार्टी के वफादार सिपाहियों की तरह उनके भाइयों के रूप में काम किया है। मैं इसे स्वीकार नहीं करूँगा। इस बेहद कठिन समय में भी मैं ममता बनर्जी के साथ खड़ा रहा, और मेरे साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है? अगर यही स्थिति रही, तो मेरे लिए पार्टी में बने रहना असंभव होगा।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 17:52:12 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का बड़ा बयान, बोले- नेतन्याहू से हुईं गलतियां, हित हमेशा नहीं मिलते</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि इजरायली पीएम नेतन्याहू से कुछ चीजें गलत हुई हैं। लेबनान सैन्य कार्रवाई और ईरान तनाव के बीच उन्होंने स्पष्ट किया कि नेतन्याहू अपने देश के हितों की पैरवी करते हैं, लेकिन जहां टकराव होगा, वहां अमेरिका अपने नागरिकों का हित चुनेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-vice-president-jd-vances-big-statement-said-netanyahu/article-156671"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/jd-vance.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। ईरान के खिलाफ युद्ध में सहयोगी रहे अमेरिका और इजरायल के बीच पिछले कुछ हफ्तों से रिश्तों में तल्खी साफ देखने को मिल रही है। इस बीच, अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से ‘निश्चित रूप से कुछ चीजें गलत हुई हैं।’ वेंस ने हालांकि इसका कोई खास उदाहरण नहीं दिया, लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि नेतन्याहू ‘अपने देश के हितों की आक्रामक रूप से पैरवी करते हैं’, लेकिन उनके हित हमेशा अमेरिका के हितों के अनुकूल नहीं होते। उनका यह बयान दोनों सहयोगियों के बीच हाल के दिनों में उपजे तनाव को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने जैसा है।</p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली नेता के बीच लेबनान में सैन्य कार्रवाई को लेकर तीखी बहस हुई थी। इजरायल की इस कार्रवाई के कारण क्षेत्र में नए सिरे से हमले शुरू हो गए हैं, जिससे ईरान के साथ चल रही शांति वार्ता खटाई में पड़ती दिख रही है। बीती रात अमेरिका और ईरान के बीच लगातार दूसरे दिन हवाई हमलों हुए जिससे अप्रैल महीने से दोनों देशों के बीच लागू युद्धविराम संकट में आ गया है। यह तनाव तब दोबारा भड़का जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान ने युद्ध को समाप्त करने का ‘सौदा करने में बहुत लंबा समय ले लिया।’ ताजा संघर्ष की मुख्य वजह लेबनान के घटनाक्रम हैं, जहां इजरायल ईरान-समर्थित सशस्त्र समूह हिजबुल्लाह के खिलाफ अपना सैन्य अभियान लगातार जारी रखे हुए है।</p>
<p>इस साक्षात्कार का प्रसारण आगामी रविवार होगा। इसमें वेंस ने कहा कि नेतन्याहू एक ऐसे देश का शासन चला रहे हैं जो निश्चित रूप से अमेरिका का बहुत करीबी भागीदार रहा है। लेकिन, बेहद करीबी सहयोगी होने के बावजूद, कभी-कभी हमारे हित पूरी तरह एक जैसे होते हैं और कभी-कभी उनमें टकराव होता है। मैंने प्रधानमंत्री के रुख में यही देखा है कि वह अपने देश के हितों को बहुत आक्रामक तरीके से सामने रखते हैं, कभी इसका मतलब यह होता है कि हम दोनों एक ही राह पर हैं, और कभी इसका मतलब होता है कि हम अलग हैं।”अमेरिकी उप राष्ट्रपति ने आगे स्पष्ट किया कि ट्रंप प्रशासन का मुख्य काम इस बात पर ध्यान केंद्रित करना है कि अमेरिका के सर्वोत्तम हित में क्या है। उन्होंने कहा, "जहां हमारे हितों में टकराव होगा, वहां इजरायलियों के लिए दुर्भाग्य से ही सही हमें अमेरिकी जनता का पक्ष चुनना होगा।” जब वेंस से उन उदाहरणों के बारे में पूछा गया, जहां नेतन्याहू से गलतियां हुईं, तो उन्होंने यह कहकर बात टाल दी कि ‘ऐसी बातचीत को निजी रखना ही बेहतर होता है।’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 17:29:25 +0530</pubDate>
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