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                <title>इस्तीफे से पहले इमोशनल हुए शिवकुमार: छुए सिद्दायमैयार के पैर, बोले- आलाकमान से किया वादा निभाएंगे सिद्धारमैया</title>
                                    <description><![CDATA[बेंगलुरु में मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के आवास 'कावेरी' पर आयोजित नाश्ते की बैठक में राजनीतिक सौहार्द का अनोखा नजारा दिखा। डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने सिद्दारमैया के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। कयासबाजियों के बीच दोनों नेताओं के गले मिलने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं, जिसे पार्टी की अंदरूनी एकजुटता के रूप में देखा जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/before-resigning-shivkumar-became-emotional-touched-the-feet-of-siddaramaiah/article-155263"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/karnataka-cm.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास 'कावेरी' में गुरुवार को आयोजित नाश्ते की बैठक के दौरान डीके शिवकुमार ने मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया। यह सम्मान और राजनीतिक सौहार्द का एक उल्लेखनीय प्रदर्शन था, जिसने कर्नाटक कांग्रेस नेतृत्व समीकरणों पर चल रही चर्चा के बीच तुरंत ध्यान आकर्षित किया। यह बैठक सिद्दारमैया द्वारा आयोजित की गई थी और इसमें शिवकुमार, जो कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी हैं, के साथ-साथ कई कैबिनेट मंत्री और मुख्यमंत्री के करीबी माने जाने वाले वरिष्ठ नेता भी उपस्थित थे।</p>
<p>शिवकुमार द्वारा सिद्दारमैया के पैर छूने और उसके बाद दोनों नेताओं के गले मिलने की तस्वीरें दोनों नेताओं के कार्यालयों से जारी की गईं, जो बैठक से जुड़ी राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गईं। ये तस्वीरें सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तेजी से वायरल हुईं, जहां इन्हें राज्य कांग्रेस नेतृत्व के भीतर एकता और समन्वय के समन्वित संदेश के रूप में देखा गया। नाश्ते पर हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री के खेमे से जुड़े कई मंत्री और विधायक भी शामिल हुए, जिससे सत्तारूढ़ दल के प्रमुख नेताओं की उपस्थिति और भी स्पष्ट हो गई।</p>
<p>गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि उन्हें बैठक की विशिष्ट जानकारी नहीं है और वे विवरण जुटाएंगे। उन्होंने दोहराया कि नेतृत्व संबंधी कोई भी निर्णय पार्टी उच्च कमान के पास है। एआईसीसी महासचिव और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन के संबंध में कोई औपचारिक चर्चा या निर्णय नहीं लिया गया है। इस बीच, राज्यपाल थावरचंद गहलोत गुरुवार को बेंगलुरु में उपस्थित नहीं थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 15:03:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>झारखंड राज्यसभा चुनाव: दो सीटों पर बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी, गठबंधन की गणित पर टिकी नजर, भाजपा कर रही एक सीट पर दावा</title>
                                    <description><![CDATA[झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए 18 जून 2026 को मतदान होगा। जीत के लिए 28 वोटों की जरूरत है। 56 विधायकों के साथ सत्तारूढ़ महागठबंधन का पलड़ा भारी है, जबकि 24 विधायकों वाले एनडीए ने भी प्रत्याशी उतारने का एलान किया है। झामुमो ने भाजपा पर विधायकों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) की कोशिश का आरोप लगाया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/jharkhand-rajya-sabha-elections-political-activity-increased-on-two-seats/article-155048"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/tripura-bjp.png" alt=""></a><br /><p>रांची। झारखंड के राज्यसभा की दो सीटों को लेकर राजनीतिक तपिश बढ़ गई है। पार्टी मुख्यालयों में बैठकों का दौर चल रहा है। राज्य की दो सीटों में एक सीट शिबू सोरेन के निधन के बाद खाली हुई है, जबकि दूसरी सीट दीपक प्रकाश का कार्यकाल पूरा होने के बाद खाली हो जाएगा। वहीं चुनाव आयोग के जारी कार्यक्रम के अनुसार 1 जून को अधिसूचना जारी होगी, 8 जून तक नामांकन और 11 जून तक नाम वापसी की प्रक्रिया चलेगी। 18 जून को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान और उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना होगी।</p>
<p>राज्यसभा के दोनों सीटों का गणित सीधा नहीं बल्कि गठबंधन और समीकरणों पर निर्भर है। झारखंड विधानसभा में कुल 81 सदस्य हैं, जहां एक उम्मीदवार की जीत के लिए 28 वोट जरूरी हैं। मौजूदा स्थिति में सत्तारूढ़ महागठबंधन के पास 56 विधायकों का मजबूत आंकड़ा है। इसमें झामुमो, कांग्रेस, राजद और वाम दल शामिल हैं। ऐसे में अगर महागठबंधन एकजुट होकर चुनाव लड़ता है तो दोनों सीटों पर उसकी जीत लगभग तय मानी जा रही है। हालांकि चुनौती तब पैदा होगी, जब घटक दल अलग-अलग उम्मीदवार उतारते हैं। ऐसी स्थिति में वोट बंटने का खतरा बढ़ जाएगा। जीत का समीकरण बिगड़ सकता है।</p>
<p>झामुमो के पास कुल 34 सीट है। जबकि दो सीटों के लिए 56 वोट की जरूरत होगी। ऐसे में अगर झामुमो दो प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उत्तारता है तो एक सीट पर तो जीत पक्की है। लेकिन दूसरी सीट फंस जाएगी। क्योंकि उसके पास सिर्फ छह वोट ही बचेंगे। उसे और 22 वोटों की जरूरत पड़ेगी, जो जुटाना मुश्किल होगा। झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि दोनों सीटों पर गठबंधन का प्रत्याशी होगा। गठबंधन की बैठक में इसका फैसला होगा।</p>
<p>वहीं, कांग्रेस की बात करें तो उनके 16 विधायक हैं। एक सीट के लिए 28 विधायकों की जरूरत है। ऐसे में अगर कांग्रेस अलग से प्रत्याशी उतारती है तो अकेले दम पर जीतना मुश्किल होगा। क्योंकि उसे 12 और विधायकों की जरूरत होगी। ऐसे में गठबंधन में दरार आ सकती है। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के राजू ने कहा कि कांग्रेस-झामुमो एक-एक सीट पर प्रत्याशी देगा। सीएम से जल्दी बात करेंगे। वहीं एनडीए की बात करें तो उनके पास कुल 24 वोट हैं। वहीं अकेले भाजपा के पास 21 वोट हैं। ऐसे में एनडीए प्रत्याशी को जीत के लिए चार वोट कम पड़ेंगे। वैसे जेएलकेएम फिलहाल किसी पार्टी के साथ नहीं है। ऐसे में अगर भाजपा उसे भी साथ लेती है तो भी तय वोट से तीन वोट पीछे रह जाएगी। इससे चुनाव रोचक हो जाएगा।</p>
<p>सोमवार को भाजपा चुनाव समिति की बैठक भी हुई थी। बैठक बाद प्रदेश महामंत्री अमर बाउरी ने साफ कहा कि चुनाव में भाजपा अपना प्रत्याशी उतारेगी और जीत जरूर होगी। ऐसे में यहां दूसरे सीट पर चुनाव रोचक हो सकता है। राज्यसभा चुनाव में विधानसभा की दलगत स्थिति सत्तारूढ़ महागठबंधन के पक्ष में साफ बढ़त दिखाती है, जहां 81 सदस्यीय सदन में एक सीट के लिए 28 वोट जरूरी हैं और सत्ता पक्ष के पास कुल 56 विधायक हैं। झामुमो (34), कांग्रेस (16), राजद (4) और भाकपा माले (2) के इस संयुक्त आंकड़े के आधार पर दोनों सीटों पर जीत आसान मानी जा रही है, बशर्ते गठबंधन एकजुट रहे।</p>
<p>दूसरी ओर विपक्ष की स्थिति कमजोर है, जहां भाजपा के 21 और सहयोगियों को मिलाकर कुल 24 विधायक ही हैं, जो एक सीट के लिए भी पर्याप्त नहीं हैं। हालांकि जेएलकेएम के एक विधायक का रुख और संभावित क्रॉस वोटिंग मुकाबले को दिलचस्प बना सकती है। हालांकि झारखंड मुक्ति मोर्चा ने पत्र लिख कर सीधे भारत निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाते हुए मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। झामुमो के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने मुख्य चुनाव आयुक्त को एक बेहद संवेदनशील पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि भाजपा के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं होने के बावजूद वह उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है, जो सीधे तौर पर विधायकों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) और अनैतिक दबाव बनाने की कोशिशों की ओर इशारा करता है।</p>
<p>जिसके बाद भाजपा के प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार उतारना हर राजनीतिक दल का संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकार है। यदि भाजपा उम्मीदवार उतारने की घोषणा करती है तो झामुमो को इसमें “लोकतंत्र पर खतरा” क्यों दिखाई देने लगता है? क्या झामुमो यह मान चुका है कि उसके विधायक स्वेच्छा से भी उसके खिलाफ मतदान कर सकते हैं?उन्होंने कहा कि झामुमो का पूरा पत्र डर, भ्रम और राजनीतिक हताशा से भरा हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 15:08:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>राजस्थान में राज्यसभा चुनाव की तैयारियां तेज, 18 जून को होगा मतदान</title>
                                    <description><![CDATA[भारत निर्वाचन आयोग ने राजस्थान की तीन राज्यसभा सीटों पर 18 जून को चुनाव कराने की घोषणा की है। अधिसूचना 1 जून को जारी होगी। संख्या बल के अनुसार भाजपा दो सीटों पर मजबूत है और तीसरी सीट के लिए रणनीतिक बिसात बिछा रही है, जबकि कांग्रेस अपनी एक सीट बचाने के संघर्ष में जुटी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/preparations-for-rajya-sabha-elections-intensified-in-rajasthan-voting-will/article-154663"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/election-commission.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भारत निर्वाचन आयोग ने 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव का कार्यक्रम जारी कर दिया है। इसमें राजस्थान की तीन सीटों पर 18 जून को मतदान होगा। अधिसूचना एक जून को जारी होगी, नामांकन की अंतिम तिथि 8 जून और मतगणना उसी दिन होगी। इन सीटों पर 21 जून को रिटायर होने वाले सदस्यों के स्थान भरे जाएंगे। राजस्थान विधानसभा की वर्तमान संख्या बल के अनुसार भाजपा दो सीटें आराम से जीत सकती है, जबकि तीसरी सीट पर अंतरात्मा (क्रॉस वोटिंग) का खेल खेलने की रणनीति बना रही है।</p>
<p>भाजपा ने तीनों सीटों के लिए पैनल तैयार कर लिया है, जिसमें केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, सतीश पूनिया, राजेंद्र राठौड़, अलका गुर्जर जैसे नाम चर्चा में हैं। प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ जल्द दिल्ली जाकर केंद्रीय नेतृत्व से अंतिम फैसला लेंगे। कांग्रेस की ओर से भी तैयारियां चल रही हैं। पार्टी अपनी एक सीट बचाने की कोशिश में है, लेकिन संख्या बल के कारण चुनौतीपूर्ण स्थिति है। नीरज डांगी जैसी मौजूदा सदस्यता और आंतरिक चर्चाओं के बीच उम्मीदवार चयन पर मंथन जारी है।राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह चुनाव केवल सीटों का नहीं, बल्कि दोनों प्रमुख दलों की रणनीति और अनुशासन का भी परीक्षण होगा। क्रॉस वोटिंग की आशंका के बीच पार्टियां अपने विधायकों पर कड़ी नजर रख रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 14:53:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>तमिलनाडु में मंत्रिमंडल विस्तार : कांग्रेस की 59 साल बाद सत्ता में वापसी, जानें कितने विधायक बने मंत्री</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने अपनी 10 दिन पुरानी कैबिनेट का विस्तार करते हुए 23 नए मंत्रियों को शामिल किया है। इसके साथ ही कांग्रेस के दो विधायकों के मंत्री बनने से राज्य में 59 साल बाद कांग्रेस की सत्ता में वापसी हुई है और तमिलनाडु के इतिहास में पहली बार गठबंधन सरकार का गठन हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/tamil-nadu-gets-first-coalition-government-cm-vijay-expands-cabinet/article-154529"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/cm-vijay.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में एक ऐतिहासिक घटनाक्रम के तहत मुख्यमंत्री एवं टीवीके संस्थापक सी. जोसेफ विजय ने गुरुवार को अपने 10 दिन पुराने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए नये सहयोगी कांग्रेस को इसमें शामिल किया। इसके साथ ही राज्य में 59 वर्ष बाद कांग्रेस की सत्ता में वापसी हुई और तमिलनाडु में पहली बार गठबंधन सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त हुआ, जिससे द्रविड़ राजनीति के इस गढ़ में लंबे समय से चली आ रही एकदलीय शासन व्यवस्था का अंत हो गया।</p>
<p>तमिलनाडु में गठबंधन युग की शुरुआत विजय के उस चुनावी वादे की भी पूर्ति मानी जा रही है, जिसमें उन्होंने सहयोगी दलों के साथ सत्ता साझा करने की बात कही थी। इसे राज्य के राजनीतिक इतिहास में चुनाव बाद हुए पहले बड़े राजनीतिक पुनर्संयोजन के रूप में भी देखा जा रहा है। सीएम विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के 10 दिन बाद अपने नौ मंत्रियों वाले मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए 23 नये मंत्रियों को शामिल किया, जिनमें कांग्रेस के दो और सत्तारूढ़ टीवीके के 21 विधायक शामिल हैं। राज्यपाल आर. वी. आर्लेकर ने लोक भवन में आयोजित समारोह में उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।</p>
<p>शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत वंदे मातरम्, राष्ट्रगान और तमिल थाई वाझ्तु से हुई। इससे पहले राज्यपाल ने मुख्यमंत्री की सिफारिश पर 23 विधायकों को मंत्रिपरिषद में शामिल करने को मंजूरी दी। नये मंत्रियों में तीन महिला मंत्री भी शामिल हैं, जिससे मंत्रिमंडल में महिला मंत्रियों की संख्या बढ़कर चार हो गयी है और कुल मंत्रियों की संख्या 33 हो गयी है। नवनियुक्त मंत्रियों के विभागों की घोषणा शीघ्र किये जाने की संभावना है।</p>
<p>कांग्रेस के दो मंत्रियों में विधायक दल के नेता एस. राजेश कुमार तथा पी. विश्वनाथन शामिल हैं। किलियूर से निर्वाचित राजेश कुमार और मदुरै जिले की मेलूर सीट से जीते विश्वनाथन के मंत्रिमंडल में शामिल होने के साथ ही कांग्रेस का लगभग छह दशक लंबा इंतजार समाप्त हो गया। वर्ष 1967 में के. कामराज और एम. भक्तवत्सलम सरकार की पराजय के बाद राज्य में कांग्रेस शासन समाप्त हो गया था। लोकसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक मणिकम टैगोर ने कहा कि कांग्रेस के विधायकों का मंत्रिमंडल में शामिल होना पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि के दिन होना महज संयोग नहीं है।</p>
<p>वर्ष 1967 में द्रविड़ राजनीति के उदय के बाद अगले 59 वर्षों तक द्रमुक और अन्नाद्रमुक ने बारी-बारी से राज्य पर शासन किया। वर्ष 2026 में नयी गठित टीवीके ने इस लंबे द्रविड़ वर्चस्व को समाप्त करते हुए सत्ता हासिल की और राज्य में पहली गठबंधन सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त किया। गठबंधन सरकार की अवधारणा द्रमुक और अन्नाद्रमुक दोनों के लिए लंबे समय तक अस्वीकार्य रही थी। वर्ष 2006 में द्रमुक बहुमत से दूर रहकर भी कांग्रेस और अन्य सहयोगियों के बाहरी समर्थन से सरकार चलाने में सफल रही थी, लेकिन कांग्रेस तब सत्ता में साझेदारी नहीं कर सकी थी। इस बार कांग्रेस ने विजय के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए मंत्रिमंडल में शामिल होकर लगभग 60 वर्ष पुराना सपना पूरा कर लिया। दो मंत्री पदों के अलावा कांग्रेस को राज्यसभा की एक सीट मिलने की भी संभावना है, जो विद्रोही अन्नाद्रमुक विधायक सी. वे. शण्मुगम के इस्तीफे से रिक्त हुई है।</p>
<p>पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 35वीं पुण्यतिथि के अवसर पर कांग्रेस नेताओं ने पहले तमिलनाडु कांग्रेस मुख्यालय और श्रीपेरंबदूर स्थित उनकी समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की और बाद में शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए। सूत्रों के अनुसार, विजय सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) और विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके) के एक-एक विधायक को भी मंत्रिमंडल में शामिल किये जाने की संभावना है। दोनों दलों ने हालांकि अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया है। सी. वे. शण्मुगम, एस. पी. वेलुमणि और सी. विजयभास्कर के नेतृत्व वाले अन्नाद्रमुक के विद्रोही गुट को मंत्रिमंडल विस्तार में कोई प्रतिनिधित्व नहीं मिला। वाम दलों और वीसीके ने उनके शामिल किये जाने का विरोध किया था।</p>
<p>सीएम विजय की पार्टी टीवीके ने विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीती थीं, जिनमें से एक सीट से विजय के इस्तीफे के बाद उसकी संख्या 107 रह गयी। कांग्रेस के पांच, माकपा, भाकपा और वीसीके के दो-दो विधायकों के समर्थन से सरकार ने 118 के बहुमत का आंकड़ा हासिल कर विश्वास मत जीत लिया। मंत्रिपरिषद में शामिल किये गये 23 नये चेहरों में श्रीनाथ, कमली एस., सी. विजयलक्ष्मी, आर. वी. रंजीतकुमार, विनोत, राजीव, बी. राजकुमार, वी. गांधीराज, मधन राजा, जेगदेश्वरी, एस. राजेश कुमार, एम. विजय बालाजी, लोगेश तमिलसेलवन, विजय तमिलन पार्थिबन, रमेश, पी. विश्वनाथन, आर. कुमार, के. थेन्नारसु, वी. संपत कुमार, मोहम्मद फारवस, डी. शरतकुमार, एन. मेरी विल्सन और विग्नेश के. शामिल हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 13:08:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>तमिलनाडु सरकार गठन पर सियासी घमासान: मणिकम टैगोर का पलटवार ; बोले-कांग्रेस ने टीवीके को दिया था समर्थन, विपक्ष कर रहा गठबंधन तोड़ने और एकता कमज़ोर करने की कोशिश</title>
                                    <description><![CDATA[तमिलनाडु की राजनीति में कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने द्रमुक (DMK) के आरोपों को खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने जनमत का सम्मान करते हुए विजय की पार्टी (TVK) को समर्थन दिया है। टैगोर ने इसे केंद्र विरोधी ताकतों की एकजुटता और स्थिर सरकार के लिए जरूरी कदम बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/political-tussle-over-tamil-nadu-government-formation-manickam-tagore-countered/article-153155"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/congress1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच कांग्रेस पर लगाये जा रहे आरोपों का सांसद मणिकम टैगोर ने पलटवार करते हुए कहा कि द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) और कुछ मीडिया समूह कांग्रेस पर गठबंधन तोड़ने और विपक्षी एकता कमजोर करने का गलत आरोप लगा रहे हैं। टैगोर ने कहा कि अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन वह बहुमत के जादुई आंकड़े 118 से दूर है और कांग्रेस ने उसे समर्थन देने की घोषणा की है। उन्होंने कांग्रेस के इस फैसले का बचाव किया और कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से बातचीत की थी और सार्वजनिक रूप से उनका समर्थन भी किया था।</p>
<p>उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने टीवीके का समर्थन जनता के जनादेश का सम्मान करने और स्थिर सरकार देने के लिए किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर "मीडिया" कांग्रेस को दोष दे रहा है, वहीं दूसरी ओर द्रमुक समर्थक मीडिया भी कांग्रेस पर निशाना साध रहा है। टैगोर कहा कि द्रमुक खुद अन्नाद्रमुक के साथ बातचीत कर रही है और यह सब केंद्र की शह पर हो रहा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या कांग्रेस राजग को सत्ता में आने में मदद करती?" उन्होंने यह भी कहा कि विजय की टीवीके शुरू से केंद्र सरकार विरोधी रही है और कांग्रेस ने उसी राजनीतिक सोच के साथ उसका समर्थन किया है। कांग्रेस को अपने फैसले पर कोई पछतावा नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 18:35:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>डी.के. शिवकुमार का राज्यपाल पर निशाना, बोले- वाजपेयी को मौका मिल सकता है, तो टीवीके को क्यों नहीं ? </title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने तमिलनाडु में TVK को सरकार बनाने का मौका न देने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण देते हुए कहा कि बहुमत का फैसला केवल सदन में होना चाहिए। उन्होंने राज्यपाल से लोकतांत्रिक सिद्धांतों का पालन करते हुए सबसे बड़ी पार्टी को अवसर देने की अपील की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/on-reports-of-not-being-given-a-chance-to-form/article-153139"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/tvk1.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शुक्रवार को तमिलनाडु में टीवीके को सरकार बनाने का अवसर न दिए जाने की रिपोर्टाें पर सवाल उठाते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण देते हुए कहा कि बहुमत की परीक्षा केवल सदन में ही होनी चाहिए। शिवकुमार ने तमिलनाडु के राज्यपाल द्वारा बहुमत साबित करने के प्रयास के बावजूद टीवीके को दावा पेश करने के लिए आमंत्रित करने से कथित रूप से मना करने की आलोचना करते हुए पूछा,"क्या वाजपेयी को मौका नहीं मिला था?"</p>
<p>विधानसभा में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि संवैधानिक प्रथा और लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुसार सबसे बड़ी पार्टी या गठबंधन को सरकार बनाने एवं विश्वास मत प्राप्त करने का अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "राज्यपाल को सरकार बनाने की अनुमति देनी चाहिए। कर्नाटक में भी बी एस येदियुरप्पा को सरकार बनाने की अनुमति दी गई थी। अधिक संख्या वाली पार्टियों को हमेशा अपना बहुमत साबित करने का मौका दिया जाता रहा है।"</p>
<p>डी.के. शिवकुमार ने अतीत के उदाहरणों से तुलना करते हुए कहा कि पूर्व राष्ट्रपति के.आर. नारायणन और ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने भी इसी तरह लोकतांत्रिक परंपरा का पालन करते हुए पहले सरकारों के गठन की अनुमति दी और बाद में संसद में उनका परीक्षण किया। उन्होंने कहा, "बहुमत एक वोट से भी प्राप्त किया जा सकता है या गंवाया जा सकता है। क्या वाजपेयी के मामले में ऐसा नहीं हुआ? सबसे पहले, बहुमत साबित करने का अवसर दिया जाना चाहिए। अगर संख्या पर्याप्त नहीं होती है तो अगले विकल्प पर विचार किया जा सकता है।"</p>
<p>राज्यपाल की कथित कार्रवाई को गलत बताते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की जनता की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, "यह लोकतंत्र है। सदन में ही यह तय होना चाहिए कि किसके पास बहुमत है।" एक अन्य मुद्दे पर, डी.के. शिवकुमार ने कहा कि सरकार प्रस्तावित बेंगलुरु नॉर्थ कॉर्पोरेशन कार्यालय के लिए तीन से चार स्थानों पर विचार कर रही है और स्थलों के निरीक्षण के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गांधी कृषि विज्ञान केंद्र फिलहाल इस परियोजना के लिए विचाराधीन नहीं है। कांग्रेस नेताओं सतीश जार की होली और लक्ष्मी हेब्बलकर के साथ अपनी हालिया मुलाकात की बात करते हुए उन्होंने कहा कि चर्चा बेलगावी जिले में सिंचाई परियोजनाओं से संबंधित थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 15:55:00 +0530</pubDate>
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                <title>तमिलनाडु में सत्ता बनने पर संशय: टीवीके बहुमत के लिए प्रयासरत, कांग्रेस के समर्थन से टीवीके को मिला बूस्टर</title>
                                    <description><![CDATA[अभिनेता विजय की पार्टी TVK ने तमिलनाडु की राजनीति में धमाकेदार दस्तक दी है। बहुमत से कुछ कदम दूर विजय का 'पावर शेयरिंग' फॉर्मूला मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ, जिससे कांग्रेस ने 10 साल पुराना द्रमुक का साथ छोड़ TVK से हाथ मिला लिया। 60 साल बाद राज्य में पहली बार गठबंधन सरकार बनने जा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/doubt-over-coming-to-power-in-tamil-nadu-for-the/article-152993"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/tvk-3.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। नवगठित पार्टी 'तमिलगा वेत्री कषगम' (टीवीके) के संस्थापक विजय ने जब तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले यह दांव चला था कि उनकी पार्टी गठबंधन और सत्ता में हिस्सेदारी के लिए तैयार है, तो किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और उन्हें अनुभवहीन राजनीतिज्ञ मानकर खारिज कर दिया था। लेकिन चुनावी नतीजों ने सभी एग्जिट पोल के अनुमानों को गलत साबित कर दिया और उन्होंने राजनीतिक पटल पर धमाकेदार दस्तक दी। अभिनेता विजय की पार्टी ने हालांकि अपने दम पर सरकार बनाने के लिए साधारण बहुमत हासिल करने में विफल रही, जिससे तमिलनाडु के इतिहास में पहली बार गठबंधन सरकार बनने की उम्मीदें जग गयी हैं।</p>
<p>इस पृष्ठभूमि में, अभिनेता ने आवश्यक संख्या बल जुटाने के लिए कांग्रेस, विदुथलाई चिरुथैगल काची (वीसीके) और वामपंथी दलों से संपर्क साधा। इस परिदृश्य में, सत्ता के बंटवारे का उनका चुनाव-पूर्व दांव 'मास्टरस्ट्रोक' साबित हुआ। चुनावी नतीजों की घोषणा के मात्र दो दिन बाद ही कांग्रेस ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के साथ अपना 10 साल पुराना गठबंधन अचानक खत्म कर दिया और टीवीके के साथ हाथ मिला लिया। कांग्रेस ने अपने पांच नवनिर्वाचित विधायकों का समर्थन पत्र सौंप दिया है, ताकि सांप्रदायिक ताकतों को दूर रखने के लिए एक धर्मनिरपेक्ष सरकार बनायी जा सके। साथ ही, कांग्रेस ने भविष्य के चुनावों, 2029 के लोकसभा चुनाव और स्थानीय निकाय चुनावों, तक इस रिश्ते को जारी रखने की प्रतिबद्धता जतायी है।</p>
<p>कांग्रेस के पांच विधायकों के समर्थन ने न केवल टीवीके के लिए 'बूस्टर' का काम किया है, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति के इतिहास में पहली बार चुनाव के बाद पुनर्गठन को भी जन्म दिया है। यह अवधारणा 2006 में भी नहीं देखी गयी थी, जब द्रमुक बहुमत पाने में विफल रही थी, लेकिन कांग्रेस और अन्य सहयोगियों के बाहरी समर्थन से पांच साल का कार्यकाल पूरा किया था। उस समय कांग्रेस द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा थी, इसलिए चुनाव बाद गठबंधन का सवाल ही नहीं उठा था।</p>
<p>दो दशक बाद लेकिन अब परिदृश्य अलग है और राष्ट्रीय पार्टी ने पहल करते हुए विजय के साथ गठबंधन किया है, जिससे हार से जूझ रही द्रमुक खेमे में भारी नाराजगी है। इसी राह पर चलते हुए थोल थिरुमावलवन की वीसीके और दो वामपंथी दलों भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के भी ऐसा ही निर्णय लेने की उम्मीद है, जिससे द्रमुक मोर्चे में और अधिक बिखराव हो सकता है। हालांकि, अंतिम फैसला शुक्रवार तक पता चलने की उम्मीद है।</p>
<p>कांग्रेस, जो 2016 के विधानसभा चुनाव से द्रमुक के साथ गठबंधन में थी, उसने इस चुनाव के लिए टीवीके के साथ गठबंधन करने में रुचि दिखायी थी, विशेष रूप से विजय के सत्ता में हिस्सेदारी के खुले प्रस्ताव के संदर्भ में। चीजें तब उम्मीद के मुताबिक नहीं रहीं और राष्ट्रीय पार्टी अधिक सीटों और दो राज्यसभा सीटों की मांग पूरी न होने पर भी अनिच्छा से द्रमुक के साथ ही टिकी रही थी। कड़ी सौदेबाजी के बाद कांग्रेस ने 2021 में लड़ी गई 25 सीटों के मुकाबले 39 की मांग की थी, लेकिन अंत में द्रमुक के 28 सीटों और एक राज्यसभा सीट के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था। द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन ने गठबंधन के अन्य दलों को भी कम सीटों पर राजी करने के लिए काफी दबाव झेला था। स्टालिन ने इस कठिन दौर को कुशलता से संभाला और सहयोगियों को यह कहकर मनाया कि गठबंधन में नये दलों को जगह देनी है।</p>
<p>द्रमुक गठबंधन के इन दलों ने शुरुआत में विजय के सत्ता साझा करने के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था और द्रविड़ प्रमुख के साथ चुनाव लड़ा। यह गठबंधन 2017 से लगातार चुनाव जीत रहा था, लेकिन इस बार टीवीके की लहर में उसे अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा।<br />विजय के पक्ष में लहर ऐसी थी कि तमिलनाडु में पहली बार त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति बनी। टीवीके न केवल सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, बल्कि उसने दोनों प्रमुख दलों के वोट बैंक में बड़ी सेंध लगायी। यहां तक कि श्री स्टालिन खुद अपने गढ़ कोलाथुर सीट से हार गये, जहां से वे पिछले तीन बार से लगातार जीत रहे थे।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत है और टीवीके इस आंकड़े से 11 सीटें दूर रह गई। ऐसे में विजय ने कांग्रेस, वीसीके और वामपंथी दलों तक पहुंच बनाई। कांग्रेस ने 'अवसर का लाभ उठाते हुए' तुरंत टीवीके को समर्थन दे दिया, जिससे 1967 के बाद पहली बार उसे राज्य मंत्रिमंडल में जगह मिलना तय हो गया है। वीसीके और वामपंथी दलों के पास कुल छह विधायक हैं, और उनके भी पाला बदलने की प्रबल संभावना है।</p>
<p>तकनीकी रूप से टीवीके के पास 107 विधायक हैं, क्योंकि विजय ने दो सीटों पर जीत हासिल की है। ऐसे में उन्हें 11 और विधायकों की जरूरत है। कांग्रेस के पांच विधायकों के बाद अब सबकी नजरें वीसीके और वामपंथी दलों पर टिकी हैं। इसी बीच, टीवीके द्वारा अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) से संपर्क की खबरें भी आईं, जिसके पास 47 विधायक हैं। अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ नेता के पी मुनुसामी ने हालांकि इन खबरों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि एडप्पादी के पलानीस्वामी की सहमति से वे यह कह रहे हैं कि पार्टी विजय को कोई समर्थन नहीं देगी। अब देखना यह होगा कि क्या यह पहला चुनाव बाद का पुनर्गठन और गठबंधन शासन तमिलनाडु की राजनीति में एक नया चलन बनेगा और भविष्य के चुनावों में भी कायम रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 15:55:45 +0530</pubDate>
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                <title>थाईलैंड के कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविराकुल ने किया चुनाव जीतने का ऐलान, भारी बहुतम हासिल करने का दावा</title>
                                    <description><![CDATA[थाईलैंड के संसदीय चुनाव में भुमजैथाई पार्टी ने बहुमत हासिल करने का दावा किया, पीपल्स पार्टी दूसरे और फ्यू थाई पार्टी तीसरे स्थान पर रही।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/acting-prime-minister-of-thailand-anutin-charnvirakul-announced-victory-in/article-142519"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(22).png" alt=""></a><br /><p>बैंकॉक। थाईलैंड के कार्यवाहक प्रधानमंत्री और भुमजैथाई पार्टी के नेता अनुतिन चर्नविराकुल ने कहा है कि उनकी पार्टी ने थाईलैंड के संसदीय चुनाव जीत लिये हैं। चर्नविराकुल ने रविवार को एक संवाददाता सम्मेलन में यह घोषणा करते हुए कहा कि यह पूरे देश की जीत है। चुनाव आयोग द्वारा 87 प्रतिशत बैलेट गिने जाने तक भुमजैथाई पार्टी ने बहुमत हासिल कर ली। पीपल्स पार्टी दूसरे स्थान पर रही जबकि फ्यू थाई पार्टी तीसरे स्थान पर रही।</p>
<p>इससे पूर्व, पीपल्स पार्टी के नेता नत्ताफोंग रुंगपान्यावुत ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि उनकी पार्टी चुनावी नतीजों को स्वीकार करती है और जनमत को चुनौती देने के लिये गठबंधन नहीं बनाएगी। अगर भुमजैथाई पार्टी थाईलैंड में सरकारी बनाती है, तो पीपल्स पार्टी विपक्ष में बैठने के लिये तैयार है। </p>
<p>इस बीच, थाईलैंड डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता अभिसित वेज्जाजिवा ने भी कहा कि वह जनादेश के बाद विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। फ्यू थाई पार्टी के नेता जुलापुन अमोर्नविवात ने कहा कि उनकी पार्टी जनादेश का सम्मान करती है और किसी भी भूमिका में लोगों की भलाई के लिए काम करना जारी रखेगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 18:30:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>जापान : प्रधानमंत्री ताकाइची ने संसद भंग की, आठ फरवरी को होंगे चुनाव</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने संसद भंग कर 8 फरवरी को मध्यावधि चुनाव की घोषणा की, लोकप्रियता के सहारे जनादेश लेने की कोशिश, बजट मंजूरी टलने की आशंका।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/japan-prime-minister-takaichi-dissolves-parliament-elections-to-be-held/article-140654"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(21).png" alt=""></a><br /><p>टोक्यो। जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने पदभार संभालने के केवल तीन महीने बाद शुक्रवार को संसद के निचले सदन 'डाइट' को भंग कर दिया है, जिससे आगामी आठ फरवरी को होने वाले मध्यावधि चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। ताकाइची ने यह कदम अपनी वर्तमान लोकप्रियता का लाभ उठाने और हाल के वर्षों में अपनी पार्टी को हुए नुकसान की भरपाई करने के उद्देश्य से उठाया है। हालांकि, इस फैसले के कारण अर्थव्यवस्था को गति देने और बढ़ती कीमतों से निपटने के लिए तैयार किए गए महत्वपूर्ण बजट को मंजूरी मिलने में देरी होने की संभावना है। सदन भंग होने की घोषणा के बाद सांसदों ने पारंपरिक 'बान्जाई' के नारे लगाए और चुनाव अभियान की तैयारियों में जुट गए।</p>
<p>अक्टूबर में जापान की पहली महिला नेता के रूप में निर्वाचित होने वाली ताकाइची की लोकप्रियता रेटिंग लगभग 70 प्रतिशत के मजबूत स्तर पर बनी हुई है। हालांकि, उनकी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) अभी भी भ्रष्टाचार के आरोपों और यूनिफिकेशन चर्च के साथ पुराने संबंधों के कारण चुनौतियों का सामना कर रही है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि वह अपनी राजनीतिक साख दांव पर लगा रही हैं और अब जनता को यह तय करना है कि उन्हें पद पर बने रहना चाहिए या नहीं। वह अपने पूर्ववर्ती शिगेरु इशिबा की तुलना में अधिक कट्टर रूढि़वादी रुख अपना रही हैं और सैन्य मजबूती तथा सख्त आप्रवासन नीतियों पर जोर दे रही हैं।</p>
<p>ताकाइची ने दक्षिणपंथी 'जापान इनोवेशन पार्टी (जेआईपी) के साथ मिलकर एक नया गठबंधन बनाया है। यह बदलाव तब आया जब एलडीपी की पुरानी सहयोगी कोमेइतो पार्टी ने वैचारिक मतभेदों के कारण गठबंधन तोड़ दिया था। नए गठबंधन के तहत ताकाइची केवल पुरुषों के शाही उत्तराधिकार और परमाणु रिएक्टरों को फिर से शुरू करने जैसे लक्ष्यों पर आगे बढ़ रही हैं। दूसरी ओर, कोमेइतो ने विपक्षी कांस्टीट्यूशनल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ जापान के साथ मिलकर 'सेंट्रिस्ट रिफॉर्म एलायंस' का गठन किया है। पूर्व प्रधानमंत्री योशिहिको नोडा ने इस नए गठबंधन को समावेशी राजनीति और लोग पहले की नीति का एक अवसर बताया है।</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ताकाइची के ताइवान समर्थक बयानों के बाद चीन के साथ जापान के संबंधों में तनाव बढ़ गया है, जिससे चीन ने आर्थिक और राजनयिक जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। इसके साथ ही, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी जापान पर अपनी रक्षा क्षमताओं पर अधिक खर्च करने के लिए दबाव बना रहे हैं। </p>
<p>ताकाइची का मानना है कि उन्हें अपनी नीतियों को लागू करने के लिए जनता के स्पष्ट जनादेश की आवश्यकता है। अब 12 दिनों का आधिकारिक चुनाव अभियान अगले मंगलवार से शुरू होगा, जिसमें ताकाइची अपनी निर्णायक छवि के दम पर बहुमत हासिल करने की कोशिश करेंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Jan 2026 18:47:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>शरद पवार के साथ गठबंधन के बीच एनसीपी नेता का बड़ा बयान, हम महायुति के साथ रहेंगे : प्रफुल्ल</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई में एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने साफ किया कि अजित पवार गुट महाराष्ट्र और केंद्र में बीजेपी-नेतृत्व वाली महायुति के साथ रहेगा, पार्टी के एकीकरण की अटकलें खारिज कीं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/ncp-leaders-big-statement-amid-alliance-with-sharad-pawar-we/article-139399"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/ncp.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। पवार फैमिली की एकजुटता और पार्टी के एकीकरण की खबरों के बीच अजित पवार की एनसीपी के नेता प्रफुल्ल पटेल ने बड़ा बयान दिया है। रविवार को एनसीपी के सांसद प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि उनकी पार्टी महाराष्ट्र में बीजेपी के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन के साथ रहेगी। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अजित पवार ने पुणे, पिंपरी चिंचवड़ और परभणी के नगर निगम चुनाव में शरद पवार की एनसीपी से गठबंधन किया है।</p>
<p>महायुति को लेकर दिया बयान: महाराष्ट्र निकाय चुनाव में एनसीपी कई नगर निगमों में बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़ रही है। बीएमसी में वह महायुति के गठबंधन से बाहर है और उसने अपने कैंडिडेट उतारे हैं। सियासी गलियारों में एनसीपी के दोनों धड़ों के एक होने की चर्चा भी चल रही है। खुद अजित पवार ने एक इंटरव्यू में इसके संकेत दिए थे। अब प्रफुल्ल पटेल ने महायुति को लेकर बयान दिया है।</p>
<p><strong>एनसीपी भविष्य में भी महायुति में ही रहेगी</strong></p>
<p>राज्यसभा सांसद ने कहा कि जहां तक केंद्र सरकार और महाराष्ट्र विधानसभा का सवाल है, हम महायुति में हैं। एनसीपी भविष्य में भी महायुति में ही रहेगी। महाराष्ट्र में हम सीएम देवेंद्र फडणवीस और दिल्ली में (प्रधानमंत्री) नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में के नेतृत्व में काम करेंगे। उन्होंने पार्टी के विरोधी गुटों के बीच किसी भी बड़े सुलह की अटकलों को खारिज कर दिया।</p>
<p><strong>गठबंधन बदलने वाला नहीं</strong></p>
<p>जब उनसे पूछा गया कि क्या शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) की नेता सुप्रिया सुले भी भविष्य में उनके साथ शामिल हो सकती हैं? प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि मैं आपको कुछ भी काल्पनिक नहीं बताऊंगा। लेकिन आज की सच्चाई यह है कि हम अलग हैं। हमारी पार्टी एनडीए में है। कई बार हम देखते हैं कि एनसीपी-एसपी के बयान नरेंद्र मोदी या आज की सरकार के साथ मेल नहीं खाते हैं। और जब ऐसा नहीं है, तो उनसे बात करने का कोई सवाल ही नहीं उठता। क्योंकि हमारा गठबंधन बदलने वाला नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Jan 2026 11:32:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>नागालैंड में गठबंधन की स्पष्ट सरकार </title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस पार्टी पांच साल पहले पिछले नागालैंड विधानसभा चुनावों में अपना खाता खोलने में विफल रही थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/govt-of-coalition-in-the-nagaland/article-38825"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/4654654653.jpg" alt=""></a><br /><p>कोहिमा। नागालैंड में नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (एनडीपीपी)-भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) गठबंधन 60 सदस्यीय विधानसभा में मतगणना के साथ स्पष्ट सरकार बनाने की राह पर अग्रसर है। चुनाव आयोग के मुताबिक जहां भाजपा सात सीटों पर जीत हासिल कर चुकी है। उसकी सहयोगी एनडीपीपी ने 12 सीटें जीती हैं। भाजपा-एनडीपीपी गठबंधन बहरहाल 36 सीटों पर जीत या आगे चल रहा है। रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया ने दो सीटों पर चुनाव लड़ा था और उसने दोनों सीटों पर जीत हासिल कर ली है। तीन सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में आयी है और एक सीट पर आगे चल रहे हैं। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के उम्मीदवारों ने एक सीट पर जीत हासिल की है और अन्य दो पर आगे चल रहे हैं। आयोग के मुताबिक नागा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) ने एक सीट पर जीत हासिल की है और अन्य एक सीट पर आगे चल रही है, जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) दो सीट पर विजयी हुई है और पांच सीटों पर आगे चल रही है। नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) ने तीन सीटें जीती हैं और वह दो सीटों पर आगे चल रही है। इसके अलावा जनता दल (यूनाइटेड) लगातार एक सीट पर बढ़त बनाए हुए हैं।</p>
<p>कांग्रेस पार्टी पांच साल पहले पिछले नागालैंड विधानसभा चुनावों में अपना खाता खोलने में विफल रही थी। यह पार्टी अभी भी किसी भी निर्वाचन क्षेत्र से न तो सीट जीत सकी है और न बढ़त हासिल करने की स्थिति में है, जिससे कांग्रेस को राज्य में कहीं भी आधार नजर नहीं आ रहा है। नागालैंड विधानसभा की 59 सीटों के लिए 27 फरवरी को मतदान हुआ था। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Mar 2023 18:12:26 +0530</pubDate>
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