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                <title>coalition - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>'छात्रों की गूंज' से सरकार को घेरेंगे राहुल गांधी, छात्रों-युवाओं से जुड़ने की अपील</title>
                                    <description><![CDATA[विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 'छात्रों की गूंज' अभियान की शुरुआत की है। उन्होंने युवाओं से पेपर लीक, महंगी फीस और रोजगार के खिलाफ इस मुहिम से जुड़ने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि छात्र ऑनलाइन याचिका पर हस्ताक्षर कर अपने सपनों को बचाने के लिए आवाज बुलंद करें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/rahul-gandhi-will-surround-the-government-with-the-echo-of/article-157332"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/rahul2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने छात्रों और युवाओं से उनके 'छात्रों की गूंज' अभियान से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा है कि यह पहल सस्ती शिक्षा, निष्पक्ष परीक्षा और सम्मानजनक रोजगार की मांग को सरकार तक पहुंचाने का माध्यम है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक संदेश में गुरुवार को कहा कि यदि किसी छात्र ने पेपर लीक, परीक्षा में धांधली या महंगी फीस का दर्द झेला है और यदि मौजूदा व्यवस्था ने उसके सपनों को तोड़ा है, तो 'छात्रों की गूंज' उसकी आवाज है। उनका कहना है कि यह केवल एक अभियान नहीं, बल्कि छात्रों और युवाओं की मांगों को सरकार तक पहुंचाने का जरिया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि छात्र और युवा अभियान से जुड़कर अपने सुझाव दे सकते हैं तथा ऑनलाइन याचिका पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस अभियान से जुड़ने वाला प्रत्येक हस्ताक्षर इस लड़ाई को ताकत देगा और जितने अधिक लोग इससे जुड़ेंगे, उतनी ही बुलंद आवाज उठेगी। कांग्रेस नेता ने बुधवार को राजस्थान के कोटा से 'छात्रों की गूंज' अभियान की शुरुआत की जिसके जरिए उनकी पार्टी द्वारा शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और रोजगार जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 13:20:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>विधानसभा चुनाव से पहले जयंत चौधरी का मंथन आज: मेरठ-सहारनपुर के नेताओं संग करेंगे बैठक, बूथ कमेटियों के गठन पर चर्चा संभव</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय लोकदल (RLD) ने संगठन को मजबूत करना शुरू कर दिया है। पार्टी प्रमुख जयंत चौधरी आज दिल्ली में मेरठ और सहारनपुर मंडल के पदाधिकारियों के साथ चुनावी रणनीति और बूथ कमेटियों के गठन पर चर्चा करेंगे। सीटों के संभावित बंटवारे को लेकर भी पार्टी के भीतर मंथन जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/jayant-chaudharys-brainstorming-before-the-assembly-elections-today-he-will/article-157311"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(1)31.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले अब राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) ने भी संगठन को दुरुस्त करने की क़वायद शुरू कर दी है। इसी क्रम में रालोद के प्रमुख और केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी आज दिल्ली में पार्टी पदाधिकारियों की अहम बैठक लेंगे। सूत्रों की मानें तो बैठक में बूथ कमेटियों के गठन को लेकर चर्चा की जाएगी। यूपी विधानसभा चुनाव से पहले जयंत चौधरी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संगठन को मजबूत करने के लिए मंथन शुरू कर दिया है।</p>
<p>रालोद के सूत्रों ने बताया कि आज की बैठक में मेरठ और सहारनपुर मंडल के जिलाध्यक्ष शामिल होंगे। इसके साथ ही पार्टी के सांसद, विधायक और सहयोगी संगठनों के पदाधिकारी भी बैठक में मौजूद रहेंगे। माना जा रहा है कि जयंत चौधरी इन दोनों मंडलों की सियासी जमीन को परखेंगे और चुनावी रणनीति पर चर्चा करेंगे। यूपी विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही आरएलडी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। जयंत चौधरी लगातार जमीनी नेताओं से फीडबैक ले रहे हैं। पश्चिमी यूपी को रालोद का गढ़ माना जाता है। ऐसे में पार्टी यहां कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में संगठन की मजबूती, बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की सक्रियता और स्थानीय मुद्दों पर भी चर्चा होगी। जयंत चौधरी को आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अपनी सीटों में बड़ी कटौती का सामना करना पड़ सकता है जिसको लेकर पार्टी के भीतर अभी से मंथन शुरू हो गया है।</p>
<p>दरअसल, 2022 के विधानसभा चुनाव में रालोद ने 33 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और आठ सीटें जीती थीं। जिन सीटों पर जीत मिली थी उनमें छपरौली, थाना भवन, बुढ़ाना, सिवालखास, मीरापुर, पुरकाजी (एससी), शामली और सदाबाद शामिल हैं। इस चुनाव में 19 सीटों पर पार्टी दूसरे नंबर पर रही लेकिन इन 33 में से 25 सीटों पर अब भाजपा के विधायक हैं, इसलिए रालोद अब उन सीटों पर दावा नहीं कर सकती।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 12:58:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>झारखंड राज्यसभा चुनाव: दो सीटों के लिए मतदान जारी, दूसरी सीट पर रोमांचक मुकाबला</title>
                                    <description><![CDATA[झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए गुरुवार सुबह 9 बजे से मतदान शुरू हो गया है। सभी 81 विधायक शाम 4 बजे तक अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। मैदान में तीन उम्मीदवार हैं, जिनमें झामुमो के बैजनाथ राम की जीत तय मानी जा रही है, जबकि दूसरी सीट के लिए मुकाबला दिलचस्प है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/jharkhand-rajya-sabha-elections-voting-continues-for-two-seats-exciting/article-157310"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/election-commission.png" alt=""></a><br /><p>रांची। झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए गुरुवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सुबह 9:00 बजे से मतदान शुरू हो गया। मतदान सुबह 9 बजे से विधानसभा के कमरा संख्या 042 स्थित न्यायाधिकरण हॉल में शुरू हुआ, जो शाम 4 बजे तक चलेगा। राज्य के सभी 81 विधायक अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। राज्यसभा चुनाव में तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के बैजनाथ राम, कांग्रेस के प्रणव झा और भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी शामिल हैं।</p>
<p>मतदान को लेकर विधानसभा परिसर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। राजनीतिक दलों की नजरें प्रत्येक विधायक के मतदान पर टिकी हुई हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने विधायकों को एकजुट बनाए रखने में जुटे हुए हैं। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार झामुमो उम्मीदवार बैजनाथ राम की जीत लगभग तय मानी जा रही है। वहीं दूसरी सीट के लिए मुकाबला दिलचस्प हो गया है। कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा और एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। अब मतदान समाप्त होने के बाद मतगणना और अंतिम परिणाम पर सभी की निगाहें टिकी हैं, जिससे यह साफ हो जाएगा कि झारखंड से राज्यसभा की दो सीटों पर कौन उम्मीदवार विजयी होकर संसद के उच्च सदन में पहुंचेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 12:05:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>गाज़ा शांति रोडमैप योजना : हमास ने फ़िलिस्तीनी गुटों का जवाब संयुक्त राष्ट्र को सौंपा, ट्रंप योजना पर दिया सकारात्मक जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[हमास और अन्य फिलिस्तीनी गुटों ने गाजा शांति रोडमैप पर अपनी संयुक्त प्रतिक्रिया संयुक्त राष्ट्र को सौंप दी है। काहिरा बैठक के बाद तैयार इस रुख में मानवीय सहायता, सैन्य कार्रवाई रोकने, इजरायली सेना की पूर्ण वापसी और गाजा पुनर्निर्माण को पहले चरण में पूरी तरह लागू करने की मांग की गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/gaza-peace-roadmap-plan-hamas-submits-response-to-palestinian-factions/article-157021"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(1)19.png" alt=""></a><br /><p>काहिरा। फिलिस्तीनी संगठन हमास ने कहा है कि उसने गाजा शांति रोडमैप योजना पर फिलिस्तीनी गुटों की संयुक्त प्रतिक्रिया संयुक्त राष्ट्र के पश्चिम एशिया शांति प्रक्रिया के विशेष समन्वयक निकोलाय म्लादेनोव को सौंप दी है। हमास ने यमन की मीडिया को जारी बयान में कहा कि पिछले सप्ताह काहिरा में मिस्र, कतर और तुर्की के मध्यस्थों की मौजूदगी में विभिन्न फिलिस्तीनी गुटों के साथ कई दौर की बैठकें हुईं। इन बैठकों के बाद एक साझा राष्ट्रीय रुख तैयार किया गया, जिसे एक दिन पहले औपचारिक रूप से पेश कर दिया गया।</p>
<p>हमास ने कहा कि फिलिस्तीनी गुटों ने इस रोडमैप को "जिम्मेदारी और सकारात्मक सोच" के साथ देखा है। संगठन के अनुसार सभी गुटों ने इस बात पर जोर दिया कि योजना के पहले चरण को पूरी तरह लागू किया जाए, खासकर मानवीय सहायता व्यवस्था और गाजा पट्टी में फिलिस्तीनी जनता के खिलाफ सभी प्रकार की सैन्य कार्रवाई रोकने के मामले में। बयान में कहा गया, "फिलिस्तीनी गुटों ने राष्ट्रपति ट्रंप की योजना के दूसरे चरण को लागू करने संबंधी रोडमैप पर गंभीरता और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ विचार किया। उन्होंने पहले चरण के सभी प्रावधानों को पूरी तरह लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया, विशेष रूप से मानवीय सहायता और गाजा में सभी तरह की आक्रामक कार्रवाइयों को समाप्त करने के मुद्दे पर।"</p>
<p>हमास ने कहा कि गुटों ने रोडमैप में शामिल अन्य बिंदुओं पर भी अमल की मांग की है। इनमें प्रशासनिक समिति की तैनाती, गाजा से इजरायली सेना की पूर्ण वापसी और पुनर्निर्माण प्रक्रिया शामिल है। बयान में कहा गया, "फिलिस्तीनी गुटों ने इस बात पर भी जोर दिया कि रोडमैप में उल्लिखित प्रशासनिक समिति के प्रवेश, गाजा पट्टी से पूर्ण इजरायली वापसी और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को लागू किया जाए, ताकि फिलिस्तीनी जनता अपने राज्य की स्थापना और आत्मनिर्णय के अधिकार के लक्ष्य को हासिल कर सके।"</p>
<p>हमास ने बताया कि उसका प्रतिनिधिमंडल काहिरा में मध्यस्थों और अन्य फिलिस्तीनी गुटों के साथ आगे भी बैठकें जारी रखेगा, ताकि सहमति वाले बिंदुओं को लागू करने की दिशा में प्रगति हो सके। उल्लेखनीय है कि निकोलाय म्लादेनोव ने मई में "राष्ट्रपति ट्रंप की व्यापक गाजा शांति योजना के पूर्ण क्रियान्वयन के लिए रोडमैप" सार्वजनिक किया था। 15 बिंदुओं वाली इस योजना में सुरक्षा व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल की तैनाती, इजरायली सैनिकों की वापसी और युद्ध के बाद पुनर्निर्माण जैसे मुद्दे शामिल हैं। अक्टूबर 2025 से लागू युद्धविराम समझौते के तहत शुरुआती चरण में कैदियों की अदला-बदली, गाजा में मानवीय सहायता की आपूर्ति और कुछ इलाकों से इजरायली सैनिकों की आंशिक वापसी शामिल थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 18:32:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अल्बानिया: स्केनबेर्ग चौक आंदोलन बना व्यापक सत्ता-विरोधी प्रदर्शन, पीएम एदी रामा के इस्तीफे की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[अल्बानिया की राजधानी तिराना में जैरेड कुशनर की पर्यटन परियोजना के खिलाफ शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब बड़े राजनीतिक आंदोलन में बदल गया है। लगातार 10वें दिन सड़कों पर उतरे हजारों प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री एदी रामा के इस्तीफे की मांग की और सत्तापक्ष व विपक्ष दोनों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/albania-sch%C3%B6nberg-square-movement-becomes-massive-anti-establishment-protest-demanding-pm/article-156696"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/अलबनिया.png" alt=""></a><br /><p>तिराना। यूरोपीय देश अल्बानिया में एक संरक्षित तटीय क्षेत्र में प्रस्तावित पर्यटन विकास परियोजना के विरोध से शुरू हुआ आंदोलन अब एक व्यापक सत्ता-विरोधी आंदोलन में बदल चुका है। बुधवार रात राजधानी तिराना में लगातार 10वें दिन हजारों लोग सड़कों पर उतरे और प्रधानमंत्री एदी रामा के इस्तीफे की मांग की। रिपोर्ट के अनुसार प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार और मुख्य विपक्षी दल दोनों ही देश की राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों का समाधान करने में पूरी तरह विफल रहे हैं।</p>
<p>राजधानी तिराना के स्केनबेर्ग चौक पर भारी संख्या में प्रदर्शनकारी एकत्र हुए और वहां से संसद भवन की ओर मार्च किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने ‘रामा जेल में, बेरीशा जेल में’ के नारे लगाये। यहां ‘बेरीशा’ का संदर्भ पूर्व प्रधानमंत्री और वर्तमान में ‘डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ अल्बानिया’ के अध्यक्ष सालि बेरीशा से है, जिससे साफ है कि जनता सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों से नाराज है। यह विरोध प्रदर्शन मूल रूप से पीशे पोरो क्षेत्र और साज़ान द्वीप पर एक प्रस्तावित पर्यटन विकास परियोजना के खिलाफ शुरू हुआ था। यह परियोजना अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जैरेड कुशनर से जुड़े एक उद्यम द्वारा एक संरक्षित तटीय क्षेत्र में निवेश से संबंधित है। </p>
<p>पर्यावरण और स्थानीय हितों को लेकर शुरू हुआ यह विरोध अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है, जो सरकार की विभिन्न नीतियों और कानूनों को चुनौती दे रहा है। आंदोलन के दसवें दिन आयोजकों ने इसे एक राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन का रूप दिया। प्रदर्शनकारी नेताओं ने देश और विदेशों में रहने वाले सभी अल्बानियाई लोगों से इस रैली में शामिल होने का आह्वान किया था। इस रैली को जानबूझकर ‘लीग ऑफ प्रिजरेन’ की स्थापना की वर्षगांठ के दिन आयोजित किया गया था, जो 19वीं सदी की एक ऐतिहासिक घटना है और अल्बानियाई राष्ट्रीय एकता का एक बड़ा प्रतीक मानी जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 18:30:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>टीएमसी का संकट गहराया : कल्याण बनर्जी ने ममता को दिया अल्टीमेटम, अभिषेक के कारण पार्टी छोड़ने की दी धमकी</title>
                                    <description><![CDATA[तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक कलह खुलकर सामने आ गई है। वरिष्ठ सांसद और वकील कल्याण बनर्जी ने ममता बनर्जी को सीधा अल्टीमेटम दिया है। कोर्ट केस से हटाए जाने से नाराज कल्याण ने कहा कि अभिषेक बनर्जी के रहते वे पार्टी में नहीं रहेंगे। उन्होंने अभिषेक पर अहंकार और पार्टी बर्बाद करने का आरोप लगाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/tmcs-crisis-deepens-kalyan-banerjee-gives-ultimatum-to-mamata-threatens/article-156700"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/kalyan.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। चौतरफा संकटों से घिरी तृणमूल कांग्रेस अब एक और परेशानी में घिर गयी जब पार्टी के वरिष्ठ सांसद और देश के जाने-माने वकील कल्याण बनर्जी ने गुरुवार को पार्टी सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सीधा अल्टीमेटम दे दिया है। कल्याण बनर्जी ने दो टूक शब्दों में कहा है कि अब 'दीदी' को उनके और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के बीच किसी एक को चुनना होगा। संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कल्याण बनर्जी ने बेहद तल्ख लहजे में कहा, "दीदी को मेरे और अभिषेक बनर्जी के बीच फैसला करना होगा।" जब उनसे पूछा गया कि क्या वे पार्टी छोड़ने का संकेत दे रहे हैं, तो वरिष्ठ वकील ने स्पष्ट किया, "अगर अभिषेक बनर्जी उसी पद और उसी ताकत के साथ पार्टी में बने रहते हैं, तो मैं तृणमूल कांग्रेस में नहीं रहूंगा।"</p>
<p>इस बड़े राजनीतिक टकराव की मुख्य वजह पश्चिम बंगाल विधानसभा में कथित 'हस्ताक्षर जालसाजी' विवाद से जुड़े एक मामले में कानूनी पैरवी को लेकर पैदा हुआ विवाद है। कल्याण बनर्जी ने बताया कि वे बुधवार को कलकत्ता हाई कोर्ट में अभिषेक बनर्जी की ओर से दायर एक याचिका पर कानूनी सुरक्षा की मांग करने के लिए पेश हुए थे। अदालत ने उस दिन मामला नहीं लिया और गुरुवार को सुनवाई होनी तय थी। लेकिन कल्याण बनर्जी का आरोप है कि बुधवार की देर रात करीब 12:30 बजे उनके बेटे के पास एक फोन आया, जिसमें सूचित किया गया कि अब इस मामले में उनकी जगह वकील अयान भट्टाचार्य अदालत में जिरह करेंगे।</p>
<p>अपने पेशे का हवाला देते हुए बनर्जी ने कहा, "मैं ऐसा अहंकार बर्दाश्त नहीं कर सकता। मैं पिछले 45 सालों से वकालत के पेशे में हूँ और मैं इस तरह के रवैये को कतई स्वीकार नहीं करूँगा। जिनकी बात की जा रही है, वे मेरे बच्चों की उम्र के हैं। अगर उन्हें मुझ पर भरोसा नहीं था, तो उन्होंने पहले मुझसे इस मामले को संभालने के लिए क्यों कहा? मैं लंबे समय से जानता हूँ कि अभिषेक मुझ पर भरोसा नहीं करते, लेकिन वे इस तरह मुझ जैसे वरिष्ठ वकील का अपमान नहीं कर सकते। क्या मैं कोई कूड़ेदान हूँ?"</p>
<p>अनुभवी सांसद बनर्जी ने दावा किया कि तृणमूल के भीतर और कार्यकर्ताओं के बीच अभिषेक की लोकप्रियता लगातार खत्म हो रही है। उन्होंने कहा, "अभिषेक को अभी भी समझ नहीं आ रहा है कि जनता और पार्टी कार्यकर्ता उन्हें पसंद नहीं करते हैं। उन्होंने पार्टी को बर्बाद कर दिया है। उनकी वजह से मुझे भी 'चोर' ब्रांड किया जा रहा है। मैं कामाक स्ट्रीट का कोई अदना कार्यकर्ता नहीं हूँ जो इस अहंकार को सहन करूँगा।"</p>
<p>कल्याण बनर्जी ने यह भी दावा किया कि उन्होंने पहले भी ममता बनर्जी को पार्टी के 'नंबर-2' (अभिषेक) के इस व्यवहार और आचरण के बारे में सचेत किया था, लेकिन उस पर कोई सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई। ममता बनर्जी के साथ अपने दशकों पुराने संबंधों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, " अभिषेक दीदी के खून के रिश्तेदार हो सकते हैं, लेकिन हम लोगों ने भी पिछले 40-45 वर्षों से पार्टी के वफादार सिपाहियों की तरह उनके भाइयों के रूप में काम किया है। मैं इसे स्वीकार नहीं करूँगा। इस बेहद कठिन समय में भी मैं ममता बनर्जी के साथ खड़ा रहा, और मेरे साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है? अगर यही स्थिति रही, तो मेरे लिए पार्टी में बने रहना असंभव होगा।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 17:52:12 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का बड़ा बयान, बोले- नेतन्याहू से हुईं गलतियां, हित हमेशा नहीं मिलते</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि इजरायली पीएम नेतन्याहू से कुछ चीजें गलत हुई हैं। लेबनान सैन्य कार्रवाई और ईरान तनाव के बीच उन्होंने स्पष्ट किया कि नेतन्याहू अपने देश के हितों की पैरवी करते हैं, लेकिन जहां टकराव होगा, वहां अमेरिका अपने नागरिकों का हित चुनेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-vice-president-jd-vances-big-statement-said-netanyahu/article-156671"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/jd-vance.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। ईरान के खिलाफ युद्ध में सहयोगी रहे अमेरिका और इजरायल के बीच पिछले कुछ हफ्तों से रिश्तों में तल्खी साफ देखने को मिल रही है। इस बीच, अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से ‘निश्चित रूप से कुछ चीजें गलत हुई हैं।’ वेंस ने हालांकि इसका कोई खास उदाहरण नहीं दिया, लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि नेतन्याहू ‘अपने देश के हितों की आक्रामक रूप से पैरवी करते हैं’, लेकिन उनके हित हमेशा अमेरिका के हितों के अनुकूल नहीं होते। उनका यह बयान दोनों सहयोगियों के बीच हाल के दिनों में उपजे तनाव को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने जैसा है।</p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली नेता के बीच लेबनान में सैन्य कार्रवाई को लेकर तीखी बहस हुई थी। इजरायल की इस कार्रवाई के कारण क्षेत्र में नए सिरे से हमले शुरू हो गए हैं, जिससे ईरान के साथ चल रही शांति वार्ता खटाई में पड़ती दिख रही है। बीती रात अमेरिका और ईरान के बीच लगातार दूसरे दिन हवाई हमलों हुए जिससे अप्रैल महीने से दोनों देशों के बीच लागू युद्धविराम संकट में आ गया है। यह तनाव तब दोबारा भड़का जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान ने युद्ध को समाप्त करने का ‘सौदा करने में बहुत लंबा समय ले लिया।’ ताजा संघर्ष की मुख्य वजह लेबनान के घटनाक्रम हैं, जहां इजरायल ईरान-समर्थित सशस्त्र समूह हिजबुल्लाह के खिलाफ अपना सैन्य अभियान लगातार जारी रखे हुए है।</p>
<p>इस साक्षात्कार का प्रसारण आगामी रविवार होगा। इसमें वेंस ने कहा कि नेतन्याहू एक ऐसे देश का शासन चला रहे हैं जो निश्चित रूप से अमेरिका का बहुत करीबी भागीदार रहा है। लेकिन, बेहद करीबी सहयोगी होने के बावजूद, कभी-कभी हमारे हित पूरी तरह एक जैसे होते हैं और कभी-कभी उनमें टकराव होता है। मैंने प्रधानमंत्री के रुख में यही देखा है कि वह अपने देश के हितों को बहुत आक्रामक तरीके से सामने रखते हैं, कभी इसका मतलब यह होता है कि हम दोनों एक ही राह पर हैं, और कभी इसका मतलब होता है कि हम अलग हैं।”अमेरिकी उप राष्ट्रपति ने आगे स्पष्ट किया कि ट्रंप प्रशासन का मुख्य काम इस बात पर ध्यान केंद्रित करना है कि अमेरिका के सर्वोत्तम हित में क्या है। उन्होंने कहा, "जहां हमारे हितों में टकराव होगा, वहां इजरायलियों के लिए दुर्भाग्य से ही सही हमें अमेरिकी जनता का पक्ष चुनना होगा।” जब वेंस से उन उदाहरणों के बारे में पूछा गया, जहां नेतन्याहू से गलतियां हुईं, तो उन्होंने यह कहकर बात टाल दी कि ‘ऐसी बातचीत को निजी रखना ही बेहतर होता है।’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 17:29:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>भारत-बांग्लादेश संबंधों के नए अध्याय की शुरुआत: ढाका में दिनेश त्रिवेदी की तैनाती, जल बंटवारे से सुरक्षा तक कई मुद्दे अहम</title>
                                    <description><![CDATA[भारत के नए उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी शुक्रवार को ढाका के लिए उड़ान भरेंगे। उनकी यह रवानगी गंगा जल संधि के नवीनीकरण, तीस्ता नदी परियोजना में चीन की दखल और बदलते रणनीतिक समीकरणों के बीच हो रही है। त्रिवेदी का मुख्य फोकस दोनों देशों के बीच व्यापारिक और भू-राजनीतिक मतभेदों को संभालना होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/beginning-of-a-new-chapter-in-india-bangladesh-relations-dinesh-trivedi/article-156663"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/dinesh-trivedi.png" alt=""></a><br /><p>ढाका। बांग्लादेश में भारत के नए उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी शुक्रवार को यहां से बांग्लादेश के लिए उड़ान भरेंगे और उनकी यह रवानगी एक ऐसे संवेदनशील मोड़ पर हो रही है, जब दोनों पक्ष राजनीतिक बदलावों, उभरते रणनीतिक तनाव तथा आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों को आकार देने वाली कई महत्वपूर्ण वार्ताओं के बीच अपने रिश्तों को नए सिरे से स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। त्रिवेदी ने ढाका रवाना होने से पहले मीडिया से कहा कि दोनों देशों पर लगभग 160 करोड़ लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने की जिम्मेदारी है। उन्होंने भारत एवं बांग्लादेश के रिश्ते को 'विशेष' बताया और कहा कि इसने राजनीतिक बदलावों तथा समय-समय पर पैदा होने वाले तनावों को झेला है। यह मजबूत एवं सुरक्षित नींव पर टिका है।</p>
<p>केंद्र सरकार में रेल मंत्री रह चुके त्रिवेदी ऐसे समय में ढाका पहुंचेंगे जब द्विपक्षीय संबंधों के दो सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों (जल बंटवारे और व्यापार) पर नए सिरे से बातचीत शुरू होने वाली है। गंगा के जल बंटवारे की 1996 संधि का नवीनीकरण होना है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में व्यापक स्तर पर फिर से बातचीत करना मुश्किल साबित हो सकता है, जिससे अल्पावधि के लिए इस संधि को कुछ समय के लिए आगे बढ़ा देना ही सबसे संभावित परिणाम दिखाई देता है। विदेश मंत्रालय में पूर्व सचिव पिनाक आर चक्रवर्ती और अन्य रणनीतिक पर्यवेक्षकों ने तर्क दिया है कि पानी को व्यापक संबंधों से अलग करके नहीं देखा जा सकता।</p>
<p>भारतीय नीति निर्माता अब बदलती परिस्थितियों को देखते हुए इस संधि पर दोबारा विचार करना जरूरी समझ रहे हैं। हिमालय में ग्लेशियरों के कम पिघलने से नदियों के प्रवाह पर असर पड़ा है, जबकि जनसंख्या वृद्धि और कृषि मांग ने सीमा के दोनों ओर पानी की आवश्यकताओं को नाटकीय रूप से बढ़ा दिया है। जल बंटवारे पर वार्ता व्यापक आर्थिक चर्चाओं से भी जुड़ी हुई है। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था, जो अब 510 अरब अमेरिकी डॉलर को पार कर चुकी है, लगातार मध्यम आय वाले देश के दर्जे की ओर बढ़ रही है।</p>
<p>चूंकि बांग्लादेश सबसे कम विकसित देशों की श्रेणी से बाहर निकल रहा है, इसलिए भारत द्वारा पिछले कुछ वर्षों में एकतरफा रूप से दी गई कई व्यापारिक रियायतों और तरजीही व्यवस्थाओं में अनिवार्य रूप से संशोधन की आवश्यकता होगी। इसलिए, दोनों देशों के अधिकारी एक अधिक संतुलित रिश्ते के लिए डिज़ाइन किए गए एक नए व्यापार ढांचे की तलाश कर रहे हैं। इस पृष्ठभूमि में दोनों पक्षों को राजनीतिक रूप से परेशान करने वाले मुद्दों को संभालने की आवश्यकता होगी। जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटीजंस पार्टी के कुछ धड़ों की भारत-विरोधी बयानबाजी ने भारत में चिंता पैदा की है। इसके बावजूद भारतीय अधिकारी इस बात को स्वीकार करते हैं कि समय-समय पर आने वाले राजनीतिक बयानों को भूगोल, अर्थशास्त्र और लोगों के आपसी रिश्तों पर बने इस रिश्ते को पटरी से उतारने की अनुमति नहीं दी जा सकती। त्रिवेदी के लिए यह चुनौती होगी कि वह दोनों देशों के रिश्तों को राजनीतिक उतार-चढ़ाव से बचाकर रखें।</p>
<p>भारत बांग्लादेश के चीन और पाकिस्तान के साथ बढ़ते रिश्तों को लेकर भी लगातार सावधान है। यह चिंता सबसे ज्यादा नदी से जुड़े मुद्दों में दिख रही है। गंगा नदी के जल बंटवारे पर बातचीत चल रही है, लेकिन बांग्लादेश ने तीस्ता नदी के प्रबंधन और परियोजनाओं में चीन की मदद मांगी है। इस प्रस्ताव से भारत चिंतित है, क्योंकि यह परियोजना सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के बहुत पास है। सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं सिर्फ चीन तक ही सीमित नहीं हैं। हाल ही में बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य संपर्क—जैसे पायलट प्रशिक्षण पर बातचीत और पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों में बांग्लादेश की रुचि—ने भारत को सतर्क कर दिया है। साथ ही, खुफिया एजेंसियां बांग्लादेश में पाकिस्तान की आईएसआई की बढ़ती गतिविधियों पर भी नजर रख रही हैं।</p>
<p>ये चिंताएं पुराने अनुभवों से भी जुड़ी हैं। भारतीय एजेंसियां लंबे समय से मानती हैं कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों ने पहले पूर्वोत्तर भारत के उग्रवादी समूहों की मदद की थी। 2002 में कोलकाता के अमेरिकन सेंटर पर हुए हमले जैसी घटनाओं की जांच में भी पाकिस्तान और बांग्लादेश के कुछ चरमपंथी संगठनों के संबंध सामने आए थे। फिर भी, इन चिंताओं के बावजूद दोनों देश लंबे समय तक खराब रिश्ते नहीं रख सकते। बांग्लादेश, दक्षिण एशिया में भारत का एक बड़ा व्यापारिक साझेदार है और बंगाल की खाड़ी तक पहुंच का एक महत्वपूर्ण रास्ता भी है। वहीं, भारत भी बांग्लादेश के लिए संपर्क, ऊर्जा और क्षेत्रीय बाजारों तक पहुंच के लिहाज से बहुत जरूरी है। इसलिए त्रिवेदी के लिए असली काम मतभेद खत्म करना नहीं, बल्कि उन्हें संभालकर रिश्तों को आगे बढ़ाना होगा।</p>
<p>आखिर में, इस बातचीत की सफलता इस पर निर्भर करेगी कि क्या भारत और बांग्लादेश राजनीतिक तनाव से ऊपर उठकर बदलती परिस्थितियों के अनुसार अपने रिश्तों को नया रूप दे पाते हैं। दोनों देशों के करोड़ों लोगों की तरक्की एक-दूसरे से जुड़ी हुई है, इसलिए सहयोग बनाए रखना बहुत जरूरी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 15:58:56 +0530</pubDate>
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                <title>खरगे का बड़ा हमला: संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा, संविधान बचाने की लड़ाई का आह्वान</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने महंगाई, बेरोजगारी और नीट परीक्षा घोटाले को लेकर केंद्र पर तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि दशकों में बनी संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है। खरगे ने नेताओं से एकजुट होकर जनता के हक और संविधान की रक्षा के लिए लड़ने का आह्वान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-attack-by-kharge-constitutional-institutions-are-being-weakened-call/article-156650"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/kharge.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि देश के सामने महंगाई, बेरोजगारी, परीक्षा घोटाले, सामाजिक असमानता जैसी गंभीर चुनौतियों के साथ ही संवैधानिक संस्थाओं और व्यवस्थाओं को भी कमजोर किया जा रहा है जिनके खिलाफ सख्ती से लड़ने की जरूरत है। खरगे ने गुरुवार को यहां इंदिरा भवन में कांग्रेस महासचिवों, विभिन्न राज्यों के प्रभारियों और प्रदेश अध्यक्षों की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि जिन संस्थाओं और व्यवस्थओं को बनाने में दशकों लगे, उन्हें कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की रक्षा करना कांग्रेस की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि नीट, विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विवादों ने करोड़ों युवाओं और उनके परिवारों का विश्वास हिला दिया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी स्वयं प्रभावित छात्रों और युवाओं से मिले हैं तथा उनकी आवाज को देश के सामने मजबूती से रखा है।</p>
<p>कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, "आज दुर्भाग्य से हम देखते हैं कि जिन संस्थाओं और व्यवस्थाओं को बनाने में दशकों लगे, उन्हें कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। इसलिए हमारी जिम्मेदारी केवल राजनीतिक संघर्ष की नहीं, बल्कि भारत के संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की रक्षा की भी है।" उन्होंने पार्टी नेताओं से जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाने और संगठन को मजबूत बनाने का आह्वान किया। बैठक में मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम, संगठनात्मक रणनीति तथा आगामी कार्यक्रमों पर भी चर्चा की गई। खरगे ने कहा कि कांग्रेस इन मूल्यों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और जनता के अधिकारों की लड़ाई जारी रखेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 15:01:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>सुस्मिता देव के राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफे से तृणमूल संकट गहराया, सामूहिक दलबदल की अटकलों से बढ़ा गतिरोध</title>
                                    <description><![CDATA[तृणमूल कांग्रेस का आंतरिक संकट गहरा गया है। सुखेंदु शेखर रॉय के बाद सांसद सुस्मिता देव ने भी राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया है। दिल्ली में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से उनकी मुलाकात के बाद सियासी अटकलें तेज हैं। चर्चा है कि टीएमसी के करीब 20 सांसद पाला बदलने की तैयारी में हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/trinamool-crisis-deepens-due-to-susmita-devs-resignation-from-rajya/article-156583"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/susmita.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा संकट बुधवार को उस समय और गहरा गया, जब पार्टी की वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद सुस्मिता देव ने उच्च सदन से इस्तीफा दे दिया। वह दिग्गज नेता सुखेंदु शेखर रॉय के बाद एक हफ्ते के भीतर इस्तीफा देने वाली तृणमूल की दूसरी सांसद बन गयी हैं। इस घटनाक्रम ने हाल ही में मिले चुनावी झटके के बाद सुश्री बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के भीतर बढ़ते विद्रोह की अटकलों को तेज कर दिया है, जिससे संसद में बड़े राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना बढ़ गयी है।</p>
<p>जानकारी के अनुसार देव ने उप राष्ट्रपति एवं राज्य सभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन से मुलाकात की और सदन की सदस्यता से अपना औपचारिक इस्तीफा सौंप दिया। उनका यह इस्तीफा सुखेंदु शेखर रॉय की पार्टी और राज्य सभा दोनों से इस्तीफा देने के कुछ दिनों बाद आया है, जिसमें उन्होंने तृणमूल के भीतर 'बेलगाम भ्रष्टाचार' और 'अराजक शासन' का हवाला दिया था। पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में काम कर रहीं देव के इस्तीफे को तृणमूल नेतृत्व के लिए बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है, जो पहले से ही आंतरिक असंतोषों से जूझ रहा है।</p>
<p>महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष रहीं देव साल 2021 में कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुई थीं। उन्होंने सिलचर से 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन भाजपा उम्मीदवार राजदीप रॉय से हार गयी थीं। तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के बाद उन्हें राज्य सभा के लिए नामित किया गया और वह राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के प्रमुख चेहरों में से एक बनकर उभरीं। उनके इस्तीफे से जुड़े राजनीतिक संशय को बढ़ाते हुए बुधवार को कुछ तस्वीरें सामने आयीं, जिनमें देव नयी दिल्ली में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात करती दिख रही हैं। इसने उनके भविष्य की राजनीतिक योजनाओं को लेकर अटकलों को हवा दे दी है।</p>
<p>इस मुलाकात के राजनीतिक मायनों पर न तो देव और न ही भाजपा की ओर से तुरंत कोई टिप्पणी की गयी है। ये घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आये हैं, जब तृणमूल के संसदीय दल के भीतर बड़ा विद्रोह पनपने की सूचनाएं आ रही हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, तृणमूल के करीब 20 सांसद संसद में भाजपा नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल होने की इच्छा जताते हुए लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखने पर विचार कर रहे हैं। अभी तक ऐसा कोई औपचारिक पत्र सार्वजनिक नहीं हुआ है, लेकिन इन रिपोर्टों ने दिल्ली-कोलकाता दोनों जगह राजनीतिक सरगर्मियां तेज कर दी हैं।</p>
<p>इस सामूहिक दलबदल की संभावना ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी की एकजुटता पर नये सवाल खड़े कर दिये हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि एक के बाद एक दो वरिष्ठ सांसदों का इस्तीफा और सांसदों के एक धड़े में असंतोष की सूचनाएं, पार्टी के भीतर गहरे संगठनात्मक संकट की ओर इशारा करती हैं। इस हफ्ते की शुरुआत में सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफे से तृणमूल को पहले ही बड़ा झटका लग चुका है। अपने इस्तीफे में और उसके बाद दिये सार्वजनिक बयानों में इस दिग्गज सांसद ने पार्टी नेतृत्व की तीखी आलोचना की थी और आरोप लगाया था कि संगठन के भीतर भ्रष्टाचार और मनमाना कामकाज पूरी तरह हावी हो चुका है। हालिया चुनावी झटकों के बाद उनके जाने को व्यापक स्तर पर होने वाले विद्रोह के पहले प्रत्यक्ष संकेत के रूप में देखा गया था।</p>
<p>तृणमूल ने अब तक इन इस्तीफों के महत्व को कम कर आंकने की कोशिश की है और उसका दावा है कि बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी पूरी तरह एकजुट है। लगातार हुए इन इस्तीफों ने हालांकि भाजपा को एक नया हथियार दे दिया है, जो पश्चिम बंगाल में अपना प्रभाव बढ़ाने और अपनी पार्टियों से असंतुष्ट विपक्षी नेताओं को अपने पाले में लाने की कोशिशों में जुटी है। इस बदलते घटनाक्रम ने संसद में विपक्षी खेमे के भविष्य के स्वरूप पर भी सवाल खड़े कर दिये हैं। यदि तृणमूल सांसदों के एक धड़े के दलबदल की ये सूचनाएं अगर हकीकत में बदलती हैं, तो इससे विपक्ष के संख्या बल पर बड़ा असर पड़ सकता है और संसद के दोनों सदनों में राजग की स्थिति और मजबूत हो सकती है।</p>
<p>राष्ट्रीय स्तर पर खुद को भाजपा के मुख्य चुनौती देने वालों में से एक के रूप में पेश करने वाली तृणमूल कांग्रेस के लिए ये इस्तीफे हाल के वर्षों में सबसे गंभीर आंतरिक चुनौतियों में से एक हैं। आगे और दलबदल होने की अटकलों के बीच, अब पूरा ध्यान इस बात पर है कि क्या तृणमूल नेतृत्व इस संकट को थामने में सफल रहता है या फिर यह मौजूदा गतिरोध आने वाले हफ्तों में एक बड़े राजनीतिक उलटफेर का सबब बनेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 18:32:45 +0530</pubDate>
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                <title>पीओके में तनाव: जेएएसी का रिफ्यूजी सीटों को लेकर विरोध-प्रदर्शन, हिंसक झड़पों में 11 की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[पीओके में 27 जुलाई के विधानसभा चुनाव से पहले 12 आरक्षित शरणार्थी सीटों को लेकर राजनीतिक तनाव चरम पर है। आवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के हिंसक प्रदर्शनों में 11 लोगों की मौत हो चुकी है। सरकार ने संगठन पर प्रतिबंध लगाकर 72 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव समय पर कराने के आदेश दिए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/tension-in-pok-jaac-protests-over-refugee-seats-violent-clashes/article-156477"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/pok.png" alt=""></a><br /><p>रावलकोट। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विधानसभा सीटों को लेकर तनाव चरम पर है।जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार इन सीटों का इस्तेमाल अपने हित साधने के लिए करती है और इन्हें खत्म करने की मांग को लेकर क्षेत्र में हिंसक विरोध-प्रदर्शन किए जा रहे हैं। पीओके की यह अशांति 27 जुलाई को होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच हुई है। यह विरोध-प्रदर्शन हाल के वर्षों में इलाके में हुई सबसे घातक अशांति के एक दिन बाद हो रहा है, जिसमें कम से कम 11 लोग मारे गए और 60 से अधिक घायल हो गए। इससे अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले इलाके में और अस्थिरता का डर पैदा हो गया है।</p>
<p>रावलकोट में जेएएसी समर्थकों के एक साथी कार्यकर्ता की हत्या के विरोध में इकट्ठा होने के बाद प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें हुईं। जेएएसी आर्थिक शिकायतों, प्रशासन में सुधार और राजनीतिक मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रही है और उसने रिफ्यूजी सीटों के मुद्दे को अपने आंदोलन का मुख्य केंद्र बनाया है। 'अरब न्यूज' की रिपोर्ट के अनुसार गठबंधन का तर्क है कि 45 सदस्यों वाली विधानसभा में आरक्षित 12 सीटों का इस्तेमाल मुख्यधारा की पाकिस्तानी राजनीतिक पार्टियां इलाके में सरकार बनाने की प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए करती हैं, जिससे स्थानीय लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व कमजोर होता है।</p>
<p>पुलिस अधिकारियों के अनुसार मारे गए लोगों में कम से कम चार सुरक्षाकर्मी शामिल थे, जबकि झड़पों के दौरान लगभग 20 अन्य लोग घायल हो गए। अधिकारियों ने जेएएसी समर्थकों पर अशांति के दौरान रावलकोट में सेना द्वारा चलाए जा रहे अस्पताल पर हमला करने का आरोप लगाया। 'अरब न्यूज' के अनुसार पुलिस अधिकारियों ने आरोप लगाया कि हाल ही में प्रतिबंधित संगठन के सदस्य सरकारी संस्थानों पर हिंसक हमलों में शामिल थे।</p>
<p>गत 5 जून को क्षेत्रीय प्रशासन ने जेएएसी को आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत एक प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया। इस कदम ने अधिकारियों और विरोध आंदोलन के बीच गतिरोध को और बढ़ा दिया है। पुलिस ने बताया कि बाद में सुरक्षा कार्रवाई के दौरान समूह से जुड़े 72 लोगों को गिरफ्तार किया गया। 'अरब न्यूज' की रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों ने दावा किया कि कुछ गिरफ्तार लोगों के पास हथियार, संदिग्ध दस्तावेज और ऐसी सामग्री मिली, जिसका मकसद सार्वजनिक व्यवस्था में खलल डालना था।</p>
<p>इलाके की सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को फैसला सुनाया कि रिफ्यूजियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है और उनमें केवल संवैधानिक संशोधन के जरिए ही बदलाव किया जा सकता है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि 27 जुलाई को होने वाले विधायी चुनाव तय कार्यक्रम के अनुसार हों और राजनीतिक अशांति के कारण उनमें देरी न हो। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने बढ़ती हिंसा पर चिंता जताई और आतंकवाद-रोधी कानून के तहत जेएएसी पर प्रतिबंध लगाने के फैसले पर सवाल उठाए। मानवाधिकार संस्था ने सभी पक्षों से संयम बरतने, शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार की रक्षा करने और जनता की शिकायतों के समाधान के लिए सार्थक बातचीत करने का आह्वान किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 18:31:57 +0530</pubDate>
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                <title>शिवपाल का भाजपा और सुभासपा पर बड़ा हमला, कहा- सपा को सैफई भेजने का दावा करने वाले 2027 में नहीं पहुंचेंगे विधानसभा</title>
                                    <description><![CDATA[सपा महासचिव शिवपाल यादव ने केशव मौर्य और ओमप्रकाश राजभर पर तीखा निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि लोकसभा की तरह 2027 में भी जनता विरोधियों को जवाब देगी। यादव ने केंद्र पर महंगाई-बिजली के मुद्दों पर अनदेखी और जांच एजेंसियों के जरिए विपक्ष पर दबाव बनाने का आरोप लगाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/shivpals-big-attack-on-bjp-and-subhasp-said-those/article-156421"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/shivpal-singh-yadav.png" alt=""></a><br /><p>इटावा। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर पर निशाना साधते हुए कहा कि सपा को सैफई भेजने की बात करने वाले नेता वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद स्वयं विधानसभा पहुंचने की स्थिति में नहीं रहेंगे। जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ला से जनसमस्याओं के संबंध में मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में शिवपाल यादव ने कहा कि लोकसभा चुनाव से पहले भी विपक्षी दलों द्वारा दावा किया गया था कि सपा कुछ सीटों तक सिमट जाएगी, लेकिन पार्टी ने 37 सीटें जीतकर सभी अनुमानों को गलत साबित कर दिया। उन्होंने कहा कि जनता 2027 में भी ऐसे दावों का जवाब देगी।</p>
<p>केंद्र सरकार पर कटाक्ष करते हुए सपा नेता ने कहा कि ‘‘मन की बात’’ करने वाले जनता के मन की बात नहीं सुनते हैं। उन्होंने कहा कि महंगाई, बिजली और किसानों की समस्याओं पर सरकार ध्यान नहीं दे रही है। पश्चिम बंगाल में विपक्षी दलों के जनप्रतिनिधियों के दल बदलने के मुद्दे पर उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी किसी भी तरह विपक्ष को कमजोर करना चाहती है। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं और जनप्रतिनिधियों पर विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से दबाव बनाया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है।</p>
<p>इंडिया गठबंधन की रणनीति पर बोलते हुए यादव ने कहा कि जहां-जहां चुनाव होंगे, वहां गठबंधन दल आपसी समन्वय के साथ चुनाव लड़ेंगे। इस दौरान सपा के पीडीए प्रभारी उदयभान सिंह यादव, ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि ध्रुव कुमार ‘चीनी’ तथा समाजवादी अधिवक्ता सभा के सचिव योगेश कुमार यादव सहित अन्य नेता उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 14:09:38 +0530</pubDate>
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