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                <title>labor - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>labor RSS Feed</description>
                
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                <title>भाजपा को बिहार का नाम बदलकर श्रमिक प्रदेश कर देना चाहिए : देश निर्माण में मजदूरों का अतुलनीय योगदान, तेजस्वी बोले- मजदूरों पर ही पड़ा डबल इंजन सरकार की पूंजीपरस्त नीतियों का सीधा असर</title>
                                    <description><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर तेजस्वी यादव ने बिहार से पलायन और मजदूरों की बदहाल स्थिति को लेकर केंद्र व राज्य की डबल इंजन सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि हर साल बड़े पैमाने पर मजदूरों का पलायन हो रहा है, जो चिंता का विषय है। यादव ने तंज कसते हुए बिहार को “श्रमिक प्रदेश” घोषित करने की बात कही।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/bjp-should-change-the-name-of-bihar-to-labor-state/article-152343"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/tejashwi-yadav-3.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पटना। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के मौके पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बिहार से बड़े पैमाने पर पलायन और श्रमिकों की स्थिति को देखते हुए श्रमिक दिवस का नाम बदलकर बिहार समर्पित दिवस या बिहार का नाम श्रमिक प्रदेश कर दिया जाना चाहिए। यादव ने अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर श्रमिकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि देश निर्माण में मजदूरों का योगदान अतुलनीय रहा है, लेकिन उनके उत्थान और बेहतरी पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">यादव ने कहा कि श्रमिकों, उनके परिवारों और गांवों के विकास के बिना विकसित भारत की कल्पना करना संभव नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि डबल इंजन सरकार की पूंजीपरस्त नीतियों का सीधा असर मजदूरों एवं कामगारों पर ही पड़ा है। उन्होंने कहा कि पिछले 21 वर्षों से राजग सरकार की गरीब विरोधी नीतियों के कारण ही प्रतिवर्ष बिहार से लगभग 4 करोड़ लोग काम की तलाश में दूसरे राज्यों में जाते है। पलायन संबंधित यह तथ्यपरक आंकड़ा भयावह है। <span> </span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">यादव ने कहा कि दूसरे राज्यों में बिहारी को कभी गोली तो कभी गाली दी जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहारियों को मिल रही इस पीड़ा की जिम्मेदार राजग सरकार है। राजद नेता यादव ने कहा कि वर्तमान में गैस सिलेंडर संकट के कारण भी मजदूरों पर असर पड़ा है और कई लोग वापस बिहार लौट रहे हैं, लेकिन उनके रोजगार की समुचित व्यवस्था नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि बिहार के मजदूर दूसरे राज्यों में काम नहीं करेंगे तो वहां की फैक्ट्रियां भी प्रभावित होंगी। यादव ने तंज कसते हुए कहा कि नाम बदलने में माहिर भाजपा नेताओं को बिहार के मुख्यमंत्री को श्रमिक दिवस का नाम बदलकर बिहार समर्पित दिवस या बिहार का नाम श्रमिक प्रदेश कर देना चाहिए, क्योंकि राज्य श्रमिकों की आपूर्ति में अग्रणी है। यादव ने श्रमिक दिवस के अवसर पर सभी से बिहार से पलायन रोकने और श्रमिकों के जीवन में सुधार लाने का संकल्प लेने का आह्वान किया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';"> </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';"> </span></p>
<p class="MsoNormal"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 17:59:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नई श्रमिक संहिताएं है मजदूर विरोधी : तत्काल वापस ले सरकार, कांग्रेस ने कहा-  पार्टी देश में करेगी इसके खिलाफ आंदोलन</title>
                                    <description><![CDATA[श्रमिकों के लिए घातक ये संहिताएं उनके अधिकारों को छीनती हैं, नौकरी की सुरक्षा खत्म करती हैं और उद्योगपतियों का हित साधती हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/new-labor-codes-are-anti-labor-the-government-should-immediately/article-133805"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/1200-x-600-px)-(1).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा कि श्रम सुधारों के नाम पर सरकार हाल में जो नयी श्रम संहिताएं लेकर आयी हैं, वे श्रमिकों के खिलाफ हैं और इन्हें तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। असंगठित श्रमिक एवं कर्मचारी कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. उदित राज ने पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मोदी सरकार द्वारा लाए नयी श्रमिक संहिताओं का कांग्रेस विरोध करती है और सरकार को इसे वापस लेना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन संहिताओं को वापस नहीं लिया जाता है, तो उनका संगठन पूरे देश में इनके खिलाफ आंदोलन करेगा। उन्होंने कहा कि असंगठित श्रमिक एवं कर्मचारी कांग्रेस ने श्रम शक्ति भवन पर प्रदर्शन कर इसका विरोध करते हुए सरकार से मांग की थी कि इन सभी श्रमिक संहिताओं को तत्काल वापस लिया जाए। उनका कहना था कि ये सभी श्रमिक संहिताएं मजदूर विरोधी हैं और इन चारों लेबर कोड्स-औद्योगिक संबंध संहिता- 2020, व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य संहिता- 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता- 2020 तथा वेतन संहिता, 2019  कारपोरेट की हितैषी और मजदूर विरोधी हैँ। श्रमिकों के लिए घातक ये संहिताएं उनके अधिकारों को छीनती हैं, नौकरी की सुरक्षा खत्म करती हैं और उद्योगपतियों का हित साधती हैं। </p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि देश में पहले व्यावसायिक और स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर सख्त कानून थे, लेकिन अब निरीक्षण सिस्टम को ध्वस्त कर एक बेहद ढीला ढांचा तैयार किया गया है। नयी श्रमिक संहिताओं में निरीक्षण सिस्टम को कमजोर करने से मजदूरों के  शोषण की संभावनाएं बढ़ गईं और मालिकों को बहुत सारी कानूनी पाबंदियों से छूट मिल जाएगी। उन्होंने कहा किे इन नयी संहिताओं में अस्थायी कर्मचारियों की अनदेखी हुई है और उनको केवल पंजीकरण तक सीमित कर दिया गया है। इसमें उनके लिए ईएसआईसी तथा ईपीएफओ का प्रावधान नहीं हैं।</p>
<p>हायर एंड फायर नीति को ताकत दी गई है, जिससे असंगठित मजदूरों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा और उनकी नौकरी की सुरक्षा खत्म होगी। उनका यह भी कहना था कि इन चारों लेबर कोड में श्रमिकों के अधिकार खत्म कर दिए गए हैं। शोषण के खिलाफ मजदूर हड़ताल नहीं कर सकते और इन संहिताओं से बंधुआ मजदूरकी कुरीति को बल मिलेगा। कांग्रेस नेता कहा कि इन संहिताओं में श्रमिकों के हितों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है और श्रमिकों के सारे अधिकार छीन लिये गये हैं इसलिए सरकार को इन सभी संहिताओं को तत्काल वापस लेना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 27 Nov 2025 14:57:06 +0530</pubDate>
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                <title>बालश्रम को रोकने के लिए चलेगा अभियान</title>
                                    <description><![CDATA[ बच्चों के परिजनों को जागरुक कर उनको शिक्षित करने की पहल की जाएगी। इसके साथ ही व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में काम करने बाल श्रमिकों को भी मजदूरी से हटाकर शिक्षा से जोड़ने का भी काम किया जाएगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/campaign-for-the-stop-child-labor/article-85797"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/111u1rer-(4)12.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शहर में होने वाले बालश्रम, भिक्षावृति एवं महिलाओं एवं बच्चियों के साथ होने वाले अपराधों की रोकथाम के लिए नगर निगम जयपुर ग्रेटर की महिला एवं बाल विकास समिति जनसहभागिता से अभियान चलाएगी। निगम गे्रटर मुख्यालय में महिला एवं बाल विकास समिति की बुधवार को आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए समिति अध्यक्ष मीनाक्षी शर्मा ने बताया कि शहर के प्रमुख मंदिरों, पर्यटन स्थलों, चौराहों, अस्पतालों सहित भीड़भाड़ वाले इलाकों में बच्चों से भिक्षावृति कराने वालों में जनजागरुकता लाने के लिए जनसहभागिता से अभियान चलाया जाएगा। </p>
<p>इसमें बच्चों के परिजनों को जागरुक कर उनको शिक्षित करने की पहल की जाएगी। इसके साथ ही व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में काम करने बाल श्रमिकों को भी मजदूरी से हटाकर शिक्षा से जोड़ने का भी काम किया जाएगा। इसके लिए निगम ग्रेटर की ओर से एक हेल्पलाईन भी शुरू करवाई जाएगी। समिति अध्यक्ष मीनाक्षी ने बताया कि निगम ग्रेटर क्षेत्र में स्थित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को अब अपने प्रतिष्ठान के बाहर एक पम्पलेट लगाना अनिवार्य किया जाएगा, जिसमें उनको लिखना होगा कि उनके यहां कोई बाल श्रमिक काम नहीं करता है। पहले यह काम जागरुकता के साथ किया जाएगा उसके बाद भी यदि ऐसा पाया जाता है तो जिला प्रशासन के सहयोग से अभियान चलकार कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी। यह अभियान जोन स्तर पर शुरू किए जाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jul 2024 10:20:08 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>तमिलनाडु: बिहारी श्रमिक  प्रवासियों पर बवाल</title>
                                    <description><![CDATA[आमतौर पर हिन्दी के विरोध के नाम पर हिन्दी के पोस्टर फाडे जाते हैं और हिन्दी फिल्में दिखाए जाने का विरोध होता है, लेकिन  पिछले दिनों इस विरोध में यहां कार्यरत बिहारी श्रमिक  प्रवासियों पर कथित रूप से हमले करने में बदल गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/uproar-over-tamil-nadu-bihari-labor-migrants/article-39666"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/a-56.png" alt=""></a><br /><p>दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में हिन्दी का विरोध बहुत पुराना है और बीच-बीच में उभरता रहता है। राज्य के सभी क्षेत्रीय दल यह बात बार-बार कहते रहते हैं कि इस राज्य में हिन्दी को थोपने नहीं दिया जाएगा। इस राज्य में हिन्दी का विरोध  मुख्यत: राजनीतिक कारणों से किया जाता है। आमतौर पर हिन्दी के विरोध के नाम पर हिन्दी के पोस्टर फाडे जाते हैं और हिन्दी फिल्में दिखाए जाने का विरोध होता है, लेकिन  पिछले दिनों इस विरोध में यहां कार्यरत बिहारी श्रमिक  प्रवासियों पर कथित रूप से हमले करने में बदल गया।  हालांकि यहां की द्रमुक सरकार ने बिहारियों पर हमले की घटनाओं का खंडन किया है। लेकिन यहां कार्यरत बिहारी श्रमिक प्रवासियों के कुछ नेताओं  का कहना है  कि ऐसी छुटपुट घटनाएं पहले भी होती रही हैं, लेकिन इस ओर पहले किसी  ने अधिक ध्यान नहीं दिया। पर इसके साथ सच्चाई यह भी है कि यहां काम करने वाले बिहारी प्रवासी संगठित नहीं थे और उनकी आवाजÞ उठाने वाला कोई नहीं था।</p>
<p>इस महीने के शुरू में चेन्नई से प्रकाशित एक हिन्दी समाचार पत्र ने खबर छापी जिसमें कहा गया था कि प्रवासी श्रमिक बिहारियों पर कुछ तमिल संगठनों द्वारा हमले हो रहे हैं। इसके साथ समाचार पत्र ने कथित हमले के चित्र भी छापे थे, जो किसी टीवी चैनल के फूटेज पर आधारित थे। खबर में यह भी कहा गया था कि इस घटना के बाद यहां कार्यरत बिहारी श्रमिक प्रवासियों ने पलायन शुरू  कर दिया है। राज्य की सरकार ने इस खबर का खंडन किया। खंडन में कहा गया कि सारी खबर और उसके साथ प्रकाशित  चित्र फर्जी हैं तथा यह कोई पुरानी और असम्बद्ध घटना का है। सरकार ने इस समाचार पत्र के दो रिपोर्टरों के खिलाफ मामला दर्ज करते हुए कहा कि उन्होंने जानबूझकर ऐसी गलत और भड़काने वाली खबर दी है। उधर इन मामले को लेकर राज्य में बीजेपी के नेता  बिहारी श्रमिक प्रवासियों के पक्ष में खड़े हो गए। इसी के चलते राज्य सरकार ने   प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष अन्नामलाई और चार अन्य  नेताओं के खिलाफ  उकसाने और शांति भंग करने के मामले दर्ज कर दिए।</p>
<p>उधर जब-जब ये खबरें बिहार पहुंची तो वहां की सरकार ने अधिकारियों के एक चार सदस्यों वाले दल को तुरंत चेन्नई के लिए रवाना कर दिया। अधिकारियों के इस दल ने राज्य सरकार के अधिकारियों से भेंट कर सारे मामले के जानकारी प्राप्त की। लेकिन अभी तक यह साफ नहीं हुआ है कि वास्तव में हमले की ऐसी घटना अथवा  घटनाएं हुई थीं या नहीं।</p>
<p>राज्य में दो तरह के हिन्दी भाषी प्रवासी रहते हैं। इनमें से पहला वर्ग राजस्थानी प्रवासियों को है, जो आमतौर पर व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। वे तमिल भाषा बोलते हैं तथा यहां के लगभग स्थाई निवासी हैं। दूसरी श्रेणी प्रवासी  श्रमिकों की है, जो आमतौर पर कुछ महीने काम करके वापस अपने प्रदेश लौटे जाते हैं। इनमें से अधिकांश बिहारी है तथा श्रमिक का काम करते हैं। वे आमतौर बिहार के दो बड़े त्योहारों-छठ और होली को अमूमन अपने गांव में लौट जाते हैं। वे यहां इसलिए आते हैं कि उन्हें यहां रोजगार मिल जाता है तथा मजदूरी भी अधिक मिलती है। आमतौर पर एक श्रमिक महीने में बीस हजार तक कमा लेता है, जो बिहार की तुलना से काफी अधिक है।</p>
<p>इस कथित घटना के बाद जब सरकार की आलोचना हुई तो मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने चार पृष्ठ का बयान जारी  कर  स्थिति स्पष्ट की तथा यह दोहराया कि बहार से यहां आकर काम करने वाले को सुरक्षा देना सरकार की जिम्मेदारी  है और इसको निभाने में वह कतई लापरवाही नहीं बरतेगी। राज्य के राज्यपाल आरए रवि, जिनका सरकार के साथ कई मुद्दों पर टकराव चल रहा है। इस मामले में सरकार के साथ खड़े नजर आए। उन्होंने कहा कि राज्य काम कर रहे बिहारी प्रवासी पूरी तरह से सुरक्षित हैं। उन्होंने और सरकार ने साफ किया कि राज्य से बिहारी  श्रमिक  प्रवासियों का कोई पलायन नहीं हो रहा। रवि खुद बिहार से आते हैं।</p>
<p>यह कथित घटना तब हुई जब होली नजदीक थी तथा प्रवासी बिहारी श्रमिक गांव लौटने के लिए तैयार हो रहे थे। बिहार जाने वाली गाड़ियों में सामान्य से अधिक भीड़ नजर आ रही थी। सरकार का कहना है कि यह कोई नई बात नहीं है। होली से पहले चेन्नई से बिहार जाने वाली गाड़ियों में ऐसे समय में इतनी ही अधिक भीड़  होती रही है। ऐसा कहा जा रहा है कि चेन्नई से कथित हमलों की खबरें आने के बाद बिहार में उनके परिजनों ने तुरंत वापस लौटने के लिए कहा, इसी के चलते चेन्नई स्टेशन पर बड़ी संख्या में बिहारी श्रमिक पहुंच गए।</p>
<p><strong>लोकपाल सेठी</strong><br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Mar 2023 10:56:37 +0530</pubDate>
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