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                <title>Siddaramaiah - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Siddaramaiah RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सीएम सिद्दारमैया का केंद्र सरकार पर निशाना: एकल राष्ट्रीय-स्तरीय प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता पर उठाया सवाल, राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में सुधारों की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[नीट-यूजी 2026 रद्द होने पर मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने इसे युवाओं के साथ "विश्वासघात" बताया है। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने केंद्र पर हमला बोलते हुए राज्यों को अपनी प्रवेश परीक्षा आयोजित करने की स्वायत्तता देने की मांग की। कर्नाटक सरकार ने केंद्रीकृत प्रणाली पर सवाल उठाते हुए पारदर्शी जांच और जवाबदेही पर जोर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/cm-siddaramaiah-targets-central-government-raises-questions-on-credibility-of/article-153713"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/cm1.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। प्रश्न पत्र लीक और अनियमितताओं की रिपोर्टों के बीच राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट यूजी) 2026 के रद्द होने के बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बुधवार को केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए मांग की कि राज्यों को अपनी प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करने की अनुमति दी जाए। सिद्दारमैया ने इसे "युवाओं के साथ क्रूर विश्वासघात" करार दिया और कहा कि इसने देश भर में 22 लाख से अधिक मेडिकल उम्मीदवारों को "अनिश्चितता" में धकेल दिया है। उन्होंने कहा कि लाखों विद्यार्थी महीनों की तैयारी और कोचिंग, यात्रा तथा संबंधित खर्चों पर परिवारों द्वारा किए गए भारी वित्तीय खर्च के बाद निराश रह गए हैं।</p>
<p>नीट के प्रति राज्य के लंबे समय से चले आ रहे विरोध को दोहराते हुए सिद्दारमैया ने कहा कि केंद्रीकृत परीक्षा प्रणाली ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को नुकसान पहुंचाती है और पेशेवर प्रवेशों में राज्यों की भूमिका को कमजोर करती है। उन्होंने कथित लीक की पारदर्शी जांच, दोषियों के लिए कड़ी सजा और नई परीक्षा के लिए एक स्पष्ट कार्यक्रम की मांग की। शिवकुमार ने इस फैसले को "भारी शर्मिंदगी" बताया और आरोप लगाया कि इस अचानक उठाए गए कदम ने विद्यार्थियों का आत्मविश्वास हिला दिया है और वर्षों की तैयारी के बावजूद उम्मीदवारों को फिर से अनिश्चितता में धकेल दिया है। उन्होंने इस मुद्दे पर चुप्पी साधने के लिए भाजपा नेताओं की भी आलोचना की और पूर्व मंत्री सीएन अश्वथ नारायण के जवाब न देने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इस रद्दीकरण ने उन छात्रों को प्रभावित किया है जिनके करियर के लक्ष्य स्पष्ट थे, और उन्होंने केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों से जवाबदेही की मांग की। उन्होंने छात्र-संबंधी मुद्दों पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं में दोहरे मापदंडों का भी आरोप लगाया।</p>
<p>उच्च शिक्षा मंत्री एमसी सुधाकर, स्कूली शिक्षा मंत्री एस मधु बंगारप्पा और चिकित्सा शिक्षा मंत्री शरणप्रकाश आर पाटिल ने भी केंद्र की आलोचना की और एकल राष्ट्रीय-स्तरीय प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करने के लिए बेहतर रूप से सुसज्जित हैं और कर्नाटक द्वारा ऐसी परीक्षाओं की जिम्मेदारी लेने की तत्परता व्यक्त की। उन्होंने सुझाव दिया कि छात्रों के तनाव को कम करने के लिए कक्षा 12 के अंकों को भी महत्व दिया जा सकता है। उन्होंने नीट विवाद को "सबसे बड़ा घोटाला" बताया और बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया, जबकि बंगारप्पा ने लाखों उम्मीदवारों को हुई मनोवैज्ञानिक पीड़ा को उजागर किया।<br />मंत्रियों ने सामूहिक रूप से केंद्र सरकार से पारदर्शिता बहाल करने, एक विश्वसनीय पुन: परीक्षा प्रक्रिया आयोजित करने और मेडिकल प्रवेशों के प्रबंधन में राज्यों को अधिक स्वायत्तता देने पर विचार करने का आग्रह किया। अपने बयानों के माध्यम से, कर्नाटक के नेताओं ने तत्काल सुधारात्मक उपायों, कथित पेपर लीक की गहन जांच और छात्रों का विश्वास बहाल करने के लिए राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में सुधारों की मांग की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 16:40:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मिडिल ईस्ट संकट के बीच कनार्टक सीएम सिद्दारमैया ने लिखा हरदीप सिंह पुरी को पत्र: एलपीजी आपूर्ति बढ़ाने की मांग की, ऑटो एलपीजी की उपलब्धता पर जताई चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[बेंगलुरु में वाणिज्यिक एलपीजी की भारी किल्लत के बीच मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखा है। प्रतिदिन 50,000 सिलेंडरों की मांग के मुकाबले केवल 1,000 की आपूर्ति से होटल और आईटी क्षेत्र ठप हो रहे हैं। उन्होंने आपूर्ति सुव्यवस्थित करने और ऑटो एलपीजी के लिए पारदर्शी निगरानी प्रणाली बनाने की तत्काल मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/karnataka-cm-siddaramaiah-wrote-a-letter-to-hardeep-singh-puri/article-147051"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/karnataka.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखकर बेंगलुरु में वाणिज्यिक एलपीजी की आपूर्ति को सुव्यवस्थित करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है क्योंकि इससे आतिथ्य क्षेत्र एवं संबद्ध सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। अपने पत्र में मुख्यमंत्री ने पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के उस आदेश का उल्लेख किया जिसमें घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी आपूर्ति को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने केंद्र के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कार्य किया है और आवश्यक क्षेत्रों के लिए आवंटन को विनियमित करने एवं प्राथमिकता देने के लिए कदम उठाया है।</p>
<p>हालांकि, सिद्दारमैया ने मांग एवं आपूर्ति के बीच गंभीर असंतुलन को उजागर किया। रेस्तरां, होटल, खानपान इकाइयों एवं पीजी आवासों की प्रतिदिन लगभग 50,000 व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की आवश्यकता के मुकाबले वर्तमान में केवल लगभग 1,000 सिलेंडर ही आपूर्ति किए जा रहे हैं। 18 मार्च को लिखे इस पत्र को गुरुवार को एक्स पर पोस्ट किया गया जिसमें सिद्दारमैया ने चेतावनी दी कि इस कमी के कारण प्रतिष्ठान निरंतर बंद हो रहे है, जिससे छात्रों, आईटी पेशेवरों, किसानों, डेयरी उत्पादकों और आतिथ्य क्षेत्र पर निर्भर जनता के एक बड़े वर्ग पर व्यापक प्रभाव पड़ रहा है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने मॉने​टिरिंग में मौजूद व्यवस्थागत कमियों की बात की। घरेलू एलपीजी वितरण पर नजर रखने के लिए एक सूचना-आधारित प्रणाली मौजूद है लेकिन वाणिज्यिक एलपीजी आपूर्ति के लिए कोई एकीकृत मंच उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा उन्होंने ऑटो एलपीजी की उपलब्धता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह ऑटो रिक्शा के लिए एक महत्वपूर्ण ईंधन है, जो यातायात एवं हजारों चालकों की आजीविका के महत्वपूर्ण साधन हैं। उन्होंने आगे कहा कि ऑटो एलपीजी वितरण के लिए एक एकीकृत निगरानी प्रणाली के अभाव के कारण पारदर्शिता एवं जवाबदेही की कमी है।</p>
<p>सिद्दारमैया ने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि वे आपूर्ति बढ़ाने, समान वितरण सुनिश्चित करने और वाणिज्यिक एवं ऑटो एलपीजी दोनों क्षेत्रों के लिए एक व्यापक निगरानी तंत्र विकसित करने के लिए तत्काल कदम उठाएं ताकि मौजूदा संकट का समाधान हो सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 15:02:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर फिर अटकलें तेज, मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने किया अंदरूनी गुटबाली के आरोपों को ​खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की मुलाकात। कांग्रेस आलाकमान ने गुटबाजी के दावों को किया खारिज। डीके शिवकुमार भावी मुख्यमंत्री की दौड़ में मजबूत दावेदार। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/speculation-again-intensifies-regarding-the-post-of-chief-minister-in/article-144573"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/karnataka-cm1.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव की उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात को एक बार फिर नेतृत्व परिवर्तन पर लगातार लग रही अटकलों की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और डिप्टी सीएम डी के शिवकुमार समेत कांग्रेस के टॉप नेतृत्व ने हालांकि अंदरूनी गुटबाजी के आरोपों को खारिज कर दिया है और कहा है कि मीडिया रिपोर्टस ऐसी जगहों पर फूट डालने की कोशिश कर रही हैं जहां कोई फर्क नहीं है।</p>
<p>राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह बैठक पार्टी के अंदर चल रही शांत राजनीतिक रुख के बीच हुई है, जिसमें डी के शिवकुमार को मुख्यमंत्री पद की अनौपचारिक दौड़ में एक अहम दावेदार के तौर पर देखा जा रहा है क्योंकि कांग्रेस की राज्य इकाई में नये राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं।</p>
<p>पार्टी के अंदर के लोगों का कहना है कि हालांकि, शिवकुमार ने मुख्यमंत्री पद के लिए कोई सीधा दावा नहीं किया है लेकिन भविष्य के नेतृत्व पर विचार करने से पहले उनकी राजनीतिक पहुंच और संगठनात्मक ताकत पर करीब से नजर रखी जा रही है। स्वास्थ्य मंत्री गुंडू राव जनता और मीडिया से ऐसी अनौपचारिक बैठक को राजनीतिक न बनाने की अपील कर रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, ये बातचीत सामान्य थी और इसका मकसद शासन समन्वय को बेहतर बनाना और नीतिगत मामलों पर चर्चा करना था। उन्होंने कहा, कोई अंदरूनी मतभेद नहीं हैं, सिर्फ बाहरी लोग ही इस बारे में बात कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Feb 2026 17:01:19 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कर्नाटक सीएम सिद्दारमैया ने की अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर से मुलाकात की, द्विपक्षीय संबंधों पर हुई चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के साथ व्यापार, प्रौद्योगिकी और निवेश पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने कावेरी निवास पर द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/karnataka-cm-siddaramaiah-met-us-ambassador-sergio-gore-and-discussed/article-143533"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/karnataka-cm.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने बेंगलुरु दौर पर आए भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर के साथ चर्चा की है। यह बैठक मुख्यमंत्री के आधिकारिक निवास कावेरी में आयोजित की गई, जहाँ दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने सहित आपसी हित के मामलों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।</p>
<p>बातचीत के दौरान, मंत्री एम सी सुधाकर, मुख्य सचिव शालिनी रजनीश और मुख्यमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। यह बातचीत भारत-अमेरिका के बीच बढ़ते जुड़ाव की पृष्ठभूमि में हुई है, जिसमें आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक साझेदारी पर ध्यान केंद्रित किया गया है। </p>
<p>मुख्यमंत्री कार्यालय ने वैश्विक साझेदारी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कर्नाटक की प्रतिबद्धता पर जोर दिया है। इससे पहले  भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद तेजस्वी सूर्या ने राजदूत का बेंगलुरु में स्वागत किया जहाँ दोनों के बीच अनौपचारिक बातचीत के दौरान व्यापार, प्रौद्योगिकी और नवाचार पर  चर्चा हुईं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 15:36:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कर्नाटक सीएम सिद्धारमैया का बीजेपी पर तीखा हमला : मनुवादी विचारधारा से समाज में असमानता, सर्वे विरोध से सच छिपाने की साजिश</title>
                                    <description><![CDATA[ कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राज्य में चल रहे सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक सर्वेक्षण के विरोध में भारतीय जनता पार्टी पर मनुवादी विचारधारा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/karnataka-cm-siddaramaiahs-sharp-attack-on-bjp-conspiracy-to-hide/article-128402"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/1111.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राज्य में चल रहे सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक सर्वेक्षण के विरोध में भारतीय जनता पार्टी पर मनुवादी विचारधारा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यह विचारधारा धन, अवसर और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कुछ लोगों के हाथों में केंद्रित रखना चाहती है, जिससे गरीब, पिछड़े समुदाय और महिलाएं अवसरों से वंचित रहें। सिद्धारमैया ने सोशल मीडिया पर जारी एक विस्तृत बयान में कहा, मनुवादी विचारधारा का निर्देश है कि धन, अवसर और प्रतिनिधित्व एक ही हाथों में केंद्रित रहना चाहिए। गरीब, गरीब ही रहें, पिछड़े, पिछड़े ही रहें, महिलाएं अवसरों से वंचित रहें और जातियों व समुदायों के बीच असमानता बनी रहे। दुर्भाग्यवश, भाजपा नेताओं के भीतर यही मनुवादी मानसिकता गहराई से समायी हुई है। उन्होंने कहा कि राज्य पिछड़ा वर्ग स्थायी आयोग द्वारा आयोजित यह सर्वेक्षण कर्नाटक के सात करोड़ निवासियों की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक स्थिति को कवर करने वाला एक व्यापक प्रयास है।  </p>
<p>उन्होंने कहा, यह सर्वेक्षण किसी एक जाति या धर्म तक सीमित नहीं है। यह किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि सभी के पक्ष में है। इसका मुख्य उद्देश्य सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक समानता हासिल करना और समाज के सभी वर्गों के लिए निष्पक्ष अवसर सुनिश्चित करना है। सिद्धारमैया ने बताया कि सर्वेक्षण के माध्यम से सरकार दलितों, पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यक समुदायों के साथ-साथ अगड़ी जातियों के गरीब और वंचित वर्गों की स्थिति को समझ सकेगी। सिद्धारमैया ने बीजेपी की असंगत रुख की आलोचना करते हुए कहा कि बिहार और तेलंगाना में जाति-आधारित सर्वेक्षण बिना किसी विरोध के हुए हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने भी जाति जनगणना शुरू की है। उन्होंने कर्नाटक भाजपा नेताओं को चुनौती दी कि वे स्पष्ट करें कि क्या वे केंद्र सरकार की जनगणना का भी विरोध करते हैं या केवल राज्य के सर्वेक्षण को रोक रहे हैं। उन्होंने कहा, कर्नाटक में भाजपा नेता जो सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक सर्वेक्षण का विरोध कर रहे हैं, उन्हें जवाब देना होगा: क्या आप अपनी ही केंद्र सरकार द्वारा की जा रही जाति जनगणना का भी विरोध करते हैं? यदि हां, तो इसे स्पष्ट और जोर से कहने का साहस दिखाएं। यदि नहीं, तो ऐसी मूर्खतापूर्ण बयानबाजी से आप राज्य के बुद्धिमान लोगों के सामने हास्यास्पद क्यों बन रहे हैं? सिद्धारमैया ने नागरिकों से राजनीतिक रूप से प्रेरित बयानों को नजरअंदाज करने और सर्वेक्षण में पूर्ण भागीदारी करने की अपील की। उन्होंने कहा, आइए, मिलकर एक समतापूर्ण समाज बनाएं और कर्नाटक को सभी समुदायों के लिए शांति और सौहार्द का  स्थान बनाएं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Oct 2025 11:57:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कर्नाटक सरकार पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा करेगी : मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने भाजपा पर किया तीखा हमला, कहा- श्रीरामुलु चुनाव हार गए और अब उल्टी-सीधी बयानबाजी कर रहे </title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने प्रदेश में कांग्रेस नेतृत्व में मतभेद की अटकलों को खारिज करते हुए कहा है कि राज्य सरकार एक चट्टान की तरह है और अपना पांच साल का कार्यकाल निर्बाध पूरा करेगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/the-karnataka-government-will-complete-a-five-year-term-chief-minister/article-119074"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news-(3).png" alt=""></a><br /><p>मैसुरू। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने प्रदेश में कांग्रेस नेतृत्व में मतभेद की अटकलों को खारिज करते हुए कहा है कि राज्य सरकार एक चट्टान की तरह है और अपना पांच साल का कार्यकाल निर्बाध पूरा करेगी। सिद्दारमैया ने सोमवार को यहां संवाददाताओं से कहा कि आपको क्या लगता है, क्या मैं दशहरा उत्सव का उद्घाटन करूंगा? डीके शिवकुमार और मैं साथ हैं और यह सरकार पांच साल तक एक चट्टान की तरह बनी रहेगी। उन्होंने विपक्ष के इस दावे का सीधा जवाब दिया कि वह इस साल मैसूर दशहरा उत्सव के शुभारंभ के लिए शायद मौजूद न रहें।</p>
<p>संवाददाताओं से बातचीत के दौरान शिवकुमार भी सिद्दारमैया के साथ थे। भाजपा पर तीखा हमला करते हुए उन्होंने कहा, वे झूठ बोलने के लिए जाने जाते हैं। वे यही करते हैं। श्रीरामुलु चुनाव हार गए और अब उल्टी सीधी बयानबाजी कर रहे हैं। हम एकजुट हैं और हमें उनके दावों या टिप्पणियों की परवाह नहीं है। </p>
<p>सिद्दारमैया का यह बयान विपक्ष के नेता आर. अशोक की उस टिप्पणी के संदर्भ में सामने आया है, जिसमें कहा गया था कि शायद इस साल प्रतिष्ठित दशहरा उत्सव का उद्घाटन मुख्यमंत्री के हाथों न हो पाए। पार्टी महासचिव एवं पार्टी के कर्नाटक मामलों के प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला सहित वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के दौरे के बीच जोर पकड़ती अटकलों के संदर्भ में सिद्दारमैया ने कहा कि वे पार्टी संगठन को मजबूत करने आ रहे हैं। वे अपना काम करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Jul 2025 13:24:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विपक्ष के झूठे आरोपों के आधार पर इस्तीफा नहीं दूंगा: सिद्धारमैया</title>
                                    <description><![CDATA[प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी सिद्धारमैया के खिलाफ 14 भूखंड आवंटन में कथित अनियमितताओं के लिए एक ईसीआईआर दर्ज की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/siddaramaiah-will-not-resign-on-the-basis-of-false-allegations/article-92409"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/siddaramaiah.png" alt=""></a><br /><p>बंगलूरु। कर्नाटक के मुख्ममंत्री सिद्धारमैया ने स्पष्ट किया कि वह विपक्ष के झूठे आरोपों के आधार पर अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि वह राज्य की जनता के सामने सही स्थिति पेश करेंगे। एक न्यूज चैनल से प्राप्त समाचार के अनुसार सिद्धारमैया ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि अगर विपक्ष पार्टियां झूठे आरोपों के आधार पर मेरे इस्तीफे की मांग करती हैं, तो क्या मुझे इस्तीफा देना चाहिए। हम इन आरोपों का जवाब देंगे और लोगों को सच बताएंगे। </p>
<p>मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण जमीन आवंटन मामले के बाद कांग्रेस पार्टी के अंदर दलित और अनुसूचित जनजाति के नेताओं की बैठकें हो रही हैं। जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि ये गतिविधियां क्यों हो रही हैं, तो सिद्धारमैया ने जवाब दिया कि लोग अनावश्यक अटकलें लगा रहे हैं। वैसे कई लोग समझते हैं कि उनके खिलाफ कानूनी मामले शुरू हो जाने से उनकी राजनीतिक स्थिति कमजोर हुई है और प्रदेश कांग्रेस का एक खेमा इसमें अपने लिए अवसर दे ख रहा है। उनका विचार है कि आज न कल कांग्रेस राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की पहल कर सकती है। </p>
<p>सिद्धारमैया ने कहा कि मंत्री चर्चा करेंगे, लेकिन क्या आपको अटकलें लगानी चाहिए। जब लोक निर्माण मंत्री सतीश जारकीहोली कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे से मिलते हैं, तो लोग अटकलें लगाते हैं। अतीत में भी ऐसी बैठकें होती रही हैं, लेकिन अब ऐसी अटकलें क्यों लगाई जा रही हैं?  सिद्धारमैया ने जीटी देवगौड़ा का समर्थन करते हुए कहा कि उन्होंने केवल सच्चाई बताई है। मुख्यमंत्री ने कहा, उन्होंने सच्चाई बताई है। इसमें गलत क्या है? देवगौड़ा जद (एस) की कोर समिति के अध्यक्ष हैं और मुडा के सदस्य भी हैं। <br />विशेष अदालत के आदेश के बाद लोकायुक्त पुलिस ने 27 सितंबर को सिद्धारमैया, उनकी पत्नी पार्वती और अन्य के खिलाफ ईसीआईआर दर्ज की है। विशेष अदालत की ओर से यह आदेश उस समय आया है, जब हाईकोर्ट ने सिद्धारमैया के खिलाफ राज्यपाल थावरचंद गहलोत के द्वारा जांच की मंजूरी को बरकरार रखा है। </p>
<p>प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी सिद्धारमैया के खिलाफ 14 भूखंड आवंटन में कथित अनियमितताओं के लिए एक ईसीआईआर दर्ज की है। मुडा ने सिद्धारमैया की पत्नी को आवंटित 14 भूखंड वापस लेने का फैसला लिया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 06 Oct 2024 11:31:42 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>Congress के वित्तीय सलाहकार बसवराज रायारेड्डी ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री बनने की इच्छा की प्रकट</title>
                                    <description><![CDATA[रायारेड्डी के बयानों ने सिद्दारमैया के भविष्य के बारे में अटकलों को हवा दे दी है, जो कर्नाटक कांग्रेस के भीतर बढ़ते असंतोष को दर्शाता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congresss-financial-advisor-basavaraj-rayareddy-expressed-his-desire-to-become/article-90158"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/pze16.png" alt=""></a><br /><p>कोप्पल। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के खिलाफ मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) मामले में मुकदमा चलाने को लेकर उच्च न्यायालय के आदेश से पहले उनके पद छोडऩे की अफवाहों के बीच, वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं वित्तीय सलाहकार बसवराज रायारेड्डी ने सार्वजनिक रूप से राज्य का शीर्ष पद संभालने की इच्छा व्यक्त कर दी है, जिससे कर्नाटक कांग्रेस के भीतर गहमागहमी शुरू हो गयी है।</p>
<p>रायारेड्डी ने सोमवार को संवाददाताओं से बातचीत के दौरान स्वयं के राज्य का नेतृत्व करने की संभावना को लेकर प्रतिप्रश्न प्रश्न किया, जिसके बाद से ये कयास लगाये जा रहे हैं कि उनकी नजर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर है। उन्होंने मुख्यमंत्री की भूमिका के लिए कांग्रेस नेताओं की बढ़ती दावेदारी के बारे में सवालों का जवाब देते हुए कहा कि कोई भी कर्नाटक का मुख्यमंत्री बन सकता है। मैं क्यों नहीं बन सकता?</p>
<p>उन्होंने अपनी योग्यता पर जोर देते हुए, अपनी कई बार की चुनावी जीत और लिंगायत विधायकों के बीच वरिष्ठता पर प्रकाश डाला और कहा कि मैं सबसे वरिष्ठ लिंगायत विधायकों में से एक हूं और आठ बार निर्वाचित हो चुका हूं। मैंने हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र में सबसे अधिक बार जीत हासिल की है। यदि पार्टी समुदाय या वरिष्ठता के आधार पर चयन करने का निर्णय लेती है, तो मैं एक मजबूत उम्मीदवार हूं।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने पार्टी के अन्य नेताओं का भी बचाव किया, जिनमें वरिष्ठ नेता आरवी देशपांडे, पीडब्ल्यूडी मंत्री सतीश जरकीहोली और मंत्री एमबी पाटिल शामिल हैं, जिन्होंने अपनी-अपनी आकांक्षाओं का संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि यदि सिद्दारमैया पद छोड़ते हैं, तो इन नेताओं के बारे में विचार करना गलत नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री की सीट के लिए दौड़ खुली है। </p>
<p>रायारेड्डी के बयानों ने सिद्दारमैया के भविष्य के बारे में अटकलों को हवा दे दी है, जो कर्नाटक कांग्रेस के भीतर बढ़ते असंतोष को दर्शाता है। राज्य के शीर्ष पद पर कई वरिष्ठ नेताओं की नजर होने के कारण पार्टी में आंतरिक सत्ता संघर्ष बढऩे की आशंका है, जो मौजूदा राजनीतिक परिद्श्य को नया रूप दे सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Sep 2024 17:55:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>MUDA Scam : सिद्दारमैया पर एमयूडीए भूमि घोटाले में मुकदमा चलाने की मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[ कर्नाटक के राज्यपाल थारचंद गहलोत ने मैसूरु शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए हरी झंडी दे दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/muda-scam-approval-to-prosecute-siddaramaiah-in-muda-land-scam/article-87966"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/siddaramaiah.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक के राज्यपाल थारचंद गहलोत ने मैसूरु शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए हरी झंडी दे दी है।</p>
<p>तीन कार्यकर्ताओं द्वारा दायर याचिकाओं पर आधारित राज्यपाल के इस फैसले ने मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता को लेकर पहले से ही भड़के विवाद को और बढ़ा दिया है।</p>
<p>राज्यपाल के निर्देश ने सिद्दारमैया की मुश्किलों को काफी बढ़ा दिया है, जिसे एक औपचारिक पत्र में सूचित किया गया है। पत्र में लिखा कि राज्यपाल के निर्देशानुसार भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17 और धारा 218 के तहत याचिकाओं में उल्लिखित कथित अपराधों की जांच के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के अंतर्गत मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने के लिए सक्षम प्राधिकारी के निर्णय की प्रति संलग्न कर रहा हूं।</p>
<p>घोटाले में  आरोप लगाये गये हैं कि सिद्दारमैया ने पत्नी बीएम पार्वती, बेटे एस यतींद्र और वरिष्ठ एमयूडीए अधिकारियों के साथ मिलकर मैसूरु के एक पॉस इलाके में 14 प्रमुख स्थानों पर अवैध आवंटन की साजिश रची है। कार्यकर्ता प्रदीप कुमार, टीजे अब्राहम और स्नेहमयी कृष्णा का दावा है कि जाली दस्तावेजों का उपयोग करके इन आवंटनों के लिए राज्य के खजाने से 45 करोड़ रुपये की भारी राशि निकाली गयी है।</p>
<p>मुख्यमंत्री पर कई महीनों से यह आरोप लगते रहे हैं, लेकिन उन्होंने लगातार अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज कर दिया था और कहा कि उन पर यह हमले राजनीति से प्रेरित हैं, उनकी  छवि को धूमिल करने की साजिश है और इससे ज्यादा कुछ नहीं है। मुकदमा को आगे बढ़ाने का राज्यपाल का निर्णय एक महत्वपूर्ण कदम है, जो मुख्यमंत्री और उनकी सरकार के लिए जोखिम भरा हो सकता है।</p>
<p>गहलोत ने भी मुख्यमंत्री को कारण बताओ नोटिस जारी करके पूछा है कि उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति क्यों न दी जाए। राज्यपाल ने सात दिनों के भीतर मुख्यमंत्री से आरोपों का जवाब मांगा था। इस पर राज्य की कैबिनेट ने तीव्र प्रतिक्रिया दी दृढ़ता से सिफारिश की कि राज्यपाल मुख्यमंत्री को जारी नोटिस वापस लें।</p>
<p>राज्य में विपक्ष खासकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस विवाद को हाथों हाथ लपक लिया। वह इसके लिए केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जांच की मांग कर रही है। भाजपा ने पार्टी समर्थकों को एकजुट कर भ्रष्टाचार के खिलाफ हाल ही में बेंगलुरु से मैसूरु तक एक सप्ताह की पदयात्रा आयोजित की और कांग्रेस सरकार पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।</p>
<p>मुख्यमंत्री हालांकि इससे पीछे नहीं हट रहे हैं। उन्होंने भाजपा के आक्रामक रुख का जवाब देते हुए कहा कि उनकी पत्नी को दिया गया मुआवजा राज्य में भाजपा के सत्ता में रहने के दौरान ही मंजूर किया गया था। उन्होंने इन आरोपों का पुरजोर खंडन किया और कहा कि ये आरोप उनकी राजनीतिक प्रतिष्ठा को धूमिल करने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 17 Aug 2024 16:25:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>कर्नाटक कांग्रेस में बढ़ती अंदरूनी कलह</title>
                                    <description><![CDATA[ लोकसभा चुनावों के दौरान सिद्दारमैया ने दावा किया था कि नई सरकार ने  एक साल में इतना अच्छा काम किया है कि पार्टी सभी 28 लोकसभा सीटें जीतने की स्थिति में है ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/increasing-internal-strife-in-karnataka-congress/article-84024"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/u1rer-(8)5.png" alt=""></a><br /><p>कर्नाटक में लोकसभा के चुनावों में आशा से बहुत कम सीटें आने के बाद सत्तारूढ़ कांग्रेस में आन्तरिक कलह बढ़ गई है। राज्य में मोटे तौर पर दो गुट हैं। एक गुट मुख्यमंत्री सिद्दारमैया का तथा दूसरा गुट उपमुख्यमंत्री तथा प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष डी के शिवकुमार का।<br />गत वर्ष मई में हुए विधानसभा चुनावों में  कांग्रेस को कुल 224 सीटों में से 135 सीटें मिली थीं। पार्टी बीजेपी को पराजित कर सत्ता में आई थी। लोकसभा चुनावों के दौरान सिद्दारमैया ने दावा किया था कि नई सरकार ने  एक साल में इतना अच्छा काम किया है कि पार्टी सभी 28 लोकसभा सीटें जीतने की स्थिति में है , लेकिन माना जा रहा था कि पार्टी कम से कम 20 सीटें तो जरूर जीत सकेगी।  पिछले लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने 28 में से 26 सीटों पर अपनी जीत दर्ज की। कांग्रेस को केवल एक सीट पर ही  सब्र करना पड़ा था। उन चुनावों में कभी कांग्रेस के साथ रही पार्टी जनता दल (स) को एक सीट मिली थी। इस बार बीजेपी और जनता(स) ने मिलकर चुनाव लड़ा था। इस गठबंधन को कुल 19 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस को 9 सीटें लेकर संतोष करना पड़ा।<br />इस हार के बाद कांग्रेस पार्टी में आन्तरिक कलह खुल कर सामने आ गई। दोनों गुट हार का ठीकरा एक दूसरे पर फोड़ने लगे। विरोधी गुट ने इस हार के लिए सिद्दारमैया को जिम्मेदार ठहराया। जबकि सिद्दारमैया गुट कहना था कि हार की जिम्मेदारी संगठन की भी है, जिसके मुखिया   शिवकुमार हैं। सच्चाई यह है कि चुनाव के दौरान दोनों गुटों में सामंजस्य नहीं था। गुटबंदी के चलते जीत सकने वाले कई पार्टी नेताओं को टिकट नहीं मिला। चुनाव परिणाम सामने आने के बाद शिवकुमार गुट ने मुख्यमंत्री पर सीधा हमला कर दिया। शिवकुमार राज्य के प्रभावशाली वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं। इस समय वे इस समुदाय के एकमात्र और निर्विवादित नेता हैं। राज्य की जातिवादी राजनीति में समुदायों के संत और महंत बड़ी भूमिका निभाते हैं। शिवकुमार को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से कुछ दिन पहले वोक्कालिगा समुदाय के संतों का एक बड़ा सम्मलेन आयोजित किया गया। इसमें यह मांग की गई कि पार्टी नेतृत्व को बदलकर शिवकुमार को मुख्यमंत्री का पद दिया जाना चाहिए।<br />इसका तुरंत उत्तर देते हुए सिद्दारमैया ने कहा कि वे राज्य के निर्वाचित मुख्यमंत्री हैं। उन्हें  किसी ने नामजद नहीं किया है। वे अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। <br />सिद्दारमैया पिछड़े वर्ग से आते हैं। जिन्हें स्थानीय भाषा में अहिन्दा कहा जाता है। अब बारी अहिन्दा नेताओं की थी। उन्होंने एक बयान जारी कर कहा कि सिद्दारमैया को किसी भी सूरत में उनके पद से नहीं हटाया जाना चाहिए। सिद्दारमैया और शिवकुमार की अदावत पुरानी है। विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले जब शिवकुमार को राज्य में पार्टी का मुखिया बनाया गया था, तो सिद्दारमैया ने इसका विरोध किया था। उस समय  शिवकुमार गांधी परिवार के बहुत निकट थे। इसलिए वे राज्य पार्टी के मुखिया बनने में सफल रहे। वे न केवल राज्य कांग्रेस पार्टी के बड़े नेता हैं, बल्कि एक कुशल संगठक भी हैं। पार्टी के नेताओं का एक बड़ा वर्ग मानता है कि  विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की जीत का ज्यादा श्रेय  उन्हीं को जाता है। जीत के बाद मुख्यमंत्री पद के वे एक बड़े दावेदार थे, लेकिन कुछ अन्य कारणों से कांग्रेस हाई कमान ने सिद्दारमैया को मुख्यमंत्री  बनाया गया।<br />शिवकुमार  को  उपमुख्यमंत्री का पद दिया गया। उन्हें उनकी पसंद का और महत्वपूर्ण विभाग भी उन्हें दिया गया। इसके साथ यह भी तय हुआ लोकसभा चुनावों तक शिवकुमार राज्य कांगेस पार्टी के मुखिया बने रहेंगे। यह भी तय हुआ कि मुख्यमंत्री सभी बड़े फैसले शिवकुमार की सहमति से ही करेंगे। यह भी साफ कर दिया गया कि शिवकुमार लोकसभा का चुनाव होने तक कांग्रेस के मुखिया भी बने रहेंगे। यानी लोकसभा चुनाव उनके नेतृत्व  में लड़ा जाएगा। उन दिनों यह भी चर्चा  थी कि ढाई साल बाद शिवकुमार को मुख्यमंत्री का पद दे दिया जाएगा। ऐसा माना जाता है कि शिवकुमार के समर्थक कांग्रेस आला कमान पर यह दवाब बना रहे है कि राज्य सरकार के नेतृत्व में परिवर्तन को जल्दी से जल्दी अंजाम दे दिया जाए। जिस ढंग से दोनों गुट एक दूसरे के आमने सामने  खड़े हैं, उसको  देखते हुए लगता है कि जंग अभी और तेज होगी।</p>
<p><strong>-लोकपाल सेठी<br /></strong><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jul 2024 12:39:15 +0530</pubDate>
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                <title>मुख्यमंत्री सिद्दारमैया को राहत, आपराधिक कार्यवाही पर सुप्रीम कोर्ट की रोक</title>
                                    <description><![CDATA[वरिष्ठ वकीलों ने मुख्य तौर पर कहा कि नागरिकों के इकट्ठा होने और विरोध करने का अधिकार केवल तभी प्रतिबंधित किया जा सकता है, जब सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो, न कि कानून व्यवस्था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/relief-to-chief-minister-siddaramaiah--supreme-court-stays-criminal-proceedings/article-70545"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/siddaramaiah.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और कांग्रेस के कई अन्य नेताओं पर 14 फरवरी 2022 को बेंगलुरु में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन से संबंधित एक मामले शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही पर सोमवार को रोक लगा दी।</p>
<p>न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली सिद्दारमैया और अन्य की याचिकाओं पर संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश पारित किया। पीठ ने उच्च न्यायालय के आपराधिक कार्यवाही पर रोक के साथ-साथ याचिकाकर्ताओं पर लगाए गए जुर्माने की राशि पर भी रोक लगा दी।</p>
<p>शीर्ष अदालत ने इस मामले के अन्य आरोपियों और मुख्यमंत्री के मंत्रिमंडलीय सहयोगियों -एम बी पाटिल और रामङ्क्षलगा रेड्डी के अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप ङ्क्षसह सुरजेवाला को भी राहत दी। पीठ ने याचिकाओं पर कर्नाटक सरकार को नोटिस जारी कर छह सप्ताह में अपना पक्ष रखने का भी निर्देश दिया।</p>
<p>पीठ के समक्ष याचिकाकर्ताओं का पक्ष रख रहे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु ङ्क्षसघवी और सिद्धार्थ लूथरा ने दलील देते हुए कहा कि लोकतंत्र में बोलने और विरोध की स्वतंत्रता का अधिकार सर्वोपरि है। ऐसे प्रदर्शन के लिए आपराधिक मुकदमा चलाया जाना गैरसंवैधानिक है।</p>
<p>वरिष्ठ वकीलों ने मुख्य तौर पर कहा कि नागरिकों के इकट्ठा होने और विरोध करने का अधिकार केवल तभी प्रतिबंधित किया जा सकता है, जब सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो, न कि कानून व्यवस्था। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ सरकार (तत्कालीन) के खिलाफ बिना किसी आपराधिक इरादे के शांतिपूर्वक किए गए राजनीतिक विरोध को दबाया नहीं जा सकता।</p>
<p>याचिकाकर्ताओं ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के छह फरवरी 2024 के उस आदेश को चुनौती दी  है, जिसमें उनके साथ कुछ अन्य नेताओं के खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की उनकी याचिका खारिज कर दी थी। इतना ही नहीं, याचिकाकर्ताओं पर  अदालत का कीमती समय बर्बाद करने के एवज में 10,000 अदा करने का भी आदेश दिया गया था। उन्होंने अपनी याचिका में दावा किया है कि वर्तमान कार्यवाही कानून की प्रक्रिया के दुरुपयोग के अलावा और कुछ नहीं है। अस्पष्ट आरोपों के आधार पर कार्यवाही अनुचित उत्पीड़न होगा।</p>
<p>याचिका में यह भी कहा गया है कि शिकायत की गई घटना लगभग एक घंटे तक चली और जुलूस में शामिल किसी भी सदस्य के खिलाफ कोई हिंसक कार्रवाई या आपराधिक बल का उपयोग करने का आरोप नहीं लगाया गया है। इस प्रकार यह तर्क दिया गया है कि ऐसी मामूली घटनाओं पर कार्यवाही जारी रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती, जहां कोई स्पष्ट आरोप नहीं है।</p>
<p>प्रदर्शन का आयोजन एक सिविल ठेकेदार की मौत के बाद तत्कालीन मंत्री के एस ईश्वरप्पा के इस्तीफे की मांग को लेकर किया गया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Feb 2024 14:51:33 +0530</pubDate>
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                <title>कर्नाटक में अभी हिजाब पर प्रतिबंध नहीं हटाया गया : सिद्दारमैया</title>
                                    <description><![CDATA[ उन्होंने कहा कि हमने अभी हिजाब से प्रतिबंध नहीं हटाया है। किसी ने मुझसे सवाल पूछा था और मैंने जवाब दिया कि सरकार इसे हटाने पर विचार कर रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/siddaramaiah-has-not-lifted-the-ban-on-hijab-in-karnataka/article-64914"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/siddaramaiah.png" alt=""></a><br /><p>एजेंसी/बेंगलुरु। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने शनिवार को स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने हिजाब पर प्रतिबंध अभी तक नहीं हटाया है, लेकिन सरकारी स्तर पर चर्चा के बाद इस पर निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमने अभी हिजाब से प्रतिबंध नहीं हटाया है। किसी ने मुझसे सवाल पूछा था और मैंने जवाब दिया कि सरकार इसे हटाने पर विचार कर रही है। इससे पहले केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि कर्नाटक में कांग्रेस सरकार है। वह राज्य में शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध हटाना चाहती है। यह केवल हिजाब पर प्रतिबंध हटाना नहीं है, बल्कि राज्य में शरिया कानून की स्थापना है। अगर राहुल गांधी, कांग्रेस और इंडिया गठबंधन देश में सरकार बनाते हैं तो इस्लामिक कानून लागू किया जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 Dec 2023 09:51:49 +0530</pubDate>
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