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                <title>reels - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>रील के लिए मगरमच्छ से बैर ले रहे युवा, सोशल मीडिया पर वायरल होने की सनक में वन्यजीव संरक्षण कानून का कर रहे खुला उल्लंघन</title>
                                    <description><![CDATA[वन विभाग और प्रशासन को चाहिए कि वे जनजागरूकता अभियान चलाकर युवाओं को समझाएं ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/young-people-are-antagonizing-crocodiles-for-social-media-reels--openly-violating-wildlife-protection-laws-in-their-craze-for-going-viral/article-130525"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/y-of-news-(2)14.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। <strong> केस-1 : पैरों से मुंह दबाकर मगरमच्छ को दबोचा</strong><br />नया नोहरा इलाके में दीपावली से एक दिन पहले रविवार को सड़क पर 4 फीट लंबा मगरमच्छ आ गया था। लोगों को देख वह भागने लगा तो लोग भी उसके पीछे दौड़ने लगे। इस बीच एक युवक ने मगरमच्छ के मुंह को पैरों तले दबाकर रेस्क्यू किया। जिसे बाद में नहर में छोड़ा गया।  </p>
<p><strong>केस-2 : 80 किलो के मगर को कंधों पर उठाया</strong><br />इटावा के बंजारी गांव में एक घर में 8 फीट लंबा मगरमच्छ घुस गया था। जिसे रेस्क्यू करने पहुंचे हयात खान ने उसे पकड़ा और 80 किलो वजनी मगरमच्छ को कंधों पर उठाकर ले गया। जिसे बाद में चंबल नदी में छोड़ा गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। </p>
<p><strong>केस-3 : गोदी में मगर को उठाकर फोटोशूट करवाया</strong><br />देवली अरब क्षेत्र में शुक्रवार देर रात कुछ युवक मगरमच्छ  गोद में लेकर हंसी ठिठोली कर खेलते नजर आए। इसी तरह कोटड़ी क्षेत्र में आए मगरमच्छ को लोगों ने पकड़कर कंधों पर उठा लिया। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुए। लोग वन विभाग की टीम को सूचना देने के बजाए रील्स बनाने के लिए खुद ही रेस्क्यू कर रहे हैं।</p>
<p>शेड्यूल वन के वन्यजीवों के साथ रील्स बनाने का बढ़ता क्रेज युवाओं और जानवरों दोनों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। सोशल मीडिया पर लाइक और फॉलोअर्स  बटोरने की होड़ में युवा, न केवल वन्यजीव संरक्षण अधिनियम कानून को ठेंगा दिखा रहे बल्कि अपनी जान भी दांव पर लगाने से नहीं चूक रहे। रील्स, मीम और लाइक-कमेंट की सनक में वन्यजीवों को उकसाते और उनके प्राकृतिक आवास में घुसपैठ करते हैं, जिससे इंसान व जानवरों के बीच संघर्ष के गंभीर खतरे पैदा हो रहे हैं। कोटा जिले में इन दिनों युवाओं का मगरमच्छ के साथ रील बनाने का खतरनाक शौक बन गया है। पिछले कुछ दिनों में कई ऐसे मामले सामने आए, जिसमें कोई गोदी में लेकर मगरमच्छ के साथ खेल रहा तो कोई भारी-भरकम मगरमच्छ को कंधों पर उठाकर वाहवाही लूट रहा। वहीं, सड़कों पर मगरमच्छ के मुंह को पैरों तले दबाकर काबू करने का साहस दिखा रहे। इन हरकतों से युवा खुद के साथ न केवल वन्यजीव की जान खतरे में डाल रहे बल्कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम  का भी खुला उल्लंघन कर रहे हैं। </p>
<p><strong>3 से 7 साल की सजा का प्रावधान</strong><br />मगरमच्छ शेड्यूल वन का एनीमल है। इनको गोदी व कंधों पर उठाकर रील्स बनाना, इनके साथ मारपीट व हंसी ठिठोली करना अमानवीय व्यवहार की श्रेणी में आता है, जो वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट-1972 का खुला उल्लंघन है। जिसमें 3 से 7 साल की सजा का प्रावधान है। वहीं, 10 हजार से 1 लाख तक का जुर्माने की कार्रवाई की जा सकती है। </p>
<p><strong>अपने साथ मगर की जिंदगी भी खतरे में डाल रहे</strong><br />सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियों में युवा, मगरमच्छ को पकड़ते, मुंह पर टेप लगाते व दौड़ाकर रेस्क्यू करने का नाटक करते नजर आए हैं। वन विभाग की रेस्क्यू टीम को सूचना देने के बजाय खुद हीरो  बनने की चाहत में न सिर्फ अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं बल्कि मगरमच्छों के जीवन के लिए भी बड़ा खतरा बन रहे हैं।</p>
<p><strong>कानून की अनदेखी और विभाग की चुप्पी</strong><br />वन विभाग की ओर से अब तक इस संबंध में न तो जागरूकता अभियान चलाया गया और न ही वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत सजा और जुर्माने की कार्रवाई की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही मानव-वन्यजीव संघर्ष को बढ़ावा देती हैं और प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित करती हैं।</p>
<p><strong>फॉलोअर्स की होड़ में उड़ाई जा रही कानून की धज्जियां</strong><br />युवाओं में सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स बढ़ाने और वायरल  होने की सनक इतनी हावी है कि वे वन्यजीवों के प्रति करुणा और कानून दोनों भूल बैठे हैं। फॉरेस्ट अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस तरह के मामलों में पाए जाने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p><strong>वन्यजीवों को खतरा</strong><br /><strong>व्यवहार में बदलाव: </strong>रील्स के लिए वन्यजीवों को परेशान करने से उनका प्राकृतिक व्यवहार बदल सकता है। बार-बार होने वाली घुसपैठ से वे तनाव में आ सकते हैं, जिससे उनके खाने, शिकार करने और प्रजनन के तरीकों पर असर पड़ सकता है।<br /><strong>तनाव और चोट: </strong>वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में परेशान करने से उनमें तनाव पैदा होता है, जिससे वे बीमार पड़ सकते हैं या घायल हो सकते हैं।<br /><strong>हैबीटाट लॉस:</strong> इंसानों की मौजूदगी और रील्स की शूटिंग के दौरान होने वाली गतिविधियों से जानवरों के आवास को नुकसान पहुंचता है, जिससे उनकी संख्या में कमी आ सकती है।<br /><strong>मानव-वन्यजीव संघर्ष में वृद्धि: </strong>जब जानवर इंसानों के साथ संघर्ष करते हैं, तो अक्सर इसका खामियाजा उन्हें ही भुगतना पड़ता है। ऐसी घटनाएं वन्यजीवों के लिए खतरा बढ़ाती हैं। </p>
<p><strong>यह हो सकते हैं समाधान</strong><br /><strong>जन जागरूकता अभियान:</strong> सोशल मीडिया के जरिए वन्यजीव संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना चाहिए। <br /><strong>सख्ती से लागू हो कानून:</strong> सरकार को वन्यजीवों को परेशान करने वालों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और कानूनों को सख्ती से लागू करना चाहिए।<br /><strong>शिक्षण और जागरूकता:</strong> स्कूलों और कॉलेजों में वन्यजीव संरक्षण की शिक्षा देना चाहिए ताकि युवा इसके प्रति जागरूक हो सकें। </p>
<p><strong>वन्य जीव प्रेमी बोले</strong><br />वन्यजीव को छेड़ना, पकड़ना, हंसी ठिठोली करना या वाइल्ड एनीमल्स के साथ रील बनाना न केवल गैरकानूनी है बल्कि उनके साथ अमानवीय व्यवहार भी है। जागरूकता की कमी और सोशल मीडिया की लालसा मिलकर एक गंभीर खतरा पैदा कर रही है। युवाओं को इससे बचना चाहिए। वन विभाग को जागरूकता अभियान चलाना चाहिए। <br /><strong>- एएच जैदी, नेचर प्रमोटर</strong></p>
<p>रील की कुछ सेकंड की लोकप्रियता पाने के लिए युवाओं की यह नादानी उन्हें कानूनी सजा, शारीरिक चोट या मौत के खतरे तक पहुंचा सकती है। वन विभाग और प्रशासन को चाहिए कि वे जनजागरूकता अभियान चलाकर युवाओं को समझाएं कि वन्यजीव खिलौना नहीं बल्कि प्रकृति की अमूल्य धरोहर हैं।<br /><strong>- डॉ. सुधीर गुप्ता, वन्यजीव प्रेमी</strong></p>
<p>मगरमच्छ शेड्यूल वन का एनीमल है। इसके साथ छेड़छाड़ करना वन्यजीव अधिनियम 1972 का खुला उल्लंघन है। वन विभाग को ऐसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन, विभाग कार्रवाई नहीं करता क्योंकि यह लोग विभाग का काम कर देते हैं। कार्रवाई होगी तो रेस्क्यू के लिए वन विभाग को काम करना पड़ेगा, इसलिए जिम्मेदारी से बचने के लिए एक्शन नहीं करते। नतीजन, ऐसे मामलों की पुनरावृति बढ़ती है।<br /><strong>- तपेश्वर सिंह भाटी, वन्यजीव प्रेमी</strong></p>
<p>वाइल्ड लाइफ के प्रति लोगों में जागरूकता की कमी है। अवेयरनेस बढ़ाने के लिए कार्य किए जा रहे हैं। हाल ही में वाइल्ड लाइफ सप्ताह में भी स्कूल व कॉलेज में विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को वन्यजीवों के प्रति जागरूक किया है।  वहीं, इस तरह की घटनाओं में शामिल लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। <br /><strong>- अनुराग भटनागर, डीएफओ वन्यजीव विभाग कोटा</strong></p>
<p>वन्यजीवों के साथ रील्स बनाना, सोशल मीडिया पर फोटो वीडियो अपलोड करना गैर कानूनी है। इसमें सजा और जुर्माने का प्रावधान है। यदि, आबादी क्षेत्र में वन्यजीव नजर आए तो वन विभाग को सूचित किया जाना चाहिए, हमारी टीम तुरंत रेस्क्यू करने पहुंचेगी। <br /><strong>- सुगना राम जाट, संभागीय मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक वन्यजीव</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Oct 2025 15:56:10 +0530</pubDate>
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                <title>पानी के साथ सेल्फी व रील बनाना हो सकता है खतरनाक, सिविल डिफेंस व होमगार्ड के जवान रहेंगे तैनात</title>
                                    <description><![CDATA[ प्रदेश में मानसून की दस्तक के साथ ही इस बार अच्छी बरसात होने की संभावना है। जिससे कोटा शहर व आस-पास के पिकनिक स्पॉट पर रौनक भी बढ़ेगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/making-selfies-and-reels-with-water-can-be-dangerous/article-118100"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/news48.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। प्रदेश में मानसून की दस्तक के साथ ही इस बार अच्छी बरसात होने की संभावना है। जिससे कोटा शहर व आस-पास के पिकनिक स्पॉट पर रौनक भी बढ़ेगी। हालांकि पूर्व की घटनाओं को देखते हुए प्रशासन की ओर से सभी पिकनिक स्पॉट पर सुरक्षा के लिए सिविल डिफेंस व होमगार्ड के जवान तैनात रहेंगे। बावजूद इसके पानी के साथ सेल्फी लेना व रील बनाना खतरनाक हो सकता है। अभी प्री मानसून की बरसात हो रही है। जिससे यह अधिक तेज नहीं है। लेकिन एक दो दिन में मानसून आने वाला है। मानसून के सीजन में जहां रोजाना बरसात होती है। कई बार तो बहुत तेज  और कई दिन तक झड़ी भी लग जाती है। ऐसे में मौसम का आनंद लेने के लिए छुट्टी के दिन या वीकैंड पर अधिकतर लोग शहर व आस-पास के पिकनिक स्पॉट पर घूमने के लिए जाते है। कई लोग तो परिवार के साथ जाते हैं जबकि अधिकतर लोग अपने मित्रों के साथ पिकनिक मनाने जाते है। वहां जाकर मौसम का आनंद लेने में कई लोग भूल जाते हैं कि पानी के अधिक नजदीक जाना खतरनाक हो सकता है। ऐसे में वे कई बार दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।  हालांकि पूर्व की घटनाओं को देखते हुए जिला व पुलिस प्रशासन की ओर से पिकनिक स्पॉट पर सुरक्षा के इंतजाम भी किए जा रहे है। </p>
<p><strong>यहां हैं पिकनिक स्पॉट</strong><br />शहर व आस-पास के क्षेत्रों में वैसे तो कई पिकनिक स्पॉट हैं। लेकिन जहां बरसात के समय अधिक खतरा रहता है उनमें गेपरनाथ, भंवरकुंज, नाहरसिंह माताजी, गरड़िया महादेव, चट्टानेश्वर  और बूंदी स्थित बरधा डेम हैं। बरसात के सीजन में जहां सबसे अधिक भीड़भाड़ रहती है।  इसे देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से सभी जगह पर सिविल डिफेंस के जवान व होमगार्ड और संबंधित थानों के पुलिस कर्मियों को लगाया जाएगा।</p>
<p><strong>टीमें तो तैयार, रखें सावधानी</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण के सीएफओ राकेश व्यास ने बताया कि बरसात में आपदा व राहत के लिए बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित किया जा चुका है। दोनों निगमों में 15-15 विशेषज्ञ गोताखोरों की 12-12 घंटे की ड्यूटी लगाई गई है। चम्बल नदी व तालाब में बोट डाली हुई है। साथ ही निगम की 8 बोट व वाहन तैयार है। स्कूबा डाइविंग सूट व सिलेंडर और लाइफ जैकेट भी तैयार हैं। बाढ़ से निपटने के लिए सभी आाश्जक संसाधन व स्टाफ की पर्याप्त उपलब्धता है।  व्यास ने बताया कि पिकनिक स्पॉट पर जाते समय लोगों को सावधानी रखनी होगी। सबसे पहले तो पानी के नजदीक जाकर रील बनाने व सेल्फी लेने से बचना होगा। ऐसा करते समय ही  पैर फिसलने या संतुलन बिगड़ने से अधिकतर घटनाएं होती है। जहां अचानक तेज बहाव के साथ पानी आता है वहां अंधेरा होने के बाद नहीं रूके। पिकनिक स्पॉट पर नशे का सेवन नहीं करें। सुरक्षा गाडों द्वारा दिए गए निर्देशों की पालना करें। जिससे सुरक्षित तरीके से मौसम का आनंद भी लिया जा सकेगा। </p>
<p><strong>बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित, सुरक्षा एजेंसियां मुस्तैद</strong><br />बरसात को देखते हुए हर साल की तरह ही इस बार भी जिला प्रशासन व नगर निगम की ओर से बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित कर दिए हैं। जहां 24 घंटे गोताखोरों की टीम के साथ ही पर्याप्त  संसाधन भी जुटाए गए हैं।  प्रशासन की ओर से कलक्ट्रेट में और नगर निगम की ओर से उत्तर व दक्षिण में सब्जीमंडी व श्रीनाथपुरम् फायर स्टेशनों में ये कक्ष स्थापित किए गए हैं। प्रशासन का प्रयास है कि बरसात के दौरान कहीं भी कोई दुर्घटना नहीं हो। लेकिन फिर भी यदि दुर्घटना होती है या आपदा आती है तो उसके लिए एसडीआरएफ, सिविल डिफेंस, पुलिस, होमगार्ड व नगर निगम के गोताखोरों को तैयार व मुस्तैद किया गया है। </p>
<p>बरसात के सीजन में बाढ़ नियंत्रण कक्ष तो स्थापित कर दिया है। साथ ही पिकनिक स्पॉट पर सिविल डिफेंस व होमगार्ड के जवान तैनात किए जाएंगे। सभी को निर्देशित कर दिया है। पिकनिक स्पॉट पर भी सुरक्षा के लिए रैलिंग लगाई गई है। साथ ही लोगों को भी हिदायत दी गई है कि वे पानी के अधिक नजदीक नहीं जाएं। <br /><strong>-कृष्णा शुक्ला, एडीएम सीलिंग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Sat, 21 Jun 2025 15:55:41 +0530</pubDate>
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                <title>रील्स बनाने की लत युवाओं को ले डूबेगी!</title>
                                    <description><![CDATA[अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर फॉलोअर्स, लाइक और कमेंट बढ़ाने के चक्कर में युवा किसी भी हद तक जा रहे हैं, हथियारों के साथ खेलने जानलेवा स्टंट करने के ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-addiction-of-making-reels-will-drown-the-youth/article-40386"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/a-710.png" alt=""></a><br /><p>दिल्ली मेट्रो के अंदर रील बनाने के कई मामले सामने आए हैं। इंस्टाग्राम रील बनाने और वीडियो पर अधिक व्यूज और लाइक्स के चक्कर में मेट्रो के भीतर वीडियो रिकॉर्ड किए जाते हैं। वीडियो बनाने के चक्कर में कई बार यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। हाल ही में कई ऐसे वीडियो वायरल हुए जो दिल्ली मेट्रो के भीतर बनाए गए। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) की ओर से इस बारे में कई बार चेतावनी भी दी गई। हालांकि ऐसे मामलों पर रोक नहीं लग पाई। हाल ही में दिल्ली मेट्रो ने इस मामले में ट्वीट करते हुए वीडियो रिकॉर्ड करने पर रोक लगाने की जानकारी दी। दिल्ली मेट्रो ने सफर के दौरान यात्रियों से वीडियो रिकॉर्ड नहीं करने का संदेश जारी करते हुए एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में लिखा कि दिल्ली मेट्रो में पैसेंजर बने परेशानी नहीं। साथ ही दिल्ली मेट्रो ने एक ग्राफिक शेयर किया, जिसमें लिखा कि मेट्रो में यात्री बनो उपद्रवी नहीं। दरअसल, सोशल मीडिया पर बढ़ता क्रेज अब जानलेवा साबित हो रहा है। इंटरनेट पर कुछ लोग इसे रील एडिक्शन या सोशल मीडिया एडिक्शन के नाम से जान रहे हैं। सोशल मीडिया पर खतरनाक स्टंट के साथ रील्स और सेल्फी का यह क्रेज कई युवाओं की जान ले चुका है। अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर फॉलोअर्स, लाइक और कमेंट बढ़ाने के चक्कर में युवा किसी भी हद तक जा रहे हैं, हथियारों के साथ खेलने जानलेवा स्टंट करने के ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं। अगर आप एक सोशल मीडिया यूजर हैं, तो आपको इंस्टाग्राम रील्स के बारे में जरूर पता होगा कि रील 1 मिनट से भी कम समय की वीडियो होती हैं,जो लोगों के मनोरंजन के लिए बनाई जाती हैं और भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया में इन शॉर्ट वीडियो का मार्केट इतना बड़ा है कि करोड़ों-अरबों की संख्या में लोग इन्हें देखना और बनाना पसंद करते हैं। रील्स ट्रेंडी और रोमांचक होते हैं और बहुत ही कम समय में लोगों को अच्छा मनोरंजन देते हैं। यही कारण है कि यह आपको बांधे रखती है। लेकिन इसका एक और पक्ष है जो हममें से कई लोग नहीं जानते हैं वह है इसका एडिक्शन और सोशल मीडिया पर फेमस होने की जिज्ञासा, जिसके चलते हर कोई सोशल मीडिया स्टार बनना चाहता है और इस चक्कर में कई लोग कुछ ऐसी गलतियां कर देते हैं, जो उनके लिए जानलेवा साबित होती है।<br />गौरतलब है कि साल 2021 में मध्य प्रदेश के इंदौर से एक मामला सामने आया था, जिसमें 16 साल के एक लड़के ने इंस्टाग्राम रील बनाते समय गलती से खुद को फांसी लगा ली थी। इसके बाद इंदौर पुलिस ने जांच शुरू की, तो पता चला कि 16 साल का विक्की सोशल मीडिया पर फेमस होने के लिए नकली वीडियो बना रहा था, लेकिन यह घातक निकला और उसने गलती से खुद का गला घोंट दिया। साल 2021 में ही जयपुर के जवाहर नगर में एक लड़के ने अपनी दोस्त के साथ एक टिक टॉक वीडियो बनाया था, जिसके बाद लड़की के भाइयों ने उसे पूरे गांव में नंगा करके दौड़ाया था और उसकी पिटाई भी की थी। हालांकि पुलिस ने इस पर कार्यवाही की थी, लेकिन सोशल मीडिया पर यह वीडियो काफी वायरल हुआ था। 25 दिसंबर 2021 को जयपुर के ट्राइटन मॉल से गिरकर एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। पुलिस ने जब इस मामले पर जांच की, तो पता चला कि 22 साल का यह युवक मॉल की छत पर रील्स शूट कर रहा था और अचानक संतुलन बिगड़ने से वह मॉल से नीचे जा गिरा, जिसके बाद उसकी मौत हो गई। इसके अलावा ऐसे कई सोशल मीडिया से जुड़े केस हैं जिन्होंने लोगों की जिंदगी बर्बाद कर दी। लाइक, कमेंट और फेम की सनक में लोग अपने जान की परवाह भी नहीं करते। वे ऐसी कई घटनाओं का शिकार हो जाते हैं, जो या तो उनकी जान ले लेती हैं या उन्हें बर्बाद कर देती हैं।<br /><br />एक सर्वे के मुताबिक, भारत में प्रतिदिन 60 लाख से भी अधिक रील्स बनाए जाते हैं। ये सभी रील्स सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड किए जाते हैं। रील्स के माध्यम से बड़ी संख्या में युवा काल्पनिक दुनिया में जीने लगते हैं। युवाओं को वर्चुअल दुनिया अधिक पसंद आ रही है। युवा काल्पनिक दुनिया में जीना पसंद कर रहे हैं। उनको यही दुनिया पसंद आ रही है और यहीं सुख-दुख ढूंढ़  रहे हैं। नतीजा यह है कि वे मानसिक रूप से कमजोर हो रहे हैं और उनकी याददाश्त भी कम होती जा रही है। किसी व्यक्ति को जैसे सिगरेट पीने की लत लगती है, ठीक वैसे ही लत शॉर्ट वीडियो से भी लग जाती है, जो बहुत चाहने के बाद भी छूट नहीं पाती। इसके अलावा भी इसके कई तरह के नुकसान है। शारीरिक तौर पर निरंतर कई घंटे बैठकर एक टक रील्स देखने से युवाओं में कई तरह की शारीरिक बीमारियां भी सामने आ रही हैं। रील्स बनाने के लिए युवा आज किसी भी हद से गुजरने के लिए तैयार हैं। रील्स के माध्यम से अश्लीलता को बढ़ावा देने के प्रयास भी होने लगे हैं। वीडियो पर महज व्यूज हासिल करने के उद्देश्य से शॉर्ट वीडियो के जरिए अश्लील और बेहद ही घटिया कॉन्टेंट परोसा जा रहा है, जो वीडियो बनाने वाले और देखने वाले दोनों के मानसिक स्वास्थ को प्रभावित करते हैं।             <br /><br />-देवेन्द्रराज सुथार<br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Mar 2023 10:20:56 +0530</pubDate>
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