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                <title>junior engineer - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>दिल्ली में सीबीआई की बड़ी कार्रवाई : एमसीडी और एएसआई के रिश्वतख़ोरी रैकेट का भंडाफोड़, आरोपी गिरफ़्तार</title>
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                        <![CDATA[सीबीआई ने दिल्ली में बड़ी कार्रवाई करते हुए एमसीडी और एएसआई के भ्रष्ट अधिकारियों को रंगे हाथ दबोचा। शाहदरा में घर न गिराने के बदले रिश्वत लेते बेलदार और जेई गिरफ्तार हुए, वहीं जंतर-मंतर पर अवैध वसूली मामले में एएसआई कर्मी धरे गए। जांच एजेंसी ने जाल बिछाकर लाखों की घूसखोरी का पर्दाफाश किया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-action-by-cbi-in-delhi-bribery-racket-of-mcd/article-149019"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/cbi.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने राष्ट्रीय राजधानी में दो अलग-अलग मामलों में कार्रवाई करते हुए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकारियों को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। पहला मामला 31 मार्च को दर्ज किया गया था, जिसमें शाहदरा नॉर्थ जोन में तैनात एक बेलदार पर आरोप है कि उसने एक व्यक्ति के घर को न गिराने के बदले 80,000 रुपये की रिश्वत मांगी। एक अप्रैल को सीबीआई ने जाल बिछाकर आरोपी को 5,000 रुपये लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। जांच में सामने आया कि वह अपने लिए 5,000 रुपये और एक जूनियर इंजीनियर के लिए 70,000 रुपये मांग रहा था। इसके बाद जूनियर इंजीनियर की भूमिका भी सामने आने पर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।</p>
<p>दूसरे मामले में, सीबीआई ने नयी दिल्ली स्थित जंतर-मंतर सब-सर्कल में तैनात एएसआई के एक संरक्षण सहायक और एक मॉन्यूमेंट अटेंडेंट को गिरफ्तार किया। आरोप है कि मॉन्यूमेंट अटेंडेंट ने संरक्षण सहायक की ओर से 3.50 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी, ताकि 24 मार्च को जारी नोटिस वापस लिया जा सके और काम जारी रखने की अनुमति दी जा सके।</p>
<p>बाद में बातचीत के दौरान रिश्वत की रकम 3.10 लाख रुपये तय हुई और शिकायतकर्ता से पहली किस्त के रूप में एक लाख रुपये देने को कहा गया। एक अप्रैल को सीबीआई ने ट्रैप ऑपरेशन के दौरान मॉन्यूमेंट अटेंडेंट को एक लाख रुपये लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। जांच में संरक्षण सहायक की संलिप्तता भी सामने आई, जिसके बाद उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया। मामले में आगे की जांच जारी है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 18:23:13 +0530</pubDate>
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                <title>11 कनिष्ठ अभियंताओं का नहीं किया कार्य विभाजन </title>
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                        <![CDATA[नगर निगम का विभाजन होने के बाद कोटा उत्तर की तुलना में कोटा दक्षिण निगम में गिनती के ही कनिष्ठ अभियंता मिले। जिससे उन्हं काम काम में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/work-division-of-11-junior-engineers-not-done/article-40519"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/11-kanisht-abhiyantaon-ka-karya-vibhajan-nahi-hua...kota-news-22-03-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा दक्षिण में 11 नए कनिष्ठ अभियंता आने के बाद भी 6 माह से उनका कार्य विभाजन तक नहीं किया गया है। जिससे अभियंता मिलने के बाद भी अभी तक 6 अभियंताओं पर ही पूरे निगम क्षेत्र के काम का भार है। नगर निगम में कई ऐसे काम हैं जो कनिष्ठ अभियंताओं की रिपोर्ट पर ही होते हैं। निर्माण से लेकर पट्टा बनाने तक के काम की फाइल उनकी रिपोर्ट पर ही आगे बढ़ती है। नगर निगम का विभाजन होने के बाद कोटा उत्तर की तुलना में कोटा दक्षिण निगम में गिनती के ही कनिष्ठ अभियंता मिले। जिससे उन्हं काम काम में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इसे देखते हुए स्वायत्त शासन विभाग की ओर से करीब 6 माह पहले कोटा दक्षिण निगम में 11 कनिष्ठ अभियंता दिए गए। इनमें 9 सिविल के हैं और 2 इलेक्ट्रीकल के हैं। इन अभियंताओं को आए हुए 6 माह से अधिक होने के बाद भी अभी तक निगम अधिकारियों ने इनका कार्य विभाजन तक नहीं किया है। जिससे ये अन्य अभियंताओं के अधीन ही काम कर रहे हैं। इन्हें स्वतंत्र रूप से काम की जिम्मेदारी नहीं दी गई है। </p>
<p><strong>यह हो रही परेशानी</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण की निर्माण समिति के अध्यक्ष इसरार मोहम्मद का कहना है कि कनिष्ठ अभियंताओं को पट्टा बनाने के लिए मौका रिपोर्ट करने, इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना, निर्माण संबंधी कई काम करने होते हैं। लेकिन नए अभियंताओं का कार्य विभाजन नहीं होने से पूर्व के 6 कनिष्ठ अभियंताओं को ही अभी तक ये सभी काम करने पड़ रहे हैं। जिससे काम की गति नहीं बन पा रही है। उन 6 कनिष्ठ अभियताओं पर ही पूरे दक्षिण निगम के 9 सेक्टरों के 80 वार्डों का भार है। जिनमें एक-एक कनिष्ठ  अभियंता पर करीब 12 से 15 वाडोरं का काम है। ऐसे में हर पार्षद अपने वार्ड में कनिष्ठ अभियंता का इंतजार ही करता रहता है लेकिन वे सभी जगह पर समय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। इसरार मोहम्मद ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में आयुक्त को कई बार व्यक्तिगत रूप से और लिखित  में भी अवगत कराया है कि नए कनिष्ठ अभियंता का कार्य विभायन किया जाए। जिससे  पूराने कनिष्ठ अभियंताओं के काम कम हो सके।</p>
<p><strong>डेढ़ महीने पहले निकाला आदेश, वापस लेना पड़ा</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के कार्यवाहक आयुक्त अम्बालाल मीणा का कहना है कि उन्होंने तो करीब डेढ़ महीने पहले ही नए 11 कनिष्ठ अभियंताओं के कार्य विभाजन का आदेश निकाल दिया था। लेकिन निगम के कुछ पार्षदो ने इस पर आपत्ती जताई। जिसमें कहा कि उनसे पूछकर ही कार्य विभाजन किया जाए। इस कातण से उस आदश को निरस्त करना पड़ा। लेकिन अभी तक जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई पत्र नहीं मिला है। जिससे आधार पर कनिष्ठ अभियंताओं को उनके हिैसाब से लगाया जा सके। आयुक्त ने बताया कि अभी भी नए कनिष्ठ अभियंता काम तो कर रहे हैं लेकिन वे किसी न किसी अभियंता के साथ जुड़कर कर रहे हैं। शीघ्र ही सभी 11 कनिष्ठ अभियंताओं को भी स्वतंत्र कार्य भार दे दिया जाएगा। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Mar 2023 14:27:06 +0530</pubDate>
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