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                <title>artificial - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>artificial RSS Feed</description>
                
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                <title>जी-7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी : AI के लिए प्रस्तुत किया 'मानव' विजन, सुरक्षा और समावेशिता पर दिया जोर</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी-7 सम्मेलन में एआई के लिए भारत का 'मानव' विजन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि एआई का विकास सुरक्षा, गति और जनहित पर आधारित होना चाहिए। पीएम ने डीपफेक और साइबर खतरों से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग और 'ग्लोबल साउथ' तक तकनीक पहुंचाने का आह्वान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/development-of-artificial-intelligence-should-be-based-on-the-basic/article-157305"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/modii.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जी-7 देशों के सामने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बारे में भारत के 'मानव' विजन का उल्लेख करते हुए कहा है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विकास समावेशिता, सुरक्षा और जनहित के मूल सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए। जी-7 देशों के 52 वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए फ्रांस यात्रा पर गये पीएम मोदी ने बुधवार रात फ्रांस के एवियन में "इंश्योरिंग ए सेफ, रैपिड एंड एफिशिएंट रोल आउट ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस" विषय पर आयोजित आउटरीच सत्र को संबोधित किया।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा कि एआई एक परिवर्तनकारी शक्ति है जिसमें मानव सभ्यता की दिशा को फिर से परिभाषित करने की क्षमता है, लेकिन इसे लोगों को सशक्त बनाने वाला भी होना चाहिए। उन्होंने विस्तार से बताया कि इसी व्यापक सोच के साथ भारत ने हाल ही में एआई इम्पैक्ट समिट की मेजबानी की थी। प्रधानमंत्री ने एआई के लिए भारत के 'मानव' विजन को रेखांकित किया, जो इस बात पर जोर देता है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विकास समावेशिता, सुरक्षा और जनहित के मूल सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने हमेशा साइबरस्पेस को एक वैश्विक सार्वजनिक संपत्ति के रूप में देखा है और लोकतांत्रिक देशों की ऐसी एआई मॉडल तक पहुंच होनी चाहिए जो उनके महत्वपूर्ण सूचना बुनियादी ढांचे को सुरक्षित कर सकें और उन्हें साइबर खतरों से निपटने में मदद कर सकें। उन्होंने एआई विकास के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण का आह्वान किया, जिसमें सुरक्षा, गति और दक्षता पर एक साथ ध्यान दिया जाए।</p>
<p>इस संबंध में, उन्होंने चार सुझाव दिए: एआई सिस्टम को 'सेफ-बाय-डिजाइन' (निर्माण के स्तर पर ही सुरक्षित) होना चाहिए। एआई के इस्तेमाल के साथ-साथ सामान्य मानक, परीक्षण फ्रेमवर्क और नियामक दिशानिर्देश होने चाहिए। डीपफेक, गलत सूचना और साइबर धोखाधड़ी से निपटने के लिए प्रभावी वैश्विक सहयोग होना चाहिए और एक समावेशी दुनिया सुनिश्चित करने के लिए एआई का लाभ 'ग्लोबल साउथ' के देशों तक पहुँचना चाहिए।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने संबोधन का समापन करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उद्देश्य मानव क्षमता का विस्तार करना, मानवीय विकल्पों को सशक्त बनाना और मानव गरिमा की रक्षा करना होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत इन उद्देश्यों को बढ़ावा देने के लिए अपने सहयोगियों के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 14:08:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बढ़ावा देने के लिए की कई पहल : अंतरिक्ष क्षेत्र में विस्तार के लिए उठाए कदम, सीतारमण ने कहा - 10,300  करोड़ के बजट के साथ किया था शुरू </title>
                                    <description><![CDATA[हेल्थकेयर, कृषि और टिकाऊ शहरों पर केंद्रित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में उत्कृष्टता के तीन केंद्रों की घोषणा 2023 में की गई थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/the-government-has-taken-several-initiative-to-promote-artificial-intelligence/article-105248"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/6622-copy102.jpg" alt=""></a><br /><p>कोट्टायम। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को बढ़ावा देने, अंतरिक्ष और ड्रोन जैसे अगली पीढ़ी के क्षेत्रों में अवसरों को बढ़ावा देने तथा विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के लिए कई पहल की हैं।  सीतारमण ने केरल में कोट्टायम स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि ‘इंडिया एआई मिशन’ को कंप्यूटिंग ढांचे के निर्माण, स्वदेशी एआई क्षमताओं को विकसित करने, एआई प्रतिभा को आकर्षित करने और एआई स्टार्ट-अप के वित्तपोषण के लिए 10,300  करोड़ रुपए के बजट के साथ शुरू किया गया था। इसी तरह हेल्थकेयर, कृषि और टिकाऊ शहरों पर केंद्रित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में उत्कृष्टता के तीन केंद्रों की घोषणा 2023 में की गई थी। </p>
<p>उन्होंने कहा कि इस साल के बजट में, हमने शिक्षा पर केंद्रित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में उत्कृष्टता के एक और केंद्र की घोषणा की है। इन-स्पेस ने विस्तार के लिए गैर-सरकारी संस्थाओं  के साथ 70 से अधिक समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं ताकि इन संगठनों को अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़ी उनकी गतिविधियों को संचालित करने के लिए आवश्यक सहायता उड़ान की जा सके। उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि जनवरी 2023 में शुरू किया गया राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, पांच वर्षों के लिए लगभग 20,000 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ, भारत को ग्रीन हाइड्रोजन और इसके डेरिवेटिव के उत्पादन, उपयोग और निर्यात के लिए एक वैश्विक केंद्र बनाएगा और 2047 तक भारत को ऊर्जा-स्वतंत्र होने में सक्षम बनाएगा।</p>
<p><strong>इन कार्यों का भी किया उल्लेख</strong><br />सीतारमण्य भारत सेमीकंडक्टर मिशन, 2021, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान एवं विकास का समर्थन करने और क्वांटम प्रौद्योगिकियों में एक जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए 2023 में राष्ट्रीय क्वांटम मिशन को मंजूरी, नए उदीयमान क्षेत्रों में अनुसंधान और नवाचार का समर्थन करने के लिए दीर्घकालिक वित्तपोषण प्रदान करने के लिए एक लाख करोड़ रुपये का ‘अनुसंधान कोष’ और आईआईटी और आईआईएससी में तकनीकी अनुसंधान के लिए 10,000 पीएम रिसर्च फेलोशिप जैसी पहल का भी उल्लेख किया।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Feb 2025 11:10:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लेटेस्ट ट्रेंड्स पर चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[इन टाइम टेक विजन सॉफ्ट प्राइवेट लिमिटेड के को-फाउंडर संदीप जैन इसके उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि थे, जबकि ग्रोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड के फाउंडर व सीईओ अंकित रावत गेस्ट ऑफ ऑनर थे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/discussion-on-latest-trends-of-artificial-intelligence/article-69655"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/1112222-copy5.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पूर्णिमा यूनिवर्सिटी के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन मशीन लर्निंग एप्लीकेशंस फॉर सोसायटी की ओर से इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस आयोजित की जा रही है। रीसेंट एडवांसमेंट्स इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विषय पर इस दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस की शुरुआत हुई। इसमें देश-विदेश के प्रतिभागियों द्वारा 40 से अधिक रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए जाएंगे। </p>
<p>इन टाइम टेक विजन सॉफ्ट प्राइवेट लिमिटेड के को-फाउंडर संदीप जैन इसके उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि थे, जबकि ग्रोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड के फाउंडर व सीईओ अंकित रावत गेस्ट ऑफ ऑनर थे। इस मौके पर पूर्णिमा यूनिवर्सिटी के प्रो-प्रेसिडेंट डॉ. मनोज गुप्ता और रजिस्ट्रार डॉ. चांदनी कृपलानी सहित अन्य लोगों ने विचार व्यक्त किए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 Feb 2024 12:15:30 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>दुनिया में खड़ी होगी बेरोजगारों की फौज, 30 करोड़ नौकरियां खा जाएगा एआई</title>
                                    <description><![CDATA[इनवेस्टमेंट बैंक गोल्ड मैन सच्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक एआई से दुनियाभर में 30 करोड़ नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trend-of-artificial-intelligence-is-increasing-in-the-world/article-41180"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/333-copy8.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पूरी दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का चलन तेजी से बढ़ रहा है। बैंकिंग संकट गहराने के साथ आईटी कंपनियों के भी इसका इस्तेमाल बढ़ाने की आशंका जताई जा रही है। इनवेस्टमेंट बैंक गोल्ड मैन सच्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक एआई से दुनियाभर में 30 करोड़ नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है। यह अमेरिका और यूरोप में एक चौथाई तरह के काम कर सकता है, लेकिन साथ ही इससे नई तरह की नौकरियां मिल सकती हैं और प्रॉडक्टिविटी में उछाल आ सकती है। इससे दुनियाभर में गुड्स एंड सर्विसेज की टोटल एन्युअल वैल्यू सात फीसदी तक बढ़ सकती है।<br />रिपोर्ट में कहा गया है कि खासकर जेनरेटिव एआई बहुत क्रांतिकारी है। यह इंसान की तरह कंटेंट क्रिएट कर सकता है। दुनियाभर की सरकारें एआई के फील्ड में निवेश को प्रमोट करना चाहती हैं। खासकर विकसित देश इसमें काफी रुचि दिखा रहे हैं। उनका कहना है कि इससे प्रॉडक्टिविटी बढ़ेगी और इकॉनमी में बढ़ोतरी होगी।</p>
<p><strong>सबसे ज्यादा चुनौती जर्नलिस्ट्स को</strong><br />ब्रिटेन की टेक्नोलॉजी सेक्रेटरी मिशेल डनलैन ने कहा कि एआई हमारे काम के अनुरूप काम करे, उसमें व्यवधान पैदा न करे। इससे हमारा काम बेहतर हो, न कि यह हमारा काम छीन ले। गोल्डमैन सच्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक एआई का असर अलग-अलग सेक्टर पर अलग-अलग होगा। उदाहरण के लिए 46 परसेंट एडमिनिस्ट्रेटिव और 44 परसेंट लीगल काम आॅटोमैटेड हो सकता है, लेकिन कंस्ट्रक्शन में छह परसेंट और मेंटनेंस में चार प्रतिशत जॉब ही इससे प्रभावित हो सकते हैं। इससे पहले बीबीसी न्यूज की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि कुछ आर्टिस्ट्स ने इस बात पर चिंता जताई है कि एआई इमेज जेनरेटर्स उनकी नौकरी खा सकता है। आॅक्सफर्ड यूनिवर्सिटी के आॅक्सफर्ड मार्टिन स्कूल में फ्यूचर आॅफ वर्क डायरेक्टर कार्ल बेनेडिक्ट फ्रे ने कहा कि साफतौर पर यह नहीं कहा जा सकता है कि जेनरेटिव एआई से कितने लोगों की नौकरी जाएगी। उदाहरण के लिए चैट जीपीटी एवरेज राइटिंग स्किल वाले लोगों को आर्टिकल्स लिखने में मदद करता है। इससे सबसे ज्यादा चुनौती जर्नलिस्ट्स को मिलेगी। अगर इस तरह के काम की डिमांड में भारी तेजी नहीं आती है तो इससे सैलरी में भारी कमी आएगी।</p>
<p><strong>सैलरी में आएगी कमी</strong><br />जीपीएस टेक्नोलॉजी और उबर के आने से ड्राइवरों के साथ ऐसा ही हुआ था। इससे इस बात का कोई महत्व नहीं रह गया कि आप सड़कों का कितना अनुभव है। इससे ड्राइवरों की सैलरी में 10 फीसदी तक गिरावट आई। इससे ड्राइवर्स की संख्या तो कम नहीं हुई लेकिन उनकी सैलरी कम हो गई। अगले कुछ साल में जेनरेटिव एआई को क्रिएटिव कामों पर इसी तरह का असर देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट में एक रिसर्च का हवाला देते हुए कहा गया है कि 60 फीसदी वर्कर्स इस तरह के काम कर रहे हैं जो 1940 में नहीं थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Mar 2023 11:05:17 +0530</pubDate>
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