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                <title>free education - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title> सांप पकड़ने वाले हाथों में अब किताबों की ताकत, कक्षा एक से करीब आठवीं तक नि:शुल्क पढ़ाई </title>
                                    <description><![CDATA[घुमंतु समाज के बच्चों की तकदीर गढ़ रहा छात्रावास।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-hands-once-used-for-catching-snakes-now-hold-the-power-of-books--free-education-provided-from-class-1-to-class-8/article-151829"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(2)1.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। यदि आप शाम के समय  महावीर नगर प्रथम स्थित श्री गोविंद गुरू घुमंतु छात्रावास के आसपास से गुजर रहे तो वहां पर शाम के समय पर होता हनुमान चालीसा का पाठ व भारत माता की जय के गूंजते जयकारों को सुनकर आप चौंकिए नहीं। ये कोई मंदिर नहीं हैं। यहां पर हाड़ौती भर के घुमंतु जातियों के बच्चों को कक्षा एक से लेकर करीब आठवीं तक नि:शुल्क पढ़ाया जाता हैं। वहीं छात्रावास में पढ़ाई के साथ बच्चों का सुबह से लेकर शाम तक का व्यवस्थित शेड्यूल बना हुआ। जिसका वे पालन करत हैं।</p>
<p>छात्रावास के कोषाध्यक्ष संतोष यादव ने बताया कि छात्रावास में हाड़ौती की विभिन्न जगह जिसमें खानपुर,भवानीमंडी, सारोला, इटावा, बूंदी सहित अन्य जगहों के नट,भोपा,ओड़,कंजर,गाड़िया लुहार,मोगिया,कालबेलिया,रैबारी, जोगी,बंजारा समाज के बच्चों की आर्थिक, सामाजिक व भूगोेलिक जांच पड़ताल करके उनको प्रवेश दिया जाता हैं। वहीं ये बच्चें यहां पर आने से पहले अपने माता-पिता के साथ पुश्तैनी काम में सहयोग करते है जिनमें सांप पकड़ाना, लोहा पिटाना सहित अन्य कामों में सहयोग करते हैं।</p>
<p>कोषाध्यक्ष संतोष यादव ने बताया कि भारत की आजादी में घुमंतु जातियों का बहुत बड़ा योगदान रहा हैं। वहीं ये जातियां समाज की मुख्यधारा से अलग होती जा रही हैं। अत: इन जातियों व बच्चों को मुख्यधारा में लाने के लिए छात्रावास की स्थापना सन 2024 में 25 बच्चों से हुई व वहीं अभी करीब छात्रावा में 38 बच्चे निवासरत व अध्ययनरत हैं। वहीं घोषित रिजल्ट में 8 वीं में करीब 5 बच्चों ने ए ग्रेड़ प्राप्त किया। वहीं अभी छात्रावास में बच्चों के लिए जयपुर से आएं ट्रेनर दिनेश शर्मा बच्चों को संस्कृत सीखा रहे हैं।</p>
<p><strong>संस्कारों का अद्भुत संगम</strong></p>
<p>छात्रावास के अध्यक्ष गणपत शर्मा कहते हैं, हम चाहते हैं कि जब ये बच्चे यहाँ से निकलें, तो दुनिया की मुख्यधारा से जुड़े रहे जिसके चलते यहाँ का माहौल बेहद आधुनिक और अनुशासित है। यहाँ के बच्चे जब फराटेदार अंग्रेजी में अपना परिचय देते हैं और साथ ही झुककर बड़ों के चरण स्पर्श करते हैं, तो देखने वालों की आंखें नम हो जाती हैं। यह दृश्य बताता है कि यदि अवसर मिले, तो प्रतिभा किसी जाति या भूगोल की मोहताज नहीं होती।</p>
<p><strong>ये रहती है दिनचर्या </strong></p>
<p>छात्रावास कार्यकारिणी सदस्य विमल जैन व गौरीशंकर नागर छात्रावास अधीक्षक ने बताया कि बच्चों के दिनभर की व्यवस्थित दिनचर्या बनी हुई हैं। जिसमें सुबह करीब 6 बजे जागना होता है। उसके बाद प्रात: स्मरण व 7बजे से अल्पाहार 7.30 बजे होता है। उसके बाद विद्यालय जाना वहां पर पढ़ाई करना वहां से लौटाने के बाद पुन: विद्यार्थियों की दिनचर्या शुरू हो जाती हैं।</p>
<p><strong>भामाशाहों के सहयोग से संचालित होता है</strong></p>
<p>छात्रावास की कार्यकारिणी में मंत्री भूपेंद्र जैन, संरक्षक अरविंद गोयल, सुरेंद्र गौतम,राजेंद्र विजय सहित अन्य ने बताया कि यहां पर पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। कार्यकारिणी सदस्यों ने बताया कि ये बच्चें कभी अपने माता-पिता के मजदूरी करने जाते थे। कुछ बच्चे कालबेलिया समुदाय से है जो कि सांप पकड़ने का काम करते हैं। आज उन बच्चों का छात्रावास में प्रवेश के बाद उनको पढ़ने के साथ-साथ संस्कारित किया जा रहा हैं। साथ ही यहां पर आने वालों बच्चों के लिए सबकुछ नि:शुल्क रहता हैं। साथ ही भामाशाह के सहयोग से छात्रावास का संचालन किया जा रहा हैं।</p>
<p>डॉ. मोहन लाल साहू व विपिन योगी ने बताया कि छात्रावास परिसर सीसीटीवी से लैस हैं। साथ ही बच्चों को पढ़ने के लिए सुव्यवस्थित लाइब्रेरी बनी हुई हैं व ट्यूटर भी लगा रखे हैं। बीते सत्र में एक बच्चें ने खेल प्रतियोगिता में भाग लेकर प्रथम स्थान प्राप्त किया था। वहीं बच्चों भोजन करने के दौरान एक-दूसरे से संस्कृत में बातचीत करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 14:24:21 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>एकलव्य स्कूलों से उड़ान: जनजाति अंचलों के नौनिहाल बन रहे डॉक्टर-इंजीनियर</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश के 31 एकलव्य स्कूलों के 11,000 से अधिक विद्यार्थी नीट और आईआईटी जैसी परीक्षाओं में सफल हो रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/youngsters-of-udaan-tribe-areas-are-becoming-doctors-and-engineers/article-139981"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/jaipur1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान के सुदूर जनजाति अंचलों में संचालित एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल (ईएमआरएस) शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण की नई मिसाल बनकर उभरे हैं। राज्य के 31 ईएमआरएस विद्यालयों में अनुसूचित जनजाति वर्ग के बच्चे अब नीट, आईआईटी-जेईई जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और डॉक्टर-इंजीनियर बनने के सपने साकार कर रहे हैं।</p>
<p>राज्य के ईएमआरएस में वर्तमान में 11 हजार 619 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनमें 6 हजार 710 बालक और 4 हजार 909 बालिकाएं शामिल हैं। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षित वातावरण और आधुनिक सुविधाओं के चलते शैक्षणिक सत्र 2025-26 में विद्यार्थियों की संख्या में 1,620 की वृद्धि दर्ज की गई है। प्रवेश परीक्षा में भाग लेने वाले बच्चों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।</p>
<p>ईएमआरएस विद्यालयों में कक्षा 6 से 12 तक सीबीएसई पाठ्यक्रम के तहत निःशुल्क शिक्षा, आवास, भोजन, पाठ्यपुस्तकें और दैनिक उपयोग की सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। विज्ञान और कला संकाय के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वर्चुअल रियलिटी, कंप्यूटर, एग्रीकल्चर और ऑटोमोटिव जैसी स्किल लैब्स विद्यार्थियों को भविष्य के लिए तैयार कर रही हैं।</p>
<p>प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। टाटा मोटर्स के सहयोग से ‘इनेबल कार्यक्रम’ के तहत आईआईटी-जेईई और नीट की ऑनलाइन कक्षाएं संचालित हो रही हैं। वहीं, दक्षणा कार्यक्रम के अंतर्गत चयनित विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष कोचिंग दी जा रही है। इसका परिणाम यह है कि ईएमआरएस के छात्र-छात्राएं आज देश के विभिन्न सरकारी मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं।</p>
<p>खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी ईएमआरएस के विद्यार्थियों ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पदक और सम्मान हासिल किए हैं। जनजाति क्षेत्रों के किसानों और मजदूरों के बच्चों के लिए ईएमआरएस केवल स्कूल नहीं, बल्कि सपनों को साकार करने का सशक्त माध्यम बन चुका है, जो राजस्थान के उज्ज्वल भविष्य की नींव मजबूत कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Jan 2026 15:35:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Rajasthan University: जयपुर बम ब्लास्ट के 40 पीड़ितों के आश्रितों को नि:शुल्क शिक्षा देकर रोजगार योग्य बनाया</title>
                                    <description><![CDATA[इस आतंकवादी घटना ने सैंकड़ों निर्दोष लोगों की जानें तो ली हीं, साथ ही भारी संख्या में लोगों के शरीर पर ऐसे गंभीर जख्म दिए जिनका सामना ये आज तक कर रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rajasthan-university-made-dependents-of-40-victims-of-jaipur-bomb/article-77907"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/rajasthan-university.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय ने जयपुर बम ब्लास्ट के 40 पीड़ितों के आश्रितों को नि:शुल्क उच्च शिक्षा देकर रोजगार योग्य बनाया दिया है, जिससे पीड़ित परिवारों का जीवन बदल रहा है। दरअसल, 13 मई 2008 जयपुर के इतिहास में ब्लैक ट्यूसडे के नाम से जाना जाता है। इस दिन जयपुर में सीरियल बम ब्लास्ट के रूप में हुई आतंकवादी घटना ने जयपुर वासियों को झकझोर कर रख दिया। इस आतंकवादी घटना ने सैंकड़ों निर्दोष लोगों की जानें तो ली हीं, साथ ही भारी संख्या में लोगों के शरीर पर ऐसे गंभीर जख्म दिए जिनका सामना ये आज तक कर रहे हैं। <br />राजस्थान विश्वविद्यालय ने अपनी एक अभिनव पहल के माध्यम से इन पीड़ितों के आश्रितों को विश्वविद्यालय के सभी पाठ्यक्रमों में प्रवेश की न्यूनतम योग्यता के आधार पर ही प्रवेश देकर इन छात्रों से इनके विश्वविद्यालय में अध्ययन समाप्ति तक किसी भी तरह का शुल्क न लेकर इन्हें उच्च शिक्षा से दक्ष करने का जो बीड़ा उठाया उससे इन पीड़ित परिवारों का जीवन ही बदल गया है। </p>
<p><strong>ऐसे मिला सम्बल </strong><br />विश्वविद्यालय द्वारा सबसे पहला लाभ सांगानेरी गेट स्थित हनुमान मंदिर पर पंचर की दुकान पर कार्य करने वाले एक निर्धन इकबाल की बम धमाके से मौत के बाद उसके दो आश्रितों मोहसिम अहमद व शहजाद अहमद को राजस्थान कॉलेज में प्रवेश दिया। आज ये दोनों छात्र राज. हाईकोर्ट में एडवोकेट के रूप में कार्य कर रहे हैं। मृतक ड्राइवर गोपाल सिंह की दो लड़कियों भानू कंवर व सोनू कवंर को महारानी कॉलेज में प्रवेश दिया गया। भानू कंवर आज दिल्ली में एक प्रतिष्ठित सॉफ्टवेयर कंपनी में कार्य कर रही है। दूसरी पुत्री मेडिकल शिक्षा ले रही है। पुत्र बी.ए करने के बाद वर्तमान में विश्वविद्यालय से विधि मे स्नातक कर रहा है। राधेश्याम यादव के पुत्र गिरिराज यादव को विश्वविद्यालय के कॉमर्स कॉलेज में प्रवेश दिया गया, जो आज राजस्थान रोडवेज में अपनी सेवाएं दे रहें हैं। इसी तरह गिरिराज की बहन ने भी महारानी कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की। <br /><strong>चर्चा का विषय रहा </strong><br />राजस्थान विश्वविद्यालय ने अपनी इस अभिनव पहल योजना के माध्यम से पूरे राष्ट्र के समक्ष आतंकवादी घटनाओं के प्रभाव को उच्च शिक्षा के माध्यम से दूर करने की यह पहल पूरे भारत वर्ष में चर्चा का विषय रही। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 May 2024 11:34:41 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>आरटीई के तहत अब 12वीं कक्षा तक के छात्रों को भी निःशुल्क शिक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत अध्ययनरत छात्रों की फीस पुनर्भरण के प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। इस पर 46 करोड़ रुपए का व्यय होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/under-rte-now-free-education-for-students-up-to-class/article-41482"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/ashok_gehlot1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में अब निजी विद्यालयों में 12वीं कक्षा तक के छात्रों को भी निःशुल्क शिक्षा मिलेगी। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत अध्ययनरत छात्रों की फीस पुनर्भरण के प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। इस पर 46 करोड़ रुपए का व्यय होगा।</p>
<p>आरटीई के माध्यम से कक्षा एक से आठ तक के विद्यार्थियों के लिए ही निःशुल्क शिक्षा का प्रावधान है। गहलोत द्वारा गत बजट में राज्य सरकार के खर्चे पर छात्राओं के लिए कक्षा 9 से 12वीं तक निजी विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा जारी रखने का प्रावधान किया था। इसी क्रम में अब छात्रों को भी कक्षा एक से 12 तक आरटीई के तहत निजी विद्यालयों में प्रवेश लेने पर निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री द्वारा वर्ष 2023-24 के बजट में इस संबंध में घोषणा की गई थी। राज्य सरकार द्वारा विद्यार्थियों को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए निरंतर अहम निर्णय लिए गए हैं। इनमें महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, मुख्यमंत्री निःशुल्क यूनिफार्म योजना, मुख्यमंत्री बाल-गोपाल योजना सहित कई योजनाएं शामिल हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Apr 2023 13:24:40 +0530</pubDate>
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