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                <title>abheda mahal - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>अभेड़ा महल चमका, जीवंत हुआ राजसी वैभव</title>
                                    <description><![CDATA[झूले लगे, पार्क में लौटी बच्चों की रौनक। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/abheda-mahal-shines--royal-splendor-comes-alive/article-95259"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/27rtrer-(5)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कला, संस्कृति और प्रकृति के अनूठे संगम के बीच चंबल की गोद में बसा अभेड़ा महल का राजसी वैभव फिर से जीवंत हो उठा है।  महल का कलात्मक स्वरूप और एतिहासिक धरोहर  नवज्योति के प्रयासों से चमक उठी है। महल की दीवारों पर राजसी वैभव, युद्ध नजारे, जंग के मैदान में दौड़ते घोड़े-हाथी और भाले लेकर चल रहे सैनिकों का पराक्रम से रुबरू कराती चित्रकारिता में झलकता कोटा का गौरवशाली इतिहास पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। करीब 18 साल बाद फिर से अपने मूल स्वरूप में लौटा अभेड़ा महल को देख पर्यटक आनंदित हो रहे हैं। दरअसल, ऐतिहासिक धरोहर अभेड़ा महल की दुर्दशा को लेकर दैनिक नवज्योति ने लगातार खबरें प्रकाशित कर केडीए का ध्यान सौंदर्यीकरण की ओर आकर्षित किया था। इसके बाद केडीए प्रशासन ने न केवल महल का सौंदर्यीकरण करवाया बल्कि बरसों से टूटे झूले भी लगवा दिए। लेकिन, रानी महल में बूंदी शैली की कलात्मक पेंटिंग अशोभनीय कमेंट्स से घिरी हुई है, जो परिवार के साथ आने वाले पर्यटकों को शर्मसार कर रही है। इस ओर भी ध्यान देने की जरूरत है। </p>
<p><strong>महल के आंगन में लौटी रौनक</strong><br />अभेड़ा महल में रविवार को बड़ी संख्या में पर्यटक परिवार संग घूमने आए। महल का आंगन वर्षों बाद बच्चों से गुलजार रहा। यहां लगे झूलों पर बच्चों की भीड़ लगी रही। उन्होंने सिलीप पट्टी व झूलों का लुफ्त उठाया। साथ ही परिसर में साफ-सफाई, गार्डन   में पौधों का मेंटिनेंस व बोटिंग पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहे। </p>
<p><strong>18 साल बाद चमका अभेड़ा महल</strong><br />नेचर प्रमोटर एएच जैदी ने बताया कि केडीए ने साढ़े तीन करोड़ की लागत से वर्ष 2003 में अभेड़ा महल का जीर्णोंद्धार शुरू किया था, जो तीन साल बाद 2006 में पूरा हुआ। रिनोवेशन के तहत भवन की मरम्मत, रंग-रोशन, सुलभ कॉम्पलेक्स, मुगल गार्डन, रानी महल की मरम्मत व नक्काशी, झरोखे, तालाब, बाहरी दीवारों पर राज दरबार की सवारी जुलूस व राजसी वैभव को प्रदर्शित करती पेटिंग्स सहित कई कार्य करवाए थे। वहीं, बच्चों के लिए झूले भी लगवाए थे। करीब 18 साल बाद फिर से महल का सौंदर्यीकरण हुआ है। हालांकि, महल की दीवारों का रंग-रोगन बीच-बीच में होता रहा।</p>
<p><strong>बिजली पोल पर रंग-रोगन, कनेक्शन चालू नहीं</strong><br />बोरखेड़ा निवासी पर्यटक अजय कुशवाह, राकेश नामा, सुरेंद्र प्रजापति ने बताया कि महल के अंदर लगे बिजली के पोल पर रंग-रोगन तो कर दिया लेकिन कनेक्शन चालू नहीं है। शाम पांच बजे के बाद से अंधेरा होने लगता है लेकिन लाइटें चालू नहीं होती। वहीं, फाउंटेशन लगा हुआ है, जो अब तक चालू नहीं किया गया। हालांकि, झूले, महल का सौंदर्यीकरण होने से काफी अच्छा लगा। </p>
<p><strong>रानी महल: दीवारों पर अशोभनीय कमेंट  </strong><br />जैदी बताते हैं, नवज्योति के प्रयास रंग लाए हैं। केडीए द्वारा महल का सौंदर्यीकरण करवाया, जो तारीफे काबिल है लेकिन कुछ विकास कार्य अधूरे छोड़ दिए हैं, जिसे भी पूरे किए जाना जरूरी है। रानी महल में दीवारों पर राजसी वैभव को प्रदर्शित करते कलात्मक चित्रों पर लोगों ने अपने नाम और अभद्र कमेंट लिखकर खराब कर दिए हैं। जबकि, महल देखने आने वाले पर्यटकों से टिकट लिया जाता है लेकिन मॉनिटरिंग नहीं की जाती। जिसका फायदा प्रेमी युगल व अन्य शरारती तत्व उठाते हैं और दीवारों पर नाम व कमेंट लिख धरोहर को नुकसान पहुंचा रहे हैं। वहीं, परिवार के साथ आने वाले पर्यटकों को शर्मिंदगी महसूस करनी पड़ती है। </p>
<p><strong>नवज्योति ने उठाया था मामला</strong><br />अभेड़ा महल की दुर्दशा को लेकर दैनिक नवज्योति ने लगातार खबरें प्रकाशित की थी। शहर के पर्यावरणविद्, इतिहासकार, विरासत प्रेमियों व कलाकारों ने नवज्योति के माध्यम से केडीए, पर्यटन विभाग व जिला प्रशासन से ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण की मांग उठाई थी। नवज्योति के लगातार प्रयासोें के बाद अभेड़ा महल फिर से अपने गौरवशाली वैभव से चमक उठा है। उन्होंने दैनिक नवज्योति का लगातार प्रयास के लिए आभार जताया। </p>
<p><strong>क्या बोले पर्यटक </strong><br />विस्तार योजना विज्ञान नगर निवासी शैलेंद्र आहुजा, पंकज चौहान, शाहबाज पठान, रिंकू आलम ने बताया कि पिछले साल अभेड़ा महल आए थे तब दीवारें व शाही दरबार की पेंटिग बदहाल थी। तालाब व कुंड कमल जड़ों से अटे हुए थे। काफी समय बाद  महल की तस्वीर बदली है। सौंदर्यीकरण होने से महल चमक उठा है। परिसर में भी साफ सफाई पहले से बेहतर हो गई।  केशवपुरा निवासी कैलाश साहू, लक्ष्मी कुमारी, सुचिता, उदयराज का कहना है, रानी महल के कमरों व तिबारियों में हो रही पेंटिंग्स पर लोगों ने अशोभनीय कमेंट लिखे हुए हैं, जो बहुत गलत है। कोटा-बूंदी शैली की पेंटिग्स व विरासत को खराब कर रहे हैं। परिवार के साथ जाते हैं, ऐसे में इन कमेंट्स को देख शर्मिंदगी महसूस होती है। केडीए प्रशासन को जल्द से जल्द दीवारों का रंग रोगन करवाकर हटाना चाहिए और खराब हो रही पेंटिंग्स को फिर से बनवाकर जीवंत करनी चाहिए।</p>
<p><strong>रानी महल की दीवारें पान-गुटखों की पीक से लाल</strong><br />विरासत प्रेमी रिंकेश अग्रवाल ने बताया कि अभेड़ा महल बहुत ही खूबसूरत है। यहां मॉनिटरिंग की कमी है। देखरेख के अभाव में रानी महल की दीवारें व झरोखों को पान-गुटखों की पीक से बदरंग हो रहे हैं। वहीं, शरारती तत्वों ने कोटा-बूंदी शैली की पेंटिंग्स खराब कर  दी है। केडीए प्रशासन को टिकट दर में बढ़ोतरी कर पर्याप्त गार्ड की व्यवस्था करनी चाहिए। साथ ही मॉनिटरिंग बढ़ानी चाहिए ताकि, शरारती तत्वों पर निगरानी रखी जा सके। </p>
<p>सौंदर्यीकरण होने से महल फिर से चमक उठा है। रानी महल के अंदर की दीवारें व कोटा-बूंदी शैली की पेंटिंग्स पर लिखे कमेंट का मामला संज्ञान में आया है। जिसे तुरंत दुरुस्त करवाया जाएगा। <br /><strong>- पंकज सिसोदिया, जेईएन केडीए </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Nov 2024 16:46:16 +0530</pubDate>
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                <title>अभेड़ा में पार्किंग के नाम पर अवैध वसूली</title>
                                    <description><![CDATA[अभेड़ा महल की दीवारों पर रेट लिस्ट चस्पा नहीं थी। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/illegal-collection-in-the-name-of-parking-in-abheda/article-87957"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/1rer-(6)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर नांता स्थित अभेड़ा महल घूमने आए पर्यटकों से पार्किंग के नाम पर अवैध वसूली की गई। यहां कार पार्किंग करने के 25 रुपए वसूले गए। जबकि, कार का किराया केडीए द्वारा मात्र 10 रुपए तय किया गया है। इसके बावजूद अधिक राशि लिए जाने  से खफा पर्यटकों ने नवज्योति से शिकायत की। सबूत के रूप में पर्चियां भी सौंपी है। दरअसल, गुरुवार को छुट्टी का दिन होने से बड़ी संख्या में पर्यटक परिवार संग अभेड़ा महल पहुंचे थे। यहां टिकट काउंटर पर बैठे ठेकेदार के कार्मिकों ने चार पहिया वाहनों की पार्किंग की पर्चियां थमा कार सवारों से भी 25 रुपए वसूल लिए। लोगों ने वहां बोर्ड पर लिखे जेईएन को फोन कर मामले की शिकायत की। </p>
<p><strong>दीवारों पर रेट लिस्ट चस्पा नहीं</strong><br />अभेड़ा महल की दीवारों पर पूर्व में रेट लिस्ट चस्पा रहती थी। जिससे लोगों को एंट्री से पहले ही टिकट दरों की जानकारी मिल जाती थी लेकिन शुक्रवार दोपहर तक यहां रेट लिस्ट चस्पा नहीं थी। नतीजन, पादर्शिता के अभाव में टिकट दरों में मनमजी का खेल किए जाने की संभावना बनी रहती है। </p>
<p><strong>एक्सईएन के नम्बर में भी गड़बड़ी</strong><br />पर्यटकों ने नवज्योति को बताया कि महल के एंट्री गेट के बाहर केडीए के तीन अधिकारियों के नम्बर लिखे हैं। जिसमें जेईएन व एईएन के मोबाइल नम्बर तो सही हैं लेकिन एक्सीईएन के नम्बर में पीछे के पांच डिजिट में दो नंबर आगे-पीछे कर रखे हैं। ऐसे फोन लगाने पर नम्बर गलत आता है। नवज्योति ने मामले की सत्यता जांची तो शिकायत सही पाई गई। </p>
<p><strong>यह है मामला</strong><br />केडीए द्वारा अभेड़ा महल का संचालन ठेका फर्म के माध्यम से किया जा रहा है। यहां आने वाले पर्यटकों के लिए टिकट दरें निर्धारित की गई हैं। महल आने वाले पर्यटकों के लिए प्रवेश शुल्क 10 रुपए है। वहीं, पार्किंग शुल्क वाहनों की अलग-अलग कैटेगिरी के अनुसार निर्धारित है। यहां बाइक पार्किंग के 5 रुपए व  चार पहिया वाहनों में कार, जीप, आॅटो के 10 रुपए तथा ट्रक, बस और ट्रैक्टर के 25 रुपए किराया निर्धारित है। ऐसे में 15 अगस्त को महल देखने आए कार सवार पर्यटकों को चार पहिया वाहन पार्किंग की पर्ची थमा 25 रुपए वसूल लिए। जबकि, चार पहिया वाहनों की श्रेणी में कार से बसें तक आती हैं और दोनों तरह के वाहनों का पार्किंग किराया भी अलग-अलग है। यहां ठेकेदार द्वारा वाहन पार्किंग किराए की पर्ची में वाहनों की श्रेणी का  जिक्र नहीं किया गया। जिसका फायदा उठाकर कार्मिकों ने कार का किराया भी हैवी वाहनों का वसूल लिया। </p>
<p><strong>पर्यटक बोले-कार के 10 की जगह 25 वसूले</strong><br />स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दोपहर 2.30 बजे अभेड़ा महल गए थे। यहां टिकट काटने वालों ने कार पार्किंग का किराया 25 रुपए वसूला। जबकि, शुल्क 10 रुपए निर्धारित है। इसका विरोध भी किया लेकिन उन्होंने नहीं माना। ऐसे में मजबूरी में जो शुल्क मांगा वो देना पड़ा।<br /><strong>- अनिल कुमार प्रजापति, पर्यटक</strong></p>
<p>मैं परिवार के साथ महल गया था। जहां पार्किंग में कार के 25 रुपए ही वसूले, जो सरासर अवैध वसूली थी। इसकी शिकायत के लिए वहां बोर्ड पर लिखे एक्सईएन को फोन किया तो नम्बर गलत बताया गया।<br /><strong>- हिमांशु कुमार, पर्यटक</strong></p>
<p>दोस्तों के साथ मैं दोपहर को महल घूमने गया था। यहां हम से कार का किराया 25 रुपए वसूला गया। जबकि, यह किराया बस, ट्रैक्टर व ट्रक का होता है। कार, जीप व आॅटो का शुल्क 10 रुपए ही है। टिकट पर सिर्फ चार पहिया वाहन ही लिखा है। पर्ची में वाहनों की श्रेणी न लिखकर हल्के और भारी चार पहिया वाहनों को एक ही श्रेणी में शामिल कर अवैध वसूली को अंजाम दिया। जिसकी शिकायत जेईएन से भी की थी। लेकिन, कुछ नहीं हुआ। <br /><strong>- रिंकू मेहता, पर्यटक</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कॉन्ट्रेट में 15 अगस्त को अभेड़ा महल नि:शुल्क रखे जाने  को लेकर लिखा हुआ नहीं है। लेकिन, दीपावली व होली को नि:शुल्क रखने का जरूर लिखा है। वाहनों की पार्किंग का अधिक शुल्क लिए जाने का मामला गुरुवार को जानकारी में आ गया था। जिस पर शुक्रवार को एईएन को भेज पर्ची देखी तो सही थी। हालांकि, मामला  दिखवाकर जांच करवाएंगे।  वहीं, बोर्ड पर लिखे मेरे नम्बर सही करवाने व पेंटर भेजकर रेट लिस्ट चस्पा करवाने के निर्देश दे दिए हैं।<br /><strong>- अंकित अग्रवाल, एक्सईएन केडीए</strong></p>
<p>यहां पार्किंग का तीन तरह का शुल्क होता है। बाइक के 5, कार का 10 तथा हैवी वाहन का 25 रुपए निर्धारित है। कार के हमने 10 रुपए ही किराया लिया है। इन पर्चियों में साफ तौर पर कार लिखा है। हालांकि, चार पहिया वाहन वाली डायरी गलत छप गई, जिसे सही करवाया जा रहा है। इसमें चार पहिया वाहन की जगह बस,ट्रैक्टर व बड़े वाहन लिखवाया जाना था, जिसे सही करवाने भेज दिया है। यह सुधार वाली बात है। हमने टेंडर लेने के पहले दिन ही महल की सफाई  करवाई, रंगाई-पुताई करवाने के साथ राजसी वैभव को प्रदर्शित करती सैनिकों की पेंटिंग्स भी नई बनवाई। अभी टेंडर लिए 15 दिन ही हुए हैं, हम लगातार सुधार कर रहे हैं। <br /><strong>- शिव शर्मा, संवेदक अभेड़ा महल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Sat, 17 Aug 2024 15:35:53 +0530</pubDate>
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                <title>जिनसे लाखों कमा रहे उन्हीं की जान जोखिम में डाल रहे  </title>
                                    <description><![CDATA[यूआईटी टिकट के नाम पर पैसा तो वसूल रही है लेकिन महल की दशा सुधारने में कोई ध्यान नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/putting-the-lives-of-those-from-whom-they-are-earning-millions-at-risk/article-66046"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/abheda.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अभेड़ा महल आने वाले पर्यटकों को ट्यूरिज्म के नाम पर लूटा जा रहा है। कला, संस्कृति और वैभवशाली इतिहास की झलख की जगह गंदगी के दर्शन करवाए जा रहे हैं। महल परिसर में जगह-जगह लगे गंदगी के ढेर विरासत के रंग बदरंग कर रहे हैं। कूड़े-कचरों से उठती दुर्गंध पर्यटकों को बीमारियों की जद में ला रहा है। टिकट का पैसा लेने के बावजूद पर्यटकों को सुविधाओं से महरूम रखा जा रहा है। दरअसल, अभेड़ा महल का संचालन व रखरखाव की जिम्मेदारी नगर विकास न्यास की है। टिकट के रूप में यूआईटी सालाना पर्यटकों से करीब ढाई से तीन लाख रुपए वसूल करती है। यह पैसा तो मात्र महल में दाखिल होने की एंट्री फीस है। जबकि, महल में कैंटिन, प्री-वेडिंग व बोटिंग के अलग चार्ज हैं। इन सबको मिला लिया जाए तो कमाई का आंकड़ा कई गुना बढ़ जाता है। इसके बावजूद यूआईटी महल के जीर्णोंद्धार व सुविधाएं विकसित करने पर ध्यान नहीं दे रही। नतीजन, पर्यटक खुद को ठगा सा महसूस कर रहा है। </p>
<p><strong>झूले टूटे, फाउंटेन बंद</strong><br />बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले लगाए गए थे, जो तीन साल से टूटे हुए हैं। वहीं, फाउंटेन भी लंबे समय से बंद हैं। मर्दाना व जनाना घाट के पास तालाब में गंदगी का ढेर लगे हुए हैं। झूले टूटे होने से बच्चों को मायूस लौटना पड़ता है। </p>
<p><strong>लाखों की कमाई फिर भी गंदगी के ढेर</strong><br />अभेड़ा महल से मिली जानकारी के अनुसार, महल को देखने के लिए प्रतिदिन 100 से ज्यादा पर्यटक आते हैं। जबकि, रविवार को इनकी संख्या बढ़कर 150 हो जाती है। जिनसे एंट्री फीस व पार्किंग शुल्क मिलाकर महीने में करीब 40 से 50 हजार रुपए तथा सालाना ढाई से तीन लाख रुपए की यूआईटी को इनकम होती है। इसके बावजूद इसके रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया जाता है।  हालात यह हैं, महल परिसर में करीब एक दर्जन स्थानों पर पानी की खाली बोतलें, भोजन सामग्री व कैंटिंन का कचरा पड़ा हुआ है। जिनसे उठती दुर्गंध से लोगों का सांस लेना तक मुश्किल हो रहा है।</p>
<p><strong>पांच दिन से नहीं उठा कचरा</strong><br />कर्मचारियों ने बताया कि महल की साफ-सफाई का ठेका दो महीने पहले ही हुआ है। ठेकेदार के सफाई कर्मचारी पिछले पांच दिन से काम पर नहीं आए। नतीजन, महल परिसर में हर जगह कचरे का ढेर लगा हुआ है। एक दर्जन स्थानों पर डशबीन तक नहीं है। जबकि, यहां कैंटिन भी संचालित है। पॉलिथीन, प्लास्टिक की बोतलें, खाद्यय सामग्री, अपशिष्ट पदार्थ सहित गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। शिकायत के बावजूद यूआईटी अधिकारियों द्वारा ध्यान ध्यान तक नहीं दिया जा रहा। </p>
<p><strong>पान-गुटखों की पीक से लाल रानी महल की दीवारें </strong><br />गुमानपुरा निवासी सैयद मीर, फुरकान व तैयब ने बताया कि देखरेख के अभाव में महल दुर्दशा का शिकार हो रहा है। यहां आने वाले पर्यटकों ने रानी महल की दीवारें व झरोखों को पान-गुटखों की पीक से बदरंग कर दिया है। वहीं, कोटा शैली की पेंटिंग्स खराब कर दी है। यूआईटी टिकट के नाम पर पैसा तो वसूल रही है लेकिन महल की दशा सुधारने में कोई ध्यान नहीं है।   </p>
<p><strong>पीने को पानी नहीं, सडांध मार रहे सुविधा घर </strong><br />बोरखेड़ा निवासी सुरेश सुमन व अजय कुश्वाह ने बताया कि सोमवार को नए वर्ष पर परिवार को लेकर अभेड़ा महल घूमने गए थे। यहां पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। मजबूरी में कैंटिन से महंगी दामों पर पानी की बोतल खरीदनी पड़ रही है। डशबीन नहीं होने से मजबूरी में इधर-उधर ही फेंकना पड़ रहा है। सुविधा घरों की हालत बहुत ही बूरी है। सडांध मारते सुविधाघरों में एक पल भी रुकना मुश्किल हैं। महिलाओं के लिहाज से सुविधाएं बिलकुल भी नहीं है। यहां आना समय खराब करना जैसा है। </p>
<p><strong>तालाब किनारे सांस लेना तक मुश्किल</strong><br />नेचर प्रमोटर एएच जैदी ने बताया कि महल परिसर में बना मुख्य तालाब आकर्षण का केंद्र है। लेकिन, इन दिनों पूरा तालाब गंदगी से अटा पड़ा है। लंबे समय से तालाब की सफाई नहीं हुई। पानी में काई जमी हुई है, जिससे उठती दुर्गंध से पर्यटकों का सांस लेना तक मुश्किल हो रहा। वहीं, जलीय जीवों का दम घुट रहा है। देश प्रदेश से आने वाले पक्षियों को ठोर नहीं मिलती। इससे पक्षियों की संख्या में भी लगातार गिरावट बनी हुई है। </p>
<p><strong>एक्सपर्ट व्यू </strong><br /><strong>बदबू, शरीर में कई रोगों को देती है जन्म</strong><br />जहां कूड़ा-कचरा व गंदगी होगी वहां बैक्टेरिया पनपेंगे, जो हवा के जरिए सांस के साथ शरीर में जाने से फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। तेज खुशबू भी बदबू की श्रेणी में आती है, इससे एलर्जी बढ़ेगी, जो धीरे-धीरे अस्थमा का कारण बनेगी। वहीं, फील गुड का फेक्टर कमजोर होगा और उल्टियां होना, मन खराब होना सहित कई परेशानी भी बढ़ सकती है।  इसके अलावा, गंदगी से पनपे बैक्टेरिया  खाने-पीने की चीज के साथ शरीर में पहुंचने पर इंफेक्शन बढ़ाएंगे। इन सबसे बचाव के लिए मास्क लगाना बेहतर बचाव है। <br /><strong>- डॉ. राजेंद्र ताखर, श्वांस रोग विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेज कोटा </strong></p>
<p><strong>गार्डन का मेंटिनेंस करवाएंगे</strong><br />महल के गार्डन की सफाई के लिए कल भी ठेकेदार को बोला था, आज भी बोल दिया है। छुट्टियों का माहौल चल रहा है, इसलिए देरी हो गई होगी। फाउंटेन चलाने व झूले लगवाने के लिए टेंडर लगाया हुआ है। वहीं, डशबीन भी लगवाएंगे। यह सभी काम करवाए जाएंगे। फिलहाल, रिनोवेशन का टेंडर नहीं लगा है लेकिन उच्चाधिकारियों तक इसका मैसेज पहुंचा दिया है। गार्डन का मेंटिनेंस करवाएंगे। <br /><strong>- पंकज, जेईएन, नगर विकास न्यास</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jan 2024 19:11:29 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title> विरासत के रंग हुए बदरंग : अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा अभेड़ा महल</title>
                                    <description><![CDATA[ जिम्मेदारों की लापरवाही से कोटा का अभेड़ा महल दुर्दशा का शिकार हो रहा है। देखरेख व मरम्मत के अभाव में महल अपनी चमक खोता जा रहा है। यहां सुरक्षा गार्ड व अधिकारियों की मॉनिटरिंग का अभाव है। जिससे महल दुर्दशा का शिकार हो रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-colors-of-heritage-discolored-abheda-mahal-shedding-tears-on-its-plight/article-46635"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/photo-size-630-400-(4)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। किसे दिखाऊं दहन दाह, किस अंचल में सो जाऊं, पास बहुत है पतझर मुझसे, दूर बहुत मधुमास है। जल-जल कर बुझ जाऊं, मेरा बस इतना इतिहास है। कोटा का वैभवशाली इतिहास और कलात्मक चित्रशैली का प्रतीक अभेड़ा महल अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। दीवारों से इतिहास के रंग धुंधले हो गए। वहीं, राजसी वैभव, शाही विवाह सवारी, हाथी-घोड़ों पर सवार फौज का लश्कर और भाले लेकर चल रहे सैनिकों का पराक्रम से रुबरू कराती चित्रकारी अनदेखी के चलते बदहाल हो गई। दरअसल, जिम्मेदारों की लापरवाही से कोटा का अभेड़ा महल दुर्दशा का शिकार हो रहा है। यहां पर्यटकों के लिए टिकट व्यवस्था तो है लेकिन प्रभावी मॉनिटरिंग नहीं है। देखरेख व मरम्मत के अभाव में महल अपनी चमक खोता जा रहा है। दीवारें पान और गुटखों की पीक से बदरंग हो रही है। वहीं, रानी महल की अंदरुनी दीवारों पर अपशब्द लिखे हुए हैं, जिससे यहां परिवार के साथ आने वाले पर्यटक शर्मसार हो रहे हैं। वहीं, जलाशय भी गंदगी से अटे हैं। अव्यवस्थाओं के चलते पर्यटकों का अभेड़ा महल के प्रति मोहभंग हो रहा है। </p>
<p><strong>बायोलॉजिकल पार्क जा रहे पर्यटक</strong> <br />नाम न छापने की शर्त पर महल में तैनात कर्मचारी ने बताया कि पहले यहां बड़ी तादाद में सैलानी आते थे लेकिन वर्तमान में सौन्दर्यीकरण कार्य नहीं होने, धुंधली पेंटिंग्स, कुंडों व तालाब की सफाई नहीं होने सहित अन्य कारणों से पर्यटकों की संख्या में तेजी से गिरावट दर्ज हुई है। पर्यटक यहां आने से ज्यादा बायोलॉजिकल पार्क में जाना ज्यादा पसंद करते हैं। जबकि, अभेड़ा महल का टिकट दर बायोलॉजिकल पार्क की अपेक्षा बहुत कम है। सौंदर्यीकरण व सफाई कार्य हों तो अभेड़ा महल चमक फिर से अपनी चमक बिखरेगा।  </p>
<p><strong>गुटखों की पीक से लाल रानी महल की दीवारें </strong><br />नेचर प्रमोटर एएच जैदी ने बताया कि अभेड़ा महल बहुत ही खूबसूरत है। इसका संचालन यूआईटी द्वारा किया जाता है। यहां सुरक्षा गार्ड व अधिकारियों की मॉनिटरिंग का अभाव है। जिससे महल दुर्दशा का शिकार हो रहा है। यहां आने वाले पर्यटकों ने रानी महल की दीवारें व झरोखों को पान-गुटखों की पीक से बदरंग कर दिया है। वहीं, कोटा शैली की पेंटिंग्स खराब कर दी है। इसके अलावा महल के नजदीक बने कुंड में प्लास्टिक की बोटलें फेंक कर गंदा कर रखा है। गंदगी से उठती दुर्गंध से लोगों का सांस लेना तक मुश्किल हो रहा है। </p>
<p><strong>तलाबों की नहीं हो रही सफाई </strong><br />जैदी के अनुसार, महल परिसर में बना मुख्य तालाब आकर्षण का केंद्र है। लेकिन, इन दिनों तालाब का सौंदर्य कमल के पत्तों से दबा हुआ है। लंबे समय से तालाब की सफाई नहीं हुई। पानी में काई जमी हुई है, जिससे उठती दुर्गंध से पर्यटक परेशान हैं। वहीं, रानी महल के पास रियासतकाल में बने दो कुंड, जिसमें कभी मगरमच्छ रहा करते थे, आज वहां बोतलों का ढेर लगा हुआ है। इससे जलीय जीवों का दम घुट रहा है। देश-प्रदेश से आने वाले पक्षियों को ठोर नहीं मिलती। इससे पक्षियों की संख्या में भी लगातार गिरावट बनी हुई है। ऐसे में यूआईटी प्रशासन को तालाब की सफाई करवाकर महल की खूबसूरती बरकरार रखनी चाहिए।</p>
<p><strong>20 साल पहले हुआ था महल का रिनोवेशन</strong><br />जानकारी के मुताबिक, यूआईटी ने साढ़े तीन करोड़ की लागत से वर्ष 2003 में अभेड़ा महल का जीर्णोंद्धार शुरू किया था, जो तीन साल बाद 2006 में पूरा हुआ। रिनोवेशन के तहत भवन की मरम्मत, रंग-रोशन, सुलभ कॉम्पलेक्स, मुगल गार्डन, रानी महल की मरम्मत व नक्काशी, झरोखे, तालाब, बाहरी दीवारों पर राज दरबार की सवारी जुलूस व राजसी वैभव को प्रदर्शित करती पेटिंग्स सहित कई कार्य करवाए थे। </p>
<p><strong>पर्यटन प्रेमियों ने दिए सुझाव</strong><br />- पर्यटन प्रेमियों के अनुसार, यूआईटी प्रशासन अभेड़ा महल की टिकट दर में बढ़ोतरी की जाए। ताकि, उससे होने वाली आय से महल का मेंटिनेंस किया जा सके। <br />- सीसीटीवी कैमरों की व सुरक्षा गार्ड की संख्या बढ़ाई जाए<br />- अधिकारी करें मॉनिटरिंग। <br />- कुंड, तालाबों  व परिसर की साफ-सफाई की पुख्ता व्यवस्था हो। <br />- धुंधली होती पेंटिंग्स को रंग रोगन के लिए फिर से जीवंत किया जाए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 May 2023 15:32:01 +0530</pubDate>
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                <title>अपने ही नोंच रहे अपनी विरासत का दामन</title>
                                    <description><![CDATA[यूआईटी ने साढ़े तीन करोड़ की लागत से वर्ष 2003 में अभेड़ा महल का जीर्णोंद्धार शुरू किया था, जो तीन साल बाद 2006 में पूरा हुआ। कोटा के गौरवशाली इतिहास का साक्षी रहा अभेड़ा महल दुर्दशा का शिकार हो रहा है। पर्यटकों के लिए टिकट व्यवस्था तो है लेकिन प्रभावी मॉनिटरिंग नहीं है। देखरेख के अभाव में लोगों ने महल की दीवारों को पान और गुटखों की पीक से बदरंग कर दिया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-hem-of-his-heritage-is-being-scratched-by-himself/article-41587"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/apne-hi-nocha-rahe-apni-virasat-ka-daman..kota-news..3.4.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कला, संस्कृति और प्रकृति के अनूठे संगम के बीच चंबल की गोद में बसा अभेड़ा महल अपनी चमक खोता जा रहा है। कलात्मक चित्रशैली और कोटा का वैभवशाली इतिहास अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। दीवारों से इतिहास के रंग और पेंटिंग्स धुंधले हो गए। वहीं, राजसी वैभव, युद्ध नजारे, जंग के मैदान में दौड़ते घोड़े-हाथी और भाले लेकर चल रहे सैनिकों का पराक्रम से रुबरू कराती चित्रकारी बदहाल हो गई। दरअसल, जिम्मेदारों की लापरवाही से कोटा के गौरवशाली इतिहास का साक्षी रहा अभेड़ा महल दुर्दशा का शिकार हो रहा है। पर्यटन स्थल अभेड़ा महल का संचालन नगर विकास न्यास द्वारा किया जा रहा है। यहां पर्यटकों के लिए टिकट व्यवस्था तो है लेकिन प्रभावी मॉनिटरिंग नहीं है। देखरेख के अभाव में लोगों ने महल की दीवारों को पान और गुटखों की पीक से बदरंग कर दिया। वहीं, रानी महल की अंदरुनी दीवारों पर अपशब्द लिखे हुए हैं, जिससे यहां आने वाले पर्यटक शर्मसार हो रहे हैं। वहीं, जलाशय भी गंदगी से अटे हैं। दुर्गंध से सैलानियों का सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है।</p>
<p><strong>साढ़े तीन करोड़ से हुआ था महल का रिनोवेशन</strong><br />यूआईटी ने साढ़े तीन करोड़ की लागत से वर्ष 2003 में अभेड़ा महल का जीर्णोंद्धार शुरू किया था, जो तीन साल बाद 2006 में पूरा हुआ। रिनोवेशन के तहत भवन की मरम्मत, रंग-रोशन, सुलभ कॉम्पलेक्स, मुगल गार्डन, रानी महल की मरम्मत व नक्काशी, झरोखे, तालाब, बाहरी दीवारों पर राज दरबार की सवारी जुलूस व राजसी वैभव को प्रदर्शित करती पेटिंग्स सहित कई कार्य करवाए थे। </p>
<p><strong>दीवारों पर अपशब्द देख पर्यटक हो रहे शर्मसार </strong><br />गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज की चित्रकला प्रो. डॉ. शालिनी भारती ने बताया कि कुछ दिन पहले रिसर्च स्टूडेंट्स को लेकर अभेड़ा महल आए थे। बाहर की दीवार पर शाही सवारी, विवाह रस्म व हाथी-घोड़े व भाले लेकर चल रहे सैनिकों की पेंटिंग्स बदरंग हो चुकी है। वहीं, रानी महल की अंदरुनी दीवारों पर राजसी वैभव को प्रदर्शित करते कलात्मक चित्रों पर लोगों ने अपने नाम और अभद्र कमेंट लिखकर खराब कर दिए हैं। जबकि,  महल देखने आने वाले पर्यटकों से टिकट लिया जाता है लेकिन मॉनिटरिंग नहीं की जाती। जिसका फायदा प्रेमी युगल व अन्य शरारती तत्व उठाते हैं और दीवारों पर नाम व अभद्र कमेंट लिख धरोहर को नुकसान पहुंचा रहे हैं। वहीं, परिवार के साथ आने वाले पर्यटकों को शर्मिंदगी महसूस होती है। </p>
<p><strong>पान-गुटखों की पीक से लाल रानी महल की दीवारें </strong><br />नेचर प्रमोटर एएच जैदी ने बताया कि अभेड़ा महल बहुत ही खूबसूरत है। इसका संचालन यूआईटी द्वारा किया जा रहा है। यहां सुरक्षा गार्ड की कमी है और अधिकारियों की मॉनिटरिंग भी नहीं है। देखरेख के अभाव में महल दुर्दशा का शिकार हो रहा है। यहां आने वाले पर्यटकों ने रानी महल की दीवारें व झरोखों को पान-गुटखों की पीक से बदरंग कर दिया है। वहीं, कोटा शैली की पेंटिंग्स खराब कर  दी है। इसके अलावा महल के नजदीक बने कुंड में प्लास्टिक की बोटलें फेंक कर गंदा कर रखा है। गंदगी से उठती दुगंध से लोगों का सांस लेना तक मुश्किल हो रहा है। यूआईटी प्रशासन को टिकट दर में बढ़ोतरी कर पर्याप्त गार्ड की व्यवस्था करनी चाहिए। साथ ही मॉनिटरिंग बढ़ानी चाहिए ताकि, शरारती तत्वों पर निगरानी रखी जा सके। </p>
<p><strong>कमल के पत्तों में दबा तालाब का सौंदर्य</strong><br />जैदी ने बताया कि महल परिसर में बना मुख्य तालाब आकर्षण का केंद्र है। लेकिन, इन दिनों पूरा तालाब कमल के पत्तों से अटा पड़ा है। लंबे समय से तालाब की सफाई नहीं हुई। पानी में काई जमी हुई है, जिससे उठती दुर्गंध से पर्यटक परेशान हैं। वहीं, जलीय जीवों का दम घुट रहा है। देश प्रदेश से आने वाले पक्षियों को ठोर नहीं मिलती। इससे पक्षियों की संख्या में भी लगातार गिरावट बनी हुई है। ऐसे में यूआईटी प्रशासन को तालाब की सफाई करवाकर महल की खूबसूरती बरकरार रखनी चाहिए।</p>
<p><strong>पर्यटन प्रेमियों ने दिए सुझाव</strong><br />- पर्यटन प्रेमियों के अनुसार, यूआईटी प्रशासन अभेड़ा महल की टिकट दर में बढ़ोतरी की जाए। ताकि, उससे होने वाली आय से महल का मेंटिनेंस किया जा सके। <br />- सुरक्षा गार्ड की संख्या बढ़ाई जाए<br />- सीसीटीवी कैमरों की संख्या में इजाफा किया जाए। <br />- अधिकारियों द्वारा मॉनिटरिंग की जाए। <br />- कुंड, तालाबों  व परिसर की सफाई की पुख्ता व्यवस्था हो। <br />- धुंधली होती पेंटिंग्स को रंग रोगन के लिए फिर से जीवंत हो। </p>
<p><strong>मगरमच्छों के तालाब में बोटलों का ढेर</strong><br />प्रो. भारती ने बताया कि रियासतकाल में रानी महल के आसपास बने दो तालाबों में मगरमच्छ पाले जाते थे। जिनकी देखरेख पाटनपोल निवासी अब्दुल रजाक करते थे। यह तालाब महल का मुख्य आकर्षण हुआ करता था लेकिन वर्तमान में यह दुर्दशा का शिकार हो रहा है। यहां आने वाले पर्यटक प्लास्टिक व कोल्ड ड्रिंक की बोटले फेंक जाते हैं। यहां कचरा पात्र है, इसके बावजूद लोग तालाबों में कचरा फेंक महल की खूबसूरती को गंदा कर रहे हैं। इन्हें रोकने-टोकने के लिए कोई गार्ड व कर्मचारी भी मौजूद नहीं है। ऐसे में विरासत अपना वजूद खोती जा रही है। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं पर्यटक</strong><br />बोरखेड़ा निवासी सुरेश सुमन व अजय कुश्वाह ने बताया कि रविवार को छुट्टी का दिन होने से परिवार को लेकर अभेड़ा महल घूमने आए थे। महल में प्रवेश करते ही तालाब पर नजर पड़ी, जो कमल के पत्तों से भरा पड़ा था। दुर्गंध भी आ रही थी। वहीं, महल की मुख्य दीवारों पर राजसी वैभव व विवाह समारोह की चित्रकारी के रंग फीके पड़ चुके हैं। वहीं, रानी महल की दीवारों पर प्रेम संदेश व अभद्र संदेश लिखे हैं, जिसे देख शर्मिंदगी महसूस हुई। यूआईटी प्रशासन को कोटा की धरोहर ध्यान रखना चाहिए।</p>
<p><strong>यूआईटी सचिव ने नहीं उठाया फोन</strong><br />अभेड़ा महल की दुर्दशा को लेकर दैनिक नवज्योति ने यूआईटी सचिव राजेश जोशी को फोन व मैसेज किया लेकिन उन्होंने <strong>न तो मैसेज का जवाब दिया और न ही फोन अटैंड किया। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Apr 2023 14:57:08 +0530</pubDate>
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