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                <title>सुप्रीम कोर्ट ने लगाई NCERT को फटकार: विवादित पुस्तक पर लगाया प्रतिबंध, जानें क्या है पूरा मामला?</title>
                                    <description><![CDATA[उच्चतम न्यायालय ने न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का संदर्भ देने वाली NCERT कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान पुस्तक के पुनर्मुद्रण और डिजिटल प्रसार पर लगाया प्रतिबंध। कोर्ट ने इसे बदनाम करने की साजिश बताया। दो सप्ताह में मांगी अनुपालन रिपोर्ट।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-reprimands-ncert-bans-textbook-containing-chapter-on-corruption/article-144704"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/ncert-and-supreme-court.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की उस पाठ्यपुस्तक के पुनर्मुद्रण और डिजिटल प्रसार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है, जिसमें न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का संदर्भ दिया गया था। न्यायालय ने प्रचलन में मौजूद किताबों की प्रतियों को तुरंत जब्त करने का निर्देश दिया और इस संबंध में दो सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट मांगी ।</p>
<p>न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह एनसीईआरटी के निदेशक और उन सभी स्कूलों के प्रधानाचार्यों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी जहां यह किताब पहुंची है। उन्हें अपने परिसर में मौजूद किताब की सभी प्रतियों को तुरंत जब्त कर सील करना होगा। शीर्ष अदालत ने यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि संबंधित पुस्तक के आधार पर छात्रों को कोई निर्देश या शिक्षा न दी जाए। सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को इस आदेश का पालन करने और दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट भेजने को कहा गया है।</p>
<p>शीर्ष अदालत ने चेतावनी दी कि इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों या बदले हुए शीर्षकों के जरिए इस आदेश का उल्लंघन करने की किसी भी कोशिश को अदालत की अवमानना और निर्देशों की सीधी अवहेलना माना जाएगा। इससे पहले बुधवार को मुख्य न्यायाधीश ने पुस्तक की सामग्री पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा था कि वह किसी को भी संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं देंगे। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के नेतृत्व वाली पीठ ने इसे न्यायपालिका के खिलाफ एक गहरी साजिश करार दिया। वरिष्ठ अधिवक्ताओं कपिल सिब्बल और डॉक्टर अभिषेक मनु सिंघवी ने भी अदालत के समक्ष इस पाठ्यपुस्तक की सामग्री पर चिंता जताई थी और कहा था कि यह पूरी न्यायपालिका की छवि को खराब कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Feb 2026 15:16:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> NCERT ने 10वीं की किताब से हटाई पीरियोडिक टेबल, कांग्रेस ने मीम बनाकर कसा तंज</title>
                                    <description><![CDATA[सैलेबस में की गई इस कांट-छांट को बच्चों के सिर से बोझ कम करने वाला कदम बताया जा रहा है। NCERT के इस कदम से फिर से विवाद खड़ा हो गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/ncert-removed-periodic-table-from-10th-book/article-47458"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/pt.png" alt=""></a><br /><p>नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने 10वीं क्लास की किताब से पीरियोडिक टेबल को निकालने का फैसला लिया है। इसके अलावा अब 10वीं के बच्चों को लोकतंत्र और ऊर्जा का स्रोत टॉपिक भी नहीं पढ़ना होगा। सैलेबस में की गई इस कांट-छांट को बच्चों के सिर से बोझ कम करने वाला कदम बताया जा रहा है। NCERT के इस कदम से फिर से विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी पार्टियां अब इसकी आलोचना कर रही है। <br /><br /><strong>कांग्रेस ने ली चुटकी</strong><br />केरल कांग्रेस के ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट के जरिए इस फैसले पर चुटकी ली गई। इस ट्वीट से कांग्रेस ने पीएम मोदी पर निशाना साधा। कांग्रेस ने पीरियोडिक टेबल हटाने के मामले पर मीम बनाया। केरल कांग्रेस ने ट्वीट में लिखा- पीरियोडिक टेबल के साथ हुआ ऐतिहासिक अन्याय अब ठीक कर दिया गया है। नई पाठ्यपुस्तकें जल्द ही आ रही है।<br /><br /></p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Historical injustice to the periodic table fixed; updated textbooks coming soon! <a href="https://t.co/CfeLHQVovM">pic.twitter.com/CfeLHQVovM</a></p>
— Congress Kerala (@INCKerala) <a href="https://twitter.com/INCKerala/status/1664145351878807552?ref_src=twsrc%5Etfw">June 1, 2023</a></blockquote>
<p>

<br /><br /><br />इससे पहले जब NCERT ने थ्योरी ऑफ एवोल्यूशन को किताब से बाहर किया था तब भी जमकर विवाद हुआ था। इस बार भी पीरियोडिक टेबल समेत लोकतंत्र और राजनीतिक दलों वाले टॉपिक्स हटाए जाने के इस फैसला का विरोध किया जा रहा है।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Jun 2023 16:44:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किताबों में सिखों के इतिहास को विकृत करने की निंदा</title>
                                    <description><![CDATA[महिला किसान नेता ने पंजाब सरकार के साथ-साथ शिरोमणि कमेटी और चीफ खालसा दीवान से अपील की है कि वह एन.सी.ई.आर.टी. की पुस्तकों का उपयोग न करें बल्कि राज्य के सभी प्रकार के स्कूलों में बच्चों को पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की पाठ्यपुस्तकों ही पढ़ाएं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/condemnation-of-distorting-the-history-of-sikhs-in-books/article-42340"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/books.png" alt=""></a><br /><p>जालंधर। केंद्र सरकार की संस्था नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एन.सी.ई.आर.टी.) द्वारा स्कूली पाठ्यपुस्तकों में किए गए अवैध बदलावों की कड़ी आलोचना करते हुए महिला किसान यूनियन ने आरोप लगाया है कि संघ समर्थकों के इशारे पर भारतीय इतिहास को तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है जो संवैधानिक मानदंडों के खिलाफ है और एक विभाजनकारी और पक्षपातपूर्ण एजेंडे को उजागर करता है। जिसे तुरंत वापस लेने और पाठ्यक्रम को संशोधित करने की आवश्यकता है।<br /><br />महिला किसान यूनियन की अध्यक्ष राजविंदर कौर राजू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान दोनों पर भारतीय इतिहास, राजनीति विज्ञान और नागरिक शास्त्र पर विकृत पाठ्य पुस्तकें प्रकाशित करने का आरोप लगाते हुए एक तीखा बयान जारी कर कहा है कि श्री आनंदपुर साहिब के प्रस्ताव १९७३ के माध्यम से अलग देश की मांग कभी नहीं की गई जैसा की एनसीईआरटी की १२वीं क्लास पाठ्यपुस्तक में लिखा गया है जिससे सिख समुदाय की भावनाओं को बहुत ठेस पहुंची है।<br /><br />केंद्र सरकार से पुरजोर अपील करते हुए किसान नेता ने मांग की कि इतिहास, राजनीति विज्ञान और नागरिक शास्त्र की बदली हुई स्कूली पाठ्यपुस्तकों को तुरंत वापस लिया जाए और पाठ्यक्रम की किताबों को सिखों और पंजाब के सही इतिहास को ध्यान में रखते हुए फिर से लिखा जाए ताकि स्कूली बच्चे प्रामाणिक भारतीय इतिहास और विशेष रूप से सिख राजनीति का ठीक से ज्ञान ले सकें।<br /><br />संघीय भारत में बहुपक्षीय और सामंजस्यपूर्ण केंद्र-राज्य संबंधों की स्थापना के लिए राष्ट्रव्यापी मांगों को सही ठहराते हुए, राजू ने कहा कि श्री आनंदपुर साहिब संकल्प को संसद द्वारा अनुमोदित राजीव-लोंगोवाल समझौते में वैध माना गया था और यह प्रस्ताव भी संदर्भित किया गया था और उस समय सरकारिया आयोग को सौंपा गया था जिसने इस प्रस्ताव के संदर्भ में संसद को अपनी सिफारिशें की थीं और इन्हें भारत सरकार ने स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा कि भगवा दलों द्वारा जानबूझकर सिखों को अलगाववादी के रूप में चित्रित करना एक गहरी शरारत है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।<br /><br />महिला किसान नेता ने पंजाब सरकार के साथ-साथ शिरोमणि कमेटी और चीफ खालसा दीवान से अपील की है कि वह एन.सी.ई.आर.टी. की पुस्तकों का उपयोग न करें बल्कि राज्य के सभी प्रकार के स्कूलों में बच्चों को पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की पाठ्यपुस्तकों ही पढ़ाएं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Apr 2023 14:51:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब हमारे ऋतुराज की कन्यादान और जयपुर में लिखे बिहारी के दोहे भी नहीं पढ़ाए जाएंगे एनसीईआरटी में </title>
                                    <description><![CDATA[ बेल्जियम मूल के उन बाबा कामिल बुल्के पर लिखा गया सर्वेश्वरदयाल सक्सेना का अध्याय ‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ हटा दिया गया है, जिनका संत तुलसीदास और भगवान राम पर उल्लेखनीय काम है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/now-our-riturajs-kanyadaan-and-biharis-couplets-written-in-jaipur/article-42244"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/ncert.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम में बदलाव को लेकर बड़ा हल्ला मुगलों से संबंधित अध्याय हटाए जाने को लेकर हो रहा है, लेकिन इस शोर में यह बात दब गई है कि कक्षा नौ की पुस्तक स्पर्श भाग एक से प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी का लिखा प्रसिद्ध लेख ‘धर्म की आड़ में’ भी हटा दिया गया है। यह लेख आज भी देश के हालात पर प्रासंगिक है। राजस्थान के लिए सबसे दुखद बात ये है कि कक्षा दस की ‘हिन्दी क्षितिज’ भाग दो से देश के मशहूर गतिशील बुद्धिवादी और अपने दौर के अनूठे कवि ऋतुराज की मार्मिक कविता ‘कन्यादान’ को हटा दिया गया है। यह कविता देश की बेटियों के कोमल हृदयों में अत्याचारी लोगों से जूझने और साहस के साथ डटे रहने का जज्बा भरती है।<br /><br />बेल्जियम मूल के उन बाबा कामिल बुल्के पर लिखा गया सर्वेश्वरदयाल सक्सेना का अध्याय ‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ हटा दिया गया है, जिनका संत तुलसीदास और भगवान राम पर उल्लेखनीय काम है। गिरिजाकुमार माथुर की कविता ‘छाया मत छूना’ और नजीर अकबराबादी की कविता ‘आदमीनामा’ को हटा दिया गया है। कक्षा सात की ‘वसंत भाग दो‘ से बालकृष्ण शर्मा नवीन की कविता ‘विप्लव गान’ को अब डिलीट कर दिया गया है।  यह वही राष्ट्रवादी कविता है, जिसे पढ़कर कई पीढ़ियों ने देश से प्रेम करना सीखा है। इसकी यह पंक्ति <br />आपको भी याद होगी : <br /><br />‘कवि तुम ऐसी तान सुनाओ, जिससे उथल पुथल <br />मच जाए, एक हिलोर इधर से, एक हिलोर उधर से <br />आए’ को भी हटा दिया गया है।<br /><br /></p>
<p><strong>कन्यादान-ऋतुराज</strong><br />कितना प्रामाणिक था उसका दु:ख <br />लड़की को दान में देते वक्त <br />जैसी वही उसकी अंतिम पूंजी हो। </p>
<p>लड़की अभी सयानी नहीं थी <br />अभी इतनी भोली सरल थी <br />कि उसे सुख का आभास तो होता था <br />लेकिन दु:ख बांचना नहीं आता था <br />पाठिका थी वह धुंधले प्रकाश की <br />कुछ तुकों और कुछ लयबद्ध पंक्तियों की। </p>
<p>मां ने कहा, पानी में झांककर <br />अपने चेहरे पर मत रीझना<br />आग रोटियां सेंकने के लिए है <br />जलने के लिए नहीं <br />वस्त्र आभूषण शाब्दिक भ्रमों की तरह <br />बंधन हैं स्त्री जीवन के </p>
<p>मां ने कहा लड़की होना <br />पर लड़की जैसी दिखाई मत देना। <br /><br /><strong>बाबर से औरंगजेब तक सब हटे, राजपूत-मुगल शादियां बरकरार</strong><br />‘हमारे अतीत भाग दो’ से बाबर से लेकर औरंगजेब तक बहुत कुछ हटाया गया है, लेकिन राजपूतों के साथ मुगलों की शादी वाला हिस्सा रख दिया गया है। ‘सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन भाग तीन’ से आपराधिक न्याय प्रणाली संबंधी महत्त्वपूर्ण अध्याय भी खत्म किया गया है। <br /><br /><strong>अभी न होगा मेरा अंत का भी हो ही गया है आखिरकार अब अंत</strong><br />आठवीं की वसंत भाग तीन में हिन्दी के प्रसिद्ध कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविता थी : अभी न होगा मेरा अंत, अभी-अभी ही तो आया है मेरे जीवन में मृदुल वसंत। ऐसी अनेक कविताएं हैं, जो राष्ट्रवादी हैं और प्रगतिशीलतावादी दौर से पहले की हैं, लेकिन उन्हें भी डिलीट कर दिया गया है। साहित्यकारों का मानना है कि छायावादी कवियों में सिर्फ निराला ही ऐसे थे, जिन्होंने भारतीय संस्कारों, ऋतुओं के वर्णन के माध्यम से बनने वाले कोमल रूपकों और अनूठी भाषा के सरोकारों को अपनी तरह गढ़ा है। <br /><br /><strong>जॉर्ज पंचम की नाक भी गई और स्त्री शिक्षा विरोधी कुतर्क भी</strong><br />आठवीं में महावीरप्रसाद  द्विवेदी का लेख था : स्त्री शिक्षा विरोधी कुतर्कों के खंडन। इसमें ऐसे दिलचस्प तर्क थे, जो आज भी स्त्री विरोधी मानसिकता वाले प्राय: देते हैं। यह तो हटा ही है, प्रसिद्ध कहानीकार कमलेश्वर की बेहद चर्चित कहानी जॉर्ज पंचम की नाक भी अब कृतिका दो से गायब हो गई है। यह कहानी इस तरह लिखी गई है कि इसके भीतर के व्यंग्य को समझकर बच्चे हिन्दी साहित्य से जुड़ते चले जाते हैं और उनमें पढ़ने की ललक जगती है। <br /><br /><strong>न बिहारी रहे, न महादेवी और न अंतोन चेखव</strong><br />महादेवी वर्मा की मधुर-मधुर मेरे दीपक जल तो स्पर्श भाग दो से हटा दी है, लेकिन राजस्थान के लिए यह असहनीय है कि जयपुर के राजा सवाई जयसिंह के प्रसिद्ध कवि बिहारी के दोहे भी हटा दिए गए हैं। गौरतलब है कि ये दोहे आमेर के निकट एक मंदिर पर लिखे गए और हर दोहे पर सवाई जयसिंह बिहारी को एक दोहे पर एक अशरफी देते थे। अगर बिहारी, महादेवी और कमलेश्वर नहीं रहेंगे तो आप ही सोचिए कि अंतोन चेखव की गिरगिट भला कैसे रह जाएगी!</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Apr 2023 15:10:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मार्केट में एनसीईआरटी की डुप्लीकेट बुक्स, सस्ते के फेर में भारी नुकसान</title>
                                    <description><![CDATA[ प्रदेश के कई जिलों में चोरी छिपे एनसीईआरटी की डुप्लीकेट किताबें छाप कर कम रेट में बेची जा रही हैं। डुप्लीकेट किताबों से छात्रों को भारी नुकसान हो रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/duplicate-books-of-ncert-in-the-market/article-41667"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/a-14.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। असली सामग्री के साथ ही मार्केट में डुप्लीकेट सामग्री भी भारी मात्र में उपलब्ध है। अगर अभिभावक बाजार में एनसीईआरटी की किताब खरीदने जा रहे हैं तो सावधान रहिए। जयपुर सहित प्रदेश के कई जिलों में चोरी छिपे एनसीईआरटी की डुप्लीकेट किताबें छाप कर कम रेट में बेची जा रही हैं। डुप्लीकेट किताबों से छात्रों को भारी नुकसान हो रहा है। इन किताबों में खराब प्रिंटिंग और अशुद्धियों की भरमार है। वहीं प्रमाणिक भी नहीं हैं।</p>
<p><strong>डेढ़ करोड़ डुप्लीकेट किताबें</strong><br />राजस्थान राज्य पाठ्य पुस्तक मंडल की ओर से कक्षा एक से 12वीं तक करीब पांच करोड़ किताबें बाजार में पहुंचाई जाती हैं। इनमें करीब तीन करोड़ किताबें छह से 12वीं कक्षा तक की होती है। प्रकाशक पाठ्य पुस्तक मंडल से किताबें खरीदकर बाजार में बेचने के लिए विक्रेताओं को सप्लाई करते हैं। इसके साथ ही बाजार में करीब डेढ़ करोड़ डुप्लीकेट किताबें बेचने के लिए भेज दी जाती हैं।</p>
<p>पाठ्य पुस्तक मंडल जहां 20 फीसदी डिस्काउंट के साथ किताबें प्रकाशकों को बेचता है, वहीं बाजार में डुप्लीकेट किताबें 40 फीसदी डिस्काउंट तक विक्रेताओं के पास पहुंचती है।</p>
<p><strong>यह है नुकसान </strong><br />नकली किताबों की बाइडिंग बहुत खराब है। महीनेभर में किताब फट जाएगी। कागज की क्वालिटी इतनी खराब है कि बच्चों की आंखें खराब हो जाती है।</p>
<p><strong>यह रखें सावधानी</strong><br />डुप्लीकेट किताब का रंग काफी हल्का होता है। एनसीईआरटी की किताब लेने जा रहे हैं तो विक्रेता से पाठ्य पुस्तक मंडल से छपी किताब ही मांगें। खरीदते समय किताब का रंग चेक कर लें, असली किताब का रंग गहरा होगा। किताब खोलकर चेक करें, डुप्लीकेट किताब की प्रिटिंग हल्की होगी।</p>
<p>एनसीईआरटी कक्षा 6 से 12 तक लागू हैं। राज्य में एनसीईआरटी किताबों की हम समय-समय पर जांच करते हैं। बाजार में डुप्लीकेट किताबें आने से सरकार को राजस्व का नुकसान होता है। विक्रेता सस्ते के चक्कर में डुप्लीकेट किताबों को प्राथमिकता देते हैं। हमारे पास शिकायत आएगी तो कार्रवाई करेंगे।<br /><strong>- विनोद पुरोहित, सचिव, राजस्थान राज्य पाठ्य पुस्तक मंडल</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Apr 2023 10:59:21 +0530</pubDate>
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