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                <title>brics summit - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>brics summit RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>कांग्रेस का केंद्र पर हमला, जयराम रमेश बोले- चीन के सामने ‘नियोजित समर्पण’, सरकार की चीन नीति पर उठाए गंभीर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस ने ब्रिक्स बैठक के दौरान केंद्र सरकार पर चीन के सामने 'नियोजित समर्पण' का आरोप लगाया है। पार्टी नेता जयराम रमेश ने कहा कि सीमा विवाद, रिकॉर्ड व्यापार घाटे और गलवान पर रुख को लेकर सरकार की चुप्पी देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congresss-attack-on-the-center-jairam-ramesh-said-planned/article-165528"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/jairam-ramesh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि ब्रिक्स बैठक के दौरान केंद्र सरकार चीन के सामने समर्पण करती नजर आई है जिसे देखते हुए सरकार की चीन नीति को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने रविवार को यहां एक बयान में कहा कि केंद्र सरकार को अब उन सवालों पर पर चुप्पी तोड़ने होगी जिनका जवाब देश आज भी मांग रहा है। उनका कहना था कि भारत-चीन संबंधों के सामान्य करने के नाम पर सरकार की ओर से 'कैलिब्रेटेड कैपिटुलेशन' यानी नियोजित समर्पण दिख रहा है।</p>
<p>रमेश ने पूछा कि क्या 19 जून 2020 को चीन को दी गई उस 'क्लीन चिट' ने भारत को कमजोर नहीं किया जिसमें 15-16 जून 2020 की रात गलवान घाटी में 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। इसके सिर्फ चार दिन बाद 19 जून को सर्वदलीय बैठक में कहा गया था कि "ना कोई हमारी सीमा में घुस आया है, ना ही कोई घुसा हुआ है।" यह बयान कभी वापस नहीं लिया गया। उन्होंने सवाल किया कि क्या इससे भारत की बातचीत की स्थिति कमजोर नहीं हुई।</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि लद्दाख और अब अरुणाचल प्रदेश में चीन की क्षेत्रीय बढ़त को अनुमति दी गई है। पूर्वी लद्दाख में पारंपरिक गश्त और चराई के अधिकार चुपचाप छोड़ दिए गए। अरुणाचल में चीनी घुसपैठ, गश्त बिंदुओं तक पहुंच खोना और नए स्टैंड ऑफ की खबरें आ रही हैं। चीन 'साउथ तिब्बत' का दावा दोहरा रहा है, शहरों के नाम बदल रहा है और ब्रह्मपुत्र पर 60,000 मेगावाट के मेडोग मेगा-डैम को आगे बढ़ा रहा है, जिससे पूरे पूर्वोत्तर की जल सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है।</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की मदद में चीन की भूमिका पर भारत का रुख क्यों नरम पड़ा। पिछले वर्ष 4 जुलाई को लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने चीन की गहरी और निर्णायक भूमिका का जिक्र किया था, लेकिन गत 25 अगस्त को पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने वीआईएफ में बिल्कुल अलग रुख अपनाया। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या यह कल की बैठक से पहले माहौल बदलने की रणनीति थी।</p>
<p>उन्होंने व्यापार घाटे पर भी सवाल किया और कहा कि 2025-26 में भारत-चीन व्यापार घाटा 112.6 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। एमएसएमई समेत उद्योगों को भारी नुकसान हो रहा है और :मेक इन इंडिया' तथा 'इम्पोर्ट फ्रॉम चाइना' एक ही सिक्के के दो पहलू बन गए हैं। उन्होंने सवाल किया कि इस स्थिति को बदलने का रोडमैप कहां है। कांग्रेस नेता ने कहा "संबंध सामान्य बनाना एक बात है, लेकिन सरकार की ओर से जो रवैया दिखा है, वह नियंत्रित समर्पण है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 18:45:36 +0530</pubDate>
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                <title>महबूबा मुफ्ती ने ब्रिक्स में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा का किया स्वागत, भारत से गाजा-ईरान पर स्पष्ट रुख की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा का स्वागत किया है। इसके साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि भारत ने गाजा और ईरान में हुई हिंसा के खिलाफ मजबूत रुख क्यों नहीं अपनाया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद और नागरिक सुरक्षा में दोहरा मापदंड नहीं होना चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/mehbooba-mufti-welcomes-condemnation-of-pahalgam-terror-attack-in-brics/article-165519"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/mehbooba-mufti-1.png" alt=""></a><br /><p>श्रीनगर। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने पहलगाम आतंकी हमले की ब्रिक्स की ओर से निंदा किये जाने का स्वागत किया है। इसके साथ ही महबूबा ने सवाल उठाया कि समूह की अध्यक्षता कर रहे भारत ने वैश्विक स्तर पर हिंसा और मानवीय पीड़ा के खिलाफ मजबूत रुख अपनाने के लिए इस मंच का इस्तेमाल क्यों नहीं किया। राष्ट्रीय राजधानी में भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में नयी दिल्ली घोषणापत्र को अपनाया गया। इसमें अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गयी, आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहिष्णुता की नीति की पुष्टि की गयी और आतंकवाद के वित्तपोषण तथा सुरक्षित ठिकानों सहित इसके सभी रूपों के खिलाफ ठोस कार्रवाई का आह्वान किया गया।</p>
<p>महबूबा कहा कि भारत को ब्रिक्स की अध्यक्षता करते हुए 'साहस और वास्तविक नेतृत्व' का परिचय देना चाहिए था। उन्होंने कहा कि साझा घोषणापत्र में गाजा के विनाश और ईरान पर अमेरिकी-इजरायल के सैन्य हमलों का भी खुलकर उल्लेख किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा, "आतंकवाद की चयनात्मक निंदा नहीं की जा सकती। नागरिकों के खून की कोई राष्ट्रीयता नहीं होती और अंतरराष्ट्रीय न्याय में दोहरा मापदंड नहीं हो सकता।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आम नागरिकों पर हमलों की निंदा करने का सिद्धांत सार्वभौमिक होना चाहिए और यह प्रभावित लोगों की राष्ट्रीयता, धर्म या भू-राजनीतिक जुड़ाव पर निर्भर नहीं हो सकता। ब्रिक्स घोषणापत्र में पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त की गयी है, अधिकतम संयम बरतने का आह्वान किया गया है और बातचीत, परामर्श एवं कूटनीति के माध्यम से विवादों को सुलझाने का आग्रह किया गया है। इसमें नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर भी जोर दिया गया और शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं से जुड़े हमलों पर चिंता जतायी गयी।</p>
<p>महबूबा ने कहा कि इन प्रतिबद्धताओं पर बिना किसी भेदभाव के अमल होना चाहिए। उन्होंने कहा, "अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय आतंकवाद के खात्मे और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है, तो पीड़ितों के बीच कोई फर्क नहीं किया जा सकता और न ही सुविधा के हिसाब से विरोध जताया जा सकता है।" उन्होंने गाजा को मानवीय सहायता देने के ब्रिक्स के आह्वान का भी स्वागत किया और कहा कि केवल मानवीय राहत जवाबदेही तय करने और हिंसा को समाप्त करने का विकल्प नहीं हो सकती। गाजा पर घोषणापत्र के रुख में मानवीय सहायता का समर्थन शामिल है, जबकि पश्चिम एशिया पर इसकी व्यापक भाषा में संयम, नागरिक सुरक्षा और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के पालन का आह्वान किया गया है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "पहलगाम, गाजा या ईरान में आम नागरिकों की पीड़ा को अलग-अलग नैतिक या राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जा सकता। हर मानव जीवन पर एक ही मानक लागू होना चाहिए। बहुपक्षीय संस्थानों की विश्वसनीयता बिना किसी डर या पक्षपात के इस सिद्धांत को बनाये रखने की उनकी क्षमता पर निर्भर करती है।" उन्होंने कहा कि ब्रिक्स में भारत का नेतृत्व एक सुसंगत, नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की वकालत कर ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है, जिसमें आतंकवाद, नागरिकों पर हमलों और अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन की निंदा की जाती है, चाहे उन्हें कोई भी अंजाम दे। महबूबा ने कहा, "भारत को एक मिसाल कायम करनी चाहिए। अगर नागरिकों के खून की कोई राष्ट्रीयता नहीं होती, तो न्याय में भी दोहरा मापदंड नहीं हो सकता।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 16:02:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>BRICS सम्मेलन से इतर सीतारमण ने ईरानी समकक्ष से की मुलाकात, आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति</title>
                                    <description><![CDATA[भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर अपने ईरानी समकक्ष सैयद अली मदनीजादेह से मुलाकात की। नई दिल्ली में हुई इस बैठक में दोनों देशों के बीच साझा हित के क्षेत्रों में आर्थिक सहयोग बढ़ाने और द्विपक्षीय वित्तीय संबंधों को मजबूती देने पर चर्चा हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/sitharaman-met-iranian-counterpart-on-the-sidelines-of-brics-conference/article-165536"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/brics1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को अपने ईरानी समकक्ष सैयद अली मदनीजादेह के साथ मुलाकात की जिसमें दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। यह बैठक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर हुई है। मदनीजादेह सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नयी दिल्ली आए हुए हैं। ईरान ब्रिक्स का सदस्य है।</p>
<p>सीतारमण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में ईरान के आर्थिक मामले विभाग एवं वित्त मंत्री के साथ इस मुलाकात की तस्वीर साझा की है। उन्होंने लिखा, "दोनों पक्षों ने साझा हित के क्षेत्रों में आर्थिक सहयोग पर अपने-अपने विचारों एक-दूसरे को अवगत कराया।"</p>
<p>सीतारमण ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और फाइनेंस ट्रैक के मंथन में हिस्सा लेने के लिए ईरान को धन्यवाद दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 14:56:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>BRICS में दिखी एकजुटता: मोदी-पुतिन-जिनपिंग की मौजूदगी में मिडिल ईस्ट पर साझा रुख, आतंकवाद और टैरिफ पर भी जताई चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन पीएम नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 'फैमिली फोटो' में हिस्सा लिया। सम्मेलन में नई दिल्ली घोषणापत्र को सर्वसम्मति से मंजूरी मिली, जिसमें पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा, आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई और व्यापारिक प्रतिबंधों पर चिंता व्यक्त की गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/unity-seen-in-brics-in-the-presence-of-modi-putin-jinping-common/article-165521"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/brics-summit.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। BRICS शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत सदस्य देशों के नेताओं ने फैमिली फोटो में हिस्सा लिया। सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों ने मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव पर चिंता जताते हुए संयम बरतने और बातचीत के जरिए विवादों के समाधान की अपील की। </p>
<p>भारत की कूटनीतिक पहल के बाद BRICS देशों ने नई दिल्ली घोषणा को सर्वसम्मति से मंजूर किया। इसमें आतंकवाद के सभी रूपों, आतंकवाद की फंडिंग और सुरक्षित ठिकानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की प्रतिबद्धता दोहराई गई। घोषणा में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की भी निंदा की गई। इसके अलावा सदस्य देशों ने एकतरफा टैरिफ और व्यापार प्रतिबंधों पर चिंता जताते हुए WTO आधारित बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत बताई। सम्मेलन में राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 13:01:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने राहुल गांधी से की मुलाकात: प्रियंका गांधी भी रहीं मौजूद, कई मुद्दों पर बातचीत</title>
                                    <description><![CDATA[18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने भारत आए मलेशिया के प्रधानमंत्री दातो' सेरी अनवर इब्राहिम ने नई दिल्ली में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से नाश्ते पर मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों और विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/malaysian-prime-minister-anwar-ibrahim-met-rahul-gandhi-priyanka-gandhi/article-165513"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/rahul-gandhi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से भारत की यात्रा पर आए मलेशिया के प्रधानमंत्री दातो' सेरी अनवर इब्राहिम ने मुलाकात की और विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। रविवार को दोनों नेताओं के बीच यहां नाश्ते पर मुलाकात हुई। इस दौरान कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा मौजूद थीं।</p>
<p>इब्राहिम 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत की पांच दिवसीय यात्रा पर आए हैं। मलेशिया इस वर्ष ब्रिक्स का साझेदार देश है। भारत यात्रा के दौरान श्री इब्राहिम की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत कई नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी हुई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 12:16:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>सुप्रीम कोर्ट ने CJP के 5 सितंबर दिल्ली मार्च पर रोक से किया इनकार, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 5 सितंबर को प्रस्तावित दिल्ली मार्च पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि प्रदर्शन से अप्रिय स्थिति होने का कोई ठोस आधार नहीं है। CJP अपनी मांगों को लेकर इंडिया गेट से पुलिस मुख्यालय तक मार्च निकालेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-court-refuses-to-ban-cjps-5th-september-delhi-march/article-164307"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/cjp.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से 5 सितंबर को प्रस्तावित दिल्ली मार्च पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि ऐसा मानने के लिए फिलहाल कोई ठोस आधार नहीं है कि प्रदर्शन से अनिवार्य रूप से अप्रिय स्थिति पैदा होगी। अदालत ने प्रशासन से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और प्रदर्शन से जुड़े सभी पक्षों से नियमों के दायरे में रहने की अपेक्षा जताई।</p>
<p>मार्च पर रोक की मांग सेवानिवृत्त दिल्ली पुलिस अधिकारी राजेंद्र सिंह की याचिका में की गई थी। याचिकाकर्ता ने आगामी BRICS सम्मेलन का हवाला देते हुए राजधानी में बड़े प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने की मांग की थी। CJP का कहना है कि सरकार ने आंदोलन के दौरान उठाई गई चार मांगों में से तीन अब तक पूरी नहीं की हैं। इनमें छात्रों के परिवारों को मुआवजा, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेना और पुलिस-RAF की कार्रवाई पर माफी शामिल है। संगठन ने इन्हीं मुद्दों को लेकर 5 सितंबर को फिर मार्च निकालने का ऐलान किया है।</p>
<p>प्रस्तावित मार्च इंडिया गेट से शुरू होकर नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक जाएगा। इसमें कथित NEET अनियमितताओं के बाद जान गंवाने वाले छात्रों के परिजनों के शामिल होने की भी बात कही गई है। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि प्रदर्शन से जुड़ी FIR वापस लेने के लिए अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट में आवेदन किया गया है। इससे पहले 20 जुलाई के प्रदर्शन में पुलिस कार्रवाई के आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट पांच सदस्यीय समिति गठित कर चुका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 16:30:09 +0530</pubDate>
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                <title>Brics Summit: रूस में भारत के पास ओआईसी का बदला लेने का मौका</title>
                                    <description><![CDATA[ विज्ञप्ति के अनुसार, राष्ट्रपति ब्रासीलिया से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-has-a-chance-to-take-revenge-of-oic-in/article-93627"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/27rtrer-(1)4.png" alt=""></a><br /><p>कजान। रूस के कजान शहर में ब्रिक्स देशों का शिखर सम्मेलन होने जा रहा है। पीएम मोदी कजान शहर के लिए रवाना हो रहे हैं। इस बैठक से ठीक पहले ब्रिक्स के विस्तार की चर्चा जोर पकड़ रही है। पाकिस्तान समेत करीब 35 देशों ने ब्रिक्स में शामिल होने के लिए दावेदारी की है। कजान में होने वाली बैठक में 10 देशों को ब्रिक्स का सदस्य बनाया जा सकता है।</p>
<p>भारत का धुर विरोधी पाकिस्तान चीन की मदद से ब्रिक्स का सदस्य बनना चाहता है। इसके लिए पाकिस्तान की सरकार रूस को खुश करने में जुटी हुई है। पाकिस्तान की कोशिश है कि वह रूस की मदद से भारत पर दबाव डाले और ब्रिक्स का सदस्य बन जाए। रूस ने भी पाकिस्तान के समर्थन का ऐलान किया है। वहीं पाकिस्तान की सदस्य के लिए भारत की मंजूरी जरूरी होगी लेकिन अभी तक उसने कोई संपर्क नहीं किया है। ऐसे में यह सवाल गरम है कि क्या भारत अब 1969 के ओआईसी के धोखे का बदला लेगा या पाकिस्तान को सपोर्ट करेगा।</p>
<p>भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है लेकिन अभी तक इस्लामिक देशों के संगठन ओआईसी का हिस्सा नहीं है। भारत से आगे केवल इंडोनेशिया और पाकिस्तान ही हैं। ऐसे अनुमान हैं कि भारत साल 2060 तक दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश बन जाएगा। असल में भारत को ओआईसी की सदस्यता देने के लिए कई बार प्रस्ताव आया लेकिन हर बार सहमति नहीं बन पाने की वजह से ऐसा नहीं हुआ। हर बार सबसे ज्यादा विरोध तो पाकिस्तान की ओर से किया गया।</p>
<p><strong>याह्या खान ने ओआईसी को दी थी धमकी</strong><br />साल 1969 में ओआईसी के पहले शिखर सम्मेलन में भारत को आमंत्रित किया गया था। भारत ने ओआईसी के इस सम्मेलन को संबोधित भी किया था लेकिन यह हमारे धुर विरोधी पाकिस्तान को रास नहीं आया और उसने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके भारत को बाकी के सत्र से बाहर करवा दिया। पाकिस्तान के तत्कालीन सैन्य तानाशाह याह्या खान ने भारत को लेकर धमकी दे दी।</p>
<p>याह्या खान ने कहा कि अगर भारत को ओआईसी की सदस्यता दी जाती है तो पाकिस्तान इससे अलग हो जाएगा। यह वही पाकिस्तानी सेना के जनरल याह्या खान थे जिन्होंने पूर्वी पाकिस्तान में नरसंहार कराया था। बाद में भारत की मदद से अलग बांग्लादेश का गठन हुआ। अब पाकिस्तान की ब्रिक्स की सदस्यता का भविष्य भारत के रुख पर निर्भर कर रहा है। रूस के कजान शहर में ब्रिक्स की बैठक में पीएम मोदी हिस्सा लेने जा रहे हैं। इससे पहले भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर इस्लामाबाद गए थे और एससीओ की बैठक में हिस्सा लिया था। करीब 9 साल के बाद किसी भारतीय विदेश मंत्री ने पाकिस्तान की यात्रा की थी।</p>
<p><strong>ब्राजील के राष्ट्रपति ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन यात्रा रद्द की</strong><br />साओ पाउलो। ब्राजील के राष्ट्रपति लुईस इनासियो लूला डा सिल्वा ने चोटिल होने के कारण आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए रूस की योजनाबद्ध यात्रा रद्द कर दी। राष्ट्रपति कार्यालय ने रविवार को घोषणा की कि इनासियो को शनिवार को एक दुर्घटना में सिर में चोट लगने के बाद ब्रासीलिया के अस्पताल में भर्ती कराया गया। जिसके कारण वह 22 से 24 अक्टूबर तक कज़ान में होने वाले 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग नहीं ले पाएंगे। विज्ञप्ति के अनुसार, राष्ट्रपति ब्रासीलिया से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Oct 2024 11:41:29 +0530</pubDate>
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                <title>15वें शिखर सम्मेलन में शामिल होगें मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ब्रिक्स की 15वीं शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए मंगलवार को सुबह दक्षिण अफ्रीका के लिए प्रस्थान करेंगे और वहां से 25 अगस्त को एक दिन की आधिकारिक यात्रा पर यूनान जाएंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/modi-will-attend-the-15th-summit/article-55121"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/modi-(2).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ब्रिक्स की 15वीं शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए मंगलवार को सुबह दक्षिण अफ्रीका के लिए प्रस्थान करेंगे और वहां से 25 अगस्त को एक दिन की आधिकारिक यात्रा पर यूनान जाएंगे।</p>
<p>विदेश सचिव विनय मोहन क्वात्रा ने सोमवार को यहां विदेश मंत्रालय में एक विशेष मीडिया ब्रीफिंग में प्रधानमंत्री की इन यात्राओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मोदी कल नयी दिल्ली से सुबह जोहान्सबर्ग के लिए रवाना होंगे और वहां 22 से 24 अगस्त के दौरान ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका (ब्रिक्स) की पंद्रहवीं शिखर बैठक के कार्यक्रमों में भाग लेंगे।</p>
<p>दक्षिण अफ्रीका की यात्रा के पहले दिन मोदी जोहान्सबर्ग में रिट्रीट (पयर्टन स्थल पर) पर ब्रिक्स देशों के शीर्ष नेताओं और आमंत्रित देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों के साथ मुलाकात करेंगे। उन्होंने बताया कि रिट्रीट बैठक व्यक्तिगत प्रकार की होगी, जिसमें नेता वैश्विक महत्व के विषयों पर निजीतौर पर विचार विमर्श करेंगे। मोदी बुधवार से ब्रिक्स सम्मेलन की औपचारिक बैठकों में भाग लेंगे।</p>
<p>प्रधानमंत्री वहां से 25 अगस्त को यूनान पहुंचेंगे। क्वात्रा ने बताया कि 1983 के बाद भारत के किसी प्रधानमंत्री की यह यूनान की पहली यात्रा है। उन्होंने कहा कि मोदी कि यह आधिकारिक यात्रा यूनान के प्रधानमंत्री के निमंत्रण पर हो रही है, जिसमें दोनों देशों के बीच रक्षा, आर्थिक एवं वाणिज्य सहित विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को और गहन एवं विस्तृत बनाने पर चर्चा होगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Aug 2023 17:43:19 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को मिलेगी राजनयिक छूट</title>
                                    <description><![CDATA[दक्षिण अफ्रीका ने ब्रिक्स देशों की मंत्रिस्तरीय बैठक और शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को राजनयिक छूट देने की गारंटी दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/diplomatic-exemption-will-be-given-to-all-the-participants-participating/article-47217"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/114.png" alt=""></a><br /><p>केप टाउन। दक्षिण अफ्रीका ने ब्रिक्स देशों की मंत्रिस्तरीय बैठक और शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को राजनयिक छूट देने की गारंटी दी है।</p>
<p>विदेश मंत्री नलेडी पंडोर ने मंगलवार को यह जानकारी दी। उन्होंने सरकार की ओर से प्रकाशित एक बयान में कहा, ''डिप्लोमैटिक इम्युनिटीज एंड प्रिविलेज एक्ट, 2001 द्वारा मुझे प्रदत्त शक्तियों के अनुसार मैं एक और दो जून 2023 तक केप टाउन, दक्षिण अफ्रीका में आयोजित होने वाली ब्रिक्स मंत्रिस्तरीय बैठक और 22 से 24 अगस्त 2023 तक जोहान्सबर्ग में आयोजित होने वाले 15वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को उक्त अधिनियम की धारा 6 (1) (ए) में प्रदान की गई छूट और विशेषाधिकार हासिल करने के लिए मान्यता देती हूं।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 May 2023 15:14:12 +0530</pubDate>
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                <title>दक्षिण अफ्रीका ब्रिक्स सम्मेलन से पहले नहीं छोड़ सकता आईसीसी : कानूनी विशेषज्ञ</title>
                                    <description><![CDATA[दक्षिण अफ्रीका यदि  उचित संसदीय प्रक्रिया का पालन करता है तो वह अगस्त में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (आईसीसी) से हटने में सक्षम नहीं होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/south-africa-cannot-leave-before-brics-summit-icc-legal-expert/article-44020"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/flag1.png" alt=""></a><br /><p>जोहान्सबर्ग। दक्षिण अफ्रीका यदि  उचित संसदीय प्रक्रिया का पालन करता है तो वह अगस्त में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (आईसीसी) से हटने में सक्षम नहीं होगा। प्रिटोरिया विश्वविद्यालय में कानून के व्याख्याता लेवेलीन कर्लेविस ने स्पूतनिक को यह जानकारी दी।</p>
<p>दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने मंगलवार को कहा कि सत्तारूढ़ अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस पार्टी हेग स्थित अदालत से हटने का इरादा बना रही है क्योंकि उसने अफ्रीकी देशों के साथ गलत व्यवहार किया है। उनके कार्यालय ने बाद में कहा कि राष्ट्रपति गलत बोल रहे हैं।</p>
<p>कर्लेविस ने कहा कि एएनसी को देश के अंतरराष्ट्रीय न्यायालय से हटने के फैसले पर बहुमत हासिल करने में संसद सदस्यों के समर्थन की  दरकार होगी और उन संगठनों की चुनौती से भी निपटना होगा जो पहले से ही सरकार के इस फैसले को न्यायालय में चुनौती देने की तैयारी में हैं।</p>
<p>कानूनी विशेषज्ञ ने कहा ''मुझे नहीं लगता के अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास के बाद भी सरकार अगस्त में होने जा रहे ब्रिक्स सम्मेलन से पहले एएनसी की सरकार इन सभी चुनौतियों से पार पा सकेगी।"</p>
<p>आईसीसी द्वारा रूस के राष्ट्रपति के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट निकालने पर एएनसी ने आईसीसी छोडऩे का फैसला किया था। दुनिया में उभरती हुई पांच अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों  ब्राजील, रूस, भारत , चीन और दक्षिण अफ्रीका के संगठन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रूस को भी आमंत्रित किया था।  इन देशों का 22 से 24 अगस्त के बीच डरबन में मिलना तय है।</p>
<p>यूरोप में अदालत पर लंबे समय से अफ्रीकी देशों पर नये औपनिवेशवाद का एजेंडा थोपने पर लगे हैं। वर्ष 2021 में आईसीसी ने अमेरिका में अपराधों को लेकर चल रही उसकी जांच को भी बीच में छोड़ दिया था, यह अपराध अमेरिका ने अफगानिस्तान में रहते हुए किये थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Apr 2023 15:59:53 +0530</pubDate>
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