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                <title>European Union - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>European Union RSS Feed</description>
                
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                <title>रूस का कीव पर सबसे बड़ा हमला: 13 की मौत, 90 से ज्यादा घायल; 570 ड्रोन-मिसाइलों से दहला यूक्रेन</title>
                                    <description><![CDATA[रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइल हमला किया, जिसमें कम से कम 13 लोगों की मौत और 90 से अधिक लोग घायल हो गए। हमले के बाद कीव में शोक दिवस घोषित किया गया। यूरोपीय संघ ने रूस पर नए प्रतिबंध लगाने की घोषणा की, जबकि युद्ध लगातार और अधिक भीषण होता जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/russias-biggest-attack-on-kiev-13-killed-more-than-90/article-158700"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/russia.png" alt=""></a><br /><p>कीव। यूक्रेन की राजधानी कीव पर गुरुवार तड़के हुए रूसी हमलों में कम से कम 13 लोगों की जान चली गयी, जबकि 90 से ज्यादा लोग घायल हो गये। स्थानीय गवर्नर मिकोला कलाशनिक ने टेलिग्राम पर साझा संदेश में कहा, "रात में दुश्मन ने एक बार फिर कीव क्षेत्र पर हमलावर ड्रोन, बैलिस्टिक मिसाइल और क्रूज मिसाइल के जरिए बड़ा हमला किया।"</p>
<p>रूस का यह हमला यूक्रेन के उस हालिया हमले के जवाब में आया है जिसमें उसने रूसी ऊर्जा अवसंरचना को निशाना बनाया था। यूरोन्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन की वायुसेना ने यह चेतावनी दी थी कि राजधानी कीव पर बैलिस्टिक मिसाइल हमले होने वाले हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने भी बुधवार को अपनी आयरलैंड यात्रा यह कहते हुए स्थगित कर दी थी कि रूस उनके ऊपर हमला कर सकता है।</p>
<p>रूस के इस हमले में कीव क्षेत्र के पांच जिले प्रभावित हुए। कीव के मेयर विटाली क्लिच्शको ने कहा कि यह कीव पर अब तक का सबसे बड़ा रूसी हमला था। उन्होंने कहा कि इस हमले को ध्यान में रखते हुए तीन जुलाई को कीव में शोक का दिन घोषित किया गया है। दूसरी ओर, यूक्रेन की वायुसेना ने कहा कि रूस ने रातोंरात यूक्रेन पर 570 हवाई हमले किये। इसमें 496 ड्रोन, 24 इस्कंदर बैलिस्टिक मिसाइल और चार ज़िरकॉन मिसाइल शामिल हैं। इस हमले में 90 से ज्यादा लोग घायल हो गये और शहर में 20 से ज्यादा जगहों पर हानि दर्ज की गयी।</p>
<p>इस बीच, यूरोपीय संघ (ईयू) की विदेश नीति प्रमुख कजा कलास ने कहा कि ईयू रूस के खिलाफ नये प्रतिबंध लगायेगा। इन प्रतिबंधों में रूस की ड्रोन बनाने वाली कंपनियां भी शामिल होंगी। उल्लेखनीय है कि यूक्रेन में रूस की सैन्य कार्रवाई में 20 लाख से ज्यादा सैनिक मारे जा चुके हैं। चार साल से चल रहा यह संघर्ष द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप का सबसे खतरनाक सैन्य संघर्ष साबित हो रहा है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 17:04:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>यूरोप में भीषण गर्मी का कहर: AC पर छिड़ी बहस, EU ने कहा- फैसला जनता की पसंद; Heatwave से 1300 मौतें</title>
                                    <description><![CDATA[यूरोप में रिकॉर्ड गर्मी और 1,300 से अधिक मौतों के बाद एयर कंडीशनर के बढ़ते उपयोग पर बहस तेज हो गई है। हालांकि यूरोपीय आयोग ने एसी के पक्ष या विपक्ष में कोई रुख अपनाने से इनकार किया। आयोग ने कहा कि उपभोक्ताओं की पसंद में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा, जबकि ऊर्जा दक्षता और जलवायु नीति पर काम जारी रहेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/extreme-heat-wreaks-havoc-in-europe-debate-on-ac-started/article-158467"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/eu.png" alt=""></a><br /><p>ब्रसेल्स। यूरोप में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी में एयर कंडीशनर (एसी) के बढ़ते उपयोग पर छिड़ी बहस के बीच यूरोपीय आयोग ने इस मुद्दे पर कोई पक्ष लेने से इनकार किया है। आयोग ने कहा कि उपभोक्ताओं की पसंद तय करना यूरोपीय संघ (ईयू) की कार्यपालिका की भूमिका नहीं है। आंकड़ों के अनुसार यूरोपीय संघ में केवल लगभग 20 प्रतिशत घरों में एयर कंडीशनर लगे हैं, जबकि अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया में यह आंकड़ा 90 प्रतिशत या उससे अधिक है।</p>
<p>यूरोप में हाल में पड़ी भीषण गर्मी से कम से कम 1,300 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बाद घरों और सार्वजनिक स्थानों पर शीतलन सुविधाओं की कमी राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बन गई है। रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपीय आयोग की जलवायु मामलों की प्रवक्ता अन्ना-काइसा इतकोनेन ने कहा, "हम जानते हैं कि यूरोपीय संघ के अधिकांश आवासीय भवनों और अपार्टमेंटों में एयर कंडीशनर नहीं हैं। पारंपरिक रूप से इनका निर्माण इस तरह नहीं हुआ है, विशेषकर इसलिए क्योंकि हमारे अधिकांश आवास काफी पुराने हैं।"</p>
<p>उन्होंने कहा, "एयर कंडीशनर के पक्ष या विपक्ष में आयोग का कोई विशेष रुख नहीं है। हालांकि भवनों और आवासों के नवीनीकरण, ऊर्जा दक्षता और आवास नीति के तहत इस मुद्दे पर काम किया जा रहा है।" जब इस विषय के बढ़ते राजनीतिक महत्व को देखते हुए क्या आयोग को कोई स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए, तो प्रवक्ता ने कहा कि आयोग की प्राथमिकता जलवायु तटस्थता की दिशा में प्रभावी और दक्ष परिवर्तन सुनिश्चित करना है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि राजनीतिक परिस्थितियां बदलती हैं तो आयोग अपने तटस्थ रुख की समीक्षा कर सकता है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "यह भी देखना होगा कि आयोग की शक्तियों की सीमा क्या है कि उन्हें क्या करना चाहिए और क्या नहीं।" इतकोनेन ने कहा, "पिछले सप्ताह की भीषण गर्मी संभवतः इस पूरे ग्रीष्मकाल की शुरुआत भर है। इसलिए यह संभव है कि यह विषय राजनीतिक स्तर पर चर्चा का मुद्दा बने और सदस्य देशों के संकेतों के अनुरूप आयोग भी आवश्यक कदम उठाए।" उन्होंने स्पष्ट किया कि निजी घरों में एयर कंडीशनर लगाने जैसे मामलों में आयोग लोगों के व्यक्तिगत निर्णयों में हस्तक्षेप नहीं करेगा। एयर कंडीशनर के विरोधियों का कहना है कि इससे बिजली की मांग बढ़ती है, विद्युत ग्रिड पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, वातावरण में गर्म हवा निकलती है और जलवायु संकट के मूल कारणों का समाधान नहीं होता। वहीं समर्थकों का तर्क है कि भीषण गर्मी के दौरान रहने योग्य परिस्थितियां बनाए रखने और श्रम उत्पादकता बनाए रखने के लिए एयर कंडीशनर एक आवश्यक साधन है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 12:52:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पीटर मैग्योर की ऐतिहासिक जीत: हंगरी में 16 साल बाद ट्रंप और पुतिन के शासन का अंत, यूरोपीय संघ से जुड़े कार्यों में निभा चुके हैं भूमिका </title>
                                    <description><![CDATA[हंगरी में पीटर मग्यार ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर विक्टर ओरबान के 15 साल पुराने शासन को खत्म कर दिया है। Tisza Party के नेतृत्व में उन्होंने भ्रष्टाचार मुक्त शासन और लोकतांत्रिक सुधारों का वादा किया। यह बदलाव हंगरी की राजनीति में नए युग की शुरुआत है, जो यूरोपीय संघ के साथ रिश्तों को फिर से मजबूत करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/peter-maguires-historic-victory-ends-trump-and-putins-rule-in/article-150144"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/viktor-orban.png" alt=""></a><br /><p>हंगरी। Peter Magyar ने हंगरी की राजनीति में बड़ा उलटफेर करते हुए 2026 के संसदीय चुनाव में लंबे समय से सत्ता में रहे Viktor Orbán को पराजित कर नई सरकार बनाने का रास्ता साफ कर लिया है। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही देश में पिछले डेढ़ दशक से चल रहा सत्ता का एकाधिकार समाप्त हो गया है। 45 वर्षीय मग्यार पेशे से वकील और डिप्लोमैट हैं तथा सेंटर-राइट Tisza Party के प्रमुख नेता के रूप में उभरे हैं। कभी वह ऑर्बान की पार्टी Fidesz के करीबी सहयोगी रहे थे और सरकारी संस्थाओं व यूरोपीय संघ से जुड़े कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं।</p>
<p>मग्यार का राजनीतिक उभार काफी तेज रहा है। 2024 तक वह आम जनता के बीच ज्यादा पहचाने नहीं जाते थे, लेकिन एक चर्चित माफी विवाद के बाद उन्होंने सरकार से दूरी बना ली और सार्वजनिक रूप से भ्रष्टाचार तथा सत्ता के दुरुपयोग के आरोप लगाए। इसके बाद उन्होंने नया राजनीतिक मंच तैयार किया और टिस्ज़ा पार्टी का नेतृत्व संभालते हुए खुद को मुख्य विपक्षी चेहरे के रूप में स्थापित किया। 2024 के यूरोपीय चुनावों में मिले समर्थन ने उनकी स्थिति मजबूत की, जिसका असर 2026 के आम चुनाव में साफ दिखाई दिया। भारी मतदान और बदलाव की इच्छा के बीच टिस्ज़ा पार्टी को निर्णायक जीत मिली, जिसे हंगरी में साम्यवादी शासन के बाद सबसे बड़े राजनीतिक बदलावों में गिना जा रहा है।</p>
<p>मग्यार के चुनावी अभियान का केंद्र भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई, लोकतांत्रिक संस्थाओं की पुनर्बहाली और यूरोपीय संघ के साथ संबंधों को बेहतर बनाना रहा। उन्होंने रूस पर ऊर्जा निर्भरता कम करने और पश्चिमी देशों के साथ संतुलित रिश्ते बनाने की भी बात कही है। हालांकि, खुद को सुधारवादी नेता के रूप में पेश करने वाले मग्यार सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर अपने रूढ़िवादी रुख को बरकरार रखते हैं। अब उनके सामने चुनावी वादों को पूरा करने और हंगरी की राजनीतिक दिशा को नई दिशा देने की बड़ी चुनौती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 12:01:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव का दावा, बोलें-ब्रिक्स, एससीओ आम सहमति से काम करते हैं, नाटो के फैसले अमेरिका की मर्जी पर निर्भर</title>
                                    <description><![CDATA[रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि ब्रिक्स और एससीओ में फैसले सर्वसम्मति से होते हैं, जबकि नाटो अमेरिका पर निर्भर है। उन्होंने ईयू की भी आलोचना की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russian-foreign-minister-sergei-lavrovs-claim-brics-sco-work-with/article-142777"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(16)4.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा है कि ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) ज्यादातर मामलों में सर्वसम्मति के आधार पर फैसले करते हैं, जबकि नाटो के फैसले अमेरिका पर निर्भर करते हैं। </p>
<p>विदेश मंत्री लावरोव ने रूस के एक यूट्यूब चैनल एमपाशिया मनुची प्रोजेक्ट के साथ बातचीत में कहा, ज्यादातर मामलों में अंतरराष्ट्रीय समझौतों का पालन किया जाता है। जब बात हमारे पश्चिमी साथियों की हो तब नहीं, बल्कि जब उन प्रतिनिधियों की होती है जिन्हें हम वैश्विक बहुमत कहते हैं, जैसे ब्रिक्स, एससीओ, और सोवियत के बाद वाले सीएसटीओ, ईएईयू, और सीआईएस। इन ढांचों में आम सहमति ज्यादातर बनी रहती है। आप नाटो की तरह आसानी से फ़ैसले नहीं ले सकते, जहां अमेरिकी कहते हैं'चुप रहो और हमें दिखता है कि यह सब कैसे काम करता है।</p>
<p>इसके आगे विदेश मंत्री लावरोव ने कहा, यूरोपीय संघ भी फैसलों पर असर डालता है। यूरोपीय संघ की तरह, जहां ब्रसेल्स में बिना चुने हुए नौकरशाह देश की चुनी हुई सरकारों को बताते हैं कि क्या करना है, कैसे बर्ताव करना है, किसके साथ व्यापार करना है और किसके साथ नहीं करना है। हमारे हंगरी के साथियों ने ब्रसेल्स के हाल के गलत कामों पर साफ और समझने लायक टिप्पणी की है।</p>
<p>हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान ने दिसंबर 2025 में  कहा था कि यूरोपीय संघ यूक्रेनी संघर्ष को लंबा खींचने के लिए व्यवस्थित तरीके से कानून को रौंद रहा है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ में कानून का राज ब्रसेल्स की तानाशाही से बदल गया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Feb 2026 16:44:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>फ्रांस-जर्मनी और ऑस्ट्रिया अमेरिकी सॉफ्टवेयर छोड़कर अपनाएंगे ओपन-सोर्स </title>
                                    <description><![CDATA[फ्रांस, जर्मनी समेत कई यूरोपीय देश डेटा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों के चलते अमेरिकी सॉफ्टवेयर छोड़कर स्वदेशी व ओपन-सोर्स तकनीक अपनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/gadgets/france-germany-and-austria-will-abandon-american-software-and-adopt/article-141999"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(10).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। यूरोप के कई देश अब अमेरिकी टेक कंपनियों पर अपनी निर्भरता कम करना चाहते हैं। फ्रांस, जर्मनी और ऑस्ट्रिया जैसे देश ने अमेरिकी सॉफ्टवेयर छोड़कर अपने या ओपन-सोर्स विकल्प अपनाने का फैसला किया है। इसका मकसद है डेटा सुरक्षा, गोपनीयता और डिजिटल आजादी। फ्रांस में सरकारी कर्मचारियों को अब जूम और माइक्रोसॉफ्ट टीम्स जैसे अमेरिकी वीडियो कॉलिंग टूल्स छोड़ने होंगे। साल 2027 तक करीब 25 लाख सरकारी कर्मचारी फ्रांस के अपने वीडियो कॉन्फ्रेंस सिस्टम वीआईएसआई का इस्तेमाल करेंगे।</p>
<p>फ्रांसीसी सरकार का कहना है कि गैर-यूरोपीय सॉफ्टवेयर पर निर्भर रहना डेटा और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है। सरकार चाहती है कि संवेदनशील बातचीत और सरकारी जानकारी यूरोप के अंदर ही सुरक्षित रहे। फ्रांस के सिविल सर्विस मंत्री डेविड अमिएल ने कहा कि वैज्ञानिक जानकारी, संवेदनशील डेटा और रणनीतिक नवाचारों को गैर-यूरोपीय कंपनियों के हाथ में नहीं छोड़ा जा सकता।</p>
<p><strong>अमेरिका-यूरोप तनाव से बढ़ी चिंता</strong></p>
<p>यूरोप में यह चिंता तब और बढ़ी जब अमेरिका की ट्रंप सरकार ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के एक अधिकारी पर प्रतिबंध लगाए। इसके बाद माइक्रोसॉफ्ट ने उस अधिकारी की ईमेल सेवा बंद कर दी। इससे यह डर पैदा हुआ कि अमेरिकी कंपनियां कभी भी सेवाएं रोक सकती हैं। हालांकि, माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि उसने आईसीसी की सेवाएं पूरी तरह बंद नहीं की और वह यूरोपीय सरकारों के साथ मिलकर डेटा सुरक्षा पर काम कर रहा है। कंपनी का दावा है कि उसका डेटा यूरोप में ही रहता है और यूरोपीय कानूनों के तहत सुरक्षित है। फिर भी यूरोप में यह भावना मजबूत हुई कि अगर किसी देश या कंपनी पर बहुत ज्यादा निर्भरता होगी तो उसे हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।</p>
<p><strong>जर्मनी-ऑस्ट्रिया और डेनमार्क के भी बदले रास्ते</strong></p>
<p>जर्मनी के श्लेसविग-होल्सटीन राज्य ने पिछले साल 44 हजार कर्मचारियों की ईमेल सेवाएं माइक्रोसॉफ्ट से हटाकर ओपन-सोर्स सिस्टम पर ले गईं। ऑस्ट्रिया की सेना ने रिपोर्ट लिखने और दस्तावेज बनाने के लिए अपनाया है। इसकी एक वजह यह भी है कि माइक्रोसॉफ्ट अब ज्यादा डेटा क्लाउड पर ले जा रहा है, जबकि लिबर ऑफिस आमतौर पर ऑफलाइन चलता है।</p>
<p><strong>पहले आजादी-बाद में बचत</strong></p>
<p>डेनमार्क की सरकार और कोपेनहेगन व आरहूस जैसे शहर भी ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर आजमा रहे हैं। उनका कहना है कि विदेशी कंपनियों पर निर्भरता भविष्य में जोखिम बन सकती है। यूरोपीय नेताओं का मानना है कि तकनीक के मामले में किसी एक देश या कंपनी पर निर्भर रहना खतरनाक है। यही वजह है कि अब यूरोप में पहले आजादी, बद में बचत की सोच बढ़ रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>गैजेट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 11:39:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ग्रीनलैंड विवाद: अमेरिका पर 93 अरब यूरो का आयात शुल्क लगाने पर विचार कर रहा है यूरोपीय संघ</title>
                                    <description><![CDATA[यूरोपीय संघ डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड खरीदने की धमकी के जवाब में 93 अरब यूरो का आयात शुल्क लगाने और अमेरिकी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने का मसौदा तैयार कर रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/eu-is-considering-imposing-import-duty-of-93-billion-euros/article-140122"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump3.png" alt=""></a><br /><p>ब्रसेल्स। ग्रीनलैंड पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लगातार बयानों और धमकियों के बीच यूरोपीय संघ (ईयू) अमेरिका पर 93 अरब यूरो (107.68 अरब डॉलर) का आयात शुल्क लगाने या अमेरिकी कंपनियों को यूरोपीय ब्लॉक में व्यापार करने से रोकने पर विचार कर रहा है। </p>
<p>फाइनेंशियल टाइम्स की सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में आधिकारिक सूत्रों के हवाले से कहा गया कि अगले हफ्ते दावोस में विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) पर होने वाली बैठक से पहले इस शुल्क का मसौदा तैयार किया जा रहा है, ताकि राष्ट्रपति ट्रंप पर यूरोपीय नेताओं को थोड़ी बढ़त मिल सके। </p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया कि यूरोपीय यूनियन ने पिछले साल ही आयात शुल्क की सूची बना ली थी लेकिन व्यापार युद्ध रोकने के लिये उसे छह फरवरी तक के लिये स्थगित कर दिया था। ग्रीनलैंड पर अमेरिका-यूरोप के बीच बढ़ते तनाव के कारण ईयू नेताओं ने रविवार को इसे दोबारा लागू करने पर विचार किया। इसके अलावा यूरोपीय नेताओं ने दबाव-विरोधी मसौदे पर भी बातचीत की, जिसके लागू होने पर अमेरिकी कंपनियां यूरोप में अपना सामान नहीं बेच पायेंगी। </p>
<p>उल्लेखनीय है कि, इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि जो देश ग्रीनलैंड खरीदने के मुद्दे पर अमेरिका का समर्थन नहीं करेंगे, वह उन पर आयात शुल्क लगा सकते हैं। ट्रंप ने डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, नॉर्वे, स्वीडन और ब्रिटेन पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने की घोषणा भी की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर हालात नहीं बदलते तो एक जून से यह बढ़कर 25 प्रतिशत हो जायेगा। जिसके बाद आठों देशों ने रविवार को एक संयुक्त बयान जारी कर ग्रीनलैंड और डेनमार्क के लिये पूर्ण समर्थन का ऐलान किया था। </p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप बुधवार और गुरुवार को विश्व आर्थिक मंच की बैठक में हिस्सा लेंगे। वहां वह यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सला वॉन डेर लियन सहित अन्य यूरोपीय नेताओं से बात कर सकते हैं। इसके साथ ही वह यूक्रेन का समर्थन करने वाले पश्चिमी देशों की एक बैठक में भी शामिल हो सकते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Jan 2026 17:13:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली पहुंचे उप प्रधानमंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की, भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा संभव</title>
                                    <description><![CDATA[पोलैंड के उप-प्रधानमंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की जयपुर साहित्य उत्सव के बाद दिल्ली पहुंचे। वे विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ रक्षा, सुरक्षा और व्यापार पर रणनीतिक चर्चा करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/deputy-prime-minister-of-poland-radoslaw-sikorski-reached-delhi-possible/article-140066"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/polamnd.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत के तीन दिवसीय दौरे पर आए पोलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से सोमवार को नयी दिल्ली पहुंचे। जहां उनका स्वागत अतिरिक्त सचिव पूजा कपूर ने किया। उनके दौरे का उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाना और भारत और पोलैंड के बीच सहयोग के नए क्षेत्रों का पता लगाना है।</p>
<p>पोलैंड के उप प्रधानमंत्री के विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात कर भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाने पर चर्चा करने की उम्मीद है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक पोस्ट में कहा, नयी दिल्ली में आपका हार्दिक स्वागत है।</p>
<p>पोलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की आज नई दिल्ली पहुंचे। नयी दिल्ली में उनके कार्यक्रम भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाने पर केंद्रित हैं। राजधानी पहुंचने से पहले सिकोरस्की ने 17 से 18 जनवरी तक जयपुर का दौरा किया, जहां उन्होंने जयपुर साहित्य महोत्सव में भाग लिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Jan 2026 12:21:57 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>ट्रंप की 'टैरिफ धमकी' से शेयर बाजार में कोहराम, निवेशकों के करोड़ों रूपए स्वाहा</title>
                                    <description><![CDATA[सोमवार को डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यूरोपीय देशों पर भारी आयात शुल्क लगाने की घोषणा से वैश्विक बाजारों में अस्थिरता फैल गई, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान पर आ गए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/a-sharp-fall-in-the-stock-markets-on-the-very/article-140064"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/share-market02.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा विभिन्न यूरोपीय देशों के सामानों पर अतिरिक्त आयात शुल्क की घोषणा के बाद सोमवार को घरेलू शेयर बाजारों में चौतरफा बिकवाली रही। बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 75.85 अंक गिरकर 83,494.49 अंक पर खुला। खबर लिखे जाते समय यह पिछले कारोबारी दिवस के मुकाबले 618.72 अंक (0.74 प्रतिशत) नीचे 82,951.63 अंक पर था।</p>
<p>इसी प्रकार, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 सूचकांक 41.25 अंक टूटकर 25,653.10 अंक पर खुला। खबर लिखे जाते समय यह भी 184.15 अंक यानी 0.72 फीसदी की गिरावट के साथ 25,510.20 अंक पर रहा। एफएससीजी को छोड़कर अन्य सभी सेक्टरों में फिलहाल गिरावट है।</p>
<p>सेंसेक्स की गिरावट में आईसीआईसीआई बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, इंफोसिस, एलएंडटी, टीसीएस और एसबीआई का योगदान अधिक था जबकि इंडिगो, टेक महिंद्रा और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयरों में तेजी बनी हुई थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Jan 2026 12:10:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बयानों के बाद ग्रीनलैंड, डेनमार्क में भड़का विरोध प्रदर्शन, ग्रीनलैंडवासियों का है ग्रीनलैंड के नारे लगाए</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रीनलैंड की संप्रभुता के समर्थन में कोपेनहेगन और नूक में हजारों लोग सड़कों पर उतरे। प्रधानमंत्री निल्सन ने ट्रंप की आयात शुल्क और अधिग्रहण की धमकी को सिरे से खारिज किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/protests-broke-out-in-denmark-after-us-president-trumps-statements/article-140011"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/hands-off-greenland-demonstration-in-copenhagen.webp" alt=""></a><br /><p>कोपेनहेगन। ग्रीनलैंड पर नियंत्रण करने के अमेरिकी प्रयासों और बयानों के विरोध में डेनमार्क और ग्रीनलैंड के कई शहरों में विशाल विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं। </p>
<p>डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन के 'सिटी हॉल स्क्वायर' पर शनिवार को स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 12 बजे (भारतीय समयानुसार अपराह्न 4:30 बजे) भारी भीड़ जमा हुई, जिसने अमेरिकी दूतावास तक मार्च निकाला। इस प्रदर्शन में डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों देशों के नागरिक शामिल हुए, जो अपने हाथों में राष्ट्रीय ध्वज थामे हुए थे। </p>
<p>इस बीच ग्रीनलैंड की राजधानी नूक में भी दोपहर से ही लोग जुटना शुरू हो गए और ग्रीनलैंडवासियों का है ग्रीनलैंड के नारे लगाए। इस प्रदर्शन में ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक निल्सन भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने पारंपरिक इनुइट गीत गाए और कई लोग मेक अमेरिका गो अवे (अमेरिका को वापस भेजो) लिखी हुई टोपियां पहने नजर आये। </p>
<p>प्रदर्शनों के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि अमेरिका एक फरवरी से डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नीदरलैंड और फिनलैंड से आने वाले सभी सामानों पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाएगा। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ग्रीनलैंड की खरीद को लेकर कोई समझौता नहीं होता है, तो एक जून से इस शुल्क को बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया जाएगा। </p>
<p>उल्लेखनीय है कि ग्रीनलैंड, डेनमार्क साम्राज्य के भीतर एक स्वशासी क्षेत्र है, जिसकी रक्षा और विदेश नीति डेनमार्क सरकार के नियंत्रण में है। ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में भी इस द्वीप को खरीदने की इच्छा जतायी थी, लेकिन अब वे इसे हासिल करने के लिए अमेरिकी सेना के उपयोग सहित कई विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। </p>
<p>इससे पहले बुधवार को वॉशिगटन में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ डेनमार्क और ग्रीनलैंड के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई थी, जिसमें ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर मौलिक असहमति बनी रही। इस बीच, ट्रंप की आयात शुल्क लगाने की धमकियों पर नॉर्डिक देशों और यूरोपीय संघ ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। डेनमार्क सहित कई यूरोपीय देशों ने ब्लैकमेल और अस्वीकार्य करार देते हुए एकजुट होकर जवाब देने की चेतावनी दी है। </p>
<p>डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने इस धमकी पर हैरानी जताते हुए कहा कि वे यूरोपीय आयोग के संपर्क में हैं। नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर और फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने स्पष्ट किया कि सहयोगियों के बीच विवादों का समाधान दबाव के बजाय बातचीत से होना चाहिए। स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन ने इसे सीधे तौर पर ब्लैकमेल बताते हुए कहा कि स्वीडन ऐसी धमकियों के आगे नहीं झुकेगा। </p>
<p>फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी ट्रंप के कदम की आलोचना की है। मैक्रों ने कहा कि यूरोपीय देश इस पर समन्वित प्रतिक्रिया देंगे, जबकि स्टार्मर ने ग्रीनलैंड के भविष्य का फैसला डेनमार्क और वहां के लोगों द्वारा किए जाने की वकालत की। </p>
<p>यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने चेतावनी दी कि ऐसे कदम से ट्रांस-अटलांटिक संबंधों में गिरावट आएगी। इस बीच, यूरोपीय संसद में अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौतों को स्थगित करने और दबाव विरोधी रणनीति जैसे सख्त व्यापारिक हथियारों के इस्तेमाल की मांग तेज हो गयी है। साइप्रस की अध्यक्षता में रविवार को यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों के राजदूतों की आपात बैठक बुलाई गयी है। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Jan 2026 18:54:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>यूरोपीय संघ ने मर्कोसुर व्यापार समझौते को दी मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[फ्रांस के विरोध के बावजूद, यूरोपीय संघ ने मर्कोसुर देशों के साथ ऐतिहासिक व्यापार समझौते को हरी झंडी दे दी है। यह समझौता 70 करोड़ लोगों का मुक्त-व्यापार क्षेत्र बनाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/eu-approves-mercosur-trade-agreement/article-139146"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/eu.png" alt=""></a><br /><p>ब्रुसेल्स। यूरोपीय संघ के सदस्य देशों ने शुक्रवार को लंबे समय से विचाराधीन ईयू-मर्कोसुर साझेदारी समझौते को हरी झंडी दे दी। ईयू सदस्यों ने व्यापारिक लाभों को बढ़ाने के लिए एक व्यापक साझेदारी समझौते और एक स्वतंत्र अंतरिम व्यापार समझौते की सहमति दी है।  ईयू ने बताया कि यह समझौता ईयू और मर्कोसुर के संबंधों में एक मील का पत्थर है। यह एक आधुनिक साझेदारी के तहत राजनीतिक संवाद, सहयोग और व्यापार के लिए एक रूपरेखा स्थापित करता है। </p>
<p>ज्ञातव्य है कि, लगभग 25 वर्षों से ईयू-मर्कोसुर समझौते पर बातचीत चल रही है, जो बदलती राजनीतिक स्थितियों, दक्षिण अमेरिका में पर्यावरणीय सुरक्षा पर विवादों और यूरोप के कृषि क्षेत्र के कुछ हिस्सों के विरोध के कारण बार-बार रुकती और शुरू होती रही है। इसमें निर्णायक सफलता दिसंबर 2024 में मिली, जब ईयू और मर्कोसुर नेताओं ने घोषणा की कि वे साझेदारी के लिए एक व्यापक समझौते पर पहुंच गये हैं। इसके बाद हस्ताक्षर और समर्थन से पहले आवश्यक कानूनी और तकनीकी कार्य शुरू किए गए। </p>
<p>यूरोपीय आयोग ने इस समझौते को ईयू का अब तक का सबसे बड़ा व्यापार समझौता बताया है। आयोग का कहना है कि इससे 70 करोड़ से अधिक लोगों का मुक्त-व्यापार क्षेत्र बनेगा और ईयू निर्यात पर सालाना चार अरब यूरो (4.65 अरब अमेरिकी डॉलर) से अधिक का शुल्क कम हो जाएगा।</p>
<p><strong>ईयू के कुछ सदस्य देशों ने विरोध भी किया</strong></p>
<p>ज्ञातव्य है कि इस समझौते पर ईयू के कुछ सदस्य विरोध जताते रहे हैं। जर्मनी और स्पेन जैसे समर्थकों का कहना है कि यह सौदा नये बाजार खोलने में मदद करेगा क्योंकि यूरोप अमेरिकी शुल्कों के प्रभाव की भरपाई करना चाहता है। फ्रांस के नेतृत्व वाले विरोधियों ने चेतावनी दी है कि इससे सस्ते गोमांस, पोल्ट्री और चीनी का आयात बढ़ सकता है, जिससे घरेलू किसानों पर दबाव बढ़ेगा। </p>
<p>हाल के महीनों में, यूरोपीय आयोग ने संवेदनशील कृषि आयात से होने वाले नुकसान को सीमित करने के लिए अतिरिक्त‘सुरक्षा उपायों’के साथ समर्थन जुटाने की कोशिश की है।  आयोग ने इटली सहित विरोध करने वाले सदस्य देशों को मनाने के उद्देश्य से कुछ उपायों का प्रस्ताव रखा है, जैसे 2028 से‘सामान्य कृषि नीति’के तहत 45 अरब यूरो की सहायता किसानों को उपलब्ध कराना और कृषि क्षेत्र में प्रोत्साहन के लिए उर्वरकों पर लगने वाले ईयू के‘कार्बन बॉर्डर टैक्स’को फिलहाल के लिए रोकना। शुक्रवार को फ्रांस, पोलैंड, ऑस्ट्रिया, आयरलैंड और हंगरी ने इस समझौते के खिलाफ मतदान किया, जबकि बेल्जियम अनुपस्थित रहा। इटली ने अपने कृषि क्षेत्र के लिए अतिरिक्त आश्वासन मिलने के बाद इस सौदे का समर्थन किया। राजनयिकों का कहना है कि आवश्यक योग्य बहुमत हासिल करने के लिए इटली का समर्थन महत्वपूर्ण था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 Jan 2026 12:02:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>यूक्रेन में शांति सेना: राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों का ऐलान, संघर्ष विराम के बाद अपने सैनिकों को भेजेंगे यूक्रेन</title>
                                    <description><![CDATA[फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने यूक्रेन-रूस संघर्ष विराम के बाद शांति बनाए रखने हेतु हजारों सैनिक तैनात करने की घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये सैनिक केवल निगरानी और पुनर्निर्माण में सहयोग करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/president-emmanuel-macron-announces-that-ukraine-will-send-its-troops/article-138740"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/emmanuel-macron.png" alt=""></a><br /><p>पेरिस। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने कहा है कि रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष विराम होने के बाद वह यूक्रेन में शांति बरकरार रखने के लिये 'हजारों फ्रांसिसी सैनिक' तैनात कर सकते हैं। उन्होंने यहां मंगलवार को पश्चिमी और यूरोपीय देशों की एक बैठक के दौरान फ्रांस-2 टीवी चैनल के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि फ्रांस संघर्ष विराम पर हस्ताक्षर होने के बाद रूस-यूक्रेन सीमा की देखरेख के लिये'अभियानों में हिस्सा लेगा।</p>
<p>उन्होंने यह भी साफ किया कि फ्रांसिसी सैनिक यूक्रेन में युद्ध के लिये नहीं जायेंगे। फ्रांस की भूमिका यूक्रेनी सेना के पुनर्निमाण तक ही सीमित होगी। राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि यूक्रेन, यूरोपीय देशों और अमेरिका के बीच बातचीत हुई है और यही देश फैसला करेंगे कि सीमा का उल्लंघन हुआ है या नहीं। </p>
<p>उल्लेखनीय है कि, 30 पश्चिमी और यूरोपीय देशों ने मंगलवार को यहां एक बैठक में इस बात पर सहमति जताई कि भविष्य का कोई भी शांति समझौता यूक्रेन के लिये मजबूत और बाध्य सुरक्षा गारंटियों के बिना नहीं होगा। सभी देशों ने एक संयुक्त बयान में कहा कि वे संघर्ष विराम होने के बाद वे एक राजनीतिक और कानूनी तौर पर बाध्य गारंटियों की व्यवस्था लागू करने के लिये तैयार हैं। इसमें अमेरिका के नेतृत्व वाले संघर्ष विराम की निगरानी व्यवस्था में हिस्सा लेना, यूक्रेन को सैन्य समर्थन देना और दीर्घकालिक रक्षा सहयोग शामिल होगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Jan 2026 15:21:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की अपील दोहराई, यूरोपीय संघ ने जताई आ​पत्ति</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड पर कब्जे की मांग दोहराई है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा। डेनमार्क और यूरोपीय संघ ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-president-trump-reiterates-appeal-to-occupy-greenland-european-union/article-136881"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/donald-trump5.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक बार फिर ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की अपनी अपील दोहराई, जिससे डेनमार्क और यूरोपीय संघ की ओर से कड़ी आपत्ति दर्ज की गई। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, हमें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड की जरूरत है, खनिजों के लिए नहीं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्लोरिडा के पाम बीच में अपने मार-ए-लागो रिसॉर्ट में संवाददाताओं से कहा, वे कहते हैं कि डेनमार्क इसका मालिक है। </p>
<p>डेनमार्क ने इस पर कोई पैसा खर्च नहीं किया है और न ही कोई सैन्य सुरक्षा प्रदान की है। डेनमार्क ग्रीनलैंड की रक्षा के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार है और द्वीप से संबंधित सैन्य क्षमताएं बनाए रखता है।</p>
<p>रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने लुइसियाना के गवर्नर जेफ लैंड्री को ग्रीनलैंड के लिए विशेष दूत नियुक्त करने की घोषणा की थी। ट्रंप ने कहा, हमें ग्रीनलैंड हासिल करना ही होगा और वह (लैंड्री) इस अभियान का नेतृत्व करना चाहते थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Dec 2025 12:56:49 +0530</pubDate>
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