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                <title>Labor Day - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Labor Day RSS Feed</description>
                
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                <title>देवनानी ने बुद्ध पूर्णिमा व श्रमिक दिवस पर दी शुभकामनाएं, कहा- उनका योगदान आर्थिक व सामाजिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने बुद्ध पूर्णिमा और अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि गौतम बुद्ध के पंचशील सिद्धांत आज भी प्रासंगिक हैं और उनका जीवन अहिंसा, करुणा व सत्य का संदेश देता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/devnani-extended-best-wishes-on-buddha-purnima-and-labor-day/article-152232"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/vasudev-devnani.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने बुद्ध पूर्णिमा और अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि गौतम बुद्ध के पंचशील सिद्धांत आज भी प्रासंगिक हैं और उनका जीवन अहिंसा, करुणा व सत्य का संदेश देता है। देवनानी ने मध्यम मार्ग और अष्टांगिक मार्ग को जीवन में अपनाने की बात कही।</p>
<p>श्रमिक दिवस पर उन्होंने श्रमिकों को राष्ट्र निर्माण की धुरी बताते हुए कहा कि उनका योगदान आर्थिक व सामाजिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने श्रमिकों के अधिकार, सम्मान और सुरक्षित कार्य-परिस्थितियों पर जोर देते हुए सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की आवश्यकता जताई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 17:31:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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                <title>श्रमेव जयते का उद्घोष करता मजदूर दिवस</title>
                                    <description><![CDATA[इस दिन को लेबर डे, मई दिवस और मजदूर दिवस भी कहा जाता है। आज मजदूरों की उपलब्धियों को और देश के विकास में उनके योगदान को सलाम करने का दिन है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/labor-day-announcing-shramev-jayate/article-44302"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/z-7.png" alt=""></a><br /><p>एक मई का दिन दुनिया के कई देशों में अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के तौर पर मनाया जाता है। यह दिन दुनिया के मजदूरों और श्रमिक वर्ग को समर्पित है। इस दिन को लेबर डे, मई दिवस और मजदूर दिवस भी कहा जाता है। आज मजदूरों की उपलब्धियों को और देश के विकास में उनके योगदान को सलाम करने का दिन है। यह दिन मजदूरों के सम्मान, उनकी एकता और उनके हक के समर्थन में मनाया जाता है। इस दिन दुनिया के कई देशों में छुट्टी होती है। इस मौके पर मजदूर संगठनों से जुड़े लोग रैली व सभाओं का आयोजन करते है और अपने अधिकारों के लिए आवाज भी बुलंद करते है। हालांकि कोरोना के चलते 2 साल से इस तरह के आयोजन नहीं हुए हैं।</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस की शुरुआत एक मई 1886 को अमेरिका में एक आंदोलन से हुई थी। इस आंदोलन के दौरान अमेरिका में मजदूर काम करने के लिए 8 घंटे का समय निर्धारित किए जाने को लेकर आंदोलन पर चले गए थे। 1 मई, 1886 के दिन मजदूर लोग रोजाना 15-15 घंटे काम कराए जाने और शोषण के खिलाफ  पूरे अमेरिका में सड़कों पर उतर आए थे। इस दौरान कुछ मजदूरों पर पुलिस ने गोली चला दी थी, जिसमें कई मजदूरों की मौत हो गई और 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इसके बाद 1889 में अंतरराष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन की दूसरी बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें यह ऐलान किया गया कि 1 मई को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाएगा और इस दिन सभी कामगारों और श्रमिकों का अवकाश रहेगा। इसी के साथ भारत सहित दुनिया के तमाम देशों में काम के लिए 8 घंटे निर्धारित करने की नींव पड़ी।</p>
<p>भारत में मजदूर दिवस की शुरुआत चेन्नई में 1 मई 1923 में हुई। भारत में लेबर किसान पार्टी आॅफ  हिन्दुस्तान ने 1 मई 1923 को मद्रास में इसकी शुरुआत की थी। यही वह मौका था जब पहली बार लाल रंग झंडा मजदूर दिवस के प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल किया गया था। यह भारत में मजदूर आंदोलन की एक शुरुआत थी जिसका नेतृत्व वामपंथी व सोशलिस्ट पार्टियां कर रही थीं। दुनियाभर में मजदूर संगठित होकर अपने साथ हो रहे अत्याचारों व शोषण के खिलाफ आवाज उठा रहे थे।<br />आज ही के दिन दुनिया के मजदूरों के अनिश्चित काम के घंटों को 8 घंटे में तब्दील किया गया था। मजदूर वर्ग इस दिन पर बड़ी-बड़ी रैलियों व कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। अंतरराष्ट्रीय श्रमिक संगठन द्वारा इस दिन सम्मेलन का आयोजन किया जाता है। कई देशों में मजदूरों के लिए कल्याणकारी योजनाओं की घोषणाएं की जाती हैं। टीवी, अखबार, और रेडियो जैसे प्रसार माध्यमों द्वारा मजदूर जागृति के लिए कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं। भारत में लेबर डे को अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस, मई दिवस, कामगार दिन, इंटरनेशनल वर्कर डे, वर्कर डे भी कहा जाता है।</p>
<p>1 मई को ही महाराष्ट्र और गुजरात का स्थापना दिवस भी मनाया जाता है। भारत की आजादी के समय यह दोनों राज्य मुंबई प्रदेश का हिस्सा थे। महाराष्ट्र में इस दिन को महाराष्ट्र दिवस, जबकि गुजरात में इसे गुजरात दिवस के नाम से भी जाना जाता है। मजदूरों द्वारा की गई कड़ी मेहनत का सम्मान करने के साथ-साथ श्रमिकों के अधिकारों के लिए लड़ने वालों को सम्मान देने के लिए श्रम दिवस को मनाया जाता है। इस दिन को भारत के कई देशों में हर साल 1 मई के दिन मनाया जाता है। बहुत संघर्ष के बाद श्रमिकों को उनके अधिकार दिए गए थे। जिन्होंने इस दिवस के लिए कड़ी मेहनत की उन्होंने इसके महत्व को और अधिक बढ़ा दिया। इस दिन का उनके लिए विशेष महत्व था। इस प्रकार अधिकांश देशों में श्रम दिवस समारोह ने शुरू में अपने संघ के उन नेताओं को सम्मान देने का काम किया। जिन्होंने इस विशेष दिन का दर्जा हासिल किया और दूसरों को अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए प्रेरित किया। प्रमुख नेताओं और श्रमिकों द्वारा एक साथ प्रसन्नता के साथ समय बिताने पर भाषण दिए जाते हैं। ट्रेड यूनियन मजदूरों की टीम के लिए विशेष लंच और रात्रि भोज या संगठित पिकनिक और आउटिंग आयोजित करते हैं। कार्यकर्ताओं के अधिकारों का जश्न मनाने के लिए अभियान और परेड आयोजित की जाती है। पटाखे भी जलाए जाते हैं। जहां कई संगठन और समूहों द्वारा इस दिन पर लंच और पिकनिक और ट्रेड यूनियनों द्वारा अभियान तथा परेड आयोजित किए जाते हैं वहीं कई लोग इस दिन को बस आराम करने और फिर से जीवंत करने के अवसर के रूप में देखते हैं। वे अपने लंबित घरेलू कार्यों को पूरा करने में समय व्यतीत करते हैं या अपने दोस्तों और परिवार के साथ बाहर जाते हैं। कनाड़ा और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों में जहां श्रम दिवस को सितंबर के पहले सोमवार को मनाया जाता है वहां लोग लंबे सप्ताहांत का आनंद लेते हैं। वे आमतौर पर परिवार के साथ बाहर जाने या दोस्तों के साथ बाहर जाने की योजना बनाते हैं। यह उन्हें थकाने वाले दैनिक जीवन से बहुत आवश्यक राहत प्रदान करता है। लोग इसे छुट्टी के समय के रूप में भी देखते हैं। श्रमिकों के बीच एकता को बढ़ावा देने के लिए भी भाषण दिए जाते हैं।                    </p>
<p>-<strong>प्रकाश चंद्र शर्मा</strong><br /><br /></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 May 2023 10:42:00 +0530</pubDate>
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