<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/mukundara-hills-tiger-reserve/tag-35383" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>mukundara hills tiger reserve - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/35383/rss</link>
                <description>mukundara hills tiger reserve RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>ट्रैक पर न पहुंच जाए वन्यजीव , दरा में रेलवे लाइन के किनारे बढ़ाई निगरानी</title>
                                    <description><![CDATA[सीसीएफ ने की सीमा दीवार की जांच, टूट-फूट पर तत्काल कार्रवाई के दिए निर्देश।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/to-prevent-wildlife-from-reaching-the-track--surveillance-increased-along-the-railway-line-in-dara/article-166157"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)-(3)10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में रेलवे ट्रैक वन्यजीवों के लिए संभावित खतरे वाला क्षेत्र है। दरा रेंज से गुजरने वाली रेलवे लाइन पर वन्यजीव न पहुंचें, इसके लिए वन विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। मुकुंदरा के सीसीएफ डॉ. टी-मोहनराज ने डीसीएफ, एसीएफ, रेंजर व फिल्ड स्टाफ के साथ रेलवे ट्रैक के आसपास पैदल गश्त कर सुरक्षा इंतजामों का जायजा लिया।</p>
<p><strong>सीमा दीवार में गैप तो नहीं?</strong><br />पैदल निरीक्षण के दौरान रेलवे ट्रैक के किनारे वन्यजीवों को रोकने के लिए बनाई गई सीमा दीवार को अलग-अलग स्थानों पर जांचा परखा गया। टीम ने देखा कि दीवार अपनी जगह सुरक्षित है, कहीं टूट-फूट या गैप तो नहीं है। वनकर्मियों को निर्देश दिए गए कि ऐसे किसी भी स्थान की तत्काल पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। ताकि, टाइगर सहित अन्य वन्यजीव रेलवे ट्रैक तक न पहुंच पाए।</p>
<p><strong>रेलवे से सूचनाओं का होगा आदान-प्रदान</strong><br />सीसीएफ ने रेलवे कर्मचारियों से भी संवाद किया। ट्रैक के आसपास वन्यजीवों की आवाजाही और उनकी गतिविधियों से जुड़ी सूचनाएं समय पर साझा करने पर चर्चा हुई। उन्होंने वन विभाग और रेलवे के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया गया, ताकि वन्यजीवों से जुड़ी किसी भी गतिविधि की सूचना समय रहते मिल सके।</p>
<p><strong>संवेदनशील स्थानों पर पैदल गश्त</strong><br />दरा रेंज के वनकर्मियों को रेलवे ट्रैक के किनारे नियमित पैदल गश्त करने के निर्देश दिए हैं। खासतौर पर सीमा दीवार और संवेदनशील स्थानों पर निगरानी रखने को पाबंद किया है। सुरक्षा संरचना में किसी तरह की क्षति मिलने पर उसे तत्काल दुरुस्त कराने की कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p><strong>वन्यजीव सुरक्षा पर फोकस</strong><br />मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में रेलवे ट्रैक से वन्यजीवों को होने वाले संभावित जोखिम को कम करना वन विभाग के लिए अहम है। इसी को देखते हुए ट्रैक के आसपास नियमित निगरानी और गश्त की जा रही है, ताकि वन्यजीव सुरक्षित रूप से अपने क्षेत्र में आवाजाही कर सकें और रेलवे लाइन तक पहुंचने की स्थिति न बने। सीसीएफ ने आमजन से रेलवे ट्रैक पर प्रवेश नहीं करने तथा वन्यजीवों की सुरक्षा से जुड़े निर्देशों का पालन करने की अपील की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/to-prevent-wildlife-from-reaching-the-track--surveillance-increased-along-the-railway-line-in-dara/article-166157</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/to-prevent-wildlife-from-reaching-the-track--surveillance-increased-along-the-railway-line-in-dara/article-166157</guid>
                <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 15:12:03 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-09/1200-x-60-px%29-%28youtube-thumbnail%29-%283%2910.png"                         length="1499946"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>100 किमी चक्कर काट कर भी निराश लौट रहे पर्यटक</title>
                                    <description><![CDATA[पर्यटकों की मांग है कि या तो जिप्सी की संख्या बढ़ाई जाए या फिर शहर से सटे बोराबांस में सफारी शुरू करवाई जानी चाहिए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/tourists-returning-disappointed-even-after-traveling-100-km/article-78206"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/100km-chakkr-kat-k-bhi-nirash-laut-rhe-pryatak...kota-news-16-05-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी शुरू हुए करीब एक साल बीत चुका है। फिर भी सफारी परवान नहीं चढ़ सकी। वर्तमान में दरा अभयारणय में एक जिप्सी के भरोसे ही सफारी करवाई जा रही है। अधिकतर समय जिप्सी की एडवांस बुकिंग रहती है। ऐसे में कोटा शहर से दरा जाने वाले पर्यटकों को 50 किमी का चक्कर काटने के बाद भी सफारी का मौका नहीं मिल पाता। मजबूरन उन्हें वापस 50 किमी का तय कर बैरंग लौटना पड़ता है। इस तरह दरा आने-जाने में 100 किमी का चक्कर लगाने के बावजूद निराश लौटना पड़ रहा है। जबकि, शहरी सीमा से सटे बोराबांस में भी सफारी का रुट स्वीकृत है। जहां एक साल बाद भी सफारी शुरू नहीं हो सकी। पर्यटकों का कहना है, मुकुंदरा प्रशासन यदि, रावतभाटा रोड स्थित बोराबांस रैंज में स्वीकृत रुट्स पर सफारी शुरू करें तो पर्यटकों को काफी राहत मिलेगी। साथ ही समय की बचत हो सकेगी और ट्यूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। </p>
<p><strong>एक जिप्सी के भरोसे सफारी</strong><br />दरा सेंचुरी में जंगल सफारी के लिए मात्र एक ही जिप्सी है, जो सुबह की पारी में 6.30 से  9.30 तथा दोपहर 3 से 6 बजे तक रहती है। पर्यटकों को एंट्री व टिकट दरा रेंज कार्यालय से लेना होता है। यहीं से बुकिंग आॅफलाइन की जाती है। कोटा शहर से जाने वाले पर्यटकों को वहां जाकर पता लगता है कि जिप्सी एडवांस बुक हैं, ऐसे में उन्हें सफारी का मौका अगले दिन मिल पाएगा या फिर दोपहर की पारी तक इंतजार करना होगा। दोनों ही सूरत में पर्यटकों का समय व्यर्थ हो जाता है। मजबूरन उन्हें बैरंग लौटना पड़ता है। यदि, यहां जिप्सियों की संख्या बढ़ाई जाए तो भी लोगों को राहत मिल सकती है।  </p>
<p><strong>दरा में 4500 से 700 किराया</strong><br />दरा रेंज में मौरूकलां-बंजर-रेतिया तलाई-पटपडिया-सावनभादौ एरिया शामिल है। करीब 21 किमी के जंगल में सफारी करवाई जाती है। 6 पर्यटक होने पर ही जिप्सी सफारी के लिए रवाना होती है। ट्यूरिस्ट की संख्या कम होने पर उनसे 6 सीटों का किराया 4500 से 700 रुपए किराया वसूला जाता है। हालांकि, टिकट दर रणथम्भौर से दोगुनी कम है और वन्यजीवों की साइटिंग व सावनभादौं डेम का विहंग्म दृश्य आकर्षित करते हैं। पर्यटकों की मांग है कि या तो जिप्सी की संख्या बढ़ाई जाए या फिर शहर से सटे बोराबांस में सफारी शुरू करवाई जानी चाहिए। </p>
<p><strong>यह तीन रुट हैं स्वीकृत</strong><br />मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में सफारी के लिए चार रुट प्रस्तावित हैं। इनमें बोराबांस रेंज शहर के सबसे नजदीक है। इस रैंज में बंधा-बग्गी रोड, अखावा-बलिंडा-बंधा शामिल है। यहां विभिन्न तरह के वन्यजीव व बल खाती चंबल और मुस्कुराती कराइयां मौजूद हैं। ऐसे में यहां सफारी शुरू की जाए तो पर्यटन तो बढ़ेगा ही साथ ही सरकार के राजस्व में वृद्धि हो सकेगी। इसके अलावा कोलीपुरा रेंज में नागनी चौकी पोस्ट, कालाकोट-दीपपुरा घाटा-कान्या तालाब-नागनी चौकी पोस्ट, तीसरा रूट मंदरगढ़ में बेरियर-मंदरगढ़, तालाब-केशोपुरा-रोझा तालाब होते हुए मंदरगढ़ बेरियर शामिल है। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं पर्यटक</strong><br />दरा में जंगल सफारी के लिए बुकिंग भी आॅफ लाइन है। जिसे जल्द से जल्द आॅनलाइन किया जाना चाहिए। शहर से 50 किमी का सफर कर दरा पहुंचते हैं तो वहां जाकर जिप्सी एडवांस बुक होने की बात पता चलती है, जिससे आना-जाना मिलाकर 100 किमी का चक्कर व्यर्थ हो जाता है। मुकुंदरा प्रशासन को बोराबास रैंज में सफारी शुरू करनी चाहिए।<br /><strong>- यतिंद्र कुमार, दादाबाड़ी </strong></p>
<p> दरा बहुत दूर पड़ता है। ऐसे में रावतभाटा रोड स्थित बोराबास रेंज में प्रस्तावित रुट पर जंगल सफारी शुरू की जानी चाहिए। ताकि, पर्यटकों का समय व पेट्रोल का पैसा बच सके। साथ ही बुकिंग प्रणाली भी आॅनलाइन होनी चाहिए, जिससे व्यक्ति सफारी से पहले बुकिंग की करंट स्टेटस को देख ट्रैवलिंग प्लान बना सके।<br /><strong>- ललित नामा, महावीर नगर</strong></p>
<p>मैं अपने साथियों के साथ कुछ माह पहले सफारी के लिए दरा गया था। वहां जाकर पता लगा कि जिप्सी एडवांस में ही बुक हो चुकी है। ऐसे में वापस बैरंग लौटना पड़ा। यदि, बुकिंग व्यवस्था आॅनलाइन होती या फिर जिप्सी की संख्या अधिक होती तो उसी दिन सफारी का मौका मिल जाता। विभाग को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने की जरूरत है। <br /><strong>- चेतन कुमार सैन, कैशवपुरा </strong></p>
<p>बोराबांस रैंज का रुट जंगल सफारी के लिए प्रस्तावित है। यहां सफारी शुरू करवाने के लगातार प्रयास जारी है। हालांकि, बोराबास रैंज में वाहन मालिक  रुचि नहीं दिखा रहे हैं। हमने आवेदन भी मांगे हैं, वाहनों का रजिस्ट्रेÑशन होते ही सफारी शुरू करवा दी जाएगी। पर्यटकों के लिए सुविधाओं में विस्तार कर रहे हैं। <br /><strong>- अभिमन्यू सहारण, डीएफओ, मुकुंदरा टाइगर रिजर्व कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/tourists-returning-disappointed-even-after-traveling-100-km/article-78206</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/tourists-returning-disappointed-even-after-traveling-100-km/article-78206</guid>
                <pubDate>Thu, 16 May 2024 16:59:25 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-05/100km-chakkr-kat-k-bhi-nirash-laut-rhe-pryatak...kota-news-16-05-2024.jpg"                         length="651653"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दरा के जंगलों को आग से बचाने के लिए बनाई 50 किमी फायर लाइन</title>
                                    <description><![CDATA[ वन्यजीवों को पानी उपलब्ध करवाने से दमकलों तक का प्रबंध।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/50-km-fire-line-built-to-protect-the-forests-of-dara-from-fire/article-77601"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/dara-k-jungalo-ko-aag-s-bchane-k-liye-bnayi-50-km-fire-line...kota-news-11-05-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के अभिन्न हिस्सा दरा अभयारण्य के जंगलों को आगजनी की घटनाओं से बचाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। 82 वर्ग स्क्वायर किमी में फैले जंगल और वन्यजीवों को आग से बचाने के लिए मुकुंदरा प्रशासन ने पूरे जंगल में 50 किमी लंबी फायर लाइन बनाई है। साथ ही दमकलें सहित ग्रामीणों से सामंजस्य स्थापित किया है। वहीं, सरकारी व निजी पानी के टैंकरों की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा डीओटी द्वारा संचालित सर्विलांस कैमरों की मदद से जंगल के चप्पे चप्पे पर नजर रखी जा रही है। आगजनी की घटना पर तुरंत काबू पाने के इंतजाम पुख्ता किए गए हैं। इसी का नतीजा है, गत 4 अप्रेल को लगी आग को तुरंत काबू कर लिया गया। आग को बढ़ने से पहले ही बुझा दिया।</p>
<p><strong>अलर्ट पर दमकलें </strong><br />रैंजर भाटी ने बताया कि दरा के आसपास की फैक्ट्रियां, रामगंजमंडी व कोटा के फायर स्टेशन पर इमरजेंसी में दमकलें तैयार रखने व सूचना पर तुरंत उपलब्ध करवाने को कहा गया है। जहां से हर संभव मदद का आश्वासन भी मिला है। इसके अलावा स्थानीय ग्रामीणों के साथ बैठकें कर पानी के टैंकरों की व्यवस्था का सुनिश्चित किया है। वहीं, आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। </p>
<p><strong>20 से ज्यादा सर्विलांस कैमरों से नजर</strong><br />मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के दरा अभयारणय में 20 सर्विलांस कैमरें लगे हैं, जो नाइट विजन हैं। जिसका संचालन डीओटी के माध्यम से किया जा रहा है। वहीं, करोड़ों का एंटी पोचिंग सिस्टम भी लगा हुआ है। कैमरों से जंगल के चप्पे-चप्पे पर 24 घंटे नजर रखी जाती है। जहां कहीं संदिग्ध गतिविधि की आहट होने पर ही तुरंत वनकर्मियों को सूचना मिल जाती है। ऐसे में कहीं आगजनी की घटना का समय रहते सूचना मिल जाती है। जिसकी वजह से आग को बढ़ने से पहले ही काबू कर लिया जाता है। </p>
<p><strong>यहां पैंथरों की संख्या सर्वाधिक</strong> <br />दरा सेंचुरी में पैंथर की संख्या सर्वाधिक है। यहां 30 से 35 लेपर्ड हैं। वहीं, हायना, फॉक्स, जेकॉल, भालू, हिरण, चिंकारा, ब्लैक बक, सांभर, नीलगाय, दुर्लभ स्याहगोह, निशाचर सिविट केट, रेटल, जंगली बिल्ली, लंगूर, नेवला, झाऊ चूहा, जंगली खरगोश, चिंटीखोर यानी पैंगोलिन, सेही जंगली चूहा सहित कई वन्यजीवों की मौजूदगी हैं। वहीं, सरीसृप व उभयचर में पायथन, रैट स्नेक, बफ-स्ट्राइप, कीलबैक, चेकर्ड कीलबैक, रेड सैंडबोआ, रेसेल्स वाइपर, टिंÑकेट, कोबरा, सावनभादौं डेम की तरफ चंबल में मगरमच्छ बड़ी संख्या में है। </p>
<p><strong>50 किमी बनाई फायर लाइन </strong><br />दरा अभयारणय के क्षेत्रीय वन अधिकारी जसवीर सिंह भाटी ने बताया कि गर्मियों में जंगलों में आगजनी घटना की आशंकाएं बनी रहती है। ऐसे में आगजनी से बचाव के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। पूरे जंगल में करीब 50 किमी लंबी फायर लाइन बनाई गई है, जो 6 मीटर चौड़ी है। इसके आसपास कोई पेड़-पौधे व झाड़ियां नहीं हैं। इससे आगजनी के दौरान हवा के उठती लटपों को आगे बढ़ने से रोकने में मदद मिलती है। वहीं, सरकारी व निजी पानी के टैंकरों की व्यवस्था की गई है। पानी की टंकी लगे ट्रैक्टरों का भी इंतजाम किया गया है। आसपास के ग्रामीणों से सामंजस्य स्थापित कर आपात स्थिति में सहयोग के लिए आग्रह किया है। स्टाफ भी 24 घंटे लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है। </p>
<p><strong>टैंकरों से भरे जा रहे वाटर प्वाइंट</strong><br />इस अभयारणय में 25 से ज्यादा वाटर प्वाइंट हैं। जिसमें 18 प्राकृतिक और 7 कृत्रिम हैं। इसमें आॅटोमेटिक सौलर बोरवेल भी हैं। अब 4 और सौलर बोरवेल बनाए जाएंगे। गर्मियों में सभी जानवरों को पानी मिले इसके लिए सावनभादौं डेम से टैंकरों में पानी भर वाटर प्वाइंटों पर पहुंचाया जा रहा है। इसके अलावा अन्य व्यवस्थाएं भी की गई हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />गर्मियों में जंगलों में आगजनी की घटनाओं की आशंका बनी रहती है। किसी भी तरह की अप्रिय घटनाओं से बचाव के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। करीब 50 किमी लंबी व 6 मीटर चौड़ी फायर लाइन बनाई गई हैं। वहीं, दमकलें, पानी के टैंकर सहित अन्य इंतजाम किए गए हैं। जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। जंगल के विकास के लिए लगातार प्रयास जारी हैं। <br /><strong>- जसवीर सिंह भाटी, रैंजर दरा अभयारणय, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/50-km-fire-line-built-to-protect-the-forests-of-dara-from-fire/article-77601</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/50-km-fire-line-built-to-protect-the-forests-of-dara-from-fire/article-77601</guid>
                <pubDate>Sat, 11 May 2024 16:44:17 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-05/dara-k-jungalo-ko-aag-s-bchane-k-liye-bnayi-50-km-fire-line...kota-news-11-05-2024.jpg"                         length="540445"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सौलर बुझा रहा जंगल की प्यास</title>
                                    <description><![CDATA[मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में 16 से ज्यादा सौलर लिफ्टिंग सिस्टम ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/solar-is-quenching-the-thirst-of-the-forest/article-77466"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/solar-bhuja-rha-jungle-ki-pyas...kota-news-10-05-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। आग बरसाती भीषण गर्मी ने भले ही इंसानों का हाल बेहाल कर रखा है लेकिन यही सूरज की तपन बेजूबानों का गला तर कर रही है। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में 16 से ज्यादा सौलर लिफ्टिंग सिस्टम लगे हैं, जो सूरज की रोशनी से चंबल से पानी लिफ्ट कर दो-दो किमी तक सूखे वाटर प्वाइंट्स को लबालब कर रहे हैं। वहीं, दूर दराज के प्राकृतिक और कृत्रिम वाटर प्वाइंट पर टैंकरों की मदद से पानी पहुंचाया जा रहा है। हालांकि, कई ऐसे भी वाटर प्वाइंट हैं, जो संसाधनों के अभाव में सूख गए और कुछ सूखने की कगार पर पहुंच गए।  दरअसल, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व की सभी 6 रेंजों में कुल 107 वाटर प्वाइंट हैं। जिसमें से 30 सूख रहे हैं। हालांकि, अधिकतर वाटर प्वाइंट्स पर आॅटोमेटिक सौलर बोरवेल व खुद के टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है। </p>
<p><strong>यहां लगे आॅटोमेटिक सौलर सिस्टम </strong><br />मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व 760 वर्ग किमी में फैला हुआ है, जो 6 रेंजों में बंटा हुआ है। इसमें बोराबास में 4 आॅटोमेटिक सौलर सिस्टम लगे हैं, जो चंबल और बोरवेल की मदद से तलाइयां व वाटर प्वाइंट्स में पानी भरा जा रहा है। इसी तरह से कोलीपुरा में 3, राउंठा में 4 और दरा में 5 सौलर लगे हैं। यह आॅटोमेटिक सौलर बोरवेल सूरज की रोशनी से रिचार्ज हो रहे हैं। जिनसे प्राकृतिक व कृत्रिम वाटर प्वाइंट पानी से लबालब हो रहे हैं। वहीं, दूर-दराज के प्वाइंट को खुद के टैंकर भर रहे हैं। दरा में फूट का तालाब और बोराबास रेंज में ऊंडीखान बड़े प्वाइंट हैं, जो सौलर से भरी जा रही है। </p>
<p><strong>30 वाटर प्वाइंट सूखने की कगार पर </strong><br />उप वन संरक्षक अभिमन्यू सहारण ने बताया कि मुकुुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में कुल 107 वाटर प्वाइंट्स हैं। इनमें 77 प्राकृतिक हैं, जो घाटी व मैदानी क्षेत्र में बने हैं, वहीं 29 कृत्रिम हैं। इनमें  पठारी क्षेत्र वाले वाटर प्वाइंट्स सूख रहे हैं। आॅटोमेटिक सौलर सिस्टम की मदद से तलाइयां, बड़े गड्ढेÞ व वाटर प्वाइंट भरे जा रहे हैं। वहीं, हमारे पास खुद के दो ट्रैक्टर टैंकर हैं, जिससे दरा और जवाहर सागर रेंज के वाटर प्वाइंटों में पानी पहुंचाया जाता है। इसी तरह बोराबास व कोलीपुरा रेंज की तलाइयां भर रहे हैं। हालांकि, 30 ऐसे प्वाइंट्स हैं, जो दुर्गम स्थानों पर हैं, जहां संसाधनों की कमी के कारण पानी पहुंचाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ हैं।   </p>
<p><strong>कहां कितने वाटर प्वाइंट</strong><br /><strong>रेंज                 प्राकृतिक    कृत्रिम    कुल</strong><br />राउंठा                16           02    18<br />गागरोन             07           03    10<br />बोराबास            13           08    21<br />कोलीपुरा            12          06    18<br />दरा                    18          07    25<br />जवाहर सागर      11          04    15</p>
<p><strong>पानी की तलाश में आबादी में पहुंच रहे वन्यजीव</strong><br />वाइल्ड लाइफ रिसर्चर रवि नागर ने बताया कि दौलतगंज के सामने बोराबांस का जंगल है। जहां लोमड़ी, हिरण, जंगली खरगोश, जरख सहित कई छोटे-बड़े वन्यजीवों का हैबीटॉट है। यहां प्राकृतिक वाटर प्वाइंट सूखे हैं। हालांकि, इस इलाके में एक किमी पीछे कैनाल हैं। जिसमें पानी होता है लेकिन गर्मी के कारण वह भी सूखी हुई है। ऐसे में वन्यजीव पानी की तलाश में रावतभाटा रोड क्रॉस कर दौलतगंज रिहायशी इलाके में पहुंच जाते हैं। कई बार वाहनों की चपेट में आने से हादसे का शिकार हो जाते हैं। वहीं, जानवर व इंसानों के बीच टकराव की स्थिति भी बन जाती है। इसलिए  मुकुंदरा प्रशासन को नयागांव, दौलतगंज के जंगलों में वाटर प्वाइंट पर पानी की व्यवस्था करनी चाहिए। </p>
<p><strong>आचार संहिता में अटका टेंडर </strong><br />डीएफओ ने बताया कि वन्यजीवों के लिए पेयजल व्यवस्था के लिए सरकार से 3.50 लाख बजट मिला है लेकिन, लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के कारण टैंकरों का टेंडर नहीं कर पा रहे। मुकुंदरा की सभी तलाइयां व वाटर प्वाइंटों पर पानी पहुंचाने के लिए प्रतिदिन 8 से 10 टैंकर की आवश्यकता है। जबकि, हमारे पास दो टैÑक्टर-टैंकर ही हैं। सीमित साधनों की वजह से बड़ा क्षेत्र कवर करना मुश्किल हो रहा है। यदि, गर्मी इसी तरह भीषण रही तो वाटर प्वाइंटों पर पानी पहुंचाना मुश्किल हो जाएगा। </p>
<p><strong>इन वन्यजीवों का बसेरा </strong><br />पगमार्क फाउंडेशन के अध्यक्ष देवव्रत सिंह हाड़ा ने बताया कि मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में टाइगर, लेपर्ड, भालू, भेड़िया, जरख, सियार, कबर बिज्जु, चीतल, सांभर, चिंकारा, नीलगाय, काले हरिन, दुर्लभ स्याहगोह, निशाचर सिविट केट और रेटल जैसे दुर्लभ वन्यजीवों का बसेरा है। इसके अलावा, चीतल,  जंगली बिल्ली, लंगूर, नेवला, झाऊ चूहा, जंगली खरगोश, गिल्हरी, पैंगोलिन, सेही, जंगली चूहे सहित कई वन्यजीव हैं। वहीं, सरीसृप व उभयचर में पायथन, रैट स्नेक, बफ-स्ट्राइप, कीलबैक, चेकर्ड कीलबैक, रेड सैंडबोआ, रेसेल्स वाइपर, टिंÑकेट, कोबरा, मगरमच्छ भी बड़ी संख्या में हैं। </p>
<p><strong>इतना ही नहीं, चंबल में उदबिलाव का कुनबा भी आबाद हो रहा है। </strong><br />मुकुंदरा में कुल 107 वाटर प्वाइंट्स हैं। जिनमें आॅटोमेटिक सौलर बोरवेल सिस्टम से पानी पहुंचाया जा रहा है। हालांकि, करीब 30 प्वाइंटस ऐसे हैं जो पठारी क्षेत्रों में होने के कारण सूख रहे हैं, कुछ तो सूख भी गए। हमारे पास जो साधन-संसाधन हैं, उनसे जलापूर्ति कर रहे हैं। पानी की व्यवस्था के लिए 3.50 लाख का बजट मिला है लेकिन आचार संहिता के कारण टैंकरों का टैंडर नहीं कर पा रहे। हालांकि, विभाग अपने स्तर पर और स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद से वाटर प्वाइंट्स पर पानी पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। <br /><strong>- अभिमन्यू सहारण, उप वन संरक्षक, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/solar-is-quenching-the-thirst-of-the-forest/article-77466</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/solar-is-quenching-the-thirst-of-the-forest/article-77466</guid>
                <pubDate>Fri, 10 May 2024 14:41:18 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-05/solar-bhuja-rha-jungle-ki-pyas...kota-news-10-05-2024.jpg"                         length="754621"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>18 महीने कोटा ने पाला, बड़ा हुआ तो बूंदी को दे रहे टाइगर</title>
                                    <description><![CDATA[वन्यजीव प्रेमी बोले-दोनों शावकों पर मुकुंदरा का हक, अन्याय नहीं करेंगे बर्दाश्त।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-raised-him-for-18-months--when-he-grew-up--he-gave-tiger-to-bundi/article-76965"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/18-mahine.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के हितों पर एक बार फिर से कुठाराघात किया जा रहा है। रविवार को कोटा दौरे पर आए चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन पीके उपाध्याय ने अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में पल रहे शावकों की शिफ्टिंग को लेकर किए निर्णय ने राहत तो दी लेकिन वन्यजीव प्रेमियों को निराश कर दिया। दोनों शावकों में से मेल शावक को रामगढ़ व फिमेल शावक को मुकुंदरा में शिफ्ट करने का निर्णय किया। जबकि, 18 महीने से बाघिन टी-114 के दोनों शावकों को कोटा वन्यजीव विभाग पाल रहा है। गत वर्ष जब इन्हें रणथम्भौर से अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में शिफ्ट किया गया था तो उन्हें रीवाइल्डिंग के बाद मुकुंदरा में शिफ्ट किए जाने की बात कहीं गई थी। तब से वन्यजीव प्रेमियों को भविष्य में इन्हें दरा अभयारणय में शिफ्ट किए जाने की उम्मीद  जगी थी। 18 महीने से मुकुंदरा व वन्यजीव विभाग कोटा की निगरानी में रीवाइल्डिंग की जा रही है। ऐसे में दोनों शावकों पर मुकुंदरा का हक है, जिस पर कुठाराघात करते हुए मेल शावक को रामगढ़ विषधारी में शिफ्ट किए जाने का निर्णय किया गया।  जबकि, वहां पहले से ही टाइगर्स की संख्या 6 हो चुकी है। ऐसे में चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन का यह निर्णय वन्यजीवप्रेमियों को व्यवहारिक नहीं लगता। </p>
<p><strong>12 साल बाद भी आबाद नहीं हो सका मुकुंदरा</strong><br />वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है, मुकुन्दरा हिल्स को 9 अप्रेल 2013 को टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। इसके बाद से ही इसकी उपेक्षा की जा रही है। जबकि, रामगढ़ को टाइगर रिजर्व घोषित हुए अभी 2 साल ही हुए हैं और 6 टाइगर्स से आबाद हो चुका है। यह अधिकारियों की कार्यप्रणाली का बेहतरीन उदारहण है। एक तरफ मुकुंदरा 12 साल बाद भी अपना वजूद तलाश रहा वहीं, दूसरी ओर दो साल में ही रामगढ़ ने साबित कर दिया कि इच्छा शक्ति हो तो विरान वादियां भी शावकों की किलकारी से गूंज सकता है।  बरहाल, संघर्षों से जूझता मुकुंदरा खुशहाली की दहलीज पर खड़ा है लेकिन मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के नर शावक रामगढ़ शिफ्ट करने के अव्यवहारिक निर्णय ठेस पहुंचा रहा है।</p>
<p><strong>एमएचटीआर को ज्यादा जरूरत</strong><br />मुकुंदरा में अभी दो टाइगर है लेकिन कुनबा अब तक नहीं बढ़ा।  लंबे समय से एक और टाइग्रेस लाने की मांग की जा रही है, जो भी अब तक नहीं ला पा रहे। ऐसे में जो शावक हमारे पास हैं, उन्हें कहीं ओर शिफ्ट करने के बजाए मुकुंदरा में ही रखा जाना चाहिए। भविष्य में मुकुंदरा की तस्वीर बदलने में निर्णायक हो सकते हैं। जब से यहां शावक आए हैं तब से यही कहा गया है कि उन्हें दरा अभयारणय के 28 हैक्टेयर के एनक्लोजर में छोड़ा जाएगा। ऐसे में वन्यजीव प्रेमियों में मुकुंदा को दो टाइगर मिलने की उम्मीद जगी। <br /><strong>- एएच जैदी, नेचर प्रमोटर</strong></p>
<p><strong>एनटीसीए के मिनट्स के बाद होगा निर्णय </strong><br />चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन शुक्रवार को मुकुंदरा व अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क के विजिट पर रहे। यहां शावकों की शिफ्टिंग को लेकर उन्होंने एनटीसीए की मीटिंग के मिनट्स आने के बाद आगे की कार्रवाई किए जाने की बात कही है। <br /><strong>- अभिमन्यू सहारण, डीएफओ, मुकुंदरा टाइगर रिजर्व</strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं वन्यजीव प्रेमी</strong><br /><strong>रामगढ़ में पहले से ही 6 टाइगर </strong><br />सीडब्ल्यूएलडब्ल्यू के मेल टाइगर को रामगढ़ में शिफ्ट किए जाने का निर्णय अनुचित है। वहां पहले से ही 6 टाइगर हैं। जबकि, मुकुंदरा में मात्र दो ही है। ऐसे में मुकुंदरा को  आबाद करने के लिए दोनों शावकों को यहीं शिफ्ट किया जाना चाहिए। दरा अभयारणय में 28 हैक्टेयर के एनक्लोजर को पांच-पांच हैक्टेयर में बांट कर दोनों को यहीं रखा जा सकता है। इससे दोनों की शुरुआती तीन से चार माह रीवाइल्डिंग की प्रक्रिया भी बेहतर हो सकेगी। <br /><strong>- तपेश्वर सिंह भाटी, अध्यक्ष, मुकुंदरा वन्यजीव एवं पर्यावरण समिति   </strong></p>
<p><strong>यह तो मुकुंदरा के साथ अन्याय</strong><br />31 जनवरी 2023 की रात को दोनों शावकों को रणथम्भौर से अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में शिफ्ट किया था। तब वे ढाई माह के थे। तत्कालीन मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने छह माह रीवाइल्डिंग के बाद दरा एनक्लोजर में शिफ्ट करने के आदेश दिए थे। हालांकि, 18 माह बाद भी शिफ्टिंग नहीं हुई। लेकिन उम्मीद थी कि आज नहीं तो कल दोनों शावक मुकुंदरा में बसाया जाएगा। लेकिन, वर्तमान सीडब्ल्यूएलडब्ल्यू के निर्णय ने निराश किया। यह मुकुंदरा के साथ अन्याय है।<br /><strong>- देवव्रत सिंह हाड़ा, अध्यक्ष पगमार्क फाउंडेशन</strong></p>
<p><strong>दोनों को मुकुंदरा में ही रखा जाए</strong><br />बाघिन टी-114 के दोनों शावकों को अलग-अलग करने के बजाए एक ही जगह रखा जाना उचित होगा। मुकुंदरा 760 वर्ग किमी में फैला है, जगह की कमी नहीं है। दरा अभयारणय में 28 हैक्टेयर के एनक्लोजर को 5-5 हैक्टेयर में बांट दोनों को यहीं रखा जा सकता है। यदि, नहीं तो सेल्जर में बने 1 हैक्टेयर में मादा शावक को रखें और  दरा में नर शावक को रख सकते हैं। लेकिन ज्यादा बेहतर तो यही होगा कि दोनों को दरा में ही रखा जाए। इससे फायदा यह होगा कि शिफ्टिंग के शुरुआती तीन महीने तक इनकी निगरानी अच्छे से हो सकेगी। अभी तक यह कमरेनुमा पिंजरे में रह रहे हैं, जैसे ही खुले वातावरण में आएंगे तो इनके व्यवहार में बदलाव आएगा। 18 माह से मुकुंदरा के वन्यजीव चिकित्सक ही निगरानी कर रहे हैं, इसलिए वे जरूरी जानकारियों से परिचित हैं।  <br /><strong>- अखिलेश पांडे, वरिष्ठ पशु चिकित्सक कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-raised-him-for-18-months--when-he-grew-up--he-gave-tiger-to-bundi/article-76965</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-raised-him-for-18-months--when-he-grew-up--he-gave-tiger-to-bundi/article-76965</guid>
                <pubDate>Mon, 06 May 2024 16:54:23 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-05/18-mahine.png"                         length="451645"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुकुंदरा आबाद करो, शावको को कैद से आजाद करो</title>
                                    <description><![CDATA[बायोलॉजिकल पार्क से शावकों की शिफ्टिंग को लेकर दिया सांकेतिक धरना।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/populate-mukundara--free-the-cubs-from-captivity/article-74426"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/mukundara-abad-kro,-shavako-ko-kaid-s-azad-kro...kota-news-04-04-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में बाघों को आबाद करने में बरती जा रही लापरवाही पर वन्यजीव एवं पर्यावरण प्रेमी संगठनों का गुस्सा बुधवार को फूट पड़ा। बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और नयापुरा स्थित वन्यजीव विभाग के बाहर सांकेतिक धरना देकर विरोध जताया। इसके बाद वाइल्ड लाइफ डीएफओ, उप वन संरक्षक मुकुंदरा व संभागीय मुख्य वन संरक्षक को ज्ञापन देकर अभेड़ा में पल रहे बाघिन टी-114 के दोनों शावकों को अविलंब मुकुंदरा के दरा अभयारणय में शिफ्ट करने की मांग की। यह धरना पगमार्क फाउंडेशन, सोसाइटी फॉर कंजर्वेशन आॅफ हिस्टोरिकल एंड इकोलॉजिकल रिसोर्सेज, चंबल रेस्क्यू फोर्स और अन्य सहयोगी संस्थाओं की ओर से दिया गया। गौरतबल है कि नवज्योति ने लगातार खबर प्रकाशित कर शावकों की रिहाई की आवाज उठाई थी। जिसका समर्थन करते हुए शहर के विभिन्न प्रर्यावरण व वन्यजीव प्रेमियों ने धरना प्रदर्शन कर वन अधिकारियों का घेराव किया। </p>
<p><strong>डेढ़ साल से कैद में जी रहे शावक</strong><br />पगमार्क फाउंडेशन के अध्यक्ष देवव्रत सिंह हाड़ा ने बताया कि अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में करीब डेढ़ साल से दोनों शावकों को बंधक के रूप में 30 गुणा 30 के पिंजरों में रखा जा रहा है। जबकि, इन्हें मुकुंदरा के दरा एनक्लोजर में शिफ्ट किया जाना था, जो अब तक नहीं हुआ। वर्तमान में नर शावक का वजन लगभग 150 किलो एवं मादा शावक का वजन करीब 120 किग्रा है। इन्हें चलने फिरने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलती। ऐसे में उन्हें तुरंत मुकुंदरा में शिफ्ट किया जाए ताकि, भविष्य में मुकंदरा आबाद हो सके।  </p>
<p><strong>विद्यार्थियों को मिले शोध का अवसर </strong><br />नेचर प्रमोटर एएच जैदी ने कहा, वन्यजीव विभाग को स्थानीय विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के साथ एमओयू करना चाहिए, जिससे जीव विज्ञान के विद्यार्थियों को शोध करने के नए अवसर प्राप्त हो सके। जिनका उपयोग विभागीय प्रबंधन में भी किया जा सकता है। विभाग एवं मुकंदरा की सीमा पर बसे ग्रामीणों के बीच संवाद की कमी है, जिसके चलते मुकंदरा का विकास प्रभावित हो रहा है। </p>
<p><strong>शावकों को जल्द करें शिफ्ट</strong><br />चंबल रेस्क्यू फोर्स के अध्यक्ष बनवारी यदुवंशी ने कहा, वन्यजीव विभाग ने गत पांच वर्षों से स्थानीय वन्यजीव प्रेमियों एवं उनकी जंगल से जुडी भावनाओं को दर-किनार कर खाई सी बना दी है, जिसे पाटने की जरूरत है। शावकों को जल्द मुकुंदरा में शिफ्ट किया जाना चाहिए। इस दौरान प्रभात शर्मा, ओमप्रकाश, निमिष गौतम समेत कई वन्यजीव प्रेमी उपस्थिति रहे।</p>
<p><strong>मुकुंदरा में प्रे-बेस बढ़ाने की जरूरत</strong><br />सोसाइटी फॉर कंजर्वेशन आॅफ हिस्टोरिकल एंड इकोलॉजिकल रिसोर्सेज के अध्यक्ष कृष्णेंद्र नामा ने कहा, मुकंदरा में बाघ-बाघिन लाने की प्रकिया में तेजी लानी चाहिए। बाघों के साथ अन्य मांसाहारी वन्यजीवों की आवश्यकतानुसार मुकंदरा में प्रे-बेस बढाने चाहिए।</p>
<p><strong>कोर एरिया में बढ़ाए पर्यटन</strong><br />उर्वशी शर्मा ने कहा, मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पर्यटकों के भ्रमण के लिए नए रूट खोलने चाहिए। जिससे न केवल विभाग को आमदनी होगी बल्कि पर्यटकों के आने से वन क्षेत्र में होने वाले गैर-कानूनी कार्यों पर भी लगाम लग सकेगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/populate-mukundara--free-the-cubs-from-captivity/article-74426</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/populate-mukundara--free-the-cubs-from-captivity/article-74426</guid>
                <pubDate>Thu, 04 Apr 2024 18:00:38 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-04/mukundara-abad-kro%2C-shavako-ko-kaid-s-azad-kro...kota-news-04-04-2024.jpg"                         length="537996"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>टाइगर के घर में लेपर्ड राज, मुकुंदरा में बढ़े 99 पैंथर</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश में तीसरे नंबर पर रहा मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/leopard-rules-in-tiger-s-house--99-panthers-increase-in-mukundara/article-73986"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/tiger-k-ghr-me-leopard-raaj,-mukundara-me-bdhe-panther...kota-news-29-03-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में लेपर्ड का कुनबा आबाद हो रहा है। बाघ के घर में पैंथर राज हो गया। 12 साल में भले ही टाइगर की संख्या न बढ़ी हो लेकिन पिछले 4 साल में लेपर्ड की संख्या 49 से बढ़कर 99 हो गई है। इतना ही नहीं, शावकों की संख्या भी 4 से बढ़कर 15 के पार पहुंच गई। लेपर्ड की संख्या बढ़ने से वन्यजीव प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई। दरअसल, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने आॅल इंडिया लेपर्ड एस्टिमेशन रिपोर्ट जारी कर दी है। जिसमें देशभर के 20 राज्यों के टाइगर रिजर्व में कितने तेंदुए हैं, इसकी संख्या जारी की गई है। यह रिपोर्ट केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने जारी की है। </p>
<p><strong>प्रदेश में तीसरे नंबर पर मुकुंदरा</strong><br />आॅल इंडिया लेपर्ड एस्टिमेशन रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में सर्वाधिक लेपर्ड 269 के साथ सरिस्का टाइगर रिजर्व प्रथम स्थान पर रहा है। जबकि, रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में 167 के साथ दूसरे स्थान पर रहा । इसी तरह लेपर्ड की सर्वाधिक आबादी वाले टाइगर रिजर्व की श्रेणी में मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व 99 पैंथर के साथ तीसरे पायदान पर रहा। देशभर में वर्ष 2018 से 2022 के बीच बघेरों की गणना की गई थी। जिसमें पिछले 4 साल में मुकुंदरा में लेपर्ड की संख्या 49 से बढ़कर 99 पर पहुंच गई है। वहीं, रामगढ़ टाइगर रिजर्व 25 पैंथर के साथ चौथे  नम्बर पर रहा। </p>
<p><strong>सुरक्षा के नहीं इंतजाम, हादसों में जाती जान</strong><br />पगमार्क फाउंडेशन के संस्थापक देवव्रत सिंह हाड़ा कहते हैं, अधिकारी सिर्फ बाघों की मॉनिटरिंग में ही जुटे रहते हैं जबकि, पैंथर भी शेड्यूल वन का एनिमल है, उसकी सुरक्षा व प्रोटोकॉल वही है जो टाइगर व लॉयन की होती है। इसके बावजूद बघेरे की सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं किए जाते। बघेरों के लिए अलग से मैनेजमेंट प्लान की जरूरत है। यहां तक कि भाजपा सरकार के पिछले कार्यकाल में लागू हुआ लेपर्ड प्रोजेक्ट अभी तक ठंडे बस्ते में है। यही वजह है कि भोजन और पानी की तलाश में बघेरे आबादी क्षेत्र में पहुंच रहे हैं, जहां उन्हें जान गंवानी पड़ रही है। दरा में रेलवे लाइन, नांता क्षेत्र में फोरलेन सहित रामगढ़ टाइगर रिजर्व में कई हादसों में बघेरों की मौत हो चुकी है। </p>
<p><strong>शेरगढ़ में 7 व भैंसरोडगढ़ में 12 पैंथर</strong><br />वन्यजीव विभाग के डीएफओ अनुराग भटनागर ने बताया कि हर साल लेपर्ड की वाटर प्वाइंट गणना की जाती है। शेरगढ़ व भैंसरोडगढ़ दोनों ही सेंचुरी में लेपर्ड की संख्या में इजाफा हुआ है। वर्तमान में शेरगढ़ में 7 और भैंसरोडगढ़ में 12 पैंथर हैं। </p>
<p><strong>इसलिए बढ़ रही संख्या </strong><br />नेचर प्रमोटर एएच जैदी कहते हैं, मुकुन्दरा हिल्स को 9 अप्रेल 2013 को टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। यह करीब 760 वर्ग किमी में चार जिलों कोटा, बूंदी, झालावाड़ व चित्तौडगढ़ में फैला है। यहां प्रे बेस व पंसदीदा भोजन भी भरपूर है। इसमें लंगूर, मोर व अन्य शामिल हैं। जंगल में दो ही टाइगर होने से इन्हें डिस्टर्ब करने वाला भी कोई नहीं है। मुकुंदरा की आबो-हवा पूरी तरह से इनके अनुकूल है। इसीलिए यहां इनकी संख्या बढ़ रही है। हालांकि यह पैंथर जब फ्रिंज एरिया या मुकुंदरा की पेरीफेरी में रहेंगे, तब बस्तियों या गांवों में उनके प्रवेश करने की संभावना बढ़ जाएगी।</p>
<p><strong>कैमरा ट्रैप से हुई गणना</strong><br />जानकारी के अनुसार देशभर के टाइगर रिजर्व में लेपर्ड की गणना कैमरा ट्रैप पद्धति से की गई है। इसमें जगह-जगह पेड़ों पर कैमरा ट्रैप लगाए जाते हैं, जिनमें थर्मल सेंसर लगे होते हैं। ऐसे में जब कोई एनिमल इन कैमरों के सामने या पास से गुजरता है तो उसकी तस्वीर कैमरे में कैद हो जाती है। वहीं, बायोलॉजिस्ट व वन अधिकारियों की मदद से पगमार्क  भी लिए जाते हैं।  देशभर के 20 टाइगर रिजर्व से डेटा आने के बाद विश्लेषण कर रिपोर्ट जारी की जाती है।</p>
<p><strong>4 साल में बढ़े 50 पैंथर और 11 शावक</strong><br />मुकुंदरा के डीएफओ अभिमन्यू सहारण ने बताया कि वर्ष 2018 में जब गणना हुई थी तब लेपर्ड की संख्या 49 थी जो बढ़कर वर्ष 2022 में 99 हो गई। ऐसे में पिछले 4 साल में मुकुंदरा में 50 पैंथर बढ़े हैं। शावकों की संख्या भी 4 से बढ़कर 15 पहुंच गई है। मुकुंदरा में लगातार पैंथर की संख्या बढ़ रही है। यह शेड्यूल-1 का एनिमल है। आॅल इंडिया लेपर्ड एस्टिमेशन रिपोर्ट हाल ही में जारी हुई है। बता दें, राजस्थान में इन सालों में 245 बघेरों की संख्या बढ़ी है। </p>
<p><strong>3 करोड़ का सर्विलांस, 16 से ज्यादा कैमरा टावर</strong><br />मुकुंदरा टाइगर रिर्जव 6 रेंजों में बटा हुआ है। जिसमें दरा, जवाहर सागर, कोलीपुरा, रावंठा, बोराबांस व गागरोन रेंज शामिल है। टाइगर रिजर्व पर निगरानी के लिए 3 करोड़ की लागत से ई-सर्विलांस एंड एंटी पोचिंग सिस्टम, 16 से ज्यादा कैमरा टावर और 200 से ज्यादा कैमरा ट्रैप लगे हुए हैं। दरा रेंज में ही सर्विलांस लगा है, जिससे सभी रेंजों में लगे कैमरा टावर जुड़े हैं। इसकी मॉनीटरिंग डीओआईटी डिपार्टमेंट करता है। इसके लिए यहां सेंटलाइज कमाण्ड सेंटर बना हुआ है। जिससे 24 घंटे जंगल की एक-एक गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। सभी कैमरे टावर नाइट विजन हैं। </p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />मुकुंदरा में लेपर्ड की संख्या बढ़ना सुखद है। वन्यजीवों की सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। जिसकी वजह से ही उनकी संख्या में वृद्धि हो रही है। लेपर्ड के अलावा चीतल, चिंकारा, ब्लैक बक, हायना व भालू सहित अन्य एनिमल की संख्या में इजाफा हुआ है। सुरक्षा इंतजामों को और बेहतर करने का प्रयास जारी है।<br /><strong>- अभिमन्यू सहारण, उप वन संरक्षक मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/leopard-rules-in-tiger-s-house--99-panthers-increase-in-mukundara/article-73986</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/leopard-rules-in-tiger-s-house--99-panthers-increase-in-mukundara/article-73986</guid>
                <pubDate>Fri, 29 Mar 2024 16:59:49 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-03/tiger-k-ghr-me-leopard-raaj%2C-mukundara-me-bdhe-panther...kota-news-29-03-2024.jpg"                         length="746254"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुकुंदरा की जन्नत में सालों से ताले में बंद 1 करोड़ का इंटरप्रिटेशन सेंटर</title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति ने मौके पर ताला खुलवाकर देखा हालात चौंकाने वाले थे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/interpretation-center-worth-rs-1-crore-locked-for-years-in-mukundara-s-paradise/article-70744"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/transfer-(8)8.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व की जन्नत गरड़िया महादेव में पर्यटकों को ठगा जा रहा है। पिछले कई सालों से 1 करोड़ की लागत से बना इंटरप्रिटेशन सेंटर ताले में बंद है। जबकि, वन विभाग ने लाखों रुपए खर्च कर इस सेंटर में आर्टिफिशल जंगल बसाया है। ताकि, पर्यटकों को जंगल और वन्यजीवों के प्रति जागरूक किया जा सके। लेकिन, मुकुंदरा प्रशासन ही वन विभाग के उद्देश्यों पर पानी फेर रहा है। हालात यह हैं, सेंटर में मौजूद लाखों के उपकरण, वन्यजीवों की सजीव डमी धूल खा रही है। दैनिक नवज्योति ने मौके पर ताला खुलवाकर देखा हालात चौंकाने वाले थे।  </p>
<p><strong>जंगल देखों, इसमें कुछ नहीं</strong><br />गवर्नमेंट कॉलेज के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष विनय राज सिंह, निमेश, यश का कहना है, इंटरप्रिटेशन सेंटर के पास गार्ड से इसके बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, सेंटर में कुछ नहीं है, जाकर जंगल देखो। जबकि, गत वर्ष कॉलेज टूर के साथ आए थे तो सेंटर को अंदर से देखा था, जो बेहद खूबसूरत है। पर्यटकों को देखने तक नहीं दिया जाता, सिर्फ पैसा वसूलते हैं। </p>
<p><strong>धूल की चादर से ढका आर्टिफिशल जंगल </strong><br />एक करोड़ की लागत से बनाए गए इंटरप्रिटेक्शन सेंटर बेकद्री का शिकार है। अंदर धूल की मोटी परतें जमी हुई हैं। महंगी एलईडी, मगरमच्छ, हिरण, टाइगर, पक्षी सहित अन्य वन्यजीवों की सजीव डमी  पर धूल छा रही थी। वहीं, वन्यजीवों की शोर्ट मूवी दिखाने के लिए लगाई गई एलईडी भी बंद पड़ी थी। इतना ही नहीं, पर्यटकों की एंट्री के रजिस्टर्ड तक नहीं मिले। यहां मौजूद कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इंटरप्रिटेशन बंद ही रहता है। जब कोई वीआईपी या अधिकारियों के परिचित आते हैं तब ही खोला जाता है। हम तो निर्देर्शों की पालना करते हैं। </p>
<p><strong>जिनसे करोड़ों कमा रहे, उन्हीं से छिपा रहे</strong><br />मुकुंदरा प्रशासन हर साल जिन पर्यटकों से करोड़ों रुपए कमाता है। उन्हें ही इंटरप्रिटेशन सेंटर से दूर रखा जाता है। सेंटर दिखाना तो दूर  इसके बारे में बताया तक नहीं जाता। जबकि, विभाग ने पर्यटकों को जंगल और वन्यजीवों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से सेंटर का निर्माण करवाया था। नियमों के अनुसार, सेंटर पर एक कर्मचारी तैनात होना चाहिए, जो पर्यटकों को यहां मौजूद वन्यजीवों का जीवन चक्र, हैबीटॉट, व्यवहार, वनस्पतियां व एलईडी पर वन्यजीवों की शोर्ट मूवी दिखाने सहित फीडबैक रजिस्टर्ड में संधारण करना होता है।</p>
<p><strong>पर्यटक बोले-नहीं दिखाते इंटरप्रिटेशन सेंटर</strong><br />नवज्योति ने गरड़िया महादेव में घूम रहे कोचिंग कोचिंग स्टूडेंट्स लक्ष्य चौधरी, मनख्त सिंह, आसीम, विराट से बात की तो उन्होंने कहा, यहां सिर्फ टिकट वसूला जाता है। ट्यूरिस्ट की सुविधाओं से कोई मतलब नहीं है। गार्ड से इंटरप्रिटेशन सेंटर खोलने को कहा तो उसने इंकार कर दिया। इसके अंदर क्या है, यह भी नहीं बताया। जबकि, इस सेंटर के बारे में परिचितों से जाना था। इसे देखने की उत्सुकता थी लेकिन बिना देखे ही लौटना पड़ा। </p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />पर्यटकों को प्रकृति व वन्यजीवों के प्रति जागरूक करने के लिए इंटरप्रिटेशन बेतरीन जरिया है। इसके द्वार पर्यटकों के लिए खुले रहना चाहिए। मामला दिखवाकर उचित कार्रवाई करेंगे।<br /><strong>- रामकरण खैरवा, सीसीएफ एवं क्षेत्र निदेशक, मुकुंदरा टाइगर रिजर्व</strong></p>
<p>नया स्टाफ मिला है, जैसे ही वे ट्रैनिंग कर आएंगे तब यहां तैनात कर पर्यटकों के लिए खोला जाएगा। सेंटर में महंगे उपकरण हैं, कर्मचारी के अभाव में चोरी का अंदेशा रहता है। <br /><strong>- बीजो जॉय, पूर्व डीएफओ, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व</strong></p>
<p><strong>एक्सपर्ट व्यू :</strong><br /><strong>वाइल्ड लाइफ का संसार है इंटरप्रिटेशन</strong><br />इंटरप्रिटेशन सेंटर वन्यजीव, पक्षी व जंगल की संपूर्ण जानकारी देने वाली आर्टिफिशल जंगल होता है। जहां वन्यजीवों का वैज्ञानिक नाम, जीवनकाल, दिनचर्या, प्रजनन, खानपान आवास व जीवनचक्र की जानकारी दी जाती है। साथ ही उनके व्यवहार के साथ प्रदेश में पाए जाने वाले अन्य फ्लोरा, जैव विविधता, पक्षियों, रेप्टाइल्स और अन्य वन्यजीवों की जानकारी भी मिलती है। सेंटर में बच्चों का ध्यान रखते हुए ज्ञानवर्धक एवं मनोरंजन युक्त जानकारियां भी जाती है।  इंटरप्रिटेशन के जरिए बाघ, तेंदुआ,  भालू, हिरन, मगरमच्छ, अजगर सहित अन्य वन्यजीवों, जंगल एवं नदियों को शिल्पकला के माध्यम से दशार्या गया है। <br /><strong>- एएच जैदी, नेचर प्रमोटर</strong></p>
<p><strong>सिर्फ पैसा वसूलने पर ध्यान</strong><br />गरड़िया महादेव मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व का कोर एरिया है। यहां देश-विदेश से हर साल 65 हजार से अधिक पर्यटक आते हैं। जिनसे करोड़ों रुपए राजस्व आता है। इंटरप्रिटेशन सेंटर जंगल का आईना है। पैसा वसूलने के बावजूद पर्यटकों को इस सुविधा से दूर रखा जाता है। एक तरफ वन विभाग पर्यटकों को जंगल के प्रति जागरूक करने की बात करता है वहीं, दूसरी तरफ लोगों को इंटर प्रिटेशन सेंटर देखने तक नहीं दिया जाता। यह विभाग की कथनी और करनी में अंतर दिखाता है। सेंटर को सैलानियों के लिए खोला जाना चाहिए।<br /><strong>- देवव्रत सिंह हाड़ा, संस्थापक पगमार्क फाउंडेशन</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/interpretation-center-worth-rs-1-crore-locked-for-years-in-mukundara-s-paradise/article-70744</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/interpretation-center-worth-rs-1-crore-locked-for-years-in-mukundara-s-paradise/article-70744</guid>
                <pubDate>Wed, 21 Feb 2024 18:20:08 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-02/transfer-%288%298.jpg"                         length="70551"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>500 मीटर में 53 जगह से टूटी मुकुंदरा की सुरक्षा दीवार </title>
                                    <description><![CDATA[माफियाओं का गिरोह लगातार मुकुंदरा में सक्रिय है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mukundra-security-wall-broken-at-53-places-in-500-meters/article-70368"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/500-meter-me-53-jgh-s-tuti-mukundara-ki-suraksha-diwar...kota-news-17-02-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व माफियाओं के हत्थे चढ़ चुका है। यहां न तो जंगल सुरक्षित है और न ही बेजुबान वन्यजीवों की जिंदगी। हालात यह हैं, 500 मीटर के दायरे में 53 जगहों से मुकुंदरा की सुरक्षा दीवार माफियाओं ने तोड़ दी और जंगल में आने-जाने का रास्ता बना दिया। यह जानते हुए भी वन विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है। नतीजन, माफिया मुकुंदरा का दामन नोंच रहा। वन सम्पदा चोरी कर बेजुबान वन्यजीवों का आशियाना भी उजाड़ रहा है। इसके बावजूद वन विभाग आंखे मूंदे बैठा है। दरअसल, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व की बोराबांस रेंज में नयागांव से डायवर्जन चैनल तक जगह-जगह से सुरक्षा दीवार माफियाओं ने तोड़ रास्ता बना दिया है।</p>
<p><strong>नयागांव से डायवर्जन चैनल तक टूटी दीवारें</strong><br />मुकुंदरा की बोराबांस रैंज 12 हजार 684 हैक्टेयर में फैली हुई है। नयागांव से डायवर्जन चैनल तक करीब 500 मीटर के दायरे में जंगल की 53 जगहों से सुरक्षा दीवार टूटी हुई है। माफियाओं ने दीवारें तोड़ आने-जाने का रास्ता बना लिया है। इस इलाके में रात के अंधेरे में खनन होता है और दिन के उजाले में पत्थर, मिट्टी, ग्रेवल ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर चोरी कर रहे हैं। वहीं, अवैध कटान व मवेशियों की चराई हो रही है। </p>
<p><strong>प्रभावित हो रहा  वन्यजीवों का जीवन चक्र </strong><br />बोराबांस रैंज के जंगलों में लेपर्ड, हिरण, लोमड़ी, भालू, हायना, नीलगाय सहित कई वन्यजीवों का नेचुरल हैबीटॉट है। अवैध खनन, वाहनों का शौर, पत्थर तोड़ने की आवाज, घुसपैठ सहित अन्य संदिग्ध गतिविधियों से उनका प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहा है। साथ ही जैव विविधता भी खत्म हो रही है। वन्यजीवों का जीवन चक्र प्रभावित होने से उनका अस्तित्व खतरे में पड़ रहा है।</p>
<p><strong>दिन-रात बेधड़क दौड़ती ट्रैक्टर-ट्रॉली</strong><br />नाम न छापने की शर्त पर स्थानीय निवासियों ने बताया कि बोराबांस रैंज में कई वर्षों से अवैध खनन, पेड़ों की कटाई, मिटटी व पत्थरों की चोरी सहित अन्य अवैध गतिविधियां चल रही हैं। इसकी जानकारी अधिकारियों को भी है। माइनिंग व तस्करी का काला खेल मिलीभगत से चल रहा है। माफियाओं का गिरोह लगातार मुकुंदरा में सक्रिय है। दिन-रात जंगलों में बेधड़क ट्रैक्टर-ट्रॉलियां दौड़ती हैं।<br />  <br /><strong>टाइगर की टेरीटरी में चर रहे मवेशी </strong><br />मुकुंदरा में वर्तमान में दो टाइगर है। दोनों बाघ-बाघिन का मूवमेंट बोराबांस के वनक्षेत्र सेल्जर में रहता है। रावतभाटा रोड स्थित सेल्जर के पिछले हिस्से की दीवारें टूट रही है। जहां ग्रामीणों के मवेशी चर रहे हैं। मवेशियों को लाने-ले जाने के लिए पशुपालक अंदर तक घुस जाते हैं। जिससे टाइगर और इंसानों के बीच संघर्ष की आशंका बनी रहती है।</p>
<p><strong>क्या कहते हैं वन्यजीव प्रेमी </strong><strong>मिलीभगत से चल रहा खेल</strong><br />नयागांव से जवाहर सागर तक रैंजर, वनपाल, सहायक वनपाल, फोरेस्ट गार्ड, बॉर्डर होमगार्ड बड़ी संख्या में तैनात रहते हैं। जब ट्रैक्टर-ट्रॉलियां आती हैं तब एक भी कर्मचारी नजर आता है। ऐसे में वन अधिकारियों की माफियाओं से सांठ-गांठ की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। जंगल और जंगल के प्राणियों की सुरक्षा के लिए स्थानीय स्टाफ गंभीर नहीं है। लापरवाह अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।  <br /><strong>- देवव्रत सिंह हाड़ा, संस्थापक, पगमार्क फाउंडेशन  </strong></p>
<p>बोराबांस रैंज के जंगलों में लेपर्ड, हिरण, लोमड़ी, भालू, हायना, नीलगाय सहित कई वन्यजीवों का नेचुरल हैबीटॉट है। ऐसे में जंगल में लगातार अवैध गतिविधियां होने से पारिस्थितिकी तंत्र बिगड़ता है और वन्यजीव वहां से पलायन कर जाते हैं, फिर कभी लौटकर नहीं आते। ऐसे में उन्हें दूसरी जगह अपना वजूद कायम रखने के लिए अनगिनत संघर्षों का सामना करना पड़ता है।<br /><strong>- एएच जैदी, नेचर प्रमोटर</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />बोराबांस रेंज की 150 हैक्टेयर वनभूमि पर क्लोजर बनाने के लिए प्रपोजल भेजा हुआ है। यहां लोगों ने अवैध बाड़े बनाकर अतिक्रमण कर रखा है। जिसे पुलिस व जिला प्रशासन के सहयोग से पहले अतिक्रमण हटाए जाएंगे। इसके बाद ही दीवार बनाई जाएगी।<br /><strong> - जनक सिंह, रेंजर, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व </strong></p>
<p>नए अधिकारी के न आने तक मैं कार्यवाहक के रूप में जिम्मेदारी निभा रहा हूं। यदि, ऐसी गतिविधियां चल रही है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। जंगल और जंगल के प्राणियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।<br /><strong>-अनुराग भटनागर, डीसीएफ, एवं कार्यवाहक डीएफओ मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mukundra-security-wall-broken-at-53-places-in-500-meters/article-70368</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mukundra-security-wall-broken-at-53-places-in-500-meters/article-70368</guid>
                <pubDate>Sat, 17 Feb 2024 16:17:53 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-02/500-meter-me-53-jgh-s-tuti-mukundara-ki-suraksha-diwar...kota-news-17-02-2024.jpg"                         length="638050"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खुली लूट : पैसा लेकर पर्यटकों को गड्ढ़ों में कुदा रहा मुकुंदरा</title>
                                    <description><![CDATA[हजारों रुपए खर्च करने के बावजूद पर्यटक तनाव झेल रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mukundhara-tiger-reserve-kept-tourists-jumping-into-pits-after-taking-money/article-70188"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/transfer-(1)11.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में पर्यटकों को ठगा जा रहा है। गरड़िया महादेव में पर्यटन के नाम पर पर्यटकों से खूली लूट की जा रही है। सिंह द्वार से अंदर तक करीब एक किमी की सड़क पूरी तरह से उधड़ी पड़ी है। डामर सड़कें खाई की तरह कटी हुई है। यहां से गुजरने के दौरान वाहनों के टायर कट रहे हैं। हालात यह हैं, बाइक सवार गिट्टी व पत्थरों पर फिसलकर चोटिल हो रहे हैं। जबकि, गरड़िया महादेव हर साल एक करोड़ से ज्यादा की कमाई करता है। इसके बावजूद मुकुंदरा प्रशासन सैलानियों को गड्ढ़ों में कूदा रहा है।</p>
<p><strong>देश-विदेश में पहुंच रही बदहाली की तस्वीर</strong><br />गरड़िया महादेव मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व का कोर एरिया है, जो घने जंगल के बीच चंबल की गोद में बसी जन्नत है। जिसके दीदार को प्रतिवर्ष 50 हजार से अधिक पर्यटक देश से विदेश से आते हैं। जिन्हें प्रकृति की खूबसूरत वादियों से रुबरू होने से पहले हड्डी तोड़ पत्थरों से भरी सड़क से गुजरना पड़ता है। ऐसी बदहाली की तस्वीरें देश-विदेशों में पहुंच रही है, जो मुकुंदरा की छवी को दागदार कर रही है।</p>
<p><strong>वाहन हो रहे पंक्चर, झेल रहे तनाव</strong><br />गवर्नमेंट कॉलेज कोटा के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष विनय राज सिंह ने बताया कि कुछ दिनों पहले साथियों के साथ गरड़िया गए थे। हाइवे से नीचे उतरते ही कार गड्ढ़ों में फंस गई, जिसे बमुश्किल बाहर निकाला। प्रति व्यक्ति 137 रुपए टिकट के हिसाब से चार साथियों के 548 रुपए तथा कार के  389 रुपएअलग से टिकट लेकर जंगल में प्रवेश किया लेकिन, थोड़ी दूर जाते ही टायर पंक्चर हो गया। उधड़ी सड़कों के शार्प किनारों से टायर पर एक इंच गहरा कट लग गया, जिससे ट्यूब कट गई। हजारों रुपए खर्च करने के बावजूद पर्यटक तनाव झेल रहे हैं।</p>
<p><strong>जख्म दे रही छलनी सड़कें</strong><br />पर्यटक निमिश राजावत, योगेश शर्मा, दीपक परिहार, यशवंत सिंह ने बताया कि सड़कें पूरी तरह से छलनी हो चुकी है। गडढ़ों से गुजरने के कारण तेज झटके से गर्दन व कंधों में मोच आ गई। 6 दिन दर्द परेशान रहे। वहीं, कुन्हाड़ी निवासी कमल यादव, ब्रजेश कुमावत का कहना है, यहां के रास्ते जानलेवा हैं। बाइक फिसलने से कोहनी छिल गई, पैर गंभीर चोट लगी है।</p>
<p><strong>देशी से 526, विदेशियों से 1200 रु.वसूल रहे टिकट </strong><br />गरड़िया महादेव में पर्यटकों से महंगा टिकट वसूला जाता है। प्रति व्यक्ति 137 रुपए टिकट है। बाइक लेकर जाने पर 63 रुपए अलग से चार्ज वसूला जाता है। इसी तरह कार लेकर जाने पर 389 रुपए तथा बस के 630 रुपए अलग से वसूले जाते हैं। वहीं, प्रति विदेशी पर्यटक का टिकट 872 रुपए है। यदि, कार लेकर जाते हैं तो 389 रुपए अतिरिक्त वसूले जाते हैं। ऐसे में एक विदेशी ट्यूरिस्ट से 1261 रुपए चार्ज किए जाते हैं। इसके बावजूद सड़कों की दशा नहीं सुधारी जाती।</p>
<p><strong>क्या कहते हैं वन्यजीव प्रेमी</strong><br />मुकुंदरा को सबसे ज्यादा रेवन्यू गरड़िया महादेव से मिलती है। यहां देश-विदेश से प्रति वर्ष 50 हजार से अधिक पर्यटक आते हैं, जिनसे करोड़ों  का राजस्व प्राप्त होता है। इसके बावजूद विभाग पर्यटकों की जेब काटने से नहीं चूक रहा। सड़कों की दुर्दशा देख एमएचटीआर की पर्यटन बढ़ाने की मंशा प्रतित नहीं होती बल्कि विकास में बाधक बनना चाहता है। निष्क्रिय अधिकारी मुकुंदरा को बर्बाद करने पर तुले हैं। जन्नत से पहले दोज़ख के नजारें दिखा रहे हैं।<br /><strong>- देवव्रत सिंह हाड़ा, संस्थापक, पगमार्क फाउंडेशन</strong></p>
<p><strong>एक्सपर्ट व्यू </strong><br /><strong>सुरक्षा व सुविधाएं उपलब्ध करवाना विभाग की नैतिक जिम्मेदारी</strong><br />गरड़िया महादेव मुकुंदरा का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। यहां ग्रेवल-कच्ची सड़क बनाई जा सकती है। यहां जो पर्यटक आए वे अच्छा अनुभव लेकर जाएं। यदि, कोई इमरजेंसी हो जाए, कोई वाइल्ड एनिमल अटैक कर दे तो ऐसी स्थिति में घटिया सड़कों की वजह से घायल को समय पर मदद न पहुंचने पर उसकी समस्त जिम्मेदारी फोरेस्ट डिपार्टमेंट की रहेगी। जब प्रवेश का पैसा लिया जाता है तो सुरक्षा और सुविधाएं उपलब्ध करवाना विभाग की नैतिक जिम्मेदारी बन जाती है। संभव: फोरेस्ट ने कागजों में पैसा खर्च किया होगा लेकिन वास्तिकता में नहीं हुआ होगा।<br /><strong>- अजय दुबे, वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट, भोपाल</strong></p>
<p>गरड़िया महादेव में सुगम आवागमन के लिए कच्ची सड़कें बनाई जाएगी। इसके लिए संबंधित रेंजर को निर्देश दे दिए हैं। <br /><strong>- बीजो जॉय, डीएफओ, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व </strong></p>
<p>नए डीएफओ ट्रैनिंग में गए हैं, मैंने भी अभी ज्वाइन किया है। मामला समझने के बाद आवश्यक दिशा निर्देश देंगे। बिलकुल, सड़कों की मरम्मत करवाई जाएगी। पर्यटन को बढ़ावा मिले,इसके लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। <br /><strong>- रामकरन खैरवा, सीसीएफ एवं क्षेत्र निदेशक, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mukundhara-tiger-reserve-kept-tourists-jumping-into-pits-after-taking-money/article-70188</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mukundhara-tiger-reserve-kept-tourists-jumping-into-pits-after-taking-money/article-70188</guid>
                <pubDate>Thu, 15 Feb 2024 17:41:13 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-02/transfer-%281%2911.jpg"                         length="76503"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दुनिया के 16 देशों से कोटा पहुंचे वल्चर, मुकुंदरा को बनाया आशियाना</title>
                                    <description><![CDATA[यह अपने घौंसले चट्टानों के बीच दरारों व पेड़ों पर बनाते हैं। एक महीने बाद अंडों से चूजे बाहर आएंगे। ऐसे में इनकी संख्या बढ़ना प्रकृति के जीवन चक्र के लिए अच्छे संकेत माने जाते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/vultures-from-16-countries-of-the-world-reached-kota--made-mukundara-their-home/article-65056"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/duniya-ke-16-deshon-se-kota-vultures,-mukundara-ko-banaya-gaya-aashiyana...kota-news-25.12.203.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। दुनिया में वल्चर भले ही संकटग्रस्त श्रेणी में हो, लेकिन चंबल की कराइयों में इनकी आबादी फल-फूल रही है। साउथ ईस्ट एशिया की सबसे बड़ी ब्रिडिंग कॉलोनी के रूप में पहचान बना चुका मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में  इनकी 7 प्रजातियां आबाद हो रही है। कोटा से रावतभाटा के जंगलों व चंबल की कराइयों में विभिन्न प्रजातियों के करीब 1500 से ज्यादा वल्चर नजर आ रहे हैं।  वहीं, हिमालयन ग्रिफॉन, यूरेशियन ग्रिफॉन और सिनेरियस वल्चर विश्व के 16 देशों से मुकुंदरा में प्रवास पर आए हैं।  पक्षी विशेषज्ञ देवकीनंदन का कहना है, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के जवाहर सागर से गांधी सागर तक के इलाके में वल्चर की 7 प्रजातियां पाई जाती है। इनमें 4 प्रजातियों के लोंग बिल्ड वल्चर, वाइट रुम्पर्ड वल्चर, किंग व इजिप्सीयन वल्चर शामिल हैं। यह बारह महीने यहीं रहते हैं। जबकि, तीन प्रजाति के हिमालयन ग्रिफॉन वल्चर, यूरेशियन ग्रिफॉन और सिनेरियस ग्रिफॉन वल्चर यूरोपियन देशों से प्रवास पर आए हैं, जो मार्च माह तक रहते हैं। स्थानीय वल्चर की संख्या में अपेक्षाकृत इजाफा हुआ है। </p>
<p><strong>दो दर्जन से ज्यादा नजर आए अंडे </strong><br />नेचर प्रमोटर एएच जैदी के अनुसार, गरडिया महादेव, गेपरनाथ, भैंसरोडगढ़, जवाहर सागर व राणा प्रताप सागर के आईलैंड, गिरधरपुरा व बोराबांस के जंगलों में लोंग बिल्ड वल्चर अधिक संख्या में नजर आने लगे हैं। आॅक्टूबर माह से नेस्टिंग शुरू हो जाती है। इन जगहों पर दो दर्जन से अधिक गिद्दों के अंडे नजर आने लगे हैं। यह अपने घौंसले चट्टानों के बीच दरारों व पेड़ों पर बनाते हैं। एक महीने बाद अंडों से चूजे बाहर आएंगे। ऐसे में इनकी संख्या बढ़ना प्रकृति के जीवन चक्र के लिए अच्छे संकेत माने जाते हैं। </p>
<p><strong>मुकुंदरा में 1500 से ज्यादा संख्या </strong><br />बर्ड्स रिसचर हर्षित शर्मा ने बताया कि यहां सबसे ज्यादा संख्या इजिप्सीयन वल्चर  की है। वल्चर प्रजातियों में सबसे छोटे कद का होता है। यह अनंतपुरा व अभेड़ा डम्पयार्ड और बोराबांस के इलाकों में ज्यादा नजर आते हैं। इनका झुंड मृत जानवर के शरीर को 15 से 20 मिनट में खा जाते हैं। कोटा से रावतभाटा तक इनकी संख्या करीब 1000 है। वहीं, लोंग बिल्ड वल्चर 400 से 500 तथा वाइट रेम्पर्ड 100 से 150 की संख्या में है। वहीं, किंग वल्चर सबसे कम देखने को मिलते हैं। </p>
<p><strong>इन देशों से कोटा आए यह वल्चर</strong><br />जैदी बताते हैं, विश्व के 16 देशों से तीन प्रजातियों के वल्चर मुकुंदरा में प्रवास पर आए हैं। जिनमें हिमालयन ग्रिफॉन, यूरेशियन ग्रिफॉन और सिनेरियस शामिल हैं। यह वल्चर चीन, साइबेरिया, उत्तरी अमेरिका, यूरोप, इटली, मंगोल, इंडोनेशिया, उज्बेकिस्तान, आस्ट्रिया, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, स्वट्जरलैंड व ग्रीस सहित अन्य साउथ ईस्ट एशिया व यूरोपियन देशों से आए हैं। इन देशों में बर्फबारी के कारण सर्दी तेज से खुद को बचाने व भोजन की तलाश में प्रवास पर आते हैं। </p>
<p><strong>इंसानों को हैजा व ऐंथ्रेक्स जीवाणु से बचाता है गिद्द</strong><br />पक्षी विशेषज्ञ डॉ. अंशु शर्मा ने बताया कि गिद्दोें को प्राकृतिक सफाईकर्मी कहा जाता है। इनके पेट में शक्तिशाली एसिड होता है, जो हड्डियों के साथ हैजे और ऐंथ्रैक्स जैसे जीवाणुओं को नष्ट कर देता है। ये जीवाणु इंसानों समेत कई प्रजातियों के लिए जानलेवा होता है। एक गिद्ध सालभर में करीब 120 किलो मांस खा सकता है। उनके झुंड को मृत जानवर के एक शव को निपटाने में महज 15 से 20 मिनट लगते हैं। उनका पाचन तंत्र मांस को पचाकर अच्छी खाद बनाता है, यानी वे मिट्टी में पोषक तत्व भी छोड़ते हैं।</p>
<p><strong>बीमारियां फैलने से रोकता है वल्चर</strong><br />पक्षी प्रेमी शेख जुनैद ने बताया कि गेपरनाथ में वल्चर्स के घौंसलों में अंडे नजर आए हैं, जिनमें से एक माह बाद चुजे निकल आएंगे। यह पक्षी ईको सिस्टम का महत्वपूर्ण अंग है। इसका शरीर 60 से 70 सेंमी व दो किलो वजनी होता है। यह मृत जानवरों के शव को खाकर प्रकृति की सफाई करता है। जानवरोें के शवों से निकलने वाले बैक्टेरिया कई तरह की बीमारियों का कारण बनते हैं। ऐसे में मृत शरीर खाकर कई तरह की बीमारियां फैलने से रोकते हैं। </p>
<p><strong>दो सौ से ज्यादा पक्षियों का गूंजता कलरव</strong><br />पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार, मुकुन्दरा हिल्स में पक्षी की दौ सौ से ज्यादा प्रजातियां है। इनमें क्रेसअ‍ेड सरपेंट, ईगल, शॉर्ट टोड,पैराडाइज फ्लाई केचर, सारस क्रेन, स्टोक बिल किंग फिशर, कलर्ड स्कोप्स आउलग्रीन पीजन, गोल्एन ओरिओल, बैबलर, गागरोनी तोता, टुईंया तोता, एलेक जेन्डेरियन पैराकीट, रूडी शेल्डक, वाइट पैलिकन, ग्रेट फलेमिंगो, नोर्दन शावलर, नोर्दन पिंटटेल, बार एडेड गूज, ग्रेलेक गूज, गारगेनी टील समेत कई प्रजातियों के पक्षियों का कलरव गूंजता है। मुकुंदरा, जैव विविधता से भरपूर होने के साथ बायोडायवरसिटी पक्षियों के अनुकूल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/vultures-from-16-countries-of-the-world-reached-kota--made-mukundara-their-home/article-65056</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/vultures-from-16-countries-of-the-world-reached-kota--made-mukundara-their-home/article-65056</guid>
                <pubDate>Mon, 25 Dec 2023 20:02:48 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-12/duniya-ke-16-deshon-se-kota-vultures%2C-mukundara-ko-banaya-gaya-aashiyana...kota-news-25.12.203.png"                         length="344784"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रकृति की गोद में बसा मुकुंदरा, शहरी रूट पर भी शुरू करें सफारी</title>
                                    <description><![CDATA[वन विभाग को चाहिए कि बोराबांस व कोलीपुरा रेंज में सफारी शुरू करें ताकि शहरवासियों को पहुंचने में आसानी हो।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mukundra-situated-in-the-lap-of-nature--start-safari-on-urban-route-also/article-59674"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/prakruti-ki-god-me-bsa-mukundara,-shehri-route-pr-bhi-shuru-kre-safari...kota-news-16-10-2023.jpeg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में सफारी शुरू होने के साथ ही शहरवासी जंगल और वन्यजीवों के दीदार को उत्साहित हैं। लेकिन, उनकी खुशी में दूरी बाधा बन रही है। वर्तमान में सफारी के लिए जिस रूट को खोला गया है, वह शहर से करीब 62 किमी दूर है। पर्यटकों को एंट्री कनवास नाके से मिल रही है, जबकि, टिकट की बुकिंग दरा रेंज से हो रही है। दरा अभयारण्य भी 48 किमी दूर है। इतना ही नहीं, टिकट की बुकिंग भी आॅफलाइन है। अक्सर पर्यटक अधिक दूरी तय कर दरा रेंज पहुंच तो जाते हैं लेकिन एडवांस बुकिंग के चलते  टिकट नहीं मिलने से उन्हें निराश लौटना पड़ता है। पर्यटकों का मत है कि शहर के नजदीक बोराबांस व कोलीपुरा रेंज में भी सफारी शुरू की जानी चाहिए ताकि शहरवासियों को ज्यादा दूरी से निजात मिल सके। </p>
<p><strong>एंट्री कनवास नाका, दूरी 68 किमी</strong><br />तलवंडी निवासी अक्षत जैन व अंशु विजयवर्गीय ने बताया कि मुकुंदरा में सफारी करना अपने आप में रोमांचित करने वाला अहसास है। लेकिन, पर्यटकों को एंट्री के लिए शहर से 68 किमी दूर कनवास जाना पड़ता है। जबकि, टिकट 48 किमी दूर दरा रेंज से लेना होगा। इतनी दूर जाने के बाद भी एडवांस बुकिंग के चलते सफारी का मौका न मिलने का अंदेशा लगा रहता है। यदि टिकट की व्यवस्था आॅनलाइन मोड पर हो तो ज्यादा सहुलियत होगी। </p>
<p><strong>जिप्सियों की बढ़े संख्या तो मिले राहत</strong><br />महावीर नगर निवासी अरविंद कोली व ब्रजेश कुमार ने बताया कि वर्तमान में दरा अभयारणय में सफारी के लिए एक ही जिप्सी है लेकिन लोगों में सफारी को लेकर क्रेज ज्यादा है। ऐसे में पर्यटकों की सुविधाओं के मध्यनजर जिप्सियों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। ताकि, एक पारी में बुकिंग न मिले तो दूसरी पारी में बुकिंग मिलने की संभावना तो बनी रहे। वहीं, केशवपुरा निवासी नंदलाल का कहना है कि विभाग को सफारी का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए। </p>
<p><strong>शहरी रुट्स पर भी शुरू हो सफारी</strong><br />विज्ञान नगर निवासी अजमत हुसैन, जुल्फीकार व रियाज मोहम्मद का कहना है कि मुकुंदरा टाइगर रिजर्व घोषित होने के 10 साल बाद सफारी शुरू हुई है। यह शहरवासियों के लिए सौगात है लेकिन यह भी सच है कि दूरी अधिक होने के कारण हर कोई दरा अभयारणय नहीं जा सकता। वन विभाग को चाहिए कि बोराबांस व कोलीपुरा रेंज में सफारी शुरू करें ताकि शहरवासियों को पहुंचने में आसानी हो। इधर, शोयब खान, धीरज व राकेश नामा कहते हैं, पूर्व में प्रस्तावित तीन अन्य रूट बोराबांस रेंज में बंधा-बग्गी रोड, अखावा-बलिंडा-बंधा, दूसरा रूट कोलीपुरा रेंज में नागनी चौकी पोस्ट, कालाकोट-दीपपुरा घाटा-कान्या तालाब-नागनी चौकी पोस्ट, तीसरा रूट मंदरगढ़ में बेरियर-मंदरगढ़, तालाब-केशोपुरा-रोझा तालाब होते हुए मंदरगढ़ बेरियर तय किए गए थे। इन रुट्स पर भी सफारी शुरू करने के प्रयास किए जाने चाहिए। </p>
<p><strong>ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों से झलकता प्राचीन वैभव</strong><br />नेचर प्रमोटर एएच जैदी ने बताया कि प्राकृतिक छटा के साथ मुकुन्दरा विरासत से भरा पड़ा है। रिजर्व में 12वीं शताब्दी का गागरोन किला, 17वीं शताब्दी का अबली मीणी का महल, पुरातात्विक सर्वे के अनुसार 8वीं-9वीं शताब्दी का बाडोली मंदिर समूह, भैंसरोडगढ़ फोर्ट, 19वीं शताब्दी का रावठा महल, शिकारगाह समेत कई ऐतिहासिक व रियासतकालीन इमारतें, गेपरनाथ, गरड़िया  महादेव मंदिर भी है, जो कला-संस्कृति व प्राचीन वैभव को दर्शाते हैं। ऐसे में इन रुट्स पर सफारी शुरू होने से पर्यटक विरासत से रुबरू हो सकेंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mukundra-situated-in-the-lap-of-nature--start-safari-on-urban-route-also/article-59674</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mukundra-situated-in-the-lap-of-nature--start-safari-on-urban-route-also/article-59674</guid>
                <pubDate>Mon, 16 Oct 2023 19:16:26 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-10/prakruti-ki-god-me-bsa-mukundara%2C-shehri-route-pr-bhi-shuru-kre-safari...kota-news-16-10-2023.jpeg"                         length="340630"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        