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                <title>import duty - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>इक्वाडोर ने कोलंबियाई आयात पर थोपा 100% टैरिफ : व्यापार विवाद गहराया, विदेश आर्थिक नीति में संशोधन करने का आह्वान  </title>
                                    <description><![CDATA[इक्वाडोर ने सीमा सुरक्षा और नशीली दवाओं की तस्करी का हवाला देते हुए कोलंबिया से आयात पर 100% टैरिफ लगाने का फैसला किया है। कोलंबियाई राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने इसे "कठोर" बताते हुए एंडियन समुदाय छोड़ने के संकेत दिए हैं। बिजली आपूर्ति और व्यापारिक प्रतिबंधों ने दोनों देशों के बीच आर्थिक तनाव चरम पर पहुंचा दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/ecuador-doubles-tariffs-on-colombia-deepens-trade-dispute-calls-for/article-149884"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/tarffic.png" alt=""></a><br /><p>ब्यूनस आयर्स। इक्वाडोर ने एक मई से कोलंबिया से होने वाले आयात पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने का निर्णय लिया है। इक्वाडोर के उत्पादन, विदेश व्यापार एवं निवेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा, "कोलंबिया द्वारा ठोस और प्रभावी सीमा सुरक्षा उपायों को लागू करने में विफलता के कारण इक्वाडोर को संप्रभु कार्रवाई करनी पड़ी है। एक मई से कोलंबिया से आयात पर सुरक्षा शुल्क 50 प्रतिशत से बढ़कर 100 प्रतिशत हो जाएगा।"</p>
<p>कोलंबियाई राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि टैरिफ बढ़ाने का इक्वाडोर का फैसला "अत्यंत कठोर" है और इसके कारण कोलंबिया एंडियन समुदाय से बाहर हो सकता है। उन्होंने कोलंबिया की विदेश आर्थिक नीति में संशोधन करने का भी आह्वान किया, और विदेश मंत्री से आग्रह किया कि वे दक्षिण अमेरिकी मर्कोसुर समूह (दक्षिण अमेरिका का एक प्रमुख आर्थिक और व्यापारिक समूह) में स्थायी सदस्यता हासिल करने की दिशा में काम करें और कैरेबियन तथा मध्य अमेरिकी देशों के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत करें।</p>
<p>हाल के महीनों में इक्वाडोर और कोलंबिया के बीच व्यापार को लेकर विवाद चल रहा है। इक्वाडोर के राष्ट्रपति डैनियल नोबोआ ने सबसे पहले एक फरवरी को कोलंबिया से होने वाले सभी आयात पर 30 प्रतिशत शुल्क लगा दिया था। उन्होंने इसका कारण सीमा पर नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने में कोलंबिया की ओर से सहयोग न मिलना बताया था, और बाद में उन्होंने इस शुल्क को और बढ़ा दिया। कोलंबिया ने भी जवाबी कदम उठाते हुए इक्वाडोर को बिजली की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति रोक दी।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि इक्वाडोर को सूखे के मौसम में हर साल ऊर्जा की कमी का सामना करना पड़ता है। एन्डियन समुदाय (जिसे पहले एन्डियन पैक्ट कहा जाता था) दक्षिण अमेरिकी देशों को एक साथ लाती है। इसमें कोलंबिया, इक्वाडोर, पेरू और बोलीविया जैसे देश शामिल हैं। इसका उद्देश्य आर्थिक एकीकरण, मुक्त व्यापार और नीतियों में तालमेल को बढ़ावा देना है। वर्ष 1969 में स्थापित यह संगठन, लैटिन अमेरिका के प्रमुख क्षेत्रीय आर्थिक समूहों में से एक बना हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 16:57:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ट्रंप के 'टैरिफ वॉर' पर सुप्रीम कोर्ट का ब्रेक: कल से बंद होगी टैक्स वसूली, जानें भारत पर क्या पड़ेगा असर</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट के इस हस्तक्षेप से वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता कम होगी और राष्ट्रपति की असीमित शक्तियों पर अंकुश लगेगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/supreme-courts-break-on-trumps-tariff-war-tax-collection-will/article-144308"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump3.png" alt=""></a><br /><p>अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'टैरिफ नीति' को बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा (USCBP) ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि मंगलवार, 24 फरवरी की रात 12:01 बजे (EST) से 'इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट' (IEEPA) के तहत वसूले जा रहे सभी टैरिफ तत्काल प्रभाव से बंद कर दिए जाएंगे।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से ट्रंप के एकतरफा टैरिफ लगाने के अधिकार को असंवैधानिक करार दिया है। इस फैसले से भारत जैसे देशों पर लगा अतिरिक्त टैक्स खत्म हो जाएगा। हालांकि, ट्रंप ने हार न मानते हुए 'धारा 122' के तहत एक नया 15% ग्लोबल टैरिफ लागू करने का ऐलान किया है, जो पुराने भारी-भरकम टैक्स की तुलना में कम है। भारत के लिए यह राहत की बात है क्योंकि वह पहले 18-25% तक टैक्स का सामना कर रहा था।</p>
<p><strong>150 दिनों की समय सीमा</strong></p>
<p>ट्रंप का नया 15% टैरिफ केवल 150 दिनों के लिए प्रभावी होगा। जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस हस्तक्षेप से वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता कम होगी और राष्ट्रपति की असीमित शक्तियों पर अंकुश लगेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 18:20:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत-अमेरिका समझौते को लेकर कांग्रेस ने बोला केंद्र सरकार पर हमला, कहा-कपास किसानों को होगा बड़ा नुकसान </title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को किसान विरोधी बताया है। रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि अमेरिकी कपास के सस्ते आयात से भारतीय कपड़ा उद्योग और करोड़ों कपास किसानों को खरबों का नुकसान होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congress-attacked-the-central-government-regarding-the-india-us-agreement-and/article-143364"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(11)1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने भारत-अमेरिका के बीच हाल में हुए व्यापार समझौते पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार ने देश के किसानों के हितों को नजरअंदाज कर यह समझौता किया है और इससे खासकर कपास किसानों को बड़ा नुकसान होने की संभावना है। कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सोमवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में इस समझौते से देश के कपड़ा उद्योग पर गंभीर प्रभाव पडऩे की आशंका जताई है। उनका कहना था कि इस समझौते से वस्त्र क्षेत्र को खरबों रुपये तक का आर्थिक नुकसान हो सकता है और इससे किसानों से लेकर निर्यातकों तक पूरी श्रृंखला प्रभावित हो सकती है।</p>
<p>सुरजेवाला के अनुसार यदि अमेरिकी कपास और संबंधित कृषि उत्पादों का आयात शुल्क मुक्त या कम शुल्क पर बढ़ता है तो इसका भारतीय बाजार में कच्चे माल की कीमतों पर दबाव पड़ेगा। अमेरिका अपने किसानों को भारी सब्सिडी देता है, जिससे वहां की कपास अपेक्षाकृत सस्ती होती है। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में भारतीय कपास उत्पादकों की जिनिंग इकाइयों यानी कपास की पहली प्रोसेसिंग यानी कपास को रेशों को बीजों से अलग करने की प्रक्रिया वाली इकाइयाँ तथा स्पिनिंग मिलें यानी कताई मिलें जहां कपास के रेशों से कताई करके सूत तैयार करने वाली मिलों को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p>उन्होंने आशंका जताई है कि यदि अमेरिका के साथ बंगलादेश जैसे देशों के व्यापारिक प्रबंध और मजबूत होते हैं, तो भारतीय परिधान निर्यात को अतिरिक्त प्रतिस्पर्धा झेलनी पड़ सकती है। भारत पहले से वैश्विक बाजार में तीखी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है, ऐसे में कच्चे माल की कीमतों में अस्थिरता और निर्यात ऑर्डर में कमी आने से कपड़ा उद्योग के लिए नयी चुनौती बन सकता है।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि भारत का कपड़ा और परिधान उद्योग देश के सबसे बड़े रोजगार प्रदाताओं में से एक है। यह क्षेत्र लाखों किसानों, बुनकरों, श्रमिकों और लघु एवं मध्यम उद्यमों से जुड़ा हैऔर यदि सस्ते आयात के कारण घरेलू कीमतों में गिरावट आती है और मिलों का लाभांश घटेगा और इसका सीधा असर रोजगार और ग्रामीण आय पर पड़ सकता है।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में कपास उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है और इनकी ग्रामीण अर्थव्यवस्था वस्त्र उद्योग से गहराई से जुड़ी है। पार्टी का कहना है कि किसी भी बड़े आयात झटके से इन राज्यों में किसानों और छोटे उद्योगों की आय पर व्यापक असर पड़ सकता है।</p>
<p>सुरजेवाला ने कहा कि विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि विदेशी कृषि उत्पाद आयात करने और इसके बढऩे से घरेलू कीमतों में गिरावट आना स्वाभाविक है और इससे निर्यात प्रतिस्पर्धा कमजोर होती है और इससे किसानों और मिल मालिकों को खरबों रुपये की आर्थिक हानि उठानी पड़ सकती है। यह पूछने पर कि अमेरिका के साथ इस समझौते से किसानों को कितना नुकसान हो सकता है, सुरजेवाला ने कहा कि यह मामला आंकड़ों का नहीं, बल्कि देश के किसानों के हित का है जिसे नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उनका कहना था कि सरकार किसानों के लिए एमएसपी की घोषणा करती है लेकिन देती नहीं है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 17:23:16 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अमेरिका-बांग्लादेश व्यापार समझौता: अमेरिका ने बांग्लादेशी वस्तुओं पर आयात शुल्क घटाकर 19% किया, द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूती पर दिया जोर</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-बांग्लादेश के बीच नए व्यापार समझौते से आयात शुल्क घटेगा। वस्त्र, कृषि, ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा, जिससे द्विपक्षीय आर्थिक संबंध मजबूत होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/us-bangladesh-trade-agreement-us-reduced-import-duty-on-bangladeshi-goods/article-142561"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)8.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका और बांग्लादेश के बीच एक पारस्परिक व्यापार समझौता हुआ है, जो बांग्लादेश वस्तुओं पर आयात शुल्क घटाकर 19 प्रतिशत कर देगा और कुछ वस्त्र एवं परिधान उत्पादों पर छूट प्रदान करेगा और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यालय ने बताया कि यह समझौता एक ऐसा तंत्र स्थापित करेगा जिसके तहत बांग्लादेश के कुछ कपड़ों और परिधान एवं उत्पादों को शून्य पारस्परिक आयात शुल्क प्रदान किया जाएगा। इसके तहत अमेरिकी मूल की सामग्रियों का उपयोग करके बनाए गए कुछ कपड़ा और परिधान उत्पादों के लिए भी छूट दिया गया है। पात्रा आयात की मात्रा का निर्धारण बांग्लादेश द्वारा उपयोग किये गये कपास और मानव निर्मित फाइबर के साथ-साथ अमेरिकी सामग्री के इस्तेमाल के आधार पर किया जाएगा।</p>
<p>व्हाइट हाउस के बयान में बताया गया है कि बांग्लादेश लगभग 3.5 अरब डॉलर के अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद करेगा, जिसमें गेहूं, सोया, कपास और मक्का शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 15 वर्षों में लगभग 15 अरब डॉलर ऊर्जा उत्पादों की भी खरीददारी बांग्लादेश द्वारा की जाएगी। साथ ही इसमें अमेरिकी विमानों के खरीद का भी उल्लेख किया गया है।</p>
<p>यह समझौता 2013 में हस्ताक्षरित अमेरिका-बांग्लादेश व्यापार और निवेश सहयोग मंच समझौते (टीआईसीएफए) पर आधारित है। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे एक-दूसरे के बाजारों तक अभूतपूर्व पहुंच के रूप में वर्णित किया है। अमेरिका और बांग्लादेश ने कहा कि इस समझौते का उद्देश्य द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को गहरा करना और दोनों देशों के निर्यातकों के लिए बाजार पहुंच का विस्तार करना है।</p>
<p>सौदे के तहत, बांग्लादेश, अमेरिकी औद्योगिक और कृषि सामानों के लिए महत्वपूर्ण तरजीही बाजार पहुंच प्रदान करेगा, जिसमें रसायन, चिकित्सा उपकरण, मशीनरी, मोटर वाहन और पुर्जे, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी उपकरण, ऊर्जा उत्पाद, सोयाबीन, डेयरी उत्पाद, गोमांस, पोल्ट्री, ट्री नट्स और फल शामिल हैं।</p>
<p>दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को प्रभावित करने वाली गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्धता जताई है, जिसमें बांग्लादेश, अमेरिकी वाहन सुरक्षा और उत्सर्जन मानकों को स्वीकार करने, चिकित्सा उपकरणों और फार्मास्यूटिकल्स के लिए अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) प्रमाणपत्रों को मान्यता देने और अमेरिकी पुनर्मानिर्मित वस्तुओं और पुर्जों पर प्रतिबंध हटाने के लिए सहमत हुआ है।</p>
<p>बांग्लादेश ने विश्वसनीय सीमाओं के पार डेटा के मुफ्त हस्तांतरण की अनुमति देने और विश्व व्यापार संगठन में इलेक्ट्रॉनिक प्रसारण पर सीमा शुल्क पर स्थायी रोक का समर्थन करने पर भी सहमति जतायी है। साथ ही कृषि आयात के लिए विज्ञान और जोखिम-आधारित मानकों को अपनाने, बीमा क्षेत्र में बाधाओं को कम करने, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाने और अच्छी नियामक प्रथाओं को लागू करने की भी प्रतिबद्धता जताई है।</p>
<p>इसके अतिरिक्त बांग्लादेश ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त श्रम अधिकारों की रक्षा करने का संकल्प लिया है, जिसमें जबरन श्रम से उत्पादित वस्तुओं के आयात को प्रतिबंधित करना और श्रम कानूनों में संशोधन करके संघों की स्वतंत्रता और सामूहिक सौदेबाजी की पूरी तरह से रक्षा करना एवं प्रवर्तन को मजबूत करना शामिल है। समझौते में पर्यावरण संरक्षण, भ्रष्टाचार विरोधी उपाय, बौद्धिक संपदा अधिकारों की रक्षा और सब्सिडी तथा राज्य के स्वामित्व वाले उद्यमों के कारण होने वाली विकृतियों को दूर करने की प्रतिबद्धताएं भी शामिल हैं। बांग्लादेश भौगोलिक संकेतों पर महत्वपूर्ण प्रावधानों पर सहमत हुआ है, विशेष रूप से पनीर और मांस उत्पादों के लिए।</p>
<p>दोनों देशों ने यह भी कहा कि वे आपूर्ति श्रृंखला की लचीलापन बढ़ाने, शुल्क चोरी का मुकाबला करने, निर्यात नियंत्रण पर सहयोग करने और निवेश पर जानकारी साझा करने के लिए आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मजबूत करने की दिशा में काम करेंगे। राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि अमेरिका के निर्यात-आयात बैंक और अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय विकास वित्त निगम सहित अमेरिकी संस्थान पात्रता और कानून के अधीन बांग्लादेश में महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश का समर्थन करने पर विचार करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Feb 2026 11:49:57 +0530</pubDate>
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                <title>जनवरी में जीएसटी संग्रह 6.2 प्रतिशत बढ़कर 1,93,384 करोड़ रुपये पर पहुंचा</title>
                                    <description><![CDATA[जनवरी में जीएसटी संग्रह 6.2 प्रतिशत बढ़कर 1.93 लाख करोड़ रुपये पहुंचा, घरेलू कर आय मजबूत रही, जबकि आयात कर से राजस्व 10.1 प्रतिशत उछला, आर्थिक संकेत सकारात्मक दिखे मजबूत।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/gst-collection-increased-by-62-percent-in-january-to-rs/article-141522"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/gst.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत जनवरी में कुल राजस्व संग्रह 6.2 प्रतिशत बढ़कर 1,93,384 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।</p>
<p>पिछ्ले साल जनवरी में यह आंकड़ा 1,82,094  करोड रुपये रहा था।</p>
<p>सूत्रों ने बताया कि  जनवरी में घरेलू जीएसटी राजस्व 4.8 प्रतिशत बढ़कर 1,41,32 करोड़ रुपये पर रहा। वहीं आयात पर कर से प्राप्त राजस्व 10.1 प्रतिशत बढ़कर 52,253  करोड रुपये दर्ज किया गया।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Feb 2026 11:58:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका ने क्यूबा को तेल निर्यात करने वाले देशों पर लगाया अतिरिक्त आयात शुल्क : ट्रंप ने कार्यकारी आदेश पर किए हस्ताक्षर, कहा- राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए यह अतिआवश्यक</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा को तेल निर्यात करने वाले देशों पर अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने का आदेश दिया। राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवाधिकारों के उल्लंघन का हवाला देते हुए अमेरिका ने क्यूबा के खिलाफ आपात घोषणा की। क्यूबा ने इसे क्रूर कदम बताया और अमेरिका पर अन्य देशों को प्रतिबंध में शामिल करने का आरोप लगाया।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/america-imposed-additional-import-duty-on-countries-exporting-oil-to/article-141342"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/trump.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा पर अतिरिक्त दबाव डालने के उद्देश्य से इस द्वीपीय देश को तेल निर्यात करने वाले देशों पर अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने वाले एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं। अमेरिका ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अतिआवश्यक कदम बताते हुए यह कदम उठाया है, जिसके तहत उन सभी देशों से अमेरिका में आयातित वस्तुओं पर अतिरिक्त आयात शुल्क लगाया जाएगा, जो क्यूबा को तेल की आपूर्ति करते हैं। इस आदेश के पीछे तर्क दिया गया है कि क्यूबा अमेरिका के प्रति शत्रुता का रुख रखने वाले रूस, चीन और ईरान जैसे देशों से संबंध रखता है।</p>
<p>इसके अतिरिक्त तर्क दिया गया है कि क्यूबा सरकार आधारभूत मानवाधिकारों की अवहेलना करती है। इन सभी आरोपों के आधार पर अमेरिका ने क्यूबा के खिलाफ राष्ट्रीय आपात की घोषणा कर दी है और इसके सहयोगी देशों पर अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने की घोषणा की है। दूसरी ओर, क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज ने ट्रंप के इस कार्यकारी आदेश की निंदा करते हुए इसे क्यूबा और उसके लोगों के खिलाफ एक क्रूर कृत्य बताया। उन्होंने कहा कि वहां के लोगों पर अब अत्यंत कठिन परिस्थितियों में रहने का खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह दूसरे देशों को क्यूबा के खिलाफ अपनी नाकाबंदी नीति में शामिल होने के लिए मजबूर कर रहा है।</p>
<p>क्यूबा के उप विदेश मंत्री कार्लोस एफडी कोसियो ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि अमेरिका दशकों के आर्थिक युद्ध की विफलता के बाद क्यूबा की नाकाबंदी को और सख्त कर रहा है और संप्रभु राष्ट्रों को इस प्रतिबंध में शामिल होने के लिए मजबूर कर रहा है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह आदेश मेक्सिको पर महत्वपूर्ण दबाव बनाएगा, क्योंकि अमेरिका के इस पड़ोसी ने लगातार क्यूबा के साथ एकजुटता दिखाई है और क्यूबा को तेल का निर्यात भी सबसे अधिक यहीं करता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Jan 2026 15:49:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केंद्र सरकार ने किया सेब पर आयात शुल्क 50 फीसदी: ठाकुर</title>
                                    <description><![CDATA[ इससे पहले जयराम ठाकुर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और समस्त केंद्र सरकार का धन्यवाद करते हुए कहा की केंद्र सरकार ने सेब उत्पादकों के लिए एक बड़ा एवं ऐतिहासिक निर्णय लिया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/the-central-government-has-reduced-the-import-duty-on-apples/article-45149"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/t-8.png" alt=""></a><br /><p>शिमला। हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर कहा कि केंद्र सरकार ने सेब पर आयात शुल्क 50 फीसदी लगा दिया है। ठाकुर ने कहा भारत में भूटान को छोड़ विदेश से न्यून्तम 50 रुपए प्रति किलो से कम दाम पर अब सेब नहीं आएगा। केंद्र सरकार के इन आदेशों का सेब राज्य हिमाचल के बागबानों को बड़ा लाभ होने जा रहा है। इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए हम केंद्र सरकार और भाजपा के समस्त नेतृत्व का तहे दिल से धन्यवाद करते हैं।  उदाहरण के लिए 100 रुपए प्रतिकिलो का सेब अब भारत में आयत शुल्क लगने के बाद 150 रूपए का मिलेगा। इससे पहले जयराम ठाकुर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और समस्त केंद्र सरकार का धन्यवाद करते हुए कहा की केंद्र सरकार ने सेब उत्पादकों के लिए एक बड़ा एवं ऐतिहासिक निर्णय लिया है। </p>
<p><strong>सेब के आयात पर रोक </strong><br />ठाकुर ने कहा कि इस सेबोंं के परिवहन का खर्च अलग से जुड़ेगा। अगर पिछले 5 साल में सेब उत्पादन को देखा जाए तो वर्ष 2019-20 कुल पेटियां 3.58 करोड़ (एक पेटी में औसतन 20 किलो सेब आता है), 2020-21में 2.40 करोड़ पेटियां, 2021-22 में 3.22 पेटियां, 2022-23 में 3.52 पेटियां का उत्पादन हुआ है। पर अब केंद्र सरकार ने भूटान को छोड़कर विदेश से 50 रूपए प्रति किलो से कम दाम पर सेब के आयात पर रोक लगा दी है। अब विदेशों से जो सेब आएगा उसकी न्यूनतम कीमत 50 रु प्रति किलो के साथ 50: आयात शुल्क जोड़े जाने पर 75 रुपये प्रति किलो होगी। परिवहन का खर्च अलग से होगा। उन्होंने कहा की इससे प्रदेश की 4500 करोड रुपए की सेब आर्थिकी को नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा।</p>
<p><strong>सेब उत्पादकों की कमर तोड़ रहा था</strong><br />ईरान और तुर्कीये का सेब अफगानिस्तान के रास्ते बिना आयात शुल्क अदा कर और अंडर इनवॉइस कर हिमाचल के सेब उत्पादकों की कमर तोड़ रहा था उसपर भी रोक लगेगी। केंद्र सरकार के इस निर्णय से उस पर रोक लगेगी। भाजपा ने अनेकों बार इस विषय को केंद्र सरकार से उठाया था और आज केंद्र ने इस सुझाव को अपनाया इसके लिए एक बार फिर हम समस्त केंद्र नेतृत्व का धन्यवाद करते है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 May 2023 10:17:58 +0530</pubDate>
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