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                <title>mothers day - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>मदर्स डे विशेष : मां केवल परिवार की मूल धुरी नहीं, वह प्रेम, नैतिकता और राष्ट्र निर्माण की भी आधारशिला</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय संस्कृति में मां को प्रथम गुरु का स्थान दिया गया। किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व, संस्कार, संघर्ष और सफलता के पीछे उसकी मां की प्रेरणा, त्याग और मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/mothers-day-special-mother-is-not-only-the-core-of/article-153288"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)52.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भारतीय संस्कृति में मां को प्रथम गुरु का स्थान दिया गया है। किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व, संस्कार, संघर्ष और सफलता के पीछे उसकी मां की प्रेरणा, त्याग और मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चंद बैरवा जैसे उच्च पदों पर पहुंचे व्यक्तित्वों की उपलब्धियों के पीछे उनकी माताओं का मौन लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इन सभी महान हस्तियों की सफलता यह सिद्ध करती है कि मां केवल परिवार की धुरी नहीं होती, बल्कि वह समाज और राष्ट्र निर्माण की भी आधारशिला होती है।</p>
<p><strong>मां के संस्कारों से मिली सफलता की ऊंची उड़ान</strong><br />मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को उनकी मां गोमती देवी के संस्कारों से सफलता की ऊंची उड़ान मिली है। मुख्यमंत्री के अनुसार मां की वजह से ही उनका जीवन जनसेवा का उदाहरण माना जाता है। साधारण परिवार से निकलकर प्रदेश के सवार्ेच्च पद तक पहुंचने की यात्रा आसान नहीं थी। इसमें माता से दिए गए संस्कारों की भूमिका रही। भजनलाल शर्मा को माता ने बचपन से ही अनुशासन और समाज सेवा की शिक्षा दी। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने पुत्र को कभी निराश नहीं होने दिया। </p>
<p><strong>हर बड़ी कामयाबी के पीछे मां का आशीर्वाद</strong><br />उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चंद बैरवा के अनुसार उनकी मां का निधन उस समय हो गया था, जब वे स्कूली शिक्षा प्राप्त कर रहे थे। उनके स्कूल से लौट कर आने पर घर पर मिला मां का प्यार और दुलार उनको आज भी याद है। उनकी मां का जीवन भी संघर्ष और सामाजिक उत्थान की प्रेरक कहानी है। उनकी माता ने कठिन परिस्थितियों में भी शिक्षा और आत्मविश्वास का महत्व समझाया। मां की प्रेरणा से ही उन्होंने शिक्षा प्राप्त की, सामाजिक कायार्ें में सक्रियता दिखाई और राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। </p>
<p><strong>मेरे सफल जीवन में मां का बड़ा योगदान</strong><br />मे री माताजी उर्मिला माहेश्वरी का मेरे सफल जीवन में बहुत बड़ा योगदान रहा है। माताजी पेशे से शिक्षिका रही और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में भी उन्होंने अपनी सेवाएं दी। उन्होंने दिन रात मेहनत कर परिवार की जिम्मेदारियां निभाई और आज मुझे डॉक्टर्र बनने के लिए प्रेरित किया। बचपन से ही मेरी माताजी ने मुझे शिक्षा का महत्व समझाया और उनका सपना था कि मैं डॉक्टर बनकर मरीजों की सेवा करूं। आज उन्हीं के आशीर्वाद, समर्पण और त्याग का परिणाम है कि मैं आज एक सफल चिकित्सक बनकर मरीजों की सेवा कर रहा हूं और वर्तमान में एसएमएस मेडिकल कॉलेज प्राचार्य की अहम जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहा हूं। मेरी माताजी की इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि मां का आशीर्वाद और संघर्ष किसी भी सपने को साकार कर सकता है। <br />-डॉ. दीपक माहेश्वरी, प्रिंसिपल, <br />एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर।</p>
<p><strong>मां से सीखा समर्पण और ईमानदारी</strong><br />मे री माताजी डॉ. नीरजा पाटनी ग्रोवर जो स्वयं एक चिकित्सक रहीं और सीजीएचएस जयपुर की प्रभारी के रूप में कार्य कर चुकी हैं। मेरे जीवन और व्यक्तित्व की सबसे बड़ी प्रेरणा रही हैं। उन्हें समर्पण, संवेदनशीलता और ईमानदारी के साथ रोगियों की सेवा करते हुए देखकर मैंने समझा कि चिकित्सा केवल दवाइयों, ऑपरेशन या पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है। उन्होंने मुझे सिखाया कि एक अच्छे डॉक्टर बनने से पहले एक अच्छा इंसान बनना आवश्यक है। उनका मानना था कि चिकित्सा विज्ञान का संबंध केवल शरीर से नहीं, मानवीय संवेदनाओं से भी होता है। सेवानिवृत्ति के बाद भी सेवा भाव निरंतर जारी है। आज भी वे श्रवण बाधित बच्चों के पुनर्वास कायार्ें से जुड़ी हुई हैं। यह उनकी प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत है। <br />-डॉ. मोहनीश ग्रोवर, प्रिंसिपल, राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हैल्थ साइंसेज, जयपुर।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 May 2026 10:00:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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                <title>मदर्स डे और ल्यूपस डे पर हैल्थ टॉक शो, मातृ स्वास्थ्य के लिए जागरुकता का कदम</title>
                                    <description><![CDATA[मणिपाल हॉस्प्टिल, क्वींस ऑफ जयपुर, नारी कभी ना हारी लेखिका साहित्य संस्थान और सपनाज ड्रीम्स चेरिटेबल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में एक हेल्थ टॉक शो का आयोजन किया गया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/health-talk-show-on-mothers-day-and-lupus-day/article-113752"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/news-(7)4.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मणिपाल हॉस्प्टिल, क्वींस ऑफ जयपुर, नारी कभी ना हारी लेखिका साहित्य संस्थान और सपनाज ड्रीम्स चेरिटेबल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में एक हेल्थ टॉक शो का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान के बारे में जागरूक करना था। हॉस्पिटल के चिकित्सकों डॉ. अखिल गोयल, डॉ. नेहा गोदारा, डॉ. मनीषा गुप्ता ने महिलाओं के स्वास्थ्य समस्याओं और उनके समाधान के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि थोड़ा बहुत जीवनशैली में बदलाव करके महिलाएं स्वास्थ्य समस्याओं से छुटकारा पा सकती हैं। डॉ. गोयल ने बताया कि महिलाओं में ल्यूपस की बीमारी बहुत होती है, जो कि आगे चलकर भयानक रूप ले सकती है। </p>
<p><strong>मातृ स्वास्थ्य के लिए जागरुकता का कदम</strong><br />मदर्स डे के मौके पर फोर्टिस अस्पताल के विशेषज्ञों ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान सही देखभाल, सुरक्षित डिलीवरी और डिलीवरी के बाद की देखभाल से मां और बच्चे दोनों की सेहत बेहतर बन सकती है। मां का स्वास्थ्य ही परिवार की ताकत है। गर्भावस्था से लेकर डिलीवरी और उसके बाद तक मां को न सिर्फ शारीरिक बल्कि भावनात्मक और मानसिक देखभाल की भी जरूरत होती है। एक स्वस्थ मां ही अपने बच्चे और परिवार की देखभाल अच्छे से कर सकती है। डॉ. शालू कक्कड़ ने बताया कि जब हम मां की सही देखभाल करते हैं, तो हम उनके बच्चों और पूरे समाज के भविष्य को बेहतर बनाते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 May 2025 11:51:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>मां बनने के बाद सपनों के ‘तारे’ जमीं पर </title>
                                    <description><![CDATA[टीम लीज सर्वे में बताया है कि 10 लाख से ज्यादा महिलाएं बीते दो साल में प्रसव के बाद मातृत्व के लिए फिर से नौकरियों पर नहीं लौंटी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/after-becoming-a-mother-the-stars-of-dreams-are-on/article-45486"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/शीर्षक-रहित-(630-×-400-px)-(2).jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर।  नौकरीपेशा महिलाओं को प्रसव और उसके बाद मातृत्व को उसे 12 सप्ताह का अवकाश दिया। मोदी सरकार ने 2017 में एक्ट में संशोधन कर आर्गेनाइज्ड सेक्टर में कार्यरत 1.19 मिलियन महिलाओं को ध्यान में रखकर इसे 26 सप्ताह का कर दिया। लेकिन फिर भी मां बनने के बाद उनके भविष्य की उड़ान खत्म हो रही है। 2018 की एक निजी यूनिवर्सिटी की सर्वे रिपोर्ट की माने तो देश में 73 फीसदी वर्किंग वूमन प्रसव बाद अपने नवजात के मातृत्व के लिए नौकरियां छोड़ने पर मजबूर है, कारण साफ है कि प्राइवेट सेक्टर में कानून की पालना अभी दूर की कौड़ी है। कानून में संशोधन कर अवकाश बढ़ाने के बाद कंपनियां प्रसव पूर्व महिलाओं को नौकरियॉं देने से भी परहेज कर रही है। लोकल सर्कल की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार  50 फीसदी एसएमई और स्टार्ट अप कंपनियां उन्हें नौकरियां देने से भी परहेज कर रही है। वहीं टीम लीज सर्वे में बताया है कि 10 लाख से ज्यादा महिलाएं बीते दो साल में प्रसव के बाद मातृत्व के लिए फिर से नौकरियों पर नहीं लौंटी। ऐसे में कानून का मूर्तरूप अधूरा सा है और मां का मातृत्व त्याग को चुन रहा है, भविष्य चकनाचूर है। </p>
<p><strong>प्राइवेट सेक्टर में मेटरनिटी लीव को सख्ती जरूरी</strong><br />सरकारी कार्यालयों में एक्ट की पालना हो रही है। राजस्थान में तो गहलोत सरकार ने 180 दिन का मातृत्व अवकाश कर रखा है। साथ ही 2018 में डिलेवरी से लौटने वाली महिलाओं को बच्चे की देखभाल के लिए 730 दिन का चाइल्ड केयर अवकाश भी लागू कर रखा है। लेकिन प्राइवेट सेक्टर में कंपनियों में महिलाओं को यह अधिकार मिले तो महिलाएं फिर से अपनी भविष्य की उड़ान को जमीदोंज होने से रोक पाएंगी।</p>
<p><strong>महिला शक्ति को हौसला अपार इसलिए- जो काम पर लौटती हैं, कामयाब भी होती हैं</strong><br />मातृत्व अवकाश का फायदा कहें या फिर परिस्थितियों से संघर्ष या हौसला लेकर प्रसव बाद काम पर लौटने वाली महिलाएं 27 फीसदी ही हैं। उनमें से 16 फीसदी यानी आधी से ज्यादा कंपनियों में सीनियर और शीर्ष पदों तक जाकर अपनी योग्यता साबित कर रही हैं। जयपुर की वीना अरोड़ा मैनजमेंट में पीएचडी के बाद विदेश शिफ्ट हो गई। वे बताती हैं, बाद में फैमिली के लिए जयपुर लौंटी। एक निजी यूनिवर्सिटी में डीन रहीं। फिर क्लॉर्क्स आमेर होटल में एचआर-हैड रहीं। बेटी दस साल की थी तो जॉब छोड़ी। उसकी संभाल के साथ साइड में खुद की कॉरपोरेट ट्रेनिंग की कंपनी बनाई। बेटी अब बड़ी हो चुकी है। खुद की कंपनी सफलता के आयाम छू रही है। </p>
<p><strong>मां की आपबीती</strong><br />जयपुर के अजमेर रोड के जयसिंहपुरा स्थित आॅरिक विला निवासी  38 वर्षीय मेघा जूरवाल चंडीगढ़ में शिक्षक थी। उन्होंने बताया कि आठ साल पहले बेटा हुआ। गर्भावस्था के वक्त शारीरिक क्षमताएं घटीं, कुछ माह जैसेतैसे काम किया। बेटे की सार संभाल जरूरी थी। छुट्टियां मिलना मुश्किल हो गया। तब उन्होंने नौकरी छोड़ दी। मुश्किलों के बावजूद आज उन्हें फैसले पर गर्व है। </p>
<p>जयपुर के चित्रकूट की 37 वर्षीय कुमुद तंवर दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय स्तर के बीपीओ में तकनीकी यूनिट में काम करती थीं। वे बताती हैं, प्रेग्नेंट हुई तो कुछ छुटिटयां मिलीं, लेकिन बाद में डॉक्टर ने पूर्ण आराम की सलाह दी। कंपनी ने छुट्टियां नहीं दीं। ऐसे में नौकरी छोड़नी पड़ी। अब पूरी तरह से अपने साढ़े चार साल के बेटे की देखभाल ही लक्ष्य बना रखा है और वे इसमें बेहद खुश हैं।</p>
<p>मानसरोवर के स्वर्ण पथ निवासी सीएस नुपूर धींगरा इंश्योरेंस कंपनी में कार्यरत थीं। बताया कि प्रग्नेंसी के वक्त बीमार रहने लगी थीं। प्राइवेट कंपनी थी तो छुट्टियां नहीं मिलीं। बेटा हुआ तो नौकरी छोड़ दी। अब वह सात साल का है। सोचा था कि थोड़ा बड़ा हो जाएगा तो फिर से जॉब करूंगी। लेकिन अब उसकी जरुरतें मेरी जॉब से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई हंै। घर से ही अब लेखन का काम करती हूं। तीन किताबें पब्लिश हो चुकी है।</p>
<p>कई दफा मेटरनिटी लीव नहीं देने की शिकायतें आती हैं। उनका निस्तारण कर महिलाओं को राहत देती हूं। प्राइवेट सेक्टर में मातृत्व अवकाश नहीं मिलने पर भी शिकायतें नहीं आती हैं, क्योंकि महिला नौकरी जाने से डरती हैं। आगामी दिनों में जिन कंपनियों में महिलाएं काम करती हैं, वहां औचक दौरे भी करूंगी, ताकि उनकी इस तरह की समस्याओं का समाधान किया जा सके।<br />-<strong> रेहाना रियाज, अध्यक्ष, महिला आयोग, राजस्थान। </strong></p>
<p>प्रेग्नेंसी व डिलेवरी के बाद महिला की बॉडी में हार्मोनल बदलाव से शारारिक और मानसिक दक्षता पर असर होता है। दो-तीन माह में उसकी दक्षता सामान्य होती है। नवजात को भी ब्रेस्ट फिडिंग और सारसंभाल मां से बेहतर कोई और नहीं कर सकती। ऐसे में मातृत्व अवकाश अत्यंत जरुरी है, यह नहीं मिलने पर वह नौकरी छोड़ने को मजबूर होती है। <br /><strong>- डॉ.वीना आचार्य, सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 May 2023 10:21:22 +0530</pubDate>
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