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                <title>monsoon season - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>असर खबर का... अब न कमानी टूटेगी और न ही बिगड़ेगा वाहनों का संतुलन</title>
                                    <description><![CDATA[कई वाहन रोजाना इन गड्ढ़ों के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो रहे थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report----no-more-broken-suspension-springs-or-loss-of-vehicle-balance/article-162841"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(5)16.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। टिपटा स्थित गढ़ पैलेस के पास अब न तो वाहनों का संतुलन बिगड़ेगा और न ही किसी वाहन की कमानी टूटेगी। अब वाहन आसानी से निकल रहे हैं। यह संभव हुआ है नगर निगम की ओर से उन गड्ढ़ों को भरने से। किशोरपुरा स्थित एलिवेटेड पुुलिया से टिपटा गढ़ पैलेस की तरफ जाते समय सड़क के मोड पर बड़े-बड़े गड्ढ़े हो रहे थे। पिछले काफी समय से हो रहे इन गड्ढ़ों से रोजाना भारी भरकम वाहनों के साथ ही दो पहिया व ई रिक् शा जैसे वाहन भी निकल रहे हैं। जिससे गड्ढ़ों का साइज बढ़ता ही गया। हालत यह हो गई कि कई वाहन रोजाना इन गड्ढ़ों के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो रहे थे। साथ ही गड्ढ़ों के कारण वाहनों की गति धीमी होने से वहां दिन के समय कई बार ट्रैफिक जाम तक की समस्या का सामना करना पड़ रहा था। इस मार्ग से गुजरने वाले सभी वाहन चालक परेशान हो रहे थे।</p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था मामला प्रकाशित</strong><br />गौरतलब है कि लोगों की इस समस्या को दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। समाचार पत्र में 9 अगस्त को पेज 8 पर' किसी की कमानी टूट रही तो किसी वाहन का बिगड़ रहा संतुलन शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। समाचार प्रकाशित होने के साथ ही नगर निगम के अधिकारी हरकत में आए। उन्होंने इन गड्ढ़ों को भरने व सड़क को सही करने का निर्णय किया।</p>
<p>नगर निगम के अधिषाषी अभियंता ए.क्यू कुरैशी ने बताया कि इन गड्ढ़ों में रेडी मिक्स बिटुमिन कॉफ्रींट डाली गई है। एलिवेटेड पुलिया से लेकर बैराज के समानांतर पुल व शक्ति नगर के आस-पास तक के सभी गड्ढ़ों को इससे भरा गया है। करीब 35 कट्टे मैटेरियल का उपयोग किया गया है। इससे ये बरसात में नहीं उखड़ेंगा और लम्बे समय तक टिका रहेगा।</p>
<p><strong>नाला व इंटर लोकिंग होगी</strong><br />एक्सईएन कुरैशी ने बताया कि इस सड़क पर इनटरलोकिग की जाएगी। साथ ही किशोरपुरा दवराजे तक आरसीसी का नाला भी बनाया जाएगा। जिससे यहां पानी नहीं भरेगा और सड़क भी क्षतिग्रस्त नहीं होगी। इसके लिए टेंडर जारी कर बरसात के बाद काम शुरू किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 15:15:00 +0530</pubDate>
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                <title>विद्युत डीपी बनी बंदरों के लिए काल, करंट की चपेट में आने से हो रहे हादसे</title>
                                    <description><![CDATA[पेड़ों की टहनियां छू रही विद्युत लाइनें , ग्रामीणों ने उठाई सुरक्षा की मांग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/electricity-transformers-turn-deadly-for-monkeys--accidents-caused-by-electric-shocks/article-162618"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(1)44.png" alt=""></a><br /><p>बपावरकलां। कस्बे के ब्रजराज स्टेडियम छबड़ा रोड पर लगी बिजली की डीपी (डिस्ट्रीब्यूशन प्वाइंट) बंदरों के लिए जानलेवा साबित हो रही हैं। डीपी के आसपास लगे पेड़ों की टहनियां विद्युत तारों के संपर्क में आने से आए दिन चपेट में आकर झुलस रहे हैं। कस्बे में विद्युत विभाग की लापरवाही के चलते बंदरों के साथ हादसों का सिलसिला थम नहीं रहा है। ब्रजराज स्टेडियम छपरा रोड पर लगी दोनों डीपी के आसपास बड़े-बड़े पेड़ होने के कारण उनकी टहनियां विद्युत तारों को छू रही हैं। बंदरों के पेड़ों से होकर डीपी के आसपास पहुंचने पर वे करंट की चपेट में आ जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार बंदर करंट लगने से झुलस जाते हैं और घटनास्थल पर ही पड़े रहते हैं। हादसे के बाद उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं होता। जिससे ग्रामीणों में नाराजगी है।</p>
<p><strong>पेड़ों की छंटाई जल्द कराने की मांग</strong><br />ग्रामीणों ने बताया कि पुलिस चौकी बपावर के पास लगी डीपी पर भी इसी तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। बरसात के मौसम में पेड़ों क्री टहनियों और अधिक बढ़ने से खतरा बढ़ गया है। लोगों ने मांग की है कि डीपी के आसपास लगे पेड़ों की छंटाई जल्द कराई जाए और विद्युत उपकरणों को सुरक्षित किया जाए।<br /> <br />बरसात से पहले ही पेड़ों की कटाई कर दी जानी चाहिए थी, लेकिन विभाग की लापरवाही के कारण बंदरों के साथ लगातार हादसे हो रहे हैं।<br /><strong>- लोकेश मीणा, ब्लॉक कांग्रेस,सचिव, बपावरकलां</strong><br /> <br />बंदरों की आए दिन हो रही दुर्घटनाएं चिंता का विषय हैं। विद्युत विभाग को जल्द से जल्द पेड़ों की छंटाई करवानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समस्या का समाधान नहीं किया गया तो धरना प्रदर्शन किया जाएगा।<br /><strong>-मनीष कुमार गौड़, नगर कांग्रेस अध्यक्ष, बपावरकलां</strong><br /> <br />पीपल के पेड़ होने के कारण यहां बार-बार दुर्घटनाएं त हो रही हैं। जल्द ही पेड़ों की टहनियों की कटाई करवाकर स समस्या का समाधान किया जाएगा, ताकि भविष्य में हादसों ए कोरोका जा सके।<br /><strong>- पवन मेहरा, जेईएन, विद्युत विभाग,बपावरकलां</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 14:52:07 +0530</pubDate>
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                <title>गड़े भेरुजी की पूजा-अर्चना के बाद कोटा में झूमकर बरसे बदरा</title>
                                    <description><![CDATA[सावन के दूसरे सोमवार को अच्छी बारिश की कामना से की गई विधिवत पूजा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/rain-pours-down-heavily-in-kota-following-the-worship-of--gade-bhairuji/article-162551"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/gade-bharuji.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मानसून सक्रिय होने के बावजूद कोटा में अपेक्षित बारिश नहीं होने से आमजन और किसान परेशान हैं। सावन का महीना चल रहा है, लेकिन शहर में बारिश का दौर कमजोर बना हुआ है। कभी रिमझिम तो कभी बूंदाबांदी तक सीमित बारिश से लोग तेज बारिश का इंतजार कर रहे हैं। इसी बीच सावन के दूसरे सोमवार को शहर में अच्छी बारिश की कामना को लेकर पाटनपोल स्थित सती चबूतरा के गड़े भैरुजी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई।</p>
<p>गड़े भैरुजी को कुछ समय पहले निकालकर पूजा-अर्चना की गई थी। उस दिन कोटा में अच्छी बारिश हुई थी। इसके बाद नियमित पूजा-अर्चना जारी रही, लेकिन शहर में बारिश का दौर अपेक्षाकृत कमजोर रहा। आसमान में काली घटाएं छाने के बाद तेज बारिश की उम्मीद तो बनती, लेकिन तेज हवाओं के चलते बादल बिना बरसे ही निकल जाते।</p>
<p>भाजपा नेता एवं पूर्व पार्षद महेश गौतम लल्ली ने बताया कि गड़े भैरुजी को निकालकर पूजा-अर्चना किए जाने के दिन अच्छी बारिश हुई थी। इसके बाद बारिश नहीं होने से सावन के दूसरे सोमवार को फिर से विधिवत पूजा-अर्चना कराई गई। पंडितों ने मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना कर भैरुजी महाराज से कोटा में अच्छी बारिश की कामना की।पूजा-अर्चना के बाद दोपहर बाद शहर में बारिश शुरू हो गई। बारिश होने से मौसम सुहावना हो गया और लोगों ने राहत की सांस ली। पूजा के बाद बारिश होने को लेकर लोगों में भी चर्चा रही।</p>
<p><strong>अगले दो दिन भी बारिश के आसार</strong><br />मौसम विभाग के अनुसार कोटा में अगले दो दिनों तक बारिश की संभावना बनी हुई है। शहर में अधिकतम तापमान 32 से 33 डिग्री और न्यूनतम तापमान करीब 26 डिग्री सेल्सियस बना हुआ है। कोटा में मानसून सीजन में अब तक 223 मिमी बारिश दर्ज की जा चुकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 16:52:28 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>करोड़ों की आधुनिक मोटर मार्केट गंदगी की चपेट में, कचरे से बढ़ा बीमारियों का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[ पेट्रोल पंप के पास कई बार लग चुकी आग, सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/state-of-the-art-motor-market--built-at-a-cost-of-crores--plagued-by-filth--garbage-increases-disease-risk/article-162182"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/motor.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। डीसीएम रोड पर संजय नगर आरओबी के पास बने आधुनिक मोटर मार्केट में लगा गंदगी का अम्बार बीमारियों का घर बन रहा है। यहां रोजाना हजारों लोग अपनी गाडिय़ां ठीक करवाने आ रहे हैं। वहीं  कचरे व गंदगी के कारण अपने साथ बीमारियां लेकर जा रहे हैं। तत्कालीन नगर विकास न्यास की ओर से एरोड्राम स्थित मोटर मार्केट के मैकेनिकों को यहां से शिफ्ट करने के लिए डीसीएम रोड पर नया मोटर मार्केट बनाया था। इस मार्केट में करीब 400 से अधिक दुकानें बनाकर मैकेनिकों को यहां पुनर्वास किया गया।</p>
<p>करोड़ों रुपए की लागत से बने इस मोटर मार्केट को आधुनिक मोटर मार्केट का नाम दिया गया था। यहां चौड़ी सड़क से लेकर रोशनी और जन सुविधा से लेकर सभी तरह की सुविधाएं विकसित की गई थी। लेकिन वर्तमान में देखरेख व नियमित सफाई नहीं होने से यह कचरे से अटा पड़ा है।</p>
<p><strong>मुख्य द्वार से लेकर नालियां तक जाम</strong><br />स्थानीय दुकानदारों ने बताया कि मोटर मार्केट बना था उस समय तो अच्छा था। लेकिन वर्तमान में यहां न तो केडीए की ओर से ध्यान दिया जा रहा है और न ही नगर निगम की ओर से सफाई करवाई जा रही है। जिससे मुख्य द्वार से प्रवेश करते ही कचरे का ढेर देखा जा सकता है। उसके बाद अंदर जगह-जगह पर हर थोड़ी दूरी पर कचरे के ढेर लगे हुए हैं। दुकानदार दुकानों में सफाई करके कचरा बाहर निकाल रहे हैं। साथ ही गाडिय़ां सही होने से भी कचरा निकल रहा है। लेकिन उस कचरे को उठाने के लिए यहां टिपर तक नहीं आ रहे हैं।</p>
<p>इतना ही नहीं मार्केट की सभी नालियां तक कचरे से जाम हो रही हैं। अभी बरसात का सीजन है। ऐसे में बरसात अधिक होने पर नालियों से पानी की निकासी नहीं होने पर सारा गंदा पानी मार्केट में जमा होगा। जिससे पहले से ही कचरे की गंदगी से दुर्गंध का सामना करना पड़ रहा है। वहीं आने वाले समय में बदबू से बीमारियां अधिक होने का खतरा बढ़ गया है।</p>
<p><strong>पास में पेट्रोल पम्म, गर्मी में लग चुकी आग</strong><br />स्थानीय दुकानदार मोहम्मद एजाज ने बताया कि मार्केट में करीब तीन सौ से अधिक दुकानें हैं। जहां दुकानदारों के अलावा वहां काम करने वाले मैकैनिक भी हैं। वहीं रोजाना गाडिय़ां ठीक करवाने के लिए आठ सौ से हजार लोग आ रहे हैं। ऐसे में सभी को कचरे व दुर्गंध का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि मार्केट के पास ही पेट्रोल पम्प है। गर्मी के समय मार्केट में लगे कचरे के ढेर में कई बार आग लग चुकी है। जिससे पेट्रोल पम्प पर भी आग पहुंचने का खतरा बन गया था। ऐसे में वहां के कर्मचारी भी मार्केट में सफाई करवाने के बारे में कह चुके हैं। लेकिन अभी तक भी कुछ नहीं हुआ है। दुकानदारों का कहना है कि केडीए ने तो मार्केट बनाकर दिया है। लेकिन यहां साफ सफाई करवाने की जिम्मेदारी नगर निगम की है।</p>
<p>इधर नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि हर जगह पर टिपर जा रहे हैं। मोटर मार्केट में नियमित टिपर नहीं जाने की जानकारी नहीं है। इसकी जानकारी करके वहां भी सफाई करवा दी जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 14:57:06 +0530</pubDate>
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                <title>ताकि पिकनिक पैनिक न बनें, रील्स से बनाएं दूरी</title>
                                    <description><![CDATA[ वन विभाग की चेतावनी: प्रतिबंधित क्षेत्रों में बिना अनुमति गए तो लगेगा 25 हजार का फटका।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/don-t-let-a-picnic-turn-into-a-panic--steer-clear-of-making--reels/article-159323"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)27.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मानसून की पहली फुहारों के साथ ही कोटा और पूरे हाड़ौती अंचल के प्राकृतिक पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों और पिकनिक प्रेमियों की भीड़ उमड़ने लगी है। हालांकि हाडौती में मानसून अभी पुरी तरह से सक्रिय नहीं हुआ है लेकिन लोग वीकेंड पर परिवार और दोस्तों के साथ प्रकृति के बीच समय बिताने और पिकनिक की तैयारियों में जुट गए हैं। इस मस्ती के बीच जरा सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।अक्सर देखा जाता है कि लोग सेल्फी, इंस्टाग्राम रील्स और लाइव वीडियो बनाने के चक्कर में इतने मशगूल हो जाते हैं कि अपनी सुरक्षा और एहतियात पूरी तरह भूल बैठते हैं। रील्स का यह नशा हादसों का सबसे बड़ा कारण बन रहा है।</p>
<p>सुरक्षा के लिहाज से वन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने कई खतरनाक और संवेदनशील प्राकृतिक स्थलों को पूरी तरह से प्रतिबंधित (नो-एंट्री ज़ोन) घोषित कर दिया है। वन विभाग ने इस मानसून सीजन में अवैध एंट्री करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। किसी भी प्रतिबंधित वन क्षेत्र में बिना अनुमति अवैध प्रवेश करने पर 25 हजार तक का जुर्माना वसूला जाएगा। शाम 6 बजे के बाद या अंधेरा होने पर यदि कोई इन प्रतिबंधित क्षेत्रों में घूमता हुआ पाया गया, तो उसे गिरफ्तार कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p><strong>'तीसरी आंख' (कैमरा ट्रैप) से निगरानी</strong><br />वन विभाग ने जंगल के संकरे और गुप्त रास्तों पर कैमरा ट्रैप और गश्ती दल तैनात किए हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति अवैध रूप से प्रवेश करता है, उसकी तस्वीर कैमरे में कैद हो जाती है।</p>
<p><strong>पूरी तरह प्रतिबंधित स्थल</strong><br />भंवरकुंज: वन विभाग ने यहाँ पौधारोपण कर इसे पूरी तरह बंद कर दिया है।<br />गेपरनाथ: यहाँ वन विभाग की चौकी है; यह आम दिनों में बंद रहता है और केवल सावन में दर्शनार्थियों के लिए सशर्त खोला जाता है।<br />नाहरसिंह माताजी: रावतभाटा रोड स्थित इस क्षेत्र में बाघों (टाइगर) का मूवमेंट होने और सुरक्षा कारणों से प्रवेश वर्जित है।</p>
<p><strong>इन पिकनिक स्थलों पर लौटेगी रौनक</strong><br /><strong>1. पाड़ाझर वॉटरफॉल (भैंसरोड़गढ़)</strong><br />कोटा से लगभग 65 किमी दूर स्थित भैंसरोड़गढ़ अभयारण्य के जंगलों में स्थित 35 मीटर ऊँचा प्राकृतिक झरना और प्राचीन पाड़ाझर महादेव मंदिर जानेे के लिए भैंसरोड़गढ़ अभयारण्य क्षेत्र होकर जाया जाता है। यह स्थान एडवेंचर और आउटरीच केम्पेन के लिये ज्यादा फैमस है। यहां केवल निजी साधन से ही पहुचां जा सकता है।<br /><strong>सुविधाएं व सावधानी</strong><br />यहाँ कोई दुकानें नहीं हैं, खाना-पानी साथ लाएँ। रास्ता कच्चा व फिसलन भरा है। यहां ज्यादा बरसात के दिनों मे रास्तें में बाईक खराब होने के अलावा छिपने की कोई जगह नहीं होना भी बड़ी परेशानी का कारण हो सकता है।<br />जंगली जानवरों का आवास होने से दिन के समय समूह में ही जाना सुरक्षित है।<br /><strong>2. चट्टानेश्वर महादेव</strong><br />कोटा से लगभग 25 किमी दूर केबलनगर के पास अरावली पहाड़ियों के बीच बहता झरने के पास स्थित है। प्राचीन शिव प्रतिमा और लगभग 3600 वर्ष पुराने प्रागैतिहासिक शैलचित्रों काे देखने के लिये यहां वर्षपर्यन्त लोग आते है। लेकिन बरसात के मौसम में यह स्थल पुरी तरह पिकनिक स्पाॅट बन जाता है।<br /><strong>सुविधाएं व सावधानी</strong><br />एनीकट पर काई जमने से भारी फिसलन रहती है। यहाँ घुटनों तक दलदल व कीचड़ होने से हादसे होते हैं, इसलिए पानी में गहराई तक जाने से बचें।<br /><strong>3. आलनिया डैम</strong><br />कोटा-झालावाड़ रोड़ पर शहर से 25 किमी की दूरी पर शांत जलराशि, शानदार सूर्यास्त (सनसेट) और मानसून में बांध पर चलने वाली चादर प्रकृति प्रेमियाें के साथ साथ परिवार के साथ पिकनिक मनाने वाले लोगों के लिये मुफीद स्थान है।<br /><strong>4. बरधा बांध</strong><br />कोटा से बूंदी मार्ग पर स्थित लगभग 35 किमी की सडक दुरी पर स्थित 'हाड़ौती का मिनी गोवा' के नाम से जाने जाने वाला यह स्थल मानसून में हाडौती के लोगों के लिये किसी बीच से कम नहीं । बांध की 4 फीट चौड़ी दीवार पर चढ़कर लोग वहां से गिरते पानी के बीच खडे होकर फोटाे खिंचवाते है। 22 फीट की ऊंचाई से गिरते पानी के नीचे नहाने का आनन्द लेने की हाेड़ में उमडता लोगों का हुजुम किसी समुद्री किनारें जमा हुई भीड़ का नजारा बन जाता है।<br /><strong>सुविधाएं व सावधानियां</strong><br />यहां आसपास गांव होने से खाने पीने की दुकाने मिल जाती है। दीवार पर फिसलन और कीचड़ के कारण बहने का खतरा रहता है। यहाँ सुरक्षा के लिए एसडीआरएफ की टीम तैनात रहती है।<br /><strong>5. रामेश्वरम् महादेव (बूंदी)</strong><br />शहर से 60 कि. मी. दुर रामेश्वरम् महादेव पहाड़ों की कंदरा में स्थित प्राकृतिक गुफा मंदिर है। जहाँ स्वयंभू शिवलिंग पर निरंतर जलधारा से साक्षात जलाभिषेक होता है।<br /><strong>सुविधाएं व सावधानी</strong><br />धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र। गुफा और सीढ़ियों में नमी व फिसलन से सतर्क रहें।</p>
<p><strong>आपात स्थिति में काम आएगा मोबाइल</strong><br />मानसून में पिकनिक पर जाते समय मोबाइल आपदा के समय मदद बुलाने में बहुत काम आता है, बशर्ते इसका इस्तेमाल रील्स बनाने की जगह सतर्कता के लिए किया जाए। हाड़ौती के अधिकांश पिकनिक स्पॉट्स घने जंगलों या घाटियों में स्थित हैं, जहाँ नेटवर्क गायब हो जाता है। ऐसे में पिकनिक पर निकलते समय अपने साथ इमरजेंसी किट और एहतियात अवश्य रखें। पिछले दिनों देखने में आया है कि लोग ऐसी जगहों पर जहां खड़े रहना तक मुश्किल हो वहां जाकर रील्स बना रहे है। फिसलन वाली जगहों पर या पीछे गहरा पानी, झरना, या बैकग्राउण्ड़ दिखानेे के चक्कर में लोगों ने खतरें को कई गुणा बढ़ा दिया था। रील्स बनाते समय व्यक्ति में एकाग्रता व संतुलन के साथ साथ सुरक्षा के प्रति भारी उपेक्षा ही हादसों का कारण बनती है।<br /><strong>-विष्णु श्रृंगी, गोताखाेर नगर निगम कोटा</strong></p>
<p><strong>आपदा प्रबंधन और रेस्क्यू टीमें मुस्तैद</strong><br />सिविल डिफेंस और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को मानसून के दौरान भंवरकुंज, गेपरनाथ, अलनिया और बरधा डैम जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में मुस्तैद किया गया है। प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे केवल अधिकृत व सुरक्षित स्थानों पर ही पर्यटन का आनंद लें और मानसून की मस्ती में अपनी सुरक्षा का ध्यान प्राथमिकता से रखें।<br /><strong>- राकेश व्यास, उपायुक्त, नगर निगम</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />हमारे द्वारा सभी संभावित खतरें वाले स्थानों काे चिन्हित करके वहां लगातार निगरानी की जाती है। पिकनिक सींजन में सभी एंट्री पर आधुनिक ट्रेकिंग सिस्टम एक्टिव रहता है। आमजन से अपील है कि केवल स्वीकृति प्राप्त स्थानों पर ही जायें व रील्स व आदि के लिये खतरे व पानी से दुरी बनाये रखें।<br /><strong>-मुथू एस, डीसीएफ मुकून्दरा हिल्स एण्ड़ टाईगर रिजर्व</strong></p>
<p>पिकनिक के दौरान बरसात या बाहर के पानी में नहाने से आपके शरीर को इन्फेक्शन हो सकता है। इसलिये घर पर आकर दौबारा से साफ पानी से नहायें ध्यान रहे पानी साफ ही पियें जिससे पानी जनित बिमारी न हो। मेडिकल फर्स्ट एड के अलावा जरूरी दवाईया अवश्य साथ रखें।<br /><strong>- डॉ. चन्द्रप्रकाश कलवार, चिकित्सा प्रभारी (क्रिटिकल केयर) सीएचसी कुन्हाड़ी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 14:15:31 +0530</pubDate>
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                <title>'नो-वर्क' पॉलिसी - बरसात सिर पर लेकिन अभी तक नहीं हो पाई नालों की सफाई</title>
                                    <description><![CDATA[छावनी क्षेत्र के 4 वार्डो पर मंडराया बाढ़ का खतरा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-no-work--policy--monsoon-is-imminent--yet-drain-cleaning-remains-undone/article-158667"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/021.gif" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की घोर लापरवाही और अधिकारियों की उदासीनता के चलते इस मानूसन में छावनी क्षेत्र के कई वार्डों में बाढ़ के हालात बनने तय हैं। छावनी क्षेत्र के मुख्य नालों की सफ़ाई पिछले दो से तीन साल से नहीं हुई है, जिससे वर्तमान में ये नाले पूरी तरह कचरे और सीवरेज की गंदगी से पट चुके हैं। यदि तेज़ बारिश होती है, तो आठ से ज़्यादा वार्डों का निकासी पानी रुक जाएगा और पूरा इलाका जलमग्न हो जाएगा। पूर्व पार्षदों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि निगम की स्वास्थ्य शाखा केवल कागज़ी खानापूर्ति कर रही है। धरातल पर न तो लेबर लगाई गई है और न ही मशीनों से सफ़ाई सुनिश्चित की गई है। हद तो यह है कि अधिकारी अब जनता की समस्याओं को सुनने के बजाय 'पार्षद पद पर नहीं होने' का बहाना बनाकर ज़िम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहे हैं।</p>
<p><strong>बस्तियों में घुसेगा सीवरेज, व बाढ़ का पानी</strong><br />इस मौखे के मुहाने से नहर के दुसरी और तक बनें नाले में ही सिवरेज लाईन डाल दी गई है। जिससे नाले की गहराई और कम हाे गई है। सफ़ाई न होने से नाला पूरी तरह चोक है। यदि मूसलाधार बारिश होती है,तो यह ढाई फीट का मोखा इतने बड़े क्षेत्र का पानी निकालने में पूरी तरह अक्षम साबित होगा। पानी सीधे छावनी, रामचंद्रपुरा,गोपेश्वर महादेव मंदिर, राजपूत कॉलोनी,शमशान घाट से क्षमा कॉलाेनी छावनी सब्जी मण्डी और पुलिसचौकी के आसपास की घनी बस्तियों में घुस जाएगा, जिससे लाखों की संपत्ति का नुकसान और महामारी फैलने का अंदेशा है। स्थानीय निवासी दिनेश कुमार कहते है कि निगम की यह 'नो-वर्क' पॉलिसी जनता के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।</p>
<p><strong>3 साल से अटके टेंडर, 2.5 फीट के मोखे पर टिका 5 वार्डों का भविष्य</strong><br />एक छोटे मोखे पर भारी दबाव: छावनी क्षेत्र के वार्ड नंबर 15, 42 रामचंद्रपुरा, 43 समा कॉलोनी और 44 सहित लगभग 5 वार्डों के बरसाती पानी की निकासी नहर के नीचे बने मात्र ढाई (2.5) फीट के एक आर्च नुमा मोखे से होती है।</p>
<p><strong>2 निकास लेकिन वॉटर लेवल गलत</strong><br />स्थानीय निवासी हरदयाल नागर बताते है कि यहां 60 फीट की दुरी पर ही नहर के नीचे से 2 निकास थे। वर्तमान चालू मोखे के पैरेलल बने हुये दूसरे चैनल का वॉटर लेवल ऊपर कर दिया गया है। जिससे पानी टकराकर वापस रामचंद्रपुरा और छावनी की बस्तियों में बैक मारता है। सबसे निचला इलाका होने के कारण वार्ड 42 रामचंद्रपुरा में नालियां ओवरफ्लो हो रही हैं और गलियों में रिटर्न पानी भर रहा है।</p>
<p><strong>तीन साल से सफ़ाई ठप</strong><br />वार्ड 42 के निवर्तमान पार्षद ऐश्वर्य श्रृंगी ने बताया कि मेरे वार्ड में नहर के सहारे बने नाले की लम्बाई 600 मीटर के लगाभग है। जिसमें आकर पुरे क्षेत्र का पानी आकर गिरता है। इसी नाले के बीच में पानी के निकास के लिये बने मौखे स्थित है। पिछले साल भी हमनें 30 अप्रेल को तीनों वार्डो 15, 43 व 49 के पार्षदाें ने सामुहिक लेटर नगर निगम को लिखा था। बावजूद इसके 2-3 सालों से कोई टेंडर नहीं हुआ है। पिछले साल पार्षदों ने अपने स्तर पर जमादारों से हाथ की लेबर लगवाकर जैसे-तैसे कचरा साफ करवाया था।</p>
<p><strong>अधिकारियों का रवैया उदासीन</strong><br />स्वास्थ्य निरीक्षक  को लगातार फोटो और शिकायतें भेजने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। वार्ड 43 के पार्षद इसरार अहमद ने निगम अधिकारीयों पर उदासीनता का आरोप लगाते हुये बताया कि अधिकारी फोन उठाना बंद कर चुके हैं। और शिकायत करने पर तंज कसते हैं कि अब आप पार्षद ही नहीं रहे हो। यहाँ तक कि पेड़ छंटाई जैसे आपातकालीन कामों में भी कांग्रेस-बीजेपी की राजनीति देखकर काम किया जा रहा है।</p>
<p>दो साल पहले भी सफाई न होने के कारण यह मौखे चौक हो गये थे जिसके कारण लोगों के घरों मेें 5 फीट तक पानी भर गया था। यह आम लोगों के जान माल के नुकसान का कारण बनें उससे पहले ही प्रशासन को समय रहते सफाई करवानी चाहिये।<br /><strong>-बृजेश महावर स्थानीय निवासी</strong></p>
<p>नाले की सफाई नहीं होने के कारण थोड़ी सी बारिश में पानी ओवरफ्लो होकर गलियों में भर जाता है। सामान्य दिनाें में भी निचली बस्तियों में नालिया उफान पर रहती है। यहां स्थित देवनारायण मंदिर में तक नालियों का गंदा पानी भर जाता है। निगम प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है।<br /><strong>-नवीश गोचर स्थानीय निवासी रामचन्द्रपुरा</strong></p>
<p><strong>मानव श्रम के लिये टेण्डर पर होगी सफाई</strong><br />निगम अधिकारियों ने बताया कि ऐसी जगहों पर मशीनों का पहुंचना संभव नहीं हाेता है। ऐसे मे अलग से मानव श्रम लगवाना पड़ता है। इसके लिये टैण्ड़र की प्रक्रिया पुरी की जा चुकी है। मानसून पूर्व जल्द ही नालों सफाई करवाने की रूपरेखा बना ली गई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 15:10:01 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का : हरिपुरा विद्यालय में जलभराव समाधान पर आपात बैठक</title>
                                    <description><![CDATA[मानसून से पहले स्थाई निकासी व्यवस्था की उठी मांग ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/impact-of-news-report--emergency-meeting-held-to-address-waterlogging-at-haripura-school/article-157358"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)40.png" alt=""></a><br /><p>नमाना रोड। हरिपुरा राजकीय विद्यालय में जलभराव की गंभीर समस्या को लेकर स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) की आपात बैठक आयोजित की गई। दैनिक नवज्योति में खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन एवं विद्यालय प्रबंधन सक्रिय हुआ और मानसून से पहले समस्या के स्थाई समाधान को लेकर चर्चा की गई।बैठक में निर्णय लिया गया कि मानसून की शुरुआत से पहले इस समस्या का जानकारी उच्च अधिकारियों को लिखित रूप से भेजी जाएगी, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। उपस्थित सदस्यों ने कहा कि वर्षा ऋतु से पूर्व ही जल निकासी की प्रभावी व्यवस्था करना अत्यंत आवश्यक है, अन्यथा विद्यालय परिसर में पुनः जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।</p>
<p>बैठक में जलभराव की समस्या के समाधान के लिए दो प्रमुख विकल्पों पर विचार किया गया। पहला विकल्प यह रखा गया कि दक्षिण दिशा में बूंदी-खटकड़ रोड एवं विद्यालय बाउंड्री के पास बने सीमेंटेड नाले को लगभग तीन फीट नीचे किया जाए, क्योंकि वर्तमान में यह नाला जमीन से लगभग दो फीट ऊंचा होने के कारण पानी की निकासी बाधित हो रही है। यह नाला राजस्थान स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (आरएसआरडीसी) द्वारा निर्मित बताया गया है।दूसरा विकल्प पूर्व दिशा में पूर्व में मौजूद जल निकासी मार्ग को पुनः बहाल करने का रखा गया, जो मिट्टी डालकर बंद कर दिया गया था। इसे हटाकर पुराने निकास को पुनः चालू करने पर विचार किया गया। </p>
<p>बैठक में पीईओ बंशीलाल मीणा, प्रधानाचार्य घनश्याम नकलक, सरपंच प्रतिनिधि लेखराज मीणा, ठेकेदार प्रेमराज मीणा, अध्यापक के ओमप्रकाश नागर, एसएमसी से अध्यक्ष गणेश मीणा, राजकुमार मेघवाल, सोनू गुर्जर सहित अन्य सदस्य एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 15:20:34 +0530</pubDate>
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                <title>खबर का असर : नगर पालिका ने शुरू किया नदी की सफाई का अभियान</title>
                                    <description><![CDATA[  दैनिक नवज्योति में खबर प्रकाशित होते ही हरकत में आया प्रशासन।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--municipality-launches-river-cleanup-campaign/article-155721"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/ssssss.png" alt=""></a><br /><p>सांगोद। सांगोद की जीवनदायिनी अन्नपूर्णा नदी में जमा कचरे और गंदगी की समस्या को दैनिक नवज्योति द्वारा प्रमुखता से उठाए जाने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया। 31 मई को खबर प्रकाशित होने के अगले ही दिन नगर पालिका की टीम जेसीबी मशीन के साथ मौके पर पहुंची और नदी की सफाई अभियान शुरू कराया । गौरतलब है कि कोटा रोड स्थित अन्नपूर्णा पुलिया के पास नदी किनारों पर जमा कन्चरे और अपशिष्ट के कारण नदी का प्रवाह बाधित हो गया था तथा क्षेत्र में दुर्गंध फैलने लगी थी। इससे आमजन के साथ-साथ जलीय जीवों पर भी संकट मंडरा रहा था। 31 मई को यह मुद्दा प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद पूर्व पार्षद प्रदीप सोनी, नगर पालिका के सफाई निरीक्षक एवं कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर जेसीबी मशीन से सफाई कार्य शुरू करवाया। नदी में जमा कचरे और अपशिष्ट को निकालकर ट्रैक्टरों के माध्यम से बाहर डंप किया गया। </p>
<p><strong>ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने दिए निर्देश</strong><br />पूर्व पार्षद प्रदीप सोनी ने बताया कि खबर प्रकाशित होने के बाद ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल सफाई के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों पेयजल लाइन से जुड़ी तकनीकी समस्या के कारण जेसीबी मशीन नहीं लग पाई थी, लेकिन अब नदी की सफाई करवा दी गई है। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने नगर पालिका की सफाई व्यवस्थाओं का जायजा भी लिया।</p>
<p>नगर पालिका द्वारा अब नियमित रूप से नगर की नालियों, नालों तथा जलभराव वाले क्षेत्रों को चिन्हित कर सफाई करवाई जा रही है, ताकि बरसात के मौसम में किसी प्रकार की परेशानी न हो और जल स्स्रोत स्वच्छ बने रहें।<br /><strong>- मनोज मालव, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 14:15:35 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का : अब जिंदगी पर नहीं वाहनों पर ही लगेगा ब्रेक, केडीए ने सुधारी शहर के अधिकतर स्पीड ब्रेकरों की दशा</title>
                                    <description><![CDATA[वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बना हुआ था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news--kda-improves-the-condition-of-most-of-the-city-s-speed-breakers/article-127658"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/11112.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । मानसून के सीजन में इस बार भारी बारिश के चलते डामर व गिट्टी से बने शहर के अधिकतर स्पीड ब्रेकरों की बिगड़ी हालत को कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से सुधारने का काम शुरु कर दिया है। अधिकतर की दशा सुधर भी गई है। शहर में इस बार मानसून का सीजन जून के मध्य में ही शुरु हो गया था। उसी समय से लेकर पूरे सावन व भादौ तक में लगातार और भारी बारिश हुई। जिससे न केवल शहर के मुख्य मार्गों की सड़कें वरन् अधिकतर स्पीड ब्रेकर तक की दशा बिगड़ गई थी। डामर व कंकरीट से बने स्पीड ब्रेकरों में कोई बीच से तो कोई साइड से टूट गया था। किसी की गिट्टी सड़क पर बिखर गई थी। जिससे उस पर से निकलने वाले वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बना हुआ था। बदहाल हो चुके स्पीड ब्रेकरों पर वाहनों की स्पीड तो कम नहीं हो रही थी। साथ ही लोगों के जीवन पर संकर मडराने लगा था। </p>
<p><strong>दैनिक नवज्योति ने किया था मामला प्रकाशित</strong><br />भारी बारिश के चलते बदहाल हुए शहर के अधिकतर स्पीड ब्रेकरों का मामला दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। समाचार पत्र में 7 सितम्बर को पेज 7 पर ऐसे तो वाहन ही नहीं जिंदगी पर लग सकता है ब्रेक शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें स्पीड ब्रेकरों के कारण लोगों की समस्या को प्रकाशित किया था। समाचार प्रकाशित होने के बाद अधिकारियों नी बरसात का दौर थमते ही इन्हें सही करवाने का आश्वासन दिया था। जैसे ही बरसात का दौर थमा वैसे ही कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से शहर के सभी मुख्य मार्गों के स्पीड ब्रेकरों की दशा सुधारने का काम शुरु कर दिया गया है। डीसीएम रोड से लेकर सीएडी रोड व नयापुरा से लेकर अन्य सभी बदहाल हो चुके स्पीड ब्रेकरों को फिर से सही कर नया बनाया जा रहा है। केडीए अधिकारियों के अनुसार अभी काम चल रहा है। ज्यादातर को सही कर दिया है। शेष को भी सुधारने का काम किया जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Sep 2025 14:45:09 +0530</pubDate>
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                <title>पानी के साथ सेल्फी व रील बनाना हो सकता है खतरनाक, सिविल डिफेंस व होमगार्ड के जवान रहेंगे तैनात</title>
                                    <description><![CDATA[ प्रदेश में मानसून की दस्तक के साथ ही इस बार अच्छी बरसात होने की संभावना है। जिससे कोटा शहर व आस-पास के पिकनिक स्पॉट पर रौनक भी बढ़ेगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/making-selfies-and-reels-with-water-can-be-dangerous/article-118100"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/news48.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। प्रदेश में मानसून की दस्तक के साथ ही इस बार अच्छी बरसात होने की संभावना है। जिससे कोटा शहर व आस-पास के पिकनिक स्पॉट पर रौनक भी बढ़ेगी। हालांकि पूर्व की घटनाओं को देखते हुए प्रशासन की ओर से सभी पिकनिक स्पॉट पर सुरक्षा के लिए सिविल डिफेंस व होमगार्ड के जवान तैनात रहेंगे। बावजूद इसके पानी के साथ सेल्फी लेना व रील बनाना खतरनाक हो सकता है। अभी प्री मानसून की बरसात हो रही है। जिससे यह अधिक तेज नहीं है। लेकिन एक दो दिन में मानसून आने वाला है। मानसून के सीजन में जहां रोजाना बरसात होती है। कई बार तो बहुत तेज  और कई दिन तक झड़ी भी लग जाती है। ऐसे में मौसम का आनंद लेने के लिए छुट्टी के दिन या वीकैंड पर अधिकतर लोग शहर व आस-पास के पिकनिक स्पॉट पर घूमने के लिए जाते है। कई लोग तो परिवार के साथ जाते हैं जबकि अधिकतर लोग अपने मित्रों के साथ पिकनिक मनाने जाते है। वहां जाकर मौसम का आनंद लेने में कई लोग भूल जाते हैं कि पानी के अधिक नजदीक जाना खतरनाक हो सकता है। ऐसे में वे कई बार दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।  हालांकि पूर्व की घटनाओं को देखते हुए जिला व पुलिस प्रशासन की ओर से पिकनिक स्पॉट पर सुरक्षा के इंतजाम भी किए जा रहे है। </p>
<p><strong>यहां हैं पिकनिक स्पॉट</strong><br />शहर व आस-पास के क्षेत्रों में वैसे तो कई पिकनिक स्पॉट हैं। लेकिन जहां बरसात के समय अधिक खतरा रहता है उनमें गेपरनाथ, भंवरकुंज, नाहरसिंह माताजी, गरड़िया महादेव, चट्टानेश्वर  और बूंदी स्थित बरधा डेम हैं। बरसात के सीजन में जहां सबसे अधिक भीड़भाड़ रहती है।  इसे देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से सभी जगह पर सिविल डिफेंस के जवान व होमगार्ड और संबंधित थानों के पुलिस कर्मियों को लगाया जाएगा।</p>
<p><strong>टीमें तो तैयार, रखें सावधानी</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण के सीएफओ राकेश व्यास ने बताया कि बरसात में आपदा व राहत के लिए बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित किया जा चुका है। दोनों निगमों में 15-15 विशेषज्ञ गोताखोरों की 12-12 घंटे की ड्यूटी लगाई गई है। चम्बल नदी व तालाब में बोट डाली हुई है। साथ ही निगम की 8 बोट व वाहन तैयार है। स्कूबा डाइविंग सूट व सिलेंडर और लाइफ जैकेट भी तैयार हैं। बाढ़ से निपटने के लिए सभी आाश्जक संसाधन व स्टाफ की पर्याप्त उपलब्धता है।  व्यास ने बताया कि पिकनिक स्पॉट पर जाते समय लोगों को सावधानी रखनी होगी। सबसे पहले तो पानी के नजदीक जाकर रील बनाने व सेल्फी लेने से बचना होगा। ऐसा करते समय ही  पैर फिसलने या संतुलन बिगड़ने से अधिकतर घटनाएं होती है। जहां अचानक तेज बहाव के साथ पानी आता है वहां अंधेरा होने के बाद नहीं रूके। पिकनिक स्पॉट पर नशे का सेवन नहीं करें। सुरक्षा गाडों द्वारा दिए गए निर्देशों की पालना करें। जिससे सुरक्षित तरीके से मौसम का आनंद भी लिया जा सकेगा। </p>
<p><strong>बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित, सुरक्षा एजेंसियां मुस्तैद</strong><br />बरसात को देखते हुए हर साल की तरह ही इस बार भी जिला प्रशासन व नगर निगम की ओर से बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित कर दिए हैं। जहां 24 घंटे गोताखोरों की टीम के साथ ही पर्याप्त  संसाधन भी जुटाए गए हैं।  प्रशासन की ओर से कलक्ट्रेट में और नगर निगम की ओर से उत्तर व दक्षिण में सब्जीमंडी व श्रीनाथपुरम् फायर स्टेशनों में ये कक्ष स्थापित किए गए हैं। प्रशासन का प्रयास है कि बरसात के दौरान कहीं भी कोई दुर्घटना नहीं हो। लेकिन फिर भी यदि दुर्घटना होती है या आपदा आती है तो उसके लिए एसडीआरएफ, सिविल डिफेंस, पुलिस, होमगार्ड व नगर निगम के गोताखोरों को तैयार व मुस्तैद किया गया है। </p>
<p>बरसात के सीजन में बाढ़ नियंत्रण कक्ष तो स्थापित कर दिया है। साथ ही पिकनिक स्पॉट पर सिविल डिफेंस व होमगार्ड के जवान तैनात किए जाएंगे। सभी को निर्देशित कर दिया है। पिकनिक स्पॉट पर भी सुरक्षा के लिए रैलिंग लगाई गई है। साथ ही लोगों को भी हिदायत दी गई है कि वे पानी के अधिक नजदीक नहीं जाएं। <br /><strong>-कृष्णा शुक्ला, एडीएम सीलिंग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Jun 2025 15:55:41 +0530</pubDate>
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                <title>हाड़ौती के किसानों को रास आ रही बीबीएफ पद्धति</title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति ने जब ऐसे किसानों से बातचीत की तो यह निकलकर सामने आया कि बीबीएफ तकनीक से खेती करना हाड़ौती के किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/hadoti-farmers-are-liking-the-bbf-method/article-92575"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/4427rtrer12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती में विगत पांच-छह सालों में मानसून के सीजन में लगातार अतिवृष्टि हो रही है। जिससे खेतों में पानी भर जाता है और किसानों की फसलें तबाह हो जाती है। कई महिनों की मेहनत पर पानी फिर जाता है। ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए हाड़ौती की हजारों किसानों ने खेती में बदलाव करना शुरू कर दिया है। परंपरागत खेती करने के बजाए बीबीएफ (ब्रॉडबेड-एंड-फरो) पद्धति से खेती अपना रहे है। इस तकनीक को अपनाने से फसल का उत्पादन 15 से 20 फीसदी तक अधिक होता है। वर्तमान में हाड़ौती में 2000 से अधिक किसान ऐसे है बीबीएफ से खेती को कर रहे है। संभाग में सबसे अधिक झालावाड़ में एक हजार किसान इस पद्धति से खेती कर रहे है। दैनिक नवज्योति ने जब ऐसे किसानों से बातचीत की तो यह निकलकर सामने आया कि बीबीएफ तकनीक से खेती करना हाड़ौती के किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है। इससे न केवल भारी बरसात से फसल खराब नहीं हो रही और पैदावार अधिक हो रही है। इधर, कृषि विश्वविद्यालय और कृषि विभाग के विशेषज्ञ भी हाड़ौती में बीबीएफ पद्धति से खेती करने के लिए किसानों को जागरूक रहे है।  </p>
<p><strong>बीबीएफ फसल को नुकसान से बचाती</strong><br />झालावाड़ जिले में बकानी के प्रेम पाटीदार का कहना है कि मानूसन का भरोसा नहीं रहता है। झालावाड़ जिला जो कि राजस्थान का चेरापूंजी कहलाता है। इस जिले में सर्वाधिक बरसात होती है। ऐसे में बीबीएफ तकनीक की खेती अपनाने से इनकी फसल को नुकसान नहीं होता बल्कि पैदावार और अच्छी होती है। </p>
<p><strong>क्या है बीबीएफ पद्धति</strong><br />ब्रॉडबेड-एंड-फरो (बीबीएफ) प्रणाली में, खेत की सीमाओं के अंदर चौड़ी क्यारियों और नालियों का नेटवर्क बिछाया जाता है. इस प्रणाली में, अपवाह जल को फील्ड फरो में मोड़ दिया जाता है. फील्ड फरो, 30 सेंटीमीटर चौड़े और 30 सेंटीमीटर गहरे होते हैं. इन फील्ड फरो के बीच करीब 170 सेंटीमीटर चौड़ी क्यारियां होती हैं, जिनमें फसलें उगाई जाती हैं।</p>
<p><strong>इन फसलों के लिए फायदेमंद</strong><br />कृषि विभाग के एक्सपर्ट के अनुसार मूंगफली, सोयाबीन, मूंग और उड़द की फसल के लिए बीबीएफ पद्धति कारगर साबित हो सकती है। इन फसलों के पैदावार के लिए यह तकनीक बहुत फायदेमंद रहेगी। हाड़ौती के काश्तकार भी इन फसलों में यह पद्धति अपना सकते है। मध्यप्रदेश में सबसे अधिक इस तकनीक से खेती की जा रही है। गुजरात में तो सबसे अधिक मुंगफली की पैदावार इसी पद्धति से की जा रही है।</p>
<p><strong>झालावाड़ में 1000 किसानों ने अपनाई तकनीक</strong><br />जानकारी के अनुसार हाड़ौती में सबसे अधिक झालावाड़ जिले में बीबीएफ तकनीक अपनाई जा रही है। झालावाड़ के 1000 से अधिक काश्तकार बीबीएफ तकनीक से खेती कर रहे है। क्यों कि वहां की मिट्टी इस पद्धति की खेती के अनुकुल है। कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पूरे हाड़ौती में 2000 से अधिक काश्तकार बीबीएफ तकनीक को अपना कर खेतीबाड़ी कर रहे है। झालावाड़ जिले के साथ ही कोटा जिले में जुल्मी, चेचट, अलोद, पिपल्दा, सुकेत, नालोदिया, रामगंजमंडी इलाकों में किसान बीबीएफ तकनीक से  खेती कर रहे है। साथ ही कोटा में कृषि अनुसंधान केंद्र उम्मेदगंज में भी बीबीएफ तकनीक की खेती अपनाई जा रही है। कोटा जिले के करीब 400 किसान यह तकनीक अपना कर अच्छी पैदावार कर रहे है।</p>
<p><strong>कोटा के नंदकिशोर को रिश्तेदार से मिली प्रेरणा</strong><br />कोटा जिले के जुल्मी क्षेत्र के किसान नंदकिशोर पाटीदार बताते है कि अतिवृष्टि से फसल से बचाने के लिए बीबीएफ तकनीक से खेती करने का आइडिया उसे मध्यप्रदेश से मिला। मध्यप्रदेश में उनके रिश्तेदार रहते है। जो कि बीबीएफ पद्धति से खेती करते है। जब वहां पर किसानों को बीबीएफ पद्धति से खेती करते देखा तो मुझे भी यह तकनीक अपनाने की प्रेरणा मिली। नंद किशोर का कहना है कि पिछले साल अतिवृष्टि से उनकी फसल गल गई थी। इसलिए उन्होंने भी बीबीएफ तकनीक से अपने 6 बीघा खेतों में सोयाबीन की फसल की बुवाई की। सबसे पहले तो यह फायदा हुआ कि भारी बरसात होने पर भी उसकी फसल गलने से बच गई। अब फसल तैयार है। जिसकी पैदावार पहले से भी अधिक होने के आसार है। खेत की ऊंचाई होने से भारी बरसात में भी पानी बहकर निकल जाता है।</p>
<p><strong>फायदा: खर्च कम, पैदावार ज्यादा </strong><br />रामगंजमंडी क्षेत्र में नालोदिया गांव के किसान बजरंगलाल धाकड़ अपने 25 बीघा खेत में बीबीएफ तकनीक से विगत तीन साल से खेतीबाड़ी कर रहे है। इस पद्धति के फायदे के बारे में बताते हुए धाकड़ कहते है कि इस तकनीक से खर्च कम और फसल की पैदावार अधिक होती है। अतिवृष्टि की मार किसानों को नहीं झेलनी पड़ती है। औसत से अधिक बारिश होने पर पानी खेतों में नहीं भरता व बाहर निकल जाता है। जिससे फसल नष्ट नहीं होती। इस पद्धति से खेती में पौधों के बीच डेढ़ से दो फीट की दूरी रहती है। जिससे फसलों को रोग से बचाने के लिए दवा छिड़कने में आसानी रहती है। पौधों के बीच पर्याप्त दूरी होने से खतरनाक और विषैले जीव जंतू होने पर भी पता चल जाता है।</p>
<p>बीबीएफ पद्धति से खेती अतिवृष्टि में कारगर साबित हो रही है। अधिक बरसात होने पर पाल से पानी बाहर निकल जाता है। साथ ही अल्प बरसात में भी फायदेमंद है। कम बरसात में खेती की नाली में पानी भरा रहते है। जिससे जल संग्रहण रहता है। ऐसे में यह पानी खेती में काम आ जाता है। ज्यादा बरसात होने और कम बरसात दोनों ही स्थिति में यह पद्धति फसल को बचाती है। जिससे पैदावार अधिक होती है। इस पद्धति का दूसरा प्रमुख फायदा यह होता है कि सोयाबीन आदि पौधों का फैलाव जगह ज्यादा मिलने से अच्छा होता है। पौधों का फैलाव अधिक होने से पौधे का विकास बढ़िया होता है।  खरपतवार नियंत्रण में भी आसानी होती है। विभाग की ओर से समय-समय पर किसानों को गोष्ठियों के मार्फत बीबीएफ पद्धति से खेतीवाड़ी करने के लिए जागरूक किया जाता है। किसानों को इस पद्धति से खेती करने पर विभागीय अनुदान भी मिलता है। <br /><strong>- डॉ. नरेश कुमार शर्मा, सहायक निदेशक, कृषि विभाग, कोटा </strong></p>
<p>बीबीएफ पद्धति से खेतीबाड़ी करना 100 फीसदी फायदेमंद है। मध्यप्रदेश में यह तकनीक से किसानों के लिए लाभदायक हो रही है।  हाड़ौती के किसानों में पहले की अपेक्षा इस तकनीक के प्रति रूझान बढ़ा है।  इस तकनीक से सोयाबीन की खेती करने से 15 से 20 फीसदी उपज बढ़ाई जा सकती है। हम भी कृषि अनुसंधान केंद्र में बीबीएफ से खेती कर रहे है। <br /><strong>- डॉ. डीएस मीना, एसोसिएट प्रोफेसर, कृषि अनुसंधान केंद्र उम्मेदगंज, कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Oct 2024 17:12:33 +0530</pubDate>
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                <title>प्रदेश में मानसून सीजन खत्म, 2-3 दिन में विदाई</title>
                                    <description><![CDATA[माना जाता है मानसून सीजन, इस सीजन औसत से 56 फीसदी ज्यादा हुई बारिश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/monsoon-season-ends-in-the-state-farewell-in-2-3-days/article-92018"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/rain2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में मानसून सीजन खत्म हो गया है। एक जून से 30 सितम्बर तक प्रदेश में मानसून सीजन रहता है। हालांकि मौसम विभाग की ओर से प्रदेश के आधे से ज्यादा हिस्से से मानसून की अधिकारिक विदाई की घोषणा हो चुकी है और दो तीन दिन में पूरे प्रदेश मानसून की अधिकारिक विदाई हो जाएगी। वहीं इस सीजन प्रदेश में औसत से 56 प्रतिशत ज्यादा बारिश हो चुकी है। </p>
<p>मानसून सीजन खत्म होते ही गर्मी का असर फिर से तेज गया है और तापमान में भी बढ़ोतरी होने लगी है हालांकि सुबह शाम हल्की ठंडक मौसम में घुलने लगी है। इस बीच सोमवार को प्रदेश में सबसे अधिक तापमान फलौदी में 39.4 डिग्री दर्ज किया गया। राजधानी जयपुर में अधिकतम तापमान 36.8 डिग्री और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री दर्ज किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Oct 2024 12:01:31 +0530</pubDate>
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