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                <title>monsoon season - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>खबर का असर : नगर पालिका ने शुरू किया नदी की सफाई का अभियान</title>
                                    <description><![CDATA[  दैनिक नवज्योति में खबर प्रकाशित होते ही हरकत में आया प्रशासन।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--municipality-launches-river-cleanup-campaign/article-155721"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/ssssss.png" alt=""></a><br /><p>सांगोद। सांगोद की जीवनदायिनी अन्नपूर्णा नदी में जमा कचरे और गंदगी की समस्या को दैनिक नवज्योति द्वारा प्रमुखता से उठाए जाने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया। 31 मई को खबर प्रकाशित होने के अगले ही दिन नगर पालिका की टीम जेसीबी मशीन के साथ मौके पर पहुंची और नदी की सफाई अभियान शुरू कराया । गौरतलब है कि कोटा रोड स्थित अन्नपूर्णा पुलिया के पास नदी किनारों पर जमा कन्चरे और अपशिष्ट के कारण नदी का प्रवाह बाधित हो गया था तथा क्षेत्र में दुर्गंध फैलने लगी थी। इससे आमजन के साथ-साथ जलीय जीवों पर भी संकट मंडरा रहा था। 31 मई को यह मुद्दा प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद पूर्व पार्षद प्रदीप सोनी, नगर पालिका के सफाई निरीक्षक एवं कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर जेसीबी मशीन से सफाई कार्य शुरू करवाया। नदी में जमा कचरे और अपशिष्ट को निकालकर ट्रैक्टरों के माध्यम से बाहर डंप किया गया। </p>
<p><strong>ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने दिए निर्देश</strong><br />पूर्व पार्षद प्रदीप सोनी ने बताया कि खबर प्रकाशित होने के बाद ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल सफाई के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों पेयजल लाइन से जुड़ी तकनीकी समस्या के कारण जेसीबी मशीन नहीं लग पाई थी, लेकिन अब नदी की सफाई करवा दी गई है। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने नगर पालिका की सफाई व्यवस्थाओं का जायजा भी लिया।</p>
<p>नगर पालिका द्वारा अब नियमित रूप से नगर की नालियों, नालों तथा जलभराव वाले क्षेत्रों को चिन्हित कर सफाई करवाई जा रही है, ताकि बरसात के मौसम में किसी प्रकार की परेशानी न हो और जल स्स्रोत स्वच्छ बने रहें।<br /><strong>- मनोज मालव, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 14:15:35 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का : अब जिंदगी पर नहीं वाहनों पर ही लगेगा ब्रेक, केडीए ने सुधारी शहर के अधिकतर स्पीड ब्रेकरों की दशा</title>
                                    <description><![CDATA[वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बना हुआ था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news--kda-improves-the-condition-of-most-of-the-city-s-speed-breakers/article-127658"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/11112.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । मानसून के सीजन में इस बार भारी बारिश के चलते डामर व गिट्टी से बने शहर के अधिकतर स्पीड ब्रेकरों की बिगड़ी हालत को कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से सुधारने का काम शुरु कर दिया है। अधिकतर की दशा सुधर भी गई है। शहर में इस बार मानसून का सीजन जून के मध्य में ही शुरु हो गया था। उसी समय से लेकर पूरे सावन व भादौ तक में लगातार और भारी बारिश हुई। जिससे न केवल शहर के मुख्य मार्गों की सड़कें वरन् अधिकतर स्पीड ब्रेकर तक की दशा बिगड़ गई थी। डामर व कंकरीट से बने स्पीड ब्रेकरों में कोई बीच से तो कोई साइड से टूट गया था। किसी की गिट्टी सड़क पर बिखर गई थी। जिससे उस पर से निकलने वाले वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बना हुआ था। बदहाल हो चुके स्पीड ब्रेकरों पर वाहनों की स्पीड तो कम नहीं हो रही थी। साथ ही लोगों के जीवन पर संकर मडराने लगा था। </p>
<p><strong>दैनिक नवज्योति ने किया था मामला प्रकाशित</strong><br />भारी बारिश के चलते बदहाल हुए शहर के अधिकतर स्पीड ब्रेकरों का मामला दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। समाचार पत्र में 7 सितम्बर को पेज 7 पर ऐसे तो वाहन ही नहीं जिंदगी पर लग सकता है ब्रेक शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें स्पीड ब्रेकरों के कारण लोगों की समस्या को प्रकाशित किया था। समाचार प्रकाशित होने के बाद अधिकारियों नी बरसात का दौर थमते ही इन्हें सही करवाने का आश्वासन दिया था। जैसे ही बरसात का दौर थमा वैसे ही कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से शहर के सभी मुख्य मार्गों के स्पीड ब्रेकरों की दशा सुधारने का काम शुरु कर दिया गया है। डीसीएम रोड से लेकर सीएडी रोड व नयापुरा से लेकर अन्य सभी बदहाल हो चुके स्पीड ब्रेकरों को फिर से सही कर नया बनाया जा रहा है। केडीए अधिकारियों के अनुसार अभी काम चल रहा है। ज्यादातर को सही कर दिया है। शेष को भी सुधारने का काम किया जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Tue, 23 Sep 2025 14:45:09 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पानी के साथ सेल्फी व रील बनाना हो सकता है खतरनाक, सिविल डिफेंस व होमगार्ड के जवान रहेंगे तैनात</title>
                                    <description><![CDATA[ प्रदेश में मानसून की दस्तक के साथ ही इस बार अच्छी बरसात होने की संभावना है। जिससे कोटा शहर व आस-पास के पिकनिक स्पॉट पर रौनक भी बढ़ेगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/making-selfies-and-reels-with-water-can-be-dangerous/article-118100"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/news48.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। प्रदेश में मानसून की दस्तक के साथ ही इस बार अच्छी बरसात होने की संभावना है। जिससे कोटा शहर व आस-पास के पिकनिक स्पॉट पर रौनक भी बढ़ेगी। हालांकि पूर्व की घटनाओं को देखते हुए प्रशासन की ओर से सभी पिकनिक स्पॉट पर सुरक्षा के लिए सिविल डिफेंस व होमगार्ड के जवान तैनात रहेंगे। बावजूद इसके पानी के साथ सेल्फी लेना व रील बनाना खतरनाक हो सकता है। अभी प्री मानसून की बरसात हो रही है। जिससे यह अधिक तेज नहीं है। लेकिन एक दो दिन में मानसून आने वाला है। मानसून के सीजन में जहां रोजाना बरसात होती है। कई बार तो बहुत तेज  और कई दिन तक झड़ी भी लग जाती है। ऐसे में मौसम का आनंद लेने के लिए छुट्टी के दिन या वीकैंड पर अधिकतर लोग शहर व आस-पास के पिकनिक स्पॉट पर घूमने के लिए जाते है। कई लोग तो परिवार के साथ जाते हैं जबकि अधिकतर लोग अपने मित्रों के साथ पिकनिक मनाने जाते है। वहां जाकर मौसम का आनंद लेने में कई लोग भूल जाते हैं कि पानी के अधिक नजदीक जाना खतरनाक हो सकता है। ऐसे में वे कई बार दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।  हालांकि पूर्व की घटनाओं को देखते हुए जिला व पुलिस प्रशासन की ओर से पिकनिक स्पॉट पर सुरक्षा के इंतजाम भी किए जा रहे है। </p>
<p><strong>यहां हैं पिकनिक स्पॉट</strong><br />शहर व आस-पास के क्षेत्रों में वैसे तो कई पिकनिक स्पॉट हैं। लेकिन जहां बरसात के समय अधिक खतरा रहता है उनमें गेपरनाथ, भंवरकुंज, नाहरसिंह माताजी, गरड़िया महादेव, चट्टानेश्वर  और बूंदी स्थित बरधा डेम हैं। बरसात के सीजन में जहां सबसे अधिक भीड़भाड़ रहती है।  इसे देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से सभी जगह पर सिविल डिफेंस के जवान व होमगार्ड और संबंधित थानों के पुलिस कर्मियों को लगाया जाएगा।</p>
<p><strong>टीमें तो तैयार, रखें सावधानी</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण के सीएफओ राकेश व्यास ने बताया कि बरसात में आपदा व राहत के लिए बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित किया जा चुका है। दोनों निगमों में 15-15 विशेषज्ञ गोताखोरों की 12-12 घंटे की ड्यूटी लगाई गई है। चम्बल नदी व तालाब में बोट डाली हुई है। साथ ही निगम की 8 बोट व वाहन तैयार है। स्कूबा डाइविंग सूट व सिलेंडर और लाइफ जैकेट भी तैयार हैं। बाढ़ से निपटने के लिए सभी आाश्जक संसाधन व स्टाफ की पर्याप्त उपलब्धता है।  व्यास ने बताया कि पिकनिक स्पॉट पर जाते समय लोगों को सावधानी रखनी होगी। सबसे पहले तो पानी के नजदीक जाकर रील बनाने व सेल्फी लेने से बचना होगा। ऐसा करते समय ही  पैर फिसलने या संतुलन बिगड़ने से अधिकतर घटनाएं होती है। जहां अचानक तेज बहाव के साथ पानी आता है वहां अंधेरा होने के बाद नहीं रूके। पिकनिक स्पॉट पर नशे का सेवन नहीं करें। सुरक्षा गाडों द्वारा दिए गए निर्देशों की पालना करें। जिससे सुरक्षित तरीके से मौसम का आनंद भी लिया जा सकेगा। </p>
<p><strong>बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित, सुरक्षा एजेंसियां मुस्तैद</strong><br />बरसात को देखते हुए हर साल की तरह ही इस बार भी जिला प्रशासन व नगर निगम की ओर से बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित कर दिए हैं। जहां 24 घंटे गोताखोरों की टीम के साथ ही पर्याप्त  संसाधन भी जुटाए गए हैं।  प्रशासन की ओर से कलक्ट्रेट में और नगर निगम की ओर से उत्तर व दक्षिण में सब्जीमंडी व श्रीनाथपुरम् फायर स्टेशनों में ये कक्ष स्थापित किए गए हैं। प्रशासन का प्रयास है कि बरसात के दौरान कहीं भी कोई दुर्घटना नहीं हो। लेकिन फिर भी यदि दुर्घटना होती है या आपदा आती है तो उसके लिए एसडीआरएफ, सिविल डिफेंस, पुलिस, होमगार्ड व नगर निगम के गोताखोरों को तैयार व मुस्तैद किया गया है। </p>
<p>बरसात के सीजन में बाढ़ नियंत्रण कक्ष तो स्थापित कर दिया है। साथ ही पिकनिक स्पॉट पर सिविल डिफेंस व होमगार्ड के जवान तैनात किए जाएंगे। सभी को निर्देशित कर दिया है। पिकनिक स्पॉट पर भी सुरक्षा के लिए रैलिंग लगाई गई है। साथ ही लोगों को भी हिदायत दी गई है कि वे पानी के अधिक नजदीक नहीं जाएं। <br /><strong>-कृष्णा शुक्ला, एडीएम सीलिंग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Sat, 21 Jun 2025 15:55:41 +0530</pubDate>
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                <title>हाड़ौती के किसानों को रास आ रही बीबीएफ पद्धति</title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति ने जब ऐसे किसानों से बातचीत की तो यह निकलकर सामने आया कि बीबीएफ तकनीक से खेती करना हाड़ौती के किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/hadoti-farmers-are-liking-the-bbf-method/article-92575"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/4427rtrer12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती में विगत पांच-छह सालों में मानसून के सीजन में लगातार अतिवृष्टि हो रही है। जिससे खेतों में पानी भर जाता है और किसानों की फसलें तबाह हो जाती है। कई महिनों की मेहनत पर पानी फिर जाता है। ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए हाड़ौती की हजारों किसानों ने खेती में बदलाव करना शुरू कर दिया है। परंपरागत खेती करने के बजाए बीबीएफ (ब्रॉडबेड-एंड-फरो) पद्धति से खेती अपना रहे है। इस तकनीक को अपनाने से फसल का उत्पादन 15 से 20 फीसदी तक अधिक होता है। वर्तमान में हाड़ौती में 2000 से अधिक किसान ऐसे है बीबीएफ से खेती को कर रहे है। संभाग में सबसे अधिक झालावाड़ में एक हजार किसान इस पद्धति से खेती कर रहे है। दैनिक नवज्योति ने जब ऐसे किसानों से बातचीत की तो यह निकलकर सामने आया कि बीबीएफ तकनीक से खेती करना हाड़ौती के किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है। इससे न केवल भारी बरसात से फसल खराब नहीं हो रही और पैदावार अधिक हो रही है। इधर, कृषि विश्वविद्यालय और कृषि विभाग के विशेषज्ञ भी हाड़ौती में बीबीएफ पद्धति से खेती करने के लिए किसानों को जागरूक रहे है।  </p>
<p><strong>बीबीएफ फसल को नुकसान से बचाती</strong><br />झालावाड़ जिले में बकानी के प्रेम पाटीदार का कहना है कि मानूसन का भरोसा नहीं रहता है। झालावाड़ जिला जो कि राजस्थान का चेरापूंजी कहलाता है। इस जिले में सर्वाधिक बरसात होती है। ऐसे में बीबीएफ तकनीक की खेती अपनाने से इनकी फसल को नुकसान नहीं होता बल्कि पैदावार और अच्छी होती है। </p>
<p><strong>क्या है बीबीएफ पद्धति</strong><br />ब्रॉडबेड-एंड-फरो (बीबीएफ) प्रणाली में, खेत की सीमाओं के अंदर चौड़ी क्यारियों और नालियों का नेटवर्क बिछाया जाता है. इस प्रणाली में, अपवाह जल को फील्ड फरो में मोड़ दिया जाता है. फील्ड फरो, 30 सेंटीमीटर चौड़े और 30 सेंटीमीटर गहरे होते हैं. इन फील्ड फरो के बीच करीब 170 सेंटीमीटर चौड़ी क्यारियां होती हैं, जिनमें फसलें उगाई जाती हैं।</p>
<p><strong>इन फसलों के लिए फायदेमंद</strong><br />कृषि विभाग के एक्सपर्ट के अनुसार मूंगफली, सोयाबीन, मूंग और उड़द की फसल के लिए बीबीएफ पद्धति कारगर साबित हो सकती है। इन फसलों के पैदावार के लिए यह तकनीक बहुत फायदेमंद रहेगी। हाड़ौती के काश्तकार भी इन फसलों में यह पद्धति अपना सकते है। मध्यप्रदेश में सबसे अधिक इस तकनीक से खेती की जा रही है। गुजरात में तो सबसे अधिक मुंगफली की पैदावार इसी पद्धति से की जा रही है।</p>
<p><strong>झालावाड़ में 1000 किसानों ने अपनाई तकनीक</strong><br />जानकारी के अनुसार हाड़ौती में सबसे अधिक झालावाड़ जिले में बीबीएफ तकनीक अपनाई जा रही है। झालावाड़ के 1000 से अधिक काश्तकार बीबीएफ तकनीक से खेती कर रहे है। क्यों कि वहां की मिट्टी इस पद्धति की खेती के अनुकुल है। कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पूरे हाड़ौती में 2000 से अधिक काश्तकार बीबीएफ तकनीक को अपना कर खेतीबाड़ी कर रहे है। झालावाड़ जिले के साथ ही कोटा जिले में जुल्मी, चेचट, अलोद, पिपल्दा, सुकेत, नालोदिया, रामगंजमंडी इलाकों में किसान बीबीएफ तकनीक से  खेती कर रहे है। साथ ही कोटा में कृषि अनुसंधान केंद्र उम्मेदगंज में भी बीबीएफ तकनीक की खेती अपनाई जा रही है। कोटा जिले के करीब 400 किसान यह तकनीक अपना कर अच्छी पैदावार कर रहे है।</p>
<p><strong>कोटा के नंदकिशोर को रिश्तेदार से मिली प्रेरणा</strong><br />कोटा जिले के जुल्मी क्षेत्र के किसान नंदकिशोर पाटीदार बताते है कि अतिवृष्टि से फसल से बचाने के लिए बीबीएफ तकनीक से खेती करने का आइडिया उसे मध्यप्रदेश से मिला। मध्यप्रदेश में उनके रिश्तेदार रहते है। जो कि बीबीएफ पद्धति से खेती करते है। जब वहां पर किसानों को बीबीएफ पद्धति से खेती करते देखा तो मुझे भी यह तकनीक अपनाने की प्रेरणा मिली। नंद किशोर का कहना है कि पिछले साल अतिवृष्टि से उनकी फसल गल गई थी। इसलिए उन्होंने भी बीबीएफ तकनीक से अपने 6 बीघा खेतों में सोयाबीन की फसल की बुवाई की। सबसे पहले तो यह फायदा हुआ कि भारी बरसात होने पर भी उसकी फसल गलने से बच गई। अब फसल तैयार है। जिसकी पैदावार पहले से भी अधिक होने के आसार है। खेत की ऊंचाई होने से भारी बरसात में भी पानी बहकर निकल जाता है।</p>
<p><strong>फायदा: खर्च कम, पैदावार ज्यादा </strong><br />रामगंजमंडी क्षेत्र में नालोदिया गांव के किसान बजरंगलाल धाकड़ अपने 25 बीघा खेत में बीबीएफ तकनीक से विगत तीन साल से खेतीबाड़ी कर रहे है। इस पद्धति के फायदे के बारे में बताते हुए धाकड़ कहते है कि इस तकनीक से खर्च कम और फसल की पैदावार अधिक होती है। अतिवृष्टि की मार किसानों को नहीं झेलनी पड़ती है। औसत से अधिक बारिश होने पर पानी खेतों में नहीं भरता व बाहर निकल जाता है। जिससे फसल नष्ट नहीं होती। इस पद्धति से खेती में पौधों के बीच डेढ़ से दो फीट की दूरी रहती है। जिससे फसलों को रोग से बचाने के लिए दवा छिड़कने में आसानी रहती है। पौधों के बीच पर्याप्त दूरी होने से खतरनाक और विषैले जीव जंतू होने पर भी पता चल जाता है।</p>
<p>बीबीएफ पद्धति से खेती अतिवृष्टि में कारगर साबित हो रही है। अधिक बरसात होने पर पाल से पानी बाहर निकल जाता है। साथ ही अल्प बरसात में भी फायदेमंद है। कम बरसात में खेती की नाली में पानी भरा रहते है। जिससे जल संग्रहण रहता है। ऐसे में यह पानी खेती में काम आ जाता है। ज्यादा बरसात होने और कम बरसात दोनों ही स्थिति में यह पद्धति फसल को बचाती है। जिससे पैदावार अधिक होती है। इस पद्धति का दूसरा प्रमुख फायदा यह होता है कि सोयाबीन आदि पौधों का फैलाव जगह ज्यादा मिलने से अच्छा होता है। पौधों का फैलाव अधिक होने से पौधे का विकास बढ़िया होता है।  खरपतवार नियंत्रण में भी आसानी होती है। विभाग की ओर से समय-समय पर किसानों को गोष्ठियों के मार्फत बीबीएफ पद्धति से खेतीवाड़ी करने के लिए जागरूक किया जाता है। किसानों को इस पद्धति से खेती करने पर विभागीय अनुदान भी मिलता है। <br /><strong>- डॉ. नरेश कुमार शर्मा, सहायक निदेशक, कृषि विभाग, कोटा </strong></p>
<p>बीबीएफ पद्धति से खेतीबाड़ी करना 100 फीसदी फायदेमंद है। मध्यप्रदेश में यह तकनीक से किसानों के लिए लाभदायक हो रही है।  हाड़ौती के किसानों में पहले की अपेक्षा इस तकनीक के प्रति रूझान बढ़ा है।  इस तकनीक से सोयाबीन की खेती करने से 15 से 20 फीसदी उपज बढ़ाई जा सकती है। हम भी कृषि अनुसंधान केंद्र में बीबीएफ से खेती कर रहे है। <br /><strong>- डॉ. डीएस मीना, एसोसिएट प्रोफेसर, कृषि अनुसंधान केंद्र उम्मेदगंज, कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Oct 2024 17:12:33 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>प्रदेश में मानसून सीजन खत्म, 2-3 दिन में विदाई</title>
                                    <description><![CDATA[माना जाता है मानसून सीजन, इस सीजन औसत से 56 फीसदी ज्यादा हुई बारिश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/monsoon-season-ends-in-the-state-farewell-in-2-3-days/article-92018"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/rain2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में मानसून सीजन खत्म हो गया है। एक जून से 30 सितम्बर तक प्रदेश में मानसून सीजन रहता है। हालांकि मौसम विभाग की ओर से प्रदेश के आधे से ज्यादा हिस्से से मानसून की अधिकारिक विदाई की घोषणा हो चुकी है और दो तीन दिन में पूरे प्रदेश मानसून की अधिकारिक विदाई हो जाएगी। वहीं इस सीजन प्रदेश में औसत से 56 प्रतिशत ज्यादा बारिश हो चुकी है। </p>
<p>मानसून सीजन खत्म होते ही गर्मी का असर फिर से तेज गया है और तापमान में भी बढ़ोतरी होने लगी है हालांकि सुबह शाम हल्की ठंडक मौसम में घुलने लगी है। इस बीच सोमवार को प्रदेश में सबसे अधिक तापमान फलौदी में 39.4 डिग्री दर्ज किया गया। राजधानी जयपुर में अधिकतम तापमान 36.8 डिग्री और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री दर्ज किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Oct 2024 12:01:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मानसूनी मौसम के चलते एसडीपी डोनेशन में आ रही समस्या</title>
                                    <description><![CDATA[मशीन को एसडीपी सेपरेशन के लिए लगाया जाता है तो मशीन ऑटोमेटिक होने के कारण नमी को भांप लेती है और प्रोसेस रोक देती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/problems-arising-in-sdp-donation-due-to-monsoon-season/article-90039"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/1rtrer-(8)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के वातावरण में बारिश के दौरान नमी बढ़ जाती है। जिसका कारण कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं। इसमें एक प्रकार समस्या ब्लड बैंक में भी होने लगी है। जहां वातावरण में नमी ज्यादा हो जाने के कारण मशीन ब्लड सेपरेशन यानि रक्त से प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, आरबीसी और डब्लूबीसी को अलग करने का कार्य रोक देती है। एमबीएस स्थित ब्लड बैंक में भी शुक्रवार को यही घटना सामने आई जहां एक डोनर को एसडीपी देने के लिए दो बार ब्लड बैंक के चक्कर लगाने पड़े। </p>
<p><strong>यह हुई घटना:</strong> दरअसल बूंदी के खटकड़ निवासी हीरालाल जांगीड़ को ब्लड कैंसर है ऐसे में डॉक्टर ने उन्हें तुरंत एसडीपी चढ़ाने के लिए कहा जिसके लिए हीरालाल पहले मेडिकल कॉलेज अस्पताल गए तो उन्हें वहां न तो ओ नेगेटिव ब्लड मिला और न ही ओ नेगेटिव ब्लड डोनर ऐेसे में निराश होकर एमबीएस अस्पताल आए तो यहां किसी के परिचित ने नांता निवासी अर्जुन गुर्जर के बारे में बताया। जिसके बाद अर्जुन दोपहर करीब 2.30 बजे एसडीपी डोनेट करने आए तो मशीन खराब होने की जानकारी मिली। जहां 4.30 बजे तक इंतजार करने के बाद भी मशीन नहीं चलने पर अर्जुन वापस लौट गए। उसके बाद अर्जुन को शाम 8.30 बजे ब्लड बैंक से जानकारी मिली की मशीन ठीक हो गई है तो एसडीपी डोनेट करने आ जाइए जिसके बाद करीब 9 बजे तक एसडीपी डोनेट हो पाई।</p>
<p><strong>ब्लड बैंक का कहना है</strong><br />पूरी घटना पर ब्लड बैंक प्रभारी अधिकारी डॉ. शैलेंद्र वशिष्ट से जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि ब्लड बैंक की सारी मशीनें ठीक प्रकार से कार्य कर रही हैं। केवल एक मशीन में किट लगाने वाला ड्रम टूटा हुआ है। जिसके लिए अधीक्षक को लिखा हुआ है। डॉ. शैलेंद्र ने बताया कि अभी मानसून का सीजन चल रहा है। इस दौरान हवा में नमी की मात्रा बढ़ जाती है। ऐसे में जब भी मशीन को एसडीपी सेपरेशन के लिए लगाया जाता है तो मशीन ऑटोमेटिक होने के कारण नमी को भांप लेती है और किसी भी प्रकार की मेलफंकशनिंग यानी खराबी से बचने के लिए प्रोसेस रोक देती है। ऐसे में मशीन को सुखाना पड़ता है, ताकि उसमें मौजूद सारी नमी खत्म हो जाए। शुक्रवार को भी डोनर अर्जुन के साथ यही हुआ। हालांकि शाम को मशीन की नमी खत्म हो जाने के बाद अर्जुन को बुलाकर एसडीपी डोनेशन का कार्य पूरा कर लिया गया था। वहीं मशीन के कमरे और आसपास के वातावरण को बिल्कुल बंद करने के लिए अस्पताल प्रशासन को लिखा हुआ है जिससे ऐसी घटनाएं आगे ना हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Sep 2024 16:10:01 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>प्रदेश में मानसून मेहरबान, माही बजाज सागर बांध के 8 गेट खोलकर 35 हजार क्यूसेक से ज्यादा पानी की निकासी</title>
                                    <description><![CDATA[बीसलपुर बांध में पानी की आवक धीमी जरूर गई है लेकिन आवक लगातार जारी है। इसके चलते बांध का जलस्तर अब मंगलवार रात तक बढ़कर 314.69 आरएलमीटर हो गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/monsoon-is-kind-in-the-state-and-more-than-35/article-89522"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/bisalpur-dam.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में जयपुर सहित कई जिलों में बारिश का दौर जारी है। बीते 24 घंटों में बांसवाड़ा के भूंगड़ा में चार इंच से ज्यादा और गंगानगर में 61 एमएम पानी बरसा। राजधानी जयपुर सहित अजमेर, पाली, सीकर, बांसवाड़ा, बीकानेर, जैसलमेर, नागौर सहित कई जिलों में तेज बारिश हुई। जयपुर में शाम को मानसरोवर, झोटवाड़ा सहित कई इलाकों में करीब चालीस मिनट तक झमाझम बारिश हुई। वहीं देर रात तक जयपुर के कई इलाकों में रुक रुक कर छितराई बारिश का दौर चलता रहा। बांसवाड़ा में मंगलवार रात माही बजाज सागर बांध के आठ गेट खोलकर 35 हजार क्यूसेक से ज्यादा पानी माही नदी में छोड़ा गया। उदयपुर और आसपास के इलाकों में भी बारिश हुई। तेज बारिश के कारण पिछोला झील पूरी भर गई और किसी भी वक्त स्वरूप सागर के गेट खोले जा सकते हैं। वहीं उदय सागर के गेट चार फीट तक खोले गए हैं। जिले के पानेर में एक महिला की बिजली गिरने से मौत हुई है।</p>
<p><strong>जयपुर में शाम को कई इलाकों में हुई झमाझम, देर रात तक होती रही छितराई बारिश </strong><br />धौलपुर में पार्वती नदी में दो युवक डूबे<br />धौलपुर में दो युवक पार्वती नदी में नहाने के दौरान डूब गए जिनकी तलाश देर रात तक जारी थी। नागौर के डेगाना में खेत में आकाशीय बिजली गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई वहीं मेड़ता में बिजली गिरने से 45 वर्षीय एक शख्स की मौत हुई है। </p>
<p><strong>बीसलपुर @ 314.68 </strong><br />बीसलपुर बांध में पानी की आवक धीमी जरूर गई है लेकिन आवक लगातार जारी है। इसके चलते बांध का जलस्तर अब मंगलवार रात तक बढ़कर 314.69 आरएलमीटर हो गया है। वहीं त्रिवेणी 2.90 मीटर की ऊंचाई पर बह रही है। बांध में कुल भराव क्षमता का करीब 85 फीसदी पानी आ चुका है। बांध की कुल भराव क्षमता 315.50 आरएलमीटर है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Sep 2024 08:50:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जयपुर में देर रात झमाझम, सड़कें पानी-पानी, कल से फिर मानसून पकड़ेगा रफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[मौसम केन्द्र जयपुर ने एक सितंबर को 15 जिलों में मध्यम से तेज बारिश की संभावना जताई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/roads-filled-with-rain-and-water-late-at-night-in/article-89120"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/rain.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान के अधिकांश जिलों में बारिश का दौर लगभग थम गया है। हालांकि राजधानी जयपुर में शुक्रवार देर शाम अचानक मौसम बदला और बादल छा गए। इसके बाद चारदीवारी, एमआई रोड सहित कई इलाकों में करीब 20 मिनट तक छितराई बारिश हुई। इसके बाद देर रात झमाझम बारिश हुई। जयपुर में देर रात तक करीब एक इंच बारिश हुई।  वहीं अधिकांश जिलों में मौसम साफ हो गया और धूप खिल रही है। वहीं शनिवार को भी कुछ ऐसा ही मौसम रहने की उम्मीद है और बारिश होने के आसार बिल्कुल कम है। अब सितंबर की शुरुआत में अच्छी बारिश होने की संभावना है। </p>
<p>मौसम केन्द्र जयपुर ने एक सितंबर को 15 जिलों में मध्यम से तेज बारिश की संभावना जताई है। वहीं 2 सितंबर को 2 जिलों में भारी बारिश का आॅरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं बीते 24 घंटों में हनुमानगढ़ में सर्वाधिक 48 एमएम और माउंट आबू में 44 एमएम बारिश दर्ज की गई। वहीं जयपुर में दिनभर धूप खिली रही और मौसम साफ रहा। जयपुर में अधिकतम तापमान 32.8 डिग्री और न्यूनतम तापमान 25.6 डिग्री दर्ज किया गया। </p>
<p>इस बीच प्रदेश में मानसून के इस सीजन में एक जून से अब तक 552 एमएम से ज्यादा बरसात हो चुकी है जबकि औसत बारिश इस समय तक 364.5 एमएम होती है। इस बार सबसे ज्यादा बारिश दौसा जिले में 1148.8 एमएम हुई है।  दौसा के बाद दूसरा नंबर सवाई माधोपुर जिले का है, जहां 1043.9 एमएम बरसात हुई है। सिरोही, झालावाड़ और डूंगरपुर जिले ऐसे हैं जहां अब तक सामान्य से कम बारिश हुई है। वहीं शेष सभी जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो चुकी है। </p>
<p><strong>बीसलपुर बांध में धीमी हुई पानी की आवक</strong><br />बीसलपुर बांध में पानी की आवक अब बेहद कम हो गई है। बीते 24 घंटों में महज छह सेमी पानी की बांध में आवक हुई है। इसके चलते बांध का जलस्तर अब बढ़कर शुक्रवार रात तक 314.49 आरएलमीटर हो गया है। वहीं त्रिवेणी 2.90 मीटर की ऊंचाई पर बह रही है। बांध में कुल भराव क्षमता का करीब 82 फीसदी आ चुका है। बांध की कुल भराव क्षमता 315.50 आरएलमीटर है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 Aug 2024 09:41:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खराब सड़कों को ठीक करने के लिए चलेगा मेंटीनेंस कैंपेन, दीया कुमारी ने दिए अधिकारियों को निर्देश </title>
                                    <description><![CDATA[उपमुख्यमंत्री और सार्वजनिक निर्माण विभाग मंत्री दिया कुमारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कैंपेन के दौरान कार्यों की गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा जाए और कामों को निर्धारित अवधि में पूरा करवाया जाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/road-maintenance-campaign-will-be-conducted-for-the-poor-condition/article-88793"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/diya-kumari.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में बरसात से ख़राब हुई सड़कों को ठीक करने के लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग की ओर से एक सितम्बर से 25 अक्टूबर तक रोड मेंटीनेंस कैंपेन चलाया जाएगा। उपमुख्यमंत्री और सार्वजनिक निर्माण विभाग मंत्री दीया कुमारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कैंपेन के दौरान कार्यों की गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा जाए और कामों को निर्धारित अवधि में पूरा करवाया जाए। उन्होंने बताया की कैंपेन के दौरान सड़क मरम्मत कार्यों के साथ दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए ब्लैक स्पॉट्स को सुधारने का काम प्राथमिकता से किया जायेगा। उन्होंने कहा है  कि सड़क निर्माण और मरम्मत के कार्यों में निर्धारित मानकों का पालन नहीं करने वालों के ख़िलाफ़ कठोर कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p><strong>कैंपेन के दौरान यह प्रमुख काम होंगे<br /></strong></p>
<ul>
<li>बारिश के दौरान जहाँ सड़कें टूट गई है, वहाँ यातायात को तुरंत बहाल किया जाएगा।</li>
<li>जिन क्षेत्रों में भारी बारिश /बाढ़ के कारण सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई है ,उनको आपदा राहत कोष से ठीक करवाने के प्रस्ताव बनाकर जिला कलेक्टर को भिजवाए जाएंगे।</li>
<li>जेईएन और एईएन द्वारा सड़कों के गड्ढों/पैच का प्रारंभिक स्थिति निरीक्षण किया जाएगा।</li>
</ul>
<p><strong>पैच मरम्मत के लिए संबंधित अधिकारी अभियन्ता<br /></strong>उपखंड  या निर्धारित क्षेत्र के लिए 30 अगस्त तक दर अनुबंध करेंगे।पेच मरम्मत का कार्य एक सितंबर से शुरू किया जाएगा जो कि हर हाल में 25 अक्टूबर तक पूरा करना होगा।</p>
<p><strong>काम शुरू करने और पूरा करने के बाद की फोटोग्राफ़ी/ वीडियोग्राफ़ी करनी होगी<br /></strong>ठेकेदारों को काम शुरू करने से पहले और काम पूरा होने के बाद सड़क की डिजिटल फ़ोटो और वीडियोग्राफी करवानी होगी।ठेकेदार द्वारा पैचिंग से पहले पैच की मार्किंग और नंबरिंग करवाना अनिवार्य है। गारंटी अवधि की सड़कों का रख रखाव न करने वाले ठेकेदारों को एक अगस्त  से नोटिस जारी किए जा चुके हैं ,जिनका कार्य एक सितंबर से शुरू कर पाँच अक्टूबर तक पूरा करना है। इस दौरान मूल ठेकेदार द्वारा नोटिस का उचित जवाब नहीं दिया जाता है तो मूल अनुबंध की दर पर उक्त काम किसी अन्य एजेंसी से करवाया जाएगा।</p>
<p>गारंटी अवधि की सड़कों की मरम्मत उसी गुणवत्ता और सामग्री से की जानी है,जो निर्माण के दौरान उपयोग में लायी गई है।अधिशासी अभियन्ता कोल्ड्रिंक सामग्री से पेंच मरम्मत की अनुमति दे सकते हैं। इस कैंपेन के दौरान सड़क सुरक्षा कार्य जैसे किलोमीटर स्टोंस पर पेंटिंग,रोड साइनेज,स्पीड ब्रेकर मार्किंग आदि का कार्य भी किया जाएगा।</p>
<p>इसके अतिरिक्त विभाग के स्तर पर लेबर के माध्यम से सड़क किनारे पेड़ पौधों की साफ़-सफ़ाई,व्हाइटवाश ,पेड़ों पर पेंटिंग आदि कार्य करवाए जाएंगे। पैचेस कि गुणवत्ता का निरीक्षण संबंधित अधीक्षण अभियन्ता और अतिरिक्त मुख्य अभियंता द्वारा मौक़ा निरीक्षण के दौरान किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Aug 2024 18:25:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रदेश में मानसून मेहरबान, बारिश ने बनाया रिकॉर्ड</title>
                                    <description><![CDATA[मौसम विभाग ने राजस्थान के 5 जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/monsoon-friendly-rains-set-record-in-the-state/article-88775"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/rain2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में मानसून अभी भी पूरी तरह से सक्रिय है। जयपुर सहित कई जिलों में झमाझम बारिश हो रही है। जयपुर में सुबह से कहीं तेज तो कहीं रिमझिम बारिश हुई। बादल भी छाए हुए हैं। पिछले 24 घंटों में पश्चिमी राजस्थान में अनेक स्थानों पर और पूर्वी राजस्थान में अधिकांश स्थानों पर मेघगर्जन के साथ वर्षा दर्ज की गई है। जयपुर, उदयपुर, बांसवाडा और डूंगरपुर जिले में कहीं कहीं भारी वर्षा और बांसवाड़ा व  डूंगरपुर जिले में भारी से अति भारी वर्षा वर्षा दर्ज की गई है। पूर्वी राजस्थान में सर्वाधिक बारिश बागीदौरा (बांसवाडा ) में 202 एमएम व पश्चिमी राजस्थान के रतनगढ़(चूरु) में 26 एमएम बारिश दर्ज की गई है।</p>
<p><strong>बारिश ने बनाया रिकॉर्ड<br /></strong>राजस्थान में इस सीजन बारिश ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है। अगस्त के महीने में पिछले 13 साल में इतनी बारिश कभी नहीं हुई, जितनी बारिश इस सीजन में हुई है। इस सीजन में 1 अगस्त से 26 अगस्त तक 315 एमएम औसत बारिश हो चुकी है, जो साल 2011 से 2023 तक सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड है। इतनी बारिश अब तक किसी भी महीने में प्रदेश में दर्ज नहीं हुई। साल 2016 में अगस्त में 277.7 एमएम बरसात दर्ज हुई थी, जो पिछले 13 साल में सर्वाधिक बारिश किसी महीने की रही है।</p>
<p>मौसम विभाग ने आज (27 अगस्त) भी राजस्थान के 5 जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं, 21 जिलों में येलो अलर्ट है। मानसून एक्टविटी को लेकर मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर का अनुमान है कि 29 और 30 अगस्त को भारी बारिश के दौर में कमी आएगी। हालांकि, हल्की बारिश या बूंदाबांदी का दौर जारी रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Aug 2024 16:48:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>करौली में 7 इंच बारिश, बाढ़ के हालात, पूर्वी राजस्थान में मानसून जमकर मेहरबान</title>
                                    <description><![CDATA[पाली सहित कुछ शहरों में अभी बाढ़ के हालात से नहीं मिली राहत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/7-inch-rain-in-karauli-flood-situation/article-87423"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/rain.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में जयपुर, सीकर, कोटा, करौली, टोंक, दौसा समेत 11 जिलों में शनिवार को कहीं हल्की तो कहीं भारी बारिश हुई। करौली में सुबह 6 से 9 बजे तक तेज बरसात हुई। इस दौरान करीब सात इंच पानी बरसा। इसके चलते जहां करौली में बाढ़ के हालात बन गए हैं। कई कॉलोनियां पानी में डूब गई हैं। रास्ते जलमग्न हो गए हैं। टोंक शहर में भी दिनभर में तीन इंच से ज्यादा बरसात हुई। सीकर जिले के श्रीमाधोपुर शहर में पिछले छह दिनों से लगातार बारिश का दौर जारी है। शनिवार सुबह 9 बजे से तेज बारिश के चलते शहर के पुराने बस स्टैंड स्थित दुकानों में पानी घुस गया। इसके कारण दुकानदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। निचले इलाकों की गलियां दरिया बन गई। करौली के हिंडौन में पिछले तीन दिन से बारिश का दौर जारी है। पिछले 24 घंटे में क्षेत्र में 100 एमएम बारिश हो चुकी है। बारिश के कारण शहर के कई घरों में पानी घुस गया।<br /> करौली क्षेत्र में पांचना बांध के पांच गेट खोलकर 20 हजार क्यूसेक पानी की निकासी की जा रही है। पहले 4000 क्यूसेक पानी की निकासी की जा रही थी। तेजी से जलस्तर बढ़ने पर शनिवार दोपहर निकासी को बढ़ाकर 8000 क्यूसेक और तीन बजे बाद पांच गेट खोलकर 16 हजार क्यूसेक कर दिया। शाम 4 बजे से 20 हजार क्यूसेक पानी की निकासी की जा रही है। बांध में करीब 25 हजार क्यूसेक पानी की आवक हो रही है। रावतभाटा में भी रुक-रुक कर दिनभर बारिश हुई जिसके चलते बांधों में पानी की अच्छी आवक हुई। डीग जिले के जुरहरा थाना इलाके में बारिश के कारण एक मकान ढह गया। मलबे में दबने से मां-बेटी की मौत हो गई। <br />देर रात करीब एक बजे मकान भरभराकर गिर गया। मलबे में दबने से मां समसीदा और उसकी बेटी आनिया की मौत हो गई। वहीं कोटा में भी तेज बारिश के कारण सड़कों पर चारों ओर पानी भर गया। <br />जयपुर जिले चौमूं में तेज बरसात के बाद मालेश्वर धाम की पहाड़ी पर झरना बहने लगा। वहीं पाली में अभी भी बाढ़ के हालात बने हुए हैं और राहत व बचाव कार्य जारी है।<br />राजधानी में जारी रहा रिमझिम बारिश दौर<br />वहीं राजधानी जयपुर में सुबह 7 बजे कई इलाकों में बारिश का दौर शुरू हो गया। करीब 20 मिनट तक तेज बरसात होने से सड़कों पर पानी भर गया। इसके बाद रुक-रुक कर दिनभर बारिश का दौर चलने लगा जो कि देर रात तक बूंदाबांदी के रूप में जारी था। जयपुर में बीते 24 घंटों में 12 एमएम से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। जयपुर में अधिकतम तापमान 28.8 और न्यूनतम तापमान 24.6 डिग्री दर्ज किया गया। वहीं प्रदेश में सबसे अधिक तापमान गंगानगर में 38 डिग्री रिकॉर्ड किया गया।<br />फिलहाल जारी रहेगा बारिश का दौर<br />मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार उत्तर-पूर्वी राजस्थान के ऊपर बना परिसंचरण तंत्र अभी इसी क्षेत्र के ऊपर बना हुआ है और सतह से 5.8 किमी ऊंचाई तक विस्तृत है। मानसून ट्रफ लाइन बीकानेर व परिसंचरण तंत्र से होकर गुजर रही है। इसके असर से पूर्वी राजस्थान के अनेक भागों में मध्यम से तेज बारिश की गतिविधियां आगामी एक सप्ताह तक जारी रहने की प्रबल संभावना है। जयपुर, अजमेर, कोटा, उदयपुर व भरतपुर संभाग में मानसून सक्रिय रहने व कहीं-कहीं भारी बारिश की गतिविधियां आगामी 5-7 दिन जारी रहने की प्रबल संभावना है। पश्चिमी राजस्थान के बीकानेर व जोधपुर संभाग के कुछ भागों में आगामी 5-6 दिन मध्यम व कहीं-कहीं तेज बारिश होने की संभावना है। शेखावाटी क्षेत्र में भी कहीं-कहीं भारी बारिश होने की संभावना है।<br />बीसलपुर का जलस्तर 312 <br />आरएल मीटर के पार हुआ<br />बीसलपुर बांध में पानी की आवक लगातार जारी है। इसके चलते शनिवार को बांध का जलस्तर 312 आरएलमीटर को पार गया। वहीं रात तक बांध का जलस्तर बढ़कर 312.05 आरएलमीटर पर पहुंच गया है। त्रिवेणी 2.50 मीटर के उफान पर बह रही है। बांध की कुल भराव क्षमता 315.50 आरएलमीटर है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 Aug 2024 09:51:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रतापगढ़ में छह इंच से ज्यादा बारिश, जयपुर सहित कई जिलों में मानसून फिर सुस्त</title>
                                    <description><![CDATA[बीसलपुर बांध में पानी की आवक अब थम सी गई है। करीब 10 दिन से बांध में पानी की आवक नहीं हो रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/more-than-six-inches-of-rain-in-pratapgarh-monsoon-again/article-86245"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/rrain.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में मानसून की चाल एक बार फिर से कुछ धीमी हो गई है। इसके चलते उदयपुर सहित कुछ इलाकों में बारिश हुई, लेकिन जयपुर सहित अधिकांश स्थानों पर बारिश नहीं हुई और गर्मी के साथ उमस का असर फिर से बढ़ गया। वहीं मौसम विभाग की माने तो पांच से सात दिन मानसून सक्रिय रहेगा। वहीं अगस्त के पहले सप्ताह से मानसून की गतिविधियों में और तेजी आएगी। वहीं बीते 24 घंटों की बात करें तो प्रतापगढ़ व बांसवाड़ा जिले में कहीं-कहीं भारी वर्षा और प्रतापगढ़ जिले में अरनोद में अति भारी वर्षा दर्ज की गई। पूर्वी राजस्थान में सर्वाधिक बारिश अरनोद प्रतापगढ़ में 166 एमएम व पश्चिमी राजस्थान के पाली में 30 एमएम बारिश दर्ज की गई है। वहीं राजस्थान में 1 जून से 28 जुलाई तक औसत बरसात 200.4 एमएम होती है, जबकि इस सीजन में अब तक 201.9 एमएम बारिश हो चुकी है।</p>
<p><strong>अब आगे क्या</strong><br />मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया राजस्थान में आगामी 5-7 दिन अधिकांश भागों में मानसून सक्रिय रहने और बारिश की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। कोटा, उदयपुर, अजमेर, भरतपुर व जोधपुर संभाग के कुछ भागों में आगामी दो-तीन दिन मानसून सक्रिय रहने और कहीं-कहीं मध्यम से तेज बारिश होने की संभावना है। जयपुर व बीकानेर संभाग के कुछ भागों में आगामी दो-तीन दिन हल्के से मध्यम बारिश दर्ज होने की संभावना है। वहीं अगस्त के प्रथम सप्ताह में राज्य में फिर से मानसून गतिविधियों में बढ़ोतरी होने की संभावना है।</p>
<p><strong>कहां कितना रहा तापमान</strong><br />प्रदेश में सोमवार को सबसे अधिक तापमान गंगानगर में 41.2 डिग्री दर्ज किया गया। वहीं फलौदी में 41, बीकानेर 39.6, चूरू 38.5, जोधपुर 38.5, बाड़मेर 38.2, अजमेर 34 और कोटा में 34.1 डिग्री अधिकतम तापमान दर्ज किया गया। वहीं जयपुर में अधिकतम तापमान 35.1 और न्यूनतम तापमान 29.3 डिग्री दर्ज किया गया।</p>
<p><strong>बीसलपुर बांध में नहीं आया पानी</strong><br />बीसलपुर बांध में पानी की आवक अब थम सी गई है। करीब 10 दिन से बांध में पानी की आवक नहीं हो रही है। ऐसे में रोजाना बांध से एक से दो सेमी पानी कम हो रहा है। इसके चलते सोमवार शाम तक बांध का जलस्तर 310.16 आरएलमीटर दर्ज किया गया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jul 2024 09:29:44 +0530</pubDate>
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