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                <title>Mumbai attack - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Mumbai attack RSS Feed</description>
                
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                <title>तहव्वुर से दस घंटे पूछताछ : राणा ने मांगे पेन, नोटपैड और कुरान</title>
                                    <description><![CDATA[इसलिए उसे स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल के मुताबिक दूसरे आरोपियों को दिया जाने वाला खाना मिल रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/rana-inquired-for-ten-hours-from-tahwwur-asks-for-pen/article-110840"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/tahawwru-rana.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। मुंबई 26/11 आतंकी हमले के साजिशकर्ता तहव्वुर राणा से राष्ट्रीय जांच एजेंसी की टीम ने सोमवार को भी पूछताछ की। मुख्य जांच अधिकारी जया रॉय के नेतृत्व वाली टीम के अधिकारियों ने लगभग 10 घंटे उससे पूछताछ की। सूत्रों का कहना है कि हालांकि पहले राणा सहयोग नहीं कर रहा था लेकिन अब उसके रुख में बदलाव आया है। अब वह पूछताछ के दौरान राणा सहयोग कर रहा है।</p>
<p>हाई सिक्योरिटी सेल में रखा गया : मीडिया में चल रही खबरों के अनुसार, राणा ने पिछले 4 दिनों में अधिकारियों से पेन, नोटपैड और कुरान। सूत्रों के अनुसार उसे ये तीनों चीजें दे दी गई हैं। राणा को सीजीओ कॉम्प्लेक्स में आतंकवाद विरोधी एजेंसी के हेडक्वॉर्टर के अंदर एक हाई सिक्योरिटी सेल में रखा गया है। </p>
<p>दिया जा रहा साधारण खाना : हालांकि उसने अभी तक किसी खास तरह के खाने की मांग नहीं की है। इसलिए उसे स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल के मुताबिक दूसरे आरोपियों को दिया जाने वाला खाना मिल रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Apr 2025 12:51:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>26/11 मुंबई हमलों से जुड़ा तहव्वुर राणा : भारत-अमेरिका प्रत्यर्पण संधि के तहत भारत सरकार कुछ सख्त नियमों और शर्तों से बंधी हुई है</title>
                                    <description><![CDATA[यह नियम राणा के अधिकारों की रक्षा करता है और भारत को अपनी कार्रवाई सीमित रखने के लिए मजबूर करता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/2611-tahwwur-rana-associated-with-mumbai-attacks-is-tied-to/article-110366"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer-(4)16.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। भारत में राणा के खिलाफ केवल उस मामले में मुकदमा चलाया जा सकता है जो उसने प्रत्यर्पण के दौरान अमेरिकी कोर्ट के सामने लिखकर दिया है। बता दें कि, अमेरिका से भारत लाए जाने के बाद, 1997 के भारत-अमेरिका प्रत्यर्पण संधि के तहत भारत सरकार कुछ सख्त नियमों और शर्तों से बंधी हुई है। यह संधि न केवल दोनों देशों के बीच कानूनी सहयोग का प्रतीक है, बल्कि यह भी तय करती है कि जिस भी व्यक्ति या अभियोगी का प्रत्यर्पण किया जा रहा हो, उसके अधिकारों का सम्मान हो। अब इस मामले में देखना जरूरी है कि इस प्रत्यर्पण के बाद अब भारत के सामने क्या मुश्किलें हैं और क्या जिम्मेदारियां हैं। पहले ये जानते हैं कि तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण में क्या- क्या शर्तें हैं?</p>
<p><strong>जिस अपराध के लिए प्रत्यर्पण, सिर्फ उसी पर चलेगा मुकदमा</strong><br />संधि का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है विशेषता का नियम। इसके तहत तहव्वुर राणा को भारत में केवल उसी अपराध के लिए हिरासत में लिया जा सकता है, मुकदमा चलाया जा सकता है या दंडित किया जा सकता है, जिसके लिए उनका प्रत्यर्पण हुआ है। अगर भारत सरकार किसी अन्य अपराध के लिए उन पर कार्रवाई करना चाहती है, तो यह संभव नहीं होगा, सिवाय इसके कि वह अपराध प्रत्यर्पण के मूल तथ्यों से जुड़ा हो, प्रत्यर्पण के बाद हुआ हो, या अमेरिका से विशेष छूट मिली हो। यह नियम राणा के अधिकारों की रक्षा करता है और भारत को अपनी कार्रवाई सीमित रखने के लिए मजबूर करता है।</p>
<p><strong>भारत में निष्पक्ष सुनवाई का भी अधिकार</strong><br />प्रत्यर्पण के बाद राणा को भारत में निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार मिलेगा। यह सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि भारतीय कानून और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का अनिवार्य हिस्सा भी है। भारत को यह तय करना होगा कि राणा के साथ कोई पक्षपात न हो और उनकी कानूनी प्रक्रिया पारदर्शी रहे। यह नियम भारत की न्यायिक व्यवस्था पर भी एक बड़ी जिम्मेदारी डालता है। प्रत्यर्पण की प्रक्रिया सस्ती नहीं होती. संधि के तहत, अनुरोध करने वाला देश, यानी भारत आम तौर पर इस प्रक्रिया का खर्च उठाता है. हालांकि, दोनों देशों के बीच विशेष वित्तीय समझौते भी हो सकते हैं। राणा के मामले में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह खर्च कितना बड़ा होगा और इसका बोझ कैसे संभाला जाएगा। भारत को अपने ही कानूनों का पालन करना होगा, जिसमें 1962 का प्रत्यर्पण अधिनियम प्रमुख है। यह अधिनियम प्रत्यर्पित व्यक्तियों के साथ व्यवहार करने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है। किसी भी तरह की लापरवाही या नियमों से हटने की गुंजाइश नहीं है, वरना भारत की अंतरराष्ट्रीय साख पर सवाल उठ सकते हैं।</p>
<p><strong>किसी अन्य देश को नहीं सौंप सकते</strong><br />क्या भारत तहव्वुर राणा को किसी तीसरे देश को सौंप सकता है? जवाब है, नहीं, जब तक कि अमेरिका इसकी स्पष्ट सहमति न दे। संधि के अनुसार, प्रत्यर्पण से पहले किए गए किसी भी अपराध के लिए राणा को तीसरे देश को नहीं भेजा जा सकता। यह शर्त भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए भी बाध्य करती है</p>
<p><strong>क्या-क्या उठाए जा सकते हैं कदम</strong><br />तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण न केवल एक कानूनी मसला है, बल्कि भारत-अमेरिका संबंधों की मजबूती का भी प्रमाण है, लेकिन इसके साथ ही यह भारत के लिए एक चुनौती भी है। चुनौती इसलिए, क्योंकि कानूनी दायित्वों का पालन करते हुए भारत को अपनी न्यायिक प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष रखना होगा। यह देखना बाकी है कि भारत इन शर्तों को कैसे लागू करता है और राणा के मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं। यह मामला न सिर्फ कानून के जानकारों के लिए, बल्कि आम जनता के लिए भी उत्सुकता का विषय बना हुआ है।</p>
<p><strong>टाइम लाइन</strong><br />26/11 मुंबई हमलों से जुड़े तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण का मामला लंबी कानूनी जंग के बाद आखिरकार भारत के पक्ष में हुआ है।  <br />अगस्त 2024: अमेरिका की नौवीं सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने तहव्वुर राणा के भारत को प्रत्यर्पण के आदेश को बरकरार रखा। <br />नवंबर 2024: राणा ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में रेट ऑफ सर्टिओरारी (समीक्षा याचिका) दायर की, जिसमें अपीलीय अदालत के फैसले की समीक्षा की मांग की गई। <br />जनवरी 2025: यूएस सुप्रीम कोर्ट ने राणा की याचिका को खारिज कर दिया। भारत के लिए प्रत्यर्पण की राह को और आसान बना दिया।<br />मार्च 2025: राणा ने प्रत्यर्पण पर रोक लगाने के लिए एक आपातकालीन याचिका दायर की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे भी ठुकरा दिया। <br />7 अप्रैल 2025: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने तहव्वुर राणा की अंतिम अपील को खारिज कर दिया। इसके साथ ही, भारत को राणा को प्रत्यर्पित करने की सभी कानूनी बाधाएं खत्म हो गईं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Apr 2025 09:49:19 +0530</pubDate>
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                <title>26/11 मुंबई हमले पर भारत ने नहीं दिया जवाब, अब नहीं करेंगे बर्दाश्त: जयशंकर</title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्री ने रविवार को मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अगर भविष्य में ऐसा कोई हमला होता है, तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और कड़ी प्रतिक्रिया दी जाएगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/2611-india-did-not-respond-to-mumbai-attack-jaishankar-will/article-94033"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/s.-jaishankar.jpg" alt=""></a><br /><p>मुम्बई। मुंबई आतंकी हमले को लेकर भारत ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी। यह बात विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कही है। विदेश मंत्री ने रविवार को मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अगर भविष्य में ऐसा कोई हमला होता है, तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और कड़ी प्रतिक्रिया दी जाएगी। जयशंकर ने कहा कि जब हम जीरो टॉलरेंस की बात करते हैं, तो इसका मतलब है कि जवाब जरूर दिया जाएगा।</p>
<p>विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि मुंबई काउंटर-टेररिज्म का एक अहम प्रतीक है, न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए। उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य रहते हुए काउंटर-टेररिज्म कमेटी की अध्यक्षता भी की थी। उन्होंने कहा कि कमेटी की बैठक उसी होटल में आयोजित की थी जिसे हमलों के दौरान निशाना बनाया गया था।</p>
<p><strong>जीरो टॉलरेंस का क्या मतलब? </strong><br />विदेश मंत्री ने कहा कि जब हम जीरो टॉलरेंस की बात करते हैं तो इसका मतलब साफ है कि अगर कोई कुछ करता है तो उसका जवाब जरूर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ये भारत इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। ये वो है जो कि बदला है।</p>
<p><strong>आतंक के खिलाफ भारत निभा रहा लीडरशिप</strong><br />आगे बात करते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत दुनिया में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में नेतृत्व की भूमिका निभा रहा है। उन्होंने टिप्पणी की कि यह अब अस्वीकार्य है कि कोई दिन में बिजनेस करे और रात में आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त हो।</p>
<p><strong>एलएसी पर जल्द शुरू होगी पेट्रोलिंग!</strong><br />विदेश मंत्री जयशंकर ने यह भी बताया कि भारत और चीन जल्द ही लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर पेट्रोलिंग शुरू करेंगे। उन्होंने बताया कि यह अप्रैल 2020 से पहले जैसा होगा और उम्मीद है कि डेमचोक और डेपसांग जैसे क्षेत्रों में गश्त को बहाल किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Oct 2024 12:50:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई हमले के आरोपी राणा के प्रत्यार्पण को मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[न्यायाधीश ने कहा कि अदालत का निष्कर्ष है कि राणा उन अपराधों के लिए प्रत्यर्पण योग्य है जिसमें उसके प्रत्यर्पण का अनुरोध किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/approval-for-extradition-of-mumbai-attack-accused-rana/article-45934"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/a-41.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिका की एक अदालत ने मुंबई में 2008 के आतंकवादी हमले के आरोपी शिकागो के व्यवसायी तहव्वुर राणा की प्रत्यार्पण को मंजूरी दे दी है। फिलहाल राणा लॉस एंजेलिस के फेडरल जेल में बंद है। </p>
<p>यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट आफ कैलिफोर्निया की मजिस्ट्रेट जज जैकलीन चूलजियान ने 48 पेज के आदेश में कहा था कि न्यायालय ने अनुरोध के समर्थन और विरोध में प्रस्तुत सभी दस्तावेजों की समीक्षा की है और उन पर एवं सुनवाई में प्रस्तुत तर्कों पर विचार किया है। न्यायाधीश ने कहा कि अदालत का निष्कर्ष है कि राणा उन अपराधों के लिए प्रत्यर्पण योग्य है जिसमें उसके प्रत्यर्पण का अनुरोध किया गया है।</p>
<p><strong>आतंकवादी समूह का किया था समर्थन </strong><br />राणा को 2011 को मुंबई में हुए एक इस्लामी आतंकवादी समूह का समर्थन करने का दोषी ठहराया गया था, जिसमें करीब 166 लोग मारे गए थे। लेकिन उसे हमले की साजिश में मदद करने के लगे गंभीर आरोपों से मुक्त कर दिया गया। जिसके बाद, व्यवसायी को 2020 में भारत द्वारा प्रत्यर्पण के अनुरोध के बाद फिर से गिरफ्तार किया गया था। </p>
<p><strong>भारत को पंद्रह साल बाद मिली सफलता</strong><br />भारतीय अधिकारियों ने पाकिस्तानी मूल के कनाडाई निवासी राणा पर अपने बचपन के दोस्त डेविड कोलमैन हेडली के साथ पाकिस्तानी आतंकवादी समूह लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) की सहायता करने की साजिश रचने का आरोप लगाया था। पंद्रह साल बाद भारत को एक महत्वपूर्ण जीत मिली है। कैलिफोर्निया की अदालत ने राणा के भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी है। यह फैसला ऐसे मौके पर आया है, जब ठीक एक महीने बाद राष्ट्रपति जो बाइडन के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी पहली राजकीय यात्रा पर अमेरिका जाने वाले हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 May 2023 10:12:12 +0530</pubDate>
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