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                <title>caste census - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क का केंद्र सरकार पर हमला, बोलें-राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने पर ही देश की समस्याओं का होगा समाधान</title>
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                        <![CDATA[तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क ने विकाराबाद में आयोजित कांग्रेस प्रशिक्षण शिविर में कहा कि देश की सामाजिक और आर्थिक समस्याओं का समाधान राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने पर ही संभव है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/bhatti-vikramarks-attack-on-the-central-government-says-that-the/article-144316"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/te.png" alt=""></a><br /><p>विकाराबाद। तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क मल्लू ने सोमवार को कहा कि देश की गहन समस्याओं का समाधान तभी होगा जब राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनेंगे। भट्टी ने यहाँ डीसीसी अध्यक्षों के प्रशिक्षण शिविर में जातिगत मुद्दे और आरक्षण-जातिगत भेदभाव को खत्म करने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं को कैसे लडऩा चाहिए विषय पर बोलते हुए कहा कि जहाँ कहीं भी छुआछूत या जातिगत भेदभाव की घटनाएँ होती हैं, राहुल गांधी व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करते हैं। उन्होंने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के जिला कांग्रेस समिति (डीसीसी) के अध्यक्षों से दोनों राज्यों में अधिकतम लोकसभा सीटें सुरक्षित करने के लिए काम करने का आह्वान किया।</p>
<p>रोहित वेमुला की मृत्यु का संदर्भ देते हुए भट्टी ने कहा कि राहुल गांधी ने परिसर का दौरा किया था, छात्रों के साथ बातचीत की और आंदोलन का समर्थन किया, साथ ही यह सुनिश्चित किया कि इस मुद्दे को राजनीतिक बनाने के बजाय एक सामाजिक सरोकार के रूप में देखा जाए। उन्होंने बताया कि कर्नाटक और तेलंगाना में रोहित वेमुला के नाम पर कानून बनाने के प्रयास चल रहे हैं।</p>
<p>उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि राहुल गांधी ने चुनावों से पहले संसाधनों और धन के समान वितरण का वादा किया था और कांग्रेस द्वारा गठित सरकारें उसी दिशा में कल्याण और विकास कार्यक्रम लागू कर रही हैं। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद पहली बार, 50 दिनों के भीतर जाति जनगणना पूरी की गई और विधानसभा में पेश की गई, जहाँ इसे सर्वसम्मति से मंजूरी मिली।</p>
<p>केंद्र सरकार पर कांग्रेस पार्टी को खत्म करने का प्रयास करने का आरोप लगाते हुए भट्टी ने कहा कि जिस पार्टी ने स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व किया और आर्थिक, सामाजिक तथा राजनीतिक समानता प्राप्त करने के उद्देश्य से कानून बनाए, उसे अब कांग्रेस मुक्त भारत के नारे के तहत निशाना बनाया जा रहा है। भट्टी ने केंद्र सरकार पर संविधान को कमजोर करने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, एससी/एसटी सब-प्लान, भूमि सुधार और बैंकों का राष्ट्रीयकरण जैसे उपाय सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े समुदायों के आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए कांग्रेस सरकारों के तहत लागू किए गए थे।</p>
<p>बैठक में प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) अध्यक्ष महेश कुमार गौड़, डॉ. वंशी चंदर रेड्डी, अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (एआईसीसी) के नेता विश्वनाथन, सावंत, सचिन राव और अन्य पार्टी पदाधिकारी शामिल हुए।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 18:50:35 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>भाजपा प्रदेश प्रवक्ता हरिश्चन्द्र श्रीवास्तव ने साधा निशाना, बोलें-जनगणना पर अखिलेश का बयान राजनीतिक हताशा का परिचायक</title>
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                        <![CDATA[जनगणना में जाति कॉलम पर अखिलेश यादव के बयान को भाजपा ने भ्रामक बताया। प्रवक्ता हरिश्चन्द्र श्रीवास्तव ने कहा, सरकारी अधिसूचना में जाति विवरण स्पष्ट है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/bjp-state-spokesperson-harishchandra-srivastava-targeted-akhileshs-statement-on-census/article-140791"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(9)2.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा जनगणना में जाति कॉलम को लेकर दिए गए बयान पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता हरिश्चन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि अखिलेश यादव का यह बयान बौद्धिक खोखलेपन के साथ-साथ राजनीतिक हताशा और निराशा को दर्शाता है।</p>
<p>भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि अखिलेश यादव एक तरफ खुद को अनुभवी सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री बताते हैं, वहीं दूसरी ओर बिना तथ्य जाने जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा केंद्रीय जनगणना अधिनियम 1948 के अंतर्गत 22 जनवरी 2026 को जारी राजाज्ञा के बिंदु संख्या 12 में स्पष्ट रूप से अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग सहित अन्य वर्गों का विवरण दर्ज किए जाने का उल्लेख है।</p>
<p>उन्होने कहा कि ऐसे में जनगणना में जाति का कॉलम नहीं होने की बात कहना पूरी तरह भ्रामक है। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव अपने ही सांसदों, विधायकों और कार्यकर्ताओं के बीच मजाक का विषय बनते जा रहे हैं, क्योंकि उनके बयान सरकारी दस्तावेजों से मेल नहीं खाते।</p>
<p>श्रीवास्तव ने कहा कि सपा मुखिया जनता को गुमराह करने के बजाय पहले जारी राजाज्ञा को ध्यान से पढ़ें और अपना भ्रम दूर करें। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार सामाजिक न्याय के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और जनगणना प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी।</p>
<p>गौरतलब है कि एक दिन पूर्व अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट करते हुए अखिलेश यादव ने कहा था कि Þजनगणना की अधिसूचना में जाति का कॉलम तक नहीं है, फिर गिनेंगे क्या। जातिगत जनगणना भी भाजपा का जुमला है। भाजपा का सीधा फार्मूला है न गिनती होगी, न अनुपातिक आरक्षण-अधिकार देने का जनसांख्यिकीय आधार बनेगा। जातिगत जनगणना न करना पीडीए समाज के खिलाफ भाजपा की साजिश है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 25 Jan 2026 16:25:20 +0530</pubDate>
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                <title>राहुल गांधी का तेलंगाना दौरा, ओबीसी कांग्रेस की बैठक में होंगे शामिल, इन मुद्दों पर चर्चा संभव</title>
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                        <![CDATA[राहुल गांधी जनवरी में हैदराबाद में ओबीसी कांग्रेस परिषद को संबोधित करेंगे। इससे पहले 27 दिसंबर को दिल्ली में कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक होगी, जिसमें मनरेगा और राजनीतिक रणनीति पर चर्चा की जाएगी।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/rahul-gandhi-will-go-to-telangana-on-27th-december-will/article-137223"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/rahul-gandhi-(2)6.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी जनवरी के आखिरी सप्ताह में प्रस्तावित ओबीसी कांग्रेस की राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की बैठक में शामिल होने हैदराबाद जाएंगे। राहुल गांधी इस बैठक को संबोधित भी करेंगे। पार्टी सूत्रों ने बताया कि 27 दिसंबर को दिल्ली में पार्टी ने कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक बुलाई है। कार्यसमिति की बैठक में कांग्रेस मौजूदा राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा करेगी। इसमें मनरेगा समेत वोट चोरी पर सरकार को घेरने की रणनीति बनायी जाएगी। ओबीसी कांग्रेस ने भी अपनी राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की  बैठक उसी दिन  कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक के तुरंत बाद बुलाई है। </p>
<p>सलाहकार परिषद में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तथा कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे । ओबीसी सलाहकार परिषद की बैठक के एजेंडे में ओबीसी कांग्रेस के लिए एक व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करना और हैदराबाद में होने वाली आगामी राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की बैठक के लिए विशिष्ट कार्यक्रम को अंतिम रूप देना शामिल है। इन चर्चाओं मेंं देशभर में ओबीसी समुदाय के लिए पार्टी की पहुंच और संगठनात्मक ढांचे को मजबूत प्रदान करना शामिल है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Dec 2025 19:15:47 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>जातिगत गणना पर सरकार के जवाब को सार्वजनिक करते हुए राहुल गांधी ने कहा, सरकार के पास ठोस रूपरेखा की कमी </title>
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                        <![CDATA[कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संसद में पूछे गए सवालों का हवाला देते हुए जाति जनगणना पर मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि सरकार के पास न स्पष्ट योजना है, न समयसीमा, न ही सफल राज्यों से सीखने की इच्छा। राहुल ने 2025-26 में जनगणना के लिए मात्र 575 करोड़ रुपये आवंटित किए जाने पर भी सवाल उठाते हुए इसे बहुजनों के साथ “खुला विश्वासघात” बताया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/making-public-the-governments-reply-on-caste-census-rahul-gandhi/article-134542"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/rahul-gandhi--in-parliament.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और संसद में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने एक बार सत्तारूढ़़ केंद्र की भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए जाति जनगणना के सवाल पर सरकार के जवाब को सार्वजनिक कर दिया। राहुल गांधी ने सरकार के जवाब को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर करते हुए लिखा कि, संसद में मैंने सरकार से जाति जनगणना पर कई सवाल पूछे और उनका जवाब चौंकाने वाला है। न ठोस रूपरेखा, न समयबद्ध योजना, न संसद में चर्चा, और न ही जनता से संवाद। इसके आगे राहुल गांधी ने लिखा कि, दूसरे राज्यों की सफल जाति जनगणनाओं की रणनीति से सीखने की कोई इच्छा भी नहीं। मोदी सरकार की यह जाति जनगणना देश के बहुजनों के साथ खुला विश्वासघात है।</p>
<p>इसके आगे राहुल गांधी ने कहा कि, हेडलाइन तो दी गई, लेकिन इसमें डेडलाइन नहीं है। हम सब जानते हैं कि ऐसे काम में नरेंद्र मोदी कितने माहिर हैं। इसी को देखते हुए राहुल गांधी जी ने कहा है कि सरकार जातिगत जनगणना को लेकर पूरा रोडमैप सामने रखे। हम छह साल से जनगणना का इंतज़ार कर रहे हैं और इससे पहले तो जाति शब्द का कोई जिक्र नहीं था, लेकिन कल अचानक जातिगत जनगणना की बात कह दी गई।</p>
<p>जबकि, 2025-26 के बजट में सेन्सस कमिश्नर के ऑफिस-जिसपर जनगणना करने की जिम्मेदारी होती है- उसे सिर्फ 575 करोड़ का बजट दिया गया है। इससे पहले ख़ुद दिसंबर 2019 को नरेंद्र मोदी देश को बता चुके हैं कि जनगणना कराने में 8,254 करोड़ का खर्च आएगा। ऐसे में सवाल है कि सरकार 575 करोड़ रुपए में कौन सी जनगणना कराएगी?</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Wed, 03 Dec 2025 15:00:58 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>जाति गणना कांग्रेस का राजनीतिक पाखंड : जितनी आबादी-उतना हक, राहुल गांधी का ये झूठा नारा, भूपेन्द्र यादव ने कहा- कांग्रेस के लिए सामाजिक न्याय दिखावा है, प्रतिबद्धता नहीं</title>
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                        <![CDATA[भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव ने यहां पार्टी के केन्द्रीय कार्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इस देश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समाज के साथ कांग्रेस ने हमेशा धोखा किया है]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/caste-census-congresss-political-hypocrisy-this-false-slogan-of-rahul/article-117588"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/news37.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कर्नाटक में कांग्रेस द्वारा ‘सामाजिक न्याय’ के नाम पर दोबारा जातीय सर्वेक्षण कराए जाने पर सोमवार को सवाल उठाते हुए कहा कि दोबारा सर्वेक्षण की दलील पिछड़े वर्ग को झांसा देने का कांग्रेस का राजनीतिक हथकंडा मात्र है तथा उसका ‘सामाजिक न्याय’ का नारा दिखावा एवं ‘तुष्टीकरण’ से प्रेरित है।</p>
<p>भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव ने यहां पार्टी के केन्द्रीय कार्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इस देश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समाज के साथ कांग्रेस ने हमेशा धोखा किया है। अगर कांग्रेस के मन में कभी सच्चाई रही होती, तो काका कालेलकर आयोग की रिपोर्ट आने के बाद कांग्रेस ने कोई दूसरा आयोग ही नहीं बनाया। देश से जब कांग्रेस की सत्ता गई तब मंडल आयोग को बनाया। जनता पार्टी के जाने के बाद भी मंडल आयोग की रिपोर्ट लागू नहीं हुई। जब देश से दोबारा कांग्रेस की सत्ता गई, तब मंडल आयोग लागू हुआ। मंडल आयोग वैधानिकता को उच्चतम न्यायालय ने जब स्वीकार किया, तो ओबीसी आयोग को दंतविहीन बनाने का काम कांग्रेस ने किया। </p>
<p>वर्ष 2014 में जब देश से कांग्रेस की सत्ता गई और नरेन्द्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने तब ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा मिला।<br />यादव ने कहा कि उनके विश्वासघात का एक और उदाहरण कर्नाटक सर्वेक्षण है। उनके लिए, सामाजिक न्याय केवल दिखावा है, और तुष्टिकरण उनकी नीति है। भारत की अर्थव्यवस्था के कमज़ोर होने का कारण मुख्य रूप से कांग्रेस द्वारा करदाताओं के पैसे का भ्रष्टाचार है। करीब 165 करोड़ रुपए का सर्वेक्षण एक दशक से भी ज़्यादा समय से चल रहा है, तो इसका जवाबदेह कौन है?”</p>
<p>उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार का नया सर्वेक्षण डिजिटल समावेशन बनाम डिजिटल असमानता को उजागर करेगा। उप मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार का बयान अलग है, क्योंकि वे ऑनलाइन पंजीकरण की मांग कर रहे हैं और इसके कार्यान्वयन पर सवाल उठा रहे हैं। कई लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि सीमित डिजिटल पहुँच वाले समुदायों के लिए ऑनलाइन नामांकन की सटीकता कैसे सुनिश्चित हो सकती है।</p>
<p>यादव ने कहा कि कर्नाटक में एक बार फिर कांग्रेस के धोखे का उदाहरण देखने को मिला। वो दिखाता है कि कांग्रेस के लिए सामाजिक न्याय दिखावा है, प्रतिबद्धता नहीं है। ओबीसी समाज को झांसे में लाना कांग्रेस की नीति है, न्याय देना उनका काम नहीं है। 2014 में भारत की अर्थव्यवस्था बेहद नाज़ुक हो जाने का सबसे बड़ा कारण था कि करदाताओं के पैसों के साथ कांग्रेस ने भ्रष्टाचार और उनके विश्वास को खोया।</p>
<p>केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि “मैं पूछना चाहता हूं कि कर्नाटक सरकार ने जाति जनगणना पर 165 करोड़ रुपए खर्च किए हैं, फिर भी कई गलतियां पाई गईं, इसलिए वे इसे दोबारा करवा रहे हैं। सरकारी धन के दुरुपयोग के लिए कौन जिम्मेदार है? मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि यह राज्य सरकार का फैसला नहीं बल्कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का आदेश था। मेरा मानना है कि उनके लिए ओबीसी महज वोट बैंक है।”</p>
<p>उन्होंने कहा कि “कर्नाटक में कांग्रेस का पुन: सर्वेक्षण कराना, एक राजनीतिक पाखंड है। जो कांग्रेस, समाज के कुछ लोगों को भरमाने के लिए और कुछ को तुष्टिकरण की राजनीति में लाने के लिए कर रही है। जितनी आबादी-उतना हक, राहुल गांधी का ये झूठा नारा है। हक तो सिर्फ एक परिवार का है।”</p>
<p>यादव ने कहा कि कांग्रेस कर्नाटक में ये काम खुद नहीं कर रही है बल्कि संविधानेत्तर शक्तियों के इशारे पर कर रही है। कांग्रेस राजनीतिक आधार पर समाज का बंटवारा और धन का दुरुपयोग करना चाहती है। कांग्रेस के लिए जातिगत जनगणना भी केवल राजनीतिक नारा भर है जबकि हमारे लिए (भाजपा) के लिए यह हमारी प्रतिबद्धता है। हमने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षण दिया तो इसकी पूरी तैयारी की और इसे सभी वर्गों को तैयार करके क्रियान्वित किया। लेकिन कांग्रेस पार्टी अगले सौ साल तक भी परिवार की गुलामी से बाहर नहीं निकल पाएगी।</p>
<p>पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की राजनीति में ओबीसी समाज के स्थान को लेकर एक सवाल के जवाब में यादव ने कहा कि ममता बनर्जी की सरकार तुष्टीकरण में लगी हुई है। उसने केन्द्र सरकार की ऐसी कई योजनाओं को पश्चिम बंगाल में लागू नहीं होने दिया है जिससे ओबीसी या आदिवासी समुदाय के अंतिम व्यक्ति का भला होता। ममता सरकार भी ‘तुष्टीकरण की राजनीति’ में सबसे आगे है।</p>
<p>बिहार में राष्ट्रीय जनता दल के नेता लालू प्रसाद यादव द्वारा डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर को उनके पैरों में रखे जाने की घटना पर सवाल पूछे जाने पर कहा कि बिहार की जनता लालू राज नहीं भूली है। दलितों एवं अति पिछड़ों पर सबसे ज्यादा अत्याचार उन्हीं के राज में हुआ है। डॉ. अंबेडकर की तस्वीर को लालू प्रसाद के पैरों में रखा गया, इसे देख कर हमारा दिल भी दुखा है। उन्हें माफी मांगनी चाहिए।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 16 Jun 2025 18:01:42 +0530</pubDate>
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                <title>जाति जनगणना : सरकार का एक महत्वपूर्ण कदम </title>
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                        <![CDATA[आगामी जनगणना में जाति विवरण शामिल करने का सरकार का निर्णय एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/caste-census-an-important-step-of-the-government/article-113979"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/961.png" alt=""></a><br /><p>आगामी जनगणना में जाति विवरण शामिल करने का सरकार का निर्णय एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है, क्योंकि 1931 के बाद से व्यापक जाति आधारित आंकड़े एकत्र नहीं किया गया है। समर्थकों का तर्क है कि सामाजिक न्याय कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करने और समान संसाधन वितरण सुनिश्चित करने के लिए अद्यतन सूचना आवश्यक है। हालांकि, विरोधियों का तर्क है कि इस तरह की जनगणना जाति चेतना को बढ़ा सकती है और सामाजिक विभाजन को गहरा कर सकती है जाति व्यवस्था, एक गहरी सामाजिक व्यवस्था है, जो ऐतिहासिक रूप से व्यक्तियों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति और अवसरों तक पहुंच को निर्धारित करती है।</p>
<p>जाति भारतीय समाज के कई पहलुओं को आकार देने के लिए एक पहचान बनी हुई है। समाजशास्त्रियों ने जाति व्यवस्था की कई प्रमुख विशेषताओं की पहचान की है। उनमें पारंपरिक पदानुक्रमिक संरचना, अंतर्जातीय विवाह, अंतरजातीय विवाह का प्रतिरोध, सामाजिक संपर्क पर प्रतिबंध, पारंपरिक व्यावसायिक विशेषज्ञता, जाति पंचायतें, शारीरिक और सामाजिक अलगाव और भेदभाव, सीमित सामाजिक और व्यावसायिक गतिशीलता शामिल हैं। स्वतंत्रता के बाद, जाति कारक ने चुनावी राजनीति, सार्वजनिक वस्तुओं तक पहुंच और प्रतिनिधित्व को प्रभावित किया है।</p>
<p> राजनीतिक लाभ के लिए जातिगत पहचान को स्पष्ट रूप से लामबंद किया गया है। सदियों से चले आ रहे प्रणालीगत भेदभाव के जवाब में सरकार ने हाशिए पर पड़े समुदायों के उत्थान के लिए सकारात्मक नीतियां, विशेष रूप से शिक्षा और रोजगार में आरक्षण लागू किया। हालांकि इन उपायों का उद्देश्य सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना है, लेकिन योग्यता और सामाजिक सामंजस्य पर उनके प्रभाव को लेकर बहस जारी है। व्यापक जाति जनगणना कराने के हाल के फैसले ने इन चर्चाओं को और तेज कर दिया है, जिससे समानता और उत्कृष्टता के बीच संतुलन की फिर से जांच करने की जरूरत महसूस हो रही है। ऐतिहासिक संदर्भ में, स्वतंत्रता के बाद भारत ने अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों द्वारा सामना किए गए ऐतिहासिक अन्याय को दूर करने की आवश्यकता को पहचाना।</p>
<p> संविधान ने उनके पर्याप्त प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा और सार्वजनिक रोजगार में आरक्षण की सुविधा प्रदान की। 1980 में मंडल आयोग ने 1931 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर 27 प्रतिशत आरक्षण की सिफारिश करते हुए इन लाभों को अन्य पिछड़ा वर्ग तक बढ़ा दिया। 2019 में, सामान्य वर्ग में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10 प्रतिशतआरक्षण लागू किया गया, जिससे कुल आरक्षण पहले से निर्धारित 50 प्रतिशत की सीमा से अधिक हो गया। योग्यता बनाम सामाजिक न्याय एक निरंतर बहस का विषय रहा है। आरक्षण नीति के समर्थकों ने तर्क दिया है कि आरक्षण सदियों से चले आ रहे उत्पीड़न को ठीक करने और हाशिए पर पड़े समुदायों को उन अवसरों तक पहुंच प्रदान करने के साधन के रूप में काम करता है, जो पहले उन्हें नहीं दिए गए थे। सकारात्मक कार्रवाई विविधता और समावेश को बढ़ावा देती है और शैक्षिक संस्थानों और कार्यस्थलों में अधिक विविध वातावरण की सुविधा प्रदान करती है, जिससे अनुभव और दृष्टिकोण समृद्ध होते हैं। इसके विपरीत, आलोचकों का तर्क है कि आरक्षण में योग्यता को खत्म करने की क्षमता है। यह योग्यता-आधारित चयन से समझौता कर सकता है, जिससे अकुशलता और कम मानक हो सकते हैं। वे यह भी चेतावनी देते हैं कि आरक्षण जातिगत पहचान को कायम रख सकता है। </p>
<p>जाति श्रेणियों को संस्थागत बनाकरए आरक्षण अनजाने में जाति विभाजन को खत्म करने के बजाय उन्हें मजबूत कर सकता है। इसके अलावा, आलोचकों को क्रीमी लेयर की चिंता है। यह तर्क दिया गया है कि आरक्षित श्रेणियों के भीतर, लाभ अक्सर अधिक संपन्न लोगों को मिलते हैं, जबकि सबसे वंचित लोग अभी भी हाशिए पर हैं। आरक्षण के समर्थकों का तर्क है कि आरक्षण कोई दान नहीं है। यह प्रतिनिधित्व और न्याय के लिए एक संवैधानिक साधन है, न कि कल्याणकारी अनुदान और यह सदियों से चली आ रही संरचनात्मक बहिष्कार की समस्या को संबोधित करता है। यह जाहिर है कि उच्च जातियां अभी भी शीर्ष सरकारी पदों, कॉर्पोरेट नेतृत्व और शिक्षा जगत पर हावी हैं। वे योग्यता के तर्क को त्रुटिपूर्ण मानते हैं। उनके अनुसार, योग्यता की धारणा जाति-तटस्थ है, उनका तर्क है कि उच्च जातियों को पीढ़ीगत विशेषाधिकार, बेहतर स्कूली शिक्षा, धन और सामाजिक पूंजी का लाभ मिलता है। उनके विचार में, योग्यता सामाजिक रूप से निर्मित होती है और लाभ जाति की तरह ही विरासत में मिलता है। </p>
<p>योग्यता की तुलना में सामाजिक न्याय, समानता और स्वतंत्रता किसी राष्ट्र के लिए अधिक महत्वपूर्ण लक्ष्य हैं। औपनिवेशिक शासक निश्चित रूप से कई मायनों में योग्यता के मामले में हमसे कहीं अधिक श्रेष्ठ थे। केवल योग्यता के तर्क से तो उनका शासन उचित होता! वे यह भी चेतावनी देते हैं कि क्रीमी लेयर पर अत्यधिक ध्यान आरक्षण के संरचनात्मक इरादे को कमजोर करता है। दूसरा पक्ष तर्क देता है कि आरक्षण हाशिए के समुदायों की क्रीमी लेयर को लाभ पहुंचाता है और सबसे अधिक हाशिए पर पड़े लोगों की जरूरतों को पूरा करने में विफल रहता है। ऐतिहासिक और प्रणालीगत असमानता को संबोधित करना किसी भी राष्ट्र के लिए एक अत्यधिक जटिल एवं चुनौती पूर्ण कार्य है। उदाहरण के लिए, संयुक्त राज्य अमेरिका ने गुलामी को समाप्त करने और समान अधिकार देने तथा अश्वेत लोगों को मुख्यधारा में लाने के लिए संवैधानिक संशोधन, सकारात्मक कार्रवाई और ऐतिहासिक न्यायिक घोषणा सहित कई कदम उठाए। </p>
<p>स्वतंत्रता के बाद, हमारे देश में भी कई ऐतिहासिक पहल की गई हैं, जिनमें अस्पृश्यता का उन्मूलन, पिछड़े और कमजोर वर्गों के लिए शैक्षिक अवसरों और नौकरियों का आरक्षण और कई अन्य सकारात्मक कार्यक्रम शामिल हैं। पिछड़े वर्गों को राष्ट्रीय मुख्यधारा में लाने के लिए इसका परिणाम निस्संदेह उल्लेखनीय और प्रभावशाली रहा है। भारत में जाति व्यवस्था कोई छिपी सच्चाई नहीं है-यह एक स्थाई सामाजिक वास्तविकता है, जो शिक्षा, नौकरियों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक पहुंच को आकार देती है। 1,200 से ज्यादा अनुसूचित जातियां और 5,000 से ज्यादा ओबीसी जातियां पहले से ही आधिकारिक तौर पर मान्यता प्राप्त हैं। जाति जनगणना केवल वही दर्ज करेगी, जो पहले से ही स्पष्ट है, नए विभाजन पैदा नहीं करेगी। ऐसी जनगणना से समाज में विभाजन की आशंकाएं गलत हैं। राजनेताओं और पार्टियों के पास चुनावी रणनीति के लिए जातिगत जनसांख्यिकी की स्पष्ट तस्वीर पहले से ही है। लेकिन नीति को दिशा देने और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए पारदर्शी, आधिकारिक आंकड़ों एवं सूचना की कमी है।</p>
<p> जाति को नजरअंदाज करने से यह मिट नहीं जाती। उचित जनगणना के जरिए इसे स्वीकार करना हाशिए पर पड़े समुदायों की जरूरतों को पूरा करने और ज्यादा न्यायसंगत भारत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। जाति जनगणना सिर्फ मौजूदा और देखी जा सकने वाली सामाजिक वास्तविकता का दस्तावेजीकरण करेगी। यह उन जगहों पर विभाजन पैदा नहीं करेगी जहां कोई विभाजन नहीं है। बल्कि, यह सार्वजनिक क्षेत्र में पहले से चल रही चीजों को रिकॉर्ड में लाएगी।</p>
<p><strong>-जे.सी. मोहंती</strong><br /><strong>पूर्व आईएएस</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 May 2025 11:59:43 +0530</pubDate>
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                <title>सक्रिय राजनीति से सन्यास लेने की अटकलों पर मायावती ने लगाया विराम, बोली, अंतिम सांस तक पार्टी से जुड़े रहने का फैसला अटल</title>
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                        <![CDATA[उन्होने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) से जुड़ने की अफवाहों पर भी विराम देते हुये दोनो ही दलों पर तंज कसे।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/mayawati-has-no-intention-of-joining-congress-and-sp-and/article-88701"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/mayawati-759.jpg" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। सक्रिय राजनीति से सन्यास लेने की अटकलों को सिरे से नकारते हुये बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती ने कहा कि वह अपनी अंतिम सांस तक पार्टी मूवमेंट से जुड़ी रहेंगी। उन्होने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) से जुड़ने की अफवाहों पर भी विराम देते हुये दोनो ही दलों पर तंज कसे।</p>
<p>मायावती ने एक्स पर पोस्ट किया कि बहुजनों के अम्बेडकरवादी कारवाँ को कमजोर करने की विरोधियों की साजिशों को विफल करने के संकल्प हेतु बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर और कांशीराम जी की तरह ही मेरी जिन्दगी की आखिरी सांस तक बीएसपी के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान मूवमेन्ट को समर्पित रहने का फैसला अटल।</p>
<p>उन्होने कहा कि सक्रिय राजनीति से मेरा सन्यास लेने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है। जबसे पार्टी ने आकाश आनन्द को मेरे ना रहने पर या अस्वस्थ विकट हालात में उसे बीएसपी के उत्तराधिकारी के रूप में आगे किया है तब से जातिवादी मीडिया ऐसी फेक न्यूज प्रचारित कर रहा है जिससे लोग सावधान रहें।</p>
<p>बसपा अध्यक्ष ने कहा कि पहले भी मुझे राष्ट्रपति बनाए जाने की अफवाह उड़ाई गयी, जबकि कांशीराम ने ऐसे ही ऑफर को यह कहकर ठुकरा दिया था कि राष्ट्रपति बनने का मतलब है सक्रिय राजनीति से सन्यास लेना जो पार्टी हित में उन्हें गवारा नहीं था, तो फिर उनकी शिष्या को यह स्वीकारना कैसे संभव।</p>
<p>मायावती ने कहा कि सपा जिसने 2 जून 1995 में बीएसपी द्वारा समर्थन वापिसी पर मुझ पर जानलेवा हमला कराया था तो इस पर कांग्रेस कभी क्यों नहीं बोलती है जबकि उस दौरान केन्द्र में रही कांग्रेसी सरकार ने भी समय से अपना दायित्व नहीं निभाया था। तभी फिर कांशीराम जी को अपनी बीमारी की गम्भीर हालत में भी हॉस्पिटल छोड़कर रात को इनके मा. गृह मन्त्री को भी हड़काना पड़ा था तथा विपक्ष ने भी संसद को घेरा, तब जाकर यह कांग्रेसी सरकार हरकत में आई थी।</p>
<p>उन्होने कहा कि उस समय केन्द्र की कांग्रेसी सरकार की भी नीयत खराब हो चुकी थी, जो कुछ भी अनहोनी के बाद यहाँ यूपी में राष्ट्रपति शासन लगाकर, पर्दे के पीछे से अपनी सरकार चलाना चाहती थी, जिनका यह षडय़न्त्र बीएसपी ने फेल कर दिया था। साथ ही, उस समय सपा के आपराधिक तत्वों से बीजेपी सहित समूचे विपक्ष ने मानवता व इन्सानियत के नाते मुझे बचाने में जो अपना दायित्व निभाया है तो इसकी कांग्रेस को बीच-बीच मे तकलीफ क्यों होती रहती है, लोग सचेत रहें।</p>
<p>इसके इलावा, बीएसपी वर्षों से जातीय जनगणना के लिए पहले केन्द्र में कांग्रेस पर और अब बीजेपी पर भी अपना पूरा दबाव बना रही है, जिसकी पार्टी वर्षों से इसकी पक्षधर रही है तथा अभी भी है लेकिन जातीय जनगणना के बाद, क्या कांग्रेस एससी, एसटी व ओबीसी वर्गों का वाजिब हक दिला पायेगी जो एससी/एसटी आरक्षण में वर्गीकरण व क्रीमीलेयर को लेकर अभी भी चुप्पी साधे हुए है, जवाब दे। </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 26 Aug 2024 16:14:24 +0530</pubDate>
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                <title>शेयर घोटाला, जाति जनगणना, संविधान को लेकर देशव्यापी आंदोलन करेगी कांग्रेस</title>
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                        <![CDATA[कांग्रेस ने हिंडेनबर्ग रिपोर्ट के खुलासे में सेबी प्रमुख पर लगे आरोपों को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा है कि पार्टी इस घोटाले के साथ ही संविधान तथा जाति जनगणना को लेकर देशव्यापी आंदोलन करेगी।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congress-will-conduct-nationwide-agitation-regarding-share-scam-caste-census/article-87683"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/photo-size-(8)6.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने हिंडेनबर्ग रिपोर्ट के खुलासे में सेबी प्रमुख पर लगे आरोपों को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा है कि पार्टी इस घोटाले के साथ ही संविधान तथा जाति जनगणना को लेकर देशव्यापी आंदोलन करेगी।</p>
<p>कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल तथा समाचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने बैठक के बाद मंगलवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे की अध्यक्षता में कांग्रेस महासचिव, राज्यों के प्रभारी, प्रदेश अध्यक्षों तथा अन्य वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई जिसमे लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ ही 56 नेता शामिल हुए। बैठक में शामिल हुए 36 लोगों ने विभिन्न मुद्दों पर अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिए।</p>
<p>वेणुगोपाल ने कहा कि हिंडनबर्ग रिपोर्ट में जो खुलासा हुआ है वह अत्यंत गंभीर है और उसको लेकर कांग्रेस 22 अगस्त को देशव्यापी आंदोलन करेगी। कांग्रेस कार्यकर्ता उस दिन पूरे देश में ईडी कार्यालयों का घेराव करेंगे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि पार्टी अडानी शेयर घोटाले, संविधान तथा जाति जनगणना जैसे मुद्दों को लेकर देशभर में आंदोलन करेगी। शेयर घोटाले में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हैं। इसको लेकर देशभर में होने वाले आंदोलन में कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल होंगे और सरकार पर हिंडेनबर्ग रिपोर्ट में प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की अध्यक्ष पर लगे आरोपों को लेकर संयुक्त राष्ट्रीय समिति-जेपीसी से जांच कराने की मांग करेंगे।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि दूसरा महत्वपूर्ण मुद्दा जाति जनगणना का है और इस पर पार्टी नेताओं ने आज गंभीरता से विचार किया। कांग्रेस इन तीनों मुद्दों को लेकर देशव्यापी आंदोलन करेगी और सरकार पर अपनी मांगों को मनवाने के लिए दबाव डालेगी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि बैठक में इसके अलावा भारी बारिश के कारण भूस्खलन तथा बाढ़ जैसी आपदाओं पर भी चर्चा की गई और वायनाड में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। बैठक में बंगलादेश में अल्पसंख्यक ङ्क्षहन्दुओं पर हो रही अत्याचार का मुद्दा भी उठा और उनको लेकर सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों के बारे में उससे सवाल किया गया।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Tue, 13 Aug 2024 19:31:25 +0530</pubDate>
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                <title>मेरे जातिगत जनगणना की बात करते ही मोदी के दिमाग से जाति गायब हुई : राहुल</title>
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                        <![CDATA[कांग्रेस सांसद और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश में गरीब ही एकमात्र जाति होने वाले बयान पर हमला बोलते हुए आज कहा कि उन्होंने जैसे ही जातिगत जनगणना की बात शुरु की, मोदी के दिमाग से जाति गायब हो गई।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/caste-disappeared-from-modis-mind-as-soon-as-he-talked/article-61806"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/rahul-gandhi1.png" alt=""></a><br /><p>सतना। कांग्रेस सांसद और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश में गरीब ही एकमात्र जाति होने वाले बयान पर हमला बोलते हुए आज कहा कि उन्होंने जैसे ही जातिगत जनगणना की बात शुरु की, मोदी के दिमाग से जाति गायब हो गई।</p>
<p>गांधी मध्यप्रदेश के विंध्य अंचल के सतना में कांग्रेस प्रत्याशियों के समर्थन में चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कुछ दिन पहले कह रहे थे कि हिंदुस्तान में गरीब ही एकमात्र जाति है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के दिमाग से जाति इसलिए गायब हो गई क्योंकि उन्होंने जाति जनगणना की बात शुरु कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री देश को सच्चाई नहीं बताना चाहते।</p>
<p>वो किसी भी भाषण में जाति जनगणना की बात नहीं कर सकते। उनका रिमोट अदाणी के हाथ में है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि हिंदुस्तान में कम से कम 50 फीसदी जनसंख्या ओबीसी वर्ग की है और दिल्ली में कांग्रेस की सरकार बनते ही नेशनल जाति जनगणना होगी।</p>
<p>इसी क्रम में उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश और दिल्ली सरकार को एमएलए नहीं, अधिकारी चलाते हैं। मध्यप्रदेश को 53 अधिकारी चलाते हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि उन्होंने पता लगाया है कि इनमें से मात्र एक अधिकारी ओबीसी है। राज्य में ओबीसी की आबादी 50 फीसदी है, पर भागीदारी 100 रूपए में से 33 पैसा है।</p>
<p>उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि इसके बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कहते हैं कि राज्य में ओबीसी की सरकार है।</p>
<p>कांग्रेस नेता गांधी ने आरोप लगाया कि भाजपा ने मध्यप्रदेश की नींव किसान, मजदूर, बेरोजगार, युवा और छोटे दुकानदारों को खत्म कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में 18 साल में 18 हजार किसानों ने कर्ज के कारण आत्महत्या की है। भाजपा अरबपतियों को पैसा देती है। प्रदेश में किसान और मजदूर डरे हुए हैं क्योंकि यहां अर्थव्यवस्था का इंजन चालू नहीं है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने पिछली बार मध्यप्रदेश में कर्जमाफी की थी। फिर अरबपतियों ने मोदी और चौहान से मिल कर सरकार चोरी कर ली।</p>
<p>उन्होंने कहा कि उन्होंने कर्नाटक अैर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों से साफ कहा है कि जितना पैसा भाजपा ने अदाणी और अरबपतियों को दिया है, उतना कांग्रेस सबसे गरीब लोगों को देने जा रही है।</p>
<p>उन्होंने भारत जोड़ो यात्रा के संदर्भ में कहा कि इस दौरान उन्होंने देखा कि जहां भी भाजपा सरकार थीं, सब जगह बेरोजगारी थी। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं में ऊर्जा है, पर ये देश करोड़ों युवाओं को रोजगार नहीं दे पा रहा।</p>
<p>गांधी ने मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि वे दो करोड़ रुपए का सूट पहनते हैं। हजारों करोड़ के हवाईजहाज में जाते हैं। हर रोज लाखों का नया कपड़ा पहनते हैं, जबकि उनकी ये सफेद शर्ट ही चलती रहती है।</p>
<p>राज्य में 17 नवंबर को मतदान होना है। उसके पहले इन दिनों दोनों मुख्य दलों की ओर से चुनाव प्रचार जोरों पर है।</p>
<p> </p>]]>
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                <pubDate>Fri, 10 Nov 2023 17:36:10 +0530</pubDate>
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                <title>जातिवार जनगणना एवं उसके नफे-नुकसान पर होगी चर्चा!</title>
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                        <![CDATA[माना जा रहा है कि कांग्रेस कार्यसमिति राजस्थान समेत पांच राज्यों की चुनावी तैयारियों पर भी चर्चा करेगी। क्योंकि चुनावी तैयारियों एवं प्रबंधन से जड़े तमाम नेता सोमवार को बैठक में मौजूद रहेंगे।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/caste-census-in-rajasthan-ashok-gehlot-congress/article-59056"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/caste-census.png" alt=""></a><br /><p>ब्यूरो, नवज्योति, नई दिल्ली। विपक्षी कांग्रेस की शीर्ष नीति निर्धारक इकाई कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक नई दिल्ली में सोमवार का बुलाई गई है। पार्टी मुख्यालय एआईसीसी में होने वाली इस बैठक की अगुवाई अध्यक्ष मल्लिकार्जन खड़गे करेंगे। जिसमें एम. खड़गे के अलावा पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी समेत सीडब्ल्यूसी के अन्य सदस्य मौजूद रहेंगे।<br /><br />असल में, बिहार में हुई जातिवार गणना के बाद कांग्रेस इस मुद्दे पर काफी उत्साहित है। वह लगातार देशभर में जातिगत जनगणना करवाने की मांग केन्द्र सरकार से कर रही है। साथ ही जिसकी जितनी हिस्सेदारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी पर जोर दे रही है। राहुल गांधी तो पार्टी की सरकार बनने पर इसका संकल्प भी जता चुके हें। ऐसे में साल के अंत में राजस्थान समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव एवं अगले साल आम चुनाव को देखते हुए पार्टी इस मुद्दे पर गहराई से चर्चा कर लेना चाहती है। पार्टी इस मसले को अपनी नीतिगत एजेंडा बनाने पर गंभीरता से विचार करेगी। इस कवायद को कांग्रेस द्वारा ओबीसी वर्ग को साधने का संकेत भी माना जा रहा है।</p>
<p><strong>राजस्थान से यह नेता रहेंगे मौजूद</strong><br />मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एवं पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा को भी बैठक के लिए बुलाया गया है। जबकि सीडब्ल्यूसी सदस्य पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट, पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह, पूर्व महासचिव मोहन प्रकाश एवं राज्य सरकार में मंत्री महेन्द्रजीत सिंह मालवीय बैठक में मौजूद रहेंगे। इसके अलावा प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा सीडब्ल्यूसी के सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे।<br />विधानसभा चुनाव की <br /><br /><strong>तैयारियों पर चर्चा संभव!</strong><br />माना जा रहा है कि कांग्रेस कार्यसमिति राजस्थान समेत पांच राज्यों की चुनावी तैयारियों पर भी चर्चा करेगी। क्योंकि चुनावी तैयारियों एवं प्रबंधन से जड़े तमाम नेता सोमवार को बैठक में मौजूद रहेंगे। ऐसे में बैठक अथवा इससे इतर अलग-अलग से हर राज्य को लेकर चुनावी चर्चा संभव है। ऐसे में प्रदेश के नेता भी अपनी तैयारियों एवं अब तक की प्रगति से पार्टी नेतृत्व को अवगत करवाएंगे।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Oct 2023 10:04:36 +0530</pubDate>
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                <title>बिहार पैटर्न पर राजस्थान में जातिगत जनगणना की घोषणा</title>
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                        <![CDATA[ विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बड़ा दांव चलते हुए राजस्थान में बिहार पैटर्न पर जातिगत जनगणना की घोषणा कर दी है। कांग्रेस कोर कमेटी की बैठक के बाद गहलोत ने इस संबंध में जल्दी आदेश का ऐलान कर दिया है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/caste-census-announced-in-rajasthan-on-bihar-pattern/article-58910"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/ashok_gehlot1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बड़ा दांव चलते हुए राजस्थान में बिहार पैटर्न पर जातिगत जनगणना की घोषणा कर दी है। कांग्रेस कोर कमेटी की बैठक के बाद गहलोत ने इस संबंध में जल्दी आदेश का ऐलान कर दिया है। कमेटी बैठक में ईआरसीपी वाले जिलों में यात्रा निकालने और आगामी दिनों में कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं की छह बड़ी सभाएं राजस्थान में कराने का भी निर्णय लिया है।</p>
<p>कोर कमेटी की बैठक में कमेटी संयोजक सुखजिंदर सिंह रंधावा, सीएम अशोक गहलोत, पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा, पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट, पूर्व मंत्री हरीश चौधरी, मंत्री गोविंदराम मेघवाल और राष्ट्रीय प्रवक्ता मोहनप्रकाश के बीच चार घंटे चली चर्चा के बाद यह फैसले हुए। मीडिया से बात करते हुए गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी ने जातिगत जनगणना की पैरवी की है। रायपुर अधिवेशन में जातिगत जनगणना का प्रस्ताव पारित हुआ था। उसी आधार पर हमने तय किया है कि राजस्थान सरकार भी बिहार की तर्ज पर जातिगत जनगणना कराएगी। राहुल गांधी बार-बार कह रहे हैं कि जिसकी जितनी जनसंख्या भारी है, उसकी उतनी हिस्सेदारी तय होनी चाहिए। पार्टी की भी यही मंशा है। इसलिए हमने कांग्रेस मेंडेंट को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है। इसके आदेश जल्दी जारी किए जाएंगे।</p>
<p>सामाजिक न्याय पैटर्न, संविधान की भावना और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए इसे लागू करेंगे। जातिगत जनगणना इसलिए जरूरी है, ताकि सरकार अपनी योजनाएं बनाते समय सामाजिक सुरक्षा का पूरा ध्यान रख सके। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                                            <category>राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Oct 2023 10:14:08 +0530</pubDate>
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                <title>Supreme Court ने जातिगत जनगणना पर रोक लगाने, यथास्थिति आदेश से किया इनकार</title>
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                        <![CDATA[उच्चतम न्यायालय ने जाति जनगणना करने और उसे प्रकाशित करने के बिहार सरकार के फैसले पर रोक लगाने या यथास्थिति बनाए रखने से इनकार करते हुए शुक्रवार को कहा कि वह राज्य सरकार या किसी भी सरकार को निर्णय लेने से नहीं रोक सकता।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-refuses-status-quo-order-to-ban-caste-census/article-58893"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/supreme-court--31.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने जाति जनगणना करने और उसे प्रकाशित करने के बिहार सरकार के फैसले पर रोक लगाने या यथास्थिति बनाए रखने से इनकार करते हुए शुक्रवार को कहा कि वह राज्य सरकार या किसी भी सरकार को निर्णय लेने से नहीं रोक सकता।</p>
<p>न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और एस वी एन भट्टी की पीठ ने स्वयंसेवी संस्थाओं - एक सोच एक प्रयास, यूथ फॉर इक्वलिटी और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि फिलहाल यथास्थिति का आदेश नहीं दिया जा सकता, क्योंकि राज्य सरकार को नीतिगत निर्णय लेने से रोकना गलत होगा।</p>
<p>पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि हम राज्य सरकार या किसी भी सरकार को निर्णय लेने से नहीं रोक सकते।, पीठ ने हालांकि कहा कि हम आंकड़े एकत्र करने के राज्य के अधिकार और अन्य सभी मुद्दों की जांच करने जा रहे हैं।</p>
<p>शीर्ष अदालत ने जाति जनगणना कराने के राज्य सरकार के फैसले को बरकरार रखने के पटना उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया।</p>
<p>पीठ ने बिहार सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए कहा कि वह इस मामले में जनवरी 2024 विचार करेगी। इसके बाद याचिकाकर्ताओं को प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय भी दिया गया।</p>
<p>पीठ ने संक्षिप्त सुनवाई के दौरान एक समय राज्य सरकार से पूछा कि उसने आंकड़े (जातिगत) क्यों प्रकाशित किया।</p>
<p>इस पर बिहार सरकार के वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने कहा कि अदालत ने जनगणना प्रकाशन की तारीख के खिलाफ कभी कोई आदेश पारित नहीं किया। इस अदालत ने संकेत दिया था कि वह सबसे पहले यह तय करेगी कि नोटिस जारी किया जाए या नहीं।</p>
<p>वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह के नेतृत्व में याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि राज्य सरकार ने जातिगत जनगणना प्रकाशित की है। इसके खिलाफ पिछले आश्वासन के बावजूद इस अदालत को मामले की वैधता की जांच करने से एक तरह से रोक दिया है।</p>
<p>इस पर पीठ ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से ऐसा कोई आश्वासन नहीं मिला है।</p>
<p>इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने यथास्थिति बनाए रखने और राज्य सरकार को जातिगत विवरण जुटाने की कार्रवाई करने से रोकने का निर्देश देने की गुहार लगाई।</p>
<p>उन्होंने कहा कि जाति विवरण एकत्र करने का राज्य का निर्णय केएस पुट्टास्वामी मामले में शीर्ष अदालत के फैसले के विपरीत था। केएस पुट्टास्वामी मामले में शीर्ष अदालत ने निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी थी।</p>
<p>पीठ ने याचिकाकर्ताओं की इस दलील को अस्वीकार कर दिया। अदालत ने गोपनीयता के संबंध में तर्कों को भी खारिज कर दिया।</p>
<p>पीठ ने याचिकाकर्ताओं से कहा, आम तौर पर सभी नीतियां आंकड़ों पर निर्भर और आधारित होती हैं। हम आपकी बात सुनेंगे। उच्च न्यायालय का फैसला काफी विस्तृत है।</p>
<p>शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इस बात पर विचार करेगी कि आम जनता को (जातिगत) आंकड़े का कितना हिस्सा उपलब्ध कराया जा सकता है, क्योंकि इसमें पारदर्शिता का सवाल शामिल है या क्या अदालत को इस मुद्दे की जांच करनी चाहिए।</p>
<p>पटना उच्च न्यायालय ने एक अगस्त को राज्य में जातिगत जनगणना कराने के बिहार सरकार के छह जून 2022 के फैसले को उचित ठहराया था।</p>
<p>उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि सरकार का यह अभ्यास पूरी तरह से वैध था। यह न्याय के साथ विकास प्रदान करने के वैध उद्देश्य के साथ उचित क्षमता के साथ शुरू किया गया था।  </p>
<p>गौरतलब है कि बिहार सरकार ने दो अक्टूबर 2023 को जातिगत जनगणना के आंकड़े का प्रकाशन किया था।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Fri, 06 Oct 2023 18:10:13 +0530</pubDate>
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