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                <title>new parliament - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>Parliament Special Session: 19 सितंबर को गणेश चतुर्थी के मौके पर होगा नई संसद में कार्यवाही का श्रीगणेश</title>
                                    <description><![CDATA[19 सितंबर को गणेश चतुर्थी भी है। इसी दिन नई संसद में कार्यवाही का श्रीगणेश होगा। नई संसद का उद्घाटन पीएम मोदी ने 28 मई 2023 को किया था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/parliament-special-session-proceedings-will-shift-in-new-parliament-building-on-19-september-on-the-occasion-of-ganesh-chaturthi/article-56450"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/parliament1.png" alt=""></a><br /><p>केंद्र सरकार द्वारा बुलाए गए संसद के विशेष सत्र की शुरुआत 18 सितंबर को पुराने संसद भवन में ही होगी। लेकिन चर्चा है कि अगले दिन से यानी 19 सितंबर से सदन की कार्यवाही नई संसद में की जाएगी। संसद का विशेष सत्र 18 सितंबर से 22 सितंबर तक चलेगा। 19 सितंबर को गणेश चतुर्थी भी है। इसी दिन नई संसद में कार्यवाही का श्रीगणेश होगा। नई संसद का उद्घाटन पीएम मोदी ने 28 मई 2023 को किया था।<br /><br />देशभर में चर्चा है कि विशेष सत्र में केंद्र सरकार कई बड़े और चौंकाने वाले फैसले ले सकती है। सरकार महिला आरक्षण विधेयक, एक देश एक चुनाव विधेयक और समान नागरिक संहिता विधेयक को संसद में पेश कर सकती है। भारत और इंडिया के विवाद के बाद अब कयास लगाए जा रहे हैं कि देश का नाम केवल भारत रखने वाला कोई विधेयक भी लाया जा सकता है।</p>
<p><strong>नई संसद की क्या है खासियत<br /></strong>नई संसद में लोकसभा में 888 सासंदों और राज्यसभा में 384 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था है। पुरानी संसद में लोकसभा के 543 और राज्यसभा के 250 सांसदों के बैठने की व्यवस्था है। नई संसद में कई अत्याधुनिक सुविधाएं है। इसमें प्रवेश के लिए तीन द्वारों को ज्ञान द्वार, शक्ति द्वार एवं कर्म द्वार नाम दिए गए हैं। <br /><br />नई संसद में इमारती लकड़ी महाराष्ट्र के नागपुर से, लाल और सफेद संगमरमर राजस्थान से लगाए गए हैं। इसमें उदयपुर से लाए गए हरे पत्थर लगे हैं। इसके अलावा लाल ग्रेनाइट अजमेर के लाखा की है। कुछ सफेद संगमरमर राजस्थान में ही अंबा जी से लाकर लगाया गया है। इसमें हवा की गुणवत्ता के लिए अल्ट्रावायलेट लैम्प जैसी सुविधाएं हैं। आर्द्रता नियंत्रण के लिए अल्ट्रासोनिक ह्यूमिडी फायर काम करेगा। बता दें कि पीएम मोदी ने 10 दिसंबर 2020 को नई संसद का शिलान्यास किया था।</p>
<p><strong>65 हजार मजदूरों ने बनाई नई संसद<br /></strong>नई संसद को बनाने में करीब 65 हजार मजदूरों का श्रम लगा था। नई संसद को करीब 64500 वर्ग मीटर क्षेत्र में बनाया गया है। जो भूतल से चार मंजिला है। नए संसद भवन में करीब 1700 खिड़कियां हैं। इसे पूरी तरह से भूकंपरोधी बनाया गया है। इस भवन का जीवनकाल करीब 150 वर्ष आंका गया है। इस 20 हजार करोड़ रुपये की लागत वाले प्रोजेक्ट का नाम सेंट्रल विस्टा परियोजना था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Sep 2023 14:36:54 +0530</pubDate>
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                <title>संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[संसदीय कार्यमंत्री ने ट्वीट किया, “संसद का मानसून सत्र 2023 आगामी 20 जुलाई से शुरू होगा और 11 अगस्त तक चलेगा। सत्र के दौरान सभी दल से आग्रह है कि विधायी कामकाज और अन्य विषयों पर सार्थक चर्चा करने में योगदान दें।”]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/monsoon-session-of-parliament-begins-from-july-20/article-50574"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/630-400-size-की-कॉपी-(1)1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने शनिवार को कहा कि संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होगा और 11 अगस्त तक चलेगा। जोशी ने सभी दलों से सत्र के दौरान सार्थक चर्चा में योगदान देने का भी आग्रह किया।<br /><br />संसदीय कार्यमंत्री ने ट्वीट किया, “संसद का मानसून सत्र 2023 आगामी 20 जुलाई से शुरू होगा और 11 अगस्त तक चलेगा। सत्र के दौरान सभी दल से आग्रह है कि विधायी कामकाज और अन्य विषयों पर सार्थक चर्चा करने में योगदान दें।”<br /><br />गौरतलब है कि पिछले बजट सत्र में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लोकसभा सदस्य के रूप में अयोग्य ठहराए जाने सहित विभिन्न मुद्दों पर सरकार के खिलाफ विपक्ष के हंगामे के बाद दोनों सदनों में गतिरोध देखा गया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Jul 2023 16:34:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>सेंगोल: दक्षिण को नजदीक लाने के प्रयास</title>
                                    <description><![CDATA[ इतिहास में इस बात का उल्लेख मिलता है कि आज से लगभग एक हजार वर्ष पूर्व दक्षिण के चोल राजवंश के काल में जब सत्ता में परिवर्तन होता था या राजा सत्ता का हस्तांतरण अपने वंशज को करते थे तो ऐसे समारोह में  बड़े मठों के पुजारी राज्यभिषेक के समय ऐसा राजदंड  उसके हाथ में देते थे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/efforts-to-bring-sengol-south-closer/article-47798"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/q-14.png" alt=""></a><br /><p>देश की राजधानी दिल्ली में नए संसद भवन के उद्घाटन को लेकर कई विपक्षी दल बीजेपी सरकार पर लगातार हमले बोल रहे हैं। जब यह सामने आया कि नए भवन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करेंगे, तो कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने मांग की कि नए भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति को करना चाहिए था। उद्घाटन के बाद यह आलोचना शुरू हो गई कि सारे समारोह का भगवाकरण कर, जबकि यह  एक राष्ट्रीय स्तर का सरकारी समारोह था। आलोचना का मुख्य बिंदु दक्षिण के तमिलनाडु से बुलाए गए दो दर्जन से अधिक  मठों के अदिनमों, पुजारियों को लेकर है। इसके साथ ही नए भवन के लोकसभा कक्ष में स्पीकर के आसन के निकट सेंगोल की स्थापना को लेकर भी कई तरह की  टिप्पणियां की गई। सेंगोल तमिल भाषा का शब्द है। हिन्दी में इसे राजदंड या धर्मदंड कहा जाता है। इतिहास में इस बात का उल्लेख मिलता है कि आज से लगभग एक हजार वर्ष पूर्व दक्षिण के चोल राजवंश के काल में जब सत्ता में परिवर्तन होता था या राजा सत्ता का हस्तांतरण अपने वंशज को करते थे तो ऐसे समारोह में  बड़े मठों के पुजारी राज्यभिषेक के समय ऐसा राजदंड  उसके हाथ में देते थे। यह दंड सत्ता और धर्म का प्रतीक माना जाता था। यह परम्परा दक्षिण के राजवंशों में सदियों से चली आ रही थी।<br /><br />15 अगस्त 1947 ब्रिटेन ने भारत को आजादी दी तो  यह मुद्दा सामने आया कि सत्ता हस्तांतरण के सरकारी दस्तवेजों के अलावा सत्ता के प्रतीक के रूप में और किया जाना चाहिए। उस समय कांग्रेस के बड़े कांग्रेस नेता सी  राजगोपालचारी, जो बाद में देश के पहले गवर्नर जनरल  आजाद देश के पहले प्रधानमंत्री बनने वाले पंडित जवाहर लाल नेहरु को यह सुझाव दिया कि दक्षिण की प्राचीन हिन्दू परम्परा के अनुसार वे मदुरै मंदिर के पुजारी के हाथ से सेंगोल ग्रहण करने के बाद  ही सत्ता हस्तांतरण के सरकारी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करे। हालांकि नेहरु आमतौर पर ऐसी धार्मिक परम्पराओं में विश्वास नहीं करते थे, लेकिन इसको बड़ा समारोह देखते हुए उन्होंने ऐसा करने से इंकार नहीं किया। चेन्नई के प्रसिद्ध आभूषण बनाने वाले एक  प्रतिष्ठान को यह राजदंड बनाने का काम दिया गया। आजादी की तारीख से  एक दिन पहले इस राजदंड को विशेष विमान से दिल्ली लाया गया। मदुरै मंदिर के उप पुजारी भी साथ में आए थे। 14 और 15 अगस्त की मध्य रात्रि को सत्ता हस्तांतरण समारोह ने कुछ समय पूर्व यह राजदंड पूरे पूजा पाठ के बाद उन्हें सौंपा गया। जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नए संसद भवन में सेंगोल को स्थापित किए जाने की घोषणा की तो कांग्रेस सहित कई विरोधी नेताओं ने केवल सेंगोल के अस्तित्व को ही नकार दिया बल्कि यहां तक कह डाला को नेहरु ने कभी ऐसा सेंगोल स्वीकार ही नहीं किया था। वास्तव में आजादी के कुछ समय बड़ा जब  नेहरु की। व्यक्तिगत वस्तुओं के साथ इस सेंगोल को तब के इलाहाबाद स्थित नेहरु परिवार के पुश्तैनी घर आनंद भवन भेज दिया गया। बाद में जब  इलाहाबाद  में संग्राहालय बना तो वहा वहां एक नेहरु कक्ष बनाया  गया जिनमें पंडित  नेहरु से संबंधित वस्तुओं को रखा गया। इसमें यह सेंगोल भी था। बताया जाता है कि इस साल के आरंभ में इस सेंगोल की खोज शुरू हुई और इलाहाबाद जाकर खत्म हुई।<br /><br />जब से केंद्र में बीजेपी सत्ता में आई हैं और नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बने हैं वे राष्टÑीय स्वयंसेवक संघ के हिन्दुत्व के अजेंडे को आगे बढ़ाने में लगे हैं। इनमें से दक्षिण के तमिलनाडु राज्य को अधिक से अधिक भारत की या हिन्दुओं की मुख्य धारा के निकट लाना है। आमतौर पर तमिलनाडु  के सभी बड़े राजनीतिक दल द्रविड़ संस्कृति को हिन्दू संस्कृति से अलग  तथा इससे ऊंची मानते हैं। यही कारण है कि बीजेपी अपने हिन्दू अजेंडे की वजह से तमिलनाडु में अपने पैर नहीं जमा पाई। अब सांस्कृतिक माध्यम से ऐसा किया जा रहा है। इस साल के शुरू में काशी यानि बनारस में तमिल संगम का आयोजन किया गया। इसमें  तमिलनाडु के लगभग ढाई हजार लोग ने यह कहा गया कि सदियों से तमिलनाडु के लोग काशी आते रहे हैं। लेकिन ब्रिटिश काल में यह क्रम टूट गया। इसे फिर से शुरू करने का प्रयास किया जा रहा हैं। इसी प्रकार लगभग पांच सौ साल पूर्वे मुस्लिम हमलवारों से बचने के लिए बड़ी संख्या में गुजरात के सौराष्टÑ इलाके के लोग मुदुरै पलायन कर गए थे। अप्रैल के महीने में ऐसे लोंगो के एक समूह को सोमनाथ लाया गया था। अब ऐसे ही एक जत्थे को उत्तराखंड के केदारनाथ मंदिर ले जाया जा रहा है। संघ चाहता के उस परम्परा को पुनर्जीवित किया जाए। जब दक्षिण के हिन्दू  काशी, हरिद्वार और मथुरा जैसे प्रमुख हिन्दू तीर्थों पर जाया करते थे।<br /><br />-लोकपाल सेठी<br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Jun 2023 11:33:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>हमारी उम्मीदों का नया घर है संसद : शाहरुख</title>
                                    <description><![CDATA[शाहरुख ने संसद भवन की एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि नया संसद भवन, हमारी आशाओं का नया घर। हमारे संविधान को बनाए रखने वाले लोगों के लिए एक घर, जहां 140 करोड़ भारतीय एक परिवार बन जाते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/parliament-is-the-new-home-of-our-hopes-shahrukh/article-47047"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/shah-rukh-khan.png" alt=""></a><br /><p>शाहरुख खान ने नवनिर्मित संसद भवन को उम्मीदों का नया घर करार देते हुए रविवार को भारतीय लोकतंत्र की आत्मा के स्वस्थ रहने की कामना की। शाहरुख ने संसद भवन की एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि नया संसद भवन, हमारी आशाओं का नया घर। हमारे संविधान को बनाए रखने वाले लोगों के लिए एक घर, जहां 140 करोड़ भारतीय एक परिवार बन जाते हैं। आशा करता हूं यह नया घर इतना बड़ा हो कि इसमें देश के हर गांव, शहर और कोने-कोने से सब लोगों के लिये जगह हो। ट््वीट में लिखा कि हमारे संविधान को बनाये रखने वाले, इस महान राष्ट्र के प्रत्येक नागरिक का प्रतिनिधित्व करने वाले और देश की विविधता की रक्षा करने वाले लोगों के लिये क्या शानदार नया घर है, नरेंद्र मोदी जी। नये भारत के लिये एक नया संसद भवन लेकिन भारत के गौरव के सदियों पुराने सपने के साथ। जय हिन्द! प्रधानमंत्री मोदी ने इसके जवाब में ट्वीट किया कि खूबसूरती से व्यक्त किया! नया संसद भवन लोकतांत्रिक शक्ति और प्रगति का प्रतीक है। यह परंपरा को आधुनिकता के साथ जोड़ता है। </p>
<p>अभिनेता अक्षय कुमार ने भी नए संसद भवन का वीडियो साझा करते हुए उसे भारत की विकास गाथा का एक प्रतिष्ति प्रतीक करार दिया। जैसे प्रत्येक भारतीय को देश की प्रगति पर गर्व है, वैसे ही वह भी अपनी खुशी काबू नहीं कर सकते। दिल्ली में अपने बचपन को याद करते हुए अक्षय ने कहा कि जब मैं अपने माता-पिता के साथ इंडिया गेट जाता था, तो आसपास की ज्यादातर इमारतें अंग्रेजों की बनायी हुई थीं, लेकिन यह एक नया भारत है, एक भव्य नया भारत है और मेरा दिल गर्व से भर गया है। संसद लोकतंत्र का मंदिर है और नए भारत का प्रतीक है।  आज हमारे लिए गौरव का क्षण है।  मोदी ने अक्षय को जवाब देते हुए कहा कि आपने अपने विचारों को बहुत अच्छी तरह से व्यक्त किया है। हमारी नयी संसद वास्तव में हमारे लोकतंत्र का प्रकाश स्तंभ है। </p>
<p> </p>
<p><br />यह देश की समृद्ध विरासत और भविष्य के लिए जीवंत आकांक्षाओं का प्रतीक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 May 2023 11:45:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नया संसद भवन 150 वर्ष तक हर पीढ़ी की जरूरत को करेगा पूरा</title>
                                    <description><![CDATA[नए संसद भवन में लोकसभा में 888 और राज्यसभा में 384 सांसदों के बैठने की क्षमता रखी गई। इसमें सेंट्रल नहीं बनाया गया। बल्कि लोकसभा में ही दोनों सदनों के सांसद बैठ सकेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/new-parliament-house-will-meet-the-needs-of-every-generation/article-47042"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/630-400-size-(1)2.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li>नए संसद भवन की लागत करीब 871 करोड़ रूपए आंकी गई। जो बाद में बढ़कर करीब 1200 करोड़ तक पहुंच गई। यह रिकार्ड समय में बनकर तैयार हुआ। जो वर्तमान संसद भवन से करीब तीन गुना ज्यादा बढ़ा होगा। देश के प्रसिद्ध औद्योगिक समूह टाटा ग्रुप ने यह भवन बनाया।</li>
<li> नए संसद भवन में लोकसभा में 888 और राज्यसभा में 384 सांसदों के बैठने की क्षमता रखी गई। इसमें सेंट्रल नहीं बनाया गया। बल्कि लोकसभा में ही दोनों सदनों के सांसद बैठ सकेंगे। जिसकी क्षमता 1280 की होगी। इसमें प्रवेश के लिए तीन द्वारों को ज्ञान द्वार, शक्ति द्वार एवं कर्म द्वार नाम दिए गए हैं।</li>
<li>नई संसद के निर्माण में करीब 65 हजार मजदूरों का श्रम लगा एवं इसके निर्माण से करीब 60 हजार मानव दिवस सृजित हुए। नया संसद भवन करीब 64500 वर्ग मीटर क्षेत्र में बनाया गया है। जो भूतल से चार मंजिला होगा।</li>
<li>नए संसद भवन में करीब 1700 खिड़कियां हैं। यह पूरी तरह से भूकंपरोधी बनाया गया है। इसका जीवनकाल करीब 150 वर्ष आंका गया है।</li>
<li>नया संसद भवन 20 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली सेंट्रल विस्टा परियोजना का हिस्सा है। हीरे (त्रिकोणीय) आकार के नए भवन के साथ संसद भवन परिसर में पुस्तकालय भवन सहित तीन भवन हो गए हैं। अति विशिष्ट व्यक्तियों, सांसदों और दर्शकों को अलग-अलग द्वारों से प्रवेश कराया जायेगा। </li>
</ul>
<p>संसद भवन आधुनिक इलेक्ट्रानिक उपकरणों से लैस हैं जो सांसदों की कार्यक्षमता का विस्तार करेगा और इनसे संसदीय कार्य में आसानी होगी। संसद भवन में लगी सामग्री देश विभिन्न भागों से लाई गई है। इसमें इमारती लकड़ी महाराष्ट्र के नागपुर से, लाल और सफेद संगमरमर राजस्थान से आए हैं। इसमें उदयपुर से लाए गए हरे पत्थर लगे हैं। लाल ग्रेनाइट अजमेर के लाखा की  है। कुछ सफेद संगमरमर राजस्थान में ही अंबा जी से लाया गया है। नए भवन के राज्य सभा और लोक सभा की फॉल्स सीलिंग के लिए स्टील के ढांचे को दमन-दीव से मंगवाया गया है। भवन में पत्थर की जालियां राजस्थान के राजनगर और गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) से बनवाकर लगायी गई हैं। कुर्सियों का डिजाइन मुंबई में तैयार किया गया है। इसमें बिछाई गयीं कालीन उत्तर प्रदेश के भदोही से लायी गयी हैं।</p>
<p>संसद भवन के लोक सभा और राज्य सभा कक्षों की ऊंची दीवारों तथा सदन के बाहर लगाए गए बड़े-बड़े अशोक चक्र इंदौर से मंगवाए गए हैं। अशोक स्तम्भ के निर्माण में लगी सामग्री औरंगाबाद और जयपुर से लायी गयी हैं। इसमें लगी रेत और फ्लाईऐश हरियाणा में चरखी दादरी और उत्तर प्रदेश से लायी गयी है और ब्रास वर्क और ढलवा नालियां गुजरात से ली गयी हैं।  </p>
<p>नये संसद भवन में ऊर्जा की बचत और जल संरक्षण के विशेष प्रबंध किए गए हैं। यह फाइव स्टार गृह (ग्रीन रेटिंग फॉर इंटीग्रेटेड हैबिटाट एसेसमेंट) प्रमाण पत्र प्राप्त भवन है। इसमें सीवेज शोधन के लिए संयंत्र है और उससे शोधित पानी का फ्लश और सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। भवन में हवा की गुणवत्ता के लिए अल्ट्रावायलेट लैम्प जैसी सुविधाएं हैं। आर्द्रता नियंत्रण के लिए अल्ट्रासोनिक ह्यूमिडी फायर काम करेगा। </p>
<p><strong>मोदी-मोदी के नारों से गूंजी संसद</strong> <br /> प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नए संसद भवन में प्रवेश करते ही सदस्यों और गणमान्य लोगों ने खड़े होकर तालियों से स्वागत किया और इस दौरान मोदी-मोदी के नारे लगे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के उपसभापति डॉ हरिवंश ने नए संसद भवन में  मोदी की अगवानी की। लोकसभा कक्ष में पहुंचते ही जोरदार तालियों और नारों के साथ प्रधानमंत्री का स्वागत किया गया। इस दौरान भारत माता की जय और वंदे मातरम के साथ- साथ मोदी -मोदी के जमकर नारे लगे।</p>
<p><strong>लोकसभा कक्ष की झलकियां</strong>  </p>
<ul>
<li>विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पहली पंक्ति में बैठने का स्थान दिया गया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, असम के मुख्यमंत्री हिमंता विश्व शर्मा और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे समेत भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) शासित सभी राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए। </li>
<li>आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन रेड्डी को भी पहली पंक्ति में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ स्थान मिला। </li>
<li>शिंदे की पार्टी के सभी सदस्य पारंपरिक पगड़ी बांधकर कार्यक्रम में शामिल हुए। </li>
<li>उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के साथ कई सासंदों ने सेल्फी ली। </li>
<li>लोकसभा कक्ष में कार्यक्रम प्रारंभ होने से पहले सबसे अधिक आकर्षण केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह और योगी आदित्यनाथ के पास रहा। दोनों नेताओं पास सदस्यों समेत अन्य गणमान्य लोग मिलते रहे। </li>
<li>लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के साथ वरिष्ठ भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी बैठे। </li>
<li>पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द और पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा एक साथ बैठे। </li>
<li>भाजपा नेता वरुण गांधी अपनी मां मेनका गांधी के साथ बैठे। तीनों सेना के प्रमुख भी कक्ष में एक साथ स्थान ग्रहण किया। </li>
<li>समारोह में विभिन्न देशों के राजनयिकों के एक साथ बैठने का स्थान दिया गया। </li>
<li>कार्यक्रम के समापन पर जाते समय प्रधानमंत्री ने देवगौड़ा का हालचाल जानने के अलावा कुछ न्यायाधीशों से भी हाथ मिलाया। </li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 May 2023 11:04:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आखिर क्या है सेंगोल? क्या है इसका आजादी से कनेक्शन? नए संसद भवन में किया जाएगा स्थापित</title>
                                    <description><![CDATA[शाह ने कहा कि सेंगोल भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ा है और इसका संबंध आठवीं सदी के चोल साम्राज्य से है। सेंगोल शब्द तमिल भाषा के सेमई शब्द से बना है जिसका अर्थ नीति परायणता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/what-is-sengol-after-all--will-be-installed-in-the-new-parliament-house-amit-shah-narendra-modi-jawahar-lal-nehru/article-46533"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/sengol.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नये संसद भवन के राष्ट्र को लोकार्पण के मौके पर आजादी के समय 14 अगस्त 1947 के दिन सत्ता के हस्तांतरण की परंपरा को दोहराते हुए पवित्र 'सेंगोल' को स्वीकार करेंगे जिसे बाद में लोकसभा अध्यक्ष के आसन के निकट स्थापित किया जायेगा। </p>
<p>केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को संवाददाता सम्मेलन में बताया कि आजादी के 75 वर्ष बीत जाने के बाद भी अनेक लोगों को इस बात की जानकारी नहीं है कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 14 अगस्त 1947 को आजादी मिलने के समय प्राचीन भारतीय परंपराओं का निर्वहन करते हुए ब्रिटिश साम्राज्य से सत्ता के हस्तांतरण के प्रतीक के रूप में पवित्र सेंगोल को स्वीकार किया गया था। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश सरकार ने इस विशेष अवसर और परंपरा के लिए वायसराय लार्ड माउंटबेटन को भारत भेजा था। उन्होंंने कहा कि पंडित नेहरू ने अपने आवास पर लार्ड माउंटबेटन की मौजूदगी में तमिलनाडु के अधिनम से आये धार्मिक शिष्टमंडल से सेंगोल को स्वीकार किया था। </p>
<p>शाह ने कहा कि सेंगोल भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ा है और इसका संबंध आठवीं सदी के चोल साम्राज्य से है। सेंगोल शब्द तमिल भाषा के सेमई शब्द से बना है जिसका अर्थ नीति परायणता है। उन्होंंने कहा कि सेंगोल न्याय और नीति पर आधारित शासन के भाव से जुड़ा है। </p>
<p>केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आगामी रविवार को जब प्रधानमंत्री नये संसद भवन का उद्घाटन करेंगे तो तमिलनाडु के 20 अधिनम के अध्यक्ष मोदी को यह सेंगोल प्रदान करेंगे। बाद में पवित्र सेंगोल को लोकसभा अध्यक्ष के आसन के निकट स्थापित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि यह पवित्र सेंगोल न्यायपूर्ण शासन व्यवस्था का प्रतीक है इसलिए इसकी जगह संग्रहालय के बजाय संसद भवन होनी चाहिए। </p>
<p>विपक्ष के नेताओं के इस मौके पर उपस्थित नहीं रहने से संबंधित सवाल पर शाह ने कहा कि सरकार ने सबसे विनती की है और सभी नेता अपनी भावना तथा विवेक के आधार पर निर्णय लेंगे। उन्होंने कहा कि इस मौके को राजनीति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए, राजनीति की अपनी जगह है और इस मौके को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। </p>
<p>एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि यह वही सेंगोल है जिसे पंडित नेहरू को प्रदान किया गया था और यह अब तक इलाहाबाद के एक संग्रहालय में रखा गया था।</p>
<p><strong>आजादी से जुड़ा है इतिहास<br /></strong>सेंगोल का इतिहास काफी पुराना है। आजाद भारत में इसका बड़ा महत्व है, 14 अगस्त 1947 में जब भारत की सत्ता का हस्तांतरण हुआ, तो वो इसी सेंगोल द्वारा हुआ था। एक तरह कहा जाए तो सेंगोल भारत की आजादी का प्रतीक है, उस समय सेंगोल सत्ता के हस्तांतरण का प्रतीक बना था।  जब लॉर्ड माउंट बेटन ने पंडित नेहरू से पूछा कि सत्ता का हस्तांतरण कैसे किया जाए, तो पंडित नेहरू ने इसके लिए सी राजा गोपालचारी से मशवरा मांगा। उन्होंने सेंगोल प्रक्रिया के बारे में बताया, इसके बाद इसे तमिलनाडु से मंगाया गया और आधी रात को पंडित नेहरु ने स्वीकार किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Wed, 24 May 2023 13:15:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नए संसद भवन के उद्घाटन को लेकर राहुल गांधी ने कही ये बात</title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा सचिवालय ने कहा कि नए संसद भवन को गुणवत्तापूर्ण रूप से रिकॉर्ड समय में तैयार किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rahul-said-that-the-president-should-inaugurate-the-newly-built/article-46218"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/rahul_1.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस नेता वरिष्ठ नेता व पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने रविवार को कहा कि नवनिर्मित संसद भवन का उद्घाटन  राष्ट्रपति को करना चाहिए न कि देश के प्रधानमंत्री को।</p>
<p>गांधी का यह बयान लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी किए गए एक विज्ञप्ति के कुछ दिनों बाद आया है जिसमें कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 28 मई को नवनिर्मित संसद भवन राष्ट्र को समर्पित करेंगे।</p>
<p>राहुल ने ट्वीट करके कहा, '' राष्ट्रपति को नए संसद भवन का उद्घाटन करना चाहिए, प्रधानमंत्री को नहीं।"<br /><br /></p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi" xml:lang="hi">नए संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति जी को ही करना चाहिए, प्रधानमंत्री को नहीं!</p>
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) <a href="https://twitter.com/RahulGandhi/status/1660161465154953217?ref_src=twsrc%5Etfw">May 21, 2023</a></blockquote>
<p>

</p>
<p>पीएम मोदी ने 10 दिसंबर, 2020 को संसद के नए भवन की आधारशिला रखी थी। लोकसभा सचिवालय ने कहा कि नए संसद भवन को गुणवत्तापूर्ण रूप से रिकॉर्ड समय में तैयार किया गया है। गौरतलब है की दो दिन पहले ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने ट््वीट करके जानकारी दी थी कि प्रधानमंत्री 28 मई को नये संसद भवन का उद्घाटन करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sun, 21 May 2023 17:31:47 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नये संसद भवन की शोभा बढ़ाएंगी भदोही की मखमली कालीन</title>
                                    <description><![CDATA[नए संसद भवन में लोकसभा व राज्यसभा को भदोही की मखमली कालीनों से सजाने की  तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा चुका है। इसके लिए कालीन परिक्षेत्र की प्रतिष्ठित कंपनी ओबीटी को आर्डर भी मिल चुका है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/bhadohi-s-velvet-nails-will-enhance-the-beauty-of-the-new-parliament-building/article-45978"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/f-11.png" alt=""></a><br /><p>भदोही। अमेरिका,जर्मनी,ब्रिटेन और फ्रांस जैसे तमाम देशों में अपनी अदुभुद कारीगरी का लोहा मनवा चुकी भदोही की मखमली कालीनें देश के नव निर्मित संसद भवन की शान में इजाफा करने को तैयार हैं।</p>
<p>सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट में भदोही की मखमली कालीनें जलवा बिखेरने को तैयार हैं। इसके लिए आकर्षक डिजाइन वाली हैंड नाटेड कालीनों की तैयारी को अंतिम रूप दिया जा चुका है। सेंट्रल विस्टा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता है। प्रधानमंत्री के सपनों को साकार करने में भारतीय कालीनों का भी कहीं न कहीं अहम योगदान हो सकता है। अमेरिका, जर्मनी, ब्रिटेन व फ्रांस जैसे तमाम प्रभावशाली देशों में अपनी जलवा बिखेर चुकी भदोही की आकर्षक कालीनें अब भारत की बनने वाली नई संसद में भी शोभायमान होंगी।</p>
<p>नए संसद भवन में लोकसभा व राज्यसभा को भदोही की मखमली कालीनों से सजाने की  तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा चुका है। इसके लिए कालीन परिक्षेत्र की प्रतिष्ठित कंपनी ओबीटी को आर्डर भी मिल चुका है।</p>
<p>ओबीटी के प्रेसिडेंट (प्रशासन ) आईबी सिंह ने शुक्रवार को बताया कि सेंट्रल विस्टा के लिए कंपनी को हैंड नाटेड कालीनों के ऑर्डर मिल चुके हैं। इन कालीनों को तैयार कर संवारने सजाने का काम अंतिम चरण में है। सेंट्रल विस्टा के पांच हजार 282 स्क्वायर यार्ड एरिया कवर करने की तैयार रूपरेखा के तहत भदोही के हैंड नाटेड परंपरागत कालीनों को तैयार किया जा रहा है। परिसर में राज्यसभा के लिए 151 तथा लोकसभा के लिए 131 पीस कालीनों के ऑर्डर मिल चुके हैं।</p>
<p>उन्होंने बताया कि कालीनों की वाल टू वाल फीटिंग के लिए 30 से 40 कुशल कारीगरों की टीम दिल्ली भेजी जाएगी, जो इन कालीनों को सफाई से जोड़कर आकर्षक आकार देंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Fri, 19 May 2023 14:41:43 +0530</pubDate>
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