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                <title>US sanctions - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>US sanctions RSS Feed</description>
                
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                <title>'भारत माँ का सिर मत झुकाओ': अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार के ट्रंप के सामने झूकने पर उठाए सवाल, बोले-भारत को रूस से तेल खरीदने की इजाजत देने वाला अमेरिका होता कौन है ?</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने रूसी तेल खरीद पर अमेरिका से 'छूट' लेने को भारतीय संप्रभुता का अपमान बताया है। उन्होंने केंद्र सरकार पर डोनाल्ड ट्रम्प के सामने नतमस्तक होने का आरोप लगाते हुए कहा कि 140 करोड़ भारतीयों का नेतृत्व इतना कमजोर कभी नहीं रहा। केजरीवाल ने राष्ट्रीय हितों की रक्षा न कर पाने पर सरकार से इस्तीफे की मांग की।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/arvind-kejriwal-raised-questions-on-the-central-government-bowing-before/article-145516"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/arvind-kejriwal.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर प्रहार करते हुए कहा, ऐसी क्या मजबूरी है कि हर कदम पर केंद्र सरकार अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सामने झुकते रहे और उसके सामने बोलने तक की हिम्मत नहीं हुई। केजरीवाल ने एक्स पर कहा, भारत को रूस से तेल खरीदने की इजाजत देने वाला अमेरिका कौन होता है? भारत को अमेरिका से इजाजत की क्यों जरूरत है? पिछले कुछ महीनों में देशवासियों ने बहुत पीड़ा के साथ देखा है कि किस तरह एक के बाद एक, हर कदम पर आप ट्रम्प के सामने झुक गए और आपकी उसके सामने बोलने तक की हिम्मत नहीं हुई।</p>
<p>आप संयोजक ने कहा, केंद्र सरकार की ऐसी कौन सी मजबूरी है जिस की वजह से सरकार ट्रंप के सामने नतमस्तक हैं। भारत हजारों वर्ष पुराना देश है। भारत 140 करोड़ लोगों का एक महान देश है। भारत ने एक से बढ़कर एक वीर योद्धा पैदा किये हैं। आज तक भारत ने किसी भी देश के सामने इस तरह सिर नहीं झुकाया। आज तक भारतीय इतिहास में कभी भी भारत का नेतृत्व इतना कमजोर नहीं रहा।</p>
<p>आप नेता ने कहा, अगर केंद्र सरकार की वाकई कोई ऐसी मजबूरी है जिसका फ़ायदा ट्रम्प उठा रहा है, तो भारत और भारतीय हितों की खातिर, सरकार अपना इस्तीफ़ा दें दे, पर ऐसे भारत माँ का सर मत झुकाइए। सभी देशवासियों को बेहद पीड़ा हो रही है। उल्लेखनीय है कि अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की आपूर्ति बनाए रखने के लिए भारतीय रिफाइनरियों को रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिन की छूट दी है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Mar 2026 16:50:25 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>केसी वेणुगोपाल का केंद्र सरकार पर हमला, बोले-अमृत काल में भारत को तेल खरीदने के लिए मांगनी पड़ रही अमेरिका से छूट, देश की संप्रभुता के लिए अपमानजनक</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने रूस से तेल खरीद पर अमेरिका से 'छूट' मांगने को राष्ट्रीय अपमान बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और संप्रभुता को गिरवी रख रही है। वेणुगोपाल ने मांग की कि भारत को विदेशी दबाव के बिना अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्णय लेने चाहिए।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-general-secretary-kc-venugopal-attacked-the-central-government-and/article-145465"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/kc-vanugopal.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल ने केंद्र सरकार पर हमला करते हुए कहा है कि अमृत काल में भारत को अपनी पसंद के देश से तेल खरीदने के लिए अन्य देशों के सामने गुहार लगानी पड़ रही है, जो भारत की संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा के लिए बेहद अपमानजनक है।</p>
<p>केसी वेणुगोपाल ने शुक्रवार को कहा कि यह बेहद चिंताजनक है कि भारत को अपने लंबे समय से विश्वसनीय साझेदार रूस से तेल खरीदने के लिए अमेरिका से छूट मांगनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और ऊर्जा सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है।</p>
<p>गौरतलब है कि कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार को अमेरिका द्वारा शर्तें थोपे जाने के खिलाफ मजबूती से खड़ा होना चाहिए था, लेकिन इसके बजाय वह भारत की ऊर्जा संप्रभुता को दूसरे देशों के हाथों में सौंप रहे हैं।</p>
<p>केसी वेणुगोपाल ने कहा कि भारत को मजबूत और स्वतंत्र रुख अपनाते हुए अपने सर्वोच्च राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्णय लेने चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति किसी अन्य देश के निर्देशों पर नहीं चलनी चाहिए और न ही किसी से अनुमति लेकर फैसले किए जाने चाहिए।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Mar 2026 14:00:04 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>वेनेजुएला के तेल पर US का कंट्रोल : भारत के लिए बना चिंता का विषय, जानें कैसे ?</title>
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                        <![CDATA[नालिस्ट और इंडस्ट्री सूत्रों ने कहा कि वेनेजुएला के तेल सेक्टर पर US के नेतृत्व में कब्ज़ा या रीस्ट्रक्चरिंग से भारत को सीधा फायदा हो सकता है, जिससे लंबे समय से अटके लगभग 1 अरब अमेरिकी डॉलर के बकाए का रास्ता खुल सकता है]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/us-control-over-venezuelan-oil-has-become-a-matter-of/article-138353"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/us-oil.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। वेनेजुएला के राजनीतिक घटनाक्रम और वहां के तेल क्षेत्र पर संभावित अमेरिकी नियंत्रण ने भारत के ऊर्जा भविष्य के लिए नई उम्मीदें जगा दी हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के हटने के बाद अमेरिका वहां के तेल बुनियादी ढांचे का पुनर्गठन करता है, तो भारत को न केवल अपना बकाया $1 अरब (लगभग 8,400 करोड़ रुपये) वापस मिल सकता है, बल्कि कच्चे तेल की आपूर्ति में भी भारी उछाल आ सकता है।</p>
<p><strong>अटका हुआ लाभांश और उत्पादन में गिरावट</strong></p>
<p>ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (OVL) का सैन क्रिस्टोबल तेल क्षेत्र में 40% हिस्सा है, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण 2014 से उसका करीब $536 मिलियन का लाभांश अटका हुआ है। कुल बकाया अब $1 अरब के करीब पहुंच चुका है। प्रतिबंधों की वजह से इस क्षेत्र का उत्पादन गिरकर महज 5,000-10,000 बैरल प्रति दिन (bpd) रह गया है।</p>
<p><strong>तकनीकी सहयोग और उत्पादन क्षमता</strong></p>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार, यदि प्रतिबंध हटते हैं, तो OVL गुजरात से अपने उन्नत रिग्स और उपकरण वेनेजुएला भेज सकता है। इससे सैन क्रिस्टोबल क्षेत्र का उत्पादन बढ़कर 80,000 से 1,00,000 bpd तक पहुंच सकता है। इसके अलावा, कैराबोबो-1 प्रोजेक्ट में भी इंडियन ऑयल (IOC) और ऑयल इंडिया (OIL) की हिस्सेदारी है, जिसे पुनर्जीवित किया जा सकेगा।</p>
<p><strong>भारतीय रिफाइनरियों के लिए रणनीतिक लाभ</strong></p>
<p>रिलायंस इंडस्ट्रीज और नायरा एनर्जी जैसी भारतीय रिफाइनरियां वेनेजुएला के भारी कच्चे तेल को प्रोसेस करने के लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई हैं। 2020 से पहले भारत 4,00,000 bpd तेल आयात करता था। अमेरिकी नियंत्रण के बाद, भारत को रूसी तेल पर निर्भरता कम करने और मध्य पूर्व के देशों के साथ कीमतों पर बेहतर सौदेबाजी करने में मदद मिलेगी।</p>
<p><strong>भू-राजनीतिक बदलाव</strong></p>
<p>वेनेजुएला के पास 303 बिलियन बैरल का दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है। अमेरिका का इस पर नियंत्रण चीन के प्रभाव को कम करेगा और वैश्विक तेल कीमतों को स्थिर करने में मदद करेगा। भारत के लिए यह न केवल अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने का मौका है, बल्कि लैटिन अमेरिका में अपनी रणनीतिक पहुंच बढ़ाने का भी द्वार है।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 04 Jan 2026 17:40:26 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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            <item>
                <title>अमेरिका का कड़ा रूख, ईरान-वेनेजुएला हथियार व्यापार को लेकर लगाए नए प्रतिबंध</title>
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                        <![CDATA[ अमेरिका ने ईरान और वेनेजुएला के बीच कथित तौर पर हो रहे हथियारों के व्यापार को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों देशों की 10 संस्थाओं और व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/americas-tough-stance-new-sanctions-imposed-on-iran-venezuela-arms-trade/article-137938"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/donald-trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिगटन। अमेरिका ने ईरान और वेनेजुएला के बीच कथित तौर पर हो रहे हथियारों के व्यापार को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों देशों की 10 संस्थाओं और व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। अमेरिका का आरोप है कि तेहरान, वेनेजुएला को पारंपरिक हथियारों की आपूर्ति कर रहा है, जिससे अमेरिकी सुरक्षा हितों को खतरा पैदा हो गया है।</p>
<p>अमेरिकी विदेश विभाग और वित्त विभाग के मंगलवार को जारी अलग-अलग बयानों में कहा गया कि इन प्रतिबंधों का उद्देश्य ईरान और वेनेजुएला के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग को रोकना है। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, प्रतिबंधों के दायरे में आई एक वेनेजुएला की कंपनी कथित तौर पर ईरानी डिजाइन वाले 'कॉम्बैट अनमैन्ड एरियल व्हीकल' या हमलावर ड्रोन की खरीद-बिक्री में शामिल रही है। अमेरिकी दावों के मुताबिक, यह व्यापार लाखों डॉलर का है और इसमें शामिल ड्रोन युद्धक अभियानों में सक्षम हैं।</p>
<p>इसके आगे बयान में कहा गया है कि ईरान के वेनेजुएला को हथियारों की आपूर्ति करना न केवल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा है, बल्कि यह अमेरिकी मातृभूमि की सुरक्षा के लिए भी चुनौती है। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह ऐसे किसी भी सैन्य गठबंधन को बर्दाश्त नहीं करेगा जो उसके हितों को प्रभावित करता हो।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि, ईरान और वेनेजुएला दोनों ही लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं, जिसके कारण हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापारिक और सैन्य संबंध और भी प्रगाढ़ हुए हैं।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 Dec 2025 17:23:22 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
                    </dc:creator>
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            <item>
                <title>चीनी ड्रोन निर्माता डीजेआई ने विदेशी ड्रोन आयात पर अमेरिका के प्रतिबंध के फैसले पर जताया खेद</title>
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                        <![CDATA[चीनी ड्रोन निर्माता डीजेआई ने अमेरिका द्वारा नए विदेशी ड्रोनों के आयात पर प्रतिबंध लगाने के फैसले पर खेद जताया है। कंपनी ने कहा कि यह कदम उपभोक्ताओं की पसंद और मुक्त बाजार के सिद्धांतों को कमजोर करता है।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/chinese-drone-manufacturer-dji-regrets-us-decision-to-ban-foreign/article-136952"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/china-drone.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। मानवरहित हवाई वाहनों की दुनिया की सबसे बड़ी निर्माता कंपनी, चीनी ड्रोन निर्माता डीजेआई ने मंगलवार को अमेरिका द्वारा सभी नए आयातित विदेशी ड्रोनों को प्रतिबंधित करने के फैसले पर खेद व्यक्त किया। 'हुआनकिउ' समाचार एजेंसी के अनुसार डीजेआई ने कहा कि अमेरिका का यह कदम न केवल अमेरिकी उपभोक्ताओं और व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं के लिए पसंद की स्वतंत्रता को सीमित करता है, बल्कि एक खुले एवं निष्पक्ष बाजार के सिद्धांतों को भी कमजोर करता है।</p>
<p>हुआनकिउ ने कंपनी के हवाले से कहा, पिछले कई वर्षों में, डीजेआई उत्पादों की सुरक्षा और विश्वसनीयता वैश्विक बाजार और कई प्रतिष्ठित स्वतंत्र तृतीय-पक्ष संगठनों द्वारा प्रमाणित की गई है।</p>
<p>अमेरिकी मीडिया के मुताबिक, अमेरिकी संघीय संचार आयोग (एफसीसी) ने सुरक्षा चिंताओं के कारण नए विदेशी ड्रोनों के आयात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है, जिससे चीनी कंपनियों डीजेआई और ऑटेल के लिए अमेरिकी बाजार में नए ड्रोन मॉडल की आपूर्ति प्रभावी रूप से अवरुद्ध हो गई है।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Dec 2025 17:47:23 +0530</pubDate>
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                <title>रूस ने ओबामा सहित पांच सौ अमेरिकी नागरिकों को किया बैन</title>
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                        <![CDATA[मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका के लिए यह सीखने का सही समय है कि रूस के खिलाफ एक भी शत्रुतापूर्ण हमले को बिना कड़ी प्रतिक्रिया के नहीं छोड़ा जाएगा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russia-sanctions-500-us-citizens-including-obama/article-46061"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/obama-1.png" alt=""></a><br /><p>मास्को। रूस ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा समेत 500 अमेरिकी नागरिकों को रूस में प्रवेश करने पर अनिश्चित काल के लिए प्रतिबंधित लगा दिया है।</p>
<p>रूसी विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को यह घोषणा की। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि नई ब्लैक लिस्ट में शामिल लोगों में महत्वपूर्ण व्यक्ति, अधिकारी, सांसद, विशेषज्ञ और सैन्य-औद्योगिक कंपनियों के प्रमुख शामिल हैं।  रूस ने कहा कि यात्रा प्रतिबंध जो बिडेन प्रशासन द्वारा बार-बार लगाए गए रूसी विरोधी प्रतिबंधों के जवाब में पेश किया गया है। मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका के लिए यह सीखने का सही समय है कि रूस के खिलाफ एक भी शत्रुतापूर्ण हमले को बिना कड़ी प्रतिक्रिया के नहीं छोड़ा जाएगा।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 May 2023 11:41:38 +0530</pubDate>
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