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                <title>Middle East - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Middle East RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पश्चिम एशिया संकट के बीच संयुक्त राष्ट्र की अपील : होर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखना जरूरी, गुटेरेस ने कहा-मौजूदा संघर्ष का कोई सैन्य समाधान नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान की अपील की है। उन्होंने कूटनीतिक समाधान पर जोर देते हुए कहा कि समुद्री व्यापार में व्यवधान वैश्विक अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। यूएन ने पाकिस्तान और सऊदी अरब के मध्यस्थता प्रयासों की सराहना करते हुए शांति वार्ता जारी रखने का आह्वान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/uns-appeal-amid-west-asia-crisis-it-is-necessary-to/article-150405"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(13).png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच सभी पक्षों से होर्मुज़ जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार नौवहन की स्वतंत्रता का सम्मान बनाए रखने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि इस जलडमरूमध्य में समुद्री व्यापार में व्यवधान का असर क्षेत्र से बाहर भी पड़ा है और इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में अस्थिरता तथा विभिन्न क्षेत्रों में असुरक्षा बढ़ी है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि मौजूदा संघर्ष का कोई सैन्य समाधान नहीं है और कूटनीतिक प्रयासों को जारी रखना जरूरी है। उन्होंने इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई वार्ता को "सकारात्मक कदम" बताते हुए कहा कि युद्धविराम बनाए रखना और उल्लंघनों को रोकना आवश्यक है।</p>
<p>एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि गहरे मतभेदों के कारण समझौता तुरंत संभव नहीं है, लेकिन रचनात्मक बातचीत जारी रहनी चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान, सऊदी अरब, मिस्र और तुर्किये सहित मध्यस्थ देशों के प्रयासों की सराहना की। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में व्यवधान से लगभग 20,000 नाविक प्रभावित हुए हैं और वैश्विक व्यापार, खाद्य सुरक्षा तथा आपूर्ति शृंखलाओं पर गंभीर असर पड़ा है। संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियां सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के लिए तंत्र विकसित करने में जुटी हैं, जबकि महासचिव के विशेष दूत क्षेत्र में बातचीत जारी रखे हुए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 18:26:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच शी जिनपिंग ने रखा चार-सूत्री योजना का प्रस्ताव : दुनिया को जंगल बनाने से बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून का करना चाहिए सम्मान, विकास एवं सुरक्षा के सामंजस्य पर दिया जोर</title>
                                    <description><![CDATA[चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पश्चिम एशिया में स्थिरता के लिए चार-सूत्री सुरक्षा प्रस्ताव पेश किया है। अबू धाबी के युवराज के साथ बैठक में उन्होंने संप्रभुता के सम्मान और अंतरराष्ट्रीय कानून पर जोर दिया। अमेरिका-ईरान वार्ता विफल होने और तेल की कीमतों में उछाल के बीच चीन अब इस संकट में मध्यस्थ बनने की तैयारी में है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/amidst-the-increasing-tension-in-west-asia-xi-jinping-proposed/article-150367"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/shi-jinpin.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पश्चिम एशिया युद्ध में मध्यस्थ की भूमिका में दिलचस्पी दिखाते हुए कहा है कि उन्होंने क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए यहां अबू धाबी के युवराज ज़ायेद अल नहयान के साथ बैठक में चार-सूत्री प्रस्ताव रखा है। शी जिनपिंग ने शांति पर जोर देते हुए कहा कि पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र के लिए एक साझा, विस्तृत, सहयोगपूर्ण और टिकाऊ सुरक्षा व्यवस्था बनायी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी देशों की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता का भी पूरी तरह सम्मान होना चाहिए। साथ ही नागरिकों एवं अवसंरचनाओं की भी सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए।</p>
<p>शी जिनपिंग ने कहा कि दुनिया को जंगल बनाने से बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने विकास एवं सुरक्षा के सामंजस्य पर जोर देते हुए सभी पक्षों से साथ आकर क्षेत्रीय विकास के लिए अनुकूल माहौल बनाने अनुरोध किया। चीन का कूटनीतिक प्रयास ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका-ईरान के बीच दो सप्ताह का युद्धविराम चल रहा है। इस दौरान दोनों देशों ने पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस्लामाबाद में बैठकर शांति वार्ता भी की। यह शांति वार्ता 21 घंटे तक चली लेकिन इसका कोई हल नहीं निकला, जिससे युद्धविराम पर संकट के बादल मंडराने लगे। इस बीच, अमेरिका ने राष्ट्रपति ट्रंप की घोषणा के बाद ईरान के बंदरगाहों को बाधित कर दिया है, जिससे तेल के दामों में उछाल देखने को मिला है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 16:26:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिकी नाकेबंदी पर ईरान का पलटवार : राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार ; इरावानी ने इसे संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का &quot;घोर उल्लंघन&quot; बताया </title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र में ईरान ने अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी की कड़ी निंदा करते हुए इसे संप्रभुता का उल्लंघन करार दिया है। राजदूत अमीर सईद इरावानी ने इसे अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए खतरा बताते हुए सुरक्षा परिषद से हस्तक्षेप की मांग की है। तेहरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है और पड़ोसी देशों से भारी हर्जाने की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/irans-counterattack-on-us-blockade-is-a-gross-violation-of/article-150373"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran-war.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। ईरान ने अमेरिका द्वारा उसके बंदरगाहों की कथित नौसैनिक नाकेबंदी की कड़ी निंदा करते हुए इसे उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का "घोर उल्लंघन" बताया है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि अमीर सईद इरावानी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को लिखे पत्र में इस कदम को "अवैध आक्रामक कार्रवाई" करार दिया, जो क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए खतरा है।</p>
<p>इरावानी ने कहा कि 12 अप्रैल को यूएस सेंट्रल कमांड द्वारा घोषित यह नाकेबंदी संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का उल्लंघन है और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत "आक्रामकता का स्पष्ट उदाहरण" है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम ईरान के बंदरगाहों से आने-जाने वाले समुद्री यातायात को रोकने का प्रयास है, जिससे न केवल ईरान के संप्रभु अधिकारों में हस्तक्षेप हो रहा है, बल्कि तीसरे देशों और वैध समुद्री व्यापार के अधिकारों का भी उल्लंघन हो रहा है। ईरानी दूत ने चेतावनी दी कि तेहरान अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए "सभी आवश्यक और उचित कदम" उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है।</p>
<p>ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से इस मुद्दे पर तत्काल हस्तक्षेप कर नाकेबंदी की निंदा करने और क्षेत्र में बढ़ते तनाव को रोकने की अपील की है। इस बीच, अमेरिकी नौसेना ने पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है, जिसमें यूएसएस अब्राहम लिंकन सहित कई युद्धपोत और 11 विध्वंसक तैनात हैं। हालांकि, ऑपरेशन में शामिल जहाजों की सटीक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में सप्ताहांत में हुई वार्ता विफल रहने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी को मंजूरी दी।</p>
<p>इसके अलावा, ईरान ने बहरीन, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन से भी मुआवजे की मांग की है। ईरान का आरोप है कि इन देशों ने अमेरिका-इज़राइल अभियान में भूमिका निभाई और कुछ मामलों में ईरान के भीतर नागरिक ठिकानों पर "अवैध हमलों" में भी शामिल रहे। इरावानी ने पत्र में श्री एंटोनियो गुटेरेस और बहरीन (जो अप्रैल में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता संभाल रहा है) को संबोधित करते हुए कहा कि बहरीन, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन को ईरान को "पूर्ण क्षतिपूर्ति" देनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन देशों को अपने "अंतरराष्ट्रीय रूप से अवैध कृत्यों" के कारण हुए सभी भौतिक और नैतिक नुकसान की भरपाई करनी होगी। ईरान के अनुसार, इन कार्रवाइयों से उसे भौतिक और नैतिक दोनों प्रकार का नुकसान हुआ है, जिसकी भरपाई संबंधित देशों को करनी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 15:34:26 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पीएम बेंजामिन नेतन्याहू का ऐलान : इज़रायल जल्द शुरू करेगा लेबनान के साथ सीधी शांति वार्ता, लेबनानी हमले में 300 लोगों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने लेबनान के साथ जल्द सीधी शांति वार्ता शुरू करने की घोषणा की है। भीषण हवाई हमलों और 300 मौतों के बाद उपजे तनाव के बीच, इस कदम को अमेरिका-ईरान युद्धविराम बचाने की कोशिश माना जा रहा है। इज़रायल ने स्पष्ट किया कि शांति प्रक्रिया को कायम रखने के लिए कूटनीतिक रास्ते खुले हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/pm-benjamin-netanyahu-announces-israel-will-soon-start-direct-peace/article-149814"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/natnahu.png" alt=""></a><br /><p>तेल अवीव। इज़रायल लेबनान के साथ "जितनी जल्दी हो सके" सीधी शांति वार्ता शुरू करेगा, जिससे अमेरिका-ईरान के बीच हुई नाज़ुक युद्धविराम संधि को कायम रहने का मौका मिलेगा। इज़रायली मीडिया के अनुसार प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को यह घोषणा की। इज़रायली वायु सेना द्वारा लेबनान में हिज़्बुल्लाह पर हमला किए जाने के बाद यह नाज़ुक शांति प्रक्रिया अधर में लटक गई थी। अपुष्ट रिपोर्टों के अनुसार इज़रायली हमले में लगभग 300 लोग मारे गए थे। हिज़्बुल्लाह पर इज़रायली हमलों के बाद ईरान ने चेतावनी दी थी कि इन हमलों ने बातचीत को "बेमानी" बना दिया है।</p>
<p>इस बात को लेकर युद्धविराम संधि संकट में थी कि क्या लेबनान भी इन वार्ताओं का एक विषय है। जहाँ ईरान ने कहा कि वह इन वार्ताओं का हिस्सा है, वहीं इज़रायल और अमेरिका ने इससे इनकार कर दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 12:31:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान के तीन-सूत्री उल्लंघन के दावों पर वेंस का बड़ा बयान : हमेशा पेचीदा होते हैं युद्धविराम, लेबनान हवाई हमलों में 254 लोगों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के आरोपों पर कहा कि युद्धविराम की प्रक्रिया अक्सर अव्यवस्थित होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका और उसके सहयोगियों का लक्ष्य बमबारी रोकना है। वेंस ने ईरान के यूरेनियम भंडार पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अमेरिका दावों के बजाय ईरान के वास्तविक कार्यों पर ध्यान देगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/vances-big-statement-on-irans-three-point-violation-claims-ceasefire-is/article-149782"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/jd-vance1.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान द्वारा युद्धविराम समझौते के तीन बिंदुओं के उल्लंघन के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि "युद्धविराम हमेशा पेचीदा होते हैं।" जेडी वेंस ने हंगरी से प्रस्थान से पहले संवाददाताओं से बातचीत में ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर ग़ालिबाफ़ के उस बयान पर टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने वॉशिंगटन पर युद्धविराम के तीन प्रावधानों के जानबूझकर उल्लंघन का आरोप लगाया था। वेंस ने कहा कि यदि ग़ालिबाफ़ के पास केवल तीन असहमति के बिंदु हैं, तो इसका अर्थ है कि काफी हद तक सहमति भी है।</p>
<p>जेडी वेंस ने कहा, "युद्धविराम हमेशा थोड़ा अव्यवस्थित होता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा युद्धविराम की घोषणा के एक घंटे के भीतर ही ईरान ने पड़ोसी देशों पर कई मिसाइलें दागीं, जिसके बाद इज़रायल और कुछ खाड़ी अरब देशों ने जवाबी कार्रवाई की।" उन्होंने कहा, "यही युद्धविराम की प्रकृति है। कोई भी युद्धविराम बिना कुछ उतार-चढ़ाव के नहीं होता। हम स्पष्ट रूप से यह चाहते हैं कि बमबारी रुके। हम अपने सहयोगियों से भी बमबारी रोकने को कहते हैं और ईरान से भी यही अपेक्षा रखते हैं। हमें संकेत मिल रहे हैं कि स्थिति सही दिशा में जा रही है, लेकिन इसमें थोड़ा समय लगेगा।"</p>
<p>जेडी वेंस ने यह भी कहा कि उन्हें यह "दिलचस्प" लगा कि श्री ग़ालिबफ़ ने कहा कि ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम के बड़े भंडार को छोड़ने के अपने "अधिकार" से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा, "हम इस बात की चिंता नहीं करते कि वे क्या करने का अधिकार होने का दावा करते हैं, बल्कि इस बात पर ध्यान देते हैं कि वे वास्तव में क्या करते हैं।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 18:26:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ट्रंप ने की पुष्टि : अंतिम समझौता होने तक ईरान के आसपास तैनात रहेंगे अमेरिकी जहाज़ और विमान, परमाणु हथियार विकसित करने पर लगाई रोक</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि ईरान के साथ पूर्ण समझौता लागू होने तक अमेरिकी युद्धपोत और सैन्य बल वहां तैनात रहेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि समझौते का उल्लंघन होने पर "बड़ा और घातक" पलटवार किया जाएगा। ट्रंप ने परमाणु हथियारों पर रोक और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को अमेरिका की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/american-ships-and-aircraft-will-be-deployed-nearby-until-the/article-149716"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump3.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ अंतिम समझौते के पूरी तरह लागू होने तक उनके युद्धपोत, विमान और सैन्य बल ईरान के आसपास तैनात रहेंगे। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर कहा, "अमेरिका के सभी जहाज, विमान और सैन्य कर्मी, अतिरिक्त गोला-बारूद, हथियार और अन्य सभी चीजें ईरान में और उसके आसपास तब तक तैनात रहेंगे, जब तक कि वास्तविक समझौते का पूरी तरह से पालन नहीं हो जाता।"</p>
<p>उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समझौता लागू नहीं हुआ, तो संघर्ष पहले से कहीं अधिक "बड़ा, बेहतर और अधिक ताकतवर" रूप ले सकता है।अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि अमेरिका लंबे समय से इस बात पर कायम है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा और होर्मुज जलडमरूमध्य खुला तथा सुरक्षित रहेगा। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिकी सेना हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार है और आगे की कार्रवाई के लिए पूरी तरह से सतर्क है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 15:30:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>जेडी वैंस का दावा: अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम समझौते में लेबनान शामिल नहीं, समझौते की तीन धाराओं के उल्लंघन का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने स्पष्ट किया कि ईरान के साथ हुए युद्धविराम में लेबनान शामिल नहीं था। उन्होंने ईरानी दावों को 'गलतफहमी' बताते हुए कहा कि संघर्ष विराम की प्रक्रिया जटिल होती है। वैंस के अनुसार, इजरायल और खाड़ी देशों की जवाबी कार्रवाई समझौतों का उल्लंघन नहीं, बल्कि सुरक्षा का हिस्सा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/jd-vance-claims-lebanon-is-not-included-in-the-ceasefire/article-149657"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/jd-vance.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने ईरान के साथ हुए युद्धविराम पर कहा कि उनका मानना है कि ईरान को यह गलतफहमी थी कि लेबनान को भी इसमें शामिल किया गया है। श्री वैंस बुधवार को हंगरी से रवाना होते समय पत्रकारों से बातचीत में ये बातें कही। जेडी वैंस ने कहा कि युद्धविराम हमेशा पेचीदा होते हैं और उन्होंने ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ के इस दावे का जवाब दिया कि अमेरिका ने ईरान के साथ युद्धविराम समझौते की तीन धाराओं का उल्लंघन किया है।</p>
<p>ईरानी संसद के अध्यक्ष ने दावा किया था कि अमेरिका युद्धविराम समझौते के तीन बिंदुओं का उल्लंघन कर रहा है। उन्होंने लेबनान में लगातार गोलीबारी, कथित रूप से ईरानी हवाई क्षेत्र में ड्रोन के प्रवेश और ईरान के यूरेनियम संवर्धन के अधिकार से इनकार का हवाला दिया। जेडी वेंस ने कहा कि अगर श्री ग़ालिबफ़ के असहमति के केवल तीन बिंदु हैं, तो निश्चित रूप से कई बिंदुओं पर सहमति भी होगी। उपराष्ट्रपति ने कहा, "सबसे पहले, उन्होंने ईरान पर हुए एक कथित हमले का जिक्र किया और बताया कि यह युद्धविराम का उल्लंघन था। युद्धविराम हमेशा ही पेचीदा होते हैं।" उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा युद्धविराम की घोषणा के एक घंटे बाद ही कई मिसाइलें दागी गईं, इजरायल ने जवाबी कार्रवाई की और कुछ खाड़ी अरब देशों ने भी जवाबी कार्रवाई की।</p>
<p>जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका ने कभी भी लेबनान को युद्धविराम समझौते में शामिल करने का वादा नहीं किया था, भले ही ईरान ने ऐसा दावा किया हो और उन्होंने इसे दोनों पक्षों के बीच एक गलतफहमी करार दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 14:35:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>युद्धविराम विश्व शांति के लिए बड़ा दिन : ट्रंप ने कहा-अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने में करेगा मदद</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका-ईरान युद्धविराम को विश्व शांति के लिए मील का पत्थर बताया है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापार बहाल करने और ईरान के पुनर्निर्माण में मदद का वादा किया। ट्रंप के अनुसार, यह समझौता मध्य पूर्व के लिए 'स्वर्ण युग' की शुरुआत साबित होगा, जिससे क्षेत्र में समृद्धि और आर्थिक मजबूती आएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/armistice-is-a-big-day-for-world-peace-trump-said/article-149512"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/trump-big-disi.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम को विश्व शांति के लिए एक बड़ा दिन बताया और कहा कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि ईरान ऐसा चाहता है क्योंकि वे तंग आ चुके हैं। इसी तरह बाकी सभी भी तंग आ चुके हैं।' उन्होंने कहा कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में यातायात बढ़ाने में मदद करेगा और कई सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि खूब पैसा बनाया जाएगा और ईरान पुनर्निर्माण प्रक्रिया शुरू कर सकता है। ट्रंप ने कहा कि हम हर तरह की आपूर्ति लेकर आएंगे और यहीं आसपास मंडराते रहेंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सब कुछ ठीक चल रहा है। उन्होंने आशा व्यक्त किया कि सब कुछ ठीक चलेगा। ट्रंप ने कहा कि यह अमेरिका की तरह पश्चिम एशिया का स्वर्ण युग हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 13:21:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>भारी गोलीबारी के बीच अमेरिका ने F-15E पायलट को ढूंढ निकाला: ट्रंप ने बताया किस हालत में है ईरान से रेस्क्यू किया गया पायलट </title>
                                    <description><![CDATA[मध्य-पूर्व युद्ध के 36वें दिन अमेरिका ने पुष्टि की है कि ईरान द्वारा मार गिराए गए F-15E जेट के दूसरे लापता पायलट को सुरक्षित खोज लिया गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर इस खबर की पुष्टि की। ईरानी सेना ने पायलट पर 60,000 डॉलर का इनाम घोषित किया था, लेकिन अमेरिकी रेस्क्यू टीम ने भारी गोलाबारी के बीच उसे बचा लिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/amidst-heavy-firing-america-found-the-f-15e-pilot-trump-told/article-149159"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। मीडिल ईस्ट जंग को आज 36 दिन हो गए है और इस बीच शुक्रवार को ईरान ने अमेरिका के F-15E जेट को मार गिराया था और इस हमले में एक पायलट को सुरक्षित बचा लिया गया था, जबकि दूसरे को कोई पता नहीं था। लेकिन आज अल जजीरा ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से जानकारी देते हुए कहा किया लो पायलट लापता हो गया था उसे खोज निकाला गया है। अमेरिकी अघिकारियों ने पुष्टि की कि भारी गोलीबारी के बीच हमने F-15E विमान के दूसरे पायलट को भी सुरक्षित बचा लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भी इस बात का दावा करते हुए अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ पर इस बात की पुष्टि की।</p>
<p>अमेरिकी अधिकारियों ने बताया है कि अ​भी भी लापता पायलट को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना बाकी इसलिए बचाव अभियान जारी है। इधर, ईरानी सेना भी लापता पायलट को खोजने में लगी हुई है। ईरानी सेना ने एलान किया था कि जो कोई भी उस पायलट को ढूंढ निकालेगा उसे 60,000 डॉलर का इनाम दिया जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 12:32:29 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मिडिल ईस्ट में युद्ध : परिंदे भी हुए बेघर, दूसरे देशों में ढूंढ रहे बसेरा, सर्दियों में हर साल मध्य एशिया और सेंट्रल यूरोप से कोटा आते हैं पक्षी</title>
                                    <description><![CDATA[इजरायल- ईरान युद्ध के कारण बदलना पड़ रहा पारंपरिक मार्ग।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/war-in-the-middle-east-leaves-birds-homeless--seeking-refuge-in-other-nations%E2%80%94every-winter--birds-arrive-in-kota-from-central-asia-and-central-europe/article-148841"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)-(4)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। सर्दियों में कोटा के जलाशयों की रौनक बढ़ाने वाले विदेशी मेहमान परिंदों की घर वापसी का सिलसिला शुरू हो गया है। लेकिन इस बार मिडिल ईस्ट में युद्ध के चलते वह भी अपने मूल निवास पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। बमबारी, धुआं और बढ़ते तापमान के कारण कुछ पक्षियों ने अपने पारंपरिक मार्ग बदल दिए हैं। कई पक्षी खाड़ी देशों की ओर जाने के बजाय सेंट्रल यूरोप और एशिया के ठंडे इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं। फिर भी हर साल की तरह इस बार भी अप्रैल तक कोटा के जलाशय इन मेहमान परिंदों से खाली हो जाएंगे।दो दर्जन से अधिक प्रजातियों के ये पक्षी हर साल कोटा जिले के जलाशयों में चार से पांच महीने तक प्रवास करते हैं और यहां के मौसम व भोजन के अनुकूल वातावरण में रहते हैं। मार्च के अंत और अप्रैल की शुरुआत से इन पक्षियों की वापसी तेज हो जाती है। इस समय जलाशयों से पक्षियों के बड़े-बड़े झुंड उड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। अप्रैल तक मेहमान व मेजबान पक्षी एक बार फिर बिछुड़ जाएंगे।</p>
<p><strong>इजरायल- ईरान युद्ध के कारण बदलना पड़ रहा बसेरा</strong><br />नेचर प्रोमोटर ए.एच. जैदी ने बताया कि इस बार अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर भी पक्षियों के प्रवास पर देखने को मिल रहा है। कई पक्षी खाड़ी देशों की ओर जाने के बजाय सेंट्रल यूरोप और एशिया के ठंडे इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मध्य एशिया में युद्ध के कारण कुछ पक्षियों का समूह भारत, चाइना, रूस सहित कई देशों के ठंडे इलाकों की रुख भी कर रहे हैं। युद्ध में हो रही बमबारी के कारण वायुमंडल में धुआं, आगजनी से तापमान की अधिकता के कारण पक्षी खाड़ी देशों की ओर रुख करने के बजाय अपना मार्ग बदल रहे हैं। हाल ही में कई जलाशयों पर इनकी संख्या कम होती दिखाई दे रही है।</p>
<p><strong>इटली से जर्मनी तक इन देशों से आते हैं परिंदे</strong><br />उन्होंने बताया कि कोटा जिले में मध्य यूरोप, फ्रांस, जर्मनी, इटाली, इंग्लैंड, मंगोलिया, ईरान, साइबेरिया, रूस, चाइना, तिब्बत, नेपाल, हिमालय, भारत के लडाख समेत अन्य उंडे प्रदेशों से पक्षी आते हैं। विदेशी पक्षी कोटा के जिन तालाबों में आना पसंद करते हैं, उनमें दरा अभयारणय का किशोर सागर, गोपाल विहार, गिरधरपुरा, उदपुरिया, उम्मेदगंज पक्षी विहार, आलनिया, रानपुर, अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क, जवाहर बाई का तालाब, गैपरनाथ, गरड़िया महादेव, भैंसरोडगढ़ सहित कई वेटलैंड शामिल है।</p>
<p><strong>5 महीने परिंदों चहचहाट से गुलजार रहते हैं वेटलैंड</strong><br />उन्होंने बताया कि देश-प्रदेश से विभिन्न प्रजातियों के पक्षी हाड़ौती के जंगलों की ओर रुख करते हैं। इनमें से नॉर्दन शावलर, नॉर्दन पिनटेल, इरोशियन विजन, गेडवेल, कॉमन टिल, कॉटन टिल, कॉमन पोचाई, रेड करस्टेड पोचाई, टफ टेड वाइट आई पोचार्ड, बार हैडेड मूज, रूडी शेल्डक, कॉमन फूट, कॉम डक समेत कई प्रजातियों के पक्षी शामिल हैं। इनकी चहचहाट ये शिक्षा नगरी की फिजा गुलजार रहती है। इन्हें देखने के लिए बर्ड्स वॉचर की भीड़ लगी रहती है।</p>
<p><strong>मिस्त्र का राष्ट्रीय पक्षी भी पहुंचा अपने मुल्क</strong><br />पक्षी प्रेमी शेख जुनैद ने बताया कि कजाकिस्तान, रूस, मंगोलिया, चीन से हजारों किमी का सफर तय शिक्षा नगरी में आए मिस्त्र के राष्ट्रीय पक्षी स्टेपी ईगल भी अपने मुल्क की ओर कुच कर गए। हालांकि, कई जगहों पर इनकी संख्या बहुत कम नजर आ रही है। यह भी अप्रैल के अंत तक लौट जाएंगे। स्टेपी ईगल बाज प्रजाति का शिकारी पक्षी है, जो हवा में काफी उंगाई पर उड़ते हुए खरगोश, चूहे का शिकार करता है। स्टेपी ईगल मिस्त्र का राष्ट्रीय पक्षी है और कजाकिस्तान के राष्ट्रीय ध्वज में इसका चित्र है। नवम्बर से इनका आना शुरू हो जाता है और मार्च-अप्रैल तक राहते हैं। यह मुख्य रूप से घास के मैदानों व खुले जंगलों में रहना पसंद करते हैं।</p>
<p><strong>अब फिर से अक्टूबर में होगी मुलाकात</strong><br />पक्षी प्रेमी देवेंद्र नागर ने बताया नील कंठी पक्षियों का सितम्बर से आना शुरू हो जाता है। मार्च-अप्रैल तक वापस लौटने लगते हैं। यह नदी, तालाब, खेतों व दलदली जगहों पर अपना ठिकाना बनाते हैं। वर्तमान में अभेड़ा, आलनिया डेम, उम्मेदगंज, उदपुरिया व बरधा बांध के आसपास इनकी आवाजाही रहती है। यह कीड़े-मकोड़ों को भोजन बनाते हैं। ये पक्षी एक दिन में 80 से 100 किमी की उड़ान भरते हैं। अब फिर से सितम्बर में इनसे मुलाकात होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 15:23:19 +0530</pubDate>
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                <title>पश्चिमी एशिया संकट: इराक में अमेरिकी महिला पत्रकार अगवा, आईडब्ल्यूएमएफ ने किया तुरंत ​रिहा करने का आह्वान </title>
                                    <description><![CDATA[इराक में संघर्ष के बीच अमेरिकी फ्रीलांस पत्रकार शेली किटल्सन को अगवा कर लिया गया है। IWMF ने उनकी सुरक्षा पर गहरी चिंता जताते हुए तत्काल रिहाई की मांग की है। मध्य पूर्व में प्रेस की स्वतंत्रता के लिए काम करने वाली किटल्सन का सुराग अभी तक नहीं मिल पाया है, जिससे वैश्विक मीडिया जगत में हड़कंप है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/west-asia-crisis-american-female-journalist-kidnapped-in-iraq-no/article-148704"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/kidnep.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। पश्चिमी एशिया में जारी संघर्ष के बीच एक अमेरिकी महिला पत्रकार को इराक में अगवा कर लिया गया है। फिलहाल, उनकी स्थिति और ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है। इंटरनेशनल विमेन मीडिया फाउंडेशन (आईडब्ल्यूएमएफ) ने बुधवार को एक बयान जारी कर जानकारी दी है कि अमेरिकी फ्रीलांस पत्रकार शेली किटल्सन को मंगलवार को अगवा कर लिया गया। फिलहाल उनकी हालत और ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं है।</p>
<p>आईडब्ल्यूएमएफ ने इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए किटल्सन को तुरंत खोजने और रिहा करने का आह्वान किया है। संगठन ने कहा कि किटल्सन एक ऐसी पत्रकार हैं जिनकी रिपोर्टिंग मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका (एमईएनए) क्षेत्र और उससे परे प्रेस की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है। संगठन ने आह्वान किया है कि जल्द से जल्द उन्हें खोजा जाना चाहिए और सुरक्षित वापस लाया जाना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 16:59:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>मिडिल ईस्ट तनाव से महंगा हुआ तड़का, खाद्य तेलों की कीमतों में बढ़ोतरी से बिगड़ा बजट</title>
                                    <description><![CDATA[कंपनियां लगातार रेट बढ़ा रही हैं, जिससे रोजाना नए दाम लागू हो रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/middle-east-tensions-drive-up-cooking-oil-prices--rising-costs-disrupt-household-budgets/article-148548"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/12200-x-60-px)-(1)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब सीधे आमजन की रसोई तक पहुंच चुका है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई चेन प्रभावित होने और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के चलते खाद्य तेलों के दाम में अचानक उछाल आ गया है। पिछले कुछ दिनों में रिफाइंड तेल 15 से 20 रुपए प्रति किलो तक महंगा हो गया है, जिससे घरेलू बजट पर दबाव बढ़ गया है। व्यापारियों के अनुसार भारत में सोयाबीन और सूरजमुखी तेल का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात होता है। मिडिल ईस्ट और आसपास के क्षेत्रों में अस्थिरता के कारण शिपमेंट में देरी हो रही है, जिससे बाजार में सप्लाई घट गई है। इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है। पाम आॅयल, जो सस्ता विकल्प माना जाता है, उसके दाम भी बढ़ने लगे हैं।</p>
<p><strong>आमजन की जेब पर बढ़ा बोझ</strong><br />गृहिणियों का कहना है कि खाद्य तेल हर घर की जरूरत है, ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने से पूरे महीने का बजट गड़बड़ा गया है। कई परिवार अब तेल की खपत कम करने या सस्ते विकल्प तलाशने को मजबूर हैं। काफी समय से खाद्य तेल की कीमत होने से तरह-तरह के पकवानों का स्वाद लिया जा रहा था। अब अचानक से दामों में तेजी आने से घरेलू  बजट गड़बड़ाने लगा है। खाद्य तेलों के बिना कोई सा भी पकवान नहीं बन सकता है। अब कीमत बढ़ने से खर्चा अधिक होने लगा है। सरकार को खाद्य तेलों की कीमत को कम करने के लिए वैकल्पिक उपाय करने चाहिए।</p>
<p><strong>स्थानीय बाजार में दिख रहा असर</strong><br />कोटा के थोक और खुदरा बाजारों में तेल की कीमतों में तेजी साफ नजर आ रही है। दुकानदारों का कहना है कि कंपनियां लगातार रेट बढ़ा रही हैं, जिससे रोजाना नए दाम लागू हो रहे हैं। कुछ जगहों पर उपभोक्ताओं ने ज्यादा खरीदारी शुरू कर दी है, जिससे मांग और बढ़ गई है। वहीं होटल और ढाबा संचालकों पर भी इसका असर पड़ा है, जहां लागत बढ़ने के कारण या तो कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं या मुनाफा कम करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबा खिंचता है तो खाद्य तेलों की कीमतों में और उछाल आ सकता है।</p>
<p>पहले ही सब्जियां और राशन महंगा है, अब तेल भी महंगा हो गया। हर महीने का बजट संभालना मुश्किल हो रहा है। हमें अब खाने में तेल कम करना पड़ रहा है।<br /><strong>-सीमा शर्मा, गृहिणी</strong></p>
<p>कंपनियां लगातार रेट बढ़ा रही हैं। हर 2-3 दिन में नए दाम आ जाते हैं। ग्राहक भी परेशान हैं और हमारी बिक्री पर भी असर पड़ रहा है।<br /><strong>-राजेश अग्रवाल, दुकानदार</strong></p>
<p>तेल महंगा होने से लागत बढ़ गई है। अगर खाने के दाम बढ़ाते हैं तो ग्राहक कम हो जाते हैं, नहीं बढ़ाते तो मुनाफा खत्म हो जाता है।<br /><strong>-इमरान खान, ढाबा संचालक</strong></p>
<p>रिफाइंड तेल के 15 किलो के पीपे में 200 से 250 रुपए तक की बढ़ोतरी हुई है। वहीं मूंगफली और सरसों के तेल में भी 50 से 70 रुपए तक की तेजी आई है। अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण सप्लाई प्रभावित है।<br /><strong>-गजेन्द्र गर्ग, थोक व्यापारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 14:22:05 +0530</pubDate>
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