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                <title>straw crisis - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>एडवांस रकम देकर बुक करा रहे मवेशियों का भोजन, जिले में गेहूं की बुवाई कम होने से भूसे की किल्लत</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व में मौसम में बदलाव के कारण फसलों को भारी नुकसान हुआ था। 
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/food-for-cattle-is-being-booked-by-paying-advance-amount/article-107715"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer-(1)54.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। ब्याईजी, फूफाजी, मामाजी, मौसाजी आपने भूसा बेच दिया क्या?, भूसा मत बेचना, आप हमें दे देना। कुछ तरह का वार्तालाप ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और पशुपालकों के बीच चल रहा है। जिले में भूसे के संकट ने पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में पशुपालक अभी से ही अपने मवेशियों के लिए भूसे का इंतजाम करने में जुट गए हैं। पशुपालक अपने रिश्तेदारों के यहां से भूसे का जुगाड़ करने में लगे हैं। इस साल जिले में गेहूं का उत्पादन कम हुआ। इसका प्रभाव भूसे पर भी पडा है। इसके चलते आगामी दिनों में मवेशियों के लिए भूसे की किल्लत हो सकती है।  </p>
<p><strong>उत्पादन कम, डिमांड अधिक</strong><br />समय के अनुसार हर वस्तु की कीमत बढ़ जाती है। ऐसे में इन दिनों किसानों व पशुपालकों के लिए सबसे बड़ी समस्या पशुओं के लिए चारा संग्रह करने की आ रही है। गेहूं की बुवाई कम होने के साथ ही सुखला यानी भूसे की मांग अधिक बढ़ गई है। पशुपालक एडवांस में मुंह मांगी कीमत देकर इसे बुक कर रहे है। क्षेत्र में इस वर्ष गेहूं की कम बुवाई एवं पूरे सीजन में मौसम की मार के चलते फसल की ग्रोथ आशा के अनुरूप नहीं हुई है। इससे चलते कम भूसा निकल रहा है। भूसे की कमी की आंशका के चलते क्षेत्र के कई किसान व पशुपालक गेहूं कटाई व निकलाई से पूर्व ही भूसे की कीमत तय कर उसे एडवांस में बुक कर रहे हैं।</p>
<p><strong>इसलिए आया भूसे का संकट</strong><br />पूर्व में मौसम में बदलाव के कारण फसलों को भारी नुकसान हुआ था। फसलों के जमीन में गिरने से पैदावार के साथ भूसे का संकट भी खड़ा हो गया है।  मौसम की खराबी और बूंदाबांदी व हवा चलने से खासकर गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा था। इससे गेहूं का उत्पादन भी कम हुआ है। इसका प्रभाव भूसे पर भी पड़ा है। जिन किसानों के पास पिछले साल का भूसा बचा है उसी से वे मवेशियों का आधा अधूरा पेट भर रहे हैं। गेहूं का उत्पादन कम होने से पर्याप्त मात्रा में भूसा मिलने की उम्मीद नहीं है। इससे पशुपालकों के सामने मवेशियों को खुला छोड़ने की मजबूरी खड़ी हो सकती है। </p>
<p><strong>गत्ता व रद्दी बनाने में हो रहा उपयोग</strong><br />कृषि विशेषज्ञ गोविन्द गुप्ता के अनुसार पिछले कुछ सालों से भूसे का  कॉमर्शियल उपयोग होने लगा है इस कारण भी भूसे के स्टॉक में कमी आ रही है।  दरअसल, हाल के कुछ वर्षों में भूसे का इस्तेमाल गत्ता और रद्दी बनाने के कामों में भी किया जा रहा है। ऐसे में पशुपालकों को यह पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा अब किसान फसलों की कटाई कंबाइन मशीनों से करवाने लगे हैं। ऐसा करने से 6 इंच फसल बचकर खेत में ही रह जा रही है। कंबाइन एक बड़ी मशीन होती है। यह ऊपर के फसल को तो काट लेती है लेकिन नीचे के हिस्से की फसल रह जाती है।  इसी वजह से फसल अगर 12 इंच की है तो 6 इंच का पौधा खेत में ही रह जाता है। इस कारण भूसे का उत्पादन कम हो पा रहा है। </p>
<p><strong>अधिक दाम पर भी नहीं मिल रहा</strong><br />पशुपालक ज्ञानसिंह गुर्जर, रत्तीराम माली, हरकचंद लोधा व लालचंद मीणा आदि ने बताया कि एक बीघा में बोए हुए गेहूं के भूसे की कीमत करीब 4 से 5 हजार रुपए तक है। जो मुंह मांगी कीमत देने पर भी नहीं मिल रहा है। भूसा नहीं मिलने की दशा में चारे का कोई अन्य विकल्प काम में लेंगे। जिले में इस बार गेहूं का उत्पादन प्रभावित हुआ है। इससे भूसे की भी कमी बनी हुई है। वहीं कुछ किसान इसका स्टॉक भी कर रहे हैं, ताकि आगामी दिनों में अधिक दाम में बेचा जा सके। </p>
<p>पहले खेतों में किसान अपने औजारों से गेहूं की कटाई करता था, जिससे  भूसे का उत्पादन भी ज्यादा मात्रा में होता था लेकिन अब ऐसा बेहद कम हो रहा है। अब कंबाइन मशीनों से गेहूं की कटाई करवाने के कारण भूसे का उत्पादन घटा है। इसके अलावा इस साल तापमान की अधिकता के कारण गेहंू की फसल में नुकसान देखा गया है। क्योंकि तापमान अधिक होने से अनाज हल्का हो जाता है और प्रोडक्शन में कमी आ जाती है। <br /><strong>- गोविंद कुमार, कृषि पर्यवेक्षक</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Mar 2025 15:30:04 +0530</pubDate>
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                <title>भूसा संकट से पार पाने को बनेगा गोदाम</title>
                                    <description><![CDATA[निगम की गौशाला में मौजूद गौवंश को देखते हुए वहां हर साल भूसा, हरा चारा, खल चूरी व चापड़ का टेंडर किया जाता है। भूसे के टेंडर की शर्त के अनुसार संवेदक को गौशाला में रोजाना 60 से 70 क्विंटल भूसा सप्लाई करना है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/warehouse-will-be-built-to-overcome-the-straw-crisis/article-46308"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/bhusa-sankat-se-paar-pane-ka-bnega-godam...kota-news-22-05-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में गौवंश की संख्या बढ़ने के साथ ही भूसे की आवश्यकता भी लगातार बढ़ती जा रही है। लेकिन वहां अधिक मात्रा में भूसा रखने का पर्याप्त गोदाम तक नहीं है। ऐसे में अब गौशाला में करीब 70 लाख की लागत से नया भूसा गोदाम बनाया जाएगा। नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में वर्तमान में करीब 4 हजार से अधिक गौवंश है। जिनमें गाय से लेकर सांड तक शामिल हैं। करीब 15 सौ से अधिक सांड है। वहीं गायों में अधिकतर बीमार स्थिति वाली हैं। गौशाला में गौवंश को खिलाने के लिए हर साल करोड़ों रुपए भूसे, चारे, चापड़ व खल चूरी पर खर्च हो रहे हैं। हालत यह है कि निगम को सीजन में चारा खरीदकर रखने के लिए पर्याप्त जगह की कमी का सामना करना पड़ रहा है। जिससे आॅफ सीजन में महंगा भूसा खरीदने को मजबूृर होना पड़ रहा है। इससे भी निगम पर अनावश्यक रूप से बजट व्यय करना पड़ रहा है। लेकिन अब निगम ने इस मद में होने वाले अनावश्यक खर्च को बचाने की कवायद शुरू की है। </p>
<p><strong>यह है वर्तमान स्थिति</strong><br />निगम की गौशाला में मौजूद गौवंश को देखते हुए वहां हर साल भूसा, हरा चारा, खल चूरी व चापड़ का टेंडर किया जाता है। भूसे के टेंडर की शर्त के अनुसार संवेदक को गौशाला में रोजाना 60 से 70 क्विंटल भूसा सप्लाई करना है। साथ ही करीब 2 हजार क्विंटल भूसा स्टॉक में रखना है। लेकिन ऐसा बहुत कम होता है जब निगम के गोदाम में टेंडर टर्त के अनुसार भूसा रहता हो। कई बार तो हालत यह हो जाती है कि गोदाम में एक दो दिन का भूसा भी नहीं रहता है। नगर निगम गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह का कहना है कि नगर निगम द्वारा सीजन में जब भसा सस्ता होता है उस समय तो भूसे का टेंडर नहीं किया जाता। इसका कारण निगम के पास एक साथ स्टॉक रखने की जगह ही नहीं है। जबकि आॅफ सीजन में जब भूसे की किल्लत होती है उस समय में टेंडर कर महंगे करीब दो गुने दाम में भूसा खरीदना पड़ता है। जिससे निगम को अनावश्यक रूप से आर्थिक नुकसान भुगतना पड़ता है। </p>
<p><strong>हर साल करोड़ों रुपए खर्च</strong><br />अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गौशाला में गौवंश के भूसे-चारे पर हर साल निम करोड़ों रुपए खर्च करता है। करीब 70 लाख के भूसे का टेंडर हुआ है। इतनी ही राशि का हरा चारा और करीब 60 से 70 लाख रुपए की खल चूरी और चापड़ का टेंडर होता है।</p>
<p><strong>10 हजार क्विंटल भूसे की होगी क्षमता</strong><br />नगर निगम द्वारा गौशाला में करीब 70 लाख की लागत से नया भूसा गोदाम बनाया जाएगा। इसके टेंडर जारी कर दिए हैं। इस भूसा गोदाम की क्षमता करीब 10 हजार क् िवंटल भूसा एक बार में रखने की होगी। गोदाम का निर्माण गौशाला परिसर में ही नंदी बाड़े के पास किया जाएगा। गौशाला में वर्तमन में जो गोदाम है उसकी क्षमता 8 हजार क्विंटल है।  सिंह ने बताया कि हालांक जिस काम के टेंडर अब हुए हैं वह 6 महीने पहले ही हो जाने चाहिए थे। जिससे अब तक तो गोदाम बनकर तैयार हो जाता।</p>
<p><strong>गोदाम बनने से यह होगा लाभ</strong><br />गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि नया गोदाम बनने से निगम द्वारा सीजन में ही भूसे के टेंडर कर दिए जाएंगे। जिससे एक बार में करीब 18 हजार क् िवंटल भूसे का स्टॉक रखा जा सकगा। साथ ही रोजाना आने वाले भूसा गौवंश को खिलाया जा सकेगा। उस स्टॉक में रखे भूसे को बरसात के समय या भूसे की किल्लत के समय में उपयोग किया जा सकेगा। जिससे निगम को आॅफ सीजन में महंगे दाम में भूसा नहीं खरीदना पड़ेगा। ऐसे में निगम को हर साल लाखों रुपए की बचत होगी।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला होने वाले कामों के करीब 2 करोड़ रुपए के टेंडर किए हैं। उसमें एक भूसा गोदाम भी बनाया जाएगा। अभी जो गोदाम है उसमें सजन के समय में भूसे का पर्याप्त स्टॉक नहीं रखा जा सकता। नया गोदाम बनने से सीजन के समय में भूसा खरीदकर रखा जा सकेगा। जिससे आॅफ सीजन में महंगा भूसा नहीं खरीदना पड़ेगा। साथ ही गौशाला में खेलों की मरम्त व अन्य कार्य भी करवाए जाएंगे। <br /><strong>- राजेश डागा, कार्यवाहक आयुक्त, नगर निगम कोटा दक्षिण </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 May 2023 15:39:57 +0530</pubDate>
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