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                <title>street vendors - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>लखनऊ में रसोई गैस की किल्लत और महंगाई से ठप हुए छोटे कारोबार, मजदूरों का पलायन तेज</title>
                                    <description><![CDATA[लखनऊ में रसोई गैस की किल्लत और आसमान छूती कीमतों ने छोटे दुकानदारों और प्रवासी मजदूरों की कमर तोड़ दी है। आजमगढ़, देवरिया और बस्ती से आए ठेला-खोमचा संचालक ब्लैक में महंगे सिलेंडर और अनियमित आपूर्ति के कारण धंधा बंद कर गांव लौटने को मजबूर हैं। हजरतगंज से गोमतीनगर तक व्यापार ठप होने से गंभीर आजीविका संकट पैदा हो गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/migration-of-small-business-workers-stalled-due-to-shortage-of/article-147692"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/lpg-in-lucknow.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रसोई गैस की गहराते संकट और बढ़ती कीमतों ने छोटे कारोबारियों और प्रवासी मजदूरों की कमर तोड़ दी है। हालात ऐसे हो गए हैं कि पूर्वांचल के जिलों से आए कई मजदूर और ठेला-खोमचा संचालक अपने व्यवसाय बंद कर गांव लौटने को मजबूर हैं।</p>
<p>आजमगढ़, बस्ती, देवरिया, मऊ, बलिया, जौनपुर और कुशीनगर जैसे जिलों से आए लोगों का कहना है कि गैस की अनियमित आपूर्ति और ब्लैक में दोगुने दाम पर सिलेंडर मिलने से रोजी-रोटी चलाना मुश्किल हो गया है। हजरतगंज में बन-मक्खन चाय की दुकान चलाने वाले राकेश मौर्य बताते हैं कि कमाई घट रही है और गैस पर खर्च बढ़ता जा रहा है।</p>
<p>इंदिरा नगर में फास्ट फूड का ठेला लगाने वाले बस्ती निवासी अरविंद मिश्रा कहते हैं कि 10 दिन से सिलेंडर नहीं मिला, जिससे काम पूरी तरह बंद हो गया है। रोजाना 500 रुपये तक कमाने वाले अरविंद अब किराया तक नहीं चुका पा रहे हैं और गांव लौटने का फैसला कर चुके हैं। निशातगंज में चाट बेचने वाले देवरिया निवासी राहुल वर्मा का कहना है कि गैस ब्लैक में बहुत महंगी मिल रही है। मजबूरी में उन्होंने इंडक्शन चूल्हा खरीदा, लेकिन उससे काम की रफ्तार धीमी हो गई है और ग्राहक इंतजार नहीं करते।</p>
<p>गोमतीनगर में बलिया के मनोज सिंह ने बताया कि गैस दोगुने दाम पर मिल रही है, ऐसे में दुकान चलाना असंभव हो गया है। चौक क्षेत्र में कबाब-पराठा बेचने वाले कुशीनगर के मोहम्मद आरिफ के अनुसार, गैस खत्म होने पर उन्होंने लकड़ी से खाना बनाने की कोशिश की, लेकिन मकान मालिक ने इसकी अनुमति नहीं दी, जिससे उनकी आमदनी पूरी तरह प्रभावित हो गई।</p>
<p>संकट का असर केवल ठेला-खोमचा चलाने वालों तक सीमित नहीं है। ट्रांसपोर्ट नगर, टॉकटोरा इंडस्ट्रियल एरिया और चिनहट जैसे इलाकों में दिहाड़ी मजदूर भी भारी संकट में हैं। कई मजदूर बैग और बिस्तर के साथ शहर छोड़ते नजर आ रहे हैं। सरोजिनी नगर और अमौसी की छोटी इकाइयों में काम करने वाले मजदूरों का कहना है कि काम होने के बावजूद महंगी गैस के कारण जीवन यापन मुश्किल हो गया है।</p>
<p>चिनहट में पैकेजिंग यूनिट में काम करने वाले उन्नाव के मनोज कुमार कहते हैं कि गैस उपलब्ध भी हो तो इतनी महंगी है कि खरीद पाना संभव नहीं। एक होटल में काम कर रहे बहराइच के शंकर सोनी एक हफ्ते से सिलेंडर भरवाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन डीलर स्टॉक न होने की बात कह रहे हैं।</p>
<p>बर्लिंगटन स्थित गुप्ता चाट कॉर्नर के संचालकों ने बताया कि उनका सिलेंडर खत्म होने वाला है और दुकान बंद होने की कगार पर है। वहीं हुसैनगंज में बाटी-चोखा बेचने वाले एक परिवार ने दुकान बंद कर गांव लौटने का फैसला कर लिया है। लखनऊ में एलपीजी संकट ने छोटे व्यापारियों और मजदूरों के सामने गंभीर आजीविका संकट खड़ा कर दिया है। यदि जल्द ही आपूर्ति और कीमतों पर नियंत्रण नहीं हुआ, तो शहर में श्रमिकों का पलायन और छोटे व्यवसायों का बंद होना और तेज हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 15:07:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title> असर खबर का - स्ट्रीट वेंडर्स की समस्याओं का अब शीघ्र हो सकेगा समाधान</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा उत्तर निगम के लिए गठित हुई 25 सदस्य कमेटी। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---problems-of-street-vendors-can-now-be-resolved-soon/article-112264"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/news-(1)44.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में अब स्ट्रीट वेंडर्स की समस्याओं का शीघ्र ही समाधान हो सकेगा। इसके लिए नगर निगम कोटा उत्तर में 25 सदस्यीय टाउन वेंडिंग कमेटी का गठन किया गया है। जिसे स्थानीय निकाय विभाग से स्वीकृति मिल गई है। स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक एवं विशिष्ट सचिव इंद्रजीत सिंह द्वारा जारी आदेश से कमेटी का गठन कर स्वीकृति जारी की गई है। नगर निगम कोटा उत्तर द्वारा स्ट्रीट वेंडर्स का चयन कर कमेटी गठन कर स्वीकृति के लिए करीब 4 महीने पहले दिसम्बर 2024 में ही मुख्यालय को प्रस्ताव भेजा जा चुका था। वहां से कमेटी का गठन कर उसकी स्वीकृति जारी की गई है।  कमेटी का गठन होने के बाद शहर में जगह-जगह सड़क किनारे और फुटपाथ पर ठेले व थड़ी और फुटकर सामान बेचने वाले स्ट्रीट वेंडर्स की समस्याओं का समाधान हो सकेगा। विशेष रूप से कमेटी द्वारा स्ट्रीट वेंडर्स के लिए वेंडिंग जोन का चयन कर इन स्ट्रीट वेंडर्स को वहां शिफ्ट किया जाएगा। जिससे इन्हें बार-बार अतिक्रमण का शिकार नहीं होना पड़ेगा। </p>
<p><strong>कोटा उत्तर आयुक्त होंगे कमेटी के अध्यक्ष</strong><br />निदेशालय द्वारा जारी की गई 25 सदस्यीय कमेटी में नगर निगम कोटा उत्तर के आयुक्त कमेटी के अध्यक्ष होंगे। उपायुक्त व स्वास्थ्य अधिकारी सदस्य सचिव  होंगे। इनके अलावा पुलिस उप अधीक्षक,पार्षद ममता कानावत,पार्षद बीरबल लोधा, पार्षद अजय सुमन व उप नगर नियोजक को सदस्य बनाया गया है। वहीं व्यापार मंडल रामपुरा के प्रतिनिधि महेन्द्र गर्ग,व्यापार मंडल सोगरिया के प्रतिनिधि  राजेश शर्मा,एनजीओ प्रतिनिधि नरेन्द्र चौरसिया,जितेन्द्र सिंह चौहान, रेजीडेंट वेलफेयर सोसायटी के प्रतिनिधि  जितेन्द्र चौधरी, चमन केलवा,अग्रणी जिला बैंक प्रबंधक को भी सदस्य के रूप में शामिल किया है।  </p>
<p><strong>निर्वाचित 10 स्ट्रीट वेंडर्स भी हैं सदस्य</strong><br />कमेटी में पूर्व में निर्वाचित महिला-पुरुष स्ट्रीर वेंडर्स को भी सदस्य बनाया गया है। जिनमें अयोध्या बाई, कांता बाई,श्रीमती जानू, नितिन सैनी,राजेन्द्र कुमार शर्मा,पिताम्बर, बृजमोहन नामा सुरेश डोली, महावीर वर्मा व विजय प्रजापति को शामिल किया गया है। </p>
<p><strong>5 साल बाद हुआ गठन, फिर होगा एक निगम</strong><br />वेंडर पुरूषोत्तम सोनी ने बताया कि कोटा में पहले एक नगर निगम था। दो निगम बनने के बाद से दोनों निगमों के लिए नए सिरे से कमेटी का गठन किया जाना था। इसके लिए स्ट्रीट वेंडर्स का चयन कर निर्वाचिन प्रक्रिया की गई। इस प्रक्रिया में इतना अधिक समय लगा कि 5 साल में कमेटी का गठन हुआ है। एक निगम बनने के बाद कमेटी का अस्तित्व क्या रहेगा यह समय ही बताएगा। </p>
<p><strong>कोटा  दक्षिण में 30 अप्रैल तक मांगी सूची</strong><br />इधर कोटा दक्षिण नगर निगम में टाउन वेंडिंग कमेटी का गठन करने के लिए स्ट्रीट वेंडर्स का चयन 30 अप्रैल तक करने को कहा गया है। जिसमें 7 पुरुष व 3 महिला सदस्यों का चयन कर  सूची नगर निगम में जमा करवानी है। जिससे रा’य सरकार के निर्देशानुसार निर्वाचन अधिकारी के समक्ष  चयन प्रक्रिया अपनाई जा सके।  गौरतलब है कि नगर निगम कोटा उत्तर की तरह ही कोटा दक्षिण में भी निजी फर्म के माध्यम से स्ट्रीट वेंडर्स का सर्वे किया जा चुका है। </p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था प्रकाशित</strong><br />गौरतलब है कि टाउन वेंडिंग कमेटी का गठन होने के बाद भी मुख्यालय से स्वीकृति के अभाव में अटकी होने का मामला दैनिक नव’योति ने उठाया था। समाचार पत्र में 22 दिसम्बर 2024 को पेज 6 पर‘ मुख्यालय से अनुमोदन के अभाव में अटकी टाउन वेंडिंग कमेटी’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें बताया था कि स्ट्रीट वेंडर्स का चयन होने के बाद भी कमेटी का गठन नहीं हो सका है। जिससे स्ट्रीट वेंडर्स की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। उस समय कोटा उत्तर आयुक्त ने बताया था कि उन्होंने प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा हुआ है। वहां से स्वीकृति मिलने पर ही कमेटी का गठन हो सकेगा।  डीएलबी ने 24 अप्रैल को ही कमेटी का गठन कर स्वीकृति जारी की है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />स्ट्रीट वेंडर्स का चयन कर टाउन वेंडिंग कमेटी को स्वीकृति के लिए प्रस्ताव दिसम्बर में ही मुख्यालय को भेज दिए थे। वहां से एक दिन पहले ही स्वीकृति का आदेश प्राप्त हुआ है। अब अगले सप्ताह से स्ट्रीट वेंडर्स की समस्याओं व वेंडिंग जोन के संबंध में काम की शुरुआत की जाएगी। <br /><strong>- अशोक त्यागी, आयुक्त नगर निगम कोटा उत्तर </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Apr 2025 15:14:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>योजनाओं को फिर से दें रफ्तार : टी. रविकांत</title>
                                    <description><![CDATA[इंदिरा गांधी रोजगार गारंटी योजना, प्रधानमंत्री अन्नपूर्णा योजना, प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना के साथ ही बजट घोषणाओं और ऑनलाइन सेवाओं को लेकर भी अधिकारियों से फीडबैक लिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/give-momentum-to-the-plans-again-t-ravikant/article-80897"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/m.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। लोकसभा चुनाव की आचार संहिता समाप्त होने के साथ ही स्वायत्त शासन विभाग के प्रमुख शासन सचिव टी. रविकांत ने विभाग की चल रही योजनाओं को फिर से गति प्रदान कर आमजन को राहत पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। रविकांत ने निदेशालय में विभागीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा बैठक में इंदिरा गांधी रोजगार गारंटी योजना, प्रधानमंत्री अन्नपूर्णा योजना, प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना के साथ ही बजट घोषणाओं और ऑनलाइन सेवाओं को लेकर भी अधिकारियों से फीडबैक लिया।</p>
<p><strong>अन्नपूर्णा रसोइयों का हो सघन निरीक्षण</strong> <br />प्रमुख सचिव ने अधिकारियों से कहा कि वे मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना के तहत चल रही रसोइयों का सघन निरीक्षण करना सुनिश्चित करें ताकि आमजन को सुलभ और शुद्ध भोजन मिलता रहे। पीएम आवास योजना के निर्माणाधीन आवासों को जल्द से जल्द पूरा करवाने के प्रयास किए जाएं। स्ट्रीट वेंडर्स के लिए अभियान चलाकर प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के प्रति जागरूकता लाए। इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना के लिए कार्यों की सूची तैयार करने के भी निर्देश दिए। बैठक में डीएलबी अतिरिक्त निदेशक श्याम सिंह, वित्तीय सलाहकार महेन्द्र मोहन, जयपुर हेरिटेज निगम के आयुक्त अभिषेक सुराणा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Jun 2024 10:29:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्ट्रीट वेंडर्स को नहीं मिल रहा वेंडिंग जोन </title>
                                    <description><![CDATA[कोटा उत्तर में टाउन वेंडिंग कमेटी गठन करने के लिए नगर निगम व जिला प्रशासन ने प्रयास शुरू भी किए थे। लेकिन उसमें सदस्यों को लेकर विवाद की स्थिति बनी। जिससे निर्वाचन से ठीक पहले उस प्रक्रिया को ही निरस्त कर दिया गया।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/street-vendors-are-not-getting-vending-zone/article-46404"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/street-venders-ko-nhi-mil-rha-vending-zone...kota-news-23-05-2023-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में जगह-जगह सड़क किनारे खड़े होकर रोजगार कर रहे ठेले वाले व स्ट्रीट वेंडर्स को अपना रोजगार करने के लिए स्थायी वेंडिंग जन तक नहीं मिल पा रहा है। जिससे उन्हें बार-बार अतिक्रमण के चलते प्रशासन की मार झेलनी पड़ रही है। स्ट्रीट वेंडर्स को इस परेशानी का सामना  टाउन वेंड़िंग कमेटी के नहीं होने से करना पड़ रहा है। कोटा में पहले टाउन वेंड़िंग कमेटी बनी हुई थी। लेकिन वर्ष 2019 में कोटा उत्तर व दक्षिण दो निगम बनने के बाद कमेटी समाप्त हो गई थी। जिसका नए सिरे से गठन होना था। लेकिन हालत यह है कि चार साल बाद भी दोनों निगमों में अभी तक कमेटी का गठन नहीं हुआ है। इस कारण से स्ट्रीट वेंडर्स की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। </p>
<p><strong>नए सिरे से होगा स्ट्रीट वेंडर्स का सर्वे</strong><br />नगर निगम की ओर से वर्ष 2016-17 में स्ट्रीट वेंडर्स का सर्वे किया गया था। शहर में सड़क किनारे ख़ड़े फल सब्जी के ठेले, थड़ी वाले व फुटकर विक्रेताओं को शामिल किया गया था। उस समय सर्वे में करीब 5148 स्ट्रीट वेंडर्स को शामिल किया गया था। लेकिन बाद में उसकी छटनी करने पर यह संख्या 4840 के करीब रह गई थी। जिन्हें नगर निगम की ओर से कार्ड भी जारी कर दिए गए थे। लेकिन उस सर्वे को 5 साल से अधिक होने पर अब नए सिरे से सर्वे कराया जाएगा। </p>
<p><strong>रोजगार ही बदल गया</strong><br />जिस समय नर निगम ने सर्वे किया था उस समय स्ट्रीेट वेंडर्स का जो रोजगार था वह कोरोना काल के दौरान बदल गया। सब्जी वाला किनारे के दुकान लगाने लगा। किराने की दुकान वाला सब्जी का ठेला लगाने लगा। चाय की थडंी वाले ने दुकान खोल ली। साथ ही कई स्ट्रीट वेंडर्स की जगह ही बदल गई। जिससे पूर्व में किया गया सर्वे व्यर्थ हो गया है। </p>
<p><strong>कोटा उत्तर में गठन से पहले ही प्रक्रिया निरस्त</strong><br />कोटा उत्तर में टाउन वेंडिंग कमेटी गठन करने के लिए नगर निगम व जिला प्रशासन ने प्रयास शुरू भी किए थे। लेकिन उसमें सदस्यों को लेकर विवाद की स्थिति बनी। जिससे निर्वाचन से ठीक पहले उस प्रक्रिया को ही निरस्त कर दिया गया।  जानकारों के अनुसार टाउन वेंडिंग कमेटी में  करीब 25 सदस्य होते हैं। जिनमें जिला प्रशासन, नगर निगम, जिला परिवहन व ट्रैफिक पुलिस समेत अन्य विभागों के अधिकारियों के अलावा स्ट्रीट वेंडर्स के दस सदस्य शामिल होते हैं। उन दस सदस्यों में 7 पुरुष व3 महिला सदस्य होते हैं। इन सदस्यों का निर्वाचन किया जाता है। लेकिन चार साल का समय होने को है। अभी तक प्रशासन कमेटी का गठन नहीं कर सका है। </p>
<p><strong>निगम ने दिलाया लोन</strong><br />स्ट्रीट वेंडर्स को नगर निगम द्वारा लोन भी दिलाया गया है। पीएम स्वनिधि योजना के तहत केन्द्र सरकार द्वारा और इंदिरा गांधी शहरी क्रेडिट कार्ड योजना के तहत रा’य सरकार द्वारा 10 से 50 हजार रुपए तक का लोन बैंकों के माध्यम से स्ट्रीट वेंडर्स को दिलाया गया। हजारों स्ट्रेीट वेंडर्स को अपना रोजगार बढ़ाने के लिए लोन दिलाया गया। लोन लेकर उन्होंने अपनी आय के साधन भी बढ़ाए लेकिन स्थायी जगह के अभाव में उन्हें हर दिन परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।  </p>
<p><strong>प्रशासन की कमी, भुगत रहे स्ट्रीट वेंडर्स</strong><br />स्ट्रीट वेंडर्स का कहना है कि प्रशासन द्वारा अभी तक भी दोनों निगमों में टाउन वेंडिंग कमेटी का गठन नहीं किया गया है। प्रशासन की इस कमी का खामियाजा स्ट्रीट वेंडर्स को भुगतना पड़ रहा है। झालावाड़ रोड पर फल का ठेला लगाने वाले रामलाल का कहना है कि प्रशासन उन्हें अभी तक वेंडिंग जोन निर्धारित करके नहीं दे सका है। जिससे उन्हें सड़क पर खड़े होकर रोजगार करना पड़ रहा है। ऐसे में कभी नगर निगम तो कभी नगर विकास न्यास का दस्ता उन्हें अतिक्रमी बताकर बार-बार इधर से उधर खदेड़ रहे हैं। जिससे उनका रोगार प्रभावित हो रहा है। सीएडी रोड स्थित फुटकर सामान विक्रेता राजेश सैनी का कहना है कि वेंडिंग जोन नहीं बनने से उन्हें फुटपाथ पर ही रोजगार करना पड़ रहा है। बच्चों का पेट पालने के लिए कहीं तो रोजगार करना ही होगा। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि उन्हें स्थायी जगह दी जाए।    </p>
<p><strong>नए सिरे से सर्वे के बाद होगा कमेटी का गठन</strong><br />निगम अधिकारियों का कहना है कि स्ट्रीट वेंडर्स का सर्वे वर्ष 2016-17 में हुआ था। सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार हर पांच साल में इनका दोबारा से सर्वे होना चाहिए। उसके तहत पूर्व में हुए सर्वे को 5 साल से अधिक हो गया है। जिसमें कई स्ट्रीट वेंडर्स का रोजगार और जगह ही बदल गए हैं। नए सिरे से सर्वे के लिए कम्पनी का चयन किया गया है। सर्वे के बाद सदस्य बनने पर ही टाउन वेंडिंग कमेटी का गठन किया जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Tue, 23 May 2023 14:15:53 +0530</pubDate>
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