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                <title>healthy lifestyle - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>healthy lifestyle RSS Feed</description>
                
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                <title>मन की बात : प्रधानमंत्री मोदी ने योग अपनाने और चीनी और तेल का सेवन घटाने पर दिया जोर, लोगों से खान-पान में भी सुधार लाने की अपील की </title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 'मन की बात' में फिटनेस को जीवन का मंत्र बताया। उन्होंने चीनी के सेवन और खाद्य तेल में 10% कटौती की अपील करते हुए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के 100 दिनों के काउंटडाउन के बीच, उन्होंने अफ्रीका के 'अरविंद योग सेंटर' जैसे वैश्विक प्रयासों की भी सराहना की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/mann-ki-baat-prime-minister-modi-laid-emphasis-on-adopting/article-148328"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pm-modi5.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को रेडियो कार्यक्रम मन की बात में देशवासियों से फिटनेस पर ध्यान देने और योग को जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की। श्री मोदी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस में अब 100 दिनों से भी कम समय बचा है और पूरी दुनिया में योग के प्रति आकर्षण लगातार बढ़ रहा है। पीएम मोदी ने बताया कि अफ्रीका के जिबूती में अल्मिस नामक व्यक्ति अपने 'अरविंद योग सेंटर' के माध्यम से योग का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं और विभिन्न स्थानों पर लोगों को योग सिखा रहे हैं।</p>
<p>पीएम मोदी ने लोगों से खान-पान में सुधार लाने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इंस्टाग्राम कंटेंट क्रिएटर युवराज दुआ के पोस्ट पर उनकी प्रतिक्रिया को लेकर चर्चा की। उन्होंने बताया कि युवराज दुआ ने उनसे अपने पिता को चीनी कम करने के लिए प्रेरित करने का अनुरोध किया था, जिसका सकारात्मक असर देखने को मिला।</p>
<p>पीएम मोदी ने देशवासियों से चीनी का सेवन कम करने की अपील की और खाने के तेल में कम से कम 10 प्रतिशत की कटौती करने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के छोटे-छोटे बदलाव मोटापा और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से बचाने में मदद करेंगे। उन्होंने दोहराया कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाना आज के समय की बड़ी जरूरत है और योग इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 14:32:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>अच्छी याद्दाश्त का रहस्य है-पर्याप्त,गहरी नींद</title>
                                    <description><![CDATA[ जरूरत से कम या बिलकुल नींद न लेना हमारी सीखने , याददाश्त और काम करने की क्षमता को दिनोंदिन कम करता जा रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/the-secret-to-a-good-memory-is-getting-enough--sound-sleep/article-55421"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/health-news.png" alt=""></a><br /><p>आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में स्वयं के लिए भी समय निकाल पाना एक असंभव सा कार्य लगता है। भौतिक सुखों को इकठ्ठा करने की मानवीय भूख ने,मानव का सुख चैन और नींद सब छीन लिया है। घर की जरूरतों को पूरा करने की जद्दोजहद में आराम और पर्याप्त गहरी नींद स्वपन मात्र बन कर रह गए हैं।<br /><br />जरूरत से कम या बिलकुल नींद न लेना हमारी सीखने , याददाश्त और काम करने की क्षमता को दिनोंदिन कम करता जा रहा है। हमारी बायोलॉजिकल क्लॉक में मस्तिष्क ने प्रत्येक कार्य के लिए एक निश्चित प्रोग्रामिंग तय कर रखी है, जो एक मनुष्य से दूसरे मनुष्य में भिन्न-भिन्न हो सकती है। जैसे कुछ लोगों को प्रात: जल्दी उठन की आदत है तो उनके उठने का समय मस्तिष्क में निश्चित हो जाता है जो उन्हें प्रतिदिन उसी निश्चित समय पर उठने में मदद करता है। इसी तरह कुछ विद्यार्थी देर रात्रि तक अध्ययन कर सकते हैं,तो कुछ को प्रात: काल में अध्ययन करना अधिक सुविधाजनक लगता है। इसी तरह नींद और मस्तिष्क एवं नींद और स्मरण शक्ति के मध्य भी एक गहरा संबंध है। हमारी स्मरण शक्ति को,हमारी नींद बहुत हद तक प्रभावित करती है। शोधकर्ताओं के शोध और उनके परिणाम इस ओर संकेत करते हैं कि पूरी अवधि की गहरी नींद, हमारी स्मरण शक्ति को मजबूत बनाती है। चिकित्सक प्राय: 8 से 10 घंटे की गहरी नींद लेने का परामर्श देते हैं जो स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बहुत जरूरी है। जबकि नवजात शिशु में नींद की अवधि अधिक होती है,जिसका संबंध शिशु के तेज गति से होने वाले शारीरिक विकास से है। <br /><br />अक्सर हम 8 से 10 घंटे की नींद लेने के बाद भी तरोताजा महसूस नहीं कर पाते और कई बार मात्र मात्र कुछ मिनटों की झपकी या फिर एक दो घंटे की नींद में पुन: ऊजार्वान और तरोताजा महसूस करते हैं। इसके पीछे का कारण हमारा अपने आप को मस्तिष्क के आगे आत्मसर्पण करने जैसा है। जब हम अपनी दैनिक समस्यायों को बिस्तर पर जाने के बाद भी नहीं छोड़ना चाहते, ऐसे में मस्तिष्क को आपको नींद की आगोश में लाने के अतिरिक्त कार्य करना पड़ता है,आप तो जैसे-तैसे सो जाते हैं पर मस्तिष्क थक जाता है, जिसका प्रभाव आपके उठने के पश्चात भी दिखाई देता है और आप अपने आप को तरोताजा महसूस करने की बजाय बोझिल और बुझा-बुझा सा महसूस करते हैं। जिसका असर आपकी दैनिक कार्य क्षमता पर भी पड़ता है। जब हम झपकी लेते हैं,तो हमारा मस्तिष्क नींद के विभिन्न चरणों से गुजरता  है । रैपिड आई मूवमेंट स्लीप सोने के चरण का दूसरा भाग होता है यह नॉन रैपिड आई मूवमेंट स्लीप के बाद होता है,जिसके तीन चरण होते हैं। रात के दौरान हम सामान्य रूप से नॉन रैपिड आई मूवमेंट स्लीप के 3 चरणों और रैपिड आई मूवमेंट स्लीप के एक चरण से गुजरते हैं जो 90 से 120 मिनट का होता है। जिसमें हल्की नींद, गहरी नींद और रैपिड आई मूवमेंट  नींद शामिल  है। इस अवधि में अक्सर सपने आते है। नींद की कमी मस्तिष्क के हिप्पोकैम्पस नामक हिस्से को प्रभावित करती है, जो नई यादें बनाने के लिए महत्वपूर्ण है। नींद के रैपिड आई मूवमेंट से पूर्व के  चरण मस्तिष्क को अगले दिन में सीखने संबंधी क्रियाओं के लिए प्रेरित करते हैं। एक अनुमान के अनुसार यदि हम सोए नहीं हैं, तो नई चीजें सीखने की हमारी क्षमता 40 प्रतिशत तक कम हो सकती है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान के वैज्ञानिक नींद और स्मृति के बीच के संबंध को समझने का प्रयास कर रहे हैं। जो भविष्य में  विद्यार्थियों को सीखने में ,वृद्ध लोगों की स्मरण शक्ति बनाए रखने में मदद करेगा। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के नींद वैज्ञानिक डॉ.मैथ्यू वॉकर  के अनुसार सीखने से पहले की नींद हमारे मस्तिष्क की स्मरण शक्ति को तैयार करने में और फिर सीखने के बाद की नींद उस नई जानकारी को मस्तिष्क  में सहेजने और मजबूत करने में मदद करता है, जिससे हमारे द्वारा इसे भूलने की संभावना कम हो जाती है। अपर्याप्त और अत्यधिक नींद स्मृति प्रसंस्करण और अन्य संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं को प्रभावित करती है। अच्छी रात का आराम न केवल अच्छे शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है बल्कि हमारे मस्तिष्क को भी ठीक से काम करने में सक्षम बनाता है। हर रात पर्याप्त मात्रा में नींद लेना यादों को मजबूत करने की कुंजी है।<br /><br />पर्याप्त आराम और नींद से जागने के बाद नई जानकारी संसाधित करने में मदद मिलती है और सीखने के बाद नींद लेने से यह जानकारी हम यादों में समेकित कर, मस्तिष्क में संग्रहीत कर सकते हैं। नींद के नॉन रैपिड आई मूवमेंट चरणों के दौरान,मस्तिष्क पिछले दिन की हमारी विभिन्न स्मृतियों की छंटाई  करता है। जरूरी और गैर जरूरी यादों को फिल्टर करता है तथा गैर जरूरी जानकारी को हटा देता है। गहरी नॉन रैपिड आई मूवमेंट नींद शुरू होते ही ये चुनी गई यादें और अधिक स्थाई हो जाती हैं और यह प्रक्रिया रैपिड आई मूवमेंट नींद के दौरान भी जारी रहती है।  <br /><br />- राजेन्द्र कुमार शर्मा<br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Aug 2023 12:04:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>बारिश में संक्रामक बीमारियां होने का खतरा ज्यादा</title>
                                    <description><![CDATA[ कई अध्ययनों में पाया गया है कि सुबह खाली पेट गुनगुना पानी का सेवन करना सेहत के लिए बहुत लाभकारी हो सकता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/more-risk-of-infectious-diseases-in-rain/article-51832"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/black-futuristic-roadmap-your-story.png" alt=""></a><br /><p> इन दिनों तेज बारिश का दौर जारी है। बारिश के कारण तापमान में उतार-चढ़ाव भी देखा जा रहा है, इस तरह का मौसम कई बीमारियों के जोखिमों को बढ़ाने वाला हो सकता है। डॉक्टर कहते हैं, बारिश के दिनों में संक्रामक बीमारियों का खतरा अधिक होता है। जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, उन्हें मौसम में हो रहे बदलाव के कारण फ्लू जैसे संक्रमण का जोखिम हो सकता है।  सर्दी-जुकाम, बुखार के साथ गले में खराश, सिरदर्द की समस्याएं इन दिनों में अधिक देखी जाती रही हैं। इसके अलावा बारिश और नम वातावरण के कारण कई अन्य प्रकार की बैक्टीरियल-वायरल संक्रमण का भी खतरा हो सकता है। इन सबसे सुरक्षित रहने के लिए जरूरी है कि हम सभी अपनी इम्युनिटी को बढ़ावा देने वाले उपाय करें।  <br /><br />पिएं हल्का गुनगुना पानी : कई अध्ययनों में पाया गया है कि सुबह खाली पेट गुनगुना पानी का सेवन करना सेहत के लिए बहुत लाभकारी हो सकता है। गुनगुना पानी पीने से शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकलने में मदद मिलती है। इन दिनों में गुनगुना पानी का सबसे ज्यादा लाभ गले में संक्रमण के जोखिमों को दूर करने में है। गुनगुना पानी पीने से गला साफ रहता है और रोगजनकों के कारण होने वाले संक्रमण-दर्द की समस्या कम होती है। <br /><br />पेट की समस्या कम : सामान्य तापमान वाले पानी की तुलना में गुनगुना पानी पीने से पेट से हानिकारक विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में भी मदद मिलती है। यह आपके शरीर को डिटॉक्स करने का एक आसान और अत्यधिक प्रभावी तरीका है। चूंकि मानसून के दिनों में पेट में संक्रमण होने का जोखिम अधिक होता है साथ ही खान-पान में गड़बड़ी के कारण कब्ज, अपच जैसी दिक्कत हो सकती हैए इन सभी समस्याओं में सुबह गुनगुना पानी पीना आपके लिए  <br /><br />इम्युनिटी बढ़ाने वाली  : संक्रामक बीमारियों का सबसे जोखिम उन लोगों में होता है जिनकी इम्युनिटी कमजोर होती है। ऐसे लोगों में मौसम के बदलाव के साथ फ्लू संक्रमण होना सबसे आम है। इसलिए जरूरी है कि आप रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा देने वाले उपाय करें। बरसात के दिनों में रोजाना घरेलू औषधियों-मसालों से तैयार काढ़ा का सेवन करें। आहार में फलों-सब्जियों की मात्रा बढाएं, इससे लाभ मिलता है। <br /><br />हाथों की स्वच्छता  : बरसात के दिनों में नम वातावरण के कारण सतहों पर बैक्टीरिया और वायरस हो सकते हैं। अगर आप हाथों की सफाई का ध्यान नहीं रखते हैं तो ये दूषित हाथों के माध्यम से आपके नाक-मुंह के रास्ते शरीर में प्रवेश करके संक्रामक रोगों के खतरे को बढ़ावा दे सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि नियमित रूप से हाथों को साबुन-पानी से अच्छे से साफ करते रहें। ये संक्रामक रोगों से बचाने में आपके लिए बहुत मददगार है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Jul 2023 11:51:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कैलोरी बर्न करने के लिए क्या बेहतर है वॉक या फिर ट्रैडमिल</title>
                                    <description><![CDATA[जब आप पैदल चलते है तो आपको कई परेशानियों से गुजरना पड़ता है। जो कि आपको कड़ी मेहनत करने के लिए मजबूर करती है। और जब आपकी बॉडी को अधिक एनर्जी ड़ालनी पड़ती है तो अधिक कैलोरी बर्न होती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/which-is-better-to-burn-calories--walk-or-treadmill/article-51462"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/rj-(15)1.png" alt=""></a><br /><p>जब बात फिटनेस पाने की आती है तो एक्सपर्ट सबसे पहले वॉकिंग की सलाह देते है। क्यूंकि ये सबसे आसान एक्सरसाइज है, जिसे बड़ी आसानी से अपने डेली रूटीन में शामिल किया जा सकता है। देखा जाए तो वॉक एक ऐसी एक्सरसाइज है,जिसे करने से कई हेल्थ बेनिफिटस मिलते है।  वॉक करने के दो तरीके है, आउटडोर वॉकिंग तो दूसरा ट्रेडमिल पर जॉगिंग । वैसे तो ये दोनों तरीके सेहत के लिए फायदेमंद है। लेकिन नॉर्मल वॉक करना ट्रेडमिल पर चलने से अलग है।  <br /><br /><strong>वॉकिंग के फायदे</strong><br />जब आप पैदल चलते है तो आपको कई परेशानियों से गुजरना पड़ता है। जो कि आपको कड़ी मेहनत करने के लिए मजबूर करती है। और जब आपकी बॉडी को अधिक एनर्जी ड़ालनी पड़ती है तो अधिक कैलोरी बर्न होती है। जबकि ट्रेडमिल पर चलते समय आपको इतने प्रयास करने की जरूरत नहीं।<br /><br />आउटडोर वॉकिंग आपको स्क्रीन और स्ट्रेस से दूर रहने का समय,आपके माइंड और बॉडी को एक ब्रेक लेने,प्रकृति से जुड़ते हुए ताजी हवा में सांस लेने और अपने समुदाय के लोगों से जुड़ने का मौका देती है।<br /><br />वॉकिंग आपके मूड को बेहतर बनाने में मदद करती है, साथ ही इससे आपको एक्सरसाइज करने का मॉटिवेशन मिलता है। सूर्य से निकलने वाली किरणें विटामिन डी का सबसे अच्छा स्रोत है,इसलिए आउटडोर वॉकिंग इस महत्वपूर्ण विटामिन के लेवल को बढ़ाने का एक शानदार तरीका है। <br /><br /><strong>ट्रेडमिल के फायदे</strong><br />- मौसम के बदलते मिजाज के बीच आउटडोर वॉकिंग करना मुश्किल हो जाता है। जबकि ट्रेडमिल का यूज दिन या रात किसी भी समय किया जा सकता है।<br />- ट्रेडमिल में एक डिजिटल स्क्रीन होती है जो हार्ट रेट, कैलोरी बर्न और एवरेज स्पीड-फीडबैक जैसे चीजों को प्रदर्शित करती है जो आपके अगले कदम को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। <br /><br /><strong>दोनों में से कौन बेहतर  </strong><br />आउटडोर वॉकिंग और ट्रेडमिल में से किसी एक को चुनना आपकी पर्सनल प्रायोरिटीज  सिचुएशन और गोल पर निर्भर करता है। आउटडोर वॉकिंग फ्रेश एयर, नेचुरल एनवायरमेंट और फ्रीडम की भावना देती है, जबकि ट्रेडमिल वॉकिंग फेसिलिटी और कंट्रोल एनवायरमेंट देती है। आउटडोर वॉकिंग आपको नेचर से जुड़ने का मौका देती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Jul 2023 11:45:17 +0530</pubDate>
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                <title>हर काम में परफेक्ट बनने की चाहत में बन रही हैं, सिंड्रोम का शिकार</title>
                                    <description><![CDATA[कई महिलाओं में यह देखा जाता है कि वे हर वक्त चिड़चिड़ापन महसूस करती हैं। छोटी- छोटी बातें उन्हें इरिटेट करती हैं और वे किसी सिंपल सी बात पर भी ओवर रिऐक्ट कर जाती हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/in-the-desire-to-be-perfect-in-every-work--she-is-becoming-a-victim-of-the-syndrome/article-51196"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/multipurpose-timeline-infographic-based-on-years-(2)6.png" alt=""></a><br /><p>आज के लाइफस्टाइल में मल्टी टास्किंग होना समय की मांग है,महिलाओं में तो ये स्किल बचपन से ही डेवलप होने लगता है, कहा जाता है कि पुरुषों की तुलना में महिलाएं एक साथ कई काम कर सकती हैं,घर के कामकाज से लेकर बच्चों की परवरिश,उनकी जरूरतों को पूरा करना,दफ्तर के काम और सही बजट में घर चलाना जैसी जिम्मेदारियां अधिकतर महिलाएं ही उठाती रही हैं,लेकिन आज के मॉडर्न लाइफ में हर काम को अकेले पूरा करना और परफेक्ट तरीके से करना आसान काम नहीं होता। <br /><br />प्रतियोगिता के इस युग में कई बार महिलाएं इसकी वजह से  स्ट्रेस और एग्जायटी की शिकार हो जाती हैं,कई बार तो उनमें डिप्रेशन के लक्षण भी नजर आने लगते हैं।<br /><br />मनोवैज्ञानिक भाषा में इसे सुपरवूमन सिंड्रोम या डिजीज का नाम दिया गया है,आॅफिस गोइंग, न्यू मॉम, होममेकर जैसी जिम्मेदारियों को एक साथ निभा रही कई महिलाओं में नींद ना आने से लेकर चक्कर आना, अत्यधिक तनाव में रहना आदि जैसे लक्षण दिखते हैं जिसे सुपरवुमन सिंड्रोम माना जा सकता हैं।<br /><br /><strong>चिड़चिड़ापन</strong><br />कई महिलाओं में यह देखा जाता है कि वे हर वक्त चिड़चिड़ापन महसूस करती हैं। छोटी- छोटी बातें उन्हें इरिटेट करती हैं और वे किसी सिंपल सी बात पर भी ओवर रिऐक्ट कर जाती हैं। यह हर काम में परफेक्ट परफॉर्म करने का दबाव हो सकता है। <br /><br /><strong>नींद न आना</strong><br />अगर आप रात भर नहीं सो पातीं या आपको दिन भर बिस्तर से बाहर आने का मन नहीं करता तो थकान, स्ट्रेस और एंग्जायटी का ये कारण हो सकता है, यह भी सुपरवूमन सिंड्रोम का एक बड़ा लक्षण है, ऐसा होने पर जरूरी है कि आप अपने डेली रुटीन से थोड़ा ब्रेक लें और सेल्फकेयर पर ध्यान दें। <br /><br /><strong>बातों को भूलना</strong><br />अगर आप इन दिनों छोटी -छोटी बातें भूल जाती हैं तो यह भी सुपरवूमन सिंड्रोम का लक्षण हो सकता है,दरअसल  आपका दिमाग हर वक्त किसी दूसरे काम को सोचने और प्लान बनाने में व्यस्त होता है,ऐसे में अगर आप बिना ध्यान दिए कोई काम निपटा रही हैं तो भूलना स्वाभाविक ही है, इस वजह से आपका मन काम में नहीं लगता । <br /><br /><strong>तनाव और पसीना</strong><br />कई महिलाएं काम के दौरान मांसपेशियों में खिंचाव महसूस करती हैं और थोड़ा भी काम करने पर पसीने से तर हो जाता है,यही नहींए आपके शरीर में जगह जगह दर्द और खिंचाव भी महसूस होता रहता है,इस तरह के लक्षण बताते हैं कि आपको रिलैक्स होने की जरूरत है, फिजिकली और मेंटली भी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Jul 2023 11:52:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रोजाना डाइट में शामिल करें खजूर सेहत के लिए होते हैं फायदेमंद</title>
                                    <description><![CDATA[डाइट में खजूर को एड करने से बॉडी में विटामिन बी 6 और आयरन की कमी पूरी होती है,साथ ही खजूर में काफी कम मात्रा में कैलोरी होती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/include-dates-in-daily-diet--they-are-beneficial-for-health/article-51193"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/multipurpose-timeline-infographic-based-on-years-(1)3.png" alt=""></a><br /><p>खजूर में प्रोटीन, विटामिन बी 6,आयरन, मैग्नीशियम, पोटैशियम, कैलोरी,कार्बोहाइड्रेट और फाइबर जैसे कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो सेहत के लिए फायदेमंद माने जाते हैं,ऐसे में सीमित मात्रा में रोजाना खजूर का सेवन कई तरह की दिक्कतों को दूर करने में मदद करता है।<br /><br /><strong>सूजन से राहत<br /></strong>खजूर खाने से आपको सूजन से छुटकारा मिल सकता है,बता दें कि को खजूर एंटीआॅक्सीडेंट तत्वों का बेहतर सोर्स माना जाता है,साथ ही इनमें बाकी फू्रट्स और वेजिटेबल्स की अपेक्षा पॉलीफेनोल्स एंटीआॅक्सीडेंट भी अच्छी मात्रा में होते हैं, जो स्वेलिंग दूर करने में मदद करते हैं। <br /><br />डाइट में खजूर को एड करने से बॉडी में विटामिन बी 6 और आयरन की कमी पूरी होती है,साथ ही खजूर में काफी कम मात्रा में कैलोरी होती है,जिसके चलते मीठा खाने की क्रेविंग होने पर भी आप इसका सेवन कर सकते है। <br /><br /><strong>वेट लॉस होता है</strong><br />वेट लॉस में भी खजूर अच्छी भूमिका निभाता है, इसमें काफी मात्रा में फाइबर मौजूद होता है,जिसकी वजह से खजूर खाने के बाद भूख कम लगती है और वजन कम करने में मदद मिलती है,ऐसे में डाइटिंग के दौरान खजूर खाना आपके लिए बेहतर आॅप्शन हो सकता है। <br /><br /><strong>मसल्स स्ट्रॉन्ग होती हैं</strong><br />खजूर खाने से मसल्स को भी मजबूती मिलती है, खजूर में अच्छी मात्रा में पोटैशियम मौजूद होता है, जो मांसपेशियों को स्ट्रॉन्ग बनाने में काफी मदद करता है,इसके साथ ही खजूर बॉडी का ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बनाने और हार्ट हेल्थ को मेंटेन रखने में भी  असरदार है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Jul 2023 11:50:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>गलत तरीके से पानी पीना नुकसानदायक</title>
                                    <description><![CDATA[आचार्य भाव मिश्र ने बताया था कि आपको खाली पेट 640 मिलीलीटर गुनगुना पानी पीना चाहिए। स्वस्थ रहने के लिए यह बहुत बढ़िया तरीका है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/drinking-water-in-wrong-way-is-harmful/article-50983"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/multipurpose-timeline-infographic-based-on-years-(1)1.png" alt=""></a><br /><p>सुबह खाली पेट पानी पीने को आयुर्वेद में उषापान कहा जाता है। आचार्य भाव मिश्र ने बताया था कि आपको खाली पेट 640 मिलीलीटर गुनगुना पानी पीना चाहिए। स्वस्थ रहने के लिए यह बहुत बढ़िया तरीका है। <br /><br /><strong>पानी पीने का सही वक्त-</strong> आयुर्वेदिक आचार्य ने उषापान के सही वक्त के बारे में भी जानकारी दी थी।  उन्होंने इसके लिए ब्रह्म मुहूर्त का समय या सूरज उगने से पहले का टाइम सुझाया था। लेकिन आज की लाइफस्टाइल में इस वक्त तक उठना सभी के लिए नामुमकिन है।<br /><br />डॉक्टर वारालक्ष्मी कहती हैं कि आजकल अधिकतर लोग सुबह 6 से 10 बजे के बीच उठते हैं। आयुर्वेद इसे कफ काल कहता है और इस दौरान हमारा मेटाबॉलिज्म काफी कमजोर होता है। इसलिए इस टाइम इतना सारा पानी पचाना मुश्किल काम है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Jul 2023 11:15:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हरदम सनग्लासेस पहनने का है शौक, तो जानें इसके नुकसान</title>
                                    <description><![CDATA[ हमारा स्लीप साइकल हमारे आसपास की बदलती परिस्थितियों के जवाब में हरदिन रिलीज होने वाले हार्मोन द्वारा नियंत्रित होता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/always-fond-of-wearing-sunglasses--then-know-its-disadvantages/article-50895"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/630-400-size-की-कॉपी-(5)1.png" alt=""></a><br /><p>सनग्लासेस पहनने का चलन पिछले काफी समय से बढ़ गया है। धूप में बाहर निकलने से पहले हम सभी सनग्लासेस पहनते हैं। यह सच है कि सनग्लासेस आंखों को सूरज की हानिकारक किरणों से बचाने में मदद कर सकता है।  हालांकि, इसका इस्तेमाल सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। अगर इसे पहना जाता है तो इससे व्यक्ति का लुक भी  अच्छा लगता है। यही कारण है कि अधिकतर लोग हमेशा ही सनग्लासेस पहनते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि हरदम सनग्लासेस पहनना आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है। इससे व्यक्ति को अनिद्रा से लेकर हार्मोन असंतुलन, विटामिन डी की कमी और अन्य कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।  <br /><br /><strong>नहीं मिलता विटामिन डी:</strong> हरदम सनग्लासेस पहनने से व्यक्ति को पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी नहीं मिल पाता है। दरअसल  सनलाइट की वेवलेंथ आंखों से गुजरती हैं। जिससे पिट्यूटरी और पीनियल ग्रंथियों के जरिए मस्तिष्क को सूचित किया जाता है कि यह धूप है।  उस स्थिति में स्किन सन एक्सप्रोजर और विटामिन डी के लिए तैयार होती है। लेकिन जब आप हरवक्त सनग्लास पहनते हैं तो इससे पीनियल ग्रंथि पर बुरा असर पड़ता है। जिसके चलते माइंड तक यह सिग्नल नहीं पहुंच पाता है। मस्तिष्क को यही लगता है कि बादल छाए हुए हैं। ऐसे में स्किन को पर्याप्त सन एक्सपोजर नहीं मिल पाता है। <br /><br /><strong>हार्मोनल साइकल प्रभावित:</strong> सनग्लासेस आपकी बॉडी को भीतर से भी प्रभावित कर सकते हैं।  हरवक्त सनग्लासेस पहनने से जब आपकी आंखें सनलाइट को स्वाभाविक रूप से अवशोषित नहीं करती हैं, तो इससे शरीर का हार्मोन साइकल डिस्टर्ब होता है। ऐसे में आपके बॉडी सिस्टम और मूड्स पर बहुत बुरा असर पड़ता है। <br /><br /><strong>आंखों को थकान:</strong> हमारी आंखें इस तरह से बनी हैं कि उन्हें धूप की जरूरत होती है। इसलिए,हमें उन्हें लंबे समय तक ढक कर नहीं रखना चाहिए। लेकिन लगातार सनग्लासेस पहनने की आदत के चलते आपकी आंखों को नेचुरल लाइट पहनने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे वे थकने लगती हैं। जब आंखें लगातार तनाव में रहती हैं, तो वे आंखों की थकान का अनुभव करती हैं।  <br /><br /><strong>नींद की होती है समस्या:</strong> सनग्लासेस आपकी नींद पर भी नेगेटिव इफेक्ट डालते हैं। हमारा स्लीप साइकल हमारे आसपास की बदलती परिस्थितियों के जवाब में हरदिन रिलीज होने वाले हार्मोन द्वारा नियंत्रित होता है। हमारे रेटिना में लाइट सेंसेटिव फोटोरिसेप्टर सर्केडियन रिदम को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब आप लगातार सनग्लासेस पहनते हैं तो इससे सर्केडियन रिदम पर बुरा असर पड़ता है। जिसके चलते व्यक्ति को ठीक ढंग से नींद नहीं आती है।  <br /> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Jul 2023 12:17:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वजन कम करने के लिए एक्सरसाइज के साथ डाइट का भी रखें ध्यान</title>
                                    <description><![CDATA[वेट लॉस की कोशिश करने वाले लोग हेल्दी डाइट लेने के बजाय जंक फूड खा लेते हैं,उन्हें लगता है इससे उनका वजन कम होगा,लेकिन यह गलतफहमी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/take-care-of-diet-along-with-exercise-to-lose-weight/article-50777"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/loss.png" alt=""></a><br /><p>आज के जमाने में मोटापा महामारी की तरह फैल रहा है,दुनियाभर में करोड़ों लोग मोटापे और ज्यादा वजन की समस्या से जूझ रहे हैं,मोटापा कम करने के लिए बड़ी तादाद में लोगों को टहलते, दौड़ लगाते और एक्सरसाइज करते हुए देखा जा सकता है,बाजार में वजन कम करने का दावा करने वाले प्रोडक्ट भी मिल रहे हैं,तमाम लोग इन प्रोडक्ट्स का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं,कोशिशों के बाद भी कई लोगों को वजन कम नहीं होता और उनके शरीर पर चर्बी जमी रहती है,अब सवाल उठता है कि खूब एक्सरसाइज के बावजूद वजन न घटने की क्या वजह हैं। <br /> वजन कम करने के लिए सिर्फ एक्सरसाइज करना ही काफी नहीं होता है,मोटापा और वजन कम करने के लिए डाइट सबसे जरूरी होती है,बेहतर डाइट को फॉलो करके एक्सरसाइज की जाए,तो वजन तेजी से कम किया जा सकता है। -बड़ी तादाद में लोग वजन कम करने के लिए ब्रेकफास्ट नहीं करते हैं, लेकिन यह सबसे बड़ी गलती है,ब्रेकफास्ट सेहत के लिए बेहद जरूरी होता है,जरूरी पोषक तत्व और एनर्जी देता है।<br /><br />वेट लॉस की कोशिश करने वाले लोग हेल्दी डाइट लेने के बजाय जंक फूड खा लेते हैं,उन्हें लगता है इससे उनका वजन कम होगा,लेकिन यह गलतफहमी है। वजन कम करने के लिए कुछ लोग रोटी-सब्जी समेत सॉलिड फूड्स आइटम्स खाना छोड़े देते हैं और शुगरी ड्रिंक्स का ज्यादा सेवन करते हैं,जिससे कई बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। ज्यादा बार खाने के बजाय एक बार में अत्यधिक खाना खा लेते हैं, लेकिन ऐसा करना फायदेमंद नहीं होता है। प्रोटीन वाले फूड्स को अवॉइड करना भी गलती होती है,ऐसा करने से आपकी मसल्स को मजबूती नहीं मिल पाएगी और आपको परेशानी होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Jul 2023 10:33:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>उपभोक्ता कंपनियों के सॉफ्ट टारगेट हैं बच्चे</title>
                                    <description><![CDATA[यूनाइटेड स्टेट्स की आधिकारिक वेबसाइट नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन पर दिए गए तथ्य इस पॉलिसी की पोल खोलते हैं।  टेलीविजन पर दिखाए जाने वाले कुल विज्ञापनों में से 18 फीसदी खाद्य पदार्थों से जुड़े होते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/consumer-companies/article-50600"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/630-400-size-की-कॉपी2.png" alt=""></a><br /><p>बच्चे मन के सच्चे होते हैं। उन्हें आसानी से बरगलाया जा सकता है, क्योंकि बच्चे बहुत भोले भी होते हैं। बच्चों से संबंधित इसी सच्चाई को खासकर खाद्य और पेय उत्पाद बनाने वाली कंपनियां बखूबी भुना रही हैं। बच्चों को सॉफ्ट टारगेट समझकर इन कंपनियों ने विज्ञापन का ऐसा जाल बुना है, जिसमें फंसकर अभिभावक न सिर्फ अपनी जेब हल्की कर रहे हैं बल्कि अनजाने में अपने बच्चों के जीवन के लिए भी खतरा मोल ले रहे हैं। मेडिकल जर्नल बीएमजे के एक व्यापक शोध से तो यही साबित होता है।<br /><br />आजकल टेलीविजन से लेकर सोशल मीडिया पर ऐसे विज्ञापनों की भरमार है, जिनमें बच्चों की लंबाई, इम्यूनिटी, स्टेमिना और मेमोरी तक बढ़ाने के दावे के साथ उत्पाद पेश किए जा रहे हैं। लेकिन हकीकत क्या है? इसका भंडाफोड़ बीएमजे में प्रकाशित शोध कर रहा है। वैज्ञानिकों ने भारत समेत 15 देशों में 757 बच्चों से संबंधित उत्पादों का अध्ययन करने के बाद नतीजे तैयार किए हैं। अप्रैल, 2020 से जुलाई, 2022 तक किए गए इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े उत्पादों में से 700 से अधिक उत्पादों को लेकर किए गए दावे वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। <br /><br />यूनाइटेड स्टेट्स की आधिकारिक वेबसाइट नेशनल लाइब्रेरी आॅफ मेडिसिन पर दिए गए तथ्य इस पॉलिसी की पोल खोलते हैं।  टेलीविजन पर दिखाए जाने वाले कुल विज्ञापनों में से 18 फीसदी खाद्य पदार्थों से जुड़े होते हैं, जिनका प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष निशाना बच्चे होते हैं। एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि 3-13 साल के बच्चों के मोटापे का सीधा संबंध खाद्य पदार्थों के विज्ञापनों से पाया गया है। न्यूजीलैंड की यूनिवर्सिटी आॅफ ओटागो से सम्बद्ध वेलिंगटन स्कूल आॅफ पब्लिक हेल्थ की प्रमुख प्रोफेसर लुईस सिगनल की टीम का अध्ययन भी इस मकड़जाल की तरफ इशारा करता है। स्वास्थ्य शोध से संबंधित वैज्ञानिक पत्रिका द लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ में प्रकाशित शोध बताता है कि कंपनियों ने विज्ञापनों के जरिए 11-13 साल के बच्चों को हर 10 घंटे में 554 ब्रांड से अवगत कराया। मतलब, हर मिनट बच्चों ने कम से कम एक ब्रांड के बारे में जान लिया। बच्चों ने बड़ी संख्या में जंक फूड के विज्ञापन भी देखे।   बात अगर भारत की करें, तो कहने को यहां पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम-2019 लागू है। इसका मकसद अनुचित व्यापार प्रथाओं और भ्रामक विज्ञापनों पर अंकुश लगाना है, लेकिन टेलीविजन से लेकर सोशल मीडिया में हर घड़ी प्रसारित होने वाले अधिकतर विज्ञापनों में किए जा रहे हवा-हवाई दावे अधिनियम के प्रभाव को झुठलाते नजर आते हैं। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि भारत में डिजिटल विज्ञापन का कारोबार तेजी से बढ़ा है। पिछले साल विज्ञापन बाजार का आंकड़ा 1275  करोड़ का था, जिसके 2025 तक 2800 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान जताया जा रहा है। विज्ञापन बाजार के आंकड़े साबित करते हैं कि दुनिया भर की कंपनियों की निगाहें भारतीय बाजार पर लगी हैं। कंपनी अपने उत्पाद बेचने के लिए हर तरह की तिकड़मबाजी में जुटी हैं। ऐसे में विज्ञापन से जुड़ी मयार्दाएं टिक पाएंगी, इसकी उम्मीद नहीं की जा सकती। बहुत संभव है कि कंपनियों की विज्ञापन पॉलिसी का स्तर और अधिक गिर जाए। इसका सबसे नकारात्मक असर बच्चों पर ही पड़ेगा, जो पहले से ही कंपनियों के लिए सॉफ्ट टारगेट हैं। इसी साल फरवरी में मुंबई में हुई एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड काउंसिल आॅफ इंडिया की बैठक में मंत्रालय के जिम्मेदार अधिकारियों ने कंपनियों को विज्ञापनों के प्रति और अधिक जिम्मेदार बनने की नसीहत तो दी है लेकिन, अब देखना यह है कि इसका धरातल पर कोई असर दिखाई पड़ेगा या नहीं। <br /><br />संजीव रघुवंशी<br />- यह लेखक के स्वयं के विचार हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Jul 2023 10:26:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>प्रदेश में वन्य जीव चिकित्सा एवं संरक्षण में डॉक्टर्स दे रहे योगदान, सुरक्षा का बढ़ रहा दायरा, वन और पेड़-पौधों की हो रही कम</title>
                                    <description><![CDATA[पिछली जनवरी में अचरोल रेंज से एक पैंथर को रेस्क्यू किया गया था। कड़ाके की सर्दी के कारण वह निमोनिया से ग्रस्त हो गया था उसमें न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर भी आ गए थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/doctors-are-giving-contribution-in-wildlife-medicine-and-conservation-in-the-state--increasing-scope-of-protection--forest-and-trees-and-plants-are-decreasing/article-50534"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/plant.jpg" alt=""></a><br /><p>ब्यूरो/नवज्योति, जयपुर। प्रदेश में वन्य जीव चिकित्सा एवं संरक्षण में डॉक्टर्स अपना योगदान दे रहे हैं, जिससे जीवों की सुरक्षा का दायरा बढ़ रहा है। लेकिन इस दौरान सबसे बड़ी चुनौति वन और पेड़-पौधों की कमी है, जिसको बढ़ाने के लिए राज्य और केन्द्र सरकार भी प्रयास कर रही है। इसके बावजूद भी पौधों की संख्या नहीं बढ़ पाई है, जिससे वन्य जीवों के साथ ही प्रदेश और देश में पानी की भी कमी होती जा रही है। <br /><br /><strong>नवजात पैंथर शावक पालन </strong><br />नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क एवं चिड़ियाघरों में बनी अत्याधिक नवजात शिशु क्रिटिकल केयर यूनिट में वन्यजीवों पैंथर, हाइना, जंगली, बिल्ली आदि का पालन किया है। पिछले दिनों 7 से 10 दिन का पैंथर शावक अपनी मां से बिछड़ गया था, उसका वजन 500 ग्राम था, उसका केयर कर उसको बड़ा किया गया। आज पैंथर शावक 10 माह का हो गया है और उसका वजन 30 केजी से ज्यादा हो गया है।<br /><br /><strong>कोविड-19 प्रबंधन एवं चिकित्सा</strong><br />नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के एशियाटिक शेर त्रिपुर के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने पर उसका सफल इलाज एवं प्रबंधन किया गया। सभी वन्यजीवों के प्रोटोकॉल के अनुसार सैंपल्स लेकर भेजे गए एवं उनको चिकित्सा प्रदान की गई। <br /><br /><strong>किए रेस्क्यू ऑपरेशन </strong><br />डॉ.अरविंद माथुर ने सर्वाधिक 500 से ज्यादा वन्य जीव ट्रेंकुलाइजेशन एवं रेस्क्यू आॅपरेशन किए हैं, जिसमें विशेष तौर पर टाइगर, पैंथर, हाथी, हाइना, नील गाय, सांभर, सियार, भेड़िया, मगरमच्छ, बंदर, भालू इत्यादि है। राज्य के 14 विभिन्न जिलों से सर्वाधिक पैंथर का ट्रेंकुलाइजेशन एवं रेस्क्यू आॅपरेशन करने के कारण ही डॉ. माथुर का इंडिया बुक आॅफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज भी हुआ है। शहर में भी वन क्षेत्र से आबादी में निकले 10 से अधिक पैंथर को भी ट्रेंकुलाइज कर रेस्क्यू किया गया है। डॉ.माथुर को जिला, राज्य व राष्टÑीय स्तर के कई पुरस्कार भी मिले है।<br /><br /><strong>यह है यूनिक मामला</strong><br />पिछली जनवरी में अचरोल रेंज से एक पैंथर को रेस्क्यू किया गया था। कड़ाके की सर्दी के कारण वह निमोनिया से ग्रस्त हो गया था उसमें न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर भी आ गए थे। उस पैंथर को रेस्क्यू सेंटर में लाकर उसका ट्रीटमेंट किया और उपचार पश्चात वह पैंथर पूरी तरह स्वस्थ है। वन्य जीव एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत देश के विभिन्न राज्यों से जैसे नई दिल्ली, चेन्नई, गुजरात, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, तेलंगाना, मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश से विभिन्न वन्यजीव जैसे सफेद बाघ, रॉयल बेंगल टाइगर, एशियाटिक शेर एवं शेरनी, पैंथर, मगरमच्छ जंगली सूअर एवं शुतुरमुर्ग एवं विभिन्न पक्षियों का सुरक्षित ट्रांसपोर्टेशन जयपुर में किया गया। <br /><br /><strong>हाथी स्वास्थ्य एवं प्रबंधन</strong><br />पिछले 10 से अधिक वर्षों से आमेर जयपुर के हाथियों का स्वास्थ्य परीक्षण, चिकित्सा एवं समय पड़ने पर ट्रेंकुलाइज भी किया जा रहा है। पहली बार राज्य में नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में दरियाई घोड़े स्लॉथ बियर, मगरमच्छ एवं चेसिंघा का सफल प्रजनन भी हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Jul 2023 11:00:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>खून में जमे कोलेस्ट्रॉल को बाहर निकालेंगे ये फूड्स</title>
                                    <description><![CDATA[अलसी के बीजों को कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए रामबाण इलाज माना जा सकता है। इन बीजों में फाइबर,ओमेगा 3 फैटी एसिड समेत कई पोषक तत्वों की भरपूर मात्रा होती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/these-foods-will-remove-the-cholesterol-accumulated-in-the-blood/article-50526"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/630-400-size-की-कॉपी-(14).png" alt=""></a><br /><p>कोलेस्ट्रॉल की समस्या से छुटकारा दिलाने में कुछ फूड्स बेहद मददगार साबित हो सकते हैं,इनमें मौजूद पोषक तत्व खून में जमे कोलेस्ट्रॉल को पिघलाकर बाहर निकाल देते हैं,इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कम हो जाता है,साथ ही शरीर को मजबूती मिलती है,इनके सेवन से इम्यूनिटी भी मजबूत हो सकती है। <br /><br />कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए सेब को बेहद लाभकारी माना जा सकता है,कई रिसर्च में यह बात सामने आ चुकी है सेब खाने से कोलेस्ट्रॉल लेवल को 40 फीसदी तक कम किया जा सकता है, रिपोर्ट के अनुसार सेब में मौजूद फाइबर और अन्य एंटीआॅक्सीडेंट कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करते हैं,रोज 2 सेब खाना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। <br /><br />हाई कोलेस्ट्रॉल के मरीजों को सब्जियों का खूब सेवन करना चाहिए,सब्जियों में मौजूद पोषक तत्व कोलेस्ट्रॉल कम करके हार्ट हेल्थ बूस्ट करते हैं,सब्जियों में ब्रोकली, गोभी, टमाटर, मिर्च, अजवाइन, गाजर, पालक और प्याज को कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए सबसे ज्यादा असरदार माना गया है। <br /><br />अलसी के बीजों को कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए रामबाण इलाज माना जा सकता है,इन बीजों में फाइबर,ओमेगा 3 फैटी एसिड समेत कई पोषक तत्वों की भरपूर मात्रा होती है, जिससे शरीर में जमे कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में मदद मिलती है,अलसी के बीजों के अलावा अखरोट, बादाम, चिया सीड्स के सेवन से कोलेस्ट्रॉल कम हो सकता है,ये सभी हार्ट हेल्थ को बेहतर बनाते हैं।<br /><br />कोलेस्ट्रॉल के मरीजों को सोयाबीन और इससे बने प्रोडक्ट्स का सेवन करना चाहिए। टोफू एक लोकप्रिय सोयाबीन फूूड है और सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है,सोयाबीन और टोफू को कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने के लिए  असरदार माना जाता है,इनमें प्रोटीन की भरपूर मात्रा होती है। जिससे शरीर को मजबूती मिलती है </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Jul 2023 10:43:39 +0530</pubDate>
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