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                <title>new Parliament Building - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>पुरानी संसद को अलविदा बोलकर नई संसद में पहुंचे सासंद</title>
                                    <description><![CDATA[ नई संसद में जाने से पहले पुरानी संसद के सेंट्रल हॉल में पीएम मोदी ने कहा कि मेरी प्रार्थना है कि पुराने संसद भवन की गरिमा कभी भी कम नहीं होनी चाहिए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/mps-reached-the-new-parliament-after-saying-goodbye-to-the/article-57497"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/new-parliament.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पुरानी संसद के सेंट्रल हॉल में पीएम मोदी के संबोधन के बाद सभी सांसद नई संसद में पहुंच गए है। अब से पुरानी संसद को संविधान भवन के नाम से जाना जाएगा। बता दें कि पुरानी संसद 18 जनवरी 1927 को बनकर तैयार हुई थी।<br /><br />नई संसद में जाने से पहले पुरानी संसद के सेंट्रल हॉल में पीएम मोदी ने कहा कि मेरी प्रार्थना है कि पुराने संसद भवन की गरिमा कभी भी कम नहीं होनी चाहिए। इसे केवल पुराना संसद भवन कहकर नहीं छोड़ना। अगर सब की सहमति हो तो इसे 'संविधान सदन' के नाम से जाना जाए। उन्होंने कहा कि भारत फिलहाल 5वीं अर्थव्यवस्था है और ये तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर रहेगा।<br /><br /><strong>कांग्रेस सांसद संविधान की प्रति लेकर पहुंचे</strong><br />कांग्रेस सांसद नई संसद में संविधान की प्रति लेकर पहुंचे। संविधान की प्रति कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के हाथ में थी। उनके साथ राहुल गांधी, गौरव गोगोई और बाकी सांसद भी मौजूद थे।<br /><br /><strong>ये है नई संसद की खासियत</strong><br />नई संसद में लोकसभा में 888 सासंदों और राज्यसभा में 384 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था है। पुरानी संसद में लोकसभा के 543 और राज्यसभा के 250 सांसदों के बैठने की व्यवस्था है। नई संसद में कई अत्याधुनिक सुविधाएं है। नई संसद में आने-जाने के लिए 6 गेट बनाए गए है। इन गेट के नाम गज द्वार, मकर द्वार, अश्व द्वार, शार्दूल द्वार, गरुड़ द्वार और हंस द्वार है। गज द्वार पीएम के लिए विशेष रास्ता है। मकर द्वार से सासंदों का आना और जाना होगा। हंस द्वार से पत्रकारों का आना-जाना होगा।<br /><br />नई संसद में इमारती लकड़ी महाराष्ट्र के नागपुर से, लाल और सफेद संगमरमर राजस्थान से लगाए गए हैं। इसमें उदयपुर से लाए गए हरे पत्थर लगे हैं। इसके अलावा लाल ग्रेनाइट अजमेर के लाखा की है। कुछ सफेद संगमरमर राजस्थान में ही अंबा जी से लाकर लगाया गया है। इसमें हवा की गुणवत्ता के लिए अल्ट्रावायलेट लैम्प जैसी सुविधाएं हैं। आर्द्रता नियंत्रण के लिए अल्ट्रासोनिक ह्यूमिडी फायर काम करेगा। बता दें कि पीएम मोदी ने 10 दिसंबर 2020 को नई संसद का शिलान्यास किया था।<br /><br /><strong>नई संसद का उद्घाटन राष्ट्रपति से नहीं कराने पर विपक्ष ने किया था विरोध</strong><br />नई संसद का उद्घाटन 28 मई 2023 को हुआ था। इसके उद्घाटन से पहले कांग्रेस ने अपना विरोध जताते हुए कहा था कि इसका उद्घाटन राष्ट्रपति से कराना चाहिए। राहुल गांधी ने ट्वीट किया था कि राष्ट्रपति से संसद का उद्घाटन न करवाना और न ही उन्हें समारोह में बुलाना - यह देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद का अपमान है। संसद अहंकार की ईंटों से नहीं, संवैधानिक मूल्यों से बनती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Sep 2023 13:01:40 +0530</pubDate>
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                <title>Parliament Special Session: नए संसद भवन में जाने से पहले पीएम मोदी ने गिनाए पुरानी संसद में हुए कामकाज</title>
                                    <description><![CDATA[पीएम मोदी ने पुराने सदन में हुए काम काज को गिनाते हुए कहा कि इसी सदन में ट्रांसजेडंर बिल पास हुआ था, मुस्लिम बहनों को तीन तलाक से आजादी मिली, अनुच्छेद-370 हटाया गया और पुरानी संसद में 4 हजार से ज्यादा बिल पास किए गए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/parliament-special-session/article-57494"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/pm-modi.png" alt=""></a><br /><p>संसद के विशेष सत्र में सेंट्रल हॉल में पीएम मोदी ने कहा कि हम सब मिलकर नए भविष्य का श्री गणेश करने जा रहे हैं। ये भावुक करने वाला पल है। सेंट्रल हॉल हमारी भावनाओं से भरा हुआ है। साल 1947 में अंग्रेजी सरकार ने यहीं सत्ता का हस्तांतरण किया था। पीएम मोदी ने कहा कि मैं पूरे यकीन से कहता हूं कि भारत दुनिया की टॉप-3 अर्थव्यवस्थाओं में पहुंचेगा।<br /><br />पीएम मोदी ने पुराने सदन में हुए काम काज को गिनाते हुए कहा कि इसी सदन में ट्रांसजेडंर बिल पास हुआ था, मुस्लिम बहनों को तीन तलाक से आजादी मिली, अनुच्छेद-370 हटाया गया और पुरानी संसद में 4 हजार से ज्यादा बिल पास किए गए। पीएम मोदी ने कहा कि साल 1952 से अब तक दुनिया के करीब 41 राष्ट्राध्यक्षों ने सेंट्रल हॉल में सांसदों को संबोधित किया है।<br /><br />नए भवन में जाने से पहले <span class="uk-margin-bottom uk-display-block">पुराने संसद भवन में लोकसभा और राज्यसभा के सभी सांसदों ने ग्रुप फोटो भी खिंचवाई।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Tue, 19 Sep 2023 12:50:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>Parliament Special Session: खड़गे ने सरकार को दी राजनीति का तरीका बदलने की सलाह</title>
                                    <description><![CDATA[उन्होंने कहा ''जब हमने 1950 में लोकतंत्र को अपनाया तो कई विदेशी लोगों ने सोचा कि यहां लोकतंत्र असफल हो जाएगा क्योंकि यहां साक्षरता बहुत कम है।" ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/parliament-special-session-kharge-advised-the-modi-government-to-change-the-way-of-doing-politics-narendra-modi-news-parliament-building/article-57426"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/kharge.png-12.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कांग्रेस के कार्यकाल को लेकर अक्सर 70 सालों पर पूछे जाने वाले सवालों के सदन में जवाब दिए और उन्होंने सरकार को राजनीति का तरीका बदलने की सलाह दी। संसद के विशेष सत्र की शुरूआत और नये संसद भवन में मंगलवार से कार्यवाही शुरू किये जाने से पहले आज वर्तमान संसद भवन में चर्चा के दौरान खड़गे ने कविता के माध्यम से अपने वक्तव्य की शुरूआत की। उन्होंने कविता पढ़ी: </p>
<p>बदलना है तो अब हालात बदलो, <br />ऐसे नाम बदलने से क्या होता है?<br />देना है तो युवाओं को रोजगार दो<br />सबको बेरोजगार करके क्या होता है?<br />दिल थोड़ा करके देखो<br />लोगों को मारने से क्या होता है?<br />कुछ कर नहीं सकते तो कुर्सी छोड़ दो <br />बात-बात पर डराने से क्या होता है?</p>
<p>खड़गे ने कहा कि अंग्रेजों ने भारत को बहुत कम आंका था लेकिन देश लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में विजयी होकर उभरा। उन्होंने कहा ''जब हमने 1950 में लोकतंत्र को अपनाया तो कई विदेशी लोगों ने सोचा कि यहां लोकतंत्र असफल हो जायेगा क्योंकि यहां साक्षरता बहुत कम है।" </p>
<p>विपक्ष के नेता ने ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल का जिक्र किया और कहा, ''चर्चिल ने तो यहां तक कह दिया था कि अगर अंग्रेज भारत से चले जायेंगे जो यहां न्यायपालिका, स्वास्थ्य सेवायें, रेलवे और उनके द्वारा शुरू किये गये काम पूरी तरह से तबाह हो जायेंगे। सिस्टम नष्ट हो जायेगा। उन्होंने हमें बहुत कम आंका। हमने लोकतंत्र को बरकरार रख उन लोगों को गलत साबित कर दिया। हमने इसे मजबूत किया और सुरक्षित भी रखा और आप पूछते हो हमने 70 सालों में क्या किया।"</p>
<p>उन्होंने आम आदमी पार्टी (आप) के सदस्य संजय सिंह और राघव चढ्ढा के निलंबन को समाप्त कर उन दोनों सदस्यों को सदन में आने की अनुमति देने की अपील करते हुए कहा कि यह भवन संविधान सभा के साथ ही आजाद भारत के सभी बड़े निर्णय लिये जाने का गवाह है। जब राष्ट्र की बुनियाद रखी गई थी तब ऐसी नींव रखी गयी ताकि उस पर मजबूत इमारत बन सके। पंडित जवाहरलाल नेहरू, बाबा साहब अंबेडकर सहित बड़े बड़े विद्वान इसी इमारत में बैठक कर संविधान बनाये थे। 140 खंभों वाली यह इमारत गुलामी के नहीं बल्कि भारतीय वस्तुकला का नमूना है। </p>
<p>उन्होंने मणिपुर मुद्दे को उठाते हुये कहा कि यह राज्य मई से जल रहा है। आज भी एक व्यक्ति की हत्या हुई है। उन्होंने सदन में नियम 267 के तहत चर्चा कराये जाने के मामले को भी उठाया और कहा कि इसके तहत सात बार चर्चा हो चुकी है और प्रश्नकाल स्थगित कर 10 बार महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करायी जा चुकी है। </p>
<p>उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि मनमोहन सिंह ने अपने कार्यकाल में 30 बार संसद में बयान दिये और अटल बिहारी वाजपेयी ने 21 बार बयान दिए, लेकिन मोदी ने कस्टमरी बयान को छोड़कर सिर्फ दो बार बयान दिए हैं। </p>
<p>खड़गे ने महत्वपूर्ण विधेयकों को बगैर किसी समिति के पास भेजे पारित कराये जाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुये कहा कि 1952 से 57 के बीच संसद की 667 बैठकें हुयी, 319 विधेयक पारित कराये गये। संसद का मुख्य काम कानून बनाना और लोगों को सशक्त बनाना है। राज्यसभा और लोकसभा में एक से बढ़कर एक सदस्य आज भी हैं और पहले भी थे। सभी को बोलने की आजादी मिलनी चाहिए। कानून को स्थायी समिति को नहीं भेजा जाता है जबकि इसे भेजा जाना चाहिए। समितियों को भेजने जाने वाले विधेयकों का 2009-14 के दौरान 71 प्रतिशत था जो 2014-19 के दौरान 47 प्रतिशत और 2019 के बाद अब तक गिरकर यह 13 प्रतिशत पर आ गया है। बुलेट ट्रेन से तेज गति से कानून बना रहे हैं। कानून की गुणवत्ता कमतर होती जा रही है। तीन कृषि कानून को वापस लेना पड़ा। ऐसे करने से किसान भी नराज हैं।</p>
<p>उन्होंने बेरोजगारी और महंगाई के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी बढ़ती रही तो लोकतंत्र भी नहीं रहेगा। विपक्ष के नेता ने सभापति जगदीप धनखड़ पर भी टिप्पणी करते हुये कहा '' मेरी छोटी गलती की भी बहुत बड़ी सजा देते है। वे बड़ी गलतियां करते हैं तों भी आप माफ कर देते हैं।"</p>
<p>इस पर सभापति ने खड़गे से कहा कि आज आप मुझ पर ही आरोप लगाये जा रहे हैं। उन्होंने सदस्यों से अपील करते हुए कहा ''कब तक हम पूर्व प्रचलन को लेकर कहते रहें। आपकी भागीदारी हो सकती है लेकिन वहां आप होते नहीं हैं। अक्सर बहिष्कार कर जाते हैं। इस पर कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कुछ कहने की कोशिश की तो धनखड़ ने कहा कि जयराम रमेश आप क्यों सुपर एलओपी बन रहे हैं। यह ऐतिहासिक असवर है जब हम 75 वर्षाें के अनुभव पर चर्चा कर रहे हैं तो आप दूसरे मुद्दे उठा रहे हैं। जब भागीदारी का मौका होता है तो आप बहिष्कार कर जाते हैं। जब कुछ होता है तो दो दो सदस्य विपक्ष के नेता को बचाने आ जाते हैं। यह विपक्ष के नेता का अपमान नहीं है। वह अपने आप में सक्षम हैं। </p>
<p>इसके बाद खड़गे ने फिर से अपनी बात कहने से पहले सभापति को धन्यवाद कहा जिसपर धनखड़ ने कहा,  ''अच्छा हुआ आपने थैंक्यू तो कहा" इसके बाद खड़गे इस विशेष सत्र में महिला आरक्षण विधेयक लाये जाने की अपील करते हुये कहा कि अभी राज्यसभा में 10 प्रतिशत, लोकसभा में 14 प्रतिशत और विधानसभाओं में 10 प्रतिशत महिला प्रतिनिधि हैं। पहली सरकार में पांच प्रतिशत महिलायें थी। उन्होंने ब्रिटेन और अमेरिका का उदाहरण देते हुये कहा कि कभी वहां भी दो से तीन प्रतिशत महिलायें होती थी, लेकिन आज अमेरिका में 28 प्रतिशत और ब्रिटेन में 33 प्रतिशत महिलायें प्रतिनिधि हैं। </p>
<p>इसी बीच सदन के नेता पीयूष गोयल ने कहा कि खड़गे जी-20 की बैठक पर भी कुछ कहिये। इस पर खड़गे ने कहा कि राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं है। वे जी-20 की 10 बैठकों में श्रम मंत्री के तौर पर भाग ले चुके हैं। इसके बाद खड़गे ने अपने वक्तव्य का समापन भी एक कविता से ही किया।</p>
<p>इस पर धनखड़ ने कहा कि भारत की अध्यक्षता में जी-20 की बैठक ऐतिहासिक रही है क्योंकि इसमें अफ्रीका संघ को शामिल किया गया है। इसके साथ ही पूरी दुनिया के नेताओं ने इसे सफलतम बैठक बताया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 18 Sep 2023 15:21:52 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Jawan Movie: जयराम रमेश ने दिया चैलेंज, नई संसद में गदर 2 दिखाई थी क्या मोदी सरकार में जवान दिखाने की हिम्मत है ?</title>
                                    <description><![CDATA[जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा- नए संसद भवन में कुछ दिन पहले गदर-2 दिखाया गया था। क्या मोदी सरकार में जवान की भी स्क्रीनिंग कराने की हिम्मत है?]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/jairam-ramesh-challenged-modi-government-screening-of-jawan-2-in-new-parliament-building-gadar-2-was-shown-on-25-august/article-56684"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/jawan-movie-jairam-ramesh.png" alt=""></a><br /><p>कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मोदी सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि क्या मोदी सरकार में नए संसद भवन में जवान फिल्म को दिखाने की हिम्मत है। दरअसल कुछ दिन पहले लोकसभा सांसदों के लिए नए संसद भवन में सनी देओल की फिल्म गदर 2 की स्क्रीनिंग हुई थी। जयराम रमेेश ने इसे शाहरुख खान की फिल्म जवान से जोड़ते हुए मोदी सरकार को चैलेंज दिया है।</p>
<p>जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा- नए संसद भवन में कुछ दिन पहले गदर-2 दिखाया गया था। क्या मोदी सरकार में जवान की भी स्क्रीनिंग कराने की हिम्मत है?</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="und" xml:lang="und">Gadar-2 was shown in the new Parliament building a few days back. Will the Modi Sarkar have the courage to screen Jawan as well?<br /><br />नए संसद भवन में कुछ दिन पहले गदर-2 दिखाया गया था। क्या मोदी सरकार में जवान की भी स्क्रीनिंग कराने की हिम्मत है?</p>
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) <a href="https://twitter.com/Jairam_Ramesh/status/1700460777864602086?ref_src=twsrc%5Etfw">September 9, 2023</a></blockquote>
<p>

</p>
<p>नए संसद भवन में 25 अगस्त को गदर 2 दिखाई गई थी। ये पहली फिल्म है जिसे नए संसद भवन में दिखाया गया है। फिल्म ने अब तक 512 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर ली है। वहीं जवान को अभी रिलीज हुए 3 दिन ही हुए है और कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि फिल्म तीसरे दिन ही भारत में 200 करोड़ की कमाई का आंकड़ा छू लेगी।</p>
<p><strong>आखिर जयराम ने ये चैलेंज क्यों दिया ?</strong><br />फिल्म जवान में एक राजनीतिक संदेश दिया गया है। मंत्रियों के काम-काज पर भी फिल्म कई सवाल खड़े करती है। यही वजह है कि जयराम रमेश ने मोदी सरकार को ये चैलेंज दिया होगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 Sep 2023 16:35:06 +0530</pubDate>
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                <title>Parliament Special Session: 19 सितंबर को गणेश चतुर्थी के मौके पर होगा नई संसद में कार्यवाही का श्रीगणेश</title>
                                    <description><![CDATA[19 सितंबर को गणेश चतुर्थी भी है। इसी दिन नई संसद में कार्यवाही का श्रीगणेश होगा। नई संसद का उद्घाटन पीएम मोदी ने 28 मई 2023 को किया था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/parliament-special-session-proceedings-will-shift-in-new-parliament-building-on-19-september-on-the-occasion-of-ganesh-chaturthi/article-56450"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/parliament1.png" alt=""></a><br /><p>केंद्र सरकार द्वारा बुलाए गए संसद के विशेष सत्र की शुरुआत 18 सितंबर को पुराने संसद भवन में ही होगी। लेकिन चर्चा है कि अगले दिन से यानी 19 सितंबर से सदन की कार्यवाही नई संसद में की जाएगी। संसद का विशेष सत्र 18 सितंबर से 22 सितंबर तक चलेगा। 19 सितंबर को गणेश चतुर्थी भी है। इसी दिन नई संसद में कार्यवाही का श्रीगणेश होगा। नई संसद का उद्घाटन पीएम मोदी ने 28 मई 2023 को किया था।<br /><br />देशभर में चर्चा है कि विशेष सत्र में केंद्र सरकार कई बड़े और चौंकाने वाले फैसले ले सकती है। सरकार महिला आरक्षण विधेयक, एक देश एक चुनाव विधेयक और समान नागरिक संहिता विधेयक को संसद में पेश कर सकती है। भारत और इंडिया के विवाद के बाद अब कयास लगाए जा रहे हैं कि देश का नाम केवल भारत रखने वाला कोई विधेयक भी लाया जा सकता है।</p>
<p><strong>नई संसद की क्या है खासियत<br /></strong>नई संसद में लोकसभा में 888 सासंदों और राज्यसभा में 384 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था है। पुरानी संसद में लोकसभा के 543 और राज्यसभा के 250 सांसदों के बैठने की व्यवस्था है। नई संसद में कई अत्याधुनिक सुविधाएं है। इसमें प्रवेश के लिए तीन द्वारों को ज्ञान द्वार, शक्ति द्वार एवं कर्म द्वार नाम दिए गए हैं। <br /><br />नई संसद में इमारती लकड़ी महाराष्ट्र के नागपुर से, लाल और सफेद संगमरमर राजस्थान से लगाए गए हैं। इसमें उदयपुर से लाए गए हरे पत्थर लगे हैं। इसके अलावा लाल ग्रेनाइट अजमेर के लाखा की है। कुछ सफेद संगमरमर राजस्थान में ही अंबा जी से लाकर लगाया गया है। इसमें हवा की गुणवत्ता के लिए अल्ट्रावायलेट लैम्प जैसी सुविधाएं हैं। आर्द्रता नियंत्रण के लिए अल्ट्रासोनिक ह्यूमिडी फायर काम करेगा। बता दें कि पीएम मोदी ने 10 दिसंबर 2020 को नई संसद का शिलान्यास किया था।</p>
<p><strong>65 हजार मजदूरों ने बनाई नई संसद<br /></strong>नई संसद को बनाने में करीब 65 हजार मजदूरों का श्रम लगा था। नई संसद को करीब 64500 वर्ग मीटर क्षेत्र में बनाया गया है। जो भूतल से चार मंजिला है। नए संसद भवन में करीब 1700 खिड़कियां हैं। इसे पूरी तरह से भूकंपरोधी बनाया गया है। इस भवन का जीवनकाल करीब 150 वर्ष आंका गया है। इस 20 हजार करोड़ रुपये की लागत वाले प्रोजेक्ट का नाम सेंट्रल विस्टा परियोजना था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Sep 2023 14:36:54 +0530</pubDate>
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                <title>नए संसद भवन की ये खास बातें जानते है आप?</title>
                                    <description><![CDATA[इसका शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 10 दिसंबर 2020 को किया था। नया संसद भवन 20 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली सेंट्रल विस्टा परियोजना का हिस्सा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/do-you-know-these-special-things-about-the-new-parliament-house/article-47001"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/630-400-size-(11).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। संसद भवन परिसर में स्थापित नये संसद भवन के लोकसभा कक्ष में रविवार को पहली बार ऐतिहासिक सेन्गोल (पवित्र राजदंड) स्थापित किया गया जो विरासत के आधुनिकता से जुडऩे का प्रतीक है।</p>
<p>नये संसद भवन का निर्माण मात्र ढाई साल में पूरा किया गया है। इसका शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 10 दिसंबर 2020 को किया था। नया संसद भवन 20 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली सेंट्रल विस्टा परियोजना का हिस्सा है। </p>
<p>इसके लोकसभा कक्ष में आवश्यकता होने पर 1280 व्यक्तियों के लिए बैठने की व्यवस्था की जा सकती है। नये भवन के लोकसभा कक्ष में 888 और राज्य सभा कक्ष में 300 सदस्य सहजता से बैठ सकते हैं। हर सीट पर दो सदस्यों के बैठने की व्यवस्था की जायेगी और डेस्क पर उनके लिए टच स्क्रीन गैजेट होंगे। </p>
<p>हीरे (त्रिकोणीय) आकार के नये भवन के साथ संसद भवन परिसर में पुस्तकालय भवन सहित तीन भवन हो गये हैं। कुल 64500 वर्ग मीटर में बने नये संसद भवन में तीन मुख्य द्वार- ज्ञान द्वार, शक्ति द्वार और कर्म द्वार हैं। अति विशिष्ट व्यक्तियों, सांसदों और दर्शकों को अलग-अलग द्वारों से प्रवेश कराया जायेगा।</p>
<p>इसका निर्माण टाटा उद्योग समूह की कंपनी टाटा प्रोजेक्टस लि ने किया है। इसमें एक विशाल कक्ष है, जिसमें भारत की लोकतांत्रिक विरासत की झांकी प्रस्तुत की गयी है। इसमें सांसदों के लिए लाउंज, पुस्तकालय, कई समिति कक्ष, भोजन-पान की जगह और पार्किंग स्थल बना है। </p>
<p>नये संसद भवन के निर्माण में 60 हजार श्रमिकों के हाथ लगे हैं। यह आधुनिक इलेक्ट्रानिक उपकरणों से लैस हैं जो सांसदों की कार्यक्षमता का विस्तार करेगा और इनसे संसदीय कार्य में आसानी होगी। </p>
<p>संसद भवन में लगी सामग्री देश विभिन्न भागों से लायी गयी है। इसमें इमारती लकड़ी महाराष्ट्र के नागपुर से, लाल और सफेद संगमरमर राजस्थान से आये हैं। इसमें उदयपुर से लाये गये हरे पत्थर लगे हैं। लाल ग्रेनाइट अजमेर के लाखा की है। कुछ सफेद संगमरमर राजस्थान में ही अंबा जी से लाया गया है।</p>
<p>नये भवन के राज्य सभा और लोक सभा की फॉल्स सीलिंग के लिए स्टील के ढांचे को दमन-दीव से मंगवाया गया है। भवन में पत्थर की जालियां राजस्थान के राजनगर और गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) से बनवाकर लगायी गयी हैं। कुर्सियों का डिजाइन मुंबई में तैयार किया गया है। इसमें बिछाई गयीं कालीन उत्तर प्रदेश के भदोही से लायी गयी हैं।</p>
<p>लोक सभा और राज्य सभा कक्षों की ऊंची दीवारों और सदन के बाहर लगाये गये बड़े-बड़े अशोक चक्र इंदौर से मंगवाये गये हैं। अशोक स्तम्भ के निर्माण में लगी सामग्री औरंगाबाद और जयपुर से लायी गयी हैं। इसमें लगी रेत और फ्लाईऐश हरियाणा में चरखी दादरी और उत्तर प्रदेश से लायी गयी है और ब्रास वर्क और ढलवा नालियां गुजरात से ली गयी हैं। नये संसद भवन में ऊर्जा की बचत और जल संरक्षण के विशेष प्रबंध किये गये हैं। </p>
<p>यह फाइव स्टार गृह (ग्रीन रेटिंग फॉर इंटीग्रेटेड हैबिटाट एसेसमेंट) प्रमाण पत्र प्राप्त भवन है। इसमें सीवेज शोधन के लिए संयंत्र है और उससे शोधित पानी का फ्लश और ङ्क्षसचाई के लिए इस्तेमाल किया जायेगा। भवन में हवा की गुणवत्ता के लिए अल्ट्रावायलेट लैम्प जैसी सुविधाएं हैं। आद्र्रता नियंत्रण के लिए अल्ट्रासोनिक ह्यूमिडी फायर काम करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 May 2023 16:47:54 +0530</pubDate>
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                <title>राजद ने संसद के नए भवन की तुलना ताबूत से की, बीजेपी ने दिया जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को जब संसद के नवनिर्मित भवन का उद्घाटन कर रहे थे तब राजद ने संसद के नये भवन की तस्वीर के साथ ताबूत की तस्वीर पोस्ट कर पूछा यह क्या है। राजद के इस तरह के ट्वीट की चौतरफा आलोचना हो रही है।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rjd-compared-the-new-building-of-parliament-with-a-coffin--bjp-replied/article-46980"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/dfsd.png" alt=""></a><br /><p>पटना। बिहार में सत्तारुढ़ राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने संसद के नये भवन की तुलना ताबूत से की है, जिसकी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इतनी शर्मनाक हरकत राजद और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ही कर सकता है। </p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को जब संसद के नवनिर्मित भवन का उद्घाटन कर रहे थे तब राजद ने संसद के नये भवन की तस्वीर के साथ ताबूत की तस्वीर पोस्ट कर पूछा यह क्या है। राजद के इस तरह के ट्वीट की चौतरफा आलोचना हो रही है।  </p>
<p>भाजपा के राज्यसभा सदस्य और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने राजद के ट्वीट पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि राजद ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक ओर नये संसद भवन का चित्र और दूसरी ओर मृतक को रखने वाले बक्सा यानी ताबूत का चित्र डाला है। पहला चित्र भारत का भविष्य है और दूसरा चित्र राजद का भविष्य दर्शाता है।</p>
<p>मोदी ने कहा कि भारत के गौरव दिवस पर इतनी शर्मनाक हरकत राजद और जदयू ही कर सकता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कहते हैं कि नए संसद भवन की जरूरत नहीं थी तो उन्हें बताना चाहिए कि पटना में ब्रिटिश कालीन म्यूजियम के रहते हुए एक हजार करोड़ रुपए खर्च कर नया म्यूजियम क्यों बनाया गया । इसी तरह श्री कृष्ण मेमोरियल भवन के रहते हुए बापू सभागार बनवाने की क्या आवश्यकता थी लेकिन सभी को नरेंद्र मोदी से द्वेष और घृणा है इसलिए वह उनके हर कार्यों की आलोचना करते हैं। </p>
<p>भाजपा सांसद ने कहा कि भले ही आज विपक्ष के राजनीतिक दलों ने नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह का बहिष्कार किया है लेकिन कल जब संसद की बैठक होगी तब तो सभी को वहीं बैठना होगा। उन्होंने कहा कि यदि उनमें हिम्मत है तो वह ऐलान करें कि वह इस नए संसद भवन में कदम भी नहीं रखेंगे ।</p>
<p>ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि राजद का कोई अपना स्टैंड नहीं है। भाजपा के साथ वर्षों रहकर राज करने वाले नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बना दिया है। उन्होंने कहा कि राजद के लोग ताबूत के बदले कोई और मिसाल दे सकते थे लेकिन वह हर चीज में कोई एंगल दे देते है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 May 2023 14:39:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>नए संसद भवन के उद्घाटन मामले पर बाबा रामदेव ने विपक्ष और पहलवानों को दे डाली ये सलाह</title>
                                    <description><![CDATA[ इस मसले पर बोलते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि विपक्षी दल अपने इस फैसले पर दोबारा विचार करेंगे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/baba-ramdev-gave-this-advice-to-the-opposition-and-wrestlers-on-the-matter-of-inauguration-of-the-new-parliament-house/article-46891"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/rrrrrrrrrr.png" alt=""></a><br /><p>28 मई को नए संसद भवन का उद्घाटन होने वाला है। इसे लेकर देश में जमकर सियासत हो रही है। इसी बीच बाबा रामदेव का भी एक बयान आ गया है। इस मसले पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि विपक्षी दल अपने इस फैसले पर दोबारा विचार करेंगे।<br /><br />कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल तो नए संसद भवन के उद्घाटन का बहिष्कार करेंगे ही साथ ही साथ जंतर-मंतर पर धरना दे रहे पहलवान भी संसद का घेराव करेंगे। ऐसे में रामदेव ने पहलवानों के इस कदम पर भी बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उन्हेें भरोसा है कि पहलवान इस बात को समझ जाएंगे और नए संसद भवन के उद्घाटन वाले दिन संसद का घेराव नहीं करेंगे। <br /><br />दरअसल कई विपक्षी दल इस समारोह का बहिष्कार करने वाले है। उनकी मांग है कि इस भवन का उद्घाटन पीएम मोदी के बजाय देश की राष्ट्रपति करें। देशभर की 21 विपक्षी पार्टियों ने समारोह के बहिष्कार की योजना बनाई है। </p>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sat, 27 May 2023 15:05:36 +0530</pubDate>
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                <title>राष्ट्रपति से संसद भवन उद्घाटन का हक छीन रहे हैं मोदी : खड़गे</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने गुरुवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से नये संसद भवन का उद्घाटन नहीं कराके उनके हक को छीना है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/modi-kharge-is-taking-away-the-right-to-inaugurate-the/article-46690"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/kharage-121.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने गुरुवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से नये संसद भवन का उद्घाटन नहीं कराके उनके हक को छीना है और संसदीय प्रणाली को ध्वस्त किया है। खडग़े ने कहा, मोदी जी, संसद, जनता द्वारा स्थापित लोकतंत्र का मंदिर है। महामहिम राष्ट्रपति का पद संसद का प्रथम अंग है। आपकी सरकार के अहंकार ने संसदीय प्रणाली को ध्वस्त कर दिया है।</p>
<p>उन्होंने कहा, देश के 140 करोड़ लोग जानना चाहते हैं कि भारत के राष्ट्रपति से संसद भवन के उद्घाटन का हक़ छीनकर आप क्या जताना चाहते हैं। इस बीच पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भी कहा, नई संसद के उद्घाटन कार्यक्रम से राष्ट्रपति को अलग रखना गलत है, उनका घोर अपमान है, लोकतंत्र पर प्रहार है। इस बात का विरोध आज हर राजनीतिक दल कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 25 May 2023 17:03:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुर्मू से संसद भवन का उद्घाटन न कराना सर्वोच्च संवैधानिक पद का अपमान : राहुल</title>
                                    <description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसद के नवनिर्मित भवन के उद्घाटन कार्यक्रम को लेकर तेज हुई राजनीति के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से नये भवन का लोकार्पण नहीं कराना देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद का अपमान है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/not-inaugurating-parliament-house-from-murmu-rahul-insults-the-highest/article-46568"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/rahul-gandhi.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसद के नवनिर्मित भवन के उद्घाटन कार्यक्रम को लेकर तेज हुई राजनीति के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से नये भवन का लोकार्पण नहीं कराना देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद का अपमान है। गांधी ने ट्वीट किया, राष्ट्रपति से संसद का उद्घाटन न करवाना और न ही उन्हें समारोह में बुलाना - यह देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद का अपमान है। संसद अहंकार की ईंटों से नहीं, संवैधानिक मूल्यों से बनती है।</p>
<div class="div_border" contenteditable="false">
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रपति से संसद का उद्घाटन न करवाना और न ही उन्हें समारोह में बुलाना - यह देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद का अपमान है।<br /><br />संसद अहंकार की ईंटों से नहीं, संवैधानिक मूल्यों से बनती है।</p>
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) <a href="https://twitter.com/RahulGandhi/status/1661283364803080192?ref_src=twsrc%5Etfw">May 24, 2023</a></blockquote>

</div>
<p>

</p>
<p>कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने कहा, संसद में लोकतंत्र की शहनाई बजनी चाहिए, लेकिन जब से स्वघोषित विश्वगुरु पधारे हैं एकतंत्र की तोप चलाई जा रही है। इमारत नहीं, नीयत बदलो। पार्टी के राष्ट्रीय सचिव तथा संचार विभाग की आंतरिक प्रभारी विनीत पुनिया ने कहा, नये संसद भवन के उद्घाटन के लिए राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति को न बुलाना सिर्फ उनका ही नहीं, देश के संविधान व हर नागरिक का अपमान है। आत्ममुग्धता की ऐसी पराकाष्ठा एक ग़लत परंपरा की शुरुआत है....क्या इसका एहसास कराने का साहस किसी भी मंत्री के पास नहीं है। इससे पहले विपक्ष के 19 दलों ने संसद भवन के निर्माण में विपक्ष तथा जनता की राय नहीं लेने और राष्ट्रपति को लोकार्पण समारोह से दूर रखने को लोकतंत्र का अपमान बताते हुए उद्घाटन समारोह के बहिष्कार की सामूहिक घोषणा की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 May 2023 16:53:47 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>आखिर क्या है सेंगोल? क्या है इसका आजादी से कनेक्शन? नए संसद भवन में किया जाएगा स्थापित</title>
                                    <description><![CDATA[शाह ने कहा कि सेंगोल भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ा है और इसका संबंध आठवीं सदी के चोल साम्राज्य से है। सेंगोल शब्द तमिल भाषा के सेमई शब्द से बना है जिसका अर्थ नीति परायणता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/what-is-sengol-after-all--will-be-installed-in-the-new-parliament-house-amit-shah-narendra-modi-jawahar-lal-nehru/article-46533"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/sengol.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नये संसद भवन के राष्ट्र को लोकार्पण के मौके पर आजादी के समय 14 अगस्त 1947 के दिन सत्ता के हस्तांतरण की परंपरा को दोहराते हुए पवित्र 'सेंगोल' को स्वीकार करेंगे जिसे बाद में लोकसभा अध्यक्ष के आसन के निकट स्थापित किया जायेगा। </p>
<p>केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को संवाददाता सम्मेलन में बताया कि आजादी के 75 वर्ष बीत जाने के बाद भी अनेक लोगों को इस बात की जानकारी नहीं है कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 14 अगस्त 1947 को आजादी मिलने के समय प्राचीन भारतीय परंपराओं का निर्वहन करते हुए ब्रिटिश साम्राज्य से सत्ता के हस्तांतरण के प्रतीक के रूप में पवित्र सेंगोल को स्वीकार किया गया था। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश सरकार ने इस विशेष अवसर और परंपरा के लिए वायसराय लार्ड माउंटबेटन को भारत भेजा था। उन्होंंने कहा कि पंडित नेहरू ने अपने आवास पर लार्ड माउंटबेटन की मौजूदगी में तमिलनाडु के अधिनम से आये धार्मिक शिष्टमंडल से सेंगोल को स्वीकार किया था। </p>
<p>शाह ने कहा कि सेंगोल भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ा है और इसका संबंध आठवीं सदी के चोल साम्राज्य से है। सेंगोल शब्द तमिल भाषा के सेमई शब्द से बना है जिसका अर्थ नीति परायणता है। उन्होंंने कहा कि सेंगोल न्याय और नीति पर आधारित शासन के भाव से जुड़ा है। </p>
<p>केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आगामी रविवार को जब प्रधानमंत्री नये संसद भवन का उद्घाटन करेंगे तो तमिलनाडु के 20 अधिनम के अध्यक्ष मोदी को यह सेंगोल प्रदान करेंगे। बाद में पवित्र सेंगोल को लोकसभा अध्यक्ष के आसन के निकट स्थापित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि यह पवित्र सेंगोल न्यायपूर्ण शासन व्यवस्था का प्रतीक है इसलिए इसकी जगह संग्रहालय के बजाय संसद भवन होनी चाहिए। </p>
<p>विपक्ष के नेताओं के इस मौके पर उपस्थित नहीं रहने से संबंधित सवाल पर शाह ने कहा कि सरकार ने सबसे विनती की है और सभी नेता अपनी भावना तथा विवेक के आधार पर निर्णय लेंगे। उन्होंने कहा कि इस मौके को राजनीति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए, राजनीति की अपनी जगह है और इस मौके को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। </p>
<p>एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि यह वही सेंगोल है जिसे पंडित नेहरू को प्रदान किया गया था और यह अब तक इलाहाबाद के एक संग्रहालय में रखा गया था।</p>
<p><strong>आजादी से जुड़ा है इतिहास<br /></strong>सेंगोल का इतिहास काफी पुराना है। आजाद भारत में इसका बड़ा महत्व है, 14 अगस्त 1947 में जब भारत की सत्ता का हस्तांतरण हुआ, तो वो इसी सेंगोल द्वारा हुआ था। एक तरह कहा जाए तो सेंगोल भारत की आजादी का प्रतीक है, उस समय सेंगोल सत्ता के हस्तांतरण का प्रतीक बना था।  जब लॉर्ड माउंट बेटन ने पंडित नेहरू से पूछा कि सत्ता का हस्तांतरण कैसे किया जाए, तो पंडित नेहरू ने इसके लिए सी राजा गोपालचारी से मशवरा मांगा। उन्होंने सेंगोल प्रक्रिया के बारे में बताया, इसके बाद इसे तमिलनाडु से मंगाया गया और आधी रात को पंडित नेहरु ने स्वीकार किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Wed, 24 May 2023 13:15:12 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नए संसद भवन के उद्घाटन का 19 दल करेंगे बायकॉट, राष्ट्रपति मूर्मू से उद्घाटन कराए जाने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[विपक्षी दलों ने संयुक्त बयान में कहा है कि जब संसद से लोकतंत्र की आत्मा को ही खींच लिया गया हो, ऐसे में हमें नई इमारत की कोई कीमत नजर नहीं आती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/19-teams-will-boycott-the-inauguration-of-the-new-parliament/article-46532"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/news.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत बनी संसद की नई बिल्डिंग का उद्घाटन राष्ट्रपति से कराने की मांग को लेकर देश की सियासत गरमाने लगी है। कई विपक्षी दलों ने 28 मई को आयोजित समारोह का बहिष्कार करने का फैसला किया है। इन दलों की मांग है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जगह संसद के नए भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से कराया जाए। विपक्ष की 19 राजनैतिक दलों ने संयुक्त बयान जारी कर नए भवन के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल नहीं होने का एलान किया है। </p>
<p>विपक्षी दलों ने संयुक्त बयान में कहा है कि जब संसद से लोकतंत्र की आत्मा को ही खींच लिया गया हो, ऐसे में हमें नई इमारत की कोई कीमत नजर नहीं आती है। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे पहले ही कार्यक्रम का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से करवाने की मांग कर चुके हैं। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 मई को संसद के नए भवन का उद्घाटन करेंगे। राज्यसभा में तृणमूल के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने ट्वीट किया, संसद सिर्फ नई इमारत नहीं है, यह पुरानी परंपराओं, मूल्यों, मिसालों और नियमों के साथ एक प्रतिष्ठान है, यह भारतीय लोकतंत्र की नींव है। प्रधानमंत्री यह नहीं समझते। उनके लिए रविवार को नई इमारत का उद्घाटन सिर्फ मैं, खुद के बारे में है इसलिए हमें इससे बाहर रखें।</p>
<div class="div_border" contenteditable="false">
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi" xml:lang="hi">19 घटक दलों ने नई संसद के उद्घाटन का बहिष्कार का फ़ैसला इसलिए किया है क्योंकि राष्ट्रपति मूर्मू को पूरी तरह से दरकिनार करके उद्घाटन करना ना सिर्फ़ महामहिम का घोर अपमान है वरन हमारे लोकतंत्र पर गहरा हमला है.<br /><br />अनुच्छेद 79 में यह स्पष्ट है कि संसद का मतलब राष्ट्रपति, राज्यसभा एयर… <a href="https://t.co/D6oSmlnNcI">pic.twitter.com/D6oSmlnNcI</a></p>
— Supriya Shrinate (@SupriyaShrinate) <a href="https://twitter.com/SupriyaShrinate/status/1661302830626402308?ref_src=twsrc%5Etfw">May 24, 2023</a></blockquote>

</div>
<p>

</p>
<p><strong>यह राजनैतिक दल नहीं होंगे शामिल</strong></p>
<p>नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह से दूरी बनाने वाले राजनैतिक दलों में कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम,राष्ट्रीय जनता दल, जनता दल-यूनाइटेड, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, समाजवादी पार्टी, उद्धव ठाकरे की शिवसेना गुट, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया, झारखंड मुक्ति मोर्चा, करेला कांग्रेस मनी, विदुथलाई चिरूथाइगल कच्छी, राष्ट्रीय लोक दल, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस और रेवॉल्युशनरी सोशलिस्ट पार्टी अन्य मरूमलारची द्रविड मुनेत्रद कडगम हैं। आम आदमी पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने एक ट्वीट करते हुए कहा, 'संसद भवन के उदघाटन समारोह में महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मूर्मू को आमंत्रित न करना उनका घोर अपमान है। ये भारत के दलित आदिवासी व वंचित समाज का अपमान है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा महामहिम राष्ट्रपति को आमंत्रित नही करने के विरोध में आम आदमी पार्टी उदघाटन कार्यक्रम का बहिष्कार करेगी।'</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Wed, 24 May 2023 13:13:00 +0530</pubDate>
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