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                <title>sengol - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>सेंगोल: दक्षिण को नजदीक लाने के प्रयास</title>
                                    <description><![CDATA[ इतिहास में इस बात का उल्लेख मिलता है कि आज से लगभग एक हजार वर्ष पूर्व दक्षिण के चोल राजवंश के काल में जब सत्ता में परिवर्तन होता था या राजा सत्ता का हस्तांतरण अपने वंशज को करते थे तो ऐसे समारोह में  बड़े मठों के पुजारी राज्यभिषेक के समय ऐसा राजदंड  उसके हाथ में देते थे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/efforts-to-bring-sengol-south-closer/article-47798"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/q-14.png" alt=""></a><br /><p>देश की राजधानी दिल्ली में नए संसद भवन के उद्घाटन को लेकर कई विपक्षी दल बीजेपी सरकार पर लगातार हमले बोल रहे हैं। जब यह सामने आया कि नए भवन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करेंगे, तो कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने मांग की कि नए भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति को करना चाहिए था। उद्घाटन के बाद यह आलोचना शुरू हो गई कि सारे समारोह का भगवाकरण कर, जबकि यह  एक राष्ट्रीय स्तर का सरकारी समारोह था। आलोचना का मुख्य बिंदु दक्षिण के तमिलनाडु से बुलाए गए दो दर्जन से अधिक  मठों के अदिनमों, पुजारियों को लेकर है। इसके साथ ही नए भवन के लोकसभा कक्ष में स्पीकर के आसन के निकट सेंगोल की स्थापना को लेकर भी कई तरह की  टिप्पणियां की गई। सेंगोल तमिल भाषा का शब्द है। हिन्दी में इसे राजदंड या धर्मदंड कहा जाता है। इतिहास में इस बात का उल्लेख मिलता है कि आज से लगभग एक हजार वर्ष पूर्व दक्षिण के चोल राजवंश के काल में जब सत्ता में परिवर्तन होता था या राजा सत्ता का हस्तांतरण अपने वंशज को करते थे तो ऐसे समारोह में  बड़े मठों के पुजारी राज्यभिषेक के समय ऐसा राजदंड  उसके हाथ में देते थे। यह दंड सत्ता और धर्म का प्रतीक माना जाता था। यह परम्परा दक्षिण के राजवंशों में सदियों से चली आ रही थी।<br /><br />15 अगस्त 1947 ब्रिटेन ने भारत को आजादी दी तो  यह मुद्दा सामने आया कि सत्ता हस्तांतरण के सरकारी दस्तवेजों के अलावा सत्ता के प्रतीक के रूप में और किया जाना चाहिए। उस समय कांग्रेस के बड़े कांग्रेस नेता सी  राजगोपालचारी, जो बाद में देश के पहले गवर्नर जनरल  आजाद देश के पहले प्रधानमंत्री बनने वाले पंडित जवाहर लाल नेहरु को यह सुझाव दिया कि दक्षिण की प्राचीन हिन्दू परम्परा के अनुसार वे मदुरै मंदिर के पुजारी के हाथ से सेंगोल ग्रहण करने के बाद  ही सत्ता हस्तांतरण के सरकारी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करे। हालांकि नेहरु आमतौर पर ऐसी धार्मिक परम्पराओं में विश्वास नहीं करते थे, लेकिन इसको बड़ा समारोह देखते हुए उन्होंने ऐसा करने से इंकार नहीं किया। चेन्नई के प्रसिद्ध आभूषण बनाने वाले एक  प्रतिष्ठान को यह राजदंड बनाने का काम दिया गया। आजादी की तारीख से  एक दिन पहले इस राजदंड को विशेष विमान से दिल्ली लाया गया। मदुरै मंदिर के उप पुजारी भी साथ में आए थे। 14 और 15 अगस्त की मध्य रात्रि को सत्ता हस्तांतरण समारोह ने कुछ समय पूर्व यह राजदंड पूरे पूजा पाठ के बाद उन्हें सौंपा गया। जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नए संसद भवन में सेंगोल को स्थापित किए जाने की घोषणा की तो कांग्रेस सहित कई विरोधी नेताओं ने केवल सेंगोल के अस्तित्व को ही नकार दिया बल्कि यहां तक कह डाला को नेहरु ने कभी ऐसा सेंगोल स्वीकार ही नहीं किया था। वास्तव में आजादी के कुछ समय बड़ा जब  नेहरु की। व्यक्तिगत वस्तुओं के साथ इस सेंगोल को तब के इलाहाबाद स्थित नेहरु परिवार के पुश्तैनी घर आनंद भवन भेज दिया गया। बाद में जब  इलाहाबाद  में संग्राहालय बना तो वहा वहां एक नेहरु कक्ष बनाया  गया जिनमें पंडित  नेहरु से संबंधित वस्तुओं को रखा गया। इसमें यह सेंगोल भी था। बताया जाता है कि इस साल के आरंभ में इस सेंगोल की खोज शुरू हुई और इलाहाबाद जाकर खत्म हुई।<br /><br />जब से केंद्र में बीजेपी सत्ता में आई हैं और नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बने हैं वे राष्टÑीय स्वयंसेवक संघ के हिन्दुत्व के अजेंडे को आगे बढ़ाने में लगे हैं। इनमें से दक्षिण के तमिलनाडु राज्य को अधिक से अधिक भारत की या हिन्दुओं की मुख्य धारा के निकट लाना है। आमतौर पर तमिलनाडु  के सभी बड़े राजनीतिक दल द्रविड़ संस्कृति को हिन्दू संस्कृति से अलग  तथा इससे ऊंची मानते हैं। यही कारण है कि बीजेपी अपने हिन्दू अजेंडे की वजह से तमिलनाडु में अपने पैर नहीं जमा पाई। अब सांस्कृतिक माध्यम से ऐसा किया जा रहा है। इस साल के शुरू में काशी यानि बनारस में तमिल संगम का आयोजन किया गया। इसमें  तमिलनाडु के लगभग ढाई हजार लोग ने यह कहा गया कि सदियों से तमिलनाडु के लोग काशी आते रहे हैं। लेकिन ब्रिटिश काल में यह क्रम टूट गया। इसे फिर से शुरू करने का प्रयास किया जा रहा हैं। इसी प्रकार लगभग पांच सौ साल पूर्वे मुस्लिम हमलवारों से बचने के लिए बड़ी संख्या में गुजरात के सौराष्टÑ इलाके के लोग मुदुरै पलायन कर गए थे। अप्रैल के महीने में ऐसे लोंगो के एक समूह को सोमनाथ लाया गया था। अब ऐसे ही एक जत्थे को उत्तराखंड के केदारनाथ मंदिर ले जाया जा रहा है। संघ चाहता के उस परम्परा को पुनर्जीवित किया जाए। जब दक्षिण के हिन्दू  काशी, हरिद्वार और मथुरा जैसे प्रमुख हिन्दू तीर्थों पर जाया करते थे।<br /><br />-लोकपाल सेठी<br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Jun 2023 11:33:07 +0530</pubDate>
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                <title>आखिर क्या है सेंगोल? क्या है इसका आजादी से कनेक्शन? नए संसद भवन में किया जाएगा स्थापित</title>
                                    <description><![CDATA[शाह ने कहा कि सेंगोल भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ा है और इसका संबंध आठवीं सदी के चोल साम्राज्य से है। सेंगोल शब्द तमिल भाषा के सेमई शब्द से बना है जिसका अर्थ नीति परायणता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/what-is-sengol-after-all--will-be-installed-in-the-new-parliament-house-amit-shah-narendra-modi-jawahar-lal-nehru/article-46533"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/sengol.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नये संसद भवन के राष्ट्र को लोकार्पण के मौके पर आजादी के समय 14 अगस्त 1947 के दिन सत्ता के हस्तांतरण की परंपरा को दोहराते हुए पवित्र 'सेंगोल' को स्वीकार करेंगे जिसे बाद में लोकसभा अध्यक्ष के आसन के निकट स्थापित किया जायेगा। </p>
<p>केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को संवाददाता सम्मेलन में बताया कि आजादी के 75 वर्ष बीत जाने के बाद भी अनेक लोगों को इस बात की जानकारी नहीं है कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 14 अगस्त 1947 को आजादी मिलने के समय प्राचीन भारतीय परंपराओं का निर्वहन करते हुए ब्रिटिश साम्राज्य से सत्ता के हस्तांतरण के प्रतीक के रूप में पवित्र सेंगोल को स्वीकार किया गया था। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश सरकार ने इस विशेष अवसर और परंपरा के लिए वायसराय लार्ड माउंटबेटन को भारत भेजा था। उन्होंंने कहा कि पंडित नेहरू ने अपने आवास पर लार्ड माउंटबेटन की मौजूदगी में तमिलनाडु के अधिनम से आये धार्मिक शिष्टमंडल से सेंगोल को स्वीकार किया था। </p>
<p>शाह ने कहा कि सेंगोल भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ा है और इसका संबंध आठवीं सदी के चोल साम्राज्य से है। सेंगोल शब्द तमिल भाषा के सेमई शब्द से बना है जिसका अर्थ नीति परायणता है। उन्होंंने कहा कि सेंगोल न्याय और नीति पर आधारित शासन के भाव से जुड़ा है। </p>
<p>केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आगामी रविवार को जब प्रधानमंत्री नये संसद भवन का उद्घाटन करेंगे तो तमिलनाडु के 20 अधिनम के अध्यक्ष मोदी को यह सेंगोल प्रदान करेंगे। बाद में पवित्र सेंगोल को लोकसभा अध्यक्ष के आसन के निकट स्थापित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि यह पवित्र सेंगोल न्यायपूर्ण शासन व्यवस्था का प्रतीक है इसलिए इसकी जगह संग्रहालय के बजाय संसद भवन होनी चाहिए। </p>
<p>विपक्ष के नेताओं के इस मौके पर उपस्थित नहीं रहने से संबंधित सवाल पर शाह ने कहा कि सरकार ने सबसे विनती की है और सभी नेता अपनी भावना तथा विवेक के आधार पर निर्णय लेंगे। उन्होंने कहा कि इस मौके को राजनीति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए, राजनीति की अपनी जगह है और इस मौके को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। </p>
<p>एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि यह वही सेंगोल है जिसे पंडित नेहरू को प्रदान किया गया था और यह अब तक इलाहाबाद के एक संग्रहालय में रखा गया था।</p>
<p><strong>आजादी से जुड़ा है इतिहास<br /></strong>सेंगोल का इतिहास काफी पुराना है। आजाद भारत में इसका बड़ा महत्व है, 14 अगस्त 1947 में जब भारत की सत्ता का हस्तांतरण हुआ, तो वो इसी सेंगोल द्वारा हुआ था। एक तरह कहा जाए तो सेंगोल भारत की आजादी का प्रतीक है, उस समय सेंगोल सत्ता के हस्तांतरण का प्रतीक बना था।  जब लॉर्ड माउंट बेटन ने पंडित नेहरू से पूछा कि सत्ता का हस्तांतरण कैसे किया जाए, तो पंडित नेहरू ने इसके लिए सी राजा गोपालचारी से मशवरा मांगा। उन्होंने सेंगोल प्रक्रिया के बारे में बताया, इसके बाद इसे तमिलनाडु से मंगाया गया और आधी रात को पंडित नेहरु ने स्वीकार किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Wed, 24 May 2023 13:15:12 +0530</pubDate>
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