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                <title>Ground water - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Ground water RSS Feed</description>
                
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                <title>जयपुर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बना वाटर पॉजिटिव, जल संरक्षण में नई मिसाल</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट ने 1.37 लाख किलोलीटर पानी बचाकर राजस्थान का पहला "वाटर पॉजिटिव" एयरपोर्ट बनने का गौरव हासिल किया है। पुनर्चक्रण और रेन वाटर हार्वेस्टिंग के जरिए एयरपोर्ट ने उपभोग से अधिक जल संचयन किया। ब्यूरो वेरिटाज द्वारा प्रमाणित यह मॉडल मरूस्थलीय प्रदेश में सतत विकास की नई मिसाल है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-international-airport-becomes-a-new-example-in-water-positive/article-151998"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/airport.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मरुस्थलीय प्रदेश राजस्थान में जल संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। जयपुर स्थित जयपुर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट अब आधिकारिक रूप से “वाटर पॉजिटिव एयरपोर्ट” की श्रेणी में शामिल हो गया है। यह उपलब्धि हासिल करने वाला यह राजस्थान का पहला और देश के चुनिंदा एयरपोर्ट्स में शामिल हो गया है। एयरपोर्ट ने अप्रैल, 2025 से मार्च 2026 के बीच कुल 1.03 लाख किलोलीटर पानी का उपभोग किया, जबकि इसी अवधि में जल संरक्षण और पुनर्भरण उपायों के जरिए 1.37 लाख किलोलीटर पानी की बचत दर्ज की गई। यानी एयरपोर्ट ने जितना पानी इस्तेमाल किया, उससे कहीं अधिक पानी को पुनर्चक्रित और संरक्षित किया गया।</p>
<p>इस उपलब्धि के लिए ग्लोबल कंसल्टिंग फर्म ब्यूरो वेरिटाज ने एयरपोर्ट को आधिकारिक एक्रेडिटेशन प्रदान किया है। एयरपोर्ट परिसर में जल संरक्षण के लिए 18 गहरे एक्वाफर रिचार्ज पिट बनाए गए हैं, जिनके माध्यम से वर्षा जल का संग्रहण कर भूजल स्तर बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है। इसके अलावा रेन वाटर हार्वेस्टिंग, जल पुनर्चक्रण और भूजल पुनर्भरण जैसी योजनाओं पर लगातार काम किया जा रहा है। पानी की कमी वाले क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद एयरपोर्ट प्रशासन ने सतत प्रयासों से जल प्रबंधन का सफल मॉडल प्रस्तुत किया है। विशेषज्ञों के अनुसार यह उपलब्धि अन्य संस्थानों और एयरपोर्ट्स के लिए भी प्रेरणा बनेगी और जल संरक्षण के क्षेत्र में नई दिशा प्रदान करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 17:49:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>विश्व जल दिवस पर विशेष...''बढ़ती मांग, घटते स्रोत, गहराता जल संकट'': डार्क जोन में डूबता प्रदेश, गर्मियों में टैंकर राज और सूखते स्रोत</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में जल संकट विकराल हो गया है; राज्य के पास देश का मात्र 1.16% सतही जल है। 299 में से केवल 38 ब्लॉक सुरक्षित बचे हैं, जबकि भूजल दोहन 150% तक पहुँच चुका है। 'जल जीवन मिशन' से कनेक्शन तो बढ़े, लेकिन 350 करोड़ लीटर की भारी मांग और घटता जलस्तर भविष्य के लिए बड़ी चुनौती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/special-on-world-water-day-increasing-demand-decreasing-sources-deepening/article-147402"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/world-water-day.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य होने के बावजूद जल संकट की सबसे भयावह तस्वीर पेश करता है। भौगोलिक विषमताओं के कारण यहां जल संसाधन विरासत में ही सीमित मिले। राज्य के पास मात्र 1.16 प्रतिशत सतही जल उपलब्ध है। यही असंतुलन आज गहराते जल संकट की जड़ बन चुका है। लगातार सूखा, घटती वर्षा, बढ़ती आबादी और अनियंत्रित विकास ने हालात को विकराल बना दिया है। राज्य के अधिकांश ब्लॉक अब डार्क जोन में पहुंच चुके हैं, जहां भूजल का स्तर खतरनाक रूप से नीचे जा चुका है। 55 प्रतिशत ग्रामीण आबादी आज भी भूजल पर निर्भर है, लेकिन यह पानी भी कई जगह खारा और स्वास्थ्य के लिए अनुपयुक्त हो चुका है। गर्मियों में 150 से अधिक शहरों और 15 हजार गांवों में पानी का संकट खड़ा हो जाता हैं। जलदाय मंत्री कन्हैया लाल के अनुसार सरकार की प्राथमिकता हर घर को स्वच्छ जल उपलब्ध कराना है। </p>
<p>राज्य के 222 शहरों और कस्बों में पेयजल योजनाएं संचालित हैं। जयपुर जैसे बड़े शहर में ही सात लाख कनेक्शन हैं। 28 प्रतिशत शहरों को सतही जल और 50 प्रतिशत को भूजल से पानी मिल रहा है। लेकिन हकीकत यह है कि 60 शहरों में रोजाना सिर्फ  एक बार पानी आता है, जबकि 30 से अधिक शहरों में दो दिन में एक बार सप्लाई हो रही है। गर्मी के दिनों में यह संकट और विकराल हो जाता है, जिससे आमजन को परेशानी झेलनी पड़ती है।</p>
<p><strong>एक्सपर्ट व्यू</strong></p>
<p>जल प्रबंधन विशेषज्ञ मानते हैं कि राजस्थान में जल संकट केवल संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि प्रबंधन की विफलता भी है। यदि वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और फसल चक्र में बदलाव जैसे उपायों को सख्ती से लागू नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और भयावह हो सकती है।</p>
<p><strong>ग्रामीण उम्मीद: नल कनेक्शन बढ़े, पानी कहां से आएगा</strong></p>
<p>जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में नल कनेक्शन तेजी से बढ़े हैं। 2019 से पहले जहां केवल 11 लाख घरों में नल थे, अब यह संख्या बढ़कर 58 लाख तक पहुंच गई है। यह उपलब्धि दिखने में बड़ी है, लेकिन असली चुनौती पानी की उपलब्धता है। वर्तमान में विभाग के पास 130 करोड़ लीटर प्रतिदिन पानी उपलब्ध है, जबकि भविष्य में 350 करोड़ लीटर की जरूरत होगी। </p>
<p>प्रदेश में 150 प्रतिशत भूजल दोहन हो रहा है। 214 ब्लॉक अतिदोहित है। 1984 में दोहन 35 प्रतिशत, 1995 में 58 प्रतिशत, 2004 में 125 प्रतिशत, 2013 में 139 प्रतिशत, 2020 में 150 प्रतिशत और 2023 में 149 प्रतिशत तक पहुंच गया है। 1984 में 236 में से 203 ब्लॉक सुरक्षित थे, जो स्थिति 2023 में 299 में से 38 ब्लॉक ही सुरक्षित श्रेणी में रहे।</p>
<p><strong>जल आपूर्ति की स्थिति</strong></p>
<p><strong>श्रेणी                                              आंकड़े</strong><br />कुल शहर/कस्बे                                 222<br />कुल उपभोक्ता                                   35 लाख<br />जयपुर में उपभोक्ता                            07 लाख<br />ग्रामीण नल कनेक्शन                          11 लाख<br />(2019 तक)    <br />वर्तमान नल कनेक्शन                          58 लाख<br />वर्तमान जल उपलब्धता                       130 करोड़ लीटर प्रतिदिन<br />अनुमानित आवश्यकता                       350 करोड़ लीटर प्रतिदिन</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 11:30:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मानसून की बंपर बारिश से 31 जिलों में भूजल स्तर में हुई बढ़ोतरी, नागौर-पाली में आई गिरावट</title>
                                    <description><![CDATA[इस वर्ष मानसून की बारिश के चलते भूजल स्तर में ऐतिहासिक बढ़ोतरी देखी गई है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/ground-water-level-increased-in-31-districts-due-to-bumper/article-98132"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/5554-(10)3.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। इस वर्ष मानसून की बारिश के चलते भूजल स्तर में ऐतिहासिक बढ़ोतरी देखी गई है। भूजल विभाग ने अपनी मानसून सर्वे रिपोर्ट जारी करते हुए बताया कि प्रदेश के 33 में से 31 जिलों में भूजल स्तर में वृद्धि दर्ज की गई है। प्रमुख जिलों में चित्तौड़गढ़ का नाम सबसे ऊपर है, जहां भूजल स्तर 14 मीटर तक बढ़ा है। इसके अलावा जयपुर जिले में 4.64 मीटर, झुंझुनूं में 3.31 मीटर, बांसवाड़ा और बारां में 6.68 मीटर, भीलवाड़ा में 10.89 मीटर और बूंदी में 11.50 मीटर की बढ़ोतरी हुई है।</p>
<p>हालांकि कुछ जिलों में भूजल स्तर में गिरावट भी देखी गई है। नागौर में रिचार्ज के मुकाबले भूजल दोहन 188 प्रतिशत तक बढ़ने के कारण अच्छे मानसून के बावजूद भूजल स्तर में गिरावट आई है। पाली जिले में भी -5.12 मीटर की गिरावट दर्ज हुई है। भूजल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इन आंकड़ों से यह साफ है कि राज्य में जलवर्धन की दिशा में सकारात्मक बदलाव आया है, लेकिन जल दोहन और संरक्षण को लेकर सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Dec 2024 18:30:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जमीन का सीना फाड़कर निकाल रहे भू-जल, सबसे ज्यादा सांगोद में हो रहा दोहन</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा में पिछले 4 साल में भू जल स्तर 1.5 मीटर से ज्यादा गिर चुका है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/tearing-the-chest-of-the-land-and-releasing-groundwater/article-72675"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/zameen-ka-seena-fad-kr-nikal-rhe-bhu---jal...kota-news-14-03-2024.jpeg" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिले का भू जल स्तर लगातार कम हो रहा है, जिसमें कोटा शहर के साथ ही आस पास के कस्बों में लगातार रिचार्ज से ज्यादा पानी का दोहन किया जा रहा है। ऐसे में चंबल नदी का पानी उपलब्ध नहीं होने की दशा में पेयजल के लिए सबसे उपयुक्त संसाधन की लगातार कमी हो रही है। साथ इसमें भू जल का लगातार हो रहा अनियंत्रित दोहन भी इस समस्या को और बढ़ा रहा है। कोटा में पिछले 4 साल में भू जल स्तर 1.5 मीटर से ज्यादा गिर चुका है। हालांकि हर साल बारिश होने पर शहर के साथ साथ जिले का भू जल स्तर बढ़ भी जाता है। लेकिन रिचार्ज से ज्यादा दोहन होने के कारण भू जल स्तर में लगातार गिरावट देखी जा रही है।</p>
<p><strong>कोटा शहर का भूजल स्तर</strong><br /><strong>वर्ष        स्तर (मीटर में)</strong><br />2020        5.01 <br />2021        5.10<br />2022        3.36<br />2023        4.81</p>
<p><strong>वर्ष 2021-22</strong><br /><strong>ब्लॉक                 दोहन योग्य     जल दोहित जल     प्रतिशत      श्रेणी</strong><br />इटावा                 11667           9662.37               82            अर्द्ध गंभीर<br />खैराबाद              5225.68        5926                    113          अति दोहित<br />कोटा शहर           942.07         2228.44                114.7       अति दोहित<br />लाडपुरा ग्रामीण    4702.97       5207.82                110.7       अति दोहित<br />सांगोद                9469.98       13438                  141          अति दोहित<br />सुल्तानपुर          11303.97      8578                    75            अर्द्ध गंभीर</p>
<p><strong>वर्ष 2022-23</strong><br /><strong>ब्लॉक                  दोहन योग्य जल      दोहित जल        प्रतिशत         श्रेणी</strong><br />इटावा<strong>                  </strong>12083.61              10290.02         85.15<strong>        </strong>अर्द्ध गंभीर<br />खैराबाद<strong>               </strong>5378.54                6404               119.06<strong>       </strong>अति दोहित<br />कोटा शहर            2125.59                2533.73          119.20       अति दोहित<br />लाडपुरा ग्रामीण    5093.09                5777.80           113.4         अति दोहित<br />सांगोद    <strong>            </strong>9983.50                14852.85         148.77       अति दोहित<br />सुल्तानपुर           11753.34             9086.13            77.30         अर्द्ध गंभीर</p>
<p><strong>हर साल रिचार्ज से ज्यादा दोहन</strong><br />कोटा शहर में हर साल रिचार्ज से ज्यादा भू जल का दोहन किया जा रहा है। भू जल विभाग के वैज्ञानिक सुबोध मेहता ने बताया कि कोटा शहरी ब्लॉक में साल 2022-23 में मौनसून में करीब 2 हजार 361 हेक्टर मीटर पानी का रिचार्ज हुआ। लेकिन इससे 120 फीसदी से अधिक यानी करीब 2 हजार 533 हेक्टेयर मीटर पानी का दोहन किया गया। ऐसे में वर्ष 2022-23 में ही पानी के दोहन और रिचार्ज में 230 एचएएम की गिरावट रही जिससे कोटा शहरी ब्लॉक में पानी का स्तर 1.5 मीटर तक गिर गया। गत वर्ष कोटा शहरी ब्लॉक से घरेलू अव्यवसायिक और व्यवसायिक कार्यों में 115 फीसदी से अधिक पानी का दोहन हुआ। जिसकी भरपाई के रुप में केवल 2 हजार 157 एचएएम हेक्टेयर मीटर पानी ही रिचार्ज हुआ। वहीं साल 2021-22 में ब्लॉक की 1 हजार 942 हैक्टेयर मीटर की क्षमता की तुलना में 2 हजार 228 एचएएम हेक्टेयर मीटर पानी का दोहन किया। जिसमें रिचार्ज से करीब 300 हैक्टेयर मीटर पानी का अधिक दोहन किया गया। </p>
<p><strong>चार साल में 1.2 मीटर गिरा जल स्तर</strong><br />किसी भी क्षेत्र में भू जल स्तर की गणना करने के लिए कुओं का उपयोग किया जाता है। जहां कुओं में भू तल से जितना नीचे पानी नजर आता है उसे भू जल स्तर माना जाता है। बात करें कोटा शहर की तो शहर में जनवरी 2020 में भूजल स्तर 5.01 मीटर, जनवरी 2021 में 5.10 मीटर, वहीं वहीं जनवरी 2022 में भू जल स्तर 3.36 मीटर और जनवरी 2023 में ये जल स्तर 4.81 मीटर हो गया। हालांकि साल 2022 और 23 के बीच जल स्तर में वृद्धि हुई है। लेकिन पिछले 4 सालों की तुलना की जाए तो शहर का भू जल स्तर करीब 1.2 मीटर गिरा है। </p>
<p><strong>कोटा जिले के 6 में से 4 ब्लॉक अति दोहित श्रेणी में </strong><br />कोटा जिले में भू जल स्तर को मापने के लिए 6 ब्लॉक बनाए गए हैं जिनमें भू जल स्तर को मापा जाता है। जिनमें 4 ब्लॉक अति दोहित श्रेणी में हैं। जिले के जिले के लाडपुरा, खैराबाद, कोटा शहरी और सांगोद ब्लॉक अति दोहित की श्रेणी में जा चुके हैं। इन ब्लॉकों में हर साल भू जल के रिचार्ज होने से ज्यादा पानी का दोहन किया जा रहा है। इसके अलावा चारों ब्लॉक में सबसे ज्यादा दोहन सांगोद ब्लॉक में देखने को मिल रहा है जहां हर साल क्षमता से 150 फीसदी तक भू जल का दोहन किया जा रहा है। खैराबाद ब्लॉक में हर साल क्षमता से 113 फीसदी से 120 फीसदी अधिक दोहन हो रहा है। इसी तरह लाडपुरा ब्लॉक में 110 से 115 फीसदी अधिक दोहन किया जा रहा है। इटावा में क्षमता से 80 फीसदी से 85 फीसदी और सुल्तानपुर में 75 से 80 फीसदी अधिक दोहन हो रहा है।</p>
<p><strong>दो साल में ये रहा भूजल स्तर</strong><br />कोटा जिले के 6 ब्लॉकों में से इटावा ब्लॉक को छोड़कर सभी ब्लॉकों में भू जल के स्तर में गिरावट देखने को मिली है। जहां इटावा ब्लॉक में वर्ष 2022 में स्तर 11.14 मीटर था जो साल 2023 में गिरकर 10.89 हो गया। वहीं खैराबाद ब्लॉक का स्तर वर्ष 2023 में 4.39 से गिरकर 9.56 मीटर रह गया। इसी तरह लाडपुरा ब्लॉक का जल स्तर वर्ष 2023 में 6.65 से गिरकर 11.92 मीटर हो गया। इसके अलावा सांगोद ब्लॉक का जल स्तर 10.28 से गिरकर 11.22 मीटर हो गया और सुल्तानपुर ब्लॉक का जल स्तर वर्ष 2023 में 9.55 से गिरकर 10.03 रह गया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 Mar 2024 15:41:20 +0530</pubDate>
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                <title>अभी पीने के लिए हर दिन 130 करोड़ लीटर पानी मौजूद, जेजेएम के पूरा होने के बाद 350 करोड़ लीटर पानी की हर रोज रहेगी डिमांड</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य में एक अप्रैल 2022 की स्थिति के अनुसार कुल 1,21,979 बस्तियों व ढाणियों में से 53,172 को पूर्ण रूप से 58,379 को आंशिक रूप से पेयजल उपलब्ध कराया गया है शेष 10,428 बस्तियों व ढाणियां स्वच्छ पेयजल गुणवत्ता से प्रभावित है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/now-130-crore-liters-of-water-is-available-for-drinking-every-day--after-the-completion-of-jjm-there-will-be-demand-of-350-crore-liters-of-water-everyday/article-46622"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/u-1.png" alt=""></a><br /><p>ब्यूरो/नवज्योति, जयपुर। भू-जल में भारी गिरावट के साथ ही अब राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में भी पीने के पानी का संकट हर साल बढ़ता जा रहा है। पेयजल योजनाओं के लिए उपलब्ध बजट पूरा खर्च नहीं होने के कारण स्थायी योजनाएं विकसित नहीं हो पा रही है। <br /><br />इसी का नतीजा है कि हर साल गर्मियों के शुरू होते ही 11 हजार से अधिक गांव टैंकरों पर निर्भर हो जाते हंै। राज्य में 60 प्रतिशत पेयजल जरुरतें भूजल से पूरी होती है। भूजल पुनर्भरण के मुकाबले दोहन 151 प्रतिशत है। जेजेएम में एक करोड़ पांच लाख घरों को पानी का कनेक्शन होने के बाद भी पानी की समस्या समाप्त नहीं, बल्कि और ज्यादा होने वाली है। मिशन पूरा होने के बाद प्रतिदिन पेयजल की आवश्यकता 350 करोड़ लीटर हो जाएगी। अभी जल की उपलब्धता 130 करोड़ लीटर है। ऐसे में तीन गुणा पानी अधिक उपलब्ध कराना एक चुनौती होगी।<br /><br /><img alt="Rwk7C2BVAAAAAElFTkSuQmCC"></img><br /><br />पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है, विभाग के पर्याप्त संसाधनों के जरिए हर गांव-ढ़ाणी तक पीने का पानी उपलब्ध कराया जाएगा। <br />-डॉ. महेश जोशी, जलदाय मंत्री<br /><br /><strong>इस साल की क्या तैयारी</strong><br />जलदाय विभाग के अनुसार पिछले साल 76 शहरों एवं 11290 गांव-ढाणियों में जल परिवहन किया गया था। इस साल अभी 27 शहरों एवं 682 गांवों में पेयजल परिवहन किया जा रहा है, जिसे आवश्यकतानुसार बढ़ाया जाएगा। अप्रैल से अगस्त माह तक के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में 22689 गांव-ढाणियों में टैंकरों से जल परिवहन के लिए 106.50 करोड़ तथा शहरी क्षेत्रों में 172 शहरों व कस्बों के लिए 39.76 करोड़ का प्रावधान किया गया है। हर जिले के लिए 50-50 लाख इमरजेंसी में पेयजल व्यवस्था के लिए स्वीकृत किए गए हैं। गर्मियों में पेयजल समस्या के समाधान के लिए राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है।<br /><br /><strong>ग्रामीण पेयजल आपूर्ति</strong><br />राज्य में एक अप्रैल 2022 की स्थिति के अनुसार कुल 1,21,979 बस्तियों व ढाणियों में से 53,172 को पूर्ण रूप से 58,379 को आंशिक रूप से पेयजल उपलब्ध कराया गया है शेष 10,428 बस्तियों व ढाणियां स्वच्छ पेयजल गुणवत्ता से प्रभावित है। 15 अगस्त 2019 से जल जीवन मिशन के तहत वर्ष 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन के माध्यम से पीने योग्य पानी उपलब्ध कराया जाना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 May 2023 12:21:11 +0530</pubDate>
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