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                <title>post offices - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>आधार कार्ड के लिए कतारों में लगने की मजबूरी</title>
                                    <description><![CDATA[शहर के डाक घरों में आधार कार्ड बनवाने व अपडेट करवाने के लिए लोगों को मशक्कत करनी पड़ रही है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-compulsion-to-stand-in-queues-for-aadhar-cards/article-88688"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/adhaar-card-k-liye-ktaaro-me-lgne-ko-majoor...kota-news-26-08-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा ।  <strong>केस 1 - </strong>छावनी निवासी मुकेश कुमार अपने बेटे का आधार कार्ड बनवाने के लिए एरोड्राम स्थित डाकघर के आधार सेंटर पर गया था। यहां पर भीड़ के चलते उसका नम्बर नहीं आ पाया। शनिवार को यहां पर काफी भीड़ थी। आधार सेंटर पर मौजूद कर्मचारी ने अब सोमवार को बुलाया है। आधार कार्ड के बिना अब कोई काम नहीं होता है। </p>
<p><strong>केस 2 - </strong>रायपुरा निवासी वृद्धा मांगी बाई ने आधार कार्ड में मोबाइल नम्बर जुड़वाना है। डाकघर में गई तो वहां पर लोगों की लम्बी कतार लगी हुई थी। भीड़ के चलते उसका नम्बर नहीं आ पाया। इस कारण निराश होकर लौटना पड़ा।  आधार सेंटर के कर्मचारी से दूसरे दिन का नम्बर लगवा कर आई हूं। भीड़ के चलते उसे परेशानी का सामना करना पड़ा।</p>
<p>शहर के डाक घरों में आधार कार्ड बनवाने व अपडेट करवाने के लिए लोगों को मशक्कत करनी पड़ रही है। कई बार चक्कर लगाने के बावजूद लोगों का नबर नहीं आ रहा। परेशान लोग भोर होते ही घर से निकल कर कतार लगाने के लिए डाकघर पहुंच जाते हैं। हालांकि शहर में अन्य स्थानों पर भी आधार कार्ड बनाने व अपडेशन सेंटर हैं, लेकिन अधिकांश लोगों को इसकी जानकारी नहीं है। हालात ऐसे हैं कि आधार सेंटरों के बाहर लाइन में बच्चे व बुजुर्ग भी लगे देखे जा सकते हैं। रोजाना डाकघरों के आधार सेंटर पर लोगों को आधार कार्ड बनवाने और अपडेशन के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है।</p>
<p><strong>रोजाना लगाना पड़ रहा चक्कर</strong><br />धानमंडी स्थित मुख्य डाकघर परिसर में एक आधार सेंटर संचालित हो रहा है। यहां पर सुबह आठ बजे से ही लोगों की कतार लग जाती है। छावनी निवासी मंजू कुमारी ने बताया कि  कि डाकघर में दो दिन से आधार बनवाने के लिए आ रही हूं। शनिवार को पहुंची तो काफी भीड़ लगी हुई थी। उसका नम्बर आने से पहले से समय समाप्त हो गया तो कर्मचारियों ने कहा कि अब कल आना। वहीं सावित्री ने बताया कि इससे पहले बैंक गए थे। वहां पर भी लोगों की भीड़ के चलते नम्बर नहीं आया। सुगना देवी ने बताया कि आधार कार्ड बनाने के लिए सुबह सात बजे ही घर से निकल गई थी।</p>
<p><strong>समय कम होने से आती है दिक्कत</strong><br />शहर के प्रमुख आठ डाकघरों में आधार सेंटर संचालित हो रहे हैं। इन सेंटरों पर नया आधार कार्ड बनवाने और या फिर कार्ड में करेक्शन से सम्बंधित कार्य होते हैं। इन सेंटरों पर केवल चार घंटे ही आधार कार्ड से सम्बंधित कार्य होता है। जिससे अधिकांश लोगों को बैरंग लौटना पड़ता है। पूर्व में आधार सेंटर सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलता था। गर्मी के मौसम को देखते हुए इसका समय बदलकर सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे कर दिया गया है। यहां केवल चार घंटे ही कार्य होता है। जिससे सभी लोगों का नम्बर नहीं आ पाता है। ऐसे में कई लोग आधार कार्ड से सम्बंधित कार्य के लिए दूसरे दिन भी यहां का चक्कर लगाने के लिए मजबूर हो जाते हैं।</p>
<p><strong>दो दिन में भी नहीं आ रहा नम्बर </strong><br />ग्रामीण क्षेत्रों आधार कार्ड बनवाने के संसाधन सीमित होते हैं। ऐसे में कई लोगों को आधार कार्ड बनवाने के लिए शहरों तक चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इस समय राशन कार्ड में ई- केवाईसी के दौरान बच्चों व वृद्ध के बायोमेट्रिक में समस्याएं देखी जा रही है। इसे लेकर बायोमेट्रिक अपडेट के लिए आधार सेंटरों पर इन दिनों काफी भीड़ हो रही है। सुल्तानपुर क्षेत्र के चौमा मालियान, खेरुला, सुल्तानपुर उपडाक घर और पंचायत समिति में बायोमेट्रिक अपडेट का काम हो रहा है जहां दिनभर भीड़ लगी रहती है। भीड़ का आलम इतना रहता है कि लोगों को दो दिन में भी नम्बर नहीं आ रहा है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर में करीब आठ डाकघरों में आधार सेंटर संचालित हो रहे हैं। इन सेंटरों पर सुबह 9 बजे से कार्य शुरू कर दिया जाता है। अभी एक बजे तक यह कार्य किया जाता है। क्योंकि डाकघरों में स्टाफ की कमी बनी हुई है। इसलिए चार घंटे का समय निर्धारित कर रखा है। नए स्टाफ की नियुक्ति होने पर ही समय में बढ़ोतरी हो सकती है।<br /><strong>- मनीष चौरसिया, प्रधान डाकपाल, मुख्य डाकघर धानमंडी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 26 Aug 2024 17:01:01 +0530</pubDate>
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                <title>गंगोत्री के गंगाजल से होगा शिव का जलाभिषेक</title>
                                    <description><![CDATA[डाक विभाग के अधिकारियों के अनुसार गंगाजल की बिक्री सबसे अधिक सावन माह में होती है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/shiva-will-be-anointed-with-gangajal-from-gangotri/article-85205"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/gangotri-k-gangajal-s-hoga-shiv-ka-jalabhishek...kota-news-19-07-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। सावन माह में सभी शिवालयों में भगवान शिव के जलाभिषेक व अन्य अनुष्ठानों में गंगाजल की आवश्यकता होती है। आगामी दिनों में सावन माह शुरू होने वाला है। इसे देखते हुए डाक विभाग ने गंगोत्री से पवित्र गंगा जल मंगाया है, जिसकी अब बिक्री होने लगी है। डाकघरों में गंगाजल की 250 एमएल की बोतल 30 रुपए में उपलब्ध है, जबकि बाजार में इस आकार की बोतल की कीमत 60 से 70 रुपए तक है। जिले में संचालित अधिकांश डाकघरों में गंगाजल की बोतलें भिजवा दी गई है। जिससे जिले के सभी भक्तों को आसानी से उपलब्ध हो जाएगी। वैसे तो गंगाजल की सालभर बिक्री होती है, लेकिन सावन माह को देखते हुए अब बिक्री ज्यादा होने लगी है।</p>
<p><strong>डिमांड भेजकर जयपुर से मंगवाया स्टॉक</strong><br />डाक विभाग के अधिकारियों के अनुसार गंगाजल की बिक्री सबसे अधिक सावन माह में होती है। कोटा जिले में भगवान शिव के काफी मंदिर हैं। ऐसे में यहां पर सावन माह में भगवान शिव के अभिषेक और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के लिए गंगाजल की डिमांड ज्यादा होती है। स्थानीय विभाग ने कुछ दिनों पूर्व ही गंगाजल की डिमांड डाक विभाग के जयपुर स्थित कार्यालय को भेज दी थी। डिमांड के अनुसार गंगोत्री के गंगाजल से भरी बोतलें जयपुर यहां आती है। फिलहाल डाक विभाग के कुछ स्टॉक मौजूद है, जिसे ग्राहकों को दिया जा रहा है। </p>
<p><strong>यहां कीमत बाजार से आधी</strong><br />हिंदू धर्म में पवित्र गंगाजल को अमृत के समान माना गया है। यही कारण है कि पूजा पाठ से लेकर हर शुभ काम में गंगा जल का विशेष रूप से प्रयोग किया जाता है। सावन के महीने में गंगाजल का महत्व बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। सावन माह या किसी विशेष तिथि पर पवित्र स्नान करने या भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक करने के इच्छुक भक्तों को हरिद्वार, वाराणसी या प्रयागराज जाने की आवश्यकता नहीं होगी। अब वे घर पर ही गंगाजल मिश्रित जल से स्नान कर सकेंगे। भगवान भोलेनाथ का भी गंगाजल से अभिषेक कर सकेंगे। इसके लिए डाक विभाग द्वारा सस्ती दर पर यह व्यवस्था की गई। बाजार से 50 प्रतिशत कम कीमत पर शहर के सभी डाकघरों में गंगाजल उपलब्ध है। वर्तमान में जिले में प्रतिदिन गंगाजल की 40 से 50 बोतल की बिक्री हो रही है। </p>
<p><strong>अब केवल गंगोत्री का जल उपलब्ध</strong><br />पहले लोगों को हरिद्वार, ऋषिकेश और गंगोत्री का गंगाजल उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन अब केवल गंगोत्री का गंगाजल ही बेचा जा रहा है। विभाग ने ये योजना 2016 में शुरू की थी। तब विभाग गंगोत्री के साथ ऋषिकेश का गंगाजल भी बेचता था, लेकिन तीन साल से केवल गंगोत्री का गंगाजल ही बेचा जा रहा है। सावन माह के अलावा भी विभाग के पास सालभर ये बिक्री के लिए उपलब्ध होता है, लेकिन सावन के महीने में गंगाजल की मांग बढ़ जाती है। </p>
<p>डाक विभाग की यह सुविधा काफी अच्छी है। लोगों को कम कीमत में गंगोत्री का गंगाजल मिल रहा है। सावन माह में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक अधिक किया जाता है। इस कारण हर साल गंगाजल खरीदना पड़ता है। इस साल भी उसने चार बोतल गंगाजल खरीदा है।<br /><strong>- बलवीर सिंह, ग्राहक</strong></p>
<p>सावन के महीने में गंगाजल की डिमांड बढ़ जाती है। इसलिए अभी से डाकघरों में इसकी अच्छी खासी बिक्री होने लगी है।  डाकघर में 250 एमएल की बोतल 30 रुपए में बेची जा रही है। डिमांड के अनुसार जयपुर से स्टॉक मंगवा लिया गया है। <br /><strong>- धनराज मेघवाल, ट्रेजरर, डाक विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jul 2024 16:08:13 +0530</pubDate>
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                <title>इंटरनेट के दौर में अस्तित्व बचाने को खड़ा है अन्तर्देशीय पत्र</title>
                                    <description><![CDATA[अन्तर्देशीय पत्रों, पोस्टकार्ड और लिफाफों का स्थान ई-मेल और इंटरनेट के अन्य माध्यमों ने ले लिया पत्राचार के माध्यम  इतिहास बनने के कगार पर है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/inland-letter-stands-to-save-existence-in-the-era-of-internet/article-46880"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/internet-k-dore-me-astitiv-bchane-ko-khda-antardeshiya-patr...kota-news-27-05-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। आदरणीय मां-पिताजी को सादर चरण स्पर्श, आशा करता हंू कि आप सब घर पर सकुशल होेंगे। कुछ इसी तरह की सम्मानजनक और दिल को छू लेने वाली पंक्तियां लिखी जाती थी सालों पहले अंतदेर्शीय पत्र और पोस्टकार्ड में। लेकिन जैसे-जैसे समय बीता तो इन अन्तर्देशीय पत्रों, पोस्टकार्ड और लिफाफों का स्थान ई-मेल और इंटरनेट के अन्य माध्यमों ने ले लिया और आज ये पारंपरिक पत्राचार के माध्यम लगभग इतिहास बनने के कगार है। भले ही कितना ही इंटरनेट का युग आ गया हो और हम आॅनलाइन हर कार्य करने लगे हैं लेकिन जो प्यार और सम्मान पोस्टकार्ड और अन्तर्देशीय पत्रों में हुआ करती था वो आज कही देखने तक को नहीं मिलता था।  कोटा शहर की ही बात करें तो बीते 5 सालों में ही इन अंतरदेशी पत्रों, पोस्टकार्ड और लिफाफों के मासिक बिक्री में डेढ़ से दो गुना तक कमी आ चुकी है। वर्तमान समय में कोटा शहर में 23 पोस्ट आॅफिस हैं। इन सभी पोस्ट आॅफिस पर प्रतिमाह लगभग मात्र 1 हजार अंतरदेशी पत्र बिकते हैं। इस हिसाब से देखे तो हर एक पोस्ट आॅफिस पर रोजना औसतन मात्र दो अंतरदेशी पत्र बिकते हैं। यानि लगभग 15 लाख की आबादी वाले शहर में संचालित 23 पोस्ट आॅफिस में से प्रत्येक पर औसतन मात्र 2 अंतदेर्शीय पत्र रोज खपते हैं। इसी प्रकार इन सभी पोस्ट आॅफिस पर प्रतिमाह लगभग 4 से 5 हजार पोस्टकार्ड और 6 से 7 हजार लिफाफें बिकते हैं। जबकि 5 साल पहले ये संख्या लगभग दोगुना हुआ करती थी। </p>
<p><strong>ऐसा होता हैं अंतरदेशी पत्र </strong><br />अंतरदेशी पत्र उपयुक्त रूप से मोड़ कर फोल्डर और गोंद से चिपकाकर इस्तेमाल किया जाने वाला एक पत्र है जो डाकखाने से खरीदा जा सकता है। यह उचित मूल्य पर उपलब्ध है। इसका मूल्य कम ही होता है और आम जनता के लिए सस्ता व सुलभ माध्यम है। इसके भीतर कोई भी कागज या सामान रखने की अनुमति नहीं दी जाती है। यह व्यापक प्रचार और प्रसार में है और यह मुफ़्त ही हवाई संचरण द्वारा देश के भीतर ही प्रयोग किया जा सकता है। यह प्रति कार्ड 2.50 रुपये पर उपलब्ध रहता है। निजी तौर पर मुद्रित पत्र कार्ड का वजन 4 ग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए। पते के शीर्ष बाएं हाथ कोने में शब्द अंतरदेशी  पत्र कार्ड लिखा होना चाहिए और पत्र कार्ड की नाप निम्नलिखित सीमा के भीतर होना चाहिए।</p>
<p><strong>यह है पोस्टकार्ड का इतिहास</strong><br />अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, पोस्टकार्ड ने सबसे पहले आॅस्ट्रिया में बाजार में प्रवेश किया, हालांकि इसकी परिकल्पना 1869 में उत्तरी जर्मनी में जर्मन डाक अधिकारी डॉ. हेनरिक वॉन स्टीफन ने की थी। यह एक दशक का बेहतर हिस्सा था जब भारतीय उपमहाद्वीप में इस उपकरण की शुरूआत हुई थी। जुलाई 1879 में भारत में केवल एक चौथाई आना के लिए पोस्टकार्ड की शुरूआत हुई। मीडियम-लाइट बफ या स्ट्रॉ कार्ड पर मुद्रित, ईस्ट इंडिया पोस्ट कार्ड को पहले उत्पाद पर अंकित किया गया था, साथ ही ऊपरी दाएं कोने पर रानी विक्टोरिया के सिर के साथ। वैश्विक स्तर पर, एफिल टॉवर जैसे लोकप्रिय स्मारकों को 1889 में पोस्टकार्ड पर प्रदर्शित करना शुरू किया गया था। 1889 में पेश किया गया एक हेलीगोलैंड कार्ड, कई रंगों में मुद्रित होने वाला पहला पोस्टकार्ड माना जाता है। </p>
<p><strong>भारत में पोस्टकार्ड का इतिहास</strong><br />भारत में ब्रिटिश शासन के साथ, 1900 से 1930 के दशक में पोस्टकार्ड को कॉलोनियों में रहने वाले यूरोपीय लोगों के लिए संचार के साधन के रूप में देखा गया ताकि वे अपने परिवारों के साथ घर वापस आ सकें। रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग छह बिलियन पोस्टकार्ड 1902 और 1910 के बीच ब्रिटिश प्रणाली के माध्यम से कूरियर किए गए थे। जैसे-जैसे साल बीतते गए, बैंगलोर-मद्रास बेल्ट में अधिक फोटोग्राफर और स्टूडियो ने भारतीय बाजार को बढ़ावा देने के लिए पोस्टकार्ड पर दृश्य बनाना शुरू कर दिया। जातीयता, लिंग, जाति और व्यवसाय केंद्र बिंदु थे जब भारतीय मूल निवासियों के चित्र पोस्टकार्ड पर बनाए गए थे। दुर्भाग्य से, देश में एसटीडी (सब्सक्राइबर ट्रंक डायलिंग) और पीसीओ (पब्लिक कॉल आॅफिस) की शुरूआत ने 1990 के दशक में कार्ड के विकास को रोक दिया। हालांकि, 1993 में, इंडिया पोस्ट ने साप्ताहिक प्रश्नोत्तरी के साथ एक लोकप्रिय शो सुरभि के बाद प्रतियोगिता पोस्टकार्ड का निर्माण किया।  </p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />पोस्टकार्ड और अंतरदेशी  पत्र संदेश के साथ-साथ भावनाओं को भी अपने आप में समाहित किए हुए रहते हैं। आज भी लोग पुराने पत्रों को निकाल-निकाल कर पढ़कर भाव विभोर होते रहते हैं। आमजन फिर से पत्र लेखन की ओर लौटे उसके लिए डाक विभाग विद्यार्थियों के बीच प्रतियोगिताएं करवाता रहता है। <br /><strong>-नरेन्द्र अग्रवाल, मार्केटिंग एग्जेक्यूटिव, कोटा मंडल। </strong></p>
<p>पोस्टकार्ड और अन्तर्देशीय पत्र तो गुजरे जमाने की बात हो चुकी हैं। वो जमाना और था जब लेटर का इंतजार करते-करते दोपहर से शाम हो जाती थी और जब हाथ में पत्र आता तो मैं खोलंूगा-मैं खोलूंगा की होड़ मचा करती थी। चाहे कितना ही जमाना बदल जाए लेकिन जो प्यार उन पत्राचार से झलकता था वो अब नहीं मिल सकता हैं। <br /><strong>-रामगोपाल शर्मा। </strong></p>
<p>आने वाली पीढ़ी पत्र लिखना तो दूर की बात शायद अन्तर्देशीय पत्रों और पोस्टकार्ड तक के नाम भी ना जाने। आजकल तो शोक संदेश तक मोबाइल पर भेज दिए जाते हैं। आज के मोबाइल के युग में बच्चे बात ही हाय-हैलों से करते हैं। पैर छूना तो भूल ही चुके हैं। <br /><strong>-रामपाल यादव। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 May 2023 14:59:40 +0530</pubDate>
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