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                <title>hospital administration - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>राजकीय जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय में पार्किंग ठेकेदार को चिकित्सालय अधीक्षक अरविंद खरे ने जारी किया नोटिस, जानें पूरा मामला</title>
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                        <![CDATA[अधीक्षक डॉ. अरविंद खरे ने अधिक वसूली की शिकायतों पर पार्किंग ठेकेदार को नोटिस जारी कर जुर्माना लगाया। ठेकेदार द्वारा निर्धारित दर से अधिक पैसे वसूलने पर प्रशासन ने यह सख्त कार्रवाई की।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/hospital-superintendent-arvind-khare-issued-notice-to-the-parking-contractor/article-143961"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/ajer.jpg" alt=""></a><br /><p>अजमेर। अजमेर के राजकीय जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय में स्थित पार्किंग ठेकेदार को चिकित्सालय अधीक्षक डॉक्टर अरविंद खरे ने नोटिस देकर वहां पार्किंग के बदले निर्धारित किराए से अधिक वसूली करने के मामले में 10000 का जुर्माना ठोका है। </p>
<p>डॉक्टर खरे ने बताया कि इस संबंध में उन्हें पार्किंग ठेकेदार के विरुद्ध काफी समय से शिकायतें मिल रही थी कि वह चिकित्सालय प्रशासन द्वारा किए गए टेंडर में निर्धारित की गई दो पहिया में चार पहिया वाहनों की किराया राशि से अधिक राशि वाहन मालिकों से वसूल करके अनैतिक रूप से रकम ले रहा है। इसीलिए उसे पर जुर्माना राशि निर्धारित की गई है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 18:27:13 +0530</pubDate>
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                <title>13 माह से सोनोग्राफी मशीन ताले में बंद, मरीजों पर आफत</title>
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                        <![CDATA[40 किमी दूर कोटा जाकर करवा रहे सोनोग्राफी।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/sonography-machine-locked-for-13-months--patients-in-trouble/article-88388"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/pze-(6)4.png" alt=""></a><br /><p>सुल्तानपुर। सुल्तानपुर नगर के अस्पताल में करीब  2 वर्ष पूर्व सोनोग्राफी मशीन लगवा दी गई थी, लेकिन कुछ दिनों तक ही व्यवस्था सुचारू चल पाई, उसके बाद पूर्व में भी  सोनोलॉजिस्ट का स्थानांतरण हो जाने के कारण रोगियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा था। वर्तमान में भी करीब 13 माह से सोनोग्राफी का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि सोनोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं होने के कारण महिलाओं को उपचार कराने के लिए 40 किलोमीटर दूर कोटा शहर जाना पड़ रहा है। ब्लॉक क्षेत्र के सबसे बड़े अस्पताल मेडिकल कॉलेज कोटा के अधीन आने वाली सीएचसी सोनोग्राफी मशीन को लगाए हुए करीब 2 वर्ष का  समय हो गया है, लेकिन आम जनता को कुछ समय ही सोनोग्राफी मशीन का लाभ मिल सक ा, उसके बाद वापस सोनोग्राफी की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही है। सोनोलॉजिस्ट के अभाव में सोनोग्राफी सेंटर पर ताला लगा हुआ है। अस्पताल में प्रतिदिन करीब दो दर्जन मरीज ऐसे आते हैं, जिन्हें सोनोग्राफी की आवश्यकता होती है, उन्हें कोटा या फिर निजी अस्पतालों में जाकर के अपना उपचार कराना पड़ता है। चिकित्सालय प्रशासन द्वारा इस मामले में कई बार उच्चाधिकारियों को सोनोलॉजिस्ट लगवाने के लिए अवगत करा दिया गया है, लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। </p>
<p>अक्सर सुनने में मिलता है कि सरकारी विभागों में काम देरी से होते हैं लेकिन नगर में स्थित क्षेत्र के सबसे बड़े अस्पताल में चिकित्सा विभाग की कार्यशैली पर यह बात सटीक बैठती नजर आ रही है। सोनोलॉजिस्ट के अभाव में करीब 13 माह से सोनोग्राफी सेंटर पर ताला लगा हुआ है, जिससे रोगियों को मोटी रकम चुका करके अपना उपचार कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। गंभीर हालत में प्रसव के लिए भर्ती होने वाली महिलाओं को भी बिना सोनोग्राफी जांच के ही 40 किलोमीटर दूर कोटा जाना मजबूरी बन गया है।   सोनोग्राफी मशीन की सुविधा को लेकर युवा शक्ति द्वारा आंदोलन चलाया गया था, जिसमें युवाओं के साथ ही नगर वासियों एवं महिलाओं ने भी आंदोलन को सफल बनाने के लिए योगदान दिया था, जिसके फलस्वरूप लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा ग्रामीणों की मांग पर एवं नगर के लोगों की मांग पर सोनोग्राफी मशीन की घोषणा कर सीएचसी में मशीन उपलब्ध करवाई थी, लेकिन ढाई माह बाद भी इसे नियमित रूप से शुरू नहीं कराया जा सका है, स्थिति यह है कि करोडों रूपए से अधिक राशि की मशीन धूल खा रही है। इस मामले में संबंधित अधिकारियों का कहना है कि विभाग के पास सोनोलॉजिस्ट नहीं है, जबकि सीएचसी मेडिकल कॉलेज कोटा के अधीन आता है, जहां प्रशासन और जनप्रतिनिधि चाहे तो प्रतिनियुक्ति पर ही सोनोलॉजिस्ट लगाकर के नगर वासियों एवं ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को राहत पहुंचा सकते हैं लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। अस्पताल प्रशासन द्वारा यह हवाला दिया जा रहा है कि दीगोद तहसील क्षेत्र की सबसे बड़ी सीएचसी में स्थानीय चिकित्सकों द्वारा मरीजों को बेहतर चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। यहां कार्यरत चिकित्सा प्रभारी डॉ श्याम मालव डॉ दीपक बेरवा आदि द्वारा चिकित्सालय में बेहतरीन उपचार भी दिया जा रहा है। </p>
<p>पूर्व में सोनोग्राफी मशीन लगा दी गई थी, लेकिन उसका संचालन सुचारु रूप से नहीं होने के कारण मरीज को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, उन्होंने सोनोलॉजिस्ट लगाने की मांग की। <br /><strong>- संदीप शर्मा, पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष</strong></p>
<p>सोनोग्राफी मशीन की सुविधा नहीं मिलने के कारण रोगियों को 40 किलोमीटर दूर कोटा जाना पड़ता है, सोनोग्राफी मशीन की सुविधा सुल्तानपुर नगर के अस्पताल में होने के बावजूद भी आपातकालीन स्थिति में भी सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाती है, जिसके कारण रोगियों को परेशानी होती है। <br /><strong>- रवि शर्मा, वार्ड पार्षद </strong></p>
<p>सोनोग्राफी मशीन होने के बावजूद सुल्तानपुर ब्लॉक के रोगियों को या तो निजी अस्पतालों में आर्थिक खर्चा करके सोनोग्राफी करनी पड़ रही है, अन्यथा उन्हें इलाज के लिए कोटा जाना पड़ता है। <br /><strong>- अजहरुद्दीन खान, कांग्रेस युवा नेता </strong></p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />सुल्तानपुर चिकित्सालय में मरीजों को हरसंभव चिकित्सा सुविधा दी जा रही है। साथ ही मरीजों को नि:शुल्क दवाइयां देकर के उपचार किया जा रहा है। सोनोलॉजिस्ट के लिए उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया हुआ है, सोनोलॉजिस्ट का स्थानांतरण हो जाने से समस्या उत्पन्न हुई है, इस मामले में उच्च अधिकारियों को लिखित में अवगत कराया जा रहा है। <br /><strong>- डॉक्टर श्याम मालव, सीएचसी प्रभारी, सुल्तानपुर</strong></p>
<p>इस मामले में मेडिकल कॉलेज के उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है, सोनोलॉजिस्ट का स्थानांतरण हो जाने के कारण समस्या उत्पन्न हुई है, सोनोलॉजिस्ट आने के बाद सोनोग्राफी की सुविधा चालू करा दी जाएगी। <br /><strong>- डॉ राजेश सामर, ब्लॉक सीएमएचओ</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Aug 2024 16:23:41 +0530</pubDate>
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                <title>अव्यवस्था के घड़े में बंद पड़ा बच्चों का ‘अमृत’</title>
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                        <![CDATA[मदर मिल्क बैंक के संचालन के लिए आॅपरेटर और आवश्यक स्टाफ जून माह में आना प्रस्तावित था। 
]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/children-s--amrit--lying-closed-in-the-pot-of-chaos/article-86864"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/avyavastha-k-ghde-me-bnd-pda-bachho-ka-amrut...kota-news-05-08-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। जेके लोन अस्पताल में नवजात शिशुओं के लिए बनाए गए मदर मिल्क बैंक को अभी भी चालू नहीं हो सका है। बैंक के संचालन के लिए जरूरी स्टाफ और आॅपरेटर अभी भी उपलब्ध नहीं हो पाए हैं। जिसके चलते लाखों रुपए की लागत से तैयार यह बैंक किसी काम नहीं आ पा रहा है। साथ ही इसमें मौजूद उपकरण भी स्थापित होने के बाद से यूं ही पड़े हैं। ऐसे में नवजात शिशुओं को मां का दूध उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए गए इस बैंक का लाभ मिलने में और लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।</p>
<p><strong>जून में आना था स्टाफ, अभी भी कागजी कारवाई में</strong><br />मदर मिल्क बैंक के संचालन के लिए आॅपरेटर और आवश्यक स्टाफ जून माह में आना प्रस्तावित था। लेकिन उससे पहले आचार संहिता लगने के कारण प्रक्रिया रुक गई और स्टाफ लगाने का कार्य धीमा पड़ गया। वहीं उसके बाद अस्पताल प्रशासन ने भी अपने स्तर पर स्टाफ को ट्रेनिंग देकर इसके संचालन की कोशिश करने की बात कही थी। जिसमें अभी कोई ट्रेनर नहीं होने से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाइ है। बैंक के संचालन के लिए स्टाफ एनएचएम नेशनल हेल्थ मिशन जयपुर से आना था जिसकी प्रक्रिया अभी भी कागजी कारवाई में रुकी पड़ी है। </p>
<p><strong>2017 में बना 2021 में हुई चलाने की कोशिश</strong><br />नेशनल हेल्थ मिशन के तहत प्रदेश के 23 जिलों में मदर मिल्क बैंक की स्थापना की गई थी। वहीं नेशनल हेल्थ मिशन के तहत ही प्रदेश सरकार ने अपने स्तर पर कोटा, बीकानेर, झालावाड़ और जोधपुर में 2017 में मदर मिल्क बैंक की शुरूआत की थी। लेकिन उपकरण नहीं आने के चलते कोटा में इसका संचालन नहीं हो सका था। जिसके बाद इसे अस्पताल में ही अस्थाई रूप से साल 2021 में शुरू करने की कोशिश की गई थी। लेकिन कोरोना काल में अंतराष्ट्रीय प्रतिबंधों के चलते जरूरी उपकरण नहीं आ पाए थे और मामला तब से अटका हुआ था। इस पर जेके लोन पिडियाट्रिक मेडिसिन विभागाध्यक्ष अमृता मंयागर ने बताया कि मदर मिल्क बैंक का भवन 80 लाख रुपए की लागत से बनकर तैयार हुआ है। इसके लिए नेशनल हेल्थ मिशन जयपुर से कुछ संसाधन मंगवाए गए थे जो आ चुके हैं। लेकिन उपकरणों को चलाने के लिए जरूरी स्टाफ नहीं आ पाया है।</p>
<p><strong>500 से 700 बच्चों के लिए तीन माह तक उपलब्ध होगा दूध</strong><br />मदर मिल्क बैंक में एक समय में 500 से 700 नवजातों को दूध उपलब्ध करवाने का स्टोरेज रहेगा। साथ ही यहां पर जो मशीनरी स्थापित की गई और जो डीप फ्रीजर लग हैं, उनमें इस दूध को 3 महीने तक प्रिजर्व रखा जा सकता है। कई बार प्रसव के बाद नवजात की मां को सही से दूध नहीं आ पाता है ऐसे में नवजात को दूध उपलब्ध कराने के लिए इस बैंक को बनाया गया है। जहां जेके लोन अस्पताल में भर्ती शिशुओं को यह दूध प्राथमिकता पर उपलब्ध करवाया जाएगा। वहीं अतिरिक्त मदर मिल्क बचने पर उसे दूसरे अस्पतालों को उपलब्ध कराया जा सकेगा। अस्पताल प्रशासन के अनुसार यह सेवा पूरी तरह से निशुल्क रहेगी जिस पर किसी तरह का कोई शुल्क नहीं वसूला जाएगा।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मदर मिल्क बैंक बनकर तैयार है उसके सभी उपकरण भी स्थापित कर दिए गए हैं। केवल स्टाफ और आॅपरेटर की आवश्यकता है। जिसके लिए एनएचएम जयपुर पत्र लिखा हुआ है, बैंक को इसी माह से शुरू करने का पूरा प्रयास कर रहे हैं।<br /><strong>- निर्मला शर्मा, अधीक्षक, जेके लोन अस्पताल</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Aug 2024 17:47:36 +0530</pubDate>
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                <title>बड़ा सवाल - इतनी लचर व्यवस्था क्यों? अब आया प्रशासन हरकत में</title>
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                        <![CDATA[नवीन अस्पताल में पांच माह में ही दो युवतियां हो चुकी छेड़छाड़ की शिकार।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/big-question-%E2%80%93-why-such-a-poor-system--now-the-administration-came-into-action/article-76961"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/bada-sawal.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नवीन चिकित्सालय में पिछले पांच माह में दो युवतियों के साथ संविदा कर्मियों द्वारा छेड़छाड़ के बाद आखिरकार प्रशासन जागा और अब महिला वार्ड में महिला नर्सिंग कर्मियों की ड्यूटी लगाने और 20 सुरक्षा गार्ड बढाए गए। उल्लेखनीय है कि जनवरी माह में  जनवरी पहले सप्ताह में  मनोरोग विभाग के वार्ड में मानसिक रूप से बीमार एक युवती के साथ एक सफाई कर्मी द्वारा छेड़छाड़ की शर्मनाक घटना के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने कागजी दावे तो बहुत किए लेकिन उनको धरातल पर नहीं ला पाए।  जिससे 2 मई को एक बार फिर शर्मनाक घटना हो गई। 2 मई को नवीन चिकित्सालय शिशुवार्ड में भर्ती अपनी परिजन से मिलने आई नाबालिग पड़िता के साथ संविदा नर्सिंग कर्मी  अनुज कराड ने छेड़छाड़ की इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और तुरंत संविदा कर्मी को हटा दिया। वहीं पुलिस ने पोक्सो में मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार भी कर लिया। लेकिन सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह है कि दो बड़ी घटनाएं होने के बावजूद मेडिकल अस्पताल प्रशासन इसको लेकर कितना गंभीर है। उल्लेखनीय है कि जनवरी में मनोरोग विभाग में इलाज के लिए आई युवती के साथ सफाई कर्मी ने छेड़छाड़ की थी उस समय अस्पताल प्रशासन ने कई दिन तक बैठके लेकर व्यवस्थाओं को चाकचौबंद करने और  सुरक्षा कर्मी बढ़ाने के दावे किए थे लेकिन वो दावे मनोराग विभाग में 28 अप्रैल को मेथाडॉन सिरप की 15 बोतले चोरी होने के बाद खोखले साबित हो गए। कारण जहां से यह बोतले चुराई गई वहां सुरक्षा कर्मी ही तैनात नहीं थे। जबकि युवती के छेड़छाड की घटना के बाद वहां सुरक्षा कर्मी 24 घंटे तैनात करने का दावा किया गया था। नवीन चिकित्सालय पिछले कई दिनों से सुर्खियों में बना रहता है। कभी यहां एमआरआई मशीन खराब हो जाती है तो कभी यहां वार्ड में सफाई और पंखों व्यवस्था नहीं होने से मरीज परेशान नजर आते है। सबसे ज्यादा शर्मनाक घटना तो यहां आए मरीज और परिजन सुरक्षित नहीं आए दिन यहां चोरी की घटना होती है। सबसे शर्मनाक तो यहां दो युवतियों के साथ हुई छेड़छाड़ की घटना है। </p>
<p><strong>नवज्योति ने नवीन चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. आर पी मीणा से सवाल कर व्यवस्थाओं में सुधार की ली जानकारी</strong><br /><strong>- प्रश्न 1 : </strong> अस्पताल में दो बार युवतियों के साथ छेड़छाड़ की घटना हो गई फिर अस्पताल प्रशासन क्यों नहीं सर्तक हुआ।<br /><strong>उत्तर :</strong> जनवरी में मनोरोगी युवती के साथ सफाई कर्मी द्वारा छेड़छाड़ के मामले के बाद से ही अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था बढाई गई है।<br /><strong>- प्रश्न 2 : </strong> शिशु रोग विभाग में 2 मई को हुई नाबालिग के साथ छेड़छाड़ के बाद सुरक्षा के क्या कदम उठाए।<br /><strong>उत्तर : </strong> संविदा नर्सिंग कर्मी को हटा दिया गया। साथ ही अस्पताल मैन पावर सप्लाई करने वाले ठेकेदार के सुपरवाइजर सत्यनारायण गुर्जर को भी पाबंद किया है। शिशुरोग विभागाध्यक्ष से वार्ता कर अब वार्ड में पुरुष नर्सिंग कर्मी के स्थान पर महिला नर्सिंग कर्मी ही तैनात करने के आदेश जारी कर दिए है। साथ ही हर वार्ड के बाहर सुरक्षा गार्ड तैनात किए है। जिससे इस प्रकार की घटना की पुर्नावृति नहीं हो।<br /><strong>- प्रश्न 3</strong> : अस्पताल में घटना के बाद कितने सुरक्षा कर्मी बढ़ाए कुल कितने सुरक्षा कर्मी वर्तमान में काम कर रहे है।<br /><strong>उत्तर :</strong> 5 मई से 20 सुरक्षा गार्ड और लगाए है। अस्पताल में पहले 59 सुरक्षा गार्ड व्यवस्थाओं को संभाल रहे है। अब कुल 79 गार्ड पूरे अस्पताल की सुरक्षा करेंगे।<br /><strong>- प्रश्न 4 : </strong>नर्सिंग स्टाफ व वार्ड इंचार्ज को क्या सावधानी बरतने के निर्देश दिए। <br /><strong>उत्तर : </strong> सभी नर्सिंग आफिसर और स्टाफ को इस प्रकार की घटना दूबारा नहीं हो इसके लिए पाबंद किया है। साथ महिला वार्ड में महिला नर्सिंग कर्मियों की तैनाती करने के लिए पाबंद किया है। किसी भी घटना की सूचना तुरंत देने के लिए पाबंद  किया है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 May 2024 16:44:20 +0530</pubDate>
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                <title>मरीजों का सुना दर्द, अस्पताल प्रशासन को लताड़ा, व्यवस्था सुधारने के निर्देश</title>
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                        <![CDATA[मुख्यमंत्री के प्रदेश के सभी अस्पतालों की व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश के बाद चिकित्सा शिक्षा आयुक्त शिव प्रसाद नकाते एसएमएस अस्पताल पहुंचे।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/hearing-the-pain-of-patients-scolded-the-hospital-administration-and/article-65392"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/mmd-(4)1.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सवाईमानसिंह में व्यवस्थाएं सुधारने के लिए राज्य सरकार ने अब कमर कस ली है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के हाल ही में अस्पताल का दौरा करने के बाद मिली खामियों से जहां सीएम खुद नाराज दिखे थे वहीं अब चिकित्सा विभाग के आलाधिकारी भी व्यवस्था का जायजा लेने के लिए अस्पताल पहुंचे तो उन्हें भी अव्यवस्थाओं का अंबार दिखाई दिया। </p>
<p>मुख्यमंत्री के प्रदेश के सभी अस्पतालों की व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश के बाद गुरुवार सुबह चिकित्सा शिक्षा आयुक्त शिव प्रसाद नकाते एसएमएस अस्पताल पहुंचे। यहां उन्होंने करीब दो घंटे तक अस्पताल में ओपीडी, आईपीडी, दवा काउंटर, नर्सिंग काउंटर, भर्ती प्रक्रिया सहित हर जगह का निरीक्षण किया। इस दौरान व्याप्त खामियों और अस्पताल प्रशासन के रवैये पर काफी नाराज दिखे और इन्हें सुधारने के निर्देश दिए। </p>
<p><strong>ओपीडी में मरीजों से लिया फीडबैक</strong><br />नकाते सबसे पहले ओपीडी में पहुंचे। यहां जैसे ही उन्होंने मरीजों और परिजनों से फीडबैक लेना शुरू किया तो शिकायतों की लाइन लग गई। किसी ने लंबी लाइनों की शिकायत की तो किसी ने डॉक्टर नहीं मिलने तो किसी इलाज नहीं मिलने से लेकर दवाईयों की व्यवस्था तक की शिकायतें की। इस पर नकाते ने साथ चल रहे अस्पताल प्रबंधन पर नाराजगी जताते हुए जल्द से जल्द व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए। इस दौरान नकाते ने ओपीडी में बुजुर्गों के काउंटर पर भी अव्यवस्थाएं देखी और नाराजगी जताते हुए सुधार के निर्देश दिए। काउंटरों पर माइक लगाकर मरीजों को आवाज देने के भी निर्देश दिए। इस दौरान नकाते ने अस्पताल में पीडब्ल्यूडी के कामकाज को लेकर भी नाराजगी जताई और इससे जुड़े अधिकारियों की भी नकाते ने क्लास ली और तय समय पर काम पूरा करने के निर्देश दिए।</p>
<p><strong>बायोमेट्रिक हाजिरी से तय होगी जिम्मेदारी</strong><br />नकाते ने अस्पताल में आने वाले हर चिकित्साकर्मी की उपस्थिति तय समय पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके लिए अस्पताल के हर गेट पर सीसीटीवी कैमरे से निगरानी और सभी चिकित्साकर्मियों की बायोमेट्रिक हाजिरी की व्यवस्था करने के लिए अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिए। अस्पताल के बाहर की गंदगी के लिए उन्होंने नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखने के निर्देश दिए। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Dec 2023 10:07:22 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - पर्ची के लिए मरीजों का इंतजार खत्म, डॉक्टर तक पहुंच हुई आसान</title>
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                        <![CDATA[दैनिक नवज्योति में लगातार खबर प्रकाशित होने के बाद अब अस्पताल प्रशासन ने एक और कर्मचारी को लगाकर व्यवस्था में सुधार किया।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---patients--wait-for-prescription-ended--access-to-doctor-became-easy/article-64428"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/asar-khabar-ka.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। विज्ञान नगर के राजकीय सामुदायिक अस्पताल में डॉक्टर को दिखाने से पहले मरीजों को अब टिकट के लिए पर्ची काउंटर पर लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अस्पताल प्रशासन ने ओपीडी काउंटर पर पर्ची बनाने के लिए एक और कर्मचारी तैनात कर दिया है। ऐसे में अब काउंटर पर दो कर्मचारियों के होने से मरीजों की पर्ची जल्द बनने लगी है। जिससे उन्हें इलाज के लिए पर्ची बनवाने का लंबा इंतजार खत्म होने से मरीजों को राहत मिली है। गौरतलब है कि दैनिक नवज्योति ने मरीजों की परेशानियों को लेकर समय-समय पर खबर प्रकाशित कर चिकित्साधिकारियों का ध्यान गंभीर समस्या की ओर आकर्षित किया था। इस पर अस्पताल प्रशासन ने कुछ माह पहले ओपीडी के पर्ची काउंटर पर एक और कर्मचारी की तैनाती कर व्यवस्था में सुधार किया। </p>
<p><strong>इलाज से पहले पर्ची बनवाने की थी मशक्कत</strong><br />सामुदायिक अस्पताल में इलाज करवाने आए संजय नगर निवासी मुश्ताक, सुरेंद्र राजावत ने बताया कि पहले इलाज से पहले कांउटर पर पर्ची बनवाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता था। एक से दो घंटे तक लाइनों में खड़ा रहना पड़ता था। गर्मियों में तेज धूप से परेशानी और बढ़ जाती थी। लेकिन, दैनिक नवज्योति में लगातार खबर प्रकाशित होने के बाद अब अस्पताल प्रशासन ने एक और कर्मचारी को लगाकर व्यवस्था में सुधार किया। नतीजन मरीजों को लंबे इंतजार से छुटकारा मिल गया। </p>
<p><strong>वरिष्ठजनों के लिए भी बने अलग से काउंटर</strong><br />विज्ञान नगर विस्तार योजना से आर्इं 71 वर्षीय जरीना बानो, नईमा खानम, कौशल्या ने बताया कि यहां बुजुर्गों के लिए अलग से ही पर्ची काउंटर बनाया जाना चाहिए। ताकि, पर्ची बनवाने के लिए कतार में न लगना पड़े। हालांकि, यहां कुर्सियां भी लगी हुई हैं। पर्ची काउंटर की अलग से व्यवस्था हो जाए तो वरिष्ठजनों को काफी राहत मिलेगी। </p>
<p>अस्पताल की ओपीडी पर्ची काउंटर पर एक और कर्मचारी लगाया गया है। मरीजों को अब पर्ची बनवाने के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ रहा है। यहां मरीजों की हर सुविधा का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। वहीं, सीनियर सीटीजनों के लिए अलग से पर्ची काउंटर खोलने के लिए कम्प्यूटर व प्रिंटर की आवश्यकता है, जिसके लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया है। व्यवस्था करने के प्रयास कर रहे हैं। <br /><strong>- डॉ. सविता शर्मा, सीएचसी प्रभारी, विज्ञान नगर</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Dec 2023 14:13:37 +0530</pubDate>
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                <title>एमबीएस बना मच्छरों का घर, मरीजों को मार रहे डंक</title>
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                        <![CDATA[परिसर में जगह जगह खुली नालियों में मच्छरों की भरमार है लेकिन इनको नष्ट करने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mbs-becomes-home-to-mosquitoes-stings-are-killing-patients/article-56245"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/mbs-bna-machharo-ka-ghr,-marizo-ko-mar-rhe-dank...kota-news-04-09-2023.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में डेंगू स्क्रब टायफस और मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। शनिवार को 37 मरीज डेंगू पॉजीटिव आए। पिछले दो दिन से रक्षाबंधन का अवकाश और धूप में आए तेजी के कारण डेंगू के मच्छरों का हमला कम रहा है लेकिन शनिवार को एकबार फिर से सर्वे शुरू होते ही 37 मरीज डेंगू के पॉजीटिव आए है। शहर में लगातार डेंगू का कहर जारी है। पूरे शहर में एंटी लार्वा गतिविधियां जोरो पर चल रही है। लेकिन एमबीएस अस्पताल की नालियों और गड्डों में लार्वा तेजी पनप  कर अस्पताल में भर्ती मरीजों को डंक मार रहे है। परिसर में जगह जगह खुली नालियों में मच्छरों की भरमार है लेकिन इनको नष्ट करने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे है। जिसके चलते दिन में और रात में मच्छर वार्डो भर्ती मरीजों के डंक मार रहे है। </p>
<p><strong>गलियारे में पनप रहे मच्छर मारना भूले</strong><br />अस्पताल में इलाज कराने आए राजाराम बैरवा ने बताया कि एमबीएस के महिला वार्ड में मरीजों को मच्छरों से बचाने के लिए मच्छरदानी लगाकर इतिश्री कर ली, लेकिन ये मच्छर कहां से आ रहे है। इस ओर अस्पताल प्रशासन ध्यान नहीं दिया। अस्पताल के महिला वार्ड के पास बने गलियारे में नालियों में जमा गंदगी और पानी के कारण यहां मच्छर पनप रहे है। जिम्मेदारों की इन नालियों और गंदगी पर नजर नहीं पड़े इसलिए कर्मचारियों ने एमबीएस की ट्रॉली स्टेड के पास बने गलियार के चैनल गेट को ही बंद कर दिया। जिससे डॉक्टरों की इस गंदगी और पनप रहे मच्छरों पर निगाह नहीं पड़े। मच्छरदानी लगाने के बजाए मच्छरों को मारते तो लोगों भला होता।</p>
<p><strong>डेंगू के आंकडा पहुंचा 367 पार</strong><br />शहर मे डेंगू तेजी से फैल रहा है। शनिवार को एलाइजा टेंस्ट में 37 मरीज पॉजीटिव आए। वहीं स्क्रब टायफस के 73 मरीज अब तक आ चुके है। अब तक डेंगू के 367 मरीज आ चुके है।  शहर के तलवंडी, इंदिरा विहार, विज्ञान नगर, महावीर नगर, तलवंडी सेक्टर 1 से 5 में सबसे ज्यादा मरीज आ रहे है। शनिवार को जेकेलोन की ओपीडी डेंगू के तीन मरीज आए वहीं एक मरीज आईपीडी में भर्ती हुआ। एक को डिस्चार्ज किया गया। शहर के अन्य निजी अस्पतालों में शनिवार को ओपीडी में 25 डेंगू के मरीज आए।  वहीं आईपीडी में दो मरीज भर्ती हुए। एमबीएस अस्पताल में ओपीडी में एक मरीज व आईपी एक मरीज भर्ती हुआ। रामपुरा में एक भी मरीज डेंगू का नहीं आया। </p>
<p><strong>डेंगू पॉजीटिव के सैंपल पूणे भेजने के दिए निर्देश</strong><br />कलक्टर ओपी बुनकर ने शनिवार को डेंगू खतरनाक होने व इसकी चपेट आए चार मरीजों की मौत होने और मल्टीपल आर्गन फैल होने के कारणों को जानने के लिए डेंगू के मरीजों ब्लड सैंपल को पूणे लैब में भेजने के निर्देश दिए है। डेंगू का कौनसा नया स्टेÑन इसका पता लगाया जाएगा। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />डेंगू व मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए प्रभावी मॉनिटरिंग की जा रही है। एंटी लार्वा गतिविधियां लगातार जा रही है। शहर के विभिन्न इलाकों में कूलर, परेंडे और कंटेनरों में लार्वा नष्ट किए जा रहे है। <br /><strong>- डॉ. जगदीश कुमार सोनी, सीएमएचओ कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Sep 2023 16:33:56 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए किया अलर्ट  </title>
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                        <![CDATA[सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पनवाड़ में वर्तमान में निशुल्क जांच योजना के अंतर्गत आने वाली समस्त जांच की जा रही हैं। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/asar-khabar-ka---alerted-for-the-prevention-of-seasonal-diseases/article-55854"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/asar-khabar-ka---mosami-bimariyo-ki-roktham-k-liye-kiya-alert...panwar,-jhalawar-news-30-08-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>पनवाड़। दैनिक नवज्योति में मंगलवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पनवाड़  में सीबीसी मशीन के रिजेंट खत्म होने की खबर प्रकाशित होने के तुरंत बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया। मंगलवार को ही ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मुकेश नागर ने निरीक्षण कर अस्पताल की समस्याओं को जाना। निरीक्षण के दौरान अस्पताल स्टाफ की मीटिंग ली। मौसमी बीमारियों की रोकथाम को लेकर स्टाफ से चर्चा कर संबंधित कार्य के लिए पाबंद किया। ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मुकेश नागर ने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पनवाड़ में वर्तमान में निशुल्क जांच योजना के अंतर्गत आने वाली समस्त जांच की जा रही हैं। चिकित्सालय की लैब में सीबीसी मशीन के रिजेंट खत्म होने से बंद पड़ी मशीन का रिजेंट उपलब्ध करवा दिया गया है। मंगलवार से सीबीसी की जांच नियमित रूप से शुरू कर दी गई है। अब रोगियों को परेशान नहीं होना पड़ेगा। जांच के लिए बाहर नही जाना पड़ेगा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पनवाड़ पर वर्तमान में डॉक्टर सत्यवीर सिंह सोलंकी एवं डॉक्टर नीतीश कटारिया अपनी सेवाए निरंतर दे रहे हैं। जिनको मुख्यालय पर रहने के लिए पाबंद किया गया है। अस्पताल परिसर में शाम के वक्त गेट पर ताला लगा हुआ होने की शिकायत मिलने पर अस्पताल स्टाफ से जानकारी ली तो पता चला कि अस्पताल परिसर में दो गेट हैं। चौकीदार की पत्नी की तबियत खराब होने पर चौकीदार एक गेट का ताला लगाकर घर चला गया है। जिसके लिए चौकीदार को दोनों गेट खुले हुए रखने के लिए पाबंद किया गया।</p>
<p><strong>जल्द शुरू होगा भवन का निर्माण कार्य </strong><br />ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मुकेश नागर ने बताया कि राजस्थान सरकार द्वारा घोषित बजट में कस्बे के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में कामोन्नत होने के बाद नवीन सामुदायिक स्वास्थ्य भवन के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी झालावाड़ एवं सभी प्रशासनिक अधिकारियों के प्रयास से लगभग 9.5 बीघा भूमि जिला कलक्टर द्वारा आवंटित करने पर लीज खानपुर तहसील कार्यालय से रिलीज हो गई है। संबंधित पटवारी से संपर्क कर लिया गया है। आगे की कार्यवाही जारी है। कार्यवाही पूर्ण होने पर जल्द ही भवन का निर्माण कार्य शुरू करवा दिया जाएगा ।</p>
<p>निरीक्षण के दौरान वर्तमान में सीएचसी भवन की छत क्षतिग्रस्त होने की शिकायत मिली थी। क्षतिग्रस्त भवन की रिपेयरिंग के लिए उच्च अधिकारियों को सूचना भेज दी गई है।<br /><strong>-डॉक्टर मुकेश नागर, ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Aug 2023 15:16:55 +0530</pubDate>
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                <title>अब प्रसव पीड़ा पर भारी नहीं पड़ेगी अव्यवस्था</title>
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                        <![CDATA[आधुनिक सुविधा युक्त लेबर का जीणोद्धार कार्य पूरा हो चुका है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/now-labor-pain-will-not-be-overshadowed-by-clutter/article-52023"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/ab-prasav-peeda-pr-bhari-nhi-pdegi-avyavstha...kota-news-17-07-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े जेकेलोन अस्पताल की नई ओपीडी में इमजेंसी प्रसूताओं को सीढ़ियां चढ़ने आ रही परेशानी को ध्यान में रखते हुए अस्पताल प्रशासन ने ओपीडी में व्हील चेर्यस और स्ट्रेचर की व्यवस्था की है। इमजेंसी प्रसव के लिए आई महिलाओं को लेबर रूम तक ले जाने के लिए परेशानी हो रही थी। इस परेशानी को ध्यान में रखते हुए अस्पताल प्रशासन ने ये व्यवस्था शुरू की। जेकेलोन की नई ओपीडी बनने के बाद से प्रसूताओं को ओपीडी के तक पहुंचने के लिए दस सीढ़ियां चढ़ने पड़ रही थी एक से प्रसव पीड़ा का दर्द उस पर इतनी सीढ़ियां चढ़ने प्रसूताओं का दर्द और बढ़ रहा था। </p>
<p><strong>पुराने लेबर रूम तक जाने में हो रही थी परेशानी </strong><br />जेकेलोन अस्पताल में अपनी बहु की डिलेवरी के लिए साथ आई सास कमला चौहान ने बताया कि बहु की प्रसव पीड़ा बढ़ गई तो आॅटो से अस्पताल लेकर पहुंचे। ओपीडी सीढ़ियां चढ़ने की हालत में बहु नहीं थी रेप के रास्ते लेकर गए, लेकिन वहां भी नहीं चल पाई मैं अस्पताल में अंदर जाकर स्ट्रैचर की तलाश कर ही रही थी तभी वहां तैनात गार्ड ने बताया कि अंदर व्हील चेयर्स रखी है उस पर बिठाकर लेकर आए। रजिस्टेशन कराया तो पता चला लेबर रूम पुरानी बिल्डिंग के आखिरी छोर पर है। बहु को व्हील चेयर्स मिलने से आसानी से लेबर रूम तक ले जा सके नहीं तो भारी परेशानी हो जाती थी।</p>
<p><strong>ओपीडी में मरीजों के बैठने के लिए लगाई कुर्सियां</strong><br />जेकेलोन के अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा ने बताया कि मरीजों के बैठने के लिए ओपीडी में सीएसआर में 50 बैच तीन सीटर ली है। कोरोमंडल कंपनी से ली है। पुरानी आईपीडी के लिए भी 200 बैच के लिए प्रयास चल रहा है। जिससे ये सारी परेशानी खत्म हो जाएगी। </p>
<p><strong>गर्भवती के लिए दस सीढ़ी चढ़ना नहीं है आसान, होती है मुश्किल</strong><br />जेकेलोन अस्पताल की नई ओपीडी तो बना दी लेकिन वहां आने वाली महिलाओं को दस सीढ़ियां चढ़ना भारी पड़ रहा है। परिजनों का कहना है ओपीडी में पहुंचने के लिए दस सीढ़िया चढ़ना प्रसूता के लिए पहाड़ पर चढ़ाई करने जैसा है। पुरानी ओपीडी में सीढ़िया नहीं होने से प्रसूताए बिना किसी के सहारे के ही अपनी जांच कराकर आसानी से आ जा सकती थी जब से नई ओपीडी शुरू हुई महिलाओं के लिए परेशानी हो रही थी। इमरेंसी में आई महिलाओं को ना तो व्हील चेयर्स मिल रही ना ही स्ट्रैचर ऐसे महिलाए परिजनों के सहारे रैंप व सीढ़ियों से ओपीडी में पहुंच रही थी। लोगों अस्पताल प्रशासन को इस बारे मे अवगत कराया तब जाकर ओपीडी में स्ट्रेचर और व्हील चेर्यस की व्यवस्था हुई। </p>
<p><strong>लेबर रूम के हेंडओवर की प्रोसेस अंतिम चरण में</strong><br />आधुनिक सुविधा युक्त लेबर का जीणोद्धार कार्य पूरा हो चुका है। लेबर हेंडओवर का कार्य अंतिम चरण में चल रहा है अगले सप्ताह से इसके चालू होने की संभावना है। ओटी की मशीनों व अन्य उपकरणों की जांच और काउंटिक लिस्ट के अनुसार चेक की जा रही है। ये काम पूरा होते ही नया लेबर रूम शुरू हो जाएगा। अभी पुराना लेबर रूम जेकेलोन के अंतिम छोर पर होने से प्रसूताओं को लंबा चक्कर लगाकर जाना पड़ रहा है। अब दूसरा गेट भी बंद हो गया है। ऐसे में प्रसूताओं को पहले नई ओपीडी से पुरानी ओपीडी बिल्डिंग में होते हुए पुराने लेबर रूम में जाना पड़ रहा है। ओपीडी से लेबर रूम की दूरी काफी होने से प्रसूताओं को भारी परेशानी हो रही है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />अस्पताल में प्रसूताओं की सुविधा के लिए ओपीडी के गेट के पास बने रूम में व्हील चेर्यस व ट्राली रखवाई हुई है। लोगों परेशानी नहीं हो इसके लिए बोर्ड तैयार कराए जिससे लोगों आसानी से ट्राली आदि मिल जाएगी। गार्ड पाबंद किया हुआ है। अगले सप्ताह तक नया लेबर रूम शुरू होने से प्रसूताओं लंबा चक्कर नहीं काटना पड़ेगा। <br /><strong>-डॉ. आशुतोष शर्मा, अधीक्षक जेकेलोन अस्पताल कोटा </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Jul 2023 16:03:19 +0530</pubDate>
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                <title>जेकेलोन के लेबर रूम के पास बिल्ली ने दिए बच्चे</title>
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                        <![CDATA[अस्पताल प्रशासन का दावा है कि जहां बिल्ली डेरा जमा रखा वो स्थान लेबर रूम व वार्ड से काफी दूर है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/cat-delivered-babies-near-jk-loan-labor-room/article-51679"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/jk-loan-me-labour-room-k-pas-billi-ne-diya-janam...kota-news-13-07-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के बड़े अस्पताल जेकेलोन में अब तक तो महिलाएं ही प्रसव के लिए आ रही है। जेकेलोन की अव्यवस्थाओं के चलते जेकेलोन में  एक बिल्ली ने भी बच्चे दिए है। हालांकि ये प्रसव अस्पताल प्रशासन नहीं कराया। लेबर रूम परिस में बिल्ली व उसके बच्चों के घूमने का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। वार्ड में भर्ती मरीजों के परिजनों ने बताया कि पिछले दो तीन दिन से पुराने लेबर रूम पास बने एक स्टोर रूम में एक बिल्ली और उसके तीन बच्चों ने डेरा जमा लिया है। शाम के समय बिल्ली और इनके बच्चों की धमाचौकड़ी से वार्ड में भर्ती महिलाएं और उनके परिजन दहशत में है। हालांकि अस्पताल प्रशासन का दावा है कि जहां बिल्ली डेरा जमा रखा वो स्थान लेबर रूम व वार्ड से काफी दूर है। वहां गार्ड तैनात कर रखा जो बिल्ली को लेबर रूम परिसर की ओर नहीं आने देता है। लेकिन बिल्ली व उसके बच्चे नजर चुराकर आखिर परिसर में बेखौफ घूम ही आते हैं। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />लेबर रूम के पिछले भाग में गेट के पास डस्टबीन व दवाईयों के कार्टन रखे हुए है। परिजनों के आवगमन के लिए पिछला गेट खोलकर रखना पड़ता है। उसी गेट से बिल्ली व उसके बच्चे आए है। गार्ड को पाबंद किया हुआ है। लेकिन खाली समय ये बिल्ली और इसके बच्चे परिसर में आ गए है। जहां मरीज भर्ती है वहां बिल्ली नहीं पहुंच सकती है। जहां बिल्ली घूम रही वो स्थान वार्ड से काफी दूर है इससे मरीजों कोई खतरा नहीं फिर भी गार्ड को पाबंद किया हुआ है। इसको पकड़ने के लिए नगर निगम से भी संपर्क किया लेकिन वहां से इसको पकड़ने के लिए मना करने के बाद अस्पताल की ओर से बडे पिजरें मंगवाकर रखे है। <br /><strong>- डॉ. आशुतोष शर्मा, अधीक्षक जेकेलोन अस्पताल </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Jul 2023 16:03:46 +0530</pubDate>
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                <title>एमबीएस की ओपीडी में भर्ती मरीजों को आईवी सेट और सिरींज के भी लाले</title>
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                        <![CDATA[ मरीज और तीमारदार तो दूर की बात अस्पताल के कुछ वरिष्ठ चिकित्सक अस्पताल प्रशासन की मरीजों को लेकर इस बेरूखी से हैरान और परेशान हैं।  ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/patients-admitted-in-opd-of-mbs-also-get-iv-sets-and-syringes/article-47203"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/mbs-ki-opd-me-bharti-marizo-ko-iv-set-or-syringe-k-bhi-laale...kota-news-30-05-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। अगर आप बीमार है और आपको एमबीएस अस्पताल में भर्ती होना है तो आपको अपने साथ आईवी सेट और 5 एमएल की सिरेंज साथ लेकर जाना होगा। कारण उसका ये है कि वर्तमान समय में एमबीएस अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए अति आवश्यक ये दोनों वस्तुएं बीते करीब एक माह से आरएमएसई से नहीं आ रही हैं। इतना ही नहीं अस्पताल की ओपीडी में उपचार के लिए आने वाले मरीजों के लिए स्वीकृत लगभग 500 दवाओं में से भी दवा काउटंरों पर केवल 300 से 325 ही उपलब्ध हंै। अस्पताल में भर्ती मरीजों और ओपीडी में आने वाले मरीजों के लिए अस्पताल प्रशासन की ओर से दवाओं की उपलब्धता के हालातों के बाद ये कहा जा सकता हैं कि राज्य सरकार की ओर जरुरतमंदों को सरकारी अस्पताल में नि:शुल्क दवा उपलब्ध करवाने का जो प्रयास किया जा रहा है उस पर सरकारी अस्पतालों के कारिन्दे ही पानी फेर रहे हैं। भले ही अस्पताल प्रशासन की ओर से एनओसी के माध्यम से ये वस्तुएं उपलब्ध करवा दी जाती है लेकिन उस एनओसी को प्राप्त करने में भर्ती मरीज के तीमारदार को कितना पसीना बहाना पड़ता है, कितना दर्द सहन करना पड़ता ये केवल वो ही जान सकता है। विभागीय सूत्रों की माने तो बीते कुछ महीनों में खासकर डॉ. नवीन सक्सेना के देहान्त के बाद मरीजों को अस्पताल प्रशासन से नि:शुल्क दवाओं के लिए एनओसी प्राप्त करना भी काफी टेडी खीर हो गया है। मरीज और तीमारदार तो दूर की बात अस्पताल के कुछ वरिष्ठ चिकित्सक अस्पताल प्रशासन की मरीजों को लेकर इस बेरूखी से हैरान और परेशान हैं। कुछ चिकित्सकों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि जब सरकार लोगों को नि:शुल्क दवा दे रही है और एनओसी के बाद दूसरी तय दुकानों से दवा लेने का बिल पास कर रही है तो अस्पताल प्रशासन को क्या दिक्कत आ रही है।</p>
<p> सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एमबीएस अस्पताल में भर्ती मरीजों को रोजाना लगभग 300 आईवी सेट की जरुरत पड़ती है। वहीं प्रतिदिन करीब 700 से 1000, 5 एमएल सिरेंज की आवश्यकता होती है। इसके अलावा गेस्ट्रो के मरीजों के काम आने वाली लेक्टोलॉज सिरप कई दिनों से नहीं आ रही है। नतीजतन या तो भर्ती मरीज का तीमारदार इन दवाओं के लिए एनओसी प्राप्त करने के लिए कभी उपर तो कभी नीचे, कभी उसके पास तो कभी इसके पास चक्कर काटता रहे या पैसे काटकर दूसरे मेडिकल स्टोर से ले आए। ऐसे में तीमारदार किसी के हाथ जोड़ने की बजाए, बिना समय खराब किए सीधा मेडिकल स्टोर पर जाता है और जरुरत की हर दवा ले आता है।  कमोबेश कुछ ऐसे ही हालात ओपीडी मरीजों के लिए बने दवा काउटंरों के हैं। ये लगभग हर इंसान जानता है कि एमबीएस अस्पताल में चिकित्सक को दिखाना, जांच करवाना और उपचार प्रारम्भ करवाना सीधी या सरल बात नहीं है। मरीज जैसे-तैसे करके सारे काम कर भी लेता है और दवा लेने के लिए जब वो इन दवा काउंटर पर जाता है तो सबसे पहले तो उसे इस काउंटर पर जा, उस काउंटर पर जा सुनना पड़ता है। लम्बी कतार में लगने के बाद जब उसका दवा लेने का नम्बर आता है तो अन्दर बैठा कार्मिक उसकी पर्ची पर लिखी दवाइयों में से कुछ पर क्रॉस का निशान बनाकर ये कह देता है कि यहां तो ये दवाइयां ही बाकी की बाहर से ले लेना। यानि आपोडी के दवा काउटंरों पर दवाओं का टोटा है। </p>
<p><strong>इनका कहना हैं...</strong><br />आरएमएसई से तो आईवी सेट और सिंरेज ही नहीं और भी कई दवाइयां नहीं आ रही है, अब उनका लंबा चौड़ा काम है। लेकिन एनओसी से मरीज को दवाइयां उपलब्ध करवा दी जाती है। <br /><strong>- डॉ. दिनेश वर्मा, अधीक्षक, एमबीएस अस्पताल। </strong></p>
<p>काफी देर से दवा लेने के लिए लाइन में लगी थी, करीब आधे घंटे बाद जब नम्बर आया तो पता लगा कि पर्ची में लिखी 5 दवाईयों में से 2 तो हैं ही नहीं। अब ऐसी दवाइयों को डाक्टर लिखते ही क्यों हैं जो यहां मिलती ही नहीं है। <br /><strong>- कौशल्या कुमारी। </strong></p>
<p>इन दवा काउंटरों से दवाई लेना किसी किले को जीतने से कम नहीं है। अस्पताल प्रशासन को दवा काउंटरों की संख्या बढ़ानी चाहिए ताकि भीड़ कम हो। मैं काफी देर से लाइन में लगा था, जब पर्ची दवा काउंटर पर काम करने वाले के पास गई तो उसने स्पीड से पर्ची पर दो-तीन क्रॉस के निशान बना दिए और बोल दिया कि यहां नहीं है। <br /><strong>- दीपक कुमार। </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 May 2023 14:34:09 +0530</pubDate>
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                <title>हाल-ए- कुन्हाड़ी सीएचसी: एक्सरे मशीन बंद, वार्ड की बिजली गुल</title>
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                        <![CDATA[ अस्पताल में आधे भाग में तो बिजली सुचारू हो गई है लेकिन आधे हिस्से में बिजली की केबल जलने से फाल्ट का पता नहीं चल पा रहा है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/hall-e--kunhadi-chc--x-ray-machine-closed--ward-s-power-failure/article-47086"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/haal-e-kunhadi-ch-xray-machine-band,-ward-ki-bijali-gul...kota-news-29-05-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। एक माह पूर्व  कुन्हाड़ी सीएचसी में दवाइयां, रिकॉर्ड और केबल जलने के हालात अभी तक नहीं सुधर पाए। अस्पताल  का आधा ब्लॉक अभी भी अंधेरे में  है। अस्पताल  में  जनरल वार्ड में बिजली नहीं होने से मरीजों को गर्मी में परेशान होना पड़ रहा है। वहीं एक्स-रे मशीन की  केबल जलने से 1 माह से मरीजों को बाहर से एक्सरे कराना पड़ रहा है। अस्पताल में 60 से 70 मरीज रोज अस्थि रोग के आ रहे हैं। ऐसे में मरीजों को बाहर से एक्सरे  करवाना पड़ रहा है। अस्पताल प्रशासन की ओर से केडीएल को बिजली की केबल ठीक करने के लिए कई बार अवगत कराया जिसके बाद आधे ब्लॉक में तो बिजली चालू हो चुकी हैं लेकिन लिफ्ट और वार्ड और एक्स-रे मशीन की  केवल अभी भी ठीक नहीं होने से मरीजों परेशान होना पड़ रहा है । गौरतलब है कि कुन्हाड़ी स्थित शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में एक माह पूर्व सुबह अचानक आग लग गई। आग लगने से काफी सामान और दवा जल गई थी। समय रहते आस-पड़ौस के लोगों ने आग को पानी डालकर बुझाया था जिससे बड़ा हादसा टल गया था। प्रभारी डॉ. अल्का मित्तल ने बताया कि आग लगने से आवश्यक दवाइयां, कम्प्यूटर, डाटा केबल, सीपीयू, टेबल, दो लिविंग चेयर स्टूल, एससी, पंखा, ट्यूबलाइट सहित कई तरह की पर्चियां, रिकॉर्ड व अन्य दस्तावेज जल गए थे । तभी से अस्पताल आधे भाग में बिजली बंद चल रही है ।</p>
<p><strong>सिंगल फेज से नहीं चल पा रही पानी की मोटर</strong><br />नर्सिंग आॅफिसर गुल मोहम्मद अंसारी ने बताया कि अस्पताल में आधे भाग में तो बिजली सुचारू हो गई है लेकिन आधे हिस्से में बिजली की केबल जलने से फाल्ट का पता नहीं चल पा रहा है। जिसके कारण आधे हिस्से में सिंगल फेस बिजली ही चल रही है जिससे ना तो पानी की मोटर कर पा रही है। नहीं एक्सरे हो पा रहे हैं ऐसे में मरीजों को पानी तक के लिए परेशान होना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>वार्ड में मरीज नहीं हो पा रहे भर्ती</strong><br />अस्पताल में इलाज कराने आए मरीज विजय वर्मा ने बताया कि अस्पताल में बिजली गुल होने से वार्ड में मरीजों को भर्ती करने में परेशानी हो रही है। दुर्घटना में घायल हुए मरीजों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है लेकिन वार्ड में बिजली की केबल कटी होने के कारण पंखे व कूलर नहीं चल पा रहे है। </p>
<p><strong>एक माह से बंद पड़ी लिफ्ट </strong><br />अस्पताल की केवल जलने से एक माह से लिफ्ट बंद करने से मरीजों को सैकंड फ्लोर में जाने में परेशानी हो रही है सेकंड फ्लोर पर प्रसूता व बच्चों का वार्ड है। प्रसूताओं को सीढ़ियां चढ़कर ऊपर जाना पड़ता है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />बिजली सुचारू करने के लिए केडीएल को अवगत कराया था उनके कर्मचारी आकर अवलोकन भी कर गए लेकिन अस्पताल में लाइन में किस जगह फाल्ट आया यह पता नहीं चलने से आधे हिस्से में बिजली बंद है लिफ्ट व एक्स-रे मशीन नहीं चल पा रही है।<br /><strong>- डॉ अलका मित्तल , कुन्हाड़ी सीएचसी प्रभारी।  </strong></p>]]>
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                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 May 2023 14:50:39 +0530</pubDate>
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