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                <title>एलयूसीसी चिटफंड घोटाला: सीबीआई की मुंबई में बड़ी कार्रवाई, दो मुख्य साजिशकर्ता गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तराखंड के बहुचर्चित लोनी अर्बन को-ऑपरेटिव सोसाइटी (LUCC) घोटाले में सीबीआई ने मुंबई से दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस घोटाले में 1 लाख से अधिक निवेशकों से ₹800 करोड़ की ठगी की गई थी। आरोपियों को देहरादून की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/lucc-chit-fund-scam-cbi-arrests-two-masterminds-from-mumbai/article-155759"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/cbi.png" alt=""></a><br /><p>देहरादून। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने उत्तराखंड के बहुचर्चित लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (एलयूसीसी) चिटफंड घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो प्रमुख आरोपियों को महाराष्ट्र के मुंबई से गिरफ्तार किया है। सीबीआई ने मंगलवार को बताया कि दोनों आरोपियों को सोमवार को गिरफ्तार किया गया था। यह कार्रवाई विस्तृत वित्तीय दस्तावेजों के विश्लेषण, बैंक लेन-देन की जांच, मौखिक साक्ष्य जुटाने तथा देश के विभिन्न राज्यों में व्यापक जांच-पड़ताल के बाद की गई है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय के निर्देश पर सीबीआई ने 26 नवंबर 2025 को इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। इससे पहले उत्तराखंड पुलिस ने एलयूसीसी और उसके पदाधिकारियों के खिलाफ 18 प्राथमिकी दर्ज की थीं। मामला जनता से अवैध रूप से धन जमा कराने, धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र, धन के दुरुपयोग तथा अनियमित जमा योजनाओं के संचालन से संबंधित है। जांच में अब तक सामने आया है कि उत्तराखंड में एक लाख से अधिक निवेशकों को विभिन्न अनियमित निवेश योजनाओं में धन लगाने के लिए प्रलोभन दिया गया था। निवेशकों से जुटाई गई कुल राशि लगभग 800 करोड़ रुपये आंकी गई है।</p>
<p>सीबीआई के अनुसार, गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल हैं और उन्होंने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर निवेशकों से एकत्र धन के संग्रहण, प्रबंधन, हस्तांतरण और कथित गबन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जांच एजेंसी को ऐसे साक्ष्य भी मिले हैं जो लाखों निवेशकों से जुटाई गई धनराशि के उपयोग और उसके प्रवाह से जुड़े व्यापक षड्यंत्र की ओर संकेत करते हैं।</p>
<p>सीबीआई ने बताया कि दोनों आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर देहरादून ले जाया जाएगा और बड्स अधिनियम के तहत गठित विशेष न्यायालय में पेश किया जाएगा। इससे पहले सीबीआई ने 12 और 13 मई को पांच अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनमें एलयूसीसी के तीन वरिष्ठ सहकारी प्रमोटर भी शामिल थे। सभी आरोपी वर्तमान में देहरादून की सुद्धोवाला जेल में न्यायिक हिरासत में हैं।</p>
<p>जांच एजेंसी ने आरोपियों द्वारा कथित रूप से अपराध से अर्जित धन से खरीदी गई कई अचल संपत्तियों का भी पता लगाया है। इन संपत्तियों का विवरण उत्तराखंड सरकार के वित्त सचिव को भेजा गया है और उन्हें फ्रीज करने तथा बड्स अधिनियम के तहत पीड़ित निवेशकों के हित में आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है। सीबीआई ने कहा है कि मामले की जांच जारी है और इसे शीघ्र पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 18:16:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>नेपाल में छिप नहीं पाएंगे भारतीय अपराधी, दोनों देशों में बड़ा समझौता, एफएटीएफ से काठमांडू को मिलेगी राहत</title>
                                    <description><![CDATA[भारत और नेपाल ने आपराधिक मामलों में आपसी कानूनी सहायता के लिए ऐतिहासिक समझौता किया है। इससे जाली नोटों, आतंकवाद और संगठित अपराधों के खिलाफ जांच तथा साक्ष्य जुटाने में दोनों देशों को सीधी मदद मिलेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/indian-criminals-will-not-be-able-to-hide-in-nepal/article-143874"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/nepal.png" alt=""></a><br /><p>काठमांडू। भारत के अपराधी अक्सर अपराध करने के बाद नेपाल भाग जाते हैं। यही नहीं नेपाल के अंदर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का पूरा नेटवर्क है जो जाली नोटों के कारोबार को बढ़ावा देता है। इससे नेपाल भारत विरोधी तत्वों का अड्डा बन गया है। अब कई सालों की बातचीत के बाद नेपाल और भारत के बीच आपराधिक मामलों में आपसी कानूनी सहायता समझौता हो गया है। इसे अब दोनों देश आपराधिक जांच और कानूनी प्रक्रिया के मामले में एक-दूसरे की मदद करेंगे। इस समझौते पर काठमांडू में हस्ताक्षर किया गया। नेपाल इस समय फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स के ग्रे लिस्ट में है और उसे उम्मीद है कि इस समझौते के बाद वह इससे निकल सकेगा। नेपाल ने इसी तरह का समझौता एक और पड़ोसी देश चीन के साथ भी किया हुआ है।</p>
<p><strong>आपराधिक जांच और कानूनी कार्रवाई में सहयोग </strong></p>
<p>नेपाल के विधि, न्याय और संसदीय मामलों के मंत्रालय में आयोजित एक समारोह के दौरान मंगलवार को आपराधिक मामलों में परस्पर कानूनी सहायता पर समझौता पर हस्ताक्षर किए गए। मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, यह समझौता दोनों देशों को आपराधिक जांच और कानूनी कार्रवाई में सहयोग करने में सक्षम बनाएगा। इसका उद्देश्य आपराधिक मामलों से संबंधित जांच, अभियोजन और न्यायिक प्रक्रियाओं में सहयोग को मजबूत करना है।</p>
<p><strong>नेपाल और भारत के बीच नई प्रत्यर्पण संधि पर क्या है अपडेट?</strong></p>
<p>नेपाली कानून मंत्रालय के मुताबिक, इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच आपराधिक मामलों में कानूनी सहायता के आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाना है, जिसमें साक्ष्य संग्रह, सूचना साझाकरण और जांच तथा अदालती कार्यवाही के दौरान सक्षम अधिकारियों के बीच समन्वय शामिल है। नेपाल और भारत के बीच साल 2005 में इसी तरह का आपसी कानूनी सहायता और प्रत्यर्पण समझौता हुआ था। हालांकि अब आपराधिक मामलों में समझौता हो गया है लेकिन नई प्रत्यर्पण संधि को लेकर अभी बातचीत जारी है।</p>
<p><strong>समझौते के बाद एक तंत्र विकसित किया जाएगा</strong></p>
<p>इस कानूनी समझौते का उद्देश्य जांच, अभियोजन और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े आपराधिक मामले में दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ाया जाएगा। भारत की ओर से नेपाल में राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किया है। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक इस समझौते के बाद एक तंत्र विकसित किया जाएगा ताकि आपराधिक मामलों की जांच, अभियोजन और न्यायिक प्रक्रिया को किया जा सके। इस समझौते की मदद से मानव तस्करी, ड्रग्स की तस्करी, वित्तीय अपराध, आतंकवाद से जुड़े अपराध और संगठित अपराध को रोकने में मदद मिलेगी। इसकी मदद से अधिकारी और जांच एजेंसियां इन विषयों की प्रभावी तरीके से जांच कर सकेंगी। भारत और नेपाल के बीच साल 1953 में इससे पहले प्रत्यर्पण संधि हुई थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 11:49:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत और नेपाल के बीच होने जा रहा बड़ा समझौता: ट्रांसनेशनल अपराधों से निपटने के लिए म्युचुअल लीगल असिस्टेंस करार तैयार, चुनाव से पहले होंगे हस्ताक्षर</title>
                                    <description><![CDATA[भारत-नेपाल के बीच एमएलए समझौता जल्द साइन होगा। यह ट्रांसनेशनल अपराधों से निपटने, जांच, सबूत साझा करने और कानूनी सहयोग को मजबूत करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/a-big-agreement-is-going-to-be-signed-between-india/article-142401"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(2)7.png" alt=""></a><br /><p>काठमांडू। भारत और नेपाल के बीच कानूनी सहायता को लेकर एक बड़ा समझौता होने जा रहा है। करार तैयार हो चुका है अब दोनों देशों के अधिकारी समझौते पर साइन करने के लिए तारीख तय कर रहे हैं। इस कानून पर पिछले साल जुलाई में नई दिल्ली में गृह सचिव स्तर की बैठक के दौरान सहमति बनी थी। नेपाली मीडिया ने बताया है कि कई वर्षों की बातचीत के बाद इस समझौते पर दोनों देश पहुंचे हैं, जिससे पता चलता है कि ये समझौता कितना पेचीदा है। इस समझौते का नाम वी​वीक्यू है। इस समझौते के तहत दोनों पक्षों ने ट्रांसनेशनल अपराधों से निपटने और दोनों देशों की कानूनी संस्थाओं के बीच सूचना के आदान-प्रदान, जांच सबूतों को साझा करने, अभियोजन में सहयोग और आपराधिक जांच में कॉर्डिनेशन को आसान बनाने के लिए आपराधिक मामलों पर एमएलए पर साइन करने के साथ आगे बढ़ने पर सहमति जताई थी। यह समझौता दोनों पक्षों को ट्रांसनेशनल अपराधों की जांच करने के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करता है। चूंकी दोनों देशों के नागरिक बगैर वीजा के एक देश से दूसरे देश की यात्रा करते हैं, इसलिए ये कानून काफी अहम माना जा रहा है।</p>
<p><strong>भारत नेपाल के बीच बड़ा कानूनी सहायता समझौता </strong></p>
<p>भारत और नेपाल के बीच प्रत्यर्पण संधि नहीं है, ऐसे में दोनों देशों के सुरक्षा अधिकारियों को लंबे समय से अपराधियों को एक-दूसरे को सौंपने में कानूनी और प्रशासनिक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली में गृह सचिव स्तर की बैठक के दौरान बातचीत से जुड़े एक अधिकारी ने काठमांडू पोस्ट को कहा है कि एमएलए में एक ऐसा समझौता शामिल है जो आतंकवाद, तस्करी, साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी जैसे ट्रांसनेशनल अपराधों का मुकाबला करने के लिए तेज, व्यवस्थित सहयोग को सक्षम बनाता है। इस समझौते पर साइन होने के बाद अपराधियों का पता लगाने, सबूत जमा करने, अपराधियों की संपत्ति को जब्त करने और एक दूसरे की जांच एजेंसियों को संदिग्धों के बयान को दर्ज करने का अधिकार देगी। </p>
<p><strong>भारत यात्रा के दौरान साइन की चर्चा</strong></p>
<p>काठमांडू पोस्ट ने बताया है कि फिलहाल मामला इस पेंच पर फंसा हुआ है कि इस समझौते को मार्च में नेपाल में होने वाले चुनाव से पहले साइन कर लिया जाए या चुनाव के बाद। नेपाल विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा है कि हम इस पर चर्चा कर रहे हैं। इससे पहले विदेश मंत्री बालनंद शर्मा की फरवरी के पहले हफ्ते में भारत यात्रा के दौरान समझौते पर साइन करने की चर्चा हुई थी। लेकिन यात्रा स्थगित कर दी गई और अगर चुनाव से पहले समझौते पर साइन करने को लेकर सहमति बनती है, तो कानून मंत्री अनिल सिन्हा नेपाल सरकार की ओर से समझौते पर साइन कर सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 11:42:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हाथों में हथकड़ी और....गिरफ्तार राष्ट्रपति मादुरो, उनकी पत्नी विमान से न्यूयॉर्क पहुंचे, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को न्यूयॉर्क लाया गया है। संयुक्त राष्ट्र ने इस घटना पर सोमवार को आपातकालीन बैठक बुलाई है। पूरी दुनिया में चिंता का माहौल है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/handcuffed-and-arrested-president-maduro-and-his-wife-reached-new/article-138306"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/maduro.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को लेकर एक विमान न्यूयॉर्क के एक सैन्य अड्डे पर पहुंच गया है। इन दोनों को शनिवार तड़के वेनेजुएला में हुए अमेरिकी सैन्य हमले के दौरान गिरफ्तार किया गया था। यह जानकारी स्थानीय मीडिया ने दी। </p>
<p>वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने सरकारी टेलीविजन चैनल पर प्रसारित राष्ट्रीय रक्षा परिषद के एक सत्र में राष्ट्रपति दंपति की तत्काल रिहाई की मांग की। उन्होंने कहा कि श्री मादुरो वेनेजुएला के एकमात्र राष्ट्रपति हैं।</p>
<p>वेनेजुएला पर अमेरिका के हालिया हमलों और मादुरो की गिरफ्तारी की पूरी दुनिया में निंदा एवं चिंता व्यक्त की गई है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने शनिवार को घोषणा किया कि वह वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिकी अभियान पर सोमवार को एक आपातकालीन बैठक आयोजित करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 04 Jan 2026 12:43:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>13000 करोड़ के घोटले के आरोपी मेहुल चौकसी को बेल्जियम कोर्ट से बड़ा झटका, भारत में प्रत्यर्पण के खिलाफ दायर याचिका खारिज, जानें पूरा मामला</title>
                                    <description><![CDATA[बेल्जियम की सर्वोच्च अदालत ने पीएनबी घोटाले के आरोपी भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी की प्रत्यर्पण के खिलाफ अपील खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि चोकसी कोई ठोस कानूनी या तथ्यात्मक आधार पेश नहीं कर सका। इससे उसके भारत लाए जाने की प्रक्रिया तेज हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-blow-to-mehul-choksi-accused-of-rs-13000-crore/article-136397"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/fugitive-diamond-merchant-lawyer-says-mehul-choksi.png" alt=""></a><br /><p>बेल्जियम। बेल्जियम की सर्वोच्च अदालत कोर्ट ऑफ कैसशन ने पंजाब नेशनल बैंक में 13000 करोड़ के घोटाले में भगोड़ें हीरा व्यापारी मेहुल चोकसी की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने भारत प्रत्यर्पण के फैसले को चुनौती दी थी। कोर्ट के इस फैसले के बाद में ये बिल्कुल साफ हो गया है कि बहुत ही जल्द मेहुल चौकसी को भारत लाया जा सकेगा। दरअसल, कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि मेहुल चौकसी के तर्क में कुछ ऐसा खास नहीं है, जिससे की उनकी याचिका को खारिज नहीं किया जा सके और उस पर दौबारा विचार किया जा सके। इसके आगे कोर्ट ने कहा कि मेहुल चौकसी अब तक कोर्ट में कोई ऐसा कानूी और तथ्यात्मक सबूत पेश नहीं कर पाए है, जिससे ये साबित हो जाए कि ये अपराध उन्होंने नहीं किया है। इसके आगे कोर्ट ने कहा कि मेहुल चौकसी के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया भारत के कानूनों और यूरोपीय मानवाधिकार मानकों के अनुरूप है।</p>
<p>बेल्जियम की सर्वोच्च अदालत कोर्ट ऑफ कैसशन ने जारी आदेश में उस मत का समर्थन किया, जिसमें कहा गया था कि मेहुल चौकसी भारत में न्याय से ​वंचित किए जाने, अमानवीय एंव अपमानजनक व्यवहार के खतरे को साबित करने में विफल रहे हैं। इसके आगे कोर्ट ने अपने आदेश में ​कहा कि मेहुल चौकसी ने कोर्ट में अभी तक जितने भी सबूत पेश किए है वो सभी तर्कहीन है, लेकिन इसके साथ ही मेहुल चौकसी का भारत आने का रास्ता भी साफ हो गया है।</p>
<p>बताया जा रहा है कि कोर्ट ऑफ कैसेशन ने मेहुल चौकसी पर करीब 104 यूरो का जुर्माना भी लगया है और इसका भुगतान तुरंत करने ​के लिए कहा गया है। अगर मेहुल चौकसी भारत में आ जाते हैं तो उनको आर्थर रोड़ जेल में बैरक नंबर 12 में रखा जाएगा, जिसकी तस्वीरेें और मेहुल चौकसी को दी जानें वाली सुविधाओं की तस्वीरें भारत की तरफ बेल्जियम पुलिस के सामने शेयर भी की जा चुकी है।</p>
<p>बता दें कि सीबीआई की चार्टशीट में बताया गया है कि पीएनबी बैंक में कुल 13000 करोड़ का घोटाला हुआ है,​ जिनमें से करीब 6400 करोड़ रुपये की हेराफेरी अकेले मेहुल चौकसी ने की है। इसके अलावा इस मामले में गीतांजलि जेम्स लिमिटेड के पूर्व चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मेहुल चौकसी के साथ उनका भांजा नीरव मोदी भी बराबर का आरोपी है। सीबीआई चार्टशीट में आगे बताया गया है कि साल 2018 में ये मामला सामने आया था, जिसके बाद दोनों आरोपी भारत छोडकर विदेश भाग गए थे और उसके बाद भारत ने 27 अगस्त 2024 को बेल्जियम सरकार के पास मेहुल चौकसी के प्रत्यर्पण को लेकर अनुरोध किया था, लेकिन इस मामले में अभी तक दोनों आरोपी देश से फरार है। फिलहाल, इस मामले में सीबीआई के द्वारा आगे की कार्रवाई जारी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Dec 2025 19:29:31 +0530</pubDate>
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                <title>गुरपतवंत पन्नू मामले में अमेरिकी प्रत्यर्पण के खिलाफ निखिल की याचिका खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[पन्नू के पास अमेरिका और कनाडा की दोहरी नागरिकता है। निखिल को 2023 में चेक गणराज्य की राजधानी प्राग में गिरफ्तार कर लिया गया था। अमेरिका सरकार उसके प्रत्यर्पण की मांग कर रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/petition-against-america-extradition-in-gurpatwant-pannu-case-rejected/article-79119"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/t21rer-(30)1.png" alt=""></a><br /><p>लंदन। खालिस्तान समर्थक आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या के प्रयास में षड्यंत्र रचने के आरोपी भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता की अमेरिकी प्रत्यर्पण के विरोध में दाखिल याचिका चेक गणराज्य की संवैधानिक कोर्ट ने खारिज कर दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने हाईकोर्ट के निर्णय को बरकरार रखा है। अब निखिल के प्रत्यर्पण का अंतिम निर्णय चेक गणराज्य के न्याय मंत्री पावेल ब्लाजेक लेंगे। अमेरिकी संघीय अभियोजकों ने निखिल गुप्ता पर अभियोग लगाया है कि उसने पिछले वर्ष नवंबर में एक भारत सरकार के अधिकारी से मिलकर अमेरिकी धरती पर खालिस्तान समर्थक अलगाववादी नेता पन्नू की हत्या की साजिश रची थी। </p>
<p>पन्नू के पास अमेरिका और कनाडा की दोहरी नागरिकता है। निखिल को 2023 में चेक गणराज्य की राजधानी प्राग में गिरफ्तार कर लिया गया था। अमेरिका सरकार उसके प्रत्यर्पण की मांग कर रही है। चेक संवैधानिक कोर्ट इसके विरुद्ध दाखिल निखिल की याचिका पर सुनवाई कर रहा है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि निखिल के प्रत्यर्पण की मांग को लेकर उसे किसी मूल अधिकार और स्वतंत्रा के अधिकार के उल्लंघन की बात नहीं दिखती। उसने मामले के राजनीतिक होने के तर्क को खारिज कर दिया। कोर्ट ने इसके साथ ही स्थानीय कोर्ट और हाई कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा जिसमें उसके प्रत्यपर्ण को स्वीकार किया गया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 May 2024 11:06:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>तहव्वुर राणा ने भारत प्रत्यर्पण को अमेरिका की कोर्ट में दी चुनौती</title>
                                    <description><![CDATA[ मुंबई हमले के आरोपी को भारत लाने की तैयारी के बीच राणा ने अपने अधिवक्ता के जरिए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर इसे भारत-अमेरिका के बीच प्रत्यर्पण संधि का उल्लंघन बताया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/tahawwur-rana-give-challenges-extradition-of--india-in-court/article-47585"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/47603745699.jpg" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। मुंबई के 26/11 आतंकी हमले के आरोपी पाकिस्तानी मूल के कनाडाई कारोबारी तहव्वुर राणा ने अमेरिकी कोर्ट के भारत प्रत्यर्पण आदेश को चुनौती दी है। पिछले महीने कोर्ट ने राणा के प्रत्यर्पण को मंजूरी दी थी। मुंबई हमले के आरोपी को भारत लाने की तैयारी के बीच राणा ने अपने अधिवक्ता के जरिए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर इसे भारत-अमेरिका के बीच प्रत्यर्पण संधि का उल्लंघन बताया है। बीते 16 मई को सेंट्रल डिस्ट्रक्ट आफ कैलिफोर्निया की अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट की मजिस्ट्रेट जैकलिन चूलजियान ने अमेरिकी प्रशासन के इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया था कि राणा को भारत को प्रत्यर्पित कर दिया जाए। 2008 के मुंबई हमले में तहव्वुर राणा पर लश्कर-ए-तैयबा के पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी नागरिक डेविड कोलमैन हेडली की मदद करने का आरोप है।</p>
<p>हमले में राणा की भूमिका की जांच कर रही एनआइए ने पाया था कि राणा ने मुंबई हमले में हेडली की संलिप्तता जानते हुए भी उसकी सहायता की। मंबई हमले में कुल 166 लोगों की मौत हो गई  थी, जबकि 10 हमलावरों में से 9 सुरक्षाबलों ने मार गिराया था।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 Jun 2023 11:11:09 +0530</pubDate>
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