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                <title>Archeology Department - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Archeology Department RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>5 मिनट से अधिक रहा सर्वर डाउन तो पुरातत्व विभाग के कर्मचारी करेंगे टिकट वितरण</title>
                                    <description><![CDATA[बार बार ई टिकटिंग के सर्वर डाउन होने से पर्यटकों को होती है परेशानी ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/if-the-server-is-down-for-more-than-5-minutes/article-89122"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/pze-(3)10.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शहर के स्मारकों में ई-टिकटिंग का सर्वर पांच मिनट से ज्यादा समय के लिए हुआ डाउन तो पुरातत्व विभाग के कर्मचारी विभागीय टिकट बुकलेट के माध्यम से विभाग स्तर पर टिकट वितरण कर सकेंगे। ताकि पोर्टल बंद होने पर संग्रहालय एवं स्मारक पर अव्यवस्था फैलने से रोका जा सके। इस संबंध में पुरातत्व विभाग के निदेशक डॉ पंकज धरेंद्र ने आदेश जारी किए हैं। ई-टिकटिंग के सर्वर डाउन होने पर पर्यटकों को होने वाली परेशानियों को लेकर दैनिक नवज्योति ने कई बार इस मुद्दे को उठाया था।   <img width="378" height="140" alt="9k="></img></p>
<p>गौरतलब है कि पुरातत्व विभाग के अधीन शहर के स्मारकों में कई बार ई टिकटिंग का सर्वर बंद हो जाता है। जिससे पर्यटकों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। इसके बाद पुरातत्व विभाग की ओर से डीओआईटी को पत्र लिखा गया था। जिसमें कहा गया था कि सर्वर के पांच मिनट से ज्यादा देर तक बंद होने पर पुरातत्व विभाग अपने स्तर पर टिकट कटेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 Aug 2024 09:51:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Archeology Department : संग्रहालयों और स्मारकों में भी श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं के दर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[ पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के अधीन आने वाले संग्रहालयों और स्मारकों में पर्यटक भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं के दर्शन करते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/archeology-department-also-shows-various-pastimes-of-shri-krishna-in/article-88461"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/1rer-(6)3.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर को छोटी काशी के नाम से जाना जाता है। जयपुर के आराध्य देव गोविंददेवजी, ब्रजनिधि, राधा माधव, गोवर्धन नाथ जी और विजय गोविंद देव आदि मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहता है। वहीं दूसरी ओर पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के अधीन आने वाले संग्रहालयों और स्मारकों में पर्यटक भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं के दर्शन करते हैं। 17वीं शताब्दी में बनी श्रीकृष्ण की पेंटिंग्स अल्बर्ट हॉल संग्रहालय में प्रदर्शित हैं। जिसमें श्रीकृष्ण को गोवर्धन पर्वत के समीप गोपियों के साथ दिखाया गया है। वैसे तो संग्रहालय में 100 से अधिक दुर्लभ पेंटिंग्स संग्रहित हैं। जिसमें से करीब 30 पेंटिंग्स को संग्रहालय में पर्यटकों के अवलोकनार्थ प्रदर्शित किया गया है। इसके अतिरिक्त राजकीय संग्रहालय अलवर में भी श्रीकृष्ण पर बनी करीब 17 पेंटिंग्स प्रदर्शित हैं। जो 19वीं शताब्दी की बताई जा रही हैं। </p>
<p><strong>यहां संग्रहित है वेणु गोपाल की पाषाण प्रतिमा </strong><br />हवामहल स्मारक में भगवान श्रीकृष्ण की सालों पुरानी पाषाण प्रतिमाएं हैं। अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार स्मारक के स्टोर में वेणु गोपाल सहित श्रीकृष्ण की अन्य पाषाण प्रतिमाएं संग्रहित हैं। जिसमें कृष्ण को खड़े और हाथों में बंशी बजाते हुए दिखाया गया है। ये प्रतिमाएं 16वीं से 18वीं शताब्दी के बीच बताई जा रही है। इसके अतिरिक्त विभाग के अन्य स्मारकों में भी श्रीकृष्ण की पाषाण प्रतिमाएं संग्रहित हैं।</p>
<p>महाराजा सवाई प्रतापसिंह श्रीकृष्णजी के अनन्य भक्त थे। उन्होंने हवामहल अपने इष्टदेव के मस्तक को सुशोभित करने वाले मुकुट के समान बनवाया था। यहां भगवान श्रीकृष्ण की पाषाण प्रतिमाएं संग्रहित हैं।<br />- सरोजनी चंचलानी, अधीक्षक, हवामहल स्मारक</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Aug 2024 10:53:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केसर क्यारी और शीश महल में पुन: शुरू हो सकते हैं फव्वारे  </title>
                                    <description><![CDATA[सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मावठा और सागर का संरक्षण कार्य, महल के आसपास नालियों का नवीनीकरण और मरम्मत कार्य, केसर क्यारी, दिल ए आराम बाग और शीश महल के फव्वारों का पुन: संचालन एवं केसर क्यारी की नींव के मरम्मत से जुड़े महत्वपूर्ण बिन्दुओं को आईकोनिक डेस्टिनेशन बनाने के तहत किए जाने वाले कार्यों में जोड़ा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/fountains-can-be-restarted-in-kesar-kyari-and-sheesh-mahal/article-80696"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/yy211rer-(9)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज मॉन्यूमेंट्स की लिस्ट में शामिल आमेर महल को आईकोनिक डेस्टिनेशन बनाने के तहत कई कार्य करवाएं जाएंगे। इसके लिए पुरातत्व विभाग के अधिकारियों की ओर से खाका तैयार किया जा चुका है। विभाग के अधिकारियों ने इस योजना के लिए कई बिन्दुओं को इसमें जोड़ा है। ताकि यहां कराए जाने वाले कार्यों को पर्यटकों को भी कुछ नया देखने को मिल सके।</p>
<p>सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मावठा और सागर का संरक्षण कार्य, महल के आसपास नालियों का नवीनीकरण और मरम्मत कार्य, केसर क्यारी, दिल ए आराम बाग और शीश महल के फव्वारों का पुन: संचालन एवं केसर क्यारी की नींव के मरम्मत से जुड़े महत्वपूर्ण बिन्दुओं को आईकोनिक डेस्टिनेशन बनाने के तहत किए जाने वाले कार्यों में जोड़ा है। वहीं वाटर लिफ्टिंग सिस्टम (रहट) को भी अपग्रेड किया जाएगा। ताकि यहां आने वाले पर्यटकों को भी जानकारी मिले कि सालों पहले पानी को मावठे से महल तक किस प्रकार लिफ्ट कर पहुंचाया जाता था। </p>
<p>टूरिस्ट गाइड फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह ने कहा कि गुलाबी नगरी आने वाले देसी और विदेशी पर्यटकों में सबसे पहले आमेर महल देखने की दिली इच्छा रहती है। ऐसे में आईकोनिक डेस्टिनेशन के तहत किए जाने वाले कार्यों से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। परंतु जब ये कार्य करवाए जाएं तो अधिकारी समय-समय पर इनके मेटिंनेंस पर भी ध्यान दें। तभी इन कार्यों की सार्थकता है।  <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Jun 2024 11:16:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>International Museum Day : 200 साल पुराने बलि पत्र पर लगे धब्बे साधारण नहीं, बल्कि खून के, 2023 में मिली जानकारी</title>
                                    <description><![CDATA[ पुरातत्व विभाग के अधीन आने वाले राजकीय संग्रहालय अल्बर्ट हॉल में सालों पुरानी पुरावस्तुओं का संसार बसा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/international-museum-day-the-stains-on-the-200-year-old/article-78412"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/t21rer48.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पुरातत्व विभाग के अधीन आने वाले राजकीय संग्रहालय अल्बर्ट हॉल में सालों पुरानी पुरावस्तुओं का संसार बसा है। जिसे देखकर देसी ही नहीं बल्कि विदेशी पर्यटक भी अचंभित हो जाते हैं। इस बीच संग्रहालय में एक ऐसी पुरा वस्तु भी प्रदर्शित है। जिसके बारे में कम ही लोगों को जानकारी हो। अन्तरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर आज दैनिक नवज्योति अपने पाठकों को उसी एक पुरा वस्तु की जानकारी दे रहा है। </p>
<p><strong>ये धब्बे आम नहीं</strong><br />अन्तरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस पर म्यूजियम में संरक्षित एक प्राचीन ग्रंथ (19वीं शताब्दी का) ‘भैरवाष्टक’ का उल्लेख करना जरूरी है। नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र की एक टीम काफी समय से अल्बर्ट हॉल संग्रहालय में संरक्षण का कार्य कर रही थी। उसे साल 2023 में संरक्षण कार्य करते समय भैरवाष्टक नाम की पांडुलिपि के अंदर एक बलि पत्र मिला था। इसके मुख्य भाग में श्री चक्र एवं शेष भाग पर समस्त देवी देवताओं को बलि देने का स्थान दर्शाया गया है। इस पत्र की मुख्य बात ये है कि इस पर लगे खून के धब्बे बीतते समय के साथ काले पड़ गए। संरक्षण का कार्य कर रही टीम ने केमिकल का उपयोग कर कंजर्वेशन कार्य किया तो ये सारे धब्बे पुन: लाल हो गए थे। इसे देख ऐसा प्रतीत होता है कि ये पत्र स्वयं ही बलि प्रक्रिया का एक जीवंत दस्तावेज है। ये दस्तावेज दर्शाता है कि संग्रहालय न सिर्फ केवल मूर्त अपितु अमूर्त की भी सुरक्षा करता है। ताकि आगे आने वाली पीढ़ियां इस विरासत से रूबरू हो सकें। इस बलि पत्र में भारतीय तंत्र साधना में विभिन्न प्रकार की बलियों का उल्लेख है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 May 2024 10:56:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Excavation में मिले प्राचीन कालीन सभ्यता के अवशेष</title>
                                    <description><![CDATA[पुरातत्व विभाग की ओर से गांव के बीचों बीच एक टीले पर खुदाई के दौरान महाभारत और मौर्य काल के ढाई हजार साल से भी ज्यादा पुराने अवशेष मिले हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bharatpur/remains-of-ancient-civilization-found-in-excavation/article-77904"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/t21rer-(4)21.png" alt=""></a><br /><p>डीग। जिले के वहज गांव में पुरातत्व विभाग की ओर से गांव के बीचों बीच एक टीले पर खुदाई के दौरान महाभारत और मौर्य काल के ढाई हजार साल से भी ज्यादा पुराने अवशेष मिले हैं। टीम की ओर से अभी तक 30 फीट के करीब गहरे दो कुंडों की खुदाई की जा चुकी है। जिसमें प्राचीन रूप की ईटों की दीवार और मिट्टी के बर्तनों के टुकड़े अवशेष निकल रहे हैं। पुरातत्व विभाग की ओर से ये यह कार्य जनवरी से चल रहा है। बृज क्षेत्र के अंदर 50 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद बड़े स्तर पर खुदाई का काम हुआ है। जो प्रमाण मिले हैं वह विलक्षण है। खुदाई स्थल वर्तमान में राजस्थान के डीग जिले में स्थित है लेकिन प्राचीन काल में यह गोवर्धन पहाड़ीं का हिस्सा था। यह क्षेत्र 84 कोस परिक्रमा सर्किट का भी हिस्सा है। जो लगभग 250-270 किमी की परिक्रमा तीर्थयात्रा है। </p>
<p><strong>उत्खनन में यह मिले दुर्लभ चीजों के अवशेष</strong><br />जनवरी में खुदाई शुरू होने के बाद से पुरा विभाग की टीम को शुंग काल के हड्डी के उपकरण, हाथियों पर सवार देवताओं के चित्रों वाली मिट्टी की मुहरें, चित्रित ग्रे वेयर संस्कृति, 800 ईसा पूर्व से एक दुर्लभ टेराकोटा पाइप और एक ईसा पूर्व की टेराकोटा की देवी प्रतिमा मिली है। दीवार के किनारे 45 डिग्री के कोण पर जली हुई ईंटें, जो मौर्य काल की हो सकती हैं। एक और दिलचस्प खोज प्रत्येक स्तर पर मिलने वाले सैकड़ों छोटे मोती थे, जिनमें पूर्व मौर्यकालीन भी शामिल थे। पुरातत्व विभाग के अभिकारियों का कहना है कि गुजरात पत्थरों की कटाई और पॉलिश करने का मुख्य केन्द्र था। ऐसा लगता है कच्चा माल वहां से लाकर यहां बनाया जाता था। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>भरतपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 May 2024 15:47:35 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पुरातत्व विभाग: पहली बार महिला दिवस पर बालिकाओं और महिलाओं को स्मारकों में मिलेगा निशुल्क प्रवेश</title>
                                    <description><![CDATA[अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला सशक्तिकरण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से 8 मार्च को राज्य में पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के अधीन झाने बाले समस्त संरक्षित स्मारकों और संग्रहालयों में महिलाओं और बालिकाओं को निशुल्क प्रवेश दिया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/archeology-department-for-the-first-time-on-womens-day-girls/article-71901"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/transfer-(11).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला सशक्तिकरण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से 8 मार्च को राज्य में पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के अधीन झाने बाले समस्त संरक्षित स्मारकों और संग्रहालयों में महिलाओं और बालिकाओं को निशुल्क प्रवेश दिया जाएगा। इसके लिए मंगलबार को पुरातत्व विभाग के निदेशक ब्रजेश कुमार चान्दोलिया ने आदेश जारी किए।</p>
<p>अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार महिला दिवस पर पहली बार पुरातत्व विभाग के अधीन आने वाले समस्त स्मारकों और संग्रहालयों में महिलाओं और बालिकाओं को निशुल्क प्रवेश देने के आदेश जारी हुए हैं। गौरतलब है कि 30 मार्च राजस्थान दिवस, 18 अप्रेल बिश्व धरोहर दिवस, 18 मई विश्व संग्रहालय दिनस और 27 सितम्बर निश्न पर्यटन दिवस के अवसर पर देसी और विदेशी पर्यटकों को पुरातत्व विभाग के अधीन आने नाले समस्त स्मारकों और संग्रहालयों में निशुल्क प्रवेश दिया जाता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Mar 2024 19:01:31 +0530</pubDate>
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                <title>प्राचीन सिक्कों में भी अंकित हैं ‘लक्ष्मी’</title>
                                    <description><![CDATA[पुरातत्व विभाग के पास संग्रहित सिक्कों में परशुधारी के कुछ सिक्कों पर देवी के बाएं हाथ में कमल की कली और दाहिने हाथ में पाश एवं कमलासन पर पैर प्रदर्शित हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/lakshmi-is-also-inscribed-in-ancient-coins/article-27682"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/sikka-photo.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। समुद्रगुप्त के दंडधारी व परशुधारी और चन्द्रगुप्त द्वितीय के दंडधारी तरह के सिक्कों पर लक्ष्मीजी को सिंह पर आसीन, साड़ी, चोली, चादर, हार, भुजदंड और मोती की लड़ी की माला पहने अंकित किया है। दंडधारी तरह के समुद्रगुप्त के सिक्कों पर बाएं हाथ में कार्नूकोपिया और दाएं में पाश है और गोलाकार चटाई पर पैर रखे बताया गया। पुरातत्व विभाग के पास संग्रहित सिक्कों में परशुधारी के कुछ सिक्कों पर देवी के बाएं हाथ में कमल की कली और दाहिने हाथ में पाश एवं कमलासन पर पैर प्रदर्शित हैं। बयाना निधि से प्राप्त एक सिक्के के पृष्ठभाग पर देवी के पैर रखें तले कमल सिंहासन को छिपा दिखाया गया। वहीं चन्द्रगुप्त द्वितीय और कुमार गुप्त प्रथम के कुछ सिक्कों पर वह कमल पर आसीन दिखाई देती हैं। पुरातत्व विभाग के मुद्रा विशेषज्ञ प्रिंसकुमार उप्पल ने बताया कि संग्रहित सिक्कों पर अंकित देवी के हाथों के अंकन में भिन्नताएं मिलती है। कभी-कभी कटि पर अवलम्बित बाएं हाथ में कमल धारण किए हैं। समुद्रगुप्त के वीणावादक तरह के सिक्कों के पृष्ठभाग पर लक्ष्मी, प्रभामंडलयुक्त, मोढ़े पर बैठी, साड़ी सहित अन्य मुद्राओं में सिक्के देखने को मिलते हैं। कुमार गुप्त (प्रथम) के अश्वारोही के सिक्कों के पृष्ठभाग पर मोढ़े पर आसीन देवी लक्ष्मी के बड़े कलात्मक अंकन मिलते हैं। </p>
<p><strong>चंदेल राजाओं ने भी चलाए थे सोने के सिक्के </strong><br />11वीं शताब्दी के शुरू से पुन: सोने के सिक्के मिलने शुरू हुए थे। उनकी शुरुआत त्रिपुरी के कलचुरि नरेश गांगेयदेव के सिक्कों से होता है। नरवर्मन जेजाकुभक्ति के चंदेल राजाओं ने भी 11वीं शताब्दी के अंतिम चरण से लेकर 13वीं शताब्दी के तृतीय चरण तक ऐसे ही सिक्के चलाए। ऐसे सिक्के इस वंश के कीर्मिवर्मन, सल्लक्षणवर्मन, मदनवर्मन, परमर्दि, त्रैलोक्यवर्मन और वीरवर्मन के भी मिले हैं। गागेयदेव के इस सिक्के के अनुकरण पर ही परवर्ती अनेक शासकों ने भी लक्ष्मी प्रतीक अंकित घटिया सोने और चांदी के सिक्के बनाए थे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Oct 2022 12:44:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>‘हिल फोर्ट्स ऑफ राजस्थान’ का सर्टिफिकेट ‘लापता’!</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य पुरातत्व विभाग ने एएसआई से कई बार पत्र के जरिए मांगी सर्टिफिकेट की प्रति]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E2%80%98%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%B2-%E0%A4%AB%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B8-%E0%A4%91%E0%A4%AB-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E2%80%99-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%BF%E0%A4%AB%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%9F-%E2%80%98%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E2%80%99/article-3392"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/24.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। यूनेस्कों ने साल, 2013 में प्रदेश के 6 फोर्ट्स को वर्ल्ड हेरिटेज मॉन्यूमेंट्स की लिस्ट में शामिल किया था। ‘हिल फोर्ट्स ऑफ राजस्थान’ के तहत राजस्थान के पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के दो एवं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के 4 फोर्ट्स को चयनित किया गया था। इनमें आमेर महल (पुरातत्व विभाग), गागरौन फोर्ट (पुरातत्व विभाग), कुंभलगढ़ फोर्ट (एएसआई), चित्तौड़गढ़ फोर्ट (एएसआई), जैसलमेर फोर्ट (एएसआई) और रणथम्भौर फोर्ट (एएसआई) शामिल हैं। पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग ने कई बार दिल्ली स्थित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के मुख्यालय को पत्र लिखकर हिल फोर्ट्स ऑफ राजस्थान के सर्टिफिकेट की प्रति उपलब्ध करवाने की बात कही, लेकिन दिल्ली स्थित एएसआई मुख्यालय से पुरातत्व विभाग को कोई जवाब नहीं दिया गया है।</p>
<p><br /> दैनिक नवज्योति संवाददाता ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के जयपुर सर्किल और जोधपुर सर्किल के अधिकारियों से हिल फोर्ट्स ऑफ राजस्थान के सर्टिफिकेट की प्रति उपलब्ध होने की बात पूछी तो कमाल की बात ये है कि दोनों सर्किलों के पास भी सर्टिफिकेट की प्रति नहीं है। जबकि विभाग के ही अधिकारियों का कहना था कि सर्टिफिकेट की प्रति सर्किलों के पास भी होनी चाहिए थी। <br /> <br /> गागरौन फोर्ट हिल फोर्ट्स ऑफ राजस्थान की सूची में शामिल है। लेकिन हमारे पास यूनेस्को की ओर से दिए गए सर्टिफिकेट के प्रति तक नहीं है। इसकी प्रति प्राप्त करने के लिए कई बार निदेशालय स्तर से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के दिल्ली स्थित मुख्यालय को निदेशालय स्तर से पत्र लिखा गया है, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला है। - <strong>उमराव सिंह, वृत अधीक्षक, कोटा वृत कोटा</strong><br /> <br /> सर्टिफिकेट की प्रति प्राप्त करने के लिए कई बार पत्र लिखे गए हैं। साथ ही निदेशालय स्तर पर एएसआई के दिल्ली मुख्यालय को पत्र लिखा गया है, लेकिन अभी तक सर्टिफिकेट की प्रति उपलब्ध नहीं हुई है। - <strong>डॉ. पंकज धरेन्द्र, अधीक्षक, आमेर महल<br /> </strong><br /> जयपुर सर्किल में रणथम्भौर दुर्ग आता है। ये भी साल, 2013 में यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज मॉन्यूमेंट्स की हिल फोर्ट्स ऑफ राजस्थान की सूची में शामिल हुआ था। उस सर्टिफिकेट की प्रति हमारे पास नहीं है। दिल्ली स्थित एएसआई मुख्यालय से ही इस संबंध में जानकारी मिल सकती है। -<strong>डॉ. प्रवीण सिंह, अधीक्षण पुरातत्वविद्, जयपुर सर्किल, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग<br /> </strong><br /> यूनेस्को की ओर से हिल फोर्ट्स ऑफ राजस्थान में शामिल किले-महलों के सर्टिफिकेट की प्रति हमारे पास नहीं है। रिकॉर्ड चैक करके बता पाउंगा। -<strong>डॉ. बिरी सिंह, अधीक्षण पुरातत्वविद्, जोधपुर सर्किल, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग</strong></p>
<p><strong><br /> 4 बार पत्र लिखे, जवाब एक का नहीं मिला</strong><br /> राजस्थान पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग से मिली जानकारी के अनुसार सर्टिफिकेट की प्रति भिजवाने के लिए एएसआई को करीब 4 बार पत्र भेजे गए हैं, लेकिन विभाग ने एक पत्र का भी जवाब नहीं भेजा है। पुरातत्व विभाग के तत्कालीन निदेशक प्रकाश चन्द शर्मा ने सितम्बर, 2021 में भी पत्र भेजा था। अधिकारियों के अनुसार यूनेस्को की ओर से जारी सिक्स हिल्स आॅफ फोर्ट की सूची में पुरातत्व विभाग के अधीन आने वाले आमेर महल और गागरौन फोर्ट भी चयनित हुए थे, तो कम से कम यूनेस्को की ओर से दिए गए सर्टिफिकेट की प्रति विभाग के पास होनी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Dec 2021 12:25:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>प्रदेश में स्मारकों-संग्रहालयों के टिकट के लिए खिड़की पर खड़े होने की जरूरत नहीं, मोबाइल ऐप से भी होंगे बुक</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश में पुरातत्व विभाग के अधीन आने वाले सभी 33 स्मारकों और संग्रहालयों के प्रवेश टिकट्स अब पर्यटक मोबाइल ऐप से भी ले सकते हैं। इसके लिए विभाग की ओर से बुकराजमोनुमेंट्स के नाम से ऐप बनवाया गया है, जिसे पर्यटक गूगल प्ले स्टोर से निशुल्क डाउनलोड कर सकते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%9F%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%9F-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%96%E0%A4%BF%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%96%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82--%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%B2-%E0%A4%90%E0%A4%AA-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A5%81%E0%A4%95/article-975"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-07/002.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में पुरातत्व विभाग के अधीन आने वाले सभी 33 स्मारकों और संग्रहालयों के प्रवेश टिकट्स अब पर्यटक मोबाइल ऐप से भी ले सकते हैं। इसके लिए विभाग की ओर से बुकराजमोनुमेंट्स के नाम से ऐप बनवाया गया है, जिसे पर्यटक गूगल प्ले स्टोर से निशुल्क डाउनलोड कर सकते हैं। <br /> <br /> पुरातत्व विभाग के निदेशक प्रकाश चंद शर्मा ने बताया कि अब पर्यटक मोबाइल ऐप से भी स्मारकों-संग्रहालयों के टिकट खरीद सकते हैं, जिससे उन्हें टिकट विंडो पर खड़े होने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। मोबाइल ऐप से टिकट खरीदने पर पर्यटकों को मोबाइल पर मैसेज आएगा। साथ ही ई-मेल आइडी पर टिकट की पीडीएफ प्राप्त होगी।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Fri, 02 Jul 2021 16:30:52 +0530</pubDate>
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