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                <title>umaidganj bird sanctuary - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>असर खबर का - वन्यजीव विभाग की ताबड़तोड़ कार्रवाई, जाल-नाव किए जब्त </title>
                                    <description><![CDATA[वन्यजीव विभाग की टीम दोपहर 12.30 बजे पक्षी विहार पहुंची और शाम 4 बजे तक कार्रवाई जारी रखी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---wildlife-department-took-swift-action--net-boats-seized/article-71937"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/transfer-(17).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। उम्मेदगंज पक्षी विहार कंजरर्वेशन रिजर्व में अवैध फिशिंग का सामाचार नवज्योति में प्रकाशित होने के बाद वन्यजीव विभाग हरकत में आ गया। डीएफओ अनुराग भटनागर के निर्देशन में अधिकारी-कर्मचारी मंगलवार दोपहर को लवाजमे के साथ पक्षी विहार पहुंचे। वनकर्मियों को देख अवैध फिशिंग कर रहे ठेकेदार व कर्मचारियों में हड़कम्प मच गया। वनकर्मियों ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए दो झौंपड़ियां, बेम्बू हाउस ध्वस्त कर दिए और नांव, जाल व दो दर्जन से ज्यादा लकड़िया जब्त कर ली। साथ ही ठेकेदार को दोबारा वन क्षेत्र में मतस्य आखेट न करने के लिए सख्त हिदायत देकर पाबंद किया। वहीं, कर्मचारियों को नियमित गश्त करने के निर्देश दिए।</p>
<p><strong>ठेकेदार ने कार्रवाई का किया विरोध </strong><br />उम्मेदगंज पक्षी विहार में अवैध रूप से मतस्य आखेट करने वाले ठेकेदार व कर्मचारियों ने वन विभाग की कार्रवाई का विरोध किया लेकिन ग्रीन आर्मी का लवाजमा देख अपने पैर पीछे खींचने में ही भलाई समझी। इस दौरान ठेकेदार के कार्मिकों ने यहां बेम्बू लकड़ी के वेयर हाउस बना रखे थे, जिसमें मछलियां पकड़ने के उपकरण, व सामान रखे हुए थे। कर्मचारियों ने झौंपड़िया व बेम्बू हाउस तोड़कर सामान जब्त किया। </p>
<p><strong>4 घंटे चली कार्रवाई</strong><br />वन्यजीव विभाग की टीम दोपहर 12.30 बजे पक्षी विहार पहुंची और शाम 4 बजे तक कार्रवाई जारी रखी। इस दौरान एक नाव, जाल, दो दर्जन से अधिक बांस-बल्लियां, मछली पैकिंग के सामान सहित अन्य उपकरण जब्त किए हैं। वहीं, कैनाल के दोनों ओर किए गए अतिक्रमण भी ध्वस्त कर दिए गए। साथ ही ठेकेदार को चेतावनी दी है कि दोबारा वनक्षेत्र में अवैध मतत्य आखेट करते हुए मिलने पर वाइल्ड लाइफ एक्ट 1972 के तहत प्रकरण दर्ज किया जाएगा।</p>
<p><strong>10 हैक्टेयर में हो रही थी अवैध फिशिंग</strong><br />उम्मेदगंज पक्षी विहार 273 हैक्टेयर में फैला हुआ है। जिसमें से 10 हैक्टेयर में अवैध फिशिंग की जा रही थी। वन्यजीव विभाग द्वारा पूर्व में भी अवैध मतस्य आखेट रोकने के लिए नोटिस जारी किया था। लेकिन कार्रवाई के अभाव में अवैध फिशिंग पिछले चार साल से जारी रही। जिससे पक्षियों का प्राकृतिक आवास नष्ट होने लगा। विदेशों से आने वाले पक्षियो का पलायन बढ़ गया। </p>
<p><strong>नवज्योति ने उठाया था मुद्दा</strong><br />दैनिक नवज्योति ने सोमवार के अंक में वन्यजीव विभाग की लापरवाही से छिन रहा बेजुबान पक्षियों का निवाला शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। जिसके बाद वन विभाग के अधिकारी हरकत में आए और तुरंत एक्शन करते हुए उम्मेदगंज में कार्रवाई कर अवैध मतस्य आखेट रोका।</p>
<p><strong>दोबारा अवैध फिशिंग तो दर्ज करेगें केस</strong><br />उम्मेदगंज पक्षी विहार कंजरर्वेशन रिजर्व के 10 हैक्टेयर में अवैध मतस्य आखेट किया जा रहा था। जिस पर कार्रवाई कर बंद करवाया गया। वहीं, अतिक्रमण ध्वस्त कर नाव, जाल, बांस-बल्लियां, मछलियां पकड़ने के उपकरण जब्त कर लिए गए हैं। साथ ही स्टाफ को नियमित गश्त करने को निर्देश दिए हैं। यदि, ठेकेदार व उनके कर्मचारी दोबारा अवैध फिशिंग करते हुए मिले तो उनके खिलाफ वन्यजीव अधिनियम 1972 के तहत कार्रवाई कर केस दर्ज किए जाएंगे। <br /><strong>- अनुराग भटनागर, उप वन संरक्षक, वन्यजीव विभाग कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Mar 2024 12:01:14 +0530</pubDate>
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                <title>वन्यजीव विभाग की लापरवाही से छिन रहा बेजुबान परिंदों का निवाला </title>
                                    <description><![CDATA[उम्मेदगंज पक्षी विहार में दिनदहाड़ेअवैध फिशिंग होने से पक्षियों का प्राकृतिक आवास नष्ट होने लगा है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/due-to-the-negligence-of-wildlife-department--the-food-of-speechless-birds-is-being-snatched-away/article-71857"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/transfer-(1)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। उम्मेदगंज पक्षी विहार में बेजुबान परिंदों का निवाला छिना जा रहा है और वन्यजीव विभाग आंखें मूंदे पड़ा है। अधिकारियों की घोर लापरवाही से पक्षी विहार में दिन दहाड़े अवैध फिशिंग हो रही है। कार्रवाई करना तो दूर पक्षियों की सुरक्षा तक नहीं कर रहे हैं। हालात यह हैं, हजारों मील का सफर कर विदेशों से उम्मेदगंज पहुंचे पक्षियों को भोजन नहीं मिल पा रहा। भूख से बेचेन परिंदे तड़पते नजर आ रहे हैं। नतीजन, उम्मेदगंज पक्षी विहार से पक्षियों का पलायन बढ़ने लगा है।  दरअसल, मतस्य विभाग द्वारा उम्मेदगंज पक्षी विहार से गुजर रही नहर से मछली व्यवसाय के लिए ठेका दिया जाता है। लेकिन, ठेकेदार के कर्मचारी नहर के आमने-सामने स्थित पक्षी विहार के तालाबों में से अवैध रूप से मछली निकाल रहे हैं। जबकि, वर्ष 2020 में मतस्य विभाग के तत्कालीन डायरेक्टर ने अपने विभाग के स्थानीय अधिकारियों को पक्षी विहार से लगती नहर से 500 मीटर का क्षेत्र छोड़कर ठेका करने को पाबंद किया था। लेकिन अधिकारियों ने इसकी पालना नहीं की। जिसकी वजह से बर्ड्स सेंचुरी में अवैध मतस्य आखेट बढ़ गया। नतीजन, पक्षियों के भूखे मरने की नौबत आ गई। </p>
<p><strong>10 हैक्टेयर में हो रही अवैध फिशिंग</strong><br />सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, उम्मेदगंज पक्षी विहार 273 हैक्टेयर में फैला हुआ है। जिसमें से 10 हैक्टेयर में अवैध फिशिंग की जा रही है। वन्यजीव विभाग द्वारा पूर्व में भी मतस्य विभाग को नोटिस जारी कर अवैध मतस्य आखेट रोकने का आग्रह किया था, विभाग ने ध्यान नहीं दिया। नतीजन, अवैध फिशिंग होने से पक्षियों का प्राकृतिक आवास नष्ट होने लगा है। जिसकी वजह से बर्ड्स पलायन करने लगी है। वहीं, वन्यजीव विभाग द्वारा अवैध गतिविधियां रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठा रहा।  </p>
<p><strong>फोरेस्ट लैंड में बनाई टैंटनुमा झोपड़ी</strong><br />उम्मेदगंज में अवैध मतस्य आखेट करने वालों ने वन विभाग व सिंचाई विभाग की जमीन पर ही टैंट लगाकर अस्थाई वेयर हाउस बना लिया है। जहां मछली पकड़ने के जाल, नाव, कैरेट सहित अन्य सामान रखे जाते हैं। नहर के आमने सामने दोनों तालाबों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में मछली निकाली जाती है, जिसे इस टेंट में रखी कैरेट में भरकर स्टोर की जा रही है। वन्यजीव विभाग के अधिकारियोें व कर्मचारियों को यह दिखाई नही दे रहा। विशेषज्ञों का तर्क है कि अवैध मतस्य आखेट विभाग की मिलीभगत से चल रहा है। ऐसे में सरकार को अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका की जांच करवानी चाहिए। </p>
<p><strong>लाडपुरा विधायक ने उठाया था मामला</strong><br />गत 28 फरवरी को वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा के कोटा प्रवास के दौरान लाडपुरा विधायक कल्पना सिंह ने उम्मेदगंज पक्षी विहार में अवैध मतस्य का मामला उठाया था। इस पर मंत्री ने वन्यजीव विभाग के अधिकारियों को फटकार लगाते हुए रोकने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद अधिकारियों ने इस दिशा में कोई सार्थक प्रयास नहीं किए। </p>
<p><strong>नियमानुसार करेंगे कारवाई</strong><br />उम्मेदगंज पक्षी विहार कंजर्वेशन रिजर्व में अवैध मतस्य आखेट का मामला संज्ञान में आया है। जिसे रोकने के लिए नियमानुसार  कार्रवाई कर रहे हैं। <br /><strong>- अनुराग भटनागर, उपवन संरक्षक, वन्यजीव विभाग </strong></p>
<p>मैने अभी विभाग ज्वाइन नहीं किया है। यदि फोरेस्ट लैंड में अवैध रूप से फिशिंग की जा रही है तो ठेकेदार को पाबंद कर रुकवाएंगे। <br /><strong>- इरशाद खान, सहायक निदेशक, मतस्य विभाग </strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं पक्षी प्रेमी</strong><br /><strong>10 हजार पक्षियों के भोजन पर डाका</strong><br />पिछले चार वर्षों से उम्मेदगंज पक्षी विहार कंर्जरवेशन रिजर्व में अवैध मतस्य आखेट किया जा रहा है। लेकिन, वन्यजीव अधिकारियों को दिखाई नहीं दे रहा। जबकि, उम्मेदगंज में 10 हजार से ज्यादा पक्षी विदेशों से आते हैं। इनमें से अधिकतर पक्षी मछली पर निर्भर होते हैं। ऐसे में वन विभाग के तालाबों में से लोग अवैध रूप से मछली निकाल बेजुबान परिंदों के भोजन पर डाका डाल रहे हैं और वन्यजीव विभाग के अधिकारी तमाशा देख रहे हैं। केवलादेवी पक्षी अभयारणय की तर्ज पर उम्मेदगंज को विकसित करने के सरकार के उद्देश्य को बर्बाद करने पर तुले हैं। वन अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध गतिविधियां हो रही है। सरकार को ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। <br /><strong>- देवव्रत सिंह हाड़ा, संस्थापक, पगमार्क फाउंडेशन </strong></p>
<p><strong>130 प्रजातियों के पक्षियों का नष्ट हो रहा आवास</strong><br />उम्मेदगंज पक्षी विहार में हर साल उत्तरी अमेरिका, ब्रिटेन, इराक, ईरान, उज्बेकिस्थान, रशिया, चीन, मंगोल सहित कई देशों से 130 प्रजातियों के पक्षी हजारों पक्षी यहां आते हैं। इनमें से अधिकतर पक्षियों का मुख्य भोजन मछली होता है। लेकिन, वन्यजीव विभाग की लापरवाही से अवैध फिशिंग और संदिग्ध गतिविधियां बढ़ रही है। जिससे पक्षियों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहा है। उन्हें खाने के लिए मछलियां नहीं मिल रही। मजबूरन पक्षियों का पलायन करने लगे हैं। वॉच टावर स्थित तालाब पर पहले सारस क्रेन का जोड़ा आता था लेकिन अब इस स्थान पर नहीं आते।  वहीं, पक्षियों की सुरक्षा को लेकर भी अनदेखी बरती जा रही है।<br /><strong>- एएच जैदी, नेचर प्रमोटर</strong></p>
<p><strong>अधिकारी गैर जिम्मेदार, उजड़ रहा संसार</strong><br />उम्मेदगंज पक्षी विहार कंजर्वेशन रिजर्व में गत 30 जनवरी को वन्यजीव विभाग की ओर से पक्षी गणना करवाई गई थी। जिसमें यहां कोमन पोचार्ड, क्रेस्टेड पोचर्ड, टफ्टेड , लिटिल गीब गल, स्टार्क, प्रेटीनकोल, लिटिल रिंग फ्लॉवर, रफ, कॉमन टील, नार्थन सोवलर, ब्लू थ्रोट, जिंटिंग सिस्टिकोला, विस्किर्ड टर्न, रिवर टर्न, कॉमन कूट, गेडवेल, कॉटन पिग्मी गीज, सारस क्रेन, सहित अन्य कई प्रजाति के प्रवासी पक्षी रिकॉर्ड किए गए थे। इसके बाद विभाग ने कभी पक्षी विहार की तरफ झांका तक नहीं। अवैध फिशिंग व संदिग्ध घुसपैठ लंबे समय से चल रही है। गैर जिम्मेदार वन अधिकारियों की वजह से इन परिंदों का संसार उजड़ रहा है। ऐसे अधिकारियों के खिलाफ सरकार को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। <br /><strong>- रवि नागर, बायोलॉजिस्ट </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Mar 2024 17:22:13 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>उम्मेदगंज पक्षी विहार में पेड़ों पर चली कुल्हाड़ी</title>
                                    <description><![CDATA[उम्मेदगंज पक्षी विहार में गत माह असमाजिक तत्वों ने हरे पेड़ों पर जमकर कुल्हाड़ियां बरसाई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ax-on-trees-in-umaidganj-bird-sanctuary/article-47825"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/ummedganj-pakshi-vihar-me-pedo-pr-chali-kulhadi...kota-news-05-06-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर से 8 किमी दूर उम्मेदगंज पक्षी विहार अपनी बर्बादी पर आंसू बहा रहा है। जहां पक्षियों का खूबसूरत संसार बसता था, आज वहां नशेड़ियों की महफिलें सजती हैं। परिंदों का आशियाना उजाड़ा जा रहा और वन्यजीव अधिकारी आंखें मूंदे पड़े हैं। लापरवाही का आलम यह है कि गत दिनों असमाजिक तत्वों ने पक्षी विहार के हरे पेड़ काट दिए और जंगल में आग लगा दी। इसके बावजूद जिम्मेदारों की कुंभकरर्णीय नींद नहीं टूटी। नतीजन, पेड़-पौधे जलकर खाक हो गए। घटना के 15 दिन बाद भी न डीएफओ मौके पर पहुंचे और न ही एसीएफ ने सुध ली। हैरानी की बात यह है, एसीएफ को न तो घटना की जानकारी है और न ही अपने क्षेत्र की। वह अपने ही क्षेत्र को टेरिटोरियल का बताने से भी नहीं चूके। जबकि, वन्यजीव विभाग के ही रैंजर ने यह क्षेत्र उम्मेदगंज पक्षी विहार में होना स्वीकार किया। </p>
<p><strong>4 साल से सारस ने नहीं बनाया घौंसला</strong><br />बर्ड्स रिर्सचर अंशू शर्मा बतातीं है, उम्मेदगंज पक्षी विहार में पिछले चार साल में सारस ने घौंसला नहीं बनाया। पहले मई से जून तक तालाब के किनारे 8 से 10 सारस ग्रुप में भोजन की तलाश में आते थे, जबकि सारस के तीन जोड़े पक्षी विहार में ही रहते थे। लेकिन, श्वानों के हमले के कारण कुछ अकाल मौत का शिकार हो गए तो शेष यहां से चले गए। वर्ष 2019 के बाद से ही सारस यहां से पलायन कर गए। वर्ष 2020 में भोजन की तलाश में आए सारस जोड़े पर श्वानों ने हमला कर दिया था। जिसमें एक सारस पंख कटने से जख्मी हो गया था। वह करीब एक माह तक उड़ान नहीं भर पाया। बाद में करीब डेढ़ माह बाद जब कुदरती रूप से पंख आए तो वह उड़कर चला गया। वर्तमान में उम्मेदगंज पक्षी विहार में एक भी सारस नहीं है। </p>
<p><strong>सफेदे के पेड़ों पर चली कुल्हाड़ियां</strong><br />उम्मेदगंज पक्षी विहार में गत माह असमाजिक तत्वों ने हरे पेड़ों पर जमकर कुल्हाड़ियां बरसाई। सफेदे सहित आधा दर्जन अन्य पेड़ काट दिए। वहीं, झाड़ियों में आग लगा दी। जिससे आसपास के पेड़-पौधे जलकर खाक हो गए। मधुमक्खियों के छत्ते जमीन पर बिखरे पड़े थे। दूर-दूर तक पेड़-पौधों के जलने के काले निशान थे। वहीं, कई जगहों पर सूखे पेड़ भी काटे हुए थे। घटना को करीब 15 दिन बीत चुके हैं। इसके बावजूद वन्यजीव डीएफओ व एसीएफ को मामले की भनक तक नहीं लगना काम के प्रति लापरवाही दर्शाती है।</p>
<p><strong>वॉच टावर में सजती है नशेड़ियों की महफिल</strong><br />नेचर प्रमोटर एएच जैदी ने बताया कि गत माह 21 मई को अपने कुछ स्टूडेंट्स के साथ उम्मेदगंज पक्षी विहार पहुंचे थे। वहां के हालात बेहद चौंकाने वाले थे। कई जगह पेड़ कटे हुए थे तो कई जगहों पर आगजनी के निशान थे। यहां वॉच टावर, बड़ तालाब सहित कई जगहों पर शराब व बीयर की खाली बोतलें बिखरी पड़ी थी। वहीं, कुछ मृत पक्षियों के अवशेष भी मिले, जो संभवत: श्वानों के हमले में अकाल मौत का शिकार होना प्रतित होते हैं। </p>
<p><strong>खत्म हो रहा पक्षियों का रहवास</strong><br />जैदी के अनुसार, पूर्व में उम्मेदगंज में बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पक्षी नजर आते थे, लेकिन अब इनकी संख्या न के बराबर रह गई है। वन्यजीव विभाग द्वारा पक्षियों के संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया जा रहा और न ही विकास कार्य करवाए जा रहे। विभाग की अनदेखी के कारण पक्षियों का बसेरा खत्म होता जा रहा है। पहले नहर बंद होने के बाद भी उम्मेदगंज तालाब पर एक हजार से अधिक पक्षी दिखाई देते थे लेकिन आज 150 से 200 ही नजर आ रहे हैं। यहां 70 प्रजातियों के पक्षियों की मौजूदगी रहती थी लेकिन वर्तमान में पेड़-पौधों की कटाई, मछली शिकार व आवारा श्वानों का बढ़ते हमले से पक्षी यहां से माइग्रेट हो गए। जबकि, स्पोटेड ओवल व तोतों के लिए वंश वृद्धी का यह सबसे उपयुक्त स्थान था। पेड़ों पर इनकी आबादी बसती थी, जो अब देखने को नहीं मिलती।</p>
<p><strong>नहीं होती मॉनिटरिंग</strong><br />वन्यजीव विभाग ने उम्मेदगंज पक्षी विहार की सुरक्षा के नाम पर एक वन रक्षक तैनात कर रखा है। लेकिन, पक्षी विहार का क्षेत्रफल अधिक होने से मॉनिटरिंग नहीं हो पाती। नाम न छापने की शर्त पर एक वनकर्मी ने बताया कि वन्यजीव विभाग ने लंबे समय से न तो पक्षी विहार में विकास कार्य करवाए और न ही पक्षियों के संरक्षण व सुरक्षा को लेकर कोई काम किए। इतना ही नहीं, अधिकारियों को पेड़ काटे जाने व आग लगाने की घटना तक की जानकारी नहीं है। हालात यह हैं कि विभाग के अधिकारी पक्षी विहार के निरीक्षण तक को नहीं आते।</p>
<p><strong>2012 में घोषित हुआ था पक्षी कंजरवेशन रिजर्व </strong><br />उन्होंने बताया कि नवम्बर 2012 में उम्मेदगंज के 272.47 हैक्टेयर को पक्षी कंजरवेशन रिजर्व घोषित किया गया था। यह हाड़ौती का एक मात्र संरक्षित क्षेत्र होने के बावजूद दुर्दशा का शिकार हो रहा हैं। हालांकि, विभाग ने पक्षी विहार के नाम पर यहां एक वॉच टॉवर, गार्ड चौकी और 540 मीटर दीवार ही बनाई है। लेकिन, यहां आने वाले सैलानियों के लिए बैंच से लेकर पीने के पानी की भी व्यवस्था नहीं है। निगरानी के लिए यहां महज एक फॉरेस्ट गार्ड तैनात है, जो  पक्षी विहार के क्षेत्रफल के लिहाज से नाकाफी है। </p>
<p><strong>तितलियों का बसेरा भी हुआ खत्म</strong><br />बर्ड्स रिर्सचर हर्षित शर्मा बताते हैं, उम्मेदगंज में पक्षियों के साथ तितलियों की विभिन्न प्रजातियां देखने को मिलती थी। यहां उनका रहवास था, जो मानवीय दखल के कारण खत्म हो गई है, अब पक्षी विहार में तितलियां नजर नहीं आती। वहीं, सारस का आशियाना भी उजड़ गया। यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो उम्मेदगंज नाम का ही पक्षी विहार रह जाएगा। </p>
<p><strong>इन पक्षियों का रहता है बसेरा</strong><br />उम्मेदगंज पक्षी विहार में पेंटेड स्टोर्क, ओपन बिल स्टोर्क, वूली नेक स्टोर्क, सारस, ग्लोसी व व्हाइट आईबीस, स्पून बिल, इग्रेट, इंडियन रोलर वाइट, किंगफिशर, कॉमन किंग फिशर, गोल्डन ओरिओल, कोयल, कोरमोरेंट, वुड पैकर, ग्रीन बीईटर सहित विभिन्न प्रजातियों के कई पक्षियों की मौजूदी रहती है। </p>
<p><strong>यह एरिया हमारा नहीं टेरिटोरियल का है</strong><br />उम्मेदगंज वनभूमि दो हिस्सों में वन्यजीव और टेरिटोरियल के बीच बंटी है। चौकी के पीछे 70 मीटर और चौकी से ऊपर व साइड की ओर 50 से 60 मीटर का हिस्सा वन्यजीव विभाग में आता है। उम्मेदगंज के 272.47 हैक्टेयर को पक्षी विहार घोषित किया गया है। इसमें 52 हैक्टेयर तो तालाब है। वॉच टावर व आसपास का क्षेत्र भी टेरिटोरियल में ही आता है। वहीं, उम्मेदगंज में पेड़ काटे जाने व आगजनी की मुझे कोई जानकारी नहीं है। <br /><strong>-राजबिहारी मित्तल, एसीएफ वन्यजीव विभाग</strong></p>
<p><strong>यह क्षेत्र वन्यजीव में आता है </strong><br />वॉच टावर, रियासतकालीन महल व तालाब उम्मेदगंज पक्षी विहार का हिस्सा है, जो वन्यजीव विभाग के हिस्से में आता है। हमारा इलाका ढाड़देवी रोड स्थित देवनारायण मंदिर से सीधे हाथ पर आने वाला क्षेत्र व ढाड़देवी से चरण चौकी तक सीधे हाथ पर आने वाली वनभूमि टेरिटोरियल में आती है। जबकि, इन लॉकेशन के उल्टे हाथ पर आने वाला क्षेत्र वन्यजीव विभाग में आता है। ऐसे में पेड़ काटे जाने वाला क्षेत्र टेरिटोरियल में नहीं आता। <br /><strong>-जयराम पांडे्य, डीएफओ, वनमंडल कोटा</strong></p>
<p><strong>यह क्षेत्र हमारे दायरे में है, पेड़ नहीं टहनियां कटी थी</strong><br />उम्मेदगंज में बना वॉच टावर व रियासतकालीन तालाब किनारे वाला क्षेत्र और दूसरी तरफ आने वाले खेत के बीच का हिस्सा वन्यजीव विभाग में आता है। यह उम्मेदगंज पक्षी विहार कहलाता है। यहां पेड़ नहीं सफेदे की टहनियां काटी गई थी। <br /><strong>-दुर्गेश कहार, रैंजर अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क, वन्यजीव विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 05 Jun 2023 14:36:20 +0530</pubDate>
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