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                <title>Pakistan - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Pakistan RSS Feed</description>
                
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                <title>पाकिस्तान में गुरुद्वारा तोड़े जाने पर भाजपा का हमला, AAP की चुप्पी को बताया 'सिख विरोधी मानसिकता'</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने पाकिस्तान में फरूखाबाद स्थित गुरु सिंह सभा गुरुद्वारे को तोड़े जाने की निंदा करते हुए आम आदमी पार्टी पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, जबकि पाकिस्तान में धार्मिक स्थलों और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/bjps-attack-on-demolition-of-gurudwara-in-pakistan-calls-aaps/article-158702"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/harsh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने पाकिस्तान में फरूखाबाद में गुरू सिंह सभा गुरुद्वारे को तोड़े जाने की कड़ी निंदा करते हुए इस मामले पर आम आदमी पार्टी के नेताओं की चुप्पी को सिख विरोधी मानसिकता बताया है। मल्होत्रा ने गुरुवार कहा है कि केंद्र सरकार लगातार सिखों और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों को सुरक्षा देने के लिए काम कर रही है। वहीं पाकिस्तान की सरकार ने अल्पसंख्यकों को अतिवादियों के भरोसे छोड़े दिया है और उसी के साथ पाकिस्तान लगातार आतंकवाद की शरणस्थली बनी हुई है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में सिंह सभा गुरुद्वारे को तोड़े जाने के एक सप्ताह बाद भी पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार की उस पर चुप्पी देशवासियों को स्तब्ध करती है और निंदनीय है। उन्होंने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान खुद सिख मर्यादाओं के हनन के दोषी हैं और श्री अकाल तख्त साहब ने उन्हें सिख पंथ विरोधी घोषित किया हुआ और ऐसे में सीएम मान और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पाकिस्तान में गुरुद्वारा तोड़े जाने पर चुप्पी उनके सिख विरोधी होने का एक और सबूत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 18:55:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>&quot;शिमला समझौते&quot; पर भाजपा का बड़ा हमला : 'रणनीतिक चूक' का आरोप, कांग्रेस की नीति पर उठाए सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा ने 1972 के शिमला समझौते को कांग्रेस की कमजोर कूटनीति का उदाहरण बताते हुए आरोप लगाया कि 1971 युद्ध में मजबूत स्थिति के बावजूद कश्मीर जैसे अहम मुद्दों का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। पार्टी ने कहा कि यह समझौता आज भी भारत की रणनीतिक और कूटनीतिक नीति पर बहस का विषय बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/bjp-made-a-big-attack-on-shimla-agreement-accused-of/article-158681"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/011.gif" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने 1972 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए शिमला समझौते को कांग्रेस की कमजोर कूटनीतिक नीति का परिणाम करार देते हुए कहा है कि मजबूत स्थिति में होने के बावजूद कांग्रेस नेतृत्व ने कश्मीर जैसे मुद्दों का स्थायी समाधान निकालने के बजाय द्विपक्षीय बातचीत को चुना था। भाजपा ने सोशल मीडिया एक्स पर गुरूवार को लिखा कि 1971 की लड़ाई में निर्णायक जीत के बाद, इसी दिन 1972 में भारत ने शिमला समझौता किया। 93000 से ज़्यादा पाकिस्तानी युद्ध-बंदियों और कब्ज़े में लिए गए इलाक़ों के साथ, भारत बातचीत में बहुत मज़बूत स्थिति में था। फिर भी, उस मज़बूत स्थिति का फ़ायदा उठाकर मुख्य मुद्दों, ख़ासकर कश्मीर का स्थायी समाधान निकालने के बजाय कांग्रेस नेतृत्व ने सिर्फ़ द्विपक्षीय बातचीत पर आधारित रास्ता चुना।</p>
<p>भाजपा ने कहा कि शिमला समझौते के दौरान कांग्रेस की कमज़ोर कूटनीतिक नीति, आज़ाद भारत के सबसे बड़े रणनीतिक मौकों में से एक को गंवाने का मामला बनी हुई है। भारी फ़ायदे वाला वह पल दशकों तक बहस का विषय बना रहा कि क्या भारत ने बिना कोई स्थायी समाधान पाए ही बहुत कुछ छोड़ दिया। भाजपा ने कहा कि पाँच दशक से भी ज़्यादा समय बाद दो जुलाई और शिमला समझौता कूटनीति, बातचीत और पाकिस्तान की समस्या के समाधान को लेकर कांग्रेस की मंशा पर अहम सवाल खड़े करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 16:59:41 +0530</pubDate>
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                <title>अफगानिस्तान पर पाकिस्तानी एयर स्ट्राइक को लेकर UN में हंगामा: पाकिस्तान से सैन्य कार्रवाई तुरंत रोकने की मांग, नागरिकों की मौत पर उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र में अफगानिस्तान के स्थायी मिशन ने पाकिस्तान के कथित हवाई हमलों की निंदा करते हुए उन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन बताया। मिशन ने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, सैन्य कार्रवाई तुरंत रोकने और मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की। अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी दोनों पक्षों से वार्ता के जरिए विवाद सुलझाने की अपील की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/uproar-in-un-over-pakistani-air-strike-on-afghanistan-demand/article-158501"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/afghanistan.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र में अफगानिस्तान के स्थायी मिशन ने पाकिस्तान द्वारा पक्तिया, पक्तिका और कुनार प्रांतों में किये गये हवाई हमलों की निंदा करते हुए कहा है कि इन हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित कई नागरिक मारे गए और घायल हुए हैं। मिशन ने सीमा पार सैन्य कार्रवाई तत्काल रोकने की मांग की है। मिशन ने कहा कि पाकिस्तान को अफगान क्षेत्र में सभी सैन्य हमले तत्काल बंद करने चाहिए और अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के लिए उसे जवाबदेह ठहराया जाना चाहिये। मिशन के अनुसार ये हमले अफगानिस्तान की क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन हैं और संयुक्त राष्ट्र चार्टर की भावना के अनुरूप नहीं हैं।</p>
<p>यह बयान तालिबान के उप प्रवक्ता हमदुल्ला फितरत के उस दावे के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि 28 जून की रात पाकिस्तान द्वारा किये गये हवाई हमलों में 36 नागरिक मारे गए, 163 अन्य घायल हुए तथा तीन रिहायशी मकान भी नष्ट हो गये। मिशन ने कहा, "कोई भी सुरक्षा संबंधी चिंता ऐसी सैन्य कार्रवाई को उचित नहीं ठहरा सकती, जिससे नागरिक हताहत हों या किसी दूसरे देश की क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन हो।" उसने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।</p>
<p>मिशन ने कहा कि दशकों के संघर्ष से प्रभावित अफगानिस्तान की जनता को तालिबान प्रशासन और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव की कीमत नहीं चुकानी चाहिये। मिशन ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से घटनाक्रम पर करीबी नजर रखने, संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित करने तथा अफगानिस्तान की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान कराने के लिए प्रयास तेज करने का आग्रह किया। साथ ही उसने स्थिति को और अधिक गंभीर होने से रोकने की आवश्यकता पर बल दिया।</p>
<p>इस बीच 'डिस्प्लेस्ड इंटरनेशनल' नामक संगठन ने भी पाकिस्तान से अफगानिस्तान में हवाई हमले और अन्य सैन्य कार्रवाई बंद करने की अपील की है। संगठन ने कहा कि इससे नागरिकों की और अधिक जानें जा सकती हैं तथा क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है। उसने अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के सिद्धांतों, विशेषकर भेदभाव, अनुपातिकता और जवाबदेही का पालन करने की मांग की। उधर, नार्वे शरणार्थी परिषद (एनआरसी) के महासचिव जान एगेलैंड ने पूर्वी अफगानिस्तान में पाकिस्तानी हवाई हमलों पर चिंता व्यक्त करते हुए पाकिस्तान और तालिबान से मतभेदों का समाधान बातचीत के माध्यम से करने का आग्रह किया।</p>
<p>एगेलैंड ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा, "नागरिकों और नागरिक ढांचे को कभी निशाना नहीं बनाया जाना चाहिये। हम पाकिस्तान और अफगानिस्तान, दोनों पक्षों के सैन्य बलों से अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करने तथा अपने विवादों का समाधान वार्ता के जरिए करने का आग्रह करते हैं।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 17:52:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कराची हमले के बाद पाकिस्तान का पलटवार: पूर्वी अफगानिस्तान में एयर स्ट्राइक, 25 आतंकियों को मारने का दावा</title>
                                    <description><![CDATA[कराची में रेंजर्स मुख्यालय पर हमले के बाद पाकिस्तान ने पूर्वी अफगानिस्तान में सैन्य कार्रवाई और हवाई हमले किए। पाकिस्तान ने 25 आतंकियों के मारे जाने का दावा किया, जबकि तालिबान सरकार ने 36 नागरिकों की मौत और 163 लोगों के घायल होने की बात कही।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/pakistan-counterattacks-after-karachi-attack-air-strike-in-eastern-afghanistan/article-158402"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/pakistan.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान के कराची शहर में रेंजर्स के क्षेत्रीय मुख्यालय पर हुए हमले के बाद पाकिस्तानी सेना ने पूर्वी अफगानिस्तान में सैन्य कार्रवाई और हवाई हमले किये हैं। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने सोमवार को दावा किया कि इस अभियान में 25 आतंकवादी मारे गये है। अफगानिस्तान के अनुसार इन हमलों में 36 नागरिक मारे गये हैं। पाकिस्तान के अनुसार यह कार्रवाई उस समूह के खिलाफ की गयी, जिसे वह कराची में सप्ताहांत में हुए घातक हमले के लिए जिम्मेदार मानता है। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार लगातार इस बात से इनकार करती रही है कि आतंकवादी समूह उसकी सरजमीं का इस्तेमाल कर रहे हैं।</p>
<p>पाकिस्तान ने कहा कि जमीनी अभियान के बाद रविवार रात पूर्वी अफगानिस्तान में "सटीक हवाई हमले" किये गये। इस्लामाबाद के अनुसार इन हमलों का निशाना पाकिस्तान तहरीक-ए-तालिबान (टीटीपी) से अलग हुआ संगठन जमात-उल-अहरार था। तरार ने कहा, "पक्तिया, पक्तिका और कुनार में स्थित तीन ठिकानों को सटीक हवाई हमलों में नष्ट कर दिया गया।" उन्होंने कहा कि सैन्य अभियान केवल संगठन के ठिकानों और सुरक्षित ठिकानों को निशाना बनाकर चलाया गया। दूसरी ओर, काबुल स्थित तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के दावों को खारिज करते हुए कहा कि तीनों पूर्वी प्रांतों में हुए हवाई हमले मुख्य रूप से नागरिक क्षेत्रों पर किये गये, जिनमें 36 लोगों की मौत हो गई और 163 अन्य घायल हो गये।</p>
<p>तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने इस सैन्य कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे "कायरतापूर्ण आक्रामकता" बताया। अफगान अधिकारियों ने एक बार फिर दोहराया कि उनकी सरजमीं पर आतंकवादी संगठनों को पनाह नहीं दी जाती। दोनों देशों के बीच यह ताजा सैन्य तनाव वर्ष 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से लगातार बिगड़ते संबंधों की कड़ी माना जा रहा है। इससे पहले फरवरी में दोनों देशों के बीच कई सप्ताह तक संघर्ष चला था। यह तनाव शनिवार को कराची में पाकिस्तान रेंजर्स के शिविर पर हुए बड़े हमले के बाद बढ़ा। हमलावरों ने विस्फोट करने के बाद अंधाधुंध गोलीबारी की थी, जिसमें रेंजर्स के तीन जवान मारे गए थे। पाकिस्तान के अधिकारियों ने इस मामले में एक अफगान नागरिक को हिरासत में लिया है, जिस पर हमले में शामिल होने का संदेह है।</p>
<p>पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में की गई सीमा पार सैन्य कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ अपनी आंतरिक सुरक्षा जरूरत बताते हुए उसका बचाव किया है। दोनों देशों ने मार्च में युद्धविराम पर सहमति जताई थी, लेकिन उसके बाद भी बीच-बीच में हिंसक घटनाएं होती रही हैं। अफगान अधिकारियों के अनुसार जून महीने में पाकिस्तान की ओर से किए गए हमलों में 13 लोगों की मौत हुई थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 16:49:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली बरसी पर पीएम मोदी ने बदली सोशल मीडिया डीपी: भारतीय सशस्त्र बलों के शौर्य और बहादुरी को किया नमन, पाकिस्तान को सख्त संदेश </title>
                                    <description><![CDATA['ऑपरेशन सिंदूर' की पहली वर्षगांठ पर पीएम मोदी ने एक्स (X) की डीपी बदलकर सैनिकों के अदम्य साहस को नमन किया। महाभारत के श्लोक के साथ उन्होंने संदेश दिया कि उच्च मनोबल वाली सेना की विजय निश्चित है। 7 मई 2025 को शुरू हुआ यह ऑपरेशन आतंकवाद के खिलाफ भारत की ऐतिहासिक जीत का प्रतीक है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/on-the-first-anniversary-of-operation-sindoor-pm-modi-changed/article-152976"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/pm-modi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर की पहली बरसी पर अपने सोशल मीडिया एक्स की डिस्प्ले तस्वीर बदलकर 'ऑपरेशन सिंदूर' कर ली है और सैनिकों के पराक्रम और देशभक्ति की सराहना की है। पीएम मोदी ने 'ऑपरेशन सिंदूर' की वर्षगांठ पर भारतीय सशस्त्र बलों के शौर्य और बहादुरी को नमन करते हुए एक्स पर लिखा, "ऑपरेशन सिंदूर में भारत को मिली असाधारण विजय हमारे वीर सैनिकों के अद्भुत पराक्रम और देशभक्ति की प्रेरक मिसाल है। उनके अदम्य साहस, दृढ़ संकल्प और कर्तव्यनिष्ठा पर हर देशवासी को गर्व है।"</p>
<p>उन्होंने इस मौके पर महाभारत का एक श्लोक को एक्स पर पोस्ट किया, उदीर्णमनसो योधा वाहनानि च भारत। यस्यां भवन्ति सेनायां ध्रुवं तस्यां जयं वदेत्।" इस श्लोक का अर्थ है हे भरतवंशी (युधिष्ठिर)! जिस सेना के सैनिक (योद्धा) और वाहन (घोड़े, हाथी, रथ आदि) उत्साही और उच्च मनोबल वाले (उदीर्णमनस:) होते हैं, उस सेना की विजय निश्चित (ध्रुवम्) समझनी चाहिए। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले को लेकर भारतीय सेना ने सात मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था और पाकिस्तान में स्थित आतंकवादियों के कई ठिकानों को नष्ट कर दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 12:27:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>आर्थिक संकट के बीच पाकिस्तानी विपक्षी नेता अचकज़ई का बड़ा ऐलान: अफगानिस्तान के साथ बातचीत का किया आह्वान, बोले-पड़ोसी देश के साथ तनावपूर्ण संबंध राजनीतिक और आर्थिक समस्याओं की जड़</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान के विपक्षी नेता महमूद खान अचकज़ई ने सरकार से अफगानिस्तान के साथ तत्काल वार्ता बहाल करने का आग्रह किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि पड़ोसी देश के साथ बिगड़ते संबंधों और आर्थिक गलतियों के कारण पाकिस्तान का निर्यात बाजार बर्बाद हो रहा है। अचकज़ई के अनुसार, आर्थिक स्थिरता और क्षेत्रीय शांति के लिए नीतियों में सुधार अनिवार्य है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/amidst-the-economic-crisis-pakistani-opposition-leader-achakzai-made-a/article-152834"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/mahmood-khan-achakzai.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता और पश्तूनख्वा मिल्ली अवामी पार्टी (पीकेएमएपी) के अध्यक्ष महमूद खान अचकज़ई ने सरकार से अफगानिस्तान के साथ बातचीत फिर से शुरू करने का आह्वान किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि पड़ोसी देश के साथ तनावपूर्ण संबंध एवं राजनीतिक गलत अनुमान पाकिस्तान की आर्थिक समस्याओं को और बढ़ा रहे हैं। यह जानकारी बुधवार को अफ़गान समाचार पोर्टल एरियाना न्यूज़ ने दी।</p>
<p>रिपोर्ट में मंगलवार को कहा गया कि श्री अचकज़ई का मानना है कि पाकिस्तान की मौजूदा आर्थिक कठिनाइयों की जड़ें सरकार की उन गलत नीतियों में निहित हैं जिनके कारण अफगानिस्तान एक आर्थिक साझेदार नहीं रहा है, जो हाल तक पाकिस्तानी वस्तुओं के लिए एक प्रमुख निर्यात बाजार था।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, श्री अचकज़ई ने कहा कि अफगानिस्तान अभी भी पाकिस्तानी सामानों में बहुत रुचि रखता है और उन्होंने बल देकर कहा कि इस्लामाबाद की नीतियों ने उसके अपने आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचाया है। खबरों के अनुसार, उन्होंने पाकिस्तान के नेतृत्व से आर्थिक दबावों एवं क्षेत्रीय अस्थिरता दोनों से निपटने के लिए संवाद और अपनी नीतियों में सुधार करते हुए व्यावहारिक समाधान खोजने का आग्रह किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 18:35:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका ने ईरानी जहाज के चालक दल के 22 सदस्यों को पाकिस्तान को सौंपा, चेतावनियों के बावजूद की थी नौसैनिक नाकाबंदी तोड़ने की कोशिश </title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने ओमान की खाड़ी में जब्त ईरानी जहाज 'एम/वी टूसका' के 22 चालक दल सदस्यों को पाकिस्तान को सौंप दिया है। पाकिस्तान इन्हें आज ईरानी अधिकारियों को सौंपेगा। इस कदम को अमेरिका-ईरान तनाव के बीच 'कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मेजर' माना जा रहा है, जिससे क्षेत्रीय शांति और कूटनीति को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-handed-over-22-crew-members-of-an-iranian-ship/article-152651"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/pakistan.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि अमेरिका ने एक ईरानी कंटेनर जहाज पर पकड़े गए चालक दल के 22 सदस्यों को सुरक्षित पाकिस्तान पहुँचा दिया है, जिन्हें आज ही ईरानी अधिकारियों को सौंप दिया जाएगा। पाकिस्तान ने चालक दल की इस वापसी को तनाव कम करने की दिशा में अमेरिका द्वारा उठाया गया एक 'विश्वास बढ़ाने वाला कदम' बताया है। ईरानी ध्वज वाला जहाज 'एम/वी टूसका', जो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान शिपिंग लाइन्स (आईआरआईएसएल) का हिस्सा है, पिछले महीने ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सेना द्वारा जब्त कर लिया गया था।</p>
<p>अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, इस जहाज ने बार-बार दी गई चेतावनियों के बावजूद नौसैनिक नाकाबंदी को तोड़ने की कोशिश की थी। अमेरिकी सेना ने जहाज के इंजन रूम पर फायरिंग भी की थी। ईरान ने अमेरिका की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की थी और इसे 'समुद्री डकैती' करार दिया था। पाकिस्तान के मुताबिक, चालक दल के सदस्यों को रविवार रात उसकी हिरासत में सौंपा गया था और सोमवार को उन्हें ईरान भेज दिया जाएगा। मंत्रालय ने यह भी कहा कि मरम्मत के बाद जहाज को उसके असली मालिकों को लौटा दिया जाएगा।</p>
<p>सीएनएन ने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के हवाले से कहा कि इन सदस्यों की वापसी ईरानी और अमेरिकी पक्षों के समर्थन से मिलकर की जा रही है। पाकिस्तान ने ऐसे सकारात्मक कदमों का स्वागत करते हुए कहा कि वह क्षेत्रीय शांति के लिए मध्यस्थता के प्रयासों को जारी रखेगा और बातचीत तथा कूटनीति को बढ़ावा देता रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 16:52:13 +0530</pubDate>
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                <title>कांग्रेस का गंभीर आरोप : अमेरिका को खुश करने के लिए केंद्र सरकार ने दी पाकिस्तान को 'क्लीन चिट', बयान को बताया राष्ट्रविरोधी</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने रक्षा मंत्री पर एससीओ बैठक में पाकिस्तान को 'क्लीन चिट' देने का आरोप लगाया है। उन्होंने इस रुख को शर्मनाक और राष्ट्रविरोधी बताते हुए कहा कि अमेरिका को खुश करने के लिए पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को नजरअंदाज किया जा रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congresss-serious-allegation-that-to-please-america-the-central-government/article-152045"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/jairam.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि रक्षा मंत्री ने आतंकवाद के मामले में पाकिस्तान को 'क्लीन चिट' दे दी है और दावा किया कि ऐसा अमेरिका को खुश करने के लिए किया गया है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने बुधवार को सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि निश्चित रूप से रक्षा मंत्री ने केंद्र सरकार की स्वीकृति और निर्देश पर ही किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में 'क्लीन चिट' दी है। उन्होंने इसे शर्मनाक बताया और सवाल किया कि सरकार को ये बताना चाहिए कि क्या पाकिस्तान आतंकवाद का केन्द्र नहीं है।</p>
<p>उन्होंने सवाल किया" क्या वहां भारत के खिलाफ आतंकी शिविर नहीं चल रहे हैं और क्या मुंबई तथा पहलगाम जैसे हमलों की साजिश पाकिस्तान से जुड़े आतंकियों ने नहीं रची थी।" जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान के प्रति सरकार का यह रुख अमेरिका को खुश करने और चीन के सामने संतुलन साधने की नीति का हिस्सा है। उन्होंने 19 जून 2020 को चीन को लेकर दिए गए बयान का हवाला देते हुए कहा कि रक्षा मंत्री का यह भी उसी तरह का चौंकाने वाला रुख है। उन्होंने रक्षा मंत्री के बयान को राष्ट्रविरोधी करार दिया। जयराम रमेश ने एससीओ की बैठक में रक्षा मंत्री के भाषण के वीडियाे का एक हिस्सा भी पाेस्ट किया है जिसमें उन्होंने कहा है कि आतंकवाद का न कोई देश होता है और न कोई धर्म।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 18:40:14 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ईरान-पाकिस्तान वार्ता : मॉस्को रवाना हुए Abbas Araghchi ; पुतिन से करेंगे अहम मुलाकात, मध्यस्थता प्रयासों के बीच अमेरिका से वार्ता जारी रखने पर चर्चा </title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तान, ओमान और रूस के साथ गहन कूटनीतिक चर्चा की है। अमेरिका के साथ संवाद बहाली और होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए, वे अब मास्को में राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात करेंगे। इस दौरे का उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव कम करना और वैश्विक स्थिरता सुनिश्चित करना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iran-pakistan-talks-abbas-araghchi-leaves-for-moscow-will-have-an/article-151885"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran7.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोमवार को कहा कि उनकी पाकिस्तान यात्रा के दौरान कई मध्यस्थों की भागीदारी वाले क्षेत्रीय राजनयिक प्रयासों के बीच अमेरिका के साथ बातचीत को निरंतर जारी रखे जाने को लेकर पाकिस्तान के साथ चर्चा की गयी है। अराघची ने टेलीग्राम पर लिखा, "पाकिस्तान में मेरे दोस्तों के साथ मेरी अच्छी बातचीत हुई और यह दौरा सफल रहा। हमने इस बात पर चर्चा की कि किन परिस्थितियों में और किस तरह से बातचीत जारी रखी जा सकती है।"</p>
<p>क्षेत्रीय स्तर पर समानांतर परामर्श के दौरान, अराघची ने ओमान में हुई चर्चाओं का भी उल्लेख किया जहां ईरानी और ओमानी अधिकारियों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में हो रहे घटनाक्रमों पर बात की। उनका कहना है कि दोनों पक्षों ने समुद्री सुरक्षा पर समान रुख अपनाया और इस मुद्दे पर विशेषज्ञ स्तर का संवाद जारी रखने पर सहमति व्यक्त की। ईरानी विदेश मंत्री आगे की बातचीत के लिए मास्को रवाना हुए हैं। ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वह सोमवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात करेंगे और वार्ता की वर्तमान स्थिति, युद्धविराम से संबंधित घटनाक्रम और व्यापक क्षेत्रीय स्थितियों पर चर्चा करेंगे।</p>
<p>हाल के वर्षों में रूस और ईरान के राजनीतिक और रणनीतिक संबंध मजबूत हुए हैं खासकर तब जब दोनों देश व्यापक पश्चिम देशों के प्रतिबंधों के साए में हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि चर्चा में मध्यस्थता प्रयासों और चल रहे क्षेत्रीय संघर्षों पर अद्यतन जानकारी शामिल होगी। इसके अलावा, ओमान के अधिकारियों ने यह भी कहा कि श्री अराघची के साथ हुई चर्चा में क्षेत्रीय स्थिरता, होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा और तनाव कम करने के उद्देश्य से चल रहे मध्यस्थता प्रयासों पर ध्यान केंद्रित किया गया। ओमान के प्रतिनिधियों ने क्षेत्र में चल रहे संकटों के लिए संवाद और राजनयिक समाधानों के महत्व पर बल दिया।</p>
<p>ये राजनयिक प्रयास ऐसे समय में किए जा रहे हैं जब अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ क्षेत्र में पहले के संघर्ष संबंधी तनावों और प्रत्यक्ष वार्ता में लंबे समय तक विराम के बाद ईरान और अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष संपर्क बनाए रखने के प्रयास जारी रखे हुए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 18:26:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान-अमेरिका वार्ता पर तनाव : ईरानी प्रवक्ता इब्राहिम रजाई का कड़ा रुख, बोले-मध्यस्थता के लिए पाकिस्तान के पास नहीं है आवश्यक विश्वसनीयता</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी संसद ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान के पास अमेरिका के साथ बातचीत के लिए आवश्यक विश्वसनीयता नहीं है। प्रवक्ता इब्राहिम रजाई ने कहा कि इस्लामाबाद डोनाल्ड ट्रंप के हितों के आगे निष्पक्ष रहने में विफल रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य संकट और ऊर्जा युद्ध के बीच, ईरान ने सीधी बातचीत से इनकार करते हुए तटस्थ मध्यस्थ की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/tension-on-iran-america-talks-iranian-spokesperson-takes-a-tough-stance/article-151845"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/pakistan3.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरानी संसद के प्रवक्ता इब्राहिम रजाई ने सोमवार को ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता को लेकर पाकिस्तान की मध्यस्थता पर कड़ी आलोचना करते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि 'मध्यस्थता के लिए पाकिस्तान के पास आवश्यक विश्वसनीयता नहीं है।' सांसद ने आरोप लगाया कि इस्लामाबाद 'हमेशा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हितों का ध्यान रखता है और अमेरिकियों की इच्छा के विरुद्ध एक शब्द भी नहीं बोलता। पाकिस्तान हमारा एक अच्छा दोस्त और पड़ोसी है, लेकिन वह बातचीत के लिए उपयुक्त मध्यस्थ नहीं है।' उन्होंने कहा कि ईरान का मानना है कि एक मध्यस्थ को निष्पक्ष होना चाहिए और दोनों पक्षों को असहज सच बोलने के लिए तैयार रहना चाहिए, जिसमें पाकिस्तान विफल रहा है।</p>
<p>रजाई के अनुसार, पाकिस्तान यह सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने को तैयार नहीं है कि अमेरिका ने शुरू में प्रस्ताव स्वीकार किया और फिर उससे पीछे हट गया। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान लेबनान और ईरान की रुकी हुई वित्तीय संपत्तियों के संबंध में अमेरिका को उसकी प्रतिबद्धताओं के लिए जवाबदेह ठहराने में विफल रहा है। सबसे गंभीर आरोप उस 10-सूत्रीय वार्ता ढांचे को लेकर है, जिसे ईरान का दावा है कि तेहरान यात्रा के दौरान पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को सीधे सौंपा गया था। ईरान के अनुसार, जनरल मुनीर को यह प्रस्ताव इस समझ के साथ दिया गया था कि इसे अमेरिकी पक्ष तक पहुँचाया जाएगा, लेकिन ईरान का कहना है कि उसे अब तक कोई प्रतिक्रिया या पावती नहीं मिली है।</p>
<p>यह कूटनीतिक तनाव 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद शुरू हुए संघर्ष की पृष्ठभूमि में सामने आया है। इस युद्ध ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा हो गया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका के साथ सीधी बातचीत से इनकार कर दिया है। दूसरी ओर, ट्रंप ने सोशल मीडिया पर संकेत दिया कि यदि ईरान बात करना चाहता है, तो उन्हें बस फोन करना चाहिए, लेकिन अमेरिका अब इस्लामाबाद में वरिष्ठ वार्ताकार नहीं भेजेगा। पाकिस्तान की मुस्लिम जगत के शांति मध्यस्थ बनने की महत्वाकांक्षा को इस कूटनीतिक गतिरोध से बड़ा झटका लगा है। ईरान का संदेश स्पष्ट है- तटस्थता दिखाई देनी चाहिए, केवल उसका दावा करना पर्याप्त नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 15:53:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पहलगाम हमले की बरसी पर अमेरिकी सांसदों की पाकिस्तान को दो टूक : लश्कर-ए-तैयबा पर कार्रवाई की मांग, आतंकवाद की स्पष्ट शब्दों में की निंदा </title>
                                    <description><![CDATA[वॉशिंगटन में आयोजित प्रदर्शनी में अमेरिकी सांसदों ने पाकिस्तान को लश्कर जैसे आतंकी संगठनों पर नकेल कसने की चेतावनी दी। पहलगाम हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देते हुए ब्रैड शेरमन ने आतंकियों को मिलने वाली पनाह की निंदा की। राजदूत क्वात्रा ने भारत के कड़े रुख और 'ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता को दोहराया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/on-the-anniversary-of-pahalgam-attack-us-lawmakers-demand-pakistan/article-151501"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/pakistan2.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी सांसदों ने आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक एकजुटता का आह्वान करते हुए पाकिस्तान से लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों पर कठोर नकेल कसने की अपील की है। वाशिंगटन डी.सी. स्थित कैपिटल हिल में भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित प्रदर्शनी 'आतंकवाद की मानवीय कीमत' के दौरान सांसदों ने 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की। पहलगाम हमले की पहली बरसी के अवसर पर आयोजित इस विशेष प्रदर्शनी में अमेरिकी कांग्रेस के 19 सदस्य और 60 से अधिक कांग्रेसी कार्यालयों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस दौरान वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों, थिंक टैंक और भारतीय समुदाय के बीच आतंकवाद की स्पष्ट शब्दों में निंदा की गई।</p>
<p>कांग्रेस के सदस्य ब्रैड शेरमन ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए कहा, "पहलगाम हमले के लिए जिम्मेदार 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (टीआरएफ) को लश्कर-ए-तैयबा का ही हिस्सा माना जाता है, जिसे पाकिस्तान में पनाह मिली हुई है। हमें पाकिस्तान सरकार से यह स्पष्ट मांग करनी चाहिए कि वह लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद जैसे समूहों को पूरी तरह खत्म करे।" संबोधन के दौरान राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश को दोहराते हुए कहा कि भारत आतंकवाद के किसी भी रूप के सामने कभी नहीं झुकेगा। उन्होंने जोर दिया कि मानवता की रक्षा के लिए दुनिया भर के देशों को आतंकवाद के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई लड़नी होगी।</p>
<p>हाउस रिपब्लिकन कॉन्फ्रेंस की अध्यक्ष लिसा मैकक्लेन और सांसद रिचर्ड मैककॉर्मिक ने भी इस खतरे को एक 'साझा दुश्मन' बताया। मैकक्लेन ने खुफिया जानकारी साझा करने और आपसी तालमेल बढ़ाने पर जोर दिया, जबकि मैककॉर्मिक ने इसे एक ऐसी "अनोखी बुराई" करार दिया जो स्वतंत्रता और एकता पर प्रहार करती है। डिजिटल और इंटरैक्टिव डिस्प्ले के माध्यम से इस प्रदर्शनी में 1993 के मुंबई बम धमाकों से लेकर 2008 के मुंबई हमलों और पिछले साल हुए पहलगाम हमले के विनाशकारी परिणामों को दिखाया गया। यह आयोजन उन परिवारों और समुदायों को समर्पित था जिन्होंने आतंकी हिंसा में अपने प्रियजनों को खोया है।</p>
<p>कार्यक्रम में भारत की रक्षा नीति के उस कड़े संदेश को भी याद किया गया, जिसके तहत 7 मई, 2025 को भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया था। इस ऑपरेशन के जरिए पाकिस्तान और पीओके में स्थित लश्कर और जैश के नौ प्रमुख ठिकानों एवं ट्रेनिंग सेंटरों को ध्वस्त किया गया था। इस मिशन की विशेषता इसकी सटीक खुफिया जानकारी और नैतिक संयम रही, जिससे आम नागरिकों को कोई नुकसान नहीं पहुँचा। इस दौरान रिपब्लिकन सांसद माइकल बॉमगार्टनर, बिल हुइज़ेंगा और डेमोक्रेट नेता रो खन्ना, राजा कृष्णमूर्ति, जूली जॉनसन, और श्री थानेदार सहित कई दिग्गज नेता उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 18:23:25 +0530</pubDate>
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                <title>'दलाल' देश बना शांतिदूत? कांग्रेस नेता जयराम रमेश का केंद्र पर हमला ; शांति वार्ता में पाकिस्तान की मेजबानी, भारतीय कूटनीति में बदलाव ज़रूरी</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जिस पाकिस्तान को विदेश मंत्री ने 'दलाल' कहा, वही आज अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की मेजबानी कर रहा है। रमेश के अनुसार, पाकिस्तान का बढ़ता वैश्विक प्रभाव और डोनाल्ड ट्रंप से उसकी करीबी भारत की रणनीतिक हार और कूटनीतिक विफलता का संकेत है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pakistan-hosting-peace-talks-change-in-indian-diplomacy-necessary-congress/article-151104"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/jairam-ramesh-2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने सरकार पर पाकिस्तान को उसकी नीतियों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए कहा है कि जिस देश को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ‘दलाल’ बता रहे थे, उसी को दूसरी बार अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की मेजबानी का मौका मिल रहा है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने सोमवार को एक बयान में इसे केंद्र के नेतृत्व वाली सरकार की विदेश नीति के लिए झटका बताया और कहा कि अब कूटनीतिक तथा रणनीतिक स्तर पर बदलाव की सख्त जरूरत है।</p>
<p>उन्होंने विदेश मंत्री पर भी निशाना साधा और कहा, “बहुत जानकार और हमेशा सलीके से पेश आने वाले विदेश मंत्री ने जिस देश को ‘दलाल’ बताया था, वही आज अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के दूसरे दौर की मेजबानी कर रहा है। बारह अप्रैल को पहले दौर की वार्ता पूरी होने के बाद पाकिस्तान ने सऊदी अरब और कतर से छह अरब डॉलर का कर्ज लिया, ताकि संयुक्त अरब अमीरात के 3.5 अरब डॉलर के कर्ज को चुका सके और 1.43 अरब डॉलर के यूरोबॉन्ड की एक किश्त का भुगतान कर सके।”</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में है और वह मित्र देशों की सहायता पर निर्भर है, इसके बावजूद वह एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने ओसामा बिन लादेन जैसे सभी आतंकवादियों को शरण दी, अफगानिस्तान में ड्रग पुनर्वास केंद्रों पर बमबारी की और हाल में पहलगाम आतंकवादी हमले की साजिश रची। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि केंद्र सरकार की क्षेत्रीय और वैश्विक कूटनीति पाकिस्तान को अलग-थलग करने में विफल रही है, जबकि नवंबर 2008 के मुंबई आतंकवादी हमले के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समय भारत ने पाकिस्तान पर प्रभावी दबाव बनाया था।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि यह भारत के लिए चिंता का विषय है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर अब डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जा रहे हैं। उनके अनुसार, पाकिस्तान ने ट्रंप के परिवार और उनके करीबी नेटवर्क के साथ संबंध बनाने में भारत की तुलना में अधिक सफलता पायी है। उन्होंने कहा, “यह भी केंद्र सरकार की विदेश नीति के लिए बड़ा झटका है। भारत को अपनी कूटनीतिक रणनीति और तौर-तरीकों में व्यापक बदलाव की जरूरत है, जिसके लिए मौजूदा नेतृत्व सक्षम नहीं दिखता।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 18:13:15 +0530</pubDate>
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