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                <title>अब मुकुंदरा व रामगढ़ टाइगर रिजर्व के कोर में सफारी की तैयारी!</title>
                                    <description><![CDATA[अप्रूवल मिलने पर कोर के 20% प्रतिशत हिस्से में शुरू होगा पर्यटन। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/now-preparations-for-safari-in-the-core-of-mukundra-and-ramgarh-tiger-reserve/article-97990"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer38.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स व रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में अब सफारी शुरू किए जाने की तैयारी है। संभागीय मुख्य वनसंरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक द्वारा टाइगर कंजरर्वेशन प्लान तैयार कर प्रधान मुख्य वनसंरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक-जयपुर को भेजा गया है। अब यह टाइगर कंजरर्वेशन प्लान मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक द्वारा एनटीसीए को भेजे जाएंगे। जहां से अप्रूवल मिलते ही मुकुंदरा व रामगढ़ टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में सफारी शुरू की जाएगी। दरअसल, हाड़ौती के दोनों टाइगर रिजर्व में अब तक बफर एरिया में ही सफारी की जा रही है। एनटीसीए से मंजूरी मिलते ही कोर एरिया के सीमित क्षेत्र करीब 20% हिस्से में पर्यटन शुरू किया जा सकेगा। यह प्रयास ट्यूरिज्म को बढ़ावा देने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। </p>
<p><strong>यह है मुकुंदरा का कोर एरिया </strong><br />जानकारी के अनुसार मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में भैंसरोडगढ़, जवाहर सागर, दरा अभयारणय, गागरोन व कोलीपुरा का जंगल का जंगल शामिल है। इनके सीमित क्षेत्र में एनटीसीए की मंजूरी के बाद सफारी शुरू की जाएगी। </p>
<p><strong>अब एनटीसीए को भेजे टाइगर कंजरवेशन प्लान </strong><br />सीसीएफ आरके खैरवा ने बताया कि मुकुंदरा हिल्स व रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के कोर  एरिया में सफारी शुरू किए जाने के प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए टाइगर कंजरर्वेशन प्लान तैयार किया गया है, जिसे गत अक्टूबर माह में प्रधान मुख्य वनसंरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को भेजा है। जहां से एनटीसीए को भेजा जा रहा है। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद दोनों टाइगर रिजर्व के सीमित कोर एरिया में पर्यटन शुरू किया जा सकेगा। </p>
<p><strong>मुकुंदरा के बफर जोन में यह 4 रूट स्वीकृत </strong><br />मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के बफर जोन में ईको-टूरिज्म का संचालन करने के लिए वन विभाग ने 4 रूट स्वीकृत किए हैं। इनमें से एक रुट्स दरा सेंचुरी में सफारी गत वर्ष से ही संचालित की जा रही है। जबकि,  तीन अन्य रुट्स पर अभी सफारी शुरू नहीं हो पाई है। इन 4 रुट्स में पहला-बोराबांस रेंज में बंधा-बग्गी रोड, अखावा-बलिंडा-बंधा, दूसरा रूट कोलीपुरा रेंज में नागनी चौकी पोस्ट, कालाकोट-दीपपुरा घाटा-कान्या तालाब-नागनी चौकी पोस्ट, तीसरा रूट मंदरगढ़ में बेरियर-मंदरगढ़, तालाब-केशोपुरा-रोझा तालाब होते हुए मंदरगढ़ बेरियर और चौथा रूट दरा रेंज में मौरूकलां-बंजर-रेतिया तलाई-पटपडिया-सावनभादौ एरिया शामिल है। इन क्षेत्र में पर्यटक जंगल सफारी का लुत्फ ले सकेंगे। </p>
<p><strong>कंजरवेशन प्लान में यह किए शामिल</strong><br />टाइगर कंजरर्वेशन प्लान में मुकुंदरा व रामगढ़ टाइगर रिजर्व के बफर व कोर एरिया निर्धारित किया है। जिसमें हैबीटॉट डवलेपमेंट,  वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन, कंजरर्वेशन इम्प्रूमेंट, सफारी रुट्स, ईको टेल व रिसर्च सहित तमाम बिंदूओं को शामिल किया गया है। मुकुंदरा के कोर एरिया में दरा अभयारणय, जवाहर सागर सेंचुरी, गागरोन, बोराबांस व राउंठा रेंज के क्षेत्र हैं। एनटीसीए की मंजूरी के बाद यहां  सफारी रुट्स तय किए जाएंगे। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />हमने टाइगर कंजरर्वेशन प्लान का प्रपोजल बनाकर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक  को भेज चुके हैं। जहां से कुछ क्योरी आई थी, वह  भी दुरुस्त करवाकर भिजवा दी गई है। अब उनके स्तर से यह प्रपोजल एनटीसीए को भिजवाया जाएगा। जहां से अप्रूवल मिलने के बाद पर्यटन शुरू किया जा सकेगा। यह प्रयास ट्यूरिज्म विकास में मील का पत्थर साबित होगा। <br /><strong>- रामकरण खैरवा, संभागीय मुख्य वनसंरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक वन विभाग </strong></p>
<p>मुकुंदरा के बफर व कोर एरिया में सफारी शुरू किए जाने के प्रस्ताव भेजे गए हैं। जिसमें जवाहर सागर, गागरोन, दोलतगंज, मंदरगढ़, राउंठा महल, दरा, भैंसरोडगढ़ सहित अन्य रुट्स शामिल हैं। एनटीसीए से मंजूरी मिलने के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी। <br /><strong>- मुथु एस, डीएफओ मुकुंदरा टाइगर रिजर्व </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Dec 2024 17:30:10 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>एनटीसीए ने परमिशन दी फिर भी मुकुंदरा में नहीं ला सके टाइगर</title>
                                    <description><![CDATA[वन्यजीव प्रेमियों का कहना है, मुकुंदरा को खुद मुकुंदरा के अधिकारी ही बर्बाद करने पर तुले हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ntca-gave-permission-but-still-could-not-bring-tiger-to-mukundhra/article-65909"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/ntca-ne-permission-di-fr-bhi-mukundara-me-nhi-la-ske-tiger...kota-news-04-01-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में दो बाघिन और एक बाघ लाने की एनटीसीए से स्वीकृति मिल चुकी है। इसके बावजूद रणथम्भौर से टाइगर नहीं लाए जा सके। अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण टाइगर की शिफ्टिंग पर पेंच फंस गया। जिम्मेदारों की लापरवाही का आलम यह है कि टाइगर रिजर्व घोषित होने के 11 साल बाद भी मुकुंदरा पनप नहीं सका। जबकि,  रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व 2 साल बाद ही आबाद हो गया। यहां बाघों का कुनबा बढ़कर पांच हो गया। वर्तमान में रामगढ़ में एक बाघ-बाघिन और तीन शावक हैं। जबकि, मुकुंदरा में एक दशक बाद भी कुनबा नहीं बढ़ सका। दो साल में ही रामगढ़ तेजी से आगे निकल गया और मुकुंदरा अब भी वहीं खड़ा है, जहां से शुरू हुआ था। वन्यजीव प्रेमियों का तर्क है, एमएचटीआर के अधिकारी ही मुकुंदरा के साथ दोगला रवैया अपना रहे हैं। जिस तरह की फुर्ती रामगढ़ के  अधिकारी दिखा रहे,उतनी ही सुस्ती मुकुंदरा के अधिकारियों की देखने को मिल रही है। </p>
<p><strong>स्वीकृति मिले 6 माह बीते</strong><br />मुकुंदरा हिल्स टाइर रिजर्व में एक बाघ और दो बाघिन लाने की एनटीसीए  की तकनीकी कमेटी ने करीब 6 माह पहले स्वीकृति जारी कर दी थी। इसके बाद  डीएफओ लेवल पर रणथम्भौर से टाइगर चिन्हित कर शिफ्टिंग को लेकर कोडिनेट करना चाहिए था जो उन्होंने अब तक नहीं किया और न ही कोई पत्र व्यवहार किया गया। ऐसे में रणथम्भौर की ओर से भी फेरीफरी क्षेत्र से बाहर विचरण करने वाले टाइगर को चिन्हित नहीं किया गया। यदि, मुकुंदरा प्रशासन की ओर से टाइगर शिफ्टिंग को लेकर प्रयास किए जाते तो अब तक कोई सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना बन सकती थी। </p>
<p><strong>11 साल बाद भी आबाद नहीं हुआ मुकुंदरा</strong><br />मुकुंदरा हिल्स को 9 अप्रेल 2013 को टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था।  3 अप्रेल 2018 में मुकुंदरा को पहला बाघ टी-91 के रूप में मिला। इसके बाद 18 दिसम्बर 2018 को रणथम्भौर से एमटी-2 बाघिन को शिफ्ट किया गया। इनका जोड़ा भी बना। इसके अगले साल ही 10 फरवरी 2019 को बाघ टी-98 रणथम्भौर से निकल प्राकृतिक गलियारे से होते हुए खुद मुकुंदरा पहुंचा था। जिसे एमटी-3 के नाम से जाना गया। ऐसे में यहां दो बाघ व एक बाघिन हो गई थी। जोड़ा बनाने के लिए 12 अप्रेल 2019  को रणथम्भौर के आमा घाटी से बाघिन एमटी-4 को लाया गया।  इनमें से दोनों बाघिनों ने शावकों को जन्म दिया था लेकिन अधिकारियों की लापरवाही से एक भी शावक जिंदा नहीं बच गया। वहीं, एमटी-1 से एमटी-4 तक सभी टाइगर व टाइग्रेस अकाल मौत के शिकार हो गए। </p>
<p><strong>अधिकारियों की मंशा पर उठे सवाल</strong><br />वन्यजीव प्रेमियों का कहना है, मुकुंदरा को खुद मुकुंदरा के अधिकारी ही बर्बाद करने पर तुले हैं। स्वीकृति मिलने के 6 माह बाद भी दो बाघिन व एक बाघ नहीं लाया जाना, अधिकारियों की लापरवाही को दर्शाता है। वहीं, 9 अगस्त 2023 को अंडर ऐज की बाघिन को मुकुंदरा में शिफ्ट कर दिया गया। जबकि, 3 साल से ज्यादा उम्र की बाघिन को छोड़ा जाना चाहिए। कम उम्र की बाघिन का सलेक्शन करना गलत निर्णय साबित हो रहा है। वर्तमान में मुकुंदरा में एक बाघ और बाघिन है। जिनकी एक साल बाद भी मेटिंग नहीं हो सकी। ऐसे में मुकुंदरा शावकों से आबाद नहीं हो सका। जबकि, रामगढ़ को टाइगर रिजर्व घोषित हुए दो साल ही हुए हैं और वहां बाघों की संख्या दो से बढ़कर पांच हो गई है। मुकुंदरा के पिछड़ने में अधिकारियों की मंशा पर सवाल उठते हैं। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं अधिकारी</strong><br />एनटीसीए की तकनीकी कमेटी से रणथम्भौर से दो बाघिन व एक बाघ को लाने की अनुमति पूर्व में ही मिल चुकी है। इस संबंध में रणथम्भौर के अधिकारियों से वार्ता की जाएगी।<br /><strong>- बीजो जॉय, उपवन संरक्षक, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व</strong></p>
<p>इस संबंध में वार्ता चल रही है। अभी तक इस बारे में मुझे लिखित में आदेश नहीं मिले हैं। <br /><strong>- मोहित गुप्ता, उपवन संरक्षक, रणथम्भौर बाघ परियोजना, सवाईमाधोपुर</strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं वन्यजीव प्रेमी</strong><br />स्वीकृति मिलने के बावजूद बाघ-बाघिन न लाना अधिकारियों की लापरवाही दर्शाता है। मुकुंदरा के साथ दोगला रवैया अपनाया जा रहा है। एमएचटीआर  के विकास में अधिकारियों की निष्क्रियता से मंशा का पता लगता है। जबकि, रामगढ़ दो साल में ही आबाद हो गया। अब प्रदेश की नई सरकार से उम्मीद है कि मुकुंदरा के विस्तार को रफ्तार मिलेगी।<br /><strong>- तपेश्वर सिंह भाटी, अध्यक्ष, मुकुंदरा वन्यजीव, पर्यावरण समिति </strong></p>
<p>एनटीसीए से दो बाघिन व एक बाघ लाने की एनटीसीए से करीब 6 माह पूर्व ही स्वीकृति मिल गई थी। ऐसे में बाघ-बाघिन लाने के प्रयास तेज करना चाहिए। टाइगर लाने में देरी से स्थानीय लोगों में विभाग के प्रति नकारात्मक मैसेज जा रहा है। किसी भी प्रोजेक्ट को सफल होने के लिए वाइवल पोपुलेशन होना चाहिए। वर्तमान में यहां एक बाघ व एक बाघिन है। बाघिन अंडर ऐज होने से दूरी बनाए रखती है। ऐसे में बाघ लम्बी-लम्बी जगहों को एक्सप्लोर करता है। ऐसे में उसके माइग्रेट कर दूसरी जगह जाने की आशंका लगी रहती है। <br /><strong>- दौलत सिंह, वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jan 2024 17:56:22 +0530</pubDate>
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                <title>मानसून के साथ बाघिन दे सकती है दस्तक</title>
                                    <description><![CDATA[वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा टाइग्रेस शिफ्टिंग की स्वीकृति न देने के पीछे तापमान में अत्यधिक वृद्धि भी एक कारण हो सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/tigress-can-knock-with-monsoon/article-48656"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/monsoon-k-sath-baghin-de-sakti-h-dastak...kota-news-13-06-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में अकेला विचरण कर रहा बाघ एमटी-5 को अपने हमसफर के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा। बाघ-बाघिन के मिलन में वन,पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन की स्वीकृति दीवार बनकर खड़ी है। हालांकि, एनटीसीए ने मुकुंदरा में बाघिन शिफ्टिंग के लिए तकनीकी स्वीकृति जारी कर दी है लेकिन अभी तक वन,पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन की स्वीकृति नहीं मिली है। हालांकि, उम्मीद जताई जा रही है कि 25 से 27 जून के मध्य मंत्रालय से परमिशन मिल सकती है। इसके बाद शिफ्टिंग की तैयारियां शुरू हो सकेगी। </p>
<p><strong>जून के आखरी सप्ताह में मिल सकती है स्वीकृति </strong><br />राष्ट्रीय बाघ प्राधिकरण-एनटीसीए की सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के करीब तीन हफ्ते बाद एमओईएफसीसी से स्वीकृति मिलने की संभावना रहती है। यदि, जून के आखिरी सप्ताह में बाघिन लाने की परमिशन मिल जाती है तो जुलाई के प्रथम सप्ताह में शिफ्टिंग प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। मानसून के आगाज के साथ मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में बाघिन दस्तक दे सकती है। </p>
<p><strong>सेल्जर के एनक्लोजर में छोड़ी जाएगी बाघिन </strong><br />मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के मुख्य वन संरक्षक एवं फिल्ड डायरेक्टर शारदा प्रताप सिंह ने बताया कि एनटीसीए ने सेल्जर वन क्षेत्र में स्थित सॉफ्ट एनक्लोजर को ही अनुमोदित किया है। ऐसे में बाघिन को इसी सॉफ्ट एनक्लोजर में शिफ्ट किया जाएगा। एनक्लोजर के रखरखाव से संबंधित सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। वहीं, मुकुंदरा के साथ रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में भी एक बाघिन आना है। जिसे जैतपुर रेंज के बजालिया वनक्षेत्र में 34.50 लाख की लागत से बन रहे पोर्टेबल एनक्लोजर में छोड़ा जाएगा</p>
<p><strong>यह की जा रही तैयारियां</strong><br />सीसीएफ एसपी सिंह ने बताया कि बाघिन के आने से पहले कई तैयारियां करनी होती है। जब कोई टाइगर आता है तो सबसे पहले एनक्लोजर चेक किया जाता है। नियमित साफ-सफाई की मॉनिटरिंग की जाती है। वहां पानी की व्यवस्था करनी होती है। साथ ही एनक्लोजर पर ग्रीनशेड लगानी होती है, ताकि टाइगर को अंदर से बाहर और बाहर वाले को अंदर टाइगर न दिख सके। प्रे-बेस का भी माकूल बंदोबस्त किया जाता है। </p>
<p><strong>इधर, कोलीपुरा से दामोदरपुरा के बीच टाइगर का मूवमेंट </strong><br />मुकुंदरा में बाघ एमटी-5 का मूवमेंट कोलीपुरा से दमोदरपुरा रेंज के बीच बना हुआ है। इस क्षेत्र में पानी के स्त्रोत तलाई व नाले होने से इस क्षेत्र की ओर रुख करता है। अमझार नाले के पानी में बैठ गर्मी से निजात पाने का जतन करते ग्रामीणों को नजर आ चुका है। हालांकि, वनकर्मियों की टीम नियमित रूप से बाघ की ट्रैकिंग व मॉनिटरिंग कर रही है। </p>
<p><strong>लाइटिंग की मौत के बाद रह गया अकेला</strong><br />लाइटिनिंग के नाम से मशहूर बाघिन एमटी-4 की मुकुंदरा में गत 4 मई को मौत हो गई थी। इसके बाद से ही वह जंगल में अकेला ही विचरण कर रहा है। ज्यादा समय अकेले रहने से उसके मुकुंदरा की सीमा से बाहर निकल जाने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों का मत है कि यदि बाघिन लाने में देरी होती है तो बाघ के भटकने की संभावना अधिक बढ़ जाती है। बता दें, तीन वर्ष पूर्व बाघ एमटी-1 की जोड़ीदार बाघिन की मौत के बाद वह मुकुंदरा से गायब हो गया, जो आज तक लापता है। ऐसे में अधिकारियों को वक्त गवाए बिना रणथम्भौर से बाघिन लाने के प्रयास तेज करना चाहिए। </p>
<p><strong>तापमान में बढ़ोतरी बन रही बाधक</strong><br />मानसून की आहट के साथ मुकुंदरा में बाघिन दस्तक दे सकती है। वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा टाइग्रेस शिफ्टिंग की स्वीकृति न देने के पीछे तापमान में अत्यधिक वृद्धि भी एक कारण हो सकता है। प्रदेश में इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि मंत्रालय अभी मौसम में ठंडक होने का इंतजार कर रहा है। जुलाई के पहले सप्ताह में मानसून की एंट्री के साथ शिफ्टिंग प्रक्रिया फाइलों से निकल धरातल पर लौटने की उम्मीद है। विशेषज्ञ बताते हैं, इन दिनों शहर का तापमान 40 से 45 डिग्री होने से जहां धरती तप रही वहीं, गर्म हवाओं के थपेड़ों से जंगल में वन्यजीव भी बेहाल हैं। ऐसे में भरी गर्मी में बाघिन की शिफ्टिंग नहीं हो सकती। मंत्रालय भी मानसून का इंतजार कर रहा है ताकि, बारिश के बाद मौसम एनिमल के अनुकूल हो सके। </p>
<p><strong>दामोदरपुरा का होगा विस्थापन</strong><br />मुकुंदरा में बसे दामोदरपुरा गांव के विस्थापन के लिए सरकार से बजट मिल चुका है। विस्थापित प्रत्येक परिवार को 15 लाख रुपए के हिसाब से मुआवजा दिया जाएगा।  लेकिन, यह राशि तीन किश्तों में दी जाएगी। </p>
<p><strong>27 जून तक मिल सकती है परमिशन</strong><br />मुकुंदरा में बाघिन शिफ्टिंग को लेकर फिलहाल एनटीसीए की तकनीकी स्वीकृति ही मिली है, अभी वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से स्वीकृति मिलना बाकी है।  हालांकि, 25 से 27 जून तक परमिशन मिलने की संभावना है। बाघिन को सेल्जर वनक्षेत्र के सॉफ्ट एनक्लोजर में ही शिफ्ट किया जाएगा।<br /><strong>- शारदा प्रताप सिंह, मुख्य वन संरक्षक एवं फिल्ड डायरेक्टर, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Jun 2023 14:32:20 +0530</pubDate>
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