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                <title>jk loan hospital - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>मेडिकल जेनेटिक्स ओपीडी शुरू होने के बाद 10 महीने में 2500 से अधिक केस, रेयर डिजीज डे पर आयोजित सेमिनार</title>
                                    <description><![CDATA[रेयर डिजीज अब नाम की रेयर। लगातार बढ़ती जागरूकता और स्क्रीनिंग से डॉक्टर्स के सामने उम्मीद से बढ़कर केस आ रहे। रेयर डिजीज डे के अवसर पर एसएमएस मेडिकल कॉलेज के मेडिकल जेनेटिक्स विभाग और रेयर डिजीज इंडिया फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित सेमिनार में विशेषज्ञों ने यह जानकारी दी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/more-than-2500-cases-in-10-months-after-medical-genetics/article-144940"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/200-x-60-px)-(2)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। रेयर डिजीज अब नाम की रेयर हैं। लगातार बढ़ती जागरूकता और स्क्रीनिंग से डॉक्टर्स के सामने उम्मीद से बढ़कर केस आ रहे हैं। रेयर डिजीज डे के अवसर पर एसएमएस मेडिकल कॉलेज के मेडिकल जेनेटिक्स विभाग और रेयर डिजीज इंडिया फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित सेमिनार में विशेषज्ञों ने यह जानकारी दी। डॉक्टर्स ने बताया कि अकेले राजस्थान में ही पिछले साल अप्रैल में शुरू हुई रेयर डिजीज क्लिनिक की ओपीडी में अब तक 10 महीने में 2500 से ज्यादा केस रजिस्टर्ड हो चुके हैं। इनमें 300 से अधिक मरीजों को भर्ती तक किया जा चुका है। </p>
<p><strong>7 हजार जेनेटिक बीमारियों में से 2039 बीमारियां इन्हेरिटेड मेटाबॉलिक डिसऑर्डर से संबंधित –</strong><br />नोडल सेंटर फॉर रेयर डिजीज के इंचार्ज डॉ. प्रियांशु माथुर ने बताया कि अब तक दुनियाभर में 7 हजार से ज्यादा जेनेटिक बीमारियों का पता लगाया जा चुका है। इनमें से 2039 बीमारियां इन्हेरिटेड मेटाबॉलिक डिसऑर्डर (भोजन को शरीर में भोजन को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया में गड़बड़ी) से संबंधित हैं। इनमें बच्चों को डेवलपमेंट डिले, बेहोशी, वजन न बढ़ना, बार-बार गंभीर बीमार होने पर अस्पताल में भर्ती होना जैसे लक्षण सामने आते हैं। </p>
<p>रेयर डिजीज इंडिया फाउंडेशन के डायरेक्टर सौरभ सिंह ने बताया कि भारत में दुर्लभ बीमारियों से ग्रसित मरीजों की संख्या काफी अधिक है, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण अक्सर इनके निदान में देरी हो जाती है। इसके अलावा एक पैनल डिस्कशन भी हुआ जिसमें डॉ. मनीषा गोयल, डॉ. रामबाबू शर्मा, डॉ. भावना शर्मा, डॉ. रूपेश, डॉ. सुधीर महर्षि, डॉ. गायत्री, डॉ. नेहा अग्रवाल सहित अन्य विशेषज्ञों ने दुर्लभ बीमारियों के मैनेजमेंट के लिए 'मल्टी-डिसिप्लिनरी अप्रोच' पर जोर दिया। डॉ. लोकेश अग्रवाल ने दुर्लभ बीमारियों के अवलोकन पर, डॉ. प्रदीप चौधरी ने न्यूबॉर्न स्क्रीनिंग पर और डॉ. पूजा चौधरी ने पारंपरिक से जीनोमिक डायग्नोस्टिक तकनीकों पर अपने अनुभव साझा किए। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में जे.के. लोन अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आर. एन. सेहरा, विशिष्ट अतिथि पीडियाट्रिक मेडिसिन विभाग के एचओडी डॉ. कैलाश मीणा और सामाजिक कार्यकर्ता मनु कम्बोज उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 15:01:20 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>JK Loan Hospital में प्लाज्मा चोरी मामला: ब्लड बैंक इंचार्ज को हटाया, एसीएस ने 4 सदस्यों की कमेटी बनाई</title>
                                    <description><![CDATA[राजधानी जयपुर के जे.के. लोन हॉस्पिटल से प्लाज्मा चोरी के मामले में राज्य ने एक्शन लेते हुए इस मामले ब्लड बैंक इंचार्ज सतेन्द्र सिंह को जे.के. लोन से हटाकर सवाई मानसिंह हॉस्पिटल स्थित ब्लड बैंक लगा दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/plasma-theft-case-in-jk-loan-hospital-blood-bank-incharge/article-76989"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/jl-laon.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजधानी जयपुर के जे.के. लोन हॉस्पिटल से प्लाज्मा चोरी के मामले में राज्य ने एक्शन लेते हुए इस मामले ब्लड बैंक इंचार्ज सतेन्द्र सिंह को जे.के. लोन से हटाकर सवाई मानसिंह हॉस्पिटल स्थित ब्लड बैंक लगा दिया। जबकि इस पूरे मामले की जांच के लिए 4 सदस्यों की कमेटी का गठन किया है, जिसे तीन दिन में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए है। वहीं इस पूरे मामले में अस्पताल प्रशासन की ओर से एफआईआर भी दर्ज कराई गई है। वहीं अब एक प्राइवेट हॉस्पिटल की संदिग्ध भूमिका भी इस पूरे मामले में नजर आ रही है। सूत्रों का कहना है कि प्लाज्मा चोरी करने वाला स्टाफ इसी हॉस्पिटल के किसी व्यक्ति को ये बेचता था। इस प्लाज्मा का उपयोग फार्मा कंपनियां प्रोटीन समेत अन्य सप्लीमेंट्स बनाने में उपयोग लेती है।</p>
<p>अतिरिक्त मुख्य सचिव शुभ्रा सिंह के निर्देश पर अतिरिक्त निदेशक अस्पताल प्रशासन डॉ. सुशील परमार, उप वित्तीय सलाहाकार सुरेश चन्द जैन, एड्स कंट्रोल सोसायटी के अतिरिक्त निदेशक डॉ. केसरी सिंह और औषधि नियंत्रक प्रथम अजय फाटक को इस कमेटी में शामिल किया है। गौरतलब है कि जेके लोन हॉस्पिटल में ब्लड बैंक के इंचार्ज डॉक्टर सत्येंद्र सिंह ने शनिवार को लैब टेक्नीशियन कृष्णकांत कटारिया को प्लाज्मा चोरी के मामले में पकड़ा था। इस प्रकरण का रविवार को जब खुलासा हुआ तो मेडिकल हेल्थ डिपार्टमेंट ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करवाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही इस मामले की जांच शुरू करवा दी। जांच प्रभावित न हो इसे देखते हुए डॉ. सत्येन्द्र सिंह को जे.के. लोन हॉस्पिटल से हटाकर एसएमएस हॉस्पिटल के ब्लड बैंक में लगाया गया।<br /><br /><strong>सीसीटीवी फुटेज लेगी कमेटी</strong><br />ये कमेटी जांच इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए हॉस्पिटल के सीसीटीवी फुटेज देखेगी। इसके अलावा किस-किस स्टाफ की कब-कब ड्यूटी ब्लड बैंक में लगी है इसको लेकर भी पूरा रिकॉर्ड देखकर उसकी जांच करेगी और स्टाफ के बयान और पूछताछ के आधार पर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। </p>
<p><strong>नहीं आता मरीजों के काम</strong><br />ब्लड बैंक से जुड़े एक्सपर्ट्स ने बताया कि चोरी किया गया प्लाज्मा मरीजों के उपयोग का नहीं होता। इस प्लाज्मा को फार्मा कंपनियां  मेडिकल रिलिफ सोसायटी के जरिए खरीदती है। इस प्लाज्मा से दवाईयां, प्रोटीन समेत अन्य सप्लीमेंट्स बनाए जाते है। सूत्रों की माने तो लैब टेक्नीशियन कृष्णकांत कटारिया इस प्लाज्मा को चोरी करने के बाद एक निजी हॉस्पिटल को देता था। जेएलएन मार्ग स्थित इस निजी हॉस्पिटल के कुछ लोग इस भूमिका में शामिल है। हालांकि ये तो जांच के बाद ही पता चलेगा कि हॉस्पिटल प्रशासन भी इसमें शामिल था या ये काम केवल कुछ लोगों तक ही सीमित था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 May 2024 17:58:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>बोरवेल खराब होने से जेके लोन में पीने के पानी की किल्लत</title>
                                    <description><![CDATA[जेकेलोन अस्पताल में पीने के पानी सारे वाटर कुलर खराब पड़े है, वार्ड में टॉयलेट में भी पानी नहीं आ रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/shortage-of-drinking-water-in-jakelon-due-to-damaged-borewell/article-64075"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/borewell.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बडे जेकेलोन अस्पताल में पुराने हो चुके बोरवेल से पानी की सप्लाई नहीं होने से अस्पताल में पानी की किल्लत हो रही है। जिससे मरीजों को बाहर से पानी लाकर काम चलना पड़ रहा है। वहीं स्टाफ भी पानी के कैंपर मंगवाकर काम चला रहा है। अस्पताल में दो बोरवेल है जो काफी पुराने हो गए जिससे उनका जल स्तर नीच ला गया है। अभी हाल में अस्पताल प्रशासन ने दोनो ंबोरवेल की सफाई भी कराई लेकिन 70 से 80 फीट गहरे होने के बाद पानी पूरा नहीं आ रहा जिसके चलते अस्पताल में पानी की किल्लत हो गई है। </p>
<p><strong>जेकेलोन की पुरानी बिल्डिंग में सबसे ज्यादा परेशानी</strong><br />जेकेलोन में तीमारदारी के लिए आए मनीषा वर्मा ने बताया कि अस्पताल में पीने के पानी सारे वाटर कुलर खराब पड़े है। वार्ड में टॉयलेट में भी पानी नहीं आ रहा है। अस्पताल में लगी पीने की प्याऊ में टोटियां गायब हो गई है।  उनकी जगह प्लग लगाकर पांइट बंद कर दिए। जिससे बाजार से पानी खरीदकर लाना पड़ रहा है। लेबर रूम के पास लगी पानी टंकी कई दिनों से बंद पड़ी है। यहीं हाल वार्ड में भी है। पोस्ट आॅपरेटिव वार्ड में पानी नहीं है। </p>
<p><strong>सभी कार्यालय में आ रहे कैंपर</strong><br />अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ ने बताया कि अस्पताल में पेयजल के लिए सभी कर्मचारी कैंपर मंगवा रहे है। पर्ची काउंटर से लेकर अस्पताल के सभी कार्यालय में रोज पानी के कैंपर मंगवाए जा रहे है। </p>
<p>अस्पताल में लगे बोरवेल पुराने हो गए है। जिससे पानी नहीं आ रहा है। उनकी सफाई भी करवाई लेकिन सार्थक परिणाम नहीं आए है। आज बैठक में नए बोरवेल लगवाने का प्रस्ताव दिया है। शीघ्र ही पानी की समस्या का समाधान किया जाएगा। <br /><strong>- डॉ. आशुतोष शर्मा, अधीक्षक जेकेलोन अस्पताल कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Dec 2023 17:44:45 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जर्जर हॉस्टल मार रहा करंट, खतरे में जान</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व में भी करंट लगने के घटना हो चुकी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-dilapidated-hostel-is-hit-by-current--life-in-danger/article-53202"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/jajr-maar-rha-current,-khtre-me-jaan...kota-news-31-07-2023.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एमबीएस व जेकेलोन अस्पताल में स्वच्छता का पाठ पढ़ाने वाले नर्सिंग स्टूडेंटस खुद ही संक्रमण व गंदगी के बीच दिन गुजारने को मजबूर हैं। कमरों के ऊपर बिजली के तार झूल रहे तो दीवारों में सीलन से करंट का खतरा बना है। नयापुरा स्थित 26 साल पुराना राजकीय नर्सिंग हॉस्टल जर्जर हो चुका है। चारों ओर झाड़-झंगाड़ व गंदगी के ढेर लगे हैं। जिससे बीमारियों व जहरीले जीव-जंतुओं की मौजूदगी से जान का खतरा बना रहता है। भवन के पीछे गंदा नाला है, जिसकी बरसों से सफाई नहीं हुई। दुर्गंध से विद्यार्थियों का सांस लेना दुश्वार हो रहा वहीं छतों पर खुली टंकियों में खतरनाक बीमारियों का लार्वा पनप रहा। मच्छरों के प्रकोप से छात्रों के बीमार होने का खतरा मंडरा रहा है। </p>
<p><strong>दीवारों में सीलन, कटे बिजली तार</strong><br />एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष हनुमान मीणा ने बताया कि हॉस्टल की छतें जर्जर हो चुकी है। बारिश में कमरों की छतें टपकती है। दीवारों में सीलिंग रहती है। वहीं, दीवारों में अंडरग्राउड हो रही वायरिंग जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो रही है, जिससे करंट का खतरा बना रहता है। पूर्व में भी करंट लगने के घटना हो चुकी है।</p>
<p><strong>गिर रहे प्लास्टर </strong><br />राजकीय नर्सिंग कॉलेज से जीएनएम कर रहे प्रथम व द्वितीय वर्ष के छात्र ने बताया कि हॉस्टल में सुविधाओं का आभाव है। दीवारों व छतों का प्लास्टर उखड़े हुए हैं। कमरों का मेंटिनेंस भी छात्र खुद के खर्चें पर करवा रहे हैं। सीलनभरी दीवारों से उठती दुर्गंध से सांस लेना मुश्किल होता है।  </p>
<p><strong>टंकियों में पनप रहा लार्वा</strong><br />नर्सेज एसोसिएशन के अध्यक्ष अरूण जांगिड़ ने बताया कि जेकेलोन अस्पताल के पीछे स्थित नर्सिंग हॉस्टल जर्जर अवस्था में है। छतों पर रखी टंकियों के टक्कन टूटे हुए हैं, जिनमें बरसाती पानी व काई जमी हुई है। इनमें  लार्वा पनप रहा है। </p>
<p><strong>कमरों में घुस जाते हैं श्वान-सुअर  </strong><br />हॉस्टल परिसर में दिनरात आवारा मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है। सबसे ज्यादा परेशानी कुत्ते और सुअरों की है। भोजन की तलाश में यह कमरों तक पहुंच जाते हैं। </p>
<p><strong>बिजली पैनल बना कबूतरों का घौंसला</strong>  <br />एसोसिएशन के सचिव मुकुट नागर व अरविंद जांगिड़ ने बताया कि हॉस्टल की हालत डरावनी है। कमरों के बाहर बिजली के पैनल कबूतरों के घौंसले बने हुए हैं। उनके पंजों में उलझकर तार टूट जाते हैं, जिससे आए दिन शॉर्ट सर्किट होता रहता है। छात्र ही तार जोड़ते हैं, जिससे करंट का डर रहता है।  छत पर रखी टंकियों केपाइप जगह-जगह से लीकेज हो रहे हैं। जिससे टंकियां खाली हो जाती है। नलों में टूटियां नहीं हैं। कपड़े ठूंसकर पानी रोका हुआ है। स्टूडेंटस बड़ी परेशानी में है। </p>
<p><strong>4 करोड़ से बनेगा नया हॉस्टल</strong><br />एमबीएस अस्पताल परिसर में जल्द ही जी-5 कैटगरी का नया जीएनएम हॉस्टल बनेगा। इसके लिए 4 करोड़ 8 लाख रूपए का बजट स्वीकृत हो चुका है। हॉस्टल 6 मंजिला होगा। इसमें गर्ल्स और बॉयज दोनों के हॉस्टल होंगे। पूर्व में यूआईटी सचिव को पत्र लिखकर परमिशन मांगी गई थी, जो मिल चुकी है। टैंडर प्रक्रिया फाइनल स्टेज पर है। जल्द ही इसका निर्माण कार्य शुरू होगा। वहीं, मंगलवार को पुराने हॉस्टल का निरीक्षण रिपेयर करवाएंगे।<br /><strong>- विष्णुदत्त यादव, प्रिंसिपल राजकीय जीएनएम कॉलेज कोटा</strong></p>
<p>हाल ही में रेजिडेंट्स हॉस्टल का विजिट किया था। वहां के हालात देख सर्वे करवाकर मरम्मत कार्य करवाए हैं। जिसमें नल कनेक्शन, पानी टंकियां, झूलते बिजली के तारों को सही करवाना व साफ-सफाई शामिल है। इसी परिसर में नर्सिंग हॉस्टल भी है, यहां की समस्याएं संज्ञान में आई है। जल्द ही सर्वे करवाकर मेंटिनेंस करवाएंगे। छात्रों को बेहतर सुविधाएं देना प्राथमिकता में है। समस्याओं का तुरंत समाधान करवाया जाएगा।  <br /><strong>- डॉ. धर्मराज मीणा, अधीक्षक, एमबीएस अस्पताल </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 31 Jul 2023 16:42:37 +0530</pubDate>
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                <title>जेके लोन अधीक्षक ने व्यवस्थाओं को किया चाकचौबंद</title>
                                    <description><![CDATA[जेके लोन अस्पताल परिसर में सफाई कराई गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-jk-loan-superintendent-tightened-the-arrangements/article-51851"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/jk-loan-adhikshak-ne-vyavsthao-ko-kiya-chokchoband...kota-news-15-07-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े अस्पताल में कलक्टर के गुरुवार को निरीक्षण के बाद दिए निर्देशों के पालन शुक्रवार को देखने को मिला। जेकेलोन में शुक्रवार को अस्पताल प्रशासन ने सबसे पहले सफाई व्यवस्था को चाकचौबंद किया। उसके बाद लेबर रूम में बिल्ली के बच्चों को निकालकर वहां रखे कचरे और सामान को हटाकर रूम को साफ कराया। उसके बाद गलियार की सफाई कराई गई। गलियारे में पड़ी निर्माण सामग्री की सफाई कराई गई। </p>
<p><strong>अस्पताल की चौक नालियों की सफाई</strong><br />जेकेलोन अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा ने बताया कि अस्पताल परिसर में सफाई कराई गई। जहां नालियां चौक हो रही थी और गंदगी फैली उनको सफाई कराई गई। लेबर रूम के पास गेट के टूटे कांच को लगाया गया। वहीं जहां जहां कीवाड खराब थे उनकी मरम्मत कराई गई। जेकेलोन के दूसरे गेट को किया बंद: कलक्टर के निर्देश के बाद शुक्रवार को पुरानी ओपीडी के दूसरे गेट को शुक्रवार को बंद कर दिया गया। उसके वहां तैनात गार्ड को नई ओपीडी में लगाया गया। साथ ही अस्पताल में अनावश्यक भीड़ को नियंत्रण करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई। वार्ड में दो ही तीमारदारों को प्रवेश दिया गया। गंदगी फैलाने वालों पर गार्ड को पाबंद कर कड़ी निगरानी के निर्देश दिए गए। </p>
<p><strong>सुपरवाइजर को हटाया</strong><br />जेकेलोन अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा ने बताया कि सुरक्षा में खामी के चलते सुपरवाइजर व गार्ड को बदला नये गार्ड तैनात किए और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। सफाई व्यवस्था में सुधार किया। नर्सिंग अधीक्षक ने स्वयं निरीक्षण कर सफाई व्यवस्था जांची। नीचे की नाली की सफाई कराई। लेबर रूम के गेट का कांच निकला हुआ था उसको लगवा दिया है। जेकेलोन के पुराने के गेट को बंद करा दिया है। अब मरीजों की एंट्री नई ओपीडी के मुख्य गेट से ही होगी। अनावश्यक भीड़ पर नियंत्रण किया गया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Jul 2023 19:47:46 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जेकेलोन में परिजनों के लिए नहीं बैठने का ठोर, पांच घंटे होते परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने अस्पताल को चकाचक कर दिए लेकिन मरीजों के लिए वेटिंग रूम नहीं बनाए है जिससे मरीज अस्पताल परिसर में इधर उधर भटकते है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/in-jk-loan--it-is-determined-not-to-sit-for-the-family-members--getting-worried-for-five-hours/article-51399"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/jkloan-me-parijano-k-liye-nhi-bethne-ka-thor,-paanch-ghnte-hote-preshan...kota-news-10-07-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। जेकेलोन अस्पताल में प्रसूताओं के लिए आधुनिक सुविधा युक्त लेबर रूम और वार्ड तैयार कर दिए लेकिन प्रसूताओं के साथ आने तीमारदारों के बैठने और रहने की माकूल व्यवस्था नहीं होने से तीमारदारों को गर्मी, सर्दी बारिश में इधर- उधर बैठक कर समय गुजारना मजबूरी बना हुआ है। सुबह 7 बजे परिजनों और तीमारदारों को सफाई करने के नाम पर बाहर निकाल दिया जाता है और सुबह 11.30 बजे तक उन्हें वार्ड में नहीं आने दिया जाता है। करीब पांच घंटे तक तीमारदार इधर इधर भटकते है। इस दौरान मरीज को कोई परेशानी होने पर कोई सुनने वाला नहीं होता है। </p>
<p><strong>फूटपाथ पर वक्त गुजरना पड़ा</strong><br />नांता से बेटे का इलाज कराने आई लक्ष्मी मीणा ने बताया कि अस्पताल में तीमारदारों के ठहरने और बैठने की कोई व्यवस्था नहीं है। अस्पताल चहुंओर गंदगी फैली है। कहां बैठे अस्पताल में बने फूटपाथ पर बैठकर समय निकालना पड़ता है। अस्पताल में सुबह 11 बजे तक मरीज के पास रूकने नहीं देते। पांच घंटे इलाज से ज्यादा पीड़ा दायक होते है। होटल पर कितनी देर बैठेंगे। </p>
<p><strong>पांच घंटे मरीज रहना पड़ा दूर</strong><br />बूंदी से आई अबिदा बानू ने बताया कि उनकी बहन को डिलेवरी के लिए जेकेलोन में लेकर आए ।  सुबह 7 बजे गार्ड सभी सफाई करने के नाम बाहर निकाल देता है। उसके बाद 11.30 बजे डॉक्टर के राउंड के बाद ही मरीज से मिलने दिया जाता है। इस दौरान मरीजों को कोई परेशानी हो तो कोई संभालने वाला नहीं होता है। पांच घंटे तक अस्पताल में कहां बिताए ये सबसे बड़ी परेशानी है। चहुंओर लोगों की भीड़ बैठने की कोई व्यवस्था नहीं है। कोई सिढ़ियों पर तो कोई पेड़ की छांव में इंतजार करना सहज ही नजर आ जाएगा।</p>
<p><strong>पेड़ की छांव में तलाश करनी पड़ती ठोर</strong><br />विमला शर्मा ने बताया कि जेकेलोन में तीमारदारों और मरीज के आए परिजनों के बैठने के लिए माकूल व्यवस्था नहीं है। जिससे लोगों को इधर उधर ठोर ढूंढना पड़ता है। सरकार ने अस्पताल को चकाचक कर दिए लेकिन मरीजों के लिए वेटिंग रूम नहीं बनाए है जिससे मरीज अस्पताल परिसर में इधर उधर भटकते है। सबसे ज्यादा परेशानी गर्मी और बारिश में होती है। सर्दी में तो लोग धूप बैठकर समय निकाल लेते लेकिन बारिश से बचने का कोई ठोर नहीं मिलता है। निजी अस्पतालों की तरह अस्पताल में परिजनों के रूकने के लिए वेटिंग रूम होना चाहिए जिससे लोगों परेशानी नहीं हो। </p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />अस्पताल में मरीजों के साथ आए परिजनों के ठहरने के लिए परिसर में आश्रय स्थल बने हुए है। अस्पताल में हॉल में कुर्सियां लगा रखी है। सफाई के दौरान ही परिजनों को बाहर निकाला जाता है जिससे सफाई ठीक से हो सके। वार्ड में डॉक्टर के विजिट के दौरान अनावश्यक भीड़ नहीं हो इसके लिए गार्ड तीमारदार के अलावा साथ आए अतिरिक्त लोगों को वार्ड से बाहर भेजते है। <br /><strong>- डॉ. आशुतोष शर्मा, अधीक्षक जेकेलोन अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Jul 2023 16:23:14 +0530</pubDate>
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                <title>अव्यवस्था की पीड़ा मां को करवा रही राहत का इंतजार</title>
                                    <description><![CDATA[जेकेलोन अस्पताल के पुराने लेबर रूम की जगह पर अब नये लेबर रूम में ही तीन अत्याधुनिक सुविधाओं व मॉड्यूलर आॅपरेशन थियेटर तैयार किए है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-pain-of-disorder-is-waiting-for-relief-to-the-mother/article-48902"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/avyavastha-ki-peeda-maa-ko-krwa-rhi-rahat-ka-intezar...kota-news-15-06-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। जेकेलोन में प्रसव कराने आई महिलाओं को अत्याधुनिक सुविधाओं के लिए अभी और करना होगा इंतजार। जेकलोन में सर्व सुविधा युक्त लेबर रूम और जच्चा बच्चा वार्ड बन तो तैयार हो गए लेकिन भवन को अभी संवेदक ने हैंडओवर नहीं किया है। अस्पताल प्रशासन पहले पूरे लेबर रूम को दिए गए मानक स्तर पर तैयार किया है या नहीं उसकी जांच करेंगा उसके बाद उसका हैंडओवर लेंगा उसके बाद उसके उद्घाटन की प्रक्रिया प्रारंभ होगी। इसके चलते अभी गर्भवती महिलाओं को नये लेबर रूम में डिलेवरी के लिए अगले माह तक इंतजार करना पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि सरकार की और से गर्भवती महिला को प्रसव के लिए जेकेलोन अस्पताल अत्याधुनिक लेबर रूम तैयार कराया जिसमें सभी सुविधाए एक ही छत के नीचे मिलेगी साथ ही एक ही समय में 20 से अधिक डिलेवरी एक साथ करने के प्रसव टेबल भी लगाए है। जिससे महिलाओं को अब उन पीड़ाओं को नहीं सहना पड़ेगा जिसे महिलाएं अभी तक सहती आई हैं। इससे आने वाली महिलाओं को न केवल राहत मिलेगी वरन वहां जाने पर निजी अस्पताल के लेबर रूम से भी बेहतर महसूस होगा। जेकेलोन अस्पताल तैयार हुए अत्याधुनिक लेबर रूम सर्व सुविधा युक्त है। खासबात यह है कि इसका निर्माण पुराने वाले लेबर रूम को तोड़कर उसका सौन्दर्यीकरण किया गया है। नया लेबर रूम में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त है इसको तैयार करने में करीब 7.50 करोड़ रुपए की लागत आई है। जिसे देखने पर लगता ही नहीं कि यहां कभी उस तरह का लेबर रूम था जिसमें जाने पर महिलाएं अक्सर घबराती थी। लेकिन अब नए लेबर रूम में जाने पर उन्हें घबराहट तो दूर जरा भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।</p>
<p><strong>तीन अत्याधिक उपकरणों से लैस ऑपरेशन थियेटर किए तैयार</strong><br />जेकेलोन अस्पताल के पुराने लेबर रूम की जगह पर अब नये लेबर रूम में ही तीन ऑपरेशन थियेटर तैयार किए है। जिनमें से एक मॉड्यूलर ओटी भी है। ये सभी लेबर रूम से जुड़े हुए हैं। किसी महिला की स्थिति गम्भीर होने पर उसे तुरंत आॅपरेशन थियेटर में शिफ्ट किया जा सकेगा। तीन में से एक ओटी मॉड्यूलर है। जिसमें हैंपर सिस्टम लगा हुआ है। यहां बाहर से आने वाले हवा भी फिल्टर होकर आएगी। साथ ही हर तीन घंटे में वहां की हवा बदलेगी। जिससे बाहर की धूल-मिट्टी के कण व अन्य संक्रमण का खतरा नहीं रहेगा।</p>
<p><strong>सेंसर वाला प्रवेश द्वार </strong><br />जेकेलोन अस्पताल के नये लेबर रूम में इस बार प्रवेश द्वार सेंसर  लगाया है।  गेट के पास पहुंचते द्वार अपने आप खुल जाएगा जिससे हैंडल के संक्रमण से बचा जा सकेंगा। वहीं सभी जगह नल भी सेंसर वाले लगाए है। भी लेबर रूम में प्रवेश करने पर गेट के कुंडे पर हाथ लगाने की जरूरत नहीं होगी। गेट के सामने पहुंचने पर हाथ आगे करते हो स्वत: गेट खुल जाएगा। उसी तरह से पानी के लिए लगाए गए नल को भी खोलने के लिए हाथ लगाने की जरूरत नहीं है। मरीजों व डॉक्टर स्टाफ के लिए जाने के अलग-अलग गेट बनाए गए हैं। प्रवेश के लिए आगे और निकास के लिए पीछे की तरफ गेट हैं। लेबर रूम से लेकर ओटी तक में वेंटीलेशन और अंदर से बाहर का दृश्य देखने व्यवस्था की गई है। अस्पताल का नया लेबर रूम में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त है। करीब 7.50 करोड़ रुपए की लागत से इसे तैयार किया  गया है।</p>
<p><strong>50 बेड का प्रसव कक्ष किया तैयार</strong><br />डॉ.गोपी किशन शर्मा ने बताया कि नया लेबर रूम 50 बेड तैयार किया है। जिसमें 30 बेड बर्थिंग हैं। इन पर गर्भवती महिला को भर्ती करने से लेकर  प्रसव पीड़ा होने व प्रसव तक उसी एक बेड पर कराया जा सकेगा। जिससे बार बार महिला को एक पलंग से  प्रसव टेबल और फिर दूसरे पलंग पर इधर से उधर ले जाने की पीड़ा से भी मुक्ति मिलेगी। जिस बेड पर महिला को भर्ती किया उसी पर डिलेवरी कराई जाएगी। भर्ती होने से लेकर डिलेवरी तक एक ही बेड पर रखा जाएगा जिससे जच्चा बच्चा संक्रमण मुक्त रहेगा। </p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />लेकेलोन अस्पताल में आधुनिक सुविधा युक्त लेबर  रूम बनकर तैयार हो गया है। हैंडओवर से पहले उसकी तय मानक स्तर जांच की जा रही है। दिए टेंडर के अनुसार उपकरण व सुविधाए और बेड की जांच की जा रही उसके बाद ही उसको हैंडओवर लिया जाएगा। उसके बाद उसके उद्घाटन की प्रक्रिया शुरू होगी। प्रसव कक्ष में महिला के भर्ती होने से लेकर प्रसव तक एक ही पलंग पर हो सकेगा। महिला को बार-बार इधर से उधर शिफ्ट करने की जरूरत नहीं होगी । सुविधाओं के साथ ही यहां संक्रमण से बचाव के भी पूरे इंतजाम किए गए हैं। मॉड्यूलर ओटी बनाया गया है।<br /><strong>- डॉ. आशुतोश शर्मा, अधीक्षक, जेकेलोन अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 Jun 2023 14:20:27 +0530</pubDate>
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