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                <title>medical tourism - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>medical tourism RSS Feed</description>
                
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                <title>बेस्ट पुडुचेरी के लिए पीएम मोदी ने 2,700 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का किया उद्घाटन और शिलान्यास, जनसभा को किया संबोधित</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री मोदी ने पुडुचेरी में ₹2,700 करोड़ की परियोजनाओं का उद्घाटन किया। उन्होंने 'BEST' (व्यापार, शिक्षा, आध्यात्मिकता, पर्यटन) का मंत्र देते हुए ई-बस सेवा, कैंसर सेंटर और करासुर औद्योगिक एस्टेट राष्ट्र को समर्पित किया। इन पहलों का लक्ष्य शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और पुडुचेरी को मेडिकल टूरिज्म का प्रमुख केंद्र बनाना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/for-best-puducherry-pm-modi-inaugurated-development-projects-worth-rs/article-145081"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/modib-22.png" alt=""></a><br /><p>पुडुचेरी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में 2,700 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस दौरान पीएम मोदी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह केंद्र शासित प्रदेश उनके बेस्ट पुडुचेरी यानी व्यापार, शिक्षा, आध्यात्मिकता और पर्यटन पर केंद्रित के दृष्टि की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि वह पुडुचेरी के अछ्वुत लोगों के बीच आकर प्रसन्न हैं। उन्होंने कहा कि आज शुरू हुईं परियोजनाएँ प्रदेश के लोगों के जीवन को सुगम बनाने और क्षेत्र में आर्थिक विकास को तेज करने में सहायक होंगी। उन्होंने कहा, जब मैं पहले यहाँ आया था, तब मैंने बेस्ट पुडुचेरी का मंत्र दिया था। बेस्ट का अर्थ व्यापार, शिक्षा, आध्यात्मिकता और पर्यटन है। पिछले साढ़े चार वर्षों में यह विजन फल दे रहा है। पुडुचेरी ने सुशासन और विकास देखा है। </p>
<p>इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कई महत्वपूर्ण पहलों का उद्घाटन किया, जिनमें पीएम ई-बस सेवा पहल के तहत ई-बसों का शुभारंभ, स्मार्ट सिटी मिशन के तहत एकीकृत कमांड और कंट्रोल सेंटर, सिटीज (सीआईटीआईआईएस ) पहल के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आवास इकाइयाँ, तथा पुडुचेरी सरकार की प्रमुख सीवरेज और जल आपूर्ति परियोजनाएं शामिल हैं।</p>
<p>ये परियोजनाएँ शहरी गतिशीलता में सुधार, नागरिक अवसंरचना को सुदृढ़ करने और प्रौद्योगिकी आधारित शासन के माध्यम से बेहतर सेवा वितरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से तैयार की गयी हैं। उच्च शिक्षा और अनुसंधान को बड़ा प्रोत्साहन देते हुए पीएम मोदी ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कराईकल में कॉम्पोजिट इंजीनियरिंग ब्लॉक, डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ब्लॉक और गंगा छात्रावास का उद्घाटन किया। इसके साथ ही उन्होंने पांडिचेरी विश्वविद्यालय में नए एनेक्सी भवनों, व्याख्यान कक्षों और छात्रावासों का भी उद्घाटन किया।  </p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, एक मजबूत और सशक्त युवा हमारे देश की विकास की नींव है। हम उनके सपनों को समर्थन देने के लिए काम कर रहे हैं। एनआईटी कराईकल में नया डॉ एपीजे अब्दुल कलाम इंजीनियरिंग ब्लॉक और आधुनिक छात्रावास विद्यार्थियों के लिए तकनीकी शिक्षा हासिल करने में सहायक होगी। पांडिचेरी विश्वविद्यालय में अवसंरचना उन्नयन बेहतर शिक्षण वातावरण और अनुसंधान के अवसर पैदा करेगा।  </p>
<p>स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा अवसंरचना को भी महत्वपूर्ण बढ़ावा मिला। पीएम मोदी ने जवाहरलाल स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (जिपमेर) में क्षेत्रीय कैंसर केंद्र के आधुनिकीकरण का उद्घाटन किया और प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम-अभीम) के तहत तीन क्रिटिकल केयर ब्लॉक्स की आधारशिला रखी।</p>
<p>उन्होंने कहा, हम मानते हैं कि स्वास्थ्य सेवा सभी के लिए सुलभ, उपलब्ध और किफायती होनी चाहिए। आयुष्मान भारत योजना पहले से ही पूरे भारत में करोड़ों परिवारों के लिए इस दृष्टि को साकार कर रही है। उन्होंने कहा, मेरा दृढ़ विश्वास है कि पुडुचेरी एक चिकित्सा पर्यटन केंद्र बन सकता है। पुड्डुचेरी में पहले से ही नौ मेडिकल कॉलेज हैं। जिपमेर के क्षेत्रीय कैंसर केंद्र का आधुनिकीकरण स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता को और विस्तार देगा।  </p>
<p>औद्योगिक विकास के लिए एक ऐतिहासिक पहल के तहत प्रधानमंत्री ने 750 एकड़ में फैले करासुर-सेदारापेट औद्योगिक एस्टेट को राष्ट्र को समर्पित किया। इस एस्टेट में एक फार्मा पार्क, कपड़ा पार्क, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) पार्क, सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास का अत्याधुनिक अनुसंधान एवं विकास केंद्र और जिपमेर की उन्नत स्वास्थ्य सुविधाओं केंद्र स्थापित किये जाएंगे, जिससे यह क्षेत्र विनिर्माण, नवाचार और रोजगार सृजन का केंद्र बनेगा। उन्होंने कई अवसंरचना परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी, जिनमें स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने के लिए जल आपूर्ति योजनाएँ, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत 41 ग्रामीण सड़कों का निर्माण, और संशोधित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के तहत विद्युत क्षेत्र की परियोजनाएँ शामिल हैं।</p>
<p>अधिकारियों ने कहा कि परियोजनाओं का यह व्यापक पैकेज अवसंरचना, शहरी सेवाओं, औद्योगिक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सतत विकास को मजबूत करने के लिए सरकार के समन्वित प्रयास को दर्शाता है। प्रधानमंत्री ने पुडुचेरी की प्रगति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश की पूर्ण क्षमता को उजागर करने के लिए स्थानीय प्रशासन के साथ निकटता से काम करना जारी रखेगा।  </p>
<p>उन्होंने कहा, ये विकास कार्य जीवन की सुगमता को बढ़ाएंगे और आर्थिक वृद्धि को गति देंगे। मिलकर, हम एक श्रेष्ठ पुडुचेरी का निर्माण करेंगे जो युवाओं के लिए अवसर सृजित करेगा, गरीबों को सशक्त बनाएगा और समग्र विकास का एक आदर्श बनेगा।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 17:39:29 +0530</pubDate>
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                <title>मेडिकल टूरिज्म की संभावनाओं के दोहन की जरूरत</title>
                                    <description><![CDATA[भारत की आज इस क्षेत्र में शीर्ष 6 देशों में गिनती होने लगी है। दरअसल चिकित्सा क्षेत्र में भाारत ने विश्वस्तरीय चिकित्सा सेवा को लेकर अपनी विशिष्ठ  पहचान बनाई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/need-to-harness-the-possibilities-of-medical-tourism/article-49422"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/630-400-size-(7)8.png" alt=""></a><br /><p>मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में आज भारत दुनिया के देशों की पसंदीदा डेस्टिनेशन बनता जा रहा है। भारत की आज इस क्षेत्र में शीर्ष 6 देशों में गिनती होने लगी है। दरअसल चिकित्सा क्षेत्र में भाारत ने विश्वस्तरीय चिकित्सा सेवा को लेकर अपनी विशिष्ठ  पहचान बनाई है। हमारे देश के 38 चिकित्सा संस्थानों को जेसीआई द्वारा मान्यता प्राप्त है तो चैन्नई, मुंबई, बैंगलोर, अहमदाबाद और दिल्ली मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में अपनी इंटरनेशनल पहचान बना चुके हैं। आज बैंगलोर आईटी राजधानी के साथ ही वैलनेस सेंटर के रुप में अपनी पहचान बना चुका है। एक मोटे अनुमान के अनुसार चिकित्सा, तंदुरुस्ती और आईवीएफ  चिकित्सा के लिए दुनिया के 78 देशों से 2 मिलियन लोग उपचार के लिए हर साल आने लगे हैं। 2020 में भारत में चिकित्सा पर्यटन क्षेत्र से करीब 9 बिलियन अमेरिकी डॉलर की आय हुई है तोे इस क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार 2026 तक मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र से लगभग डेढ़ गुणी 13 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। देखा जाए तो मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में भारत के आकर्षण का केन्द्र बनने के कई प्रमुख कारण हैं। एक तो भारत में चिकित्सा सेवाएं जिसमें मेडिकल और पेरामेडिकल दोनों सेवाएं सस्ती होने के साथ ही इंटरनेशनल लेवल की है। दूसरी यह कि भाषा को लेकर भी कोई समस्या नहीं हैं, क्योंकि भारत के चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोग धाराप्रवाह अंग्रेजी बोल भी लेते हैं तो समझ भी जाते हैं। इसके साथ ही चिकित्सा के क्षेत्र में भारत की परंपरागत छवि का भी सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। अब आवश्यकता इस इमेज को बनाए रखते हुए इस क्षेत्र का दोहन करते हुए अधिक से अधिक लोगों को आकर्षित कर विदेशी आय भी प्राप्त करना है।</p>
<p>देखा जाए तो भारतीय डॉक्टरों की इंटरनेशनल स्तर पर अपनी पहचान है। आज दुनिया के देशों में खासतौर आईपीडी देशों में 75 हजार भारतीय डॉक्टर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से 15 हजार से अधिक डॉक्टर्स तो अमेरिका में ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसी तरह से भारतीय पेरामेडिकल कार्मिक खासतौर से नर्सिंग क्षेत्र में अपनी अलग ही पहचान है। एक समय था जब केरल की नर्सों की दुनिया के अधिकांश देशों में मांग देखी जाती थी। आज भी भारतीय मेडिकल और पेरामेडिकल क्षेत्र से जुड़े लोगों के व्यवहार, कार्यशैली, काम के प्रति प्रतिबद्धता और उच्च नैनिक मानदंडों की पालना के कारण सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। जब विदेशों में ही भारत के मेडिकल क्षेत्र से जुड़े लोगों की अलग पहचान है तो दूसरी और देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों ने अपनी सेवाओं के बदौलत पहचान बनाई है।</p>
<p>विदेशियों के भारत में मेडिकल टूरिज्म के प्रति आकर्षण के अन्य कारणों के साथ ही भारत की समग्र चिकित्सा पद्धति भी एक कारण है। आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, हौम्योपैथी, यूनानी, तिब्बती और सिद्ध पद्धति की चिकित्सा सुविधा में विशेषज्ञता हासिल होने से लोग भारत को प्राथमिकता देने लगे हैं। अन्य देशों की तुलना में हमारे यहां चिकित्सा सुविधाएं सस्ती है तो सेवाएं भी इंटरनेशनल स्तर की होने से लोग आकर्षित होने लगे हैं। एक ही स्थान पर बहुआयामी चिकित्सा सुविधा प्राप्त हो जाती है। देखा जाए तो आज दुनिया के देशों में मानसिक बीमारियों की अधिकता है और भारतीय परंपरागत चिकित्सा पद्धति और योग ध्यान आदि के माध्यम से मानसिक विकारों का आसानी से ईलाज हो सकता है। योग के महत्व को तो अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकारा जा चुका है। इसके साथ ही आधुनिकतम चिकित्सा पद्धति में भी भारतीय चिकित्सकों को महारत हासिल होती जा रही है। अभी हाल ही में कोविड के दौरान भारत ने जिस तरह से दवा और टीके उपलब्ध कराकर दुनिया के देशों में अपना लोहा मनवाया है, उससे लोगों का और अधिक विश्वास बढ़ा है। जहां तक रोग निरोधक टीकों का प्रश्न है उनकी उपलब्धता और वितरण में भारत दुनिया के देशों में शीर्ष पर है।</p>
<p>मेडिकल टूरिज्म का सीधा-सीधा अर्थ यह है कि जब कोई अपने इलाज के लिए किसी दूसरे देश में जाते हैं तो यह मेडिकल टूरिज्म कहलाता है। वैसे यह माना जाता रहा है कि मेडिकल टूरिज्म के रुप में फ्रांस सबसे अग्रणी देश है तो सिंगापुर और थाईलैंड भी दुनिया के देशों के पंसदीदा स्थान है। अब मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में हमारे देश की और लोगों का झुकाव होता जा रहा है। ऐसे में सरकार को भी मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने की दिशा में ठोस प्रयास करने होंगे। इसके लिए सबसे पहले तो मेडिकल वीजा व्यवस्था को सरल और सुगम बनाना होगा। इसके साथ ही इंश्योरेंस सुविधाओं को बेहतर बनाना होगा। दरअसल विदेशों से मेडिकल टूरिज्म पर आने वाले लोगोें के सामने विदेशी इंश्योरेंस कंपनियों द्वारा केशलेस या इंश्योरेंस सुविधा प्राप्त करना परेशानी का कारण है। ऐसे में मेडिकल क्षेत्र में इंश्योरेंस करने वाले संस्थानों से समन्वय व संवाद कायम कर सुविधाएं प्राप्त करनी होगी। इसके साथ ही सरकार को भारतीय मेडिकल सुविधाओं की विदेशों में योजनाबद्ध तरीके से मार्केटिंग करनी होगी ताकि भारत को दुनिया का प्रमुख मेडिकल डेस्टिनेशन बनाया जा सके। इसके लिए सरकार के साथ ही विदेशों में कार्यरत गैर सरकारी संस्थाओं को आगे आना होगा।    </p>
<p>-डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Jun 2023 10:32:31 +0530</pubDate>
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