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                <title>New Education Policy - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>New Education Policy RSS Feed</description>
                
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                <title>नई शिक्षा नीति से सशक्त होती बेटियां</title>
                                    <description><![CDATA[नई शिक्षा नीति बेटियों को चारदीवारी से निकालकर विश्व के मंच तक पहुंचा पाएगी, या फिर संसाधनों की कमी और सामाजिक सोच उनके रास्ते में फिर दीवार बन जाएगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/daughters-getting-empowered-by-new-education-policy/article-141169"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)82.png" alt=""></a><br /><p>नई शिक्षा नीति बेटियों को चारदीवारी से निकालकर विश्व के मंच तक पहुंचा पाएगी, या फिर संसाधनों की कमी और सामाजिक सोच उनके रास्ते में फिर दीवार बन जाएगी। भारत में शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्ति का माध्यम नहीं है, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावशाली साधन रही है। नई शिक्षा नीति इसी परिवर्तन की बड़ी परिकल्पना लेकर आई। परंतु इस नीति को यदि सबसे संवेदनशील दृष्टि से देखा जाए, तो यह भारतीय बेटियों के भविष्य से गहराई से जुड़ी हुई दिखाई देती है। वर्षों से सामाजिक बंधन, आर्थिक सीमाएं, घरेलू जिम्मेदारियां और लैंगिक भेदभाव लड़कियों की शिक्षा में बाधा बनते रहे हैं।</p>
<p><strong>उम्मीद की किरण है :</strong></p>
<p>ऐसे में यह नीति केवल शैक्षिक सुधार नहीं, बल्कि उन लाखों बेटियों के लिए उम्मीद की किरण है, जो शिक्षा के सहारे अपने जीवन की दिशा बदलना चाहती हैं। नई संरचना और प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा पर दिया गया जोर बालिकाओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। अक्सर देखा गया है कि लड़कियां प्राथमिक स्तर से आगे नहीं बढ़ पातीं। अब खेल आधारित, गतिविधि आधारित और मातृभाषा में सीखने की प्रक्रिया उन्हें शिक्षा से जोड़कर रखने में सहायक हो सकती है।</p>
<p><strong>क्रांतिकारी पहलू है :</strong></p>
<p>जब पढ़ाई डर का विषय न होकर आनंद का अनुभव बनती है, तो परिवार भी बालिकाओं की शिक्षा के प्रति अधिक सकारात्मक होते हैं। प्रारंभिक साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान पर ध्यान उनकी बुनियाद को मजबूत करता है, जिससे आगे की शिक्षा उनके लिए सरल हो जाती है। इस नीति का सबसे क्रांतिकारी पहलू है लचीलापन। मल्टीपल एंट्री एग्ज़िट, विषय चयन की स्वतंत्रता और कौशल आधारित शिक्षा उन बालिकाओं के लिए वरदान साबित हो सकती है, जो विवाह, पारिवारिक जिम्मेदारियों या आर्थिक परिस्थितियों के कारण पढ़ाई बीच में छोड़ देती थीं।</p>
<p><strong>कौशल और व्यावसायिक :</strong></p>
<p>अब वे अपनी सुविधा अनुसार शिक्षा को फिर से शुरू कर सकती हैं। यह व्यवस्था शिक्षा को एक बार मिलने वाला अवसर न बनाकर जीवनभर उपलब्ध रहने वाला अवसर बनाती है। कौशल और व्यावसायिक शिक्षा पर दिया गया जोर बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अब शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं, बल्कि रोजगार, उद्यमिता और तकनीकी दक्षता से जुड़ती है। डिजिटल कौशल, कंप्यूटर शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बना सकता है।</p>
<p><strong>समाज में सम्मान :</strong></p>
<p>यह आत्मनिर्भरता ही उन्हें समाज में सम्मान और निर्णय लेने की शक्ति देती है। डिजिटल शिक्षा ने नई संभावनाएं खोली हैं। ऑनलाइन कक्षाएं ई लर्निंग सामग्री और वर्चुअल संसाधन उन बालिकाओं तक शिक्षा पहुंचा सकते हैं, जो सामाजिक कारणों से स्कूल नहीं जा पातीं। पर यही डिजिटल विस्तार एक चुनौती भी है। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और स्मार्ट उपकरणों की कमी का सबसे अधिक प्रभाव लड़कियों पर पड़ता है। कई घरों में यदि एक ही मोबाइल है, तो उसका उपयोग पहले लड़कों को मिलता है। यह डिजिटल विभाजन बेटियों के अवसरों को सीमित कर देता है।</p>
<p><strong>शिक्षा का प्रावधान :</strong></p>
<p>मातृभाषा में शिक्षा का प्रावधान बालिकाओं के लिए सहज सीख का माध्यम बनता है। वे अपनी भाषा में बेहतर समझ विकसित कर पाती हैं, जिससे आत्मविश्वास बढ़ता है। पर अभिभावकों की चिंता यह भी है कि अंग्रेजी की कमी भविष्य के अवसरों को सीमित कर सकती है। इस संतुलन को साधना नीति के सफल क्रियान्वयन की कुंजी है। आंकड़े बताते हैं कि प्राथमिक स्तर पर बालिकाओं का नामांकन बढ़ा है, पर माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर अब भी चिंता का विषय है।</p>
<p><strong>नई शिक्षा नीति :</strong></p>
<p>कम उम्र में विवाह, घरेलू कार्यों का बोझ, सुरक्षा की चिंता और आर्थिक दबाव बालिकाओं की शिक्षा को रोक देते हैं। नई शिक्षा नीति इन समस्याओं को कम करने का मार्ग दिखाती है, पर सामाजिक सोच में बदलाव के बिना इन लक्ष्यों को हासिल करना कठिन है। शिक्षा का असली अर्थ तब दिखाई देता है जब एक ग्रामीण बालिका पहली बार स्कूल की ड्रेस पहनकर अपने सपनों की ओर कदम बढ़ाती है। जब वह किताबों के साथ अपने भविष्य की कल्पना करती है। जब एक शिक्षक सीमित संसाधनों में भी उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।</p>
<p><strong>सशक्तिकरण का माध्यम :</strong></p>
<p>जब परिवार उसे पढ़ने की अनुमति देता है,वहीं नई शिक्षा नीति का वास्तविक प्रभाव दिखाई देता है। नई शिक्षा नीति बेटियों के लिए शिक्षा को अधिकार से आगे बढ़ाकर सशक्तिकरण का माध्यम बनाने की क्षमता रखती है। परंतु यह तभी संभव है, जब संसाधनों की उपलब्धता, डिजिटल पहुंच, प्रशिक्षित शिक्षक, सुरक्षित विद्यालय वातावरण और सबसे महत्वपूर्ण,सामाजिक सोच में बदलाव साथ आएं। यदि ये चुनौतियां दूर की जाएं, तो यह नीति भारतीय बेटियों को न केवल शिक्षित, बल्कि आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और सशक्त नागरिक बनाने में ऐतिहासिक भूमिका निभा सकती है।</p>
<p><strong>-डॉ सुनिधि मिश्रा</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Jan 2026 12:34:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Good News : कॉलेज में जहां पढ़ाई छोड़ेंगे, छात्र उससे आगे शुरू कर सकेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार नई शिक्षा नीति के तहत यह काम कर रही है जिसके अनुसार कॉलेज में अगर किसी ने प्रथम या द्वितीय वर्ष के बाद पढ़ाई छोड़ दी तो वह 5 साल बाद भी सीधे तृतीय वर्ष की परीक्षा दे सकेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/good-news-students-will-be-able-to-start-further-from/article-79729"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/rtu-ka-dawa...har-saal-60-fisadi-placement,-student-bole-sirf-35-fisadi...kota-news..11.9.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए अच्छी खबर सामने आई है। कॉलेज में बच्चे जहां से पढ़ाई छोड़ेंगे अब वहीं उससे आगे शुरू कर सकेंगे। इसको लेकर कवायद की जा रही है। सरकार नई शिक्षा नीति के तहत यह काम कर रही है जिसके अनुसार कॉलेज में अगर किसी ने प्रथम या द्वितीय वर्ष के बाद पढ़ाई छोड़ दी तो वह 5 साल बाद भी सीधे तृतीय वर्ष की परीक्षा दे सकेगा। ऐसी व्यवस्था करने के प्रयास चल रहे हैं। इससे काफी फायदा होगा। </p>
<p><strong>नई व्यवस्था रोजगार के अनुसार </strong><br />राज्य सरकार नई व्यवस्था में शिक्षा के बाद रोजगार देने पर फोकस किया जा रहा है। शिक्षामंत्री मदन दिलावर ने कहा कि विद्यार्थियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए और नियमित पढ़ाई जारी रखने को लेकर सरकार नए फैसले करने में लगी है। मैंने कई निर्णय लिए हैं, जिससे कोई नाराज हुए तो कुछ लोग खुश भी हुए, इसमें मोबाइल का उपयोग बंद करने का भी लिया है। इसका सीधा फायदा हमारे बच्चों को हो रहा है। शिक्षा के साथ-साथ संस्कार जरूरी हैं। हमें बच्चों को संस्कार देने ही होंगे। इसकी शुरूआत घर से होती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 May 2024 10:53:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई शिक्षा नीति से साकार होगा आत्मनिर्भर भारत का सपना: मंजू बाघमार</title>
                                    <description><![CDATA[उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में हर पाठ्यक्रम को मातृभाषा में तैयार किया जाना प्रस्तावित है। इससे बालक तेजी से सीख सकेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/the-dream-of-self-reliant-india-will-come-true-with-the/article-66587"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/manju-baghmar.png" alt=""></a><br /><p>उदयपुर। राजस्थान में सार्वजनिक निर्माण विभाग तथा महिला एवं बाल विकास विभाग राज्यमंत्री मंजू बाघमार ने कहा है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में ज्ञान के साथ-साथ कौशल उन्नयन पर भी ध्यान केन्द्रित किया गया है। यह नीति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के स्वप्न को साकार करने में सहायक सिद्ध होगी। </p>
<p>मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय कॉमर्स एण्ड मैनेजमेंट स्डटीज कॉलेज की प्रोफेसर प्रो बाघमार बुधवार को कॉमर्स कॉलेज में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत गुणवत्ता शिक्षा के लिए शिक्षकों की क्षमतावर्धन को लेकर एकाउंटेंसी एण्ड बिजनेस स्टडीज विभाग के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रही थी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में हर पाठ्यक्रम को मातृभाषा में तैयार किया जाना प्रस्तावित है। इससे बालक तेजी से सीख सकेंगे। इसके अतिरिक्त व्यावहारिकता पर अधिक बल दिया है जिससे ज्ञान के साथ-साथ ज्ञान के प्रयोग की कुशलता का भी विकास होगा। नयी शिक्षा नीति युवाओं को स्वयं रोजगार प्रदाता के रूप में भी तैयार करने में सक्षम है। आवश्यकता नयी शिक्षा नीति को अच्छे ढंग से क्रियान्वित करने की है।</p>
<p>समारोह की अध्यक्षता कर रही सुखाड़िया विश्वविद्यालय की उप कुलपति प्रो सुनीता मिश्रा ने अवगत कराया कि विश्वविद्यालय नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने वाले अग्रणी संस्थानों में शामिल है और इसके बेहतर से बेहतर क्रियान्वयन के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।समारोह को जनार्दनराय नायर विश्वविद्यालय के उप कुलपति प्रो एस एस सारंगदेवोत ने भी संबोधित किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>उदयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jan 2024 20:50:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बड़ी खबर : न्यू एजुकेशन पॉलिसी का एजेंडा हुआ पास, अब सेमेस्टर प्रणाली लागू होगी राजस्थान यूनिवर्सिटी में</title>
                                    <description><![CDATA[यूजी फर्स्ट ईयर में सेमेस्टर सिस्टम लागू किया जा रहा है। इसके तहत 6-6 महीने के दो सेमेस्टर पढ़ाए जाएंगे। तीन साल के यूजी पाठ्यक्रम के लिए 6 सेमेस्टर में पढ़ाई होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/big-news--new-education-policy-agenda-passed--now-semester-system-will-be-implemented-in-rajasthan-university/article-49451"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/rajasthan-university1.png" alt=""></a><br /><p>ब्यूरो/नवज्योति, जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय में सोमवार को एकेडमिक काउंसिल की मीटिंग में न्यू एजुकेशन पॉलिसी का एजेंडा पास हुआ। अब विश्वविद्यालय और संगठन कॉलेजों में अंडर रिजर्वेशन कोर्सेज में भी सेमेस्टर प्रणाली लागू होगी। करीब 2 घंटे चली इस बैठक में कुछ सदस्यों ने न्यू एजुकेशन पॉलिसी को लागू करने का विरोध भी किया, लेकिन ज्यादातर सदस्य पॉलिसी को लागू करने के पक्ष में रहे। इस दौरान कुछ छात्रों ने जमकर हंगामा भी किया। विश्वविद्यालय में अंडर ग्रेजुएशन कोर्सेज फर्स्ट ईयर में नई शिक्षा नीति के तहत पढ़ाई कराने का फैसला लिया गया। इसके तहत अब यूनिवर्सिटी के संघटक कॉलेजों के साथ जयपुर और दौसा के सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों में भी नई शिक्षा नीति के तहत प्रवेश होंगे। यूजी फर्स्ट ईयर में सेमेस्टर सिस्टम लागू किया जा रहा है। इसके तहत 6-6 महीने के दो सेमेस्टर पढ़ाए जाएंगे। तीन साल के यूजी पाठ्यक्रम के लिए 6 सेमेस्टर में पढ़ाई होगी। इसके लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से क्रेडिट स्कोर भी तय कर दिए गए हैं।<br /><br /><strong>स्किल डवलपमेंट कोर्स कराए जाएंगे</strong><br />वहीं नई एजुकेशन पॉलिसी में स्किल डवलपमेंट के लिए भी कोर्स होंगे। सेमेस्टर स्कीम के तहत यूजी में स्किल डवलपमेंट कोर्स कराए जाएंगे। इसके लिए कोर्स भी तय किए गए हैं। इनमें कम्प्यूटर साइंस, लाइफ सेविंग, फूड प्रोसेसिंग, आयुर्वेद,  नर्सरी डवलपमेंट सहित कई कोर्स तैयार किए हैं। इसके अलावा हॉस्पिटिलिटी, पर्यटन, मानव संसाधन प्रबंधन, एग्रीकल्चर, एयरोस्पेस एंड एविएशन, कम्यूनिकेशन, फैशन डिजाइनिंग जैसे क्षेत्र में इंटर्नशिप कराई जाएगी। जानकारों की मानें तो सेमेस्टर सिस्टम से छात्रों की परफॉर्मेंस सुधरेगी और व्यवहारिक ज्ञान में बढ़ेगा। इससे छात्रों को रोजगार में फायदा होगा।<br /><br /><strong>इस तरह होगा सेमेस्टर सिस्टम</strong><br />-यूजी फर्स्ट ईयर में होंगे दो सेमेस्टर।<br />-छात्र दो सेमेस्टर छोड़कर जाएगा तो छात्र को इंटर्नशिप करनी होगी, उसे सर्टिफिकेट दिया जाएगा।<br />-सैकंड ईयर या चार सेमेस्टर करने बाद छात्र छोड़ता है तो यूजी डिप्लोमा मिलेगा, साथ ही इंटर्नशिप करनी होगी।<br />-छात्र दोबारा खाली सीट पर प्रवेश पा सकेगा, उसका एडमिशन थर्ड सेमेस्टर में होगा।<br />-सेमेस्टर सिस्टम में यूजी में 6 सेमेस्टर क्लियर करने पर ही छात्र को डिग्री मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Jun 2023 12:40:08 +0530</pubDate>
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