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                <title>patna - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>सीएम सम्राट की मौजूदगी में अरविंद शर्मा ने बिहार विधान परिषद की सदस्यता के लिए भरा नामांकन, मंगल पांडेय ने विधान परिषद से दिया इस्तीफा</title>
                                    <description><![CDATA[बिहार भाजपा मुख्यालय प्रभारी सूर्य कुमार शर्मा ने विधान परिषद उपचुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल किया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और एनडीए के दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में हुए इस नामांकन के बाद उनकी जीत तय मानी जा रही है। उन्होंने नेतृत्व का आभार जताते हुए पार्टी के भरोसे पर खरा उतरने का संकल्प लिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/in-the-presence-of-cm-samrat-arvind-sharma-filed-nomination/article-152236"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/arvind-sharma.png" alt=""></a><br /><p>पटना। बिहार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मुख्यालय प्रभारी सूर्य कुमार शर्मा (अरविंद शर्मा) ने गुरुवार को बिहार विधान परिषद उपचुनाव 2026 के लिए अपना नामांकन पर्चा दाखिल किया। सूर्य कुमार शर्मा ने यह नामांकन वरिष्ठ भाजपा नेता मंगल पांडेय के विधान परिषद से इस्तीफे के बाद उनकी खाली हुई सीट के लिए भरा है। पाण्डेय बिहार विधानसभा चुनाव में सीवान सीट से विधायक चुने गए थे और उन्होंने विधान परिषद की सद्स्यता छोड़ दी थी। सदन में सत्तारूढ़ दल की ताकत को देखते हुए सूर्य कुमार शर्मा का चुना जाना प्रायः तय माना जा रहा है।<br />‎<br />सूर्य कुमार शर्मा के नामांकन के समय मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, बिजेन्द्र प्रसाद यादव, पूर्व मंत्री मंगल पांडेय, पूर्व मंत्री रामकृपाल यादव, संतोष कुमार सुमन, जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा, लोजपा (आर) प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी एवं राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के प्रदेश अध्यक्ष आलोक कुमार सिंह सहित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के वरिष्ठ नेता और विधायक उपस्थित थे।<br />‎<br />‎नामांकन भरने से पहले भाजपा के मुख्यालय प्रभारी सूर्य कुमार शर्मा (अरविंद शर्मा) ने प्रदेश कार्यालय में पंडित दीनदयाल उपाध्याय एवं कैलाशपति मिश्र की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। सूर्य कुमार शर्मा ने बिहार विधान परिषद उपचुनाव में राजग उम्मीदवार बनाए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं तथा राजग के सभी सहयोगी पार्टियों के राष्ट्रीय नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने उनके ऊपर जो भरोसा जताया है, उस पर वह खरे उतरने की कोशिश करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 16:29:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पीएम मोदी ने बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को दी बधाई : राज्य की प्रगति के लिए दीं शुभकामनाएं , कहा-प्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने में होंगे सफल</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को शपथ ग्रहण पर हार्दिक बधाई दी है। पीएम ने उनके जमीनी अनुभव और जनसेवा के प्रति समर्पण की सराहना की। उन्होंने विश्वास जताया कि सम्राट चौधरी के कुशल नेतृत्व में राज्य चौतरफा विकास करेगा और जनता की आकांक्षाओं को सफलतापूर्वक पूरा करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/pm-modi-congratulated-the-new-chief-minister-of-bihar-samrat/article-150516"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/modi-jii.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता सम्राट चौधरी को राज्य का मुख्यमंत्री बनने पर बधाई दी है और उम्मीद जताई है कि सम्राट चौधरी अपने अनुभव और जन सेवा के प्रति समर्पण के साथ प्रदेश को विकास की नयी ऊंचाइयों पर पहुंचाने में सफल होंगे। पीएम मोदी ने अपने बधाई और शुभकामना संदेश में कहा, "बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने पर सम्राट चौधरी जी को बहुत-बहुत बधाई और ढेरों शुभकामनाएं! उनकी ऊर्जा, जनसेवा के प्रति समर्पण और जमीनी अनुभव राज्य के लिए बेहद उपयोगी साबित होने वाला है।"</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा, "मुझे पूर्ण विश्वास है कि उनके कुशल नेतृत्व में जनता-जनार्दन की आकांक्षाओं को पूरा करते हुए बिहार चौतरफा विकास की नई ऊंचाइयों को छुएगा।" उल्लेखनीय है कि जनता दल (यूनाइटेड) के नेता नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद बुधवार को भाजपा के सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार में नये मंत्रिमंडल को पटना में शपथ दिलायी गयी। सम्राट चौधरी नीतीश सरकार में उप मुख्यमंत्री थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 15:28:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सम्राट चौधरी बने बिहार में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री : मदरसे से रहा है ताल्लुक, पढ़ें लालू के साथ शुरूआत से लेकर सीएम बनने तक का सफर</title>
                                    <description><![CDATA[सम्राट चौधरी ने बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर नया इतिहास रच दिया है। भाजपा को दशकों के इंतजार के बाद बिहार में अपना पहला मुख्यमंत्री मिला। मुंगेर के एक मदरसे से शिक्षा प्राप्त कर राजनीतिक शिखर तक पहुंचे सम्राट ने नीतीश कुमार की विरासत संभाली है, जिससे राज्य में सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/samrat-choudhary-becomes-the-first-chief-minister-of-bjp-in/article-150480"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/samratt-3.png" alt=""></a><br /><p>पटना। सम्राट चौधरी ने बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली है और इसके साथ ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी उंस महत्वाकांक्षा को हासिल कर लिया है, जिसका पीछा वह लंबे समय से कर रही थी। भाजपा ने 2023 में सम्राट चौधरी को पार्टी का बिहार प्रदेश अध्यक्ष बना कर जो राजनीतिक निवेश किया था, तीन साल बाद उसकी ब्याज के साथ वसूली हो गयी है। 46 साल पुरानी इस पार्टी को लंबे जद्दोजहद के बाद बिहार में उसका पहला मुख्यमंत्री मिल गया है।</p>
<p><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/shakuni-chaudhary.png" alt="Shakuni Chaudhary" width="1200" height="600"></img></p>
<p>सम्राट चौधरी का जन्म 16 नवंबर 1968 को मुंगेर जिले में तारापुर के लखनपुर गांव में हुआ था। सम्राट चौधरी का शुरुआती नाम राकेश चौधरी था, जिसे बाद में उन्होंने बदल कर सम्राट चौधरी कर दिया। पिता शकुनी चौधरी कुशवाहा समाज के बड़े चेहरे और प्रदेश के कद्दावर नेताओं में एक रहे हैं। शकुनी चौधरी पहली बार 1985 में तारापुर सीट से विधायक बने थे। यह वही साल था जब नीतीश कुमार भी पहली बार हरनौत से विधानसभा चुनाव जीते थे। शकुनी चौधरी इसके बाद सात बार विधायक और एक बार सांसद बने। 1998 में जब सम्राट चौधरी खगड़िय लोकसभा सीट से सांसद बने तब उनकी पारंपरिक तारापुर सीट से उनकी पत्नी और सम्राट चौधरी की माता पार्वती देवी विधायक बनी। सम्राट चौधरी एक छोटे से गांव से निकलकर एक मदरसे में पढ़कर मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचे हैं। सम्राट चौधरी लखनपुर की कच्ची गलियों में एक मकान की छत पर बने 'मदरसा इस्लामिया' में पढ़े हैं।</p>
<p><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/lalu-yadav1.png" alt="lalu yadav" width="1200" height="600"></img></p>
<p>सम्राट चौधरी की राजनीतिक शिक्षा अलग अलग हस्तियों के साथ हुई। 1990 में राजनीति में प्रवेश के बाद सन 2014 में राष्ट्रीय जनता दल छोड़ने से पहले उन्होंने काफी लंबा समय लालू प्रसाद के साथ गुजारा। लालू प्रसाद के साथ राजनीति की स्कूलिंग के बाद उन्होंने आगे के चार वर्ष नीतीश कुमार के साथ गुजरे और उसके बाद भाजपा की राजनीतिक भठ्ठी में तप कर कुंदन बन गए। नीतीश कुमार के जनता दल यूनाइटेड (जदयू) में आने के बाद 2014 में वह विधानपरिषद के सदस्य बने, जबकि अगले टर्म 2020 में उनको भाजपा ने विधानपरिषद में भेजा।</p>
<p><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/rabri-devi.png" alt="Rabri Devi" width="1200" height="600"></img></p>
<p>2020 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 74 और जदयू को सिर्फ 43 सीटें मिली। बावजूद इसके मुख्यमंत्री का पद नीतीश कुमार के पास ही रहा। राजनीतिक पंडितों ने कहा कि भाजपा के पास आक्रामक नेतृत्व की कमी है। फिर क्या था, भाजपा ने बिहार के अनुकूल जातीय समीकरण के साथ एक आक्रामक नेता की खोज शुरू की। इन्ही परिस्थितियों में जब जदयू और भाजपा के बीच मुख्यमंत्री पद की जद्दोजहद चल रही थी, 9 अगस्त 2022 को नीतीश कुमार ने फिर राजग से नाता तोड़ लिया और महागठबंधन में शामिल हो गए। यह वह स्थान था, जहां से भाजपा ने अपने लिए एक स्थाई मुख्यमंत्री के चेहरे की तलाश शुरू की। पार्टी ने 2021-22 में नीतीश मंत्रिमंडल में पंचायती राज मंत्री रहे और अगस्त 2022 से बिहार विधानपरिषद में विपक्ष ने नेता पद पर काबिज सम्राट चौधरी को 23 मार्च 2023 को संजय जायसवाल की जगह बिहार में पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया। इस परिवर्तन पर बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने तंज कसते हुए कहा था कि ‘भाजपा अब बनियों की पार्टी नही रही।‘</p>
<p><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/wife.png" alt="wife" width="1200" height="600"></img></p>
<p>दरअसल, इस परिवर्तन के साथ सम्राट चौधरी के रूप में भाजपा एक ऐसे शक्श को ले कर आई जो कुशवाहा बिरादरी के एक बड़े नेता शकुनी चौधरी का पुत्र था। शकुनी चौधरी कभी लालू प्रसाद के यादव मतों के खिलाफ खड़े हुए नीतीश के लव(कुर्मी) और कुश (कोइरी) समीकरण के ध्वजवाहक रहे थे। सम्राट चौधरी को ला कर भाजपा ने नीतीश कुमार के कोइरी-कुर्मी समीकरण में सेंध डालने के साथ उस छवि को भी उतरने का प्रयास किया, जिसमे उसको अगड़ों की पार्टी कहा जाता था।सम्राट चौधरी ने 2023 में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बनते ही अपने आक्रामक तेवर दिखाने शुरू कर दिये। उन्होंने सर पे मुरेठा बांध लिया और कहा कि अब यह मुरेठा बिहार में नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटा कर ही उतरेगा। यह अलग बात है कि अगले ही साल 2024 में जदयू-भाजपा पुनः साथ आ गए और चौधरी को नीतीश कैबिनेट में जगह के साथ उपमुख्यममंत्री का ओहदा भी मिल गया। चौधरी ने भी इसके बाद सरयू नदी में स्नान के दौरान अपना मुरेठा यह कह कर उतार दिया कि कसम महागठबंधन के मुख्यमंत्री को गद्दी से उतरने की खाई थी।</p>
<p><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/nitish.png" alt="nitish" width="1200" height="600"></img></p>
<p>2024 में पुनः जदयू-भाजपा गठजोड़ के बाद अगले साल अक्टूबर-नवंबर में बिहार विधानसभा चुनाव हुए। नीतीश कुमार के अस्वस्थ होने की खबरों के बीच उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को सरकार के प्रशासन में दखल देने के अवसर ज्यादा मिलने शुरू हुए। वह एक साये की तरह मुख्यमंत्री कुमार की सभाओं में भाग लेते रहे। 2025 विधानसभा चुनाव में राजग को 243 के सदन में 202 सीटों की प्रचंड जीत मिली। इस बार भी 2020 की तरह भाजपा को जदयू से ज्यादा सीटें मिली। भाजपा 89 सीटों के साथ सदन में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। 2014 से लगातार विधान परिषद का सदस्य रहे सम्राट चौधरी इस बार अपने पिता की विरासत तारापुर सीट से 2025 में चुनाव लड़े और प्रचंड बहुमत के साथ जीत कर विधानसभा में पहुंचे।</p>
<p><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/samrat-5.png" alt="Samrat-5" width="1200" height="600"></img></p>
<p>2025 के विधानसभा चुनाव के बाद नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बन तो गये, लेकिम अटकलें तेज हो गयीं कि भाजपा शीघ्र ही बिहार में शीर्ष पद हथिया लेगी। चुनाव से पहले ही भाजपा के फायर ब्रांड नेता केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने संकेत दिए थे कि सम्राट चौधरी बिहार के अगले मुख्यमंत्री बन सकते हैं। जनसुराज के नेता और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने भी भविष्यवाणी की थी कि राजग चुनाव जीत भी जाये तो अब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री नही रहेंगे।</p>
<p><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/samratt-1.png" alt="samratt-1" width="1200" height="600"></img></p>
<p>नवंबर 2025 में नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद नई कैबिनेट में सम्राट चौधरी को गृह मंत्रालय मिलना, उनके बढ़ते प्रभाव का एक और संकेत था। नीतीश कुमार ने अपने दो दशकों के मुख्यमंत्रित्व काल में पहली बार गृहमंत्रालय छोड़ा था। मार्च 2026 में अचानक इस बात की खबर आई कि नीतीश कुमार राज्यसभा जा रहे हैं। 15 मार्च को राज्यसभा चुनाव में नीतीश कुमार की जीत के बाद बिहार में नये मुख्यमंत्री के चेहरे की तलाश शुरू हुई। इस क्रम में मुख्यमंत्री पद के लिए भाजपा में नितिन नवीन, नित्यानंद राय, धर्मशीला गुप्ता, श्रेयसी सिंह, मंगल पांडेय, दिलीप जायसवाल सहित दर्जन भर नामों की चर्चा राजनीतिक गलियारों में चलती रही, लेकिन सम्राट चौधरी शुरू से पहले स्थान पर ट्रेंड करते रहे और आखिर में बिहार के चौबीसवें और भाजपा के पहले मुख्यमंत्री का ओहदा उनको मिल ही गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 12:42:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सम्राट चौधरी बने बिहार के 24वें मुख्यमंत्री : विजय चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव बने डिप्टी सीएम, राज्यपाल ने दिलाई पद एवं गोपनीयता की शपथ</title>
                                    <description><![CDATA[बिहार की राजनीति में नए युग का आगाज हो गया है। सम्राट चौधरी ने नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है, जबकि विजेंद्र यादव और विजय चौधरी उपमुख्यमंत्री बने हैं। राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। इस ऐतिहासिक समारोह में जेपी नड्डा और नितिन नबीन सहित कई दिग्गज नेता मौजूद रहे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/samrat-chaudhary-took-oath-as-the-new-cm-of-bihar/article-150452"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(12).png" alt=""></a><br /><p>पटना। बिहार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग )विधायक दल के नेता सम्राट चौधरी ने आज यहां राज्य के मुख्यमंत्री के पद और गोपनीयता की शपथ ली। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सेवानिवृत सैयद अता हसनैन ने लोक भवन में आयोजित एक सादे समारोह में सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री के पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके अलावा राज्यपाल ने जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव को राज्य के काबीना मंत्री पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस मौके पर बिहार के निवर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार,भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, सांसद विधायक और बड़ी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद थे।</p>
<p><span class="storydetails">भाजपा ने 2023 में सम्राट चौधरी को पार्टी का बिहार प्रदेश अध्यक्ष बना कर जो राजनीतिक निवेश किया था, तीन साल बाद उसकी ब्याज के साथ वसूली हो गयी है। 46 साल पुरानी इस पार्टी को लंबे जद्दोजहद के बाद बिहार में उसका पहला मुख्यमंत्री मिल गया है। बिहार में नीतीश कुमार जब 26 साल पहले महज सात दिनों के लिए मुख्यमंत्री बने थे, तब सम्राट चौधरी विरोधी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के टिकट पर परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से चुन कर आये थे। इस चुनाव में चौधरी के पिता और नीतीश कुमार की पुरानी समता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में एक शकुनी चौधरी भी विरोधी खेमे में थे। सन 2000 के चुनाव में नीतीश की पार्टी को सिर्फ 34 सीटें मिली थी, जबकि भाजपा ने 67 सीटें जीती थीं। बावजूद इसके प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपनी ही कैबिनेट में शामिल गठबंधन के एक घटक दल के नेता नीतीश कुमार को प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री के दावेदार के रूप में उतार दिया था। वाजपेयी की यह उदारता गठबंधन के सहयोगी दलों के प्रति उनकी उदारता के रूप में देखी गयी। इस प्रयोग में नीतीश भले सात दिन मुख्यमंत्री रहे, लेकिन बिहारवासियों को भविष्य के लिए मुख्यमंत्री का एक नया चेहरा मिल गया। बाद में नवंबर 2005 में नीतीश मुख्यमंत्री बने और 16 जून 2013 तक भाजपा के सहयोग से इस पद पर बने रहे।<br /></span></p>
<p><span class="storydetails">यह वही दौर था जब सम्राट चौधरी राजनीति के विद्यार्थी के रूप में विकसित हो रहे थे। सन 2000 में परबत्ता विधानसभा सीट से पहली बार राष्ट्रीय जनता दल से विधायक बनने के बाद 2005 का विधानसभा चुनाव वह हार गये थे और 2010 में वापसी करते हुए एक बार फिर परबत्ता सीट से जीत कर विधानसभा में पहुंचे। 2014 में श्री चौधरी ने राजद के साथ अपनी लंबी राजनीतिक पारी का पटाक्षेप किया और नीतीश कुमार की जदयू का हिस्सा बन गए। उन्हें उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी की कैबिनेट में नगर विकास और आवास मंत्री का पद हासिल हुआ। इससे पहले 1999 में श्री चौधरी राबड़ी देवी के मंत्रिमंडल में भी शामिल हुए थे, लेकिन वह चांदनी थोड़े समय की थी।<br /></span></p>
<p><span class="storydetails">सम्राट चौधरी जब जदयू में आये, बिहार की राजनीति प्रयोग के दौर से गुजर रही थी। सन 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री का चेहरा घोषित किया तो नीतीश इसके विरोध में 2013 में ही गठबंधन से बाहर निकल गए थे। 2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने और यहीं से भाजपा ने बिहार में अपने लिए मुख्यमंत्री पद का चेहरा तलाशना शुरू क़िया। इस क्रम में भाजपा ने पुराने चावल सुशील मोदी पर दांव लगाया, लेकिन नीतीश कुमार के पुनः राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन(राजग) में लौट आने के बाद बिहार मंत्रिमंडल में उनकी हैसियत नंबर दो पर स्थिर हो गयी। जिस भाजपा ने सन 2000 से 2013 तक चट्टान बन कर नीतीश का साथ दिया था, वही अब लगातार ऐसे विकल्प ढूंढ रही थी, जो बिहार में उनके मुख्यमंत्री पद का चेहरा हो और श्री कुमार को गद्दी से उतारने के लिए जनाधार बनाये। इन्ही परिस्थितियों में सम्राट चौधरी ने 2018 में जदयू का दमन छोड़ा और भाजपा का केसरिया अपने कंधे पर ओढ़ लिया। उसी वर्ष भाजपा ने बिहार में उनको पार्टी का प्रदेश उपाध्यक्ष बना दिया।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 11:06:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा, नीतीश कुमार की ''समृद्धि यात्रा'' को लेकर जनता में जोरदार उत्साह</title>
                                    <description><![CDATA[जदयू अध्यक्ष ने कहा कि 16 जनवरी से शुरू समृद्धि यात्रा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विकास योजनाओं की समीक्षा करेंगे, जनता से संवाद कर परियोजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/umesh-singh-kushwaha-said-that-there-is-strong-enthusiasm-among/article-139299"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/umesh-singh-kushwah.png" alt=""></a><br /><p>पटना। बिहार जनता दल यूनाईटेड (जदयू) के अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने सोमवार को कहा कि आगामी 16 जनवरी से प्रारंभ हो रही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ''समृद्धि यात्रा'' को लेकर प्रदेश की जनता में खासा उत्साह है। कुशवाहा ने सोमवार को बयान जारी कर कहा कि समृद्धि यात्रा के तहत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पूरे बिहार का दौरा कर प्रगति यात्रा, सात निश्चय सहित अन्य विकास योजनाओं की जमीनी स्थिति की समीक्षा करेंगे तथा जनता से सीधे संवाद करेंगे।</p>
<p>इसके आगे उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि जनता के बीच जाकर संवाद करना, उनकी समस्याओं को जानना और उनका समयबद्ध एवं प्रभावी निराकरण करना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कार्यशैली का अभिन्न हिस्सा रहा है। यही उनकी अनूठी शैली उन्हें देश के अन्य नेताओं से अलग पहचान दिलाती है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2005 में नीतीश कुमार ने पहली बार 'न्याय यात्रा' के माध्यम से जनता के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं को नजदीक से समझा था। वर्ष 2005 से 2026 के अंतराल में नीतीश कुमार अब तक 15 राज्यव्यापी यात्राएँ कर चुके हैं और 16 जनवरी से अपनी 16वीं यात्रा की शुरुआत करने जा रहे हैं। जनसेवा के क्षेत्र में यह एक ऐसा अनूठा कीर्तिमान है, जो देश के किसी अन्य मुख्यमंत्री के नाम दर्ज नहीं हो पाया है।</p>
<p>जदयू प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि प्रगति यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लगभग 50 हजार करोड़ रुपये की लागत से करीब 430 नई विकास परियोजनाओं की शुरुआत की थी, जिनमें से 21 योजनाएँ पूर्ण हो चुकी हैं, जबकि शेष योजनाओं पर तेज गति से कार्य प्रगति पर है। उन्होंने कहा कि जनसेवा ही सीएम नीतीश कुमार की राजनीति का केंद्र बिंदु रहा है। इसी कारण वे सीधे जनता से संवाद स्थापित करते हैं, जिससे आम लोगों की मूलभूत समस्याओं और आवश्यकताओं को गहराई से समझा जा सके और उनके समाधान की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकें।</p>
<p>उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि ''समृद्धि यात्रा'' के क्रम में सीएम नीतीश कुमार के द्वारा विभिन्न विकास योजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास भी किया जाएगा। उन्होने कहा कि यह यात्रा बिहार की विकास यात्रा को नया आयाम देगी और विकसित बिहार के निर्माण की मजबूत नींव साबित होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Jan 2026 14:14:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>बिहार में 10 दिनों में 50 से अधिक हत्याएं: आरजेडी ने सम्राट चौधरी पर बोला हमला, कहा-फेल है सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[राजद प्रवक्ता अरुण यादव ने आरोप लगाया है कि सम्राट चौधरी के गृह मंत्री बनने के बाद बिहार में अपराध बेलगाम है। पिछले 10 दिनों में 50 से अधिक हत्याएं हुई हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/more-than-50-murders-in-bihar-in-10-days-rjd/article-138392"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/bihar-crime.png" alt=""></a><br /><p>पटना। राजद के प्रदेश प्रवक्ता अरुण कुमार यादव ने राज्य भर में अपराध की गति में तेज वृद्धि का आरोप लगाया है, इस दावे के साथ कि आपराधिक घटनाओं को रोकने में एनडीए सरकार पूरी तरह विफल है। सम्राट चौधरी के गृह मंत्री बनने के बाद 21 नवंबर से लेकर 30 नवंबर तक यानी कि 10 दिनों के अंदर बिहार में मात्र हत्या की 50 से अधिक घटनाएं हुई हैं।</p>
<p><strong>हत्या के अलावा भी कई आपराधिक घटनाएं: </strong></p>
<p>चोरी, डकैती, दुष्कर्म आदि घटनाएं इसके अतिरिक्त हैं। इससे राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति का सहज आकलन किया जा सकता है। नवादा में फेरी लगाने वाले अतहर हुसैन की हत्या क्रुद्ध भीड़ ने कर दी। मधुबनी जिला में सुपौल निवासी नूरशेद आलम को अधमरा कर दिया। पटना के बाढ़ थानान्तर्गत जलगोविंद गांव में शनिवार रात घर में घुसकर अपराधियों ने एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी।</p>
<p><strong>तेजस्वी के लौटने की सुगबुगाहट से रिचार्ज हुए कार्यकर्ता: </strong></p>
<p>तेजस्वी यादव के बिहार आने की सुगबुहाहट के बीच राजद के नेता-कार्यकर्ता एक बार फिर पूरे जोश में हैं। अलग-अलग मुद्दों पर सरकार को घेर रहे हैं। इसी क्रम में उत्तराखंड के मंत्री पति के बयान के विरोध में राजद की महिला कार्यकर्ताओं ने एक दिन पहले पटना में जोरदार प्रदर्शन किया। </p>
<p>मामले में तेजस्वी यादव ने भी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर मंत्री पति के बयान का वीडियो शेयर करते हुए हमला बोला। बताया जाता है कि तेजस्वी यादव पांच या छह को देश लौट सकते हैं। कार्यकर्ताओं के साथ उनकी बैठक भी होने वाली है। पिता लालू प्रसाद से भी उनकी मुलाकात होनी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Jan 2026 11:59:45 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अटल जयंती 2025: सीएम नीतीश और पुष्कर सिंह धामी ने दी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर उन्हें नमन किया। पटना के पाटलिपुत्र पार्क में राजकीय समारोह आयोजित हुआ, जहाँ गणमान्य लोगों ने पुष्पांजलि अर्पित की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/cm-nitish-and-pushkar-singh-dhami-paid-emotional-tribute-to/article-137154"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/atal-bihari-vajpayee-jayanti-2025.png" alt=""></a><br /><p>पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरूवार को पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिवस पर आयोजित राजकीय जयंती समारोह में यहां पाटलिपुत्रा पार्क, स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।</p>
<p>इस अवसर पर दोनों उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा, ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, विधायक संजीव चौरसिया, रत्नेश कुशवाहा, बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. उदय कांत मिश्रा, बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष नन्द किशोर यादव, बिहार राज्य नागरिक परिषद् के महासचिव अरविंद कुमार, बिहार बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य शिवशंकर निषाद सहित कई गणमान्य व्यक्तियों, सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने भी स्व. अटल बिहारी वाजपेयी  की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग के कलाकारों द्वारा आरती-पूजन, बिहार गीत एवं देश भक्ति गीतों का गायन भी किया गया।</p>
<p>इसके साथ ही बता दें कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी गुरुवार को पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न स्व अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर अपने शिविर कार्यालय में उनके चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए नमन किया। सीएम धामी ने कहा कि वाजपेयी जी कुशल प्रशासक, ओजस्वी वक्ता तथा दूरदृष्टा नेता थे, जिन्होंने राष्ट्र निर्माण को नई दिशा प्रदान की। उनका संपूर्ण जीवन सुशासन, संवेदनशीलता एवं सर्वसमावेशी विकास के प्रति समर्पित रहा। उन्होंने राजनीति को जनसेवा का माध्यम बनाकर लोकहित को सबसे उपर रखा। इसके आगे उन्होंने कहा कि वाजपेयी जी के विचार आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Dec 2025 16:24:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बिहार के सीएम नीतीश कुमार: दो दशक में दसवीं बार शपथ, पढ़ेें 'सुशासन बाबू' का छात्र आंदोलन से लेकर 10वीं बार बिहार सीएम बनने तक का पूरा सफर</title>
                                    <description><![CDATA[नीतीश कुमार ने गुरुवार को दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर भारतीय राजनीति में नया कीर्तिमान बनाया। उम्र, स्वास्थ्य और लोकप्रियता को लेकर उठे सवालों के बावजूद जनता ने उन्हें ऐतिहासिक समर्थन दिया। महिला मतदाताओं, सुशासन की छवि और भाजपा–जदयू की मजबूत जुगलबंदी ने उनकी जीत को निर्णायक बनाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/bihar-cm-nitish-kumar-takes-oath-for-the-tenth-time/article-133065"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/11-(1200-x-600-px)-(2)5.png" alt=""></a><br /><p>पटना। श्री नीतीश कुमार ने लोकतंत्र की जननी कहीं जाने वाली भूमि बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में गुरुवार को लगभग दो दशक में दसवीं बार शपथ लेकर देश की राजनीति में एक नया कीर्तिमान बनाया है। ढ़लती उम्र, थकान और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के साथ-साथ लंबे समय तक शासन में रहने से लोकप्रियता में कमी की अटकलों को दरकिनार करते हुए हाल में संपन्न विधानसभा चुनाव में श्री कुमार ने राज्य की राजनीति में अपने निरंतर प्रभाव और जनता के भरोसे की एक बार फिर पुष्टि की।</p>
<p>लगभग दो दशकों तक सत्ता में रहने के बाद इस चुनाव में वह अपनी सबसे कठिन राजनीतिक परीक्षा का सामना कर रहे थे। जातीय खानाजंगी और राजनीति के अपराधीकरण के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाले बिहार प्रांत में'सुशासन बाबू'के रूप में पहचान बनाने वाले और बिहार में अपनी स्वच्छ एवं ईमानदार छवि के कारण वह गठबंधन की राजनीति में एक मुख्य धुरी बने हुए हैं।</p>
<p>हाल के समय में, मीडिया से नीतीश से दूरी, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा अचेत मुख्यमंत्री कहे जाने और प्रशासन पर नौकरशाही के हावी होने के आरोपों के बावजूद बिहार के मतदाताओं ने उनके नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को इस बार एक ऐतिहासिक जनादेश दिया है। </p>
<p><strong>बिहार में जनादेश की बहार में नीतीश कुमार पर जनता ने एक बार फिर ऐतबार जताया</strong></p>
<p>छह महीने पहले तक जहां नीतीश कुमार की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे थे और विपक्षी दल महागठबंधन मजबूत दिख रहा था, चुनाव नतीजों ने उनके खिलाफ तमाम अटकलें को हवा-हवाई साबित कर दिया। नीतीश कुमार ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह अब भी बिहार के राजनीतिक रंगमंच के सबसे दमदार और सरदार अदाकार हैं। राजग की इस बार की जीत सिर्फ सरकार बनाने के लिए नहीं, बल्कि बिहार की जनता की निरंतरता और स्थिरता की चाहत का प्रमाण है। जनता ने फिर से कहा है ,बिहार में बहार है, नीतीश कुमार हैं...</p>
<p><strong>नीतीश कहते रहे कि'सब हम लोग कितना काम किए जी...</strong></p>
<p>श्री नीतीश कुमार का लगातार पांचवां विधानसभा चुनाव जीतना और 10वीं बार मुख्यमंत्री बनना, भारतीय राजनीति में एक दुर्लभ उपलब्धि है, खासकर  हिंदी भाषी राज्यों में, जहां भारतीय लोकतंत्र में बदलाव की उम्मीद की जाती है, वहीं बिहार ने बार-बार दोहराये जाने वाले चेहरे पर अपना विश्वास दिखाया है। इस बार राजग में भाजपा और जदयू ने बराबर-बराबर 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ा और राजग ने उन्हें फिर से मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में आगे रख कर चुनाव लड़ा। </p>
<p>इस चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और श्री नीतीश कुमार की छवि का फायदा मिला। राजग ने 2010 के 200 से अधिक सीटों को जीतने के प्रदर्शन को दोहराया। कभी बिहार में भाजपा के बड़े भाई की भूमिका में रहे जदयू को इस बार छोटे भाई की भूमिका में देखा जा रहा था। चुनाव से पहले यह व्यापक रूप से माना जा रहा था कि श्री मोदी की स्थायी लोकप्रियता और भाजपा का राष्ट्रीय प्रभुत्व ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सबसे बड़ी ताकत होगी, जो श्री नीतीश कुमार की घटती लोकप्रियता की भरपाई कर सकती है। इस बार चुनाव परिणाम ने भाजपा-जदयू को बराबर का सहभागी साबित किया है। </p>
<p>इस चुनाव में श्री नीतीश कुमार ने महिला मतदाताओं के बीच एक मजबूत सछ्वावना अर्जित की है। बिहार की 'दीदियों' ने मजबूती से उनका हाथ थामे रखा। यह बात लंबे समय से मानी जाती रही है कि बिहार की महिलाएं 2005 से चली आ रही श्री नीतीश कुमार नेतृत्व वाली राजग सरकार की महिला-केंद्रित योजनाओं की वजह से उनसे खूब जुड़ी हुई हैं, लेकिन इस बार गेम-चेंजर बना चुनावी सीजन के दौरान 1.4 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को दिया गया, 10 हजार रुपये का नकद भुगतान। 'दस-हजारिया लाभार्थी और जीविका दीदियां राजग की बड़ी जीत का असली इंजन बन गयीं। </p>
<p>सरकारी योजनाओं से लाभ पाने वाली महिलाएं बड़ी संख्या में हैं और वे हर जाति, समुदाय और वर्ग से आती हैं। इस बार 71.6 प्रतिशत महिलाओं ने वोट डाला, जो पुरुषों (62.8 प्रतिशत) से करीब नौ प्रतिशत ज्यादा है। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना जैसी कल्याणकारी पहलों के माध्यम से महिला मतदाताओं ने उनके नेतृत्व के लिए एक स्थिर बल के रूप में काम किया है, जिससे उन्हें अन्य वर्गों के झटकों से बचाव मिला है। वर्ष 2020 के विपरीत, जहां जदयू के कैडर में भ्रम दिखा था, इस बार पार्टी की संगठनात्मक शक्ति अधिक प्रभावी ढंग से सक्रिय हुई। </p>
<p>ग्रामीण नेताओं और स्थानीय प्रभावशाली लोगों पर आधारित उसके पारंपरिक कैडर ढांचे ने निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर भाजपा के साथ बेहतर समन्वय के साथ काम किया। नेतीजों ने श्री नीतीश कुमार की उस क्षमता को भी दिखाया, जिसमें वे गठबंधन को अपना वोट ट्रांसफर कर सकते हैं। चाहे वह किसी भी गठबंधन में हों। उनके कई उलटफेरों के बावजूद, उनके निर्वाचन क्षेत्रों से संदेश साफ था, आप जहां जाएंगे, हम भी वहीं जाएंगे। विरोधियों की ओर से उनके स्वास्थ्य और शासन क्षमता पर लगातार हमलों ने उनके समर्थकों को पहले से कहीं ज्यादा मतदान केंद्रों तक पहुंचाया। 'सुशासन बाबू होने के अलावा, नीतीश' मिस्टर क्लीन भी हैं। उनके मंत्रियों पर आरोप लगते हैं, लेकिन किसी ने भी नीतीश पर भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगाया है। </p>
<p><strong>'टाइगर अभी जिंदा हैं' का नारा</strong></p>
<p>इस चुनाव में श्री नीतीश कुमार के लिए,'टाइगर अभी जिंदा हैं' का नारा सिर्फ एक राजनीतिक उद्घोष नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक वजूद और विश्वसनीयता का प्रमाण भी साबित हुआ। बिहार में पटना जिले के बख्तिायारपुर में एक मार्च 1951 को एक साधारण परिवार में जन्मे नीतीश कुमार के पिता दिवंगत कविराज राम लखन सिंह स्वतंत्रता सेनानी और वैद्य थे। श्री कुमार बिहार इंजीनियरिंग कॉलेज पटना में पढ़ायी के दौरान ही लोक नायक जयप्रकाश नारायण से प्रभावित होकर वर्ष 1974 के छात्र आंदोलन में कूद पड़े थे। श्री कुमार पहली बार सियासत में 1977 में उतरे, जब पूरे देश में कांग्रेस के खिलाफ माहौल बन चुका था। इस दौर में जनता पार्टी मजबूती से उभरी और लगभग पूरे देश में वर्चस्व बनाया। श्री नीतीश कुमार हालांकि चुनावी राजनीति में बेहतर शुरुआत नहीं कर पाये। वर्ष 1977 का चुनाव हुआ तब वह जनता पार्टी के टिकट पर नालंदा जिले के हरनौत विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा । इसके बाद 1980 के विधानसभा चुनाव में भी उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा, तब उनके परिवार वालों ने उन पर राजनीति छोड़कर नौकरी के लिए दबाव बनाना शुरु कर दिया, लेकिन श्री कुमार नहीं माने और राजनीति में डटे रहे।</p>
<p>इसके बाद श्री कुमार को पहली बार 1985 के विधानसभा चुनाव में हरनौत सीट से ही सफलता मिली और उसके बाद 1989 के लोकसभा चुनाव में वह बाढ़ संसदीय क्षेत्र से चुनकर लोकसभा पहुंचे। श्री कुमार 1990 में विश्वनाथ प्रताप सिंह सरकार में केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री बने। वर्ष 1991 के मध्यावधि चुनाव में वह फिर से लोकसभा के सदस्य चुने गये।</p>
<p>यही वह दौर था, जब इंजीनियर से नेता बने श्री नीतीश कुमार उभार पर आये। कभी पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के 'छोटे भाई' के  तौर पर उनके विश्वासपात्र माने जाने वाले श्री नीतीश कुमार ने धीरे-धीरे पिछड़ी जातियों, खासकर कुर्मी-कुशवाहा समाज को अपनी तरफ खींचना शुरू कर दिया। इसके अलावा उन्होंने अति-पिछड़ा समाज (ईबीसी) के बीच भी पैठ बनायी। इस जातीय समीकरण को बिठाकर उन्होंने लालू यादव के समर्थन में खड़े यादव समुदाय की एकजुटता की काट खोजी। </p>
<p>श्री लालू प्रसाद यादव से राजनीतिक मतभेद के कारण वर्ष 1994 में जनता दल से अलग होकर श्री कुमार ने जार्ज फर्नांडीस के नेतृत्व में समता पार्टी बनाकर 1995 का विधानसभा चुनाव लड़ा तब उनकी पार्टी मात्र सात सीट पर ही जीत हासिल कर सकी। श्री कुमार ने इस हार से सबक लेते हुए लालू विरोधी मतों के विभाजन को रोकने के इरादे से वर्ष 1996 में भाजपा के साथ गठजोड़ कर लिया। उनका यह फार्मूला कामयाब रहा और उसका फायदा उन्हें आज तक मिल रहा है।</p>
<p>श्री कुमार वर्ष 1996 ,1998 और 1999 के लोकसभा चुनाव में विजयी हुए। श्री कुमार ने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वर्ष 1998 में रेल मंत्री और भूतल परिवहन मंत्री का कार्य भार संभाला। 1999 में फिर बनी वाजपेयी सरकार में वह भूतल परिवहन और कृषि मंत्री बनाये गये। वर्ष 2000 के विधानसभा चुनाव में त्रिशंकु विधानसभा में उन्होंने राजग विधायक दल के नेता के रूप में मुख्यमंत्री पद की पहली बार शपथ ली, लेकिन बहुमत नहीं जुटा पाने के कारण विधानसभा में शक्ति परीक्षण से पहले ही सात दिनों के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। </p>
<p>श्री कुमार के लिए यह बड़ा राजनीतिक झटका था।उसके बाद वह फिर से केन्द्र की राजनीति में लौट गये और वर्ष 2000 से लेकर 2004 तक वाजपेयी सरकार में मंत्री और रेल मंत्री रहे। 2004 के लोकसभा चुनाव में श्री कुमार ने दो सीटों से चुनाव लड़ा जिसमें वह बाढ़ से चुनाव हार गये लेकिन नालंदा सीट से विजयी हुए। उस साल केन्द्र में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की सरकार बनने के बाद श्री कुमार ने अपने आप को पूरी तरह बिहार की राजनीति पर केन्द्रित कर लिया। </p>
<p>फरवरी 2005 में जब विधानसभा का चुनाव हुआ तब किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला और कोई भी दल सरकार बनाने में सफल नहीं रहा। नवम्बर 2005 में दुबारा हुए चुनाव में श्री कुमार के नेतृत्व वाले राजग को स्पष्ट बहुमत मिल गया और वह दूसरी बार मुख्यमंत्री बने। सीएम के रूप में विकास पुरुष की छवि बना चुके श्री कुमार के नेतृत्व में जब राजग ने 2010 का विधानसभा चुनाव लड़ा तो उसे दो-तिहाई बहुमत हासिल हुआ। श्री कुमार ने तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की जिम्मेवारी संभाली। उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए श्री नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री के उम्मीदवार के तौर पर पेश किये जाने की कोशिशों के विरोध में भाजपा से 17 साल पुराना अपना नाता तोड़कर एक बड़ा राजनीतिक जोखिम उठाया। </p>
<p>भाजपा से नाता टूटने के बाद अल्पमत में आयी अपनी सरकार को उन्होंने निर्दलीय और अन्य दलों के बाहर से समर्थन के बल पर किसी तरह से बचा कर रखा। इसके बाद जब वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव हुआ तो श्री कुमार की पार्टी जदयू को करारी हार का सामना करना पड़ा। इस हार की नैतिक जिम्मेवारी लेते हुए उन्होंने 17 मई 2014 को मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया और अपने भरोसेमंद नेता जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनवा दिया, लेकिन छह माह के अंदर ही श्री कुमार को लगने लगा कि उन्होंने श्री मांझी को मुख्यमंत्री बनाकर एक बड़ी राजनीतिक भूल कर दी। करीब 15 दिनों के राजनीतिक ड्रामे के बाद श्री मांझी ने इस्तीफा दिया और 22 फरवरी 2015 को श्री कुमार ने चौथी बार मुख्यमंत्री का पद संभाला।</p>
<p>बिहार में 2015 का विधानभा चुनाव कई मायनों में थोड़ा अलग और दिलचस्प था। वर्षों के सहयोगी भाजपा और जदयू इस बार फिर जुदा हो गये थे और 20 साल बाद दो पुराने दोस्त लालू प्रसाद यादव और श्री नीतीश कुमार साथ आ गये थे। श्री लालू प्रसाद और श्री नीतीश कुमार के इस महागठबंधन में कांग्रेस भी शामिल थी। वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव चुनाव के नतीजे आने पर राष्ट्रीय जनता दल ( राजद) 80 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। </p>
<p>इसके बाद जदयू को 71 और कांग्रेस को 27 सीटें मिली थीं। इस चुनाव में महागठबंधन की सरकार बनी और श्री नीतीश कुमार पांचवी बार मुख्यमंत्री बने। इस बार श्री कुमार की सरकार करीब 20 महीने ही चल पाई। दरअसल सरकार के कार्यों में राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव का बढ़ते हस्तक्षेप की वजह से पहले से ही असहज महसूस कर रहे श्री कुमार को राजद से नाता तोडऩे का तब बहाना मिल गया जब लालू परिवार के खिलाफ मंत्री पद और सरकारी नौकरी के बदले जमीन-फ्लैट लिखवाने का मामला भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने उजागर किया तथा रेलवे टेंडर घोटाला की जांच शुरू हुई। </p>
<p>इस पर श्री कुमार ने उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव से जनता के समक्ष स्थिति स्पष्ट करने को कहा, लेकिन जब उन्होंने ऐसा नहीं किया तो श्री कुमार ने 26 जुलाई 2017 को महागठबंधन से नाता तोड़ते हुए मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा भी दे दिया। इसके बाद तुरंत भाजपा ने श्री कुमार को समर्थन देने की घोषणा कर दी और 24 घंटे के अंदर ही श्री कुमार ने छठी बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही फिर से बिहार में राजग सरकार की वापसी हो गयी।</p>
<p>वर्ष 2020 में एक बार फिर श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राजग की सरकार बनी। श्री नीतीश सातवीं बार मुख्यमंत्री बने। अगस्त 2022 में हालांकि घटनाक्रम तेजी से बदले और श्री नीतीश कुमार ने राजग से अलग होने का फैसला कर लिया। श्री कुमार एक बार फिर महागठबंधन में शामिल हो गये और उनके नेतृत्व में नयी सरकार बनी। श्री कुमार आठवीं बार मुख्ममंत्री बने। श्री नीतीश कुमार महागठबंधन में गये लेकिन 17 माह में ही असहज महसूस करने लगे। जनवरी 2024 के आते-आते स्थितियां फिर से बदलने लगीं और नीतीश फिर से राजग में वापस लौट आये। श्री कुमार नवीं बार मुख्यमंत्री बने।</p>
<p>चौहत्तर साल के श्री नीतीश कुमार अपनी राजनीति का उफान देख चुके हैं। मुख्यमंत्री पद की दसवीं बार जिम्मेवारी संभालने जा रहे श्री कुमार ने अपने संघर्षपूर्ण जीवन में अब तक अपनी शर्तों पर ही राजनीति की है।   </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Nov 2025 15:00:33 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>राहुल गांधी की 1300 किमी वोटर अधिकार यात्रा का पटना में समापन : 16 दिन में 110 विधानसभा क्षेत्रों से गुजरी, गांधी मैदान में लाखों की भीड़ जुटने की तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस ने कहा है कि पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की 1300 किमी लंबी वोटर अधिकार यात्रा को जो सम्मान मिला है, वह बिहार में आंदोलन की गौरवशाली इतिहास में मील का पत्थर बनी है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rahul-gandhis-1300-km-voter-adhikar-yatra-ends-in-patna/article-125292"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/kashish-21.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की 1300 किमी लंबी वोटर अधिकार यात्रा को जो सम्मान मिला है, वह बिहार में आंदोलन की गौरवशाली इतिहास में मील का पत्थर बनी है और अब गरिमा और प्रतिष्ठा के साथ राज्य की राजधानी पटना में इसका समापन भी किया जा रहा है।</p>
<p>कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया एक्स पर शनिवार को एक पोस्ट में कहा कि 16 दिन तक चली इस यात्रा का सोमवार को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में भव्य समापन हो रहा है। सासाराम से 17 अगस्त को शुरु हुई इस यात्रा को बिहार के 110 विधानसभा क्षेत्रो से गुजरते हुए जो सम्मान और प्रतिष्ठा मिली उसी के अनुरूप इसका भव्य समापन भी किया जा रहा है।</p>
<p>वेणुगोपाल ने कहा कि "बिहार की जनता ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और पूरे महा गठबंधन की यह यात्रा थी, जिसने मतदाताओं को मिले अधिकार की रक्षा की लड़ाई में ऐतिहासिक कठिनाइयाँ देखी हैं, लेकिन आम जनता को मिली एक मात्र शक्ति - मतदान का अधिकार जिसके छिने जाने का अकल्पनीय खतरा था, उसकी रक्षा की। उनके मन में जो डर था, उसे हटाने की ज़रूरत थी और यह यात्रा मतदाता पुनरीक्षण सूची के नाम पर लोकतंत्र बचाने के लिए आशा की किरण बनकर आई।”</p>
<p>उन्होंने कहा कि इस यात्रा ने 25 ज़िलों के 110 से ज़्यादा विधानसभा क्षेत्रों को कवर करते हुए 1300 किमी का सफर तय कर बिहार के जनांदोलनों के समृद्ध इतिहास में एक मील का पत्थर बनकर उभरी है।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि “देश भर के सम्मानित नेता, जो हमारे उद्देश्य में विश्वास रखते थे, इसमें शामिल हुए और इसे और मज़बूती दी-जिनमें तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के साथ ही आज अखिलेश जी और पिछले हफ़्ते प्रियंका गांधी जैसे अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए। इसका समापन पटना में गांधी मैदान से डॉ. भीम राव अंबेडकर प्रतिमा, अंबेडकर पार्क तक एक विशाल यात्रा के साथ होगा - जो लाखों लोगों को प्रभावित करने वाला भव्य आयोजन होगा और यह इस यात्रा का एक गरिमापूर्ण समापन होगा।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sat, 30 Aug 2025 17:03:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>हार के डर से चुनावी क्षेत्र बदलने की फिराक में हैं भाजपा के कई नेता : जदयू</title>
                                    <description><![CDATA[ मठाधीश मानने वाले कुछ नेताओं के कारण भाजपा दल से दलदल में तब्दील हो  चुकी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/due-to-fear-of-defeat-many-leaders-of-bjp-and/article-60902"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/anas-mosque(10).png" alt=""></a><br /><p>पटना। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा और कहा कि अगले लोकसभा चुनाव में हार के डर से भाजपा के कई नेता चुनावी क्षेत्र बदलने की फिराक में हैं।</p>
<p>जदयू के राष्ट्रीय महासचिव राजीव रंजन ने सोमवार को यहां भाजपा पर चुटकी लेते हुए कहा कि लगातार मजबूत होती विपक्षी एकता और केंद्र सरकार के खिलाफ  बढ़ते जनाक्रोश से भाजपा के दिग्गज अंदर से हिल गये हैं। लोगों का कहना है  कि भाजपा के कई नेता चुनाव से पहले ही हार मान चुके हैं इसीलिए वह अभी से  ही अपना चुनावी क्षेत्र बदलने की फिराक में लग गये हैं। जनता के गुस्से को  भांपते हुए उन्हें डर है कि पुरानी सीट पर लडऩे से कहीं उनकी जमानत तक जब्त  न हो जाए।</p>
<p>रंजन ने कहा कि भाजपा के नेताओं को जनाक्रोश के  अलावा अपनी खुद की पार्टी के नेताओं से भी खतरा महसूस हो रहा है। दरअसल खुद  को पूरी पार्टी अनेक खेमों में बंटी हुई है। संगठन के भीतर हर बड़े  नेता ने अपना एक अलग संगठन बनाया हुआ है, जो दूसरे नेता का पत्ता काटने में  लगा रहता है। भाजपा नेताओं को डर है कि उनकी पार्टी के प्रतिद्वंद्वी भी  उनकी हार का एक बड़ा कारण बन सकते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Oct 2023 20:03:03 +0530</pubDate>
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                <title>पटना, लेह और फिरोजाबाद में क्रांतितीर्थ समारोह का आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[ बिहार में लगभग 40 दिनों तक चले इस 'क्रांतितीर्थ' कार्यक्रम में चित्रकला, गायन, भाषण, काव्य पाठ वर्ग में 34 जिलों के 471 विद्यालयों और 22 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने बिहार की प्रमुख पांच लोकभाषाओं में सहभागिता की। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/krantitirtha-celebrations-organized-in-patna-leh-and-firozabad/article-53899"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/13.png" alt=""></a><br /><p>पटना/फिरोजाबाद/लेह। स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम एवं अल्पज्ञात सेनानियों की वीरगाथा को आम जनता के सामने लाने और उन्हें श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य से देश भर में आयोजित किए जा रहे क्रान्तितीर्थ समारोह की कड़ी में रविवार को बिहार की राजधानी पटना, केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख की राजधानी लेह और उत्तर प्रदेश स्थित बलिदानों की नगरी फिरोजाबाद में क्रांतितीर्थ समारोह का आयोजन किया गया।<br /> <br />बिहार की राजधानी पटना स्थित चंद्रगुप्त प्रबंध संस्थान में आयोजित राज्य स्तरीय क्रांतितीर्थ कार्यक्रम के समापन समारोह का उद्घाटन पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद ने किया। अपने उद्बोधन में पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद ने बिहार के क्रांतिकारियों के योगदान को नमन करते हुए उनकी भूमिका के महत्व को सामने रखा। कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर अध्ययन केंद्र के निदेशक आशुतोष भटनागर ने अनाम क्रांतिकारियों को नमन करते हुए उनकी भूमिका को देश की युवा शक्ति के सामने प्रस्तुत किया। उन्होंने भारत के सम्पूर्ण स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों द्वारा स्वाधीनता के संघर्षकाल के बारे में बताया। उन्होंने भारत के आध्यात्मिक गुरुओं द्वारा स्वतंत्रता सेनानियों के सहयोग से स्वाधीनता की लड़ाई में उनके योगदान की जानकारी देते हुए कहा कि जहां-जहां क्रांतिकारियों ने जन्म लिया, आज उसे क्रांतितीर्थ के तौर पर विकसित करने की आश्यकता है।<br /> <br />कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं चंद्रगुप्त प्रबंध संस्थान के निदेशक राणा सिंह ने स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख केंद्र बिहार की भूमिका के बारे में बताया, जबकि वरिष्ठ कलाकार एवं पद्मश्री श्याम शर्मा ने भारत की अस्मिता को बचाने के लिए अपना बलिदान देने वाले अनाम स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में जानने पर बल दिया। कार्यक्रम के अध्यक्ष एवं पटना उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र प्रसाद ने संस्कारों पर बल देते हुए नैतिक मूल्यों की जरूरत पर ध्यान देने पर जोर दिया। कार्यक्रम का आयोजन संस्कार भारती, बिहार प्रदेश एवं इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल एंड कल्चरल स्टडीज के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। बिहार में लगभग 40 दिनों तक चले इस 'क्रांतितीर्थ' कार्यक्रम में चित्रकला, गायन, भाषण, काव्य पाठ वर्ग में 34 जिलों के 471 विद्यालयों और 22 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने बिहार की प्रमुख पांच लोकभाषाओं में सहभागिता की। इस दौरान 30 जिलों में नुक्कड़ नाटक और 50 से अधिक स्वंतत्रता सेनानियों के परिजनों का सम्मान किया गया। इस पूरे अभियान के दौरान प्रदेश भर में 400 से अधिक गोष्ठियों द्वारा स्वतंत्रता आंदोलन में बिहार एवं गुमनाम वीरों के बारे में लोगों के बीच उनके परिचय को आगे बढ़ाया।<br /><br />पटना में आयोजित कार्यक्रम में स्वागत समिति के अध्यक्ष व पद्मश्री से सम्मानित वरिष्ठ चित्रकार श्याम शर्मा, आयोजन समिति के अध्यक्ष एवं प्रसिद्ध लोक गायक भरत शर्मा व्यास, इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल एंड कल्चरल स्टडीज (कोलकाता) के निदेशक अरिंदम मुखर्जी, चंद्रगुप्त प्रबंध संस्थान के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी कुमोद कुमार उपस्थित रहे। रविवार को केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख की राजधानी लेह में आयोजित क्रांतितीर्थ समारोह का प्रारम्भ लेह इकाई के लद्दाख फानडे त्सोग्स्पा के <br /><br />अध्यक्ष नवांग लोटोस के स्वागत भाषण से हुआ। समारोह में लद्दाख फानडे त्सोग्स्पा की युवा शाखा द्वारा देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए गए । समारोह के मुख्य अतिथि एडवोकेट ताशी ग्यालसन और सम्मानित अतिथि कर्नल (सेवानिवृत्त) सोनम वांगचुक ने वीर नारियों और सेना के दिग्गजों के सम्मान के लिए ऐसे कार्यक्रम के आयोजन के लिए लद्दाख फैनडे त्सोग्स्पा के प्रयास की सराहना की। समारोह में डॉ अमृता शिल्पी ने "क्रांतितीर्थ" कार्यक्रम का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया और पूरे भारत में आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला पर प्रकाश डाला। समारोह के दौरान लद्दाख के लगभग 100 वीर नारियों और वीरता पुरस्कार विजेता सेना के पूर्व सैनिक उपस्थित थे, जिन्हें कार्यक्रम के दौरान सम्मानित किया गया। जानकारी हो कि लद्दाख फांडे त्सोग्स्पा एक सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन है जो पिछले तीस वर्षों से विभिन्न सामाजिक कल्याण गतिविधियों में समर्पित रूप से काम कर रहा है। सेवा (सामाजिक कल्याण), संस्कार (नैतिक मूल्य) और एकता (राष्ट्रीय एकता) लद्दाख फांडे त्सोग्स्पा का मुख्य उद्देश्य है।<br /><br />उधर बलिदानों की नगरी फिरोजाबाद स्थित एफ. एम. वाटिका (राजा का ताल) में आयोजित कार्यक्रम में क्रांतिवीरों को नमन करते हुए उनका और उनके परिवार जनों का सम्मान किया गया । सम्मान के दौरान गुमनाम क्रांतिवीरों एवं उनके परिवार के सदस्यों पर पुष्प वर्षा की गई। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं उत्तर प्रदेश सरकार के कारागार एवं होमगार्ड मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने कहा कि क्रांतितीर्थ कार्यक्रमों की एक शृंखला मात्र नहीं है, अपितु यह एक अभियान है उन बलिदानियों को श्रद्धांजलि देने का, जिन्होंने अनेक कष्ट सहे, अपना जीवन, अपना सर्वस्व देश की स्वतंत्रता के लिए, स्वराज की, स्वधर्म की भावना के लिए समर्पित कर दिया । फिर भी वे इतिहास के पृष्ठों में अनाम या अल्पज्ञात रह गए। उन्हें जिस तरह से स्मरण किया जाना चाहिए था, उस तरह से स्मरण नहीं किया गया । आज इस कार्यक्रम के  माध्यम से जनपद फिरोजाबाद के गुमनामी क्रांतिवीरों को  व उनके परिवार जनों को आज सम्मान करने का मौका मिला है। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता एवं दिल्ली विश्वविद्यालय की प्राध्यापिका डा. अंकिता कुमार ने कहा कि ‘क्रांतितीर्थ’ एक शृंखला है जो स्वतन्त्रता के लिए बलिदान हुए भूले-बिसरे महानायकों को याद करने तथा उनके योगदान को सबके समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयत्न कर रही है। आज जब पूरा देश आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहा है तो यह अवसर हैं, उन सभी नायकों को स्मरण करने का जो इतने वर्षों में छूट गए, इतिहास के पन्नों में कहीं दब गए । क्रांतितीर्थ के माध्यम से हमें वो हर एक तीर्थ ढूंढना है जो स्वराज के लिए, स्वधर्म के लिए हर पल संघर्ष कर रहा था, इस देश की संस्कृति की रक्षा की लड़ाई लड़ रहा था, हमारी उपासना पद्धति पर, हमारी परम्पराओं पर, हमारी संस्कृति पर कोई आघात न हो इस बात की लड़ाई लड़ रहा था। हमें उस तीर्थ के पीछे की प्रेरणा को ढूंढना है, उस प्रेरणा के आधार पर लड़ने वाले व्यक्ति को ढूंढना है।<br /><br />कार्यक्रम में आईवे इंटरनेशनल स्कूल के छात्र-छात्राओं द्वारा देशभक्ति पर प्रस्तुति  की गई। मंच पर प्रवीन अग्रवाल (सेवा सदन), डॉ रमा शंकर सिंह, शिवशंकर झा, हरिओम शर्मा आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन प्रवीन अग्रवाल द्वारा किया गया और प्रमुख रूप से देवी चरन अग्रवाल, अर्पित चित्रांश, उद्देश्य तिवारी, रविन्द्र बंसल, बृजेश यादव, अमित गुप्ता रक्तवीर, अनुग्रह गोपाल अग्रवाल, शंकर गुप्ता, राजीव बंसल, शिवकांत पलिया, उमेश गुप्ता, शैलेश अग्रवाल, मंयक सारस्वत, दयाशंकर गुप्ता, कृष्ण मुरारी, कपिल अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में नगर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे ।<br /><br />जानकारी हो कि अंग्रेजों की गुलामी से भारत को मुक्त कराने के लिए हजारों ऐसे वीर क्रांतिकारियों ने अपने प्राणों की भेंट चढ़ा दी, जिनकी वीर गाथाओं को इतिहास के पृष्ठों में स्थान नहीं मिला। स्वतंत्रता संग्राम के ऐसे गुमनाम एवं अल्पज्ञात सेनानियों की वीरगाथा को क्रान्ति तीर्थ समारोह के माध्यम से आम जनता के सामने लाने का बीड़ा उठाया है-केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय और सेंटर फॉर एडवांस्ड रिसर्च ऑन डेवलपमेंट एंड चेंज (सीएआरडीसी) ने। इसमें संस्कार भारती अहम सहयोगी की भूमिका निभा रहा है। 'आजादी के अमृत महोत्सव' के अवसर पर क्रान्तितीर्थ श्रृंखला का आयोजन पूरे देश में किया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 07 Aug 2023 09:55:41 +0530</pubDate>
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                <title>पटना के बाद विपक्षी दलों की अगली बैठक 17,18 जुलाई को बेंगलुरु में : कांग्रेस</title>
                                    <description><![CDATA[ कांग्रेस ने कहा है कि मोदी सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों की अगली रणनीतिक बैठक 17 और 18 जुलाई को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में आयोजित की जाएगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/next-meeting-of-opposition-parties-after-patna-congress-in-bengaluru/article-50711"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/oppo.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि मोदी सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों की अगली रणनीतिक बैठक 17 और 18 जुलाई को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में आयोजित की जाएगी। कांग्रेस महासचिव संगठन केसी वेणुगोपाल ने यह जानकारी देते हुए सोमवार को ट्वीट किया की बिहार की राजधानी पटना में सभी विपक्षी दलों की जबरदस्त कामयाब बैठक के बाद अगली बैठक अब 17 तथा 18 जुलाई को बेंगलुरु में होगी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि हम फासीवादी और अलोकतांत्रिक ताकतों को हराने और देश को आगे ले जाने के लिए एक मजबूत दृष्टिकोण प्रस्तुत करने के अपने अटल संकल्प पर कायम हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 03 Jul 2023 14:46:37 +0530</pubDate>
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