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                <title>अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का दावा, 48 मिनट के युद्ध ने अमेरिका को दिया बड़ा मुनाफा</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ने वेनेजुएला संघर्ष की लागत से 28 गुना अधिक तेल वसूल कर 'मोटी कमाई' की है। उन्होंने कहा कि 48 मिनट चले इस युद्ध के बाद वेनेजुएला के तेल क्षेत्र पर अमेरिकी नियंत्रण बढ़ा और अब इसे अमेरिकी ऊर्जा परिदृश्य का हिस्सा माना जाना चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-president-trump-claims-48-minute-war-gave-big-profit/article-157944"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/donald-trump.jpg" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनका देश वेनेजुएला के तेल के जरिए वहां हुए अपने युद्ध की लागत से ‘28 गुना’ पहले ही वसूल कर चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका इससे ‘मोटी कमाई भी कर रहा है।’ ट्रंप ने कहा, “उस युद्ध को जीतने में सिर्फ 48 मिनट लगे। हम वहां से लाखों बैरल तेल बाहर लेकर आये।” यह आंकड़ा ट्रंप के करीब एक हफ्ते पहले के पिछले दावे से अलग है, जब उन्होंने कहा था कि अमेरिका ने उस पैसे की ‘42 गुना’ भरपाई कर ली है।</p>
<p>यह बयान अमेरिका के जनवरी में वेनेजुएला के खिलाफ शुरू की गयी सैन्य आक्रामकता के महीनों बाद आया है। उस सैन्य कार्रवाई के कारण वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का अपहरण कर लिया गया था और वेनेजुएला के तेल क्षेत्र पर अमेरिकी प्रभाव का बहुत बड़ा विस्तार हुआ था। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका के तेल और गैस उत्पादन की गिनती करते समय वेनेजुएला को भी उसमें शामिल किया जाना चाहिए, क्योंकि यह देश ‘बुनियादी तौर पर’ अमेरिकी ऊर्जा परिदृश्य का ही हिस्सा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 14:48:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जे.डी. वेंस का बड़ा बयान, बोले- ईरान न तो परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करेगा और न ही खरीदने की, अमेरिका रखेगा सख्त नजर</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने कहा कि अमेरिका-ईरान समझौता यह सुनिश्चित करता है कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान की प्रतिबद्धताओं पर कड़ी नजर रखी जाएगी। यदि समझौता सफल रहता है, तो अगले 50 वर्षों में पश्चिम एशिया निवेश का बड़ा केंद्र बनेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/jds-big-statement-said-iran-will-neither-try-to/article-156991"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/jd-vance.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने कहा है कि अमेरिका-ईरान समझौता यह पक्का करता है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर पाएगा। वेंस ने कहा, "इसका मतलब है कि ईरान के पास कभी परमाणु हथियार नहीं होगा। वह न तो परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करेगा और न ही उन्हें खरीदने या हासिल करने की कोशिश करेगा। यह बात इस समझौते में शामिल है।"</p>
<p>अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका इस बात पर नज़र रखेगा कि ईरान समझौते का पालन कर रहा है या नहीं, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि इसके बदले ईरान को क्या मिलेगा। वेंस ने कहा, "यहां एक ऐसा तरीका अपनाया जा रहा है, जिसमें हम जांच-पड़ताल करते रहेंगे और जब ईरान अपनी ज़िम्मेदारियां पूरी करेगा, तो उसे वास्तविक फ़ायदे भी मिलेंगे।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि अगर ईरान समझौते का पालन करता है, तो अगले पचास सालों में पश्चिम एशिया में बुनियादी बदलाव आएगा और यह इलाका निवेश के लिए ज़्यादा अनुकूल बन जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 14:07:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ऐतिहासिक अमेरिका-ईरान समझौता : सुरक्षा परिषद देगी अंतिम मंजूरी, $24 अरब की ईरानी संपत्ति से हटेगी रोक</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव से अमेरिका-ईरान समझौते को अंतिम मंजूरी दी जाएगी। शर्तों के तहत अमेरिका ईरान पर लगे तेल प्रतिबंध हटाएगा और उसकी $24 अरब की संपत्ति मुक्त करेगा। बदले में ईरान परमाणु हथियार न बनाने और 30 दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने पर सहमत हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-final-agreement-between-iran-and-america-will-be-approved/article-156987"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trump2.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक प्रस्ताव से मंज़ूरी दी जाएगी। ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौते के मसौदा का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा, “अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक प्रस्ताव से मंज़ूरी दी जाएगी।” एजेंसी ने कहा है कि अमेरिका ने ईरानी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगे प्रतिबंधों को हटाने, ईरान के खिलाफ़ नये प्रतिबंध न लगाने और पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य ताकत न बढ़ाने का वादा किया है। समाचार एजेंसी ने मसौदा ज्ञापन का हवाला देते हुए कहा, “तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और पेट्रोकेमिकल डेरिवेटिव्स की बिक्री पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएंगे। </p>
<p>अमेरिका पश्चिम एशिया में अपनी सेना न बढ़ाने और ईरान के खिलाफ नये प्रतिबंध न लगाने का वादा किया है।” इसके अलावा मसौदा ज्ञापन के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के आंतरिक मामलों में दखल न देने और इस्लामिक गणराज्य की संप्रभुता का सम्मान करने का वादा किया है। दोनों पक्षों के बीच ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने के 30 दिनों के भीतर ही होर्मुज जलडमरूमध्य को खोल दिया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने की संधि (एनपीटी) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी है और परमाणु हथियार न बनाने का वादा किया है। एजेंसी ने मसौदा ज्ञापन का हवाला देते हुए कहा कि दस्तावेज़ में यह उल्लेख है।</p>
<p>हालांकि, इसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन विशिष्ट प्रतिरोधी बलों का उल्लेख किया गया है। दस्तावेज़ में यह भी कहा गया है कि ईरान और अमेरिका के बीच अंतिम वार्ता तब तक शुरू नहीं होगी, जब तक ईरान की विदेशी परिसंपत्तियों का आधा हिस्सा मुक्त नहीं कर दिया जाता, ईरानी तेल पर लगाए गए प्रतिबंध नहीं हटा लिए जाते और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त नहीं कर दी जाती। मसौदे के अनुसार, अमेरिका ने ईरान की 24 अरब डॉलर की विदेशी परिसंपत्तियों पर लगी रोक हटाने का वादा किया है। इनमें से आधी राशि दोनों देशों के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर होने से पहले ही ईरान को वापस दी जानी होगी। इससे पहले, ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने ईरान और अमेरिका के बीच समझौता ज्ञापन पर काम पूरा होने की पुष्टि की थी। इस पर हस्ताक्षर 19 जून को स्विट्जरलैंड में होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 11:15:43 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>क्यूबा पर अमेरिका का बड़ा एक्शन, राष्ट्रपति मिगुएल डियाज़-कैनेल सहित कई अधिकारियों और संस्थाओं पर लगाए कड़े प्रतिबंध</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने क्यूबा पर दबाव बढ़ाते हुए राष्ट्रपति मिगुएल डियाज़-कैनेल, चार अधिकारियों और पांच संस्थाओं को प्रतिबंधित व्यक्तियों की सूची में शामिल किया है। अमेरिकी वित्त विभाग द्वारा की गई इस कार्रवाई से दोनों देशों के बीच राजनयिक और आर्थिक तनाव और अधिक बढ़ने की आशंका है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/americas-big-action-on-cuba-strict-sanctions-imposed-on-many/article-156070"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/us-cuba-1.webp" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। अमेरिका ने क्यूबा पर दबाव बढ़ाने के लिए राष्ट्रपति मिगुएल डियाज़-कैनेल और कई अन्य लोगों एवं संस्थाओं पर प्रतिबंध लगा दिये हैं। अमेरिकी वित्त विभाग की वेबसाइट पर गुरुवार को जारी जानकारी के अनुसार विभाग ने डियाज़-कैनेल, चार अन्य लोगों और पांच संस्थाओं को विशेष रूप से नामित नागरिकों और प्रतिबंधित व्यक्तियों की सूची में शामिल किया है। डियाज़-कैनेल ने 2018 में राउल कास्त्रो की जगह क्यूबा के राष्ट्रपति का पद संभाला था।</p>
<p>मई में अमेरिकी सरकार ने क्यूबा के 11 अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाए थे और 1996 में क्यूबा से निर्वासित लोगों से जुड़ी एक घटना को लेकर राउल कास्त्रो पर आरोप लगाए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 14:10:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान बातचीत में अड़चन: ईरान ने की जब्त धन को तुरंत जारी करने की मांग, हिचकिचा रहा ट्रंप प्रशासन </title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में जब्त फंड की तत्काल रिहाई सबसे बड़ा रोड़ा बन गई है। ईरान $12 अरब की नकद राशि तुरंत जारी करने पर अड़ा है, जबकि ट्रंप प्रशासन ने साफ कर दिया है कि परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य पर ठोस कदम उठाए बिना कोई आर्थिक राहत नहीं दी जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/hurdle-in-us-iran-talks-iran-demands-immediate-release-of-seized/article-155993"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/mojtaba-khamenei.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में ईरान के जब्त धन को तुरंत जारी करने की मांग सबसे बड़ी अड़चन बन गई है। ईरान इस बात पर ज़ोर दे रहा है कि किसी संभावित समझौते के तहत कोई भी ठोस कदम उठाने से पहले उसकी अरबों डॉलर की जब्त की गई धनराशि को तुरंत जारी किया जाए। इस मांग को मानने में ट्रंप प्रशासन हिचकिचा रहा है। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनका प्रशासन ईरान को कोई बड़ी रियायत दिए बिना बड़े पैमाने पर धन जारी करने को मंज़ूरी देने में आनाकानी कर रहा है। खासकर ईरान के संवर्धित यूरेनियम के भंडार, परमाणु गतिविधियों और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने को लेकर वह कड़ा रूख अपना रहा है।</p>
<p>जेरूसलम पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार ईरानी वार्ताकार चाहते हैं कि जैसे ही दोनों पक्ष शुरुआती सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर करें, उन्हें जब्त हुए धन से "नकद धनराशि" तुरंत मिल जाए और इसमें किसी तरह की कोई देरी नहीं होनी चाहिए। अमेरिकी अधिकारियों का रुख साफ है कि प्रतिबंधों में राहत तभी मिलेगी जब ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर कोई ठोस आश्वासन देगा। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में चिंता सिर्फ दिखावे तक सीमित नहीं है। अगर धनराशि को जल्दी जारी कर दिया गया, तो इससे ईरान को एक आर्थिक सहारा मिल जाएगा, जबकि अमेरिका के हाथ से उसका सबसे ताकतवर मोलभाव का हथियार,आर्थिक दबाव, जिसे बनाने में उसने कई वर्ष लगाए हैं, वह उसके हाथ से निकल जाएगा।</p>
<p>वरिष्ठ अधिकारियों ने क्षेत्रीय मध्यस्थों को साफ कर दिया है कि जब तक ईरान पहले कोई ठोस और कारगर कदम नहीं उठाता है खासकर अपनी परमाणु गतिविधियों और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर,तब तक कोई बड़ी रकम जारी नहीं की जाएगी। श्री ट्रंप ने अपने सलाहकारों से साफ-साफ कह दिया है कि वह ऐसे किसी भी समझौते पर दस्तखत नहीं करेंगे जो ओबामा के 2015 के समझौते जैसा हो, जिसके तहत ईरान के लिए 1.7 अरब डॉलर का फंड जारी किया गया था।</p>
<p>रिपोर्टों के मुताबिक ईरान अब करीब 12 अरब डॉलर की मांग कर रहा है, और ट्रंप की ऐसी कोई मंशा नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सलाहकारों ने ऐसे इंतज़ामों पर विचार किया है, जिनके तहत कोई तीसरा देश जैसे कि कतर ईरान को फंड जारी करेगा, ताकि अमेरिका किसी भी सीधे भुगतान से दूर रहे। मध्यस्थों ने बीच का रास्ता निकालने के लिए कुछ प्रस्ताव रखे हैं, जिनमें कई अरब डॉलर का एक "मानवीय फंड" बनाना भी शामिल है। इस फंड का इस्तेमाल सिर्फ भोजन, दवा और कृषि उत्पादों की खरीद के लिए किया जाएगा। लेकिन अब तक, दोनों में से कोई भी पक्ष इतना झुकने को तैयार नहीं हुआ है कि यह गतिरोध टूट सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 18:39:26 +0530</pubDate>
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                <title>एलयूसीसी चिटफंड घोटाला: सीबीआई की मुंबई में बड़ी कार्रवाई, दो मुख्य साजिशकर्ता गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तराखंड के बहुचर्चित लोनी अर्बन को-ऑपरेटिव सोसाइटी (LUCC) घोटाले में सीबीआई ने मुंबई से दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस घोटाले में 1 लाख से अधिक निवेशकों से ₹800 करोड़ की ठगी की गई थी। आरोपियों को देहरादून की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/lucc-chit-fund-scam-cbi-arrests-two-masterminds-from-mumbai/article-155759"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/cbi.png" alt=""></a><br /><p>देहरादून। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने उत्तराखंड के बहुचर्चित लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (एलयूसीसी) चिटफंड घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो प्रमुख आरोपियों को महाराष्ट्र के मुंबई से गिरफ्तार किया है। सीबीआई ने मंगलवार को बताया कि दोनों आरोपियों को सोमवार को गिरफ्तार किया गया था। यह कार्रवाई विस्तृत वित्तीय दस्तावेजों के विश्लेषण, बैंक लेन-देन की जांच, मौखिक साक्ष्य जुटाने तथा देश के विभिन्न राज्यों में व्यापक जांच-पड़ताल के बाद की गई है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय के निर्देश पर सीबीआई ने 26 नवंबर 2025 को इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। इससे पहले उत्तराखंड पुलिस ने एलयूसीसी और उसके पदाधिकारियों के खिलाफ 18 प्राथमिकी दर्ज की थीं। मामला जनता से अवैध रूप से धन जमा कराने, धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र, धन के दुरुपयोग तथा अनियमित जमा योजनाओं के संचालन से संबंधित है। जांच में अब तक सामने आया है कि उत्तराखंड में एक लाख से अधिक निवेशकों को विभिन्न अनियमित निवेश योजनाओं में धन लगाने के लिए प्रलोभन दिया गया था। निवेशकों से जुटाई गई कुल राशि लगभग 800 करोड़ रुपये आंकी गई है।</p>
<p>सीबीआई के अनुसार, गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल हैं और उन्होंने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर निवेशकों से एकत्र धन के संग्रहण, प्रबंधन, हस्तांतरण और कथित गबन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जांच एजेंसी को ऐसे साक्ष्य भी मिले हैं जो लाखों निवेशकों से जुटाई गई धनराशि के उपयोग और उसके प्रवाह से जुड़े व्यापक षड्यंत्र की ओर संकेत करते हैं।</p>
<p>सीबीआई ने बताया कि दोनों आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर देहरादून ले जाया जाएगा और बड्स अधिनियम के तहत गठित विशेष न्यायालय में पेश किया जाएगा। इससे पहले सीबीआई ने 12 और 13 मई को पांच अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनमें एलयूसीसी के तीन वरिष्ठ सहकारी प्रमोटर भी शामिल थे। सभी आरोपी वर्तमान में देहरादून की सुद्धोवाला जेल में न्यायिक हिरासत में हैं।</p>
<p>जांच एजेंसी ने आरोपियों द्वारा कथित रूप से अपराध से अर्जित धन से खरीदी गई कई अचल संपत्तियों का भी पता लगाया है। इन संपत्तियों का विवरण उत्तराखंड सरकार के वित्त सचिव को भेजा गया है और उन्हें फ्रीज करने तथा बड्स अधिनियम के तहत पीड़ित निवेशकों के हित में आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है। सीबीआई ने कहा है कि मामले की जांच जारी है और इसे शीघ्र पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 18:16:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दानिश इकबाल का बड़ा बयान, कहा- कागज पर चल रहे मदरसों की सहायता राशि होनी चाहिए बंद, सरकारी धन के दुरूपयोग का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[बिहार भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी दानिश इकबाल ने कागजों पर चल रहे फर्जी मदरसों और संस्थाओं की जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि बिना इंफ्रास्ट्रक्चर के चल रहे संस्थानों को दी जाने वाली सरकारी सहायता अविलंब बंद होनी चाहिए और उस राशि का उपयोग सही स्कूलों के विकास में किया जाना चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/danish-iqbals-big-statement-said-assistance-amount-to-madrassas/article-155736"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/madarse.jpg" alt=""></a><br /><p>पटना। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश मीडिया प्रभारी दानिश इकबाल ने मंगलवार को कहा कि सरकारी धन का दुरुपयोग कर सिर्फ कागज पर चल रहे मदरसों की जांच कर उनकी सहायता अविलंब बंद कर देनी चाहिए। इकबाल ने बयान जारी कर कहा कि सरकार यदि इस तरह के कागजी मदरसों की जांच करवाती है, तो उसकी सराहना होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस समय प्रदेश में बिना बिल्डिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर के बहुत से मदरसे चलाये जा रहे हैं और इस क्रम में सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कागजी संस्थान फर्जीवाड़े की श्रेणी में आते हैं और उनका खुलासा करते हुए अविलंब कार्रवाई करनी चाहिए।</p>
<p>भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी ने कहा कि उनका वक्तव्य केवल मदरसों तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ऐसी बहुत सी संस्थाएं चलाई जा रही हैं, जो सरकारी पैसे के दुरुपयोग के लिए कागजों पर बनाई जाती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी सभी संस्थाओं की जांच करनी चाहिए और उनकी सहायता बंद कर सुरक्षित की गई राशि का उपयोग सही ढंग से संचालित स्कूलों में बच्चों के भविष्य निर्माण तथा अन्य विकास कार्यों में करना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 17:36:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी का एक्शन: ईरान पर टूटा दुखों का पहाड़, अमेरिका ने जब्त किए एक करोड़ क्रिप्टोकरेंसी</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के अनुसार, "ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी" के तहत अमेरिका ने ईरान से जुड़ी 1 अरब डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी जब्त कर ली है। इस कार्रवाई का उद्देश्य ईरान को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली से पूरी तरह अलग-थलग करना है। अमेरिकी अधिकारियों ने कई ईरानी क्रिप्टो वॉलेट्स पर सीधा नियंत्रण हासिल कर लिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/a-mountain-of-sorrow-fell-on-iran-america-seized-one/article-155547"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/us.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन, 30 मई (वार्ता) अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने दावा किया है कि अमेरिका ने ईरान से जुड़े लगभग एक अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य की क्रिप्टोकरेंसी परिसंपत्तियां जब्त कर ली हैं। उन्होंने इसे ईरान की अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली तक पहुंच को बाधित करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे आर्थिक अभियान का हिस्सा बताया। बेसेंट ने रीगन राष्ट्रीय आर्थिक मंच में शुक्रवार को बोलते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन के प्रतिबंध अभियान "ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी" ने हाल के सप्ताहों में ईरान पर आर्थिक दबाव को काफी बढ़ा दिया है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "लगभग साढ़े पांच से छह सप्ताह के अत्यंत सफल सैन्य अभियान और ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी के बाद हमने उन्हें वित्तीय रूप से लगभग पूरी तरह अलग-थलग कर दिया है। वे अब आर्थिक रूप से बेहद कठिन स्थिति में हैं।" मीडिया से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी अधिकारियों ने ईरानी वित्तीय नेटवर्क से जुड़े कई क्रिप्टोकरेंसी बटुओं (वॉलेट) पर सीधा नियंत्रण हासिल कर लिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 17:30:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रिस्क-एडजेस्टेड निवेश ऐतिहासिक रूप से सफल </title>
                                    <description><![CDATA[यहीं पर हाइब्रिड फंडों की एक श्रेणी, जिसे मल्टी-एसेट फंड के रूप में जाना जाता है, महत्वपूर्ण और प्रासंगिक हो जाती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/risk-adjusted-investing-successful-to-asset-allocation/article-58514"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/sizte--(4).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अगर लंबी अवधि में निवेश करते समय जोखिम पर ध्यान दिया जाए, तो इसका एकमात्र परिणाम वेल्थ क्रिएशन ही हो सकता है। डायवर्सिफिकेशन और एसेट एलोकेशन के माध्यम से रिस्क-एडजेस्टेड निवेश दृष्टिकोण ऐतिहासिक रूप से अत्यधिक सफल सिद्ध हुआ है। यदि कोई निवेशक कठोर अनुशासन के साथ एसेट आवंटन का पालन करने के लिए तैयार है, तो एक धैर्यवान निवेशक के लिए एकमात्र परिणाम बिना किसी परेशानी के वित्तीय लक्ष्य प्राप्त करना है। अनिल गुप्ता, फाउण्डर, एनीवेल्थ के अनुसार अधिकांश निवेशकों के लिए जो बात बेहतर है कि वह उचित एसेट एलोकेशन बनाए रखना है। यहीं पर हाइब्रिड फंडों की एक श्रेणी, जिसे मल्टी-एसेट फंड के रूप में जाना जाता है, महत्वपूर्ण और प्रासंगिक हो जाती है। </p>
<p>विभिन्न एसेट वर्गों में इस श्रेणी का एसेट एलोकेषन दृष्टिकोण इसके डायवर्सिफाई पोर्टफोलियो रणनीति के साथ रिस्क एलीमेंट को नियंत्रण में रखने में मदद करता है। श्रेणी के फंड कम से कम तीन एसेट वर्गों में से प्रत्येक में 10 प्रतिशत के न्यूनतम आवंटन के साथ 3 या अधिक एसेट वर्गों में निवेश करते हैं। विशिष्ठ एसेट वर्ग जो उनके पोर्टफोलियो का हिस्सा बनते हैं, उनमें इक्विटी, डेट, कमोडिटी, आरईआईटी और इनविट्स के माध्यम से रियल एस्टेट आदि शामिल हैं। इस श्रेणी में कई ऑफर्स हैं, यहां लगातार बेहतर प्रदर्शन करने वालों में से एक आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल मल्टी-एसेट फंड है। एक, तीन, 5 और 10 साल का आधार हो, फंड टॉप प्रदर्शन करने वालों में से रहा है और इन अवधियों में 7-12 प्रतिशत की सीमा में श्रेणी के औसत रिटर्न को पीछे छोड़ दिया है। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Oct 2023 10:52:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एसेट क्लास के तौर पर लॉन्ग टर्म वेल्थ क्रिएटर है इक्विटी </title>
                                    <description><![CDATA[ भारत के अधिकांश फंड हाउस इस श्रेणी में पेशकश करते हैं। लेकिन उनमें से एक प्रमुख नाम आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लार्ज एंड मिड-कैप फंड है। फंड अपनी कैटेगरी में लगातार अच्छा प्रदर्शन करता रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/equity-as-an-asset-class-is-a-long-term-wealth-creator/article-49835"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/630-400-size-(1)28.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। एसेट क्लास के तौर पर इक्विटी लॉन्ग टर्म वेल्थ क्रिएटर है। सभी इससे सहमत हैं और इसमें सफल होने की इच्छा रखते हैं। हालांकि दस में से एक निवेशक अपने जीवन काल में ऐसा कर पाता है, जबकि अन्य, बाजार की अज्ञानता, विशेषज्ञता की कमी और सबसे महत्वपूर्ण समय की कमी के कारण, न तो इक्विटी में उपयुक्त रूप से निवेश करने में सक्षम हैं और न ही आवश्यक धन उत्पन्न करने में सक्षम हैं। भारत के अधिकांश फंड हाउस इस श्रेणी में पेशकश करते हैं, लेकिन उनमें से एक प्रमुख नाम आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लार्ज एंड मिड-कैप फंड है। फंड अपनी कैटेगरी में लगातार अच्छा प्रदर्शन करता रहा है। मौजूदा आर्थिक और बाजार सेटिंग को देखते हुए इस योजना को वर्तमान में स्टॉक और क्षेत्रों में निवेश किया जाता है, जो आर्थिक सुधार से लाभान्वित हो सकते हैं, जो नाम पोर्टफोलियो का हिस्सा हैं, उन्हें स्टॉक-पिकिंग के लिए टॉप-डाउन और बॉटम-अप दृष्टिकोण के संयोजन के माध्यम से चुना जाता है। निवेशक इस कैटेगरी स्कीम को अपने लॉन्ग टर्म पोर्टफोलियो का हिस्सा बनाने पर विचार कर सकते हैं।</p>
<p>मनीष सी वारा, फाउण्डर, एंजेल कैपिटल, जयपुर, के अनुसार इसके अलावा, बड़ी संख्या में ऐसे निवेशक हैं, जो लार्ज-कैप और मिड-कैप के महत्व को समझते हैं। लेकिन जब इसे व्यावहारिक रूप से क्रियान्वित करने की बात आती है, तो वे अक्सर विफल हो जाते हैं क्योंकि उन्हें दो बाजार पूंजीकरणों के बीच उपयुक्त आवंटन करना मुश्किल लगता है। इस तथ्य को देखते हुए कि इक्विटी के इन दोनों सेगमेंट में अलग-अलग वैल्यूएशन मेट्रिक्स हैं और अलग-अलग बाजार स्थितियों के लिए अलग-अलग प्रतिक्रिया करते हैं, पोर्टफोलियो में दोनों का एक सूक्ष्म मिश्रण बेहतर पैदावार देता है। यहीं पर लार्ज एंड मिड कैप फंड प्रासंगिक हो जाता है। वे बाजार के दो महत्वपूर्ण क्षेत्रों से लाभान्वित होते हैं-सबसे बड़ी कंपनियां और भविष्य के नेता (लार्ज और मिडकैप)। वे क्रमश: प्रत्येक लार्जकैप और मिडकैप में फंड के कॉर्पस का न्यूनतम 35 प्रतिशत आवंटित करते हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Jun 2023 11:12:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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