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                <title>एआई और इंटरनेट दो धारी तलवार </title>
                                    <description><![CDATA[भारत में डॉक्टर्स की कमी बड़ा कारण, गूगल से पूछ कर हजारों खुद की कर रहे उपचार।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ai-and-the-internet--a-double-edged-sword/article-158105"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1200-x-600-px)-(3)12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। दैनिक नवज्योति द्वारा आयोजित मासिक परिचर्चा की श्रंखला में गुरूवार को एआई व इन्टरनेट स्वास्थ्य संबंधी जानकारी समझने के लिए बहुत उपयोगी हो सकते हैं लेकिन इलाज तय करने के लिए उस पर कितना निर्भर हो सकते हैं ( हाउ मच टू रिलाई ओन इंटरनेट एन्ड एआई फॉर ट्रीटमेंट आफ एनी एइलमेंट) विषय पर आयोजित किया गया। इसमें गवर्नमेंट कॉलेज के् डाक्टर्स,आयुर्वेद, होम्योपैथ,वकील टेक्नोलॉजी से जुडे विशेषज्ञों ने भाग लिया। परिचर्चा में कहा गया कि  इलाज तय करने के लिए केवल इंटरनेट या एआई पर पूरी तरह निर्भर होना उचित नहीं है। आॅनलाइन उपलब्ध जानकारी सामान्य होती है, जबकि हर व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, चिकित्सा इतिहास और लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। कई बार इंटरनेट पर अधूरी, पुरानी या भ्रामक जानकारी भी मिल सकती है, जिससे अनावश्यक चिंता बढ़ सकती है। डॉक्टर की शारीरिक जांच, परीक्षणों और चिकित्सकीय अनुभव का विकल्प नहीं है। इसलिए इंटरनेट और एआई को स्वास्थ्य जागरूकता तथा प्रारंभिक जानकारी के साधन के रूप में उपयोग करना चाहिए, जबकि सही निदान और उपचार के लिए योग्य चिकित्सक की सलाह लेना आवश्यक है।<br />प्रस्तुत है टॉक शो के अंश...  </p>
<p><strong>AI</strong><br />- केवल दी गई जानकारी के आधार पर जवाब देता है।<br />-  इनकी प्रत्यक्ष जांच नहीं कर सकता।<br />- केवल लिखे या बताए गए लक्षणों को समझता है।    <br />- उपलब्ध डेटा और पैटर्न के आधार पर सुझाव देता है।  <br />- रिपोर्टों का सामान्य विश्लेषण कर सकता है।    <br />- उपचार लागू नहीं कर सकता।                        </p>
<p><strong>Doctor</strong><br />- मरीज की शारीरिक जांच कर सकता है।    <br />- नाड़ी, रक्तचाप, तापमान आदि स्वयं माप सकता है।    <br />- चेहरे के भाव, चलने-फिरने और व्यवहार का अवलोकन कर सकता है।    <br />- मेडिकल इतिहास और वर्तमान स्थिति को जोड़कर निर्णय लेता है।<br />- जांच रिपोर्टों की व्यावहारिक व्याख्या कर सकता है।<br />- आवश्यकता पड़ने पर तुरंत उपचार शुरू कर सकता है। </p>
<p><strong>एआई सहयोगी, पर टच  थैरेपी जरूरी</strong><br />समाज में जिस तरह का परिवर्तन हो रहा है। डॉक्टर भी उसी के अनुरूप स्वयं को ढाल रहे हैं। एआई के इस युग में जिस तरह की गम्भीर बीमारियां हो रही हैं उनका सही इलाज करने के लिए मशीनों का उपयोग जांच में किया जा रहा है। लेकिन एआई का मतलब कृत्रिम बुद्धिमता है उसे इंसान ने ही बनाया है। ऐसे में यह बीमारियों की जानकारी के लिए सहयोगी तो हो सकता है लेकिन डॉक्टर नहीं बन सकता। बीमारी का सही इलाज तो डॉक्टर मरीज व उनके लक्षण को देखकर ही कर सकते हैं। बीमारी के इलाज में यदि  हर कोई व्यक्ति एआई का उपयोग करने लगेगा तो उसे लाभ होने की जगह नुकसान होने की संभावना अधिक है। अमेरिका में बिना डॉक्टर के इलाज के दवाई नहीं मिलती। जबकि भारत में हर कोई एआई व गूगल से पूछकर ही  स्वयं बीमारियों का उपचार मेडिकल से दवाईयां लाकर कर रहे हैं। यह मरीज के लिए हानिकारक हो सकता है।  <br /><strong>- डॉ. एस.एन. गौतम, वरिष्ठ न्यूरो सर्जन गर्वनमेंट मेडिकल कॉलेज कोटा</strong></p>
<p><strong>एआई जिसके लिए बना है वही करे उपयोग</strong><br />बदलते समय के साथ ही जिस तरह से तकनीकी युग आया है। उसमें इससे दूर नहीं रहा जा सकता। तकनीक व एआई का उपयोग जानकारी के लिए किया जाना तो अच्छा है। लेकिन इसका उपयोग चिकित्सा के क्षेत्र में हर किसी के द्वारा किया जाना सही नहीं है। एआई जिसके लिए बना है यदि वही इसका उपयोग करेंगे तो उसका लाभ होगा। लेकिन गलत व्यक्ति द्वारा उसका उपयोग करने पर उससे नुकसान ही होगा। मसलन परमाणु सही हाथ में होता है तो उर्जा उत्पन्न करता है। गलत हाथों में वही विस्फोट भी करता है। अर्थात एआई का भी सही जगह पर उपयोग होना ठीक है। कई मरीज डॉक्टर के पास आने से पहले ही एआई से पूरी जानकारी लेकर आते हैं। ऐसे में उन्हें बीमारी के बारे में समझाना मुुश्किल होता है। कई बार वह  समझने को तैयार नहीं होत।  एआई जानकारी के लिए तो सही है लेकिन चिकित्सा के क्षेत्र में बीमारी के इलाज में डॉक्टर ही सही सलाह दे सकते हैं। <br /><strong>-डॉ. नीलेश जैन, प्राचार्य  गर्वनमेंट मेडिकल कॉलेज कोटा</strong></p>
<p><strong> एआई पर नेगेटिव कंटेंट ज्यादा आते है</strong><br />मैं कोरोल पार्क में मेडिकल स्टोर का संचालन करती हूं। मेरे पास बहुत सी बार नीट के विद्यार्थी आते और बताते हैं कि हमे नींद नहीं आ रही है, गोली दे दो, स्टूडेंट उसके बारे में एआई पर सर्च करके खुद ही बोलते है कि यह गोली ही दो,  हम बहुुत सी बार उनको समझाते है।  लेकिन नहीं मानते है और एआई के हिसाब से वहां पढ़ाई के दौरान खुद ही इलाज के बारे में एआई से सलाह ले लेते है। एआई पर नेगेटिव कंटेंट ज्यादा आते हैं। मेरा मानना है कि एआई  डॉक्टर और मरीज के बीच रिश्ता खत्म करने का काम कर रहा हैं। <br /><strong>-सीमा प्रजापति, मेडिकल स्टोर संचालिका जिला अध्यक्ष मानवाधिकार सहयोग संगठन </strong></p>
<p><strong> स्वास्थ्य के लिए एआई ठीक नहीं है</strong><br /> स्वास्थ्य के लिए एआई ठीक नहीं हैं। कई बार मरीज बिना डॉक्टर से परामर्श लिए गोलियां खा लेता है जिससे उनकी किडनी खराब होने की संभावना बनी रहती है। आमतौर पर देखा जाएं तो 60 साल के बाद इंसान में विभिन्न प्रकार के शारीरिक बदलाव आते है जिसमें कम सुनना, बार-बार किसी बात को बोलना, कम दिखाई देना सहित  अन्य बदलाव उसमें आते हैं। इस बारे में यदि आप एआई पर देखेंगे तो आपको विभिन्न प्रकार की बीमारी एआई दिखा देगा। पर ये लक्षण हर व्यक्ति में होते हैं, आयुर्वेद में भी साइट इफैक्ट होते हैं। आयुर्वेद में हर बीमारी  व इंसान के हिसाब से दवाई निर्धारित की जाती हैं। जो कि एआई नहीं कर सकता हैं।  हमारे पास सर्जरी,मेडिसन सहित अन्य के विद्यार्थी आते है जो कि एआई से जानकारी लेकर आते हैं पर उनको ये भी पता नहीं होता है कि इनका उपयोग कैसे करना हैं। रोगी को डॉक्टर से ही इलाज लेना चाहिए।  <br /><strong>- वैध नित्यानंद शर्मा, प्राचार्य राजकीय आयुर्वेद योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा महाविद्यालय  </strong></p>
<p><strong>डाक्टर्स की कमी भी बड़ा कारण</strong><br />मेरा मानना है कि जब डॉक्टर के पास मरीज देखने का लोड़ अधिक होगा।  तब मरीज एआई का उपयोग करता हैं। और जब डॉक्टर पेशेंट के सवाल का जवाब नहीं दे पाता है तो मरीज एआई से बीमारी का समाधान सर्च करता है। एआई से यदि आप बीमारी के बारे में पूछते है तो वहां गलत जानकारी भी हो सकती है।  एआई एल्गोरिदम से चलता है। मरीज बार-बार एआई से पूछता है तो वहां कुछ भी बता सकता हैं। एआई पर  नेगेटिव कंटेंट ज्यादा वायरल होते हैं। एआई पर ज्यादा निर्भर नहीं रहना चाहिए। <br /><strong>- तरनदीप कौर, कॉ फाउंडर एन्ड सीईओ आइक्रा, आई स्टार्टअप</strong></p>
<p><strong>जानकारी ले सकते हैं उपचार नहीं</strong><br />एआई व गूगल के जमाने में आज हर व्यक्ति डॉक्टर बन रहा है। छोटी हो या बड़ी बीमारी होने पर खुद ही इन तकनीक का उपयोग कर इलाज व दवाई तलाश कर रहे हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से दवाईयां भी ले रहे हैं। जबकि एक दवाई का असर हर बीमारी में ऐसा जैसा नहीं हो सकता। हर व्यक्ति एआई का उपयोग कर स्यवं ही विशेषज्ञ बन रहा है।  एआई पर एलोपैथी से  होम्योपैथी व आयुर्वेदिक की जानकारी अधिक मिल रही है। इसमें कोई भी कुछ भी तथ्य डाल रहा है। इसमें साइड  इफेक्ट की संभावना कम है। जबकि डॉक्टर टच थैरेपी से मरीज का सही इलाज कर सकते हैं। एआई जानकारी दे सकता है सही इलाज नहीं कर सकता। <br /><strong>-महेश शारदा, इंजीनियर शारदा मेडिकल स्टोर</strong></p>
<p><strong>सोशल मीडिया के नुकसान भी और फायदे भी , सब बाजार का खेल</strong><br />एआई से स्वास्थ्य संबंधित प्रश्न पूछ सकते है पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। देखा जाए तो 2008 में एक साथ तीन चीजे बाजार में लॉंच हुई थी जिसमें बिटकॉइन सहित अन्य थी। एआई अभी मार्केट में आया है और इसको डवलप किया जा रहा हैं। जैसे की एक बार आप सोशल मीडिया पर किसी चीज के बारे में सर्च करेंगे तो आपको एफबी, इंस्ट्राग्राम सहित अन्य सोशल मीडिया  पर वे विज्ञापन दिनभर आते रहेंगे। बहुत सी बार हम एआई पर हम स्वास्थ्य संबंधित रिपोर्ट डालकर पूछते है तो वहां हमें जानकारी देता हैं। इसी तरह से हम अपनी जानकारी धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर शेयर करते जाते हैं। जिससे हमारी जानकारी हम सोशल मीडिया पर परोस रहे हैं।  पहले तो एफबी सहित अन्य सोशल मीडिया व रील से पता चलता था। पर अब एआई से पता चल रहा है कि अब किस के घर में क्या हो रहा हैं। मेरा मानना है कि टीनऐजर के लिए सोशल मीडिया ब्लॉक करना चाहिए। <br /><strong>- संजय कुमार विजय,एडवोकेट व स्कूल डायरेक्टर </strong></p>
<p><strong>बिना जानकारी स्वास्थ्य पर एआई का उपयोग हानिकारक</strong><br />परिवर्तन समाज का नियम है। पिछले कुछ समय में तकनीक के क्षेत्र में काफी तेजी से परिवर्तन हुआ है।  इस परिवर्तन में तकनीक जिसके लिए बनी है वही इसका उपयोग करे तो लाभ होगा। एआई का उपयोग करके ही कृषि के क्षेत्र में कई नवाचार किए हैं। एआई का उपयोग अलग-अलग कई क्षेत्रों में तो किया जा सकता है। लेकिन स्वास्थ्य पर इसका उपयोग बिना डॉक्टर की सलाह से करना गलत है। एआई बीमारी के उपचार में उतनी सही जानकारी नहीं दे सकता जितनी एक डॉक्टर मरीज को देखकर दे सकते हैं। इसलिए इलाज में तो एआई का उपयोग करना गलत होगा।  <br /><strong>- आर्यन सिंह, एआई एन्ड स्मार्ट टेक्नॉलॉजी विशेषज्ञ</strong></p>
<p><strong>इंटरनेट बुरा नहीं बस उपयोग कितना और कैसे  करें </strong><br />मेरे नजरिया से एआई बुरा नहीं है। यह हमनें कई तरह की जानकारी देता है। हमें प्रारंभिक सूचना और जानकारी मुहैया कराता है। लेकिन मामला निर्भरता का है। विश्वास करने का है। कई बार तकनीक पर निर्भरता रोग के लेवल तक पहुंच जाती है। एआई कीवर्ड के हिसाब से सूचना देता है। सूचना लेने या जानकारी के बाद डॉक्टर के पास जरूर जाना चाहिए। घर पर आॅक्सीमीटर से यदि आप प्लस नाप लें और ब्लड़ की आॅक्सीजन का पता लगा ले पर अंत में डॉ. से जरूर सलाह लेनी चाहिए। डॉक्टर की तरह  एआई इलाज नहीं कर सकता हैं। मात्र आपके कीवर्ड से आपको सलाह दे सकता है। <br /><strong>-जनार्दन राय, रिटायर्ड कमांडेंट बीएसएफ </strong></p>
<p><strong> गूगल व एआई का खिलाड़ी अधिक कर रहे उपयोग</strong><br />एआई व गूगल का उपयोग आज हर क्षेत्र में जानकारी के लिए तो किया ही जा रहा है। अब तो लोग इससे अपनी बीमारियों का भी इलाज करने लगे हैं। खिलाड़ी चाहे वह किसी भी खेल का है उसे चोट लगने या बीमार होने पर वह एआई व गूगल से ही उसका उपचार व दवाई तलाशकर उसका उपयोग कर रहा है। जिससे सबसे अधिक स्ट्रॉराइड का उपयोग किया जा रहा है। यह खिलाड़ी व उनके शरीर के लिए नुकसान दायक है। ऐसे में कई खिलाड़ी तत्काल तो राहत पा रहे हैं लेकिन भविष्य में यह उनके लिए हानिकारक हो रहा है। जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। बीमारी या चोट में इलाज और दवाई तो डॉक्टर की सलाह से ही लेना बेहतर है। <br /><strong>-अशोक औदिच्य,सचिव बॉडी बिल्डिंग</strong></p>
<p><strong>इंटरनेट पर  गलत या अधूरी जानकारी हो सकती है</strong><br />मान लीजिए किसी व्यक्ति को साधारण सिरदर्द हुआ। वह इंटरनेट पर खोज करता है। वह माइग्रेन, ब्रेन ट्यूमर या अन्य गंभीर बीमारियों की जानकारी देखकर  डर जाता है और बार-बार खोज करने लगता है। इससे उसकी चिंता और बढ़ जाती है। एआई  बीमारी के बारे में सामान्य जानकारी देने, संभावित कारणों को समझाने के लिए,दवाओं, जांचों और रिपोर्टों को समझाने के लिए तो ठीक है लेकिन एआई आपकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री नहीं जानता, बॉडी की  जांच नहीं कर सकता, कई बीमारियों के लक्षण एक जैसे होते हैं। इंटरनेट पर गलत या अधूरी जानकारी हो सकती है। कभी-कभी गलत निष्कर्ष भी दे सकता है। ऐसे में डाक्टर की सलाह पर ही पूरा भरोसा करना चाहिए। <br /><strong>-डॉ. केवल कृष्ण डंग, वरिष्ठ श्वांस रोग विशेषज्ञ</strong></p>
<p><strong>डॉक्टर की जगह नहीं ले सकता एआई</strong><br />एआई का उपयोग आज की आवश्यकता है। इससे बिना नहीं रहा जा सकता। लेकिन हर जगह इसका उपयोग नहीं किया जा सकता। विशेष रूप से स्वास्थ्य के क्षेत्र में बिना डॉक्टर की सलाह के एआई का उपयोग करना नुकसान दायक हो सकता है। हर बीमारी के कई इलाज हो सकते हैं लेकिन हर इलाज हर व्यक्ति के लिए सही हो यह जरूरी नही हैं। ऐसे में जो काम डॉक्टर का है वह डॉक्टर को ही करने देना चाहिए। एआई सलाह व जानकारी दे सकता है लेकिन डॉक्टर की जगह नहीं ले सकता। <br /><strong>- चेतन सैनी, निदेशकसुमंगलम ग्रुप</strong></p>
<p><strong>इलाज में विश्वसनीय तो डॉक्टर ही है</strong><br />एआई सूचनाओं का भंडार है।  एआई का उपयोग करके जानकारी प्राप्त की जा सकती है। वहां एक बीमारी के कई इलाज हो सकते हैं। लेकिन वह इलाज हर बीमारी व व्यक्ति पर अलग-अलग काम कर सकता है। ऐसे में एआई का उपयोग बीमारी के इलाज में व्यक्ति को स्वयं नहीं करना चाहिए। साइब्रर कांड्रीरिया की स्थिति बहुत खतरनाक है। इससे एंजाइटी बढ़ती है। जो रोग का रूप ले लेती है। एआई वही बताता है जो उसमें फीड किया हुआ है उसका अपना कोई निर्णय नहीं होता है। बीमारी में डॉक्टर का इलाज ही सही रहता है। इलाज में डॉक्टर ही विश्वसनीय है। <br /><strong>-आशुतोष माथुरिया, प्रिंसीपल, महात्मा गांधी मल्टीपरपज स्कूल गुमानपुरा</strong></p>
<p><strong>विकसित देश के लिए तकनीकी  जरूरी</strong><br />अभी की युवा पीढ़ी एआई का उपयोग कर रही हैं और हेल्थ सहित अन्य विभिन्न मामलों में एआई से सलाह ले रही है जो कि गलत हैं। वर्मा के अनुसार इंसान कितनी भी तरक्की कर ले पर उसको अपनी जड़े नहीं छोड़नी चाहिए। यदि आजकल के युवा तकनीकी पर निर्भर रहेंगे तो दिक्कत आएंगी। अब रोबोटिक सर्जरी हो रही हैं। यदि किसी की तबीयत खराब है तो वहां एआई से सलाह लेने के बजाय डॉक्टर के पास जावे और इलाज लेंवे। वहीं हम अभी   इसी फील्ड़ में कार्य कर रहे है संभवतया 2027 तक हम जो डॉक्टर ओपीडी मे मरीज देखते है उनके लिए भी कुछ तकनीकी लेकर आ रहे हैं। उदाहरण देकर समझाया कि हमारे साथी को पीलिया के लक्षण दिखा रहे थे हमने जब डॉक्टर को दिखाया तो वहां अलग ही बीमारी निकाली। फिर हमने डॉक्टर की सलाह से इलाज करवाया। वहीं इसमें पारिवारिक संस्कार भी  महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। तकनीक का सहारा लेमना चाहिए। तभी हम विकास कर सकेंगे। लेकिन स्वास्थ्य  संबंधित मामलों में केवल चेट जीपीटी या इंटरनेट पर ही भरोसा करना नुसान पहुंचा सकता है। <br /><strong>-जितेंद्र वर्मा, स्टार्टअप आर्किटेक्ट एन्ड प्रोजेक्ट राइटर(एआई)  </strong></p>
<p><strong>आधी-अधूरी जानकारी में खुद ही उलझ जाते हैं</strong><br />बच्चे आज कल घरवालों से बात नहीं करते और घर वाले भी बच्चों से सीधे संपर्क में नहीं रहते है। जिससे अभिभावक  बच्चों के बारे में समझ नहीं पाते और उनकी समस्याओं को भी नहीं समझ पाते।  बाद में डॉक्टरों से समाधान पूछते हैं। उसके बाद एआई पर समाधान पूछने के बाद डॉक्टर के पास पहुंचते है और अपना अनुभव बताते हैं। जिसके बाद एआई से परामर्श लेते है जो मरीज को उल्टा उलझा देता हैं। अंत में डॉक्टर के पास जाते हैं और एआई से आधी-अधूरी जानकारी लेकर लोग खुद ही उलझ जाते है। <br /><strong>-वंदना योगी, वाईस प्रिंसिपल गवर्नमेंट गर्ल्स स्कूल वल्लभनगर</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 11:02:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नॉर्थ टेक सिम्पोजियम 2026 : राजनाथ सिंह ने कहा-बदला है वार फेयर का चेहरा, तकनीक के चलते हुये क्रांतिकारी बदलाव, साइबर स्पेस में भी लड़े जा रहे युद्ध</title>
                                    <description><![CDATA[प्रयागराज में नॉर्थ टेक सिम्पोजियम का उद्घाटन करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे रक्षा त्रिवेणी का संगम बताया। उन्होंने आधुनिक युद्ध में AI और ड्रोन की भूमिका को गेम चेंजर करार दिया। सिंह ने भारतीय सेना से चौकन्ना रहने और वैश्विक महाशक्ति बनने के लिए नई तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/north-tech-symposium-2026-rajnath-singh-said-the-face/article-152620"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/rajnath-singh.png" alt=""></a><br /><p>प्रयागराज। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को संगम नगरी प्रयागराज में शुरु हुये नॉर्थ टेक सिम्पोजियम 2026 को ज्ञान व शक्ति का महाकुंभ बताते हुये कहा कि यह वास्तव में रक्षा त्रिवेणी का संगम है। राजनाथ सिंह ने तीन दिवसीय कार्यक्रम का उदघाटन करने के बाद अपने संबोधन में कहा कि हर काल खंड में वार फेयर का चेहरा बदला है,विश्व युद्ध के बाद नई तकनीक का समावेश होते हुए दुनिया ने देखा है। 21वीं सदी में टेक्नोलॉजी के नए युग का आगाज हुआ है। उन्होने कहा कि यह इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दौर है। आज साइबर स्पेस में भी युद्ध लड़े जा रहे हैं।</p>
<p>उन्होने कहा कि बीते 10-15 वर्षों में क्रांतिकारी बदलाव हुए हैं। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध पर उन्होने कहा कि दोनों के बीच पारंपरिक युद्ध शुरू हुआ, लेकिन अब यह युद्ध ड्रोन और सेंसर युद्ध के रूप में गेम चेंजर बनकर उभरा है। आज सब कुछ वैपनाइज किया जा सकता है। आपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि इससे भारतीय सेना का शौर्य याद आता है। ऑपरेशन सिंदूर में आकाश मिसाइल हुए नवीन तकनीक का प्रयोग किया गया था। रक्षा मंत्री ने भारतीय सेना से सक्रिय ही नहीं बल्कि चौकन्ना भी रहने का आह्वान करते हुये कहा कि तभी हम आने वाली चुनौतियों का सामना कर सकते हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि चिकित्सा और शिक्षा में नई टेक्नोलॉजी एक साल बाद भी लागू कर सकते हैं,लेकिन सेना में अगर हमने देरी की तो काफी पीछे हो जाएंगे,रक्षा मंत्री ने सेना से सरप्राइज एलिमेंट विकसित करने का आह्वान किया,सरप्राइज एलिमेंट ऐसा हो जिसे दुश्मन देश ने सोचा भी ना हो। उन्होने कहा कि आगे बढ़ने का एक ही मंत्र अनुकूलनशीलता है। सेना में इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा दिया जा रहा है, यूपी में डिफेंस कॉरिडोर और ब्रह्मोस का निर्माण किया जा रहा है, यूपी में हाल में ही लोकार्पित गंगा एक्सप्रेसवे को भी डिफेंस सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण बताया है। रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा में शोध को बढ़ावा देने के लिए कई सहूलियन दी गई हैं। रक्षा मंत्री ने इंडस्ट्री और एकेडमिया से अपील की, कि वे डिफेंस कॉरिडोर की तरह नॉलेज कॉरिडोर का भी निर्माण करें। अंत में रक्षा मंत्री ने कहा कि सबके सामूहिक प्रयास से ही भारत विश्व पटल पर सैन्य ताकत के रूप में स्थापित होगा, सबके प्रयासों से ही भारत वैश्विक महाशक्ति बनेगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चुनौतियों को अवसर में बदलने का भी आह्वान किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 16:51:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को आतंकवाद के खिलाफ देश की प्रतिबद्धता का दिया संदेश, भारत अब सिर्फ़ बयान जारी नहीं करता बल्कि आगे बढ़कर निर्णायक कार्रवाई भी करता है : राजनाथ सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' ने भारत की बदलती मानसिकता का वैश्विक संदेश दिया है। अब भारत कूटनीतिक बयानों के बजाय निर्णायक सैन्य कार्रवाई में विश्वास रखता है। रक्षा निर्यात में 62% की रिकॉर्ड वृद्धि और एआई (AI) आधारित युद्धक प्रणालियाँ नए और सशक्त भारत की पहचान बन चुकी हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/operation-sindoor-gave-a-message-to-the-world-about-the/article-152209"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rajnath-singh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत अपने भूभाग पर आतंकवादी हमलों के बाद अब केवल कूटनीतिक बयान जारी करने की पुरानी मानसिकता तक सीमित नहीं है बल्कि आगे बढ़कर निर्णायक कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है। राजनाथ सिंह ने गुरुवार को यहां एक राष्ट्रीय सुरक्षा शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ने स्पष्ट रुख अपनाया है कि किसी भी परिस्थिति में आतंकवाद का कोई भी कृत्य सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक, हवाई हमलों और ऑपरेशन सिंदूर को आतंकवाद के खिलाफ सरकार के दृढ़ संकल्प का प्रतीक बताया।</p>
<p>उन्होंने कहा, "आतंकवाद एक विकृत और विक्षिप्त मानसिकता से उत्पन्न होता है। यह मानवता पर एक काला धब्बा है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला नहीं है, यह मूल रूप से मानवता के मूल्यों की रक्षा की लड़ाई है। यह एक बर्बर विचारधारा के खिलाफ संघर्ष है जो हर मानवीय मूल्य के सीधे विरोध में खड़ी है। हमने इस भारतीय दृष्टिकोण को देश के भीतर और विदेशों में स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया है।"</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि जब तक आतंकवाद मौजूद रहेगा, यह सामूहिक शांति, विकास और समृद्धि को चुनौती देता रहेगा। उन्होंने कहा, "आतंकवाद को धार्मिक रंग देकर या इसे नक्सलवाद जैसी हिंसक विचारधारा से जोड़कर उचित ठहराने के प्रयास किए जाते हैं। यह अत्यंत खतरनाक है और एक प्रकार से आतंकवादियों को आड़ प्रदान करता है ताकि वे धीरे-धीरे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ सकें। आतंकवाद केवल राष्ट्र-विरोधी कृत्य नहीं है, इसके कई आयाम हैं—संचालनात्मक, वैचारिक और राजनीतिक। इससे तभी निपटा जा सकता है जब हम इन सभी आयामों पर काम करें।"</p>
<p>पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को लगातार समर्थन दिए जाने पर श्री सिंह ने कहा, "भारत और पाकिस्तान दोनों ने एक ही समय पर स्वतंत्रता प्राप्त की थी। हालांकि आज भारत को विश्व स्तर पर सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) के लिए जाना जाता है, जबकि पाकिस्तान को एक अलग प्रकार के आईटी यानी 'अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद' का केंद्र माना जाता है।" रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर को भारतीय सशस्त्र बलों की एकजुटता और समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय थल सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना ने एकजुट होकर और एकीकृत योजना के तहत कार्य किया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि भारत की सैन्य शक्ति अब अलग-अलग हिस्सों में काम नहीं करती, बल्कि यह एक संयुक्त, एकीकृत और वैश्विक शक्ति के रूप में उभरी है।</p>
<p>राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर को अपनी शर्तों पर और अपने चुने हुए समय पर अंजाम दिया, और इसे पूरी तरह अपनी शर्तों पर ही रोका। उन्होंने कहा, "इस अभियान के दौरान हमने अत्यंत सटीकता के साथ केवल उन लोगों को निशाना बनाया जिन्होंने हमारे खिलाफ हमला किया था। हमने अभियान इसलिए नहीं रोका कि हमारी क्षमताएं समाप्त हो गई थीं या कम हो गई थीं। हमने इसे पूरी तरह अपनी शर्तों पर समाप्त किया। हम लंबे समय तक संघर्ष जारी रखने के लिए पूरी तरह तैयार थे। हमारे पास आवश्यक अतिरिक्त क्षमता और अचानक संकट के समय अपनी क्षमताओं को तेजी से बढ़ाने की अंतर्निहित शक्ति है।"</p>
<p>रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत का सैन्य-औद्योगिक ढांचा लगातार यह साबित करता रहा है कि वह न केवल शांति काल की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तैयार है, बल्कि युद्ध के समय तेज आपूर्ति और रसद की मांगों को भी पूरा करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि उस अवधि के दौरान भारत ने परमाणु हमले की धमकी या दबाव में आए बिना अपने निर्धारित उद्देश्यों को पूरा किया। उन्होंने कहा, "यह नई विश्व व्यवस्था है, यह नए वैश्विक युग का नया भारत है। यह वह भारत है जो आतंकवाद और उसे प्रायोजित करने वालों के बीच कोई अंतर नहीं करता। यह हमारे प्रधानमंत्री की स्पष्ट नीति है, जिसने बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत को रूपांतरित किया है।"</p>
<p>रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर को प्रतिरोधक क्षमता का प्रतीक बताते हुए कहा कि यद्यपि यह अभियान केवल 72 घंटों के भीतर समाप्त हो गया, लेकिन इसके पहले की तैयारी व्यापक और लंबी थी। उन्होंने बताया कि भारत की अतिरिक्त क्षमता, संसाधनों को तेजी से जुटाने की क्षमता, रणनीतिक भंडार और स्वदेशी रूप से विकसित हथियारों की सिद्ध विश्वसनीयता अब प्रतिरोधक नीति के अभिन्न अंग बन चुके हैं।राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के परिणामस्वरूप वैश्विक धारणा में उल्लेखनीय बदलाव और स्वदेशी हथियारों तथा रक्षा उत्पादों की विश्वसनीयता के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा ,"कई देशों ने भारत से हथियार और रक्षा उपकरण खरीदने में गहरी रुचि दिखाई है। </p>
<p>आंकड़े स्वयं इसकी पुष्टि करते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 62.66 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि है। हम इन मानकों को और आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।" जर्मनी की अपनी हाल की यात्रा पर रक्षा मंत्री ने कहा कि यूरोप की प्रमुख कंपनियां हमारे निजी रक्षा उद्योग और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के साथ सहयोग करने के लिए उत्सुक हैं, जो भारत की बढ़ती विश्वसनीयता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि विश्व में भारत की मजबूत स्थिति केवल उसकी सैन्य शक्ति से ही नहीं, बल्कि प्रतिरोधक क्षमता स्थापित करने की योग्यता से भी सुदृढ़ हुई है।</p>
<p>प्रतिरोधक क्षमता के स्वरूप में तेजी से हो रहे बदलाव को रेखांकित करते हुए श्री सिंह ने कहा कि साइबर क्षेत्र, अंतरिक्ष युद्ध और सूचना प्रौद्योगिकी इसके महत्वपूर्ण घटक बन गए हैं, और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) इस परिवर्तन के केंद्र में है। उन्होंने कहा, "ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उपयोग की गई ब्रह्मोस जैसी अत्याधुनिक मिसाइल प्रणालियों से लेकर विभिन्न निगरानी प्लेटफार्मों तक, एआई का व्यापक और प्रभावी उपयोग किया गया है। इससे हमारी सटीकता और प्रहार क्षमता में वृद्धि हुई है। जहां बड़ी कार्रवाइयों की जानकारी अक्सर सार्वजनिक हो जाती है, वहीं अनगिनत छोटे अभियान और प्रक्रियाएं पहले से सक्रिय होकर खतरों को उत्पन्न होने से पहले ही निष्प्रभावी कर देती हैं। ऐसे सभी मामलों में एआई का व्यापक उपयोग किया जाता है ।"</p>
<p>एआई के व्यावहारिक उपयोग पर जोर देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि यह आतंकवादियों का पता लगाने और निर्णायक प्रतिक्रिया देने में महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, "एआई का एक अर्थ 'ऑगमेंटेड इन्फैंट्री' भी है। यह हमारे सैनिकों की क्षमताओं को काफी बढ़ा रहा है। आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए हम अपनी सेना को तकनीक-आधारित, एकीकृत युद्ध मशीन में बदलने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इस उद्देश्य से सेना ने 'रुद्र' ब्रिगेड, 'भैरव' बटालियन, 'शक्तिबाण' तोपखाना रेजिमेंट और 'दिव्यास्त्र' बैटरियों जैसे चुस्त और आत्मनिर्भर युद्धक इकाइयों की स्थापना की है, जो आधुनिक मिश्रित खतरों का तुरंत और सशक्त जवाब देने में सक्षम हैं।"<br />हालांकि, श्री सिंह ने इस बात पर भी जोर दिया कि एआई को केवल सकारात्मक दृष्टिकोण से नहीं देखा जा सकता, क्योंकि डीपफेक, साइबर युद्ध और स्वायत्त हथियार प्रणालियां नए और गंभीर खतरे उत्पन्न कर रही हैं। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा डॉ. समीर वी. कामत और एकीकृत रक्षा स्टाफ के प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 14:43:33 +0530</pubDate>
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                <title>एआई को लेकर वैश्विक कंपनियों में दिखी प्रतिस्पर्धा की झलक : मोदी के साथ ग्रुप फोटो में अल्टमैन और डारियो ने नहीं मिलाया हाथ, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो</title>
                                    <description><![CDATA[सोशल मीडिया पर इसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। मंच पर मोदी के साथ गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई, स्केल एआई के अलेक्जेंडर वांग और अन्य वैश्विक टेक नेता भी मौजूद थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/glimpse-of-competition-among-global-companies-regarding-ai-altman/article-143830"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/6622-copy48.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr">नई दिल्ली। एआई को लेकर वैश्विक कंपनियों में प्रतिस्पर्धा की झलक दिल्ली में आयोजित एआई समिट में भी दिखी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ग्रुप फोटो के दौरान OpenAI के सीईओ सैम अल्टमैन और Anthropic के सीईओ डारियो अमोदेई हाथ मिलाने में हिचकिचाते नजर आए। एकजुटता दिखाने के आग्रह के बावजूद दोनों ने हाथ मिलाने के बजाय मुट्ठी उठाकर संकेत दिया।</p>
<p dir="ltr">सोशल मीडिया पर इसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। मंच पर मोदी के साथ गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई, स्केल एआई के अलेक्जेंडर वांग और अन्य वैश्विक टेक नेता भी मौजूद थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Feb 2026 17:46:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>एआई पर हो सभी का अधिकार : चंद देशों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता एआई का भविष्य, गुटेरेस ने कहा- यह सतत विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में सहायक</title>
                                    <description><![CDATA[एआई का भविष्य कुछ गिने-चुने देशों द्वारा तय नहीं किया जा सकता, और न ही इसे कुछ अरबपतियों की इच्छाओं पर छोड़ा जा सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/everyone-should-have-the-right-on-ai-the-future-of/article-143793"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/antonio-guterres.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर सबका अधिकार होना चाहिए और इसका भविष्य कुछ गिनती के देशों या धनाढ्यों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता है। गुटेरेस ने यहां भारत मंडपम में इंडिया एआई समिट 2026 के चौथे दिन विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों, प्रौद्योगिकी कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों, विशेषज्ञों, शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों और अन्य अतिथियों को संबोधित करते हुए कहा कि वैश्विक दक्षिण में एआई शिखर सम्मेलन का पहली बार आयोजन विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि एआई का भविष्य कुछ गिने-चुने देशों द्वारा तय नहीं किया जा सकता, और न ही इसे कुछ अरबपतियों की इच्छाओं पर छोड़ा जा सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उन्होंने कहा कि एआई का लाभ सभी को मिलना चाहिये और यदि इसे सही ढंग से किया जाये, तो यह सतत विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में सहायक हो सकता है, अन्यथा यह असमानता को और बढ़ा सकता है। एक तरफ यह चिकित्सा में महत्वपूर्ण प्रगति को तेज कर सकता है, शिक्षा के अवसरों का विस्तार कर सकता है, खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ कर सकता है, जलवायु कार्रवाई और आपदा तैयारी को मजबूत कर सकता है और आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंच में सुधार कर सकता है। उन्होंने कहा कि लेकिन यह असमानता को गहरा भी कर सकता है, पक्षपात को बढ़ा सकता है और नुकसान को बढ़ावा दे सकता है। गुटेरेस ने कहा कि इस शिखर सम्मेलन का संदेश सरल है: वास्तविक प्रभाव का अर्थ है ऐसी तकनीक जो जीवन को बेहतर बनाये और पृथ्वी की रक्षा करे। उन्होंने एक ऐसे एआई के निर्माण की अपील की जिसमें गरिमा मूलभूत मानक हो।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने बताया कि पिछले साल संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2 निर्णायक कदम उठाये थे- एआई पर एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल की स्थापना और एआई शासन पर एक वैश्विक डायलॉग की शुरुआत। उन्होंने बताया कि इस पैनल की नियुक्ति हो चुकी है। इसमें विभिन्न क्षेत्रों और विषयों से आये 40 प्रमुख विशेषज्ञ शामिल हैं। दूसरी तरफ, डायलॉग का पहला सत्र जिनेवा में होगा, जिसमें प्रत्येक देश और हितधारक अपनी बात रख सकेंगे। गुटेरेस ने कहा कि निवेश के बिना कई देश एआई युग से बाहर रह जायेंगे। उन्होंने एआई पर एक वैश्विक कोष की स्थापना का आह्वान किया, ताकि विकासशील देशों में बुनियादी क्षमता का निर्माण किया जा सके, वहां कौशल, डाटा, किफायती कंप्यूङ्क्षटग शक्ति और समावेशी पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जा सके। इस कोष में तीन अरब डॉलर जुटाने का लक्ष्य रखा गया है, जो एक अकेली प्रौद्योगिकी कंपनी के वार्षिक राजस्व के एक प्रतिशत से भी कम है। उन्होंने कहा कि एआई के प्रसार के लिए यह एक छोटी सी कीमत है, जिसका लाभ सभी को मिलेगा। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">एआई की ऊर्जा और पानी की बढ़ती मांग के बीच श्री गुटेरेस ने डेटा केंद्रों और आपूर्ति शृंखलाओं को हरित ऊर्जा की ओर ले जाने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि इसकी लागत कमजोर समुदायों को न चुकानी पड़े, एआई मानव क्षमता को बढ़ाये न कि उसका स्थान ले और एआई सभी के लिए सुरक्षित हो। उन्होंने एआई के नुकसान के प्रति सचेत करते हुए कहा, Þहमें लोगों को शोषण, हेरफेर और दुरुपयोग से बचाना होगा। कोई भी बच्चा अनियंत्रित एआई का परीक्षण विषय नहीं होना चाहिये।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';"> </span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 19 Feb 2026 17:03:29 +0530</pubDate>
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                <title>कृषक कल्याण एवं कृषि विकास: किश्तों की राशि एक अप्रेल, 2026 से 30 सितम्बर, 2026 तक एकमुश्त जमा कराए जाने पर ब्याज में शत-प्रतिशत छूट दिए जाने की घोषणा</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर में कृषि यंत्रों, तारबंदी, बीज, सिंचाई और डेयरी विकास हेतु हजारों करोड़ के अनुदान की घोषणा। लाखों किसान, पशुपालक और ग्रामीण उद्यमी लाभान्वित होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/announcement-of-100-interest-rebate-if-the-amount-of-farmer/article-142834"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(9)9.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। कृषि उत्पादन में वृद्धि के लिए किसान साथियों को विभिन्न कृषि यंत्रों यथा पावर, टिलर, डिस्क, कल्टीवेटर आदि के लिए 160 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाना प्रस्तावित है। इससे लगभग 50 हजार कृषक लाभान्वित होंगे साथ ही, आगामी वर्ष 500 कस्टम हायरिंग सेंटर्स की 96 करोड़  रुपए की लागत से स्थापना की जाएगी। नीलगाय, जंगली जानवरों व निराश्रित पशुओं से फसलों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए आगामी वर्ष 50 हजार किसानों को 20 हजार किलोमीटर तारबंदी के लिए 228 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाएगा। साथ ही, सामुदायिक तारबंदी में कृषकों की न्यूनतम संख्या 10 से घटाकर 7 किया जाना प्रस्तावित है।आधुनिकतम तकनीकों तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म के आधार पर खेती करने में आसानी एवं क्षमता विकास के लिए उठाएं जाएंगे विभिन्न कदम</p>
<p><strong>एग्री स्टैक पीएमयू का होगा गठन</strong></p>
<ul>
<li>आगामी वर्ष 5 लाख कृषकों को मूंग, एक लाख कृषकों को मोठ तथा एक लाख कृषकों को ज्वार, बाजरा व बरसीम फसल के मिनिकिट का वितरण किया जाना प्रस्तावित है। इस के लिए 33 करोड़ रुपए से अधिक का अनुदान उपलब्ध करवाया जाएगा। गुणवत्तायुक्त उन्नत बीज उत्पादन के लिए मुख्यमंत्राी बीज स्वावलम्बन योजना अन्तर्गत 90 प्रतिशत अनुदान पर 70 हजार क्विंटल बीज उपलब्ध करवाया जाना प्रस्तावित हैै। इस योजनान्तर्गत 50 करोड़ रुपए का व्यय कर 3 लाख कृषकों को लाभान्वित किया जाएगा।<br />  <br />छोटे बाजरे की बढ़ती मांग तथा जनजाति क्षेत्रों के किसानों की आय में वृद्धि के लिए कांगनी, कोदो, सांवा, कुटकी, चीना, रागी आदि छोटे बाजरे के 100 हेक्टेयर क्षेत्रा में प्रदर्शन आयोजित कर एक हजार कृषकों को लाभान्वित किया जाएगा। जलवायु परिवर्तन से कृषि भूमि के पोषक तत्वों पर होने वाले प्रभावों का आंकलन तथा मृदा उर्वरा शक्ति के प्रबन्धन के लिए आगामी वर्ष एक लाख 92 हजार मृदा नमूनों की जांच की जानी प्रस्तावित है।  </li>
<li>प्रत्येक ग्राम पंचायत में वर्मी कम्पोस्ट इकाई स्थापित करने के संकल्प को पूरा करने की दृष्टि से सर्वप्रथम 5 हजार से अधिक आबादी वाली 3 हजार 496 ग्राम पंचायतों में चरणबद्ध रूप से वर्मी कम्पोस्ट इकाइयां स्थापित किया जाना प्रस्तावित है। आगामी वर्ष, प्रथम चरण में 2 हजार 98 ग्राम पंचायतों में इस के लिए लगभग 270 करोड़ रुपए से अधिक का व्यय किया जाएगा। </li>
<li>कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रा में एआई/एमएल का वृहद स्तर पर उपयोग किए जाने व उत्पादकता वृद्धि के साथ-साथ कृषकों को विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए एग्री स्टैक पीएमयू का गठन किया जाएगा। राज किसान साथी पोर्टल 3.0 पर विभिन्न योजनाओं के अन्तर्गत आवेदन से अनुदान तक की गतिविधियों के ऑनलाइन मॉडयूल का उन्नयन किया जाएगा।  </li>
<li>कृषकों को आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करने, उनकी क्षमता वृद्धि करने के उद्देश्य से नॉलेज इनहांसमेंट प्रोग्राम के अंतर्गत आगामी वर्ष 3 हजार 300 किसानों को राज्य से बाहर एक्सपोजर विजिट करवाई जाएगी। मधुमक्खी पालकों को वैज्ञानिक तरीके से मधुमक्खी पालन करने के साथ-साथ उच्च मूल्य वाले उत्पादकों व मधुमक्खी पराग के उत्पादन की जानकारी देने के लिए एक हजार मधुमक्खी पालकों को किट, वर्कशॉप व एक्सपोजर विजिट की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी।</li>
<li>डिजिटल कृषि मिशन के अन्तर्गत कृषि सूचना एवं प्रबंधन प्रणाली राज-एम्स विकसित की जाएगी। इसके अन्तर्गेत कृषि में एआई/एमएल, जीआईएस, रिमोट सेंसिंग एवं सेटेलाइट इमेजरी आदि तकनीकों द्वारा किसानों को जलवायु जोखिम से बचाव, मौसम आधारित बुवाई, फसल स्वास्थ्य की निगरानी सम्बन्धी सुविधायें उपलब्ध कराई जाएंगी। इस के लिए 77 करोड़ रुपए व्यय किये जाएंगे। </li>
<li>उन्नत तकनीक के ग्रीन हाउस-पॉलीहाउस/शेडनेट, लो टनल, प्लास्टिक मल्च उपलब्ध करवाने के लिए आगामी वर्ष 4 हजार कृषकों को 200 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाएगा। </li>
<li>प्रदेश में उद्यानिकी विकास के लिए औषधीय पौधों व मसाला फसलों तथा फूल व सब्जी आदि की खेती संवर्द्धन के लिए विभिन्न कार्य करवाए जाएंगे। ये कार्य हैं- </li>
<li>कृषि जोत भूमि के निरन्तर घटते जा रहे आकार को देखते हुए सब्जियों के गुणवत्तायुक्त उत्पादन वृद्धि के लिए वर्टिकल सपोर्ट सिस्टम आधारित खेती के लिए 5 हजार कृषकों को अनुदान उपलब्ध करवाया जाएगा। </li>
<li>उद्यानिकी उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए कृषकों को अनुदानित 500 सोलर क्रॉप ड्रायर्स उपलब्ध करवाए जाएंगे।  </li>
<li>पश्चिमी राजस्थान में औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए एक हजार कृषकों को ईसबगोल, अश्वगंधा, सफेद मूसली, एलोवेरा आदि औषधीय पौधों के उन्नत बीज व आदान उपलब्ध कराये जायेंगे।  </li>
<li>प्रदेश में जीरा, धनिया, सौंफ, मेथी आदि मसाला फसलों का 4 हजार हेक्टेयर क्षेत्रा में विस्तार किए जाने के लिए अनुदान दिया जाएगा।  </li>
<li>फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए लूज फ्लॉवर एवं पॉलीहाउस में डच रोज की 500 हेक्टेयर क्षेत्रा में खेती के लिए कृषकों को अनुदान उपलब्ध करवाया जाएगा।  </li>
<li>राज्य में एग्रो फॉरेस्ट्री के पौधे तैयार करने के लिए जोधपुर, पाली एवं कोटा में ही टेक नर्सरी की स्थापना की जाएगी।  </li>
<li>प्रदेश में चूरू सहित खारे पानी की उपलब्धता वाले जिलों में झींगा पालकों को राहत देने के लिए सस्ती दर पर बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। </li>
<li>कृषि अनुसंधान, कृषि प्रसार शिक्षा तथा कृषि शिक्षण-प्रशिक्षण कार्यों को और अधिक गति दिए जाने के लिए कृषि विश्वविद्यालयों में रिक्त पद चरणबद्ध रूप से भरे जाने प्रस्तावित हैं। आगामी वर्ष 443 रिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी। </li>
<li>दलहनी एवं तिलहनी फसलों की उत्पादकता में वृद्धि तथा आत्मनिर्भरता के लिए मूंग, उड़द, अरहर, सोयाबीन, सरसों, तिल एवं अरण्डी आदि फसलों के 70 हजार प्रदर्शनों का आयोजन किया जाएगा। साथ ही, 2 लाख 50 हजार से अधिक किसानों को दलहनी एवं तिलहनी फसलों के अनुदानित प्रमाणित बीजों का वितरण कर लाभान्वित किया जाएगा। इन पर 135 करोड़ रुपए का व्यय किया जाना प्रस्तावित है। </li>
<li>प्रदेश में कृषि विकास के लिए उन्नत बीज, भूमि सुधार, बायो एजेंट्स एवं छोटे बाजरे को बढ़ावा देने के उद्देश्य से होंगे विभिन्न कार्य  </li>
</ul>
<p><strong>मुख्यमंत्राी बीज स्वावलम्बन योजना से होगा 3 लाख कृषकों को लाभ</strong></p>
<ul>
<li>राज्य में हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 5 हजार कृषकों को नेपियर घास का नि:शुल्क वितरण किया जाएगा।  </li>
<li>क्षारीय एवं लवणीय भूमि के सुधार तथा भूमि की उर्वरता बढ़ाने के लिए 50 हजार ढैंचा बीज मिनिकिट का कृषकों को नि:शुल्क वितरण किया जाएगा।  </li>
<li>कृषि उत्पादों के गुणवत्ता संवर्द्धन में बायो एजेंट्स की उपयोगिता को दृष्टिगत रखते हुए इनका उत्पादन 100 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 200 मीट्रिक टन किया जाना प्रस्तावित है।  </li>
<li>नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी को बढ़ावा देने के लिए एक लाख हेक्टेयर क्षेत्रा में इनके छिड़काव के प्रदर्शनों के लिए 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।  </li>
<li>राज्य के अधिकांश क्षेत्रों में अनियमित एवं अनिश्चित वर्षा के कारण वर्षा जल का संग्रहण कर बिना छीजत के पानी का उपयोग सुनिश्चित किए जाने के लिए आगामी वर्ष 8 हजार डिग्गियों व 15 हजार किलोमीटर सिंचाई पाइप लाइन सहित आगामी दो वर्षों में 36 हजार फार्म पोंड्स के लिए 585 करोड़ रुपए से अधिक का अनुदान दिया जाएगा। इससे 80 हजार से अधिक किसान लाभान्वित होंगे।</li>
</ul>
<p><strong>कृषि विपणन एवं सहकारिता</strong></p>
<ul>
<li>ब्याज मुक्त अल्पकालीन फसली ऋण वितरण योजना के अन्तर्गत आगामी वर्ष 35 लाख से अधिक किसान साथियों को 25 हजार करोड़ रुपये के ऋण वितरित किए जाने की घोषणा। इस के लिए 800 करोड़ रुपए ब्याज अनुदान पर व्यय किए जाएंगे।</li>
<li>दीर्घकालीन सहकारी कृषि एवं नॉन फार्मिंग सेक्टर्स के लिए 590 करोड़ रुपए के ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया जाना प्रस्तावित है। इससे लगभग 26 हजार किसान एवं लघु उद्यमी लाभान्वित होंगे। </li>
<li>एग्रो प्रोसेड प्रोडक्ट्स को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान तथा इनसे जुड़े कृषकों को बेहतर मूल्य दिलवाने की दृष्टि से मिशन राज गिफ्ट होगा प्रारंभ <br />प्रदेश में भण्डारण क्षमता वृद्धि, कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग एवं मार्केटिंग, क्षमता विकास, मण्डी विकास तथा आधारभूत संरचना निर्माण सम्बन्धी विभिन्न कार्य करवाए जाएंगे।</li>
</ul>
<p><strong>गोदाम निर्माण, क्षमता संवर्द्धन, मण्डी सम्बन्धी कार्य</strong></p>
<ul>
<li>वर्ष 2047 तक 30 लाख मीट्रिक टन भण्डारण क्षमता के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रदेश में 250 मीट्रिक टन एवं 500 मीट्रिक टन क्षमता के 50-50 गोदामों का निर्माण करवाया जाएगा। इस के लिए लगभग 20 करोड़ रुपए का व्यय किया जाएगा।</li>
<li>गुराडिया माना, सरोद (डग) व लावासल (मनोहरथाना)- झालावाड़ सहित 100 ग्राम सेवा सहकारी समितियों में 100 मीट्रिक टन क्षमता के जीर्ण-शीर्ण गोदाम मय चारदीवारी के पुनर्निर्माण के लिए 15 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाएगा।</li>
<li>ठीकरिया चारणान-बूंदी व गैलानी, सालरिया (झालरापाटन), बडाय (खानपुर), पाडलिया, चाडा, सुनारी (डग)- झालावाड़ सहित 200 नवगठित गोदाम विहीन ग्राम सेवा सहकारी समितियों में 100 मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम एवं कार्यालय भवन मय चारदीवारी निर्माण के लिए 30 करोड़ रुपए व्यय किए जाएंगे।  </li>
<li>प्याज की फसल को खराब होने से बचाने एवं मूल्य के उतार-चढ़ाव के नियंत्रण के लिए आगामी वर्ष तीन हजार किसानों को कम लागत की प्याज भण्डारण संरचनाओं के निर्माण के लिए लगभग 26 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाएगा।  </li>
</ul>
<p><strong>मसाला उत्पादन तथा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कॉन्क्लेव ऑन स्पाइस</strong></p>
<ul>
<li>प्रदेश में मसाला उत्पादन तथा निर्यात को बढ़ावा देने की दृष्टि से आगामी वर्ष राष्ट्रीय स्तर के कॉन्क्लेव ऑन स्पाइस का आयोजन किया जायेगा।  </li>
<li>अलवर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ऑनियन, श्रीगंगानगर में सेंटर  ऑफ एक्सीलेंस फॉर किन्नू तथा बांसवाड़ा में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर मैंगो खोले जाएंगे।</li>
<li>आमजन को जैविक कृषि उत्पाद उपलब्ध कराने की दृष्टि से जोधपुर, कोटा व उदयपुर में ऑर्गेनिक फूड मार्केट की स्थापना की जाएगी।  </li>
<li>कृषि जिन्सों के प्रोसेसिंग, व्यवसाय एवं निर्यात को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से प्रदेश के चयनित जिलों में 2 हजार कृषकों, प्रोसेसर्स व्यापारियों व निर्यातकों को प्रशिक्षण दिलवाया जाएगा।  </li>
</ul>
<p>नवीन कृषि उपज अनाज मण्डी-बागीदौरा-बांसवाड़ा, सिकराय-दौसा, राजियासर स्टेशन (सूरतगढ़)-श्रीगंगानगर, कृषि उपज अनाज मण्डी में आवश्यक विकास कार्य-नदबई-भरतपुर, कोटपूतली-कोटपूतली बहरोड़, लोसल (धोद)-सीकर, राजलदेसर-चूरू थोक सब्जी मण्डी-नोखा-बीकानेर, सब्जी मण्डी-सवाई माधोपुर, बयाना-भरतपुर अनार मण्डी जीवाणा-जालोर में मूलभूत सुविधाओं का निर्माण कराया जाएगा। गौण मण्डी यार्ड, मूंडवा-नागौर में विशिष्ट पान-मैथी यार्ड तथा आधारभूत संरचनाओं का विकास कार्य ग्रामीण हाट (झालरापाटन)-झालावाड़ के लिए 10 करोड़ रुपए का व्यय किया जाएगा।  </p>
<p><strong>समस्त जिलों में नवीन उपहार विक्रय केन्द्र होंगे शुरू </strong></p>
<ul>
<li>उपभोक्ताओं को गुणवत्तायुक्त ग्रोसरी एवं अन्य खाद्य उत्पाद उपलब्ध करवाये जाने के लिए नवगठित जिलों में जिला सहकारी उपभोक्ता भण्डार स्थापित किए जाएंगे। साथ ही, समस्त जिलों में नवीन उपहार विक्रय केन्द्र शुरू किए जाएंगे। </li>
<li>दूरदराज से कृषि उपज की बिक्री के लिए कृषि उपज मण्डियों में आने वाले किसानों को गर्मी एवं बरसात से बचाव के लिए शेड निर्माण सहित मण्डियों तक पहुंच मार्ग एवं यार्डों मेंअन्य आधारभूत कार्यों के लिए 350 करोड़ रुपए व्यय किए जाएंगे। </li>
</ul>
<p><strong>पशुपालन एवं डेयरी: 200 ग्राम पंचायतों में खोले जाएंगे पशु चिकित्सा उपकेन्द्र  </strong></p>
<p>न्यूनतम 3 हजार पशुधन वाली पशु चिकित्सा संस्था विहीन ग्राम पंचायतों में से गहनौली (नदबई)-भरतपुर, धांधोला (जहाजपुर), बांगोलिया (रायपुर)-भीलवाड़ा, पावली (राशमी)-चित्तौड़गढ़, गढ़ोरा (सिकराय)-दौसा, रतनपुरा (संगरिया) -हनुमानगढ़, सामोर (आंधी)-जयपुर, आलवाड़ा (सायला)-जालोर, रेवासा दलेलपुरा (नावां)-डीडवाना कुचामन, संगतडा-सलूम्बर, 17 एमडी (घड़साना) -श्रीगंगानगर सहित 200 ग्राम पंचायतों में पशु चिकित्सा उपकेन्द्र खोले जायेंगे। </p>
<p>ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में क्रमश: 6 किमी.की परिधि में न्यूनतम 5 हजार पशुधन तथा 4 किमी.की परिधि में न्यूनतम 3 हजार पशुधन की अनिवार्यता को प्राथमिकता देते हुए चतरपुरा (बानसूर)-कोटपूतली बहरोड़, मालपुर (गोविन्दगढ़)-अलवर, लीडी (पीसांगन)-अजमेर, बामडला (सेड़वा)-बाड़मेर, नवलपुरा (लाखेरी)-बूंदी, कौरेर-डीग, घोटािद (सागवाड़ा)-डूंगरपुर, मांडियाई खुर्द (तिंवरी)-जोधपुर, कितलसर (डेगाना), हरसोलाव (मेड़तासिटी)-नागौर, डाबरकलां, सिरोही, टोडा का गोठडा, सावतगढ़ (देवली)-टोंक, तलावड़ा (खण्डार)-सवाई माधोपुर, गोमावाली (विजयनगर)- श्रीगंगानगर, खिवाड़ा (राणी)-पाली सहित 25 पशु चिकित्सा उपकेन्द्रों को पशु चिकित्सालय में क्रमोन्नत किया जाएगा।  </p>
<p>ग्रामीण क्षेत्रा में 6 किमी.की परिधि में न्यूनतम 5 हजार पशुधन तथा शहरी क्षेत्रा में 4 किमी.की परिधि में न्यूनतम 2 हजार पशुधन की पात्राता रखने वाले उपरेड़ा (बनेड़ा)-भीलवाड़ा, बिलोठी (सेवर)-भरतपुर, थांवला, राजमहल, चांदली (देवली)-टोंक, बान्दनवाड़ा (भिनाय)-अजमेर, अजबपुरा (नारायणपुर), बुद्ध विहार-अलवर, द्वारापुरा (बांदीकुई)-दौसा, जखराना-कोटपूतली बहरोड़, कठोती (जायल)-नागौर, कोटडी सिमारला (श्रीमाधोपुर)-सीकर, भालेरी (तारानगर)-चूरू, नेवरी व इन्द्रपुरा (उदयपुरवाटी)-झुंझुनूं सहित 50 पशु चिकित्सालयों को प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालयों में क्रमोन्नत किया जाएगा।  </p>
<p>प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालय से बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय में क्रमोन्नयन- जमवारामगढ़-जयपुर, खेतड़ी-झुंझुनूं, फलौदी बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय, झालरापाटन-झालावाड़ के भवन निर्माण के लिए 15 करोड़ रुपये का व्यय किया जाएगा।  </p>
<p>प्रदेश में डेयरी एवं दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हमारे द्वारा गठित राजस्थान सहकारी डेयरी अवसंरचना विकास कोष की राशि एक हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर दो हजार करोड़ रुपये किये जाने की घोषणा। </p>
<p>सरस ब्राण्ड को गुणवत्तापूर्ण राष्ट्रीय डेयरी ब्राण्ड के रूप में स्थापित करने के लिए एनसीआर, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में सरस उत्पादों के आउटलेट्स खोले जायेंगे। इसके लिए 100 करोड़ रुपये का व्यय किया जाएगा।</p>
<p>दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ दुग्ध उत्पादकों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक सम्बल योजना के अंतर्गत वर्तमान में 5 रुपये प्रति लीटर अनुदान दिया जा रहा है। आगामी वर्ष इस योजना में 700 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाना प्रस्तावित है। इससे लगभग 5 लाख पशुपालक लाभान्वित होंगे। </p>
<p>विकसित राजस्थान @2047 के लिए प्रदेश में मिल्क प्रोसेसिंग कैपेसिटी 200 लाख लीटर प्रतिदिन तथा दूध और दुग्ध उत्पाद बिक्री केन्द्रों की संख्या एक लाख किये जाने का लक्ष्य है। इसके लिए प्रदेश के उपभोक्ताओं को गुणवत्तायुक्त दूध व मिल्क प्रोडक्ट्स उपलब्ध कराने, मिल्क प्लांट्स की स्थापना, अपग्रेडेशन एवं विस्तार करने की दृष्टि से विभिन्न कार्य करवाये जाएंगे। </p>
<p><strong>दुग्ध केन्द्र/संयंत्रा की स्थापना/संवर्द्धन कार्य  </strong></p>
<ul>
<li>ग्रामीण क्षेत्र में आगामी वर्ष होगी एक हजार नवीन दुग्ध संकलन केन्द्रों स्थापना</li>
<li>आगामी वर्ष, ग्रामीण क्षेत्र में एक हजार नवीन दुग्ध संकलन केन्द्रों की स्थापना की जाएगी।  </li>
<li>अलवर में 3 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता के मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट के लिए 200 करोड़ रुपये का व्यय किया जाएगा।  </li>
<li>बारां तथा सिरोही में के 50 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता के मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट के लिए 100 करोड़ रुपए का व्यय किया जएगा।  </li>
<li>जैसलमेर मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट का सुदृढ़ीकरण करते हुए क्षमता 30 हजार लीटर से बढ़ाकर 50 हजार लीटर प्रतिदिन की जायेगी। इस पर 25 करोड़ रुपये का व्यय होगा।  </li>
<li>ग्रामीण क्षेत्रा में दुग्ध व दुग्ध उत्पादों के विपणन के साथ-साथ रोजगार उपलब्ध कराये जाने के लिए 500 डेयरी बूथ आवंटित किये जाएंगे।</li>
<li>एक लाख पशुपालकों को वेल्यू एडेड दुग्ध आधारित उत्पाद- शुद्ध घी, मावा, पनीर, मिठाई आदि तैयार किये जाने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। </li>
<li>प्रदेश में मुर्गीपालन तथा गो उत्पादों को बढ़ावा दिये जाने की दृष्टि से विभिन्न कार्य करवाये जायेंगे, जिनमें मुर्गीपालन/गोशाला संवर्द्धन सम्बन्धी विभिन्न कार्य प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, चित्तौड़गढ़, सिरोही, जालोर, पाली आदि में हैचरी, कोल्ड स्टोरेज एवं प्रोसेसिंग यूनिट की सुविधायुक्त बैक यार्ड के 35 पॉलट्री के 35 क्लस्टर्स महिला शक्ति पोल्ट्री समूह के माध्यम से स्थापित किये जायेंगे। इसके अन्तर्गत प्रति ब्सनेजमत 10 लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा।  </li>
<li>उचित मूल्य पर मुर्गी दाना उपलब्ध करवाने के लिए तबीजी-अजमेर में पॉलट्री, फीड यूनिट स्थापित की जाएगी।  </li>
<li>गोशालाओं द्वारा उत्पादित गोकाष्ठ के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए 100 गोशालाओं को रियायती दर पर गोकाष्ठ मशीनें उपलब्ध करवायी जाएंगी।  </li>
<li>गो उत्पादों को प्रोत्साहन देने व आमजन में जागरूकता बढ़ाने के लिए राज्य स्तरीय प्रदर्शनी लगायी जाएगी।  </li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Feb 2026 11:39:06 +0530</pubDate>
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                <title>सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए केंद्र सरकार ला रही नया आईटी नियम: AI Misinfo, Deepfake जांच के दायरे में</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने इंटरनेट पर डीपफेक और गुमराह करने वाले AI से बने कंटेंट से निपटने के लिए एक नए कानून को नोटिफाई किया है। इसके तहत प्लेटफॉर्म और यूज़र्स को ऐसी सामग्री साफ तौर पर बतानी होगी जो असली नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/gadgets/central-government-is-bringing-new-it-rules-for-social-media/article-142672"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(15)4.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार ने डीपफेक और भ्रामक एआई कंटेंट पर रोक लगाने के लिए सख्त आईटी नियम अधिसूचित किए हैं। नए कानून के तहत एआई से बने या बदले गए फोटो, वीडियो और ऑडियो को स्पष्ट रूप से लेबल करना अनिवार्य होगा। इंस्टाग्राम और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म को भी ऐसे कंटेंट पर साफ चेतावनी देनी होगी, ताकि यूजर्स गुमराह न हों। शिकायत निवारण की समयसीमा घटाकर दो घंटे में शिकायत स्वीकार और सात दिन में समाधान तय किया गया है। इन कदमों का उद्देश्य ऑनलाइन पारदर्शिता बढ़ाना, एआई के दुरुपयोग को रोकना और डिजिटल धोखाधड़ी पर तेजी से कार्रवाई करना है।</p>
<p><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>गैजेट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Feb 2026 18:29:34 +0530</pubDate>
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                <title>साल भर की पढ़ाई ही दिलाएगी सफलता, घबराएं नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[एग्जाम टिप्स: टीचर बोले पढ़ाई के दौरान आधुनिक तकनीक एआई का भी लिया जाता सहारा ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/only-year-long-study-will-lead-to-success--don-t-panic/article-142588"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(12200-x-600-px)-(9).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। बोर्ड परीक्षाओं की पदचाप के बीच विद्यार्थियों में बढ़ते तनाव को देखते हुए शिक्षा विशेषज्ञों ने सफलता के मूल मंत्र साझा किए हैं।वहीं दैनिक नवज्योति की खास रिपोर्ट में पढ़िए शिक्षकों ने कहा कि बोर्ड परीक्षा कोई हौवा नहीं है; इसमें वहीं सवाल पूछे जाते हैं। जो छात्रों ने वर्षभर अपनी कक्षाओं में शिक्षकों से पढ़े हैं। उन्होंने जोर दिया कि नई अध्ययन सामग्री के पीछे भागने के बजाय छात्र अपने शिक्षकों द्वारा पढ़ाए गए पाठ्यक्रम और विषयवस्तु पर ही पूरा भरोसा रखें और उसी का गहन अभ्यास करें। समय प्रबंधन और छोटे लक्ष्यों से हासिल होगी जीत परीक्षा के दौरान समय का सही नियोजन ही सफलता की कुंजी है। वहीं टीचरों ने बताया कि समय-समय पर डिजिटल क्लास रूम में बच्चों को बैठकर आधुनिक तकनीकी से रूबरू करवाया जाता व पढ़ाई करवाई जाती।</p>
<p><strong>लिखकर याद करने का फॉमूर्ला </strong><br />अक्सर छात्र कठिन विषयों को देखकर तनाव में आ जाते हैं। इसके समाधान के लिए कठिन विषय वस्तुओं का बार-बार दोहरान करना आवश्यक है। जो हिस्से याद करने में कठिन लगें, उन्हें छोटे-छोटे नोट्स के रूप में हाथ से लिखकर याद करें। हाथ से लिखे नोट्स मस्तिष्क में लंबे समय तक स्थायी रहते हैं।</p>
<p><strong>संवाद और आत्मविश्वास है जरूरी </strong><br />पढ़ाई के पाठ्यक्रम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटें और कठिन विषयों को पहले निपटाएं। पढ़ाई के बीच 5-10 मिनट का ब्रेक लें। पौष्टिक भोजन करें, पर्याप्त पानी पीएं। परीक्षा की रात अच्छी नींद लें, क्योंकि यह एकाग्रता और सोचने की क्षमता को बेहतर बनाती है। खुद पर विश्वास रखें और अपनी तैयारी पर ध्यान केंद्रित करें। परिणाम के बारे में चिंता न करें। यदि तनाव हावी हो रहा है,तो दोस्तों,परिवार या शिक्षकों से बात करें। वहीं पढ़ाई के दौरान आधुनिक तकनीकों का भी सहारा लिया जाता हैं।<br /><strong>-सुनीता मेहरा, प्रिंसिपल महा. गांधी गवर्नमेंट स्कूल, महावीर नगर फर्स्ट कोटा </strong></p>
<p><strong> वर्षभर जो पढ़ा उसमें से ही प्रश्न पूछे जाते</strong><br />बोर्ड परीक्षा की तैयारी करने के दौरान ये याद रखें कि जो आपने वर्षभर पढ़ा उस में से ही प्रश्न आते। अत: जो शिक्षकों ने पढ़ाया है उन्ही विषयवस्तुओं को आप अच्छे से पढ़ें। परीक्षा में कोई भी प्रश्न अनुत्तरित ना छोड़े। परीक्षा के दौरान समय प्रबंधन अतिमहत्वपूर्ण है। प्रतिदिन विषयवार छोटे-छोटे उद्देश्य बनायें, उनको प्राप्त करें। जिससे आपका विषय पूर्ण रूप से तैयार हो जाएगा।कठिन विषयवस्तुओं का दोहरान करें। जो याद नहीं हो पा रहा उसे छोटे छोटे नोट्स के रूप में हाथ से लिखें। मोबाइल और सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रखें।वहीं समय-समय पर आधुनिक तकनीक जिसमे एआई समेत अन्य तकनीकों का सहारा लिया जाता।<br /><strong>- रूपेश गुप्ता, विज्ञान विषय, महा. गांधी राज. विद्या.,मल्टीपर्पज, गुमानपुरा</strong></p>
<p><strong> संस्कृत व्याकरण का जुलाई से ही शुरू हो जाता है अभ्यास </strong><br />बोर्ड परीक्षा के नाम से छात्र-छात्राओं में भय व्याप्त हो जाता है। हम छात्रों को सत्र के प्रारंभ से ही बोर्ड पाठ्यक्रम के अनुसार अध्यापन और प्रश्नोत्तर की तैयारी करवाते हैं। तीनों परख व प्री बोर्ड के प्रश्नों की संभावित बोर्ड प्रश्नों को आधार बनाकर प्रश्न पत्र तैयार करते हैं। संस्कृत विषय में व्याकरण महत्वपूर्ण है।जुलाई माह से ही पिछली कक्षाओं के व्याकरण को दोहराते हुए बोर्ड के निर्धारित पाठ्यक्रम पर ध्यान केंद्रित कर अधिक से अधिक बार पाठ्यक्रम को दोहराने का प्रयास करवाया जाता हैं। जिससे विद्यार्थी आत्मविश्वास से पूर्ण, विद्यार्थी तनाव मुक्त होकर परीक्षा देते हैं।<br /><strong>- नरेन्द्र कन्सूरिया, व्याख्याता संस्कृत, राउमावि, शिवपुरा</strong></p>
<p><strong>चार्ट और क्लास टेस्ट से होती है तैयारी </strong><br />कृषि विज्ञान में बोर्ड परीक्षा में उच्च अंक प्राप्त करने के लिए विषयों का विस्तृत अध्ययन करे। उसके बाद घर में पुन: पढ़कर नोट्स बनाने को कहा जाता हैं। साथ ही समय-समय पर बच्चों के क्लास टेस्ट लिए जाते हैं। कृषि विज्ञान में विभिन्न फसलों जैसे खाद्यान्न फसलों दलहनी फसलों तिलहनी फसलों तथा विभिन्न सब्जियों की खेती की संपूर्ण जानकारी विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान दी जाती हैं। ताकि विद्यार्थी आसानी से याद कर सकें। वैसे विद्यार्थियों को कृषि विज्ञान विषय दैनिक जीवन की जरूरतों से जोड़कर पढ़ाया व समझाया जाता हैं। समय-समय पर विद्यार्थियों को चार्टस बनाकर विभिन्न जानकारी दी जाती हैं।<br /><strong>- तृप्ति पालीवाल व्याख्याता, कृषि विज्ञान रा.उ.मा.बि, दादाबाड़ी</strong></p>
<p><strong>स्व-चिंतन' से सुधारें अपनी गलतियां</strong><br />विज्ञान वर्ग की में अध्यापिका होने के चलते में ये ही कहूंगी की परीक्षा में बैठने वाले विद्यार्थियों को परीक्षा में अच्छे मार्क्स स्कोर करने के लिये आत्मविश्वास सर्वोपरि है। पूर्व बोर्ड परीक्षा के सॉल्व प्रश्नों को हल करके स्व-चिंतन करते हुए गलतियों को सुधार करने का प्रयास करें। मुख्य विषय वस्तु के शॉर्ट नोट्स का दोहरान मन मे करते रहे। तनाव रहित रहे, पर्याप्त नींद लें। रात को पढ़े गए का सुबह उठ कर दोहरान करे।<br /><strong>-नेहा गुप्ता विज्ञान अध्यापक, कोटा शहर</strong></p>
<p><strong>पूर्व परीक्षा के प्रश्नों को हल करे</strong><br /> स्टूडेंट को ्रपूरे साल ही सिलेबस को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर पढ़ने की सलाह देते है। परीक्षा नजदीक आने के दौरान ज्यादा से ज्यादा रिवीजन करे। दिमाग को शांत रखे एवं आसपास का माहौल व्यवस्थित रखने की कोशिश करे। पढ़ाई के साथ साथ अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें क्योंकि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है।<br />पूर्व वर्ष के परीक्षा प्रश्न पत्र हल करे जिससे परीक्षा से पहले स्वयं के आत्मविश्वास में वृद्धि होगी।<br /><strong>- दीपिका चाँदसिन्हा,वरिष्ठ अध्यापक हिन्दी,राजकीय उच्च मा.वि. सकतपुरा</strong></p>
<p><strong>एकाग्रता और स्वयं के नोट्स से मिलेगी सफलता </strong><br />परीक्षा माध्यम से ही विद्यार्थी वर्षभर की मेहनत का फल प्राप्त करना है। सतर्क रहते हुए विषयवस्तु का अध्ययन करना इस समय विद्यार्थियों को सिर्फ अपने अध्ययन पर ही ध्यान केन्द्रित करना है। नियमित निंद्रा लें, और समय का ध्यान रखें।इस समय एकान्त में एवं एकाग्रचित्त होकर अध्ययन करें। स्वयं के बनाये नोट्स पढ़ें। बड़े उत्तरों को याद करने के लिए मुख्य-मुख्य बिन्दु याद रखें। साथ ही परीक्षा के हॉल में समय का भी ध्यान रखें।<br /><strong>- महेश सुमन,वरिष्ठ अध्यापक संस्कृत</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Feb 2026 14:55:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत के टेक फ्यूचर की झलक ‘2NM चिप’: भारत पहली बार टेक्नोलॉजी के डिजाइन मैप पर मजबूती से उभरा, अश्विनी वैष्णव की उंगलियों के बीच दिखी 2ल्ले चिप  </title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 2एनएम चिप दिखाई। क्वालकॉम द्वारा भारत में डिजाइन यह उपलब्धि देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनने की दिशा में आगे बढ़ाती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/gadgets/glimpse-of-indias-tech-future-2nm-chip-india-emerged-strongly/article-142394"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)7.png" alt=""></a><br /><div>नई दिल्ली। हाल ही में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव की एक तस्वीर ने भारत के तकनीकी क्षेत्र में एक नई दिशा को चिह्नित किया है, जिसमें उनकी दो उंगलियों के बीच एक छोटी सी 2 नैनोमीटर चिप को देखा जा सकता है। यह चिप भारत के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी मील का पत्थर साबित हो सकती है, खासकर तब जब इसे दुनिया की सबसे बड़ी सेमीकंडक्टर निमार्ता कंपनियों में से एक, क्वालकॉम द्वारा बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद स्थित अपने इंजीनियरिंग केंद्रों में डिजाइन किया गया है। इस चिप के डिजाइन का सफल टेप-आउट (अंतिम डिजाइन चरण) हाल ही में घोषित किया गया है, जो भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि है।</div>
<div> </div>
<div><strong>2एनएम चिप क्या है और क्यों है खास?</strong></div>
<div> </div>
<div>2एनएम चिप को नेक्स्ट-जेनरेशन सेमीकंडक्टर तकनीकी के रूप में जाना जा रहा है। यह चिप ट्रांजिस्टर डेंसिटी (ट्रांजिस्टर की संख्या) के मामले में अत्यधिक प्रभावी हैं, जिससे अधिक डेटा प्रोसेसिंग और कम ऊर्जा खपत संभव होती है। विशेष रूप से, यह चिप्स मौजूदा 5एनएम और 3एनएम चिप की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करती हैं। आधिकारिक तौर पर दावा किया जा रहा है कि 2एनएम चिप का उपयोग होने के बाद ऊर्जा खपत में 45% तक की कमी आएगी। यह चिप न केवल स्मार्टफोन्स, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (अक), इंटरनेट ऑफ थिंग्स और अन्य स्मार्ट गैजेट्स में भी इस्तेमाल हो सकती हैं। </div>
<div> </div>
<div><strong>भारत के लिए यह सफलता क्यों महत्वपूर्ण है?</strong></div>
<div> </div>
<div>क्वालकॉम द्वारा 2एनएम चिप का विकास भारत में करना एक बहुत बड़ा कदम है। भारत, जो पहले से ही वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की ओर अग्रसर है, अब सेमीकंडक्टर डिजाइनिंग में भी खुद को स्थापित करने की ओर बढ़ रहा है। क्वालकॉम के अनुसार, भारत में स्थित बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई उनके लिए अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा इंजीनियरिंग टैलेंट पूल है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव का मानना है कि यह भारत के डिजाइन इकोसिस्टम की बढ़ती क्षमता का प्रमाण है।</div>
<div> </div>
<div><strong>इस चिप का प्रभाव</strong></div>
<div> </div>
<div>आने वाले समय में 2एनएम चिप का प्रभाव सिर्फ स्मार्टफोन्स तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इनका उपयोग कई अन्य क्षेत्रों में भी होगा:</div>
<div>स्मार्टफोन्स: आगामी प्रीमियम स्मार्टफोन्स में इन चिप का उपयोग किया जाएगा।</div>
<div>आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (अक): एआई ऐप्लिकेशंस के लिए यह चिप बहुत कारगर साबित हो सकती हैं, क्योंकि वे बड़े पैमाने पर डेटा प्रोसेसिंग में मदद करती हैं।</div>
<div>इंटरनेट ऑफ थिंग्स : स्मार्ट होम डिवाइस, स्मार्ट वियरेबल्स और अन्य उपकरणों में भी इन चिप का प्रभावी उपयोग होगा।</div>
<div>ऑटोमोटिव इंडस्ट्री: स्वचालित वाहन और कनेक्टेड कारों में भी इन चिप का इस्तेमाल हो सकता है, जो इन तकनीकों को और अधिक सक्षम बनाएगा।</div>
<div>डेटा सेंटर: 2एनएम चिप की ऊर्जा दक्षता और प्रोसेसिंग स्पीड डेटा सेंटर   ऑपरेशंस को अधिक प्रभावी बनाएगी।</div>
<div> </div>
<div><strong>भारत की तकनीकी क्रांति</strong></div>
<div> </div>
<div>भारत का सेमीकंडक्टर डिजाइनिंग क्षेत्र एक नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। क्वालकॉम जैसी कंपनियों के बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई में स्थापित इंजीनियरिंग केंद्रों में इस तकनीक का विकास भारत के बढ़ते तकनीकी सामर्थ्य का प्रतीक है। भारत के पास अब विश्व स्तरीय डिजाइनिंग टैलेंट, उच्च गुणवत्ता वाली इंजीनियरिंग टीम और विशाल मैन्युफैक्चरिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर है, जो उसे वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में प्रमुख खिलाड़ी बना सकता है। अगर भारत इस क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करता है, तो वह न केवल अमेरिका और चीन के समकक्ष खड़ा हो सकता है, बल्कि सेमीकंडक्टर डिजाइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में एक वैश्विक नेता के रूप में उभर सकता है।</div>
<div> </div>
<div><strong>2एनएम चिप अब तक कहाँ बन रही हैं?</strong></div>
<div> </div>
<div>2 नैनोमीटर चिप एक नई तकनीक हैं, जो सेमीकंडक्टर उद्योग में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हैं। अभी तक इस तकनीक पर काम कर रही कुछ प्रमुख कंपनियां और उनकी फैक्ट्रियां हैं, जहां यह चिप्स विकसित या निर्माण की प्रक्रिया में हैं।</div>
<div> </div>
<div>दुनिया की नंबर-1 चिप मैन्युफैक्चरर</div>
<div>लोकेशन: ताइवान</div>
<div>स्टेटस: सबसे आगे</div>
<div>उत्पादन: 2025 से</div>
<div>क्लाइंट्स लाइन में माना जा रहा है कि 18 के प्रोसेसर यहीं बनेंगे</div>
<div> </div>
<div><strong>दक्षिण कोरिया</strong></div>
<div> </div>
<div>टेक्नोलॉजी पर फोकस</div>
<div>लोकेशन: साउथ कोरिया</div>
<div>उत्पादन लक्ष्य: 2025</div>
<div> </div>
<div><strong>अमेरिका और यूरोप</strong></div>
<div> </div>
<div>अपनी 2एनएम तकनीक को 20ए / 18ए नाम से पेश कर रहा है</div>
<div> </div>
<div>लोकेशन: अमेरिका, जर्मनी, आयरलैंड</div>
<div>फोकस: हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, सर्वर और अक</div>
<div>स्टेटस: एडवांस टेस्टिंग स्टेज</div>
<div> </div>
<div><strong>अमेरिका - रिसर्च लेवल</strong></div>
<div> </div>
<div>कइट ने सबसे पहले 2ल्ले चिप का प्रोटोटाइप दिखाया</div>
<div>लोकेशन: न्यूयॉर्क रिसर्च लैब</div>
<div>उत्पादन नहीं, सिर्फ टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट</div>
<div>कइट की रिसर्च का फायदा ळरटउ और रें२४ल्लॅ को भी मिलता है</div>
<div>भारत में 2एनएम चिप कहां बन रही है?</div>
<div> </div>
<div>भारत में मैन्युफैक्चरिंग नहीं, लेकिन डिजाइन हो रहा है</div>
<div> </div>
<div>लोकेशन: बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई</div>
<div>काम: 2एनएम चिप का डिजाइन और टेप-आउट</div>
<div>मैन्युफैक्चरिंग: ताइवान या साउथ कोरिया में होगी</div>
<div>यह भारत के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है</div>
<div>2एनएम चिप बनाना इतना मुश्किल क्यों है?</div>
<div> </div>
<div><strong>टेक्नोलॉजी चैलेंज</strong></div>
<div> </div>
<div>एक मशीन की कीमत: 1.5 लाख करोड़ से ज्यादा</div>
<div>एक फैब प्लांट की लागत: 20-25 लाख करोड़।</div>
<div> </div>
<div><strong>2एनएम चिप के निर्माण की चुनौतियां</strong></div>
<div> </div>
<div>2एनएम चिप्स का निर्माण अत्यधिक जटिल प्रक्रिया है, क्योंकि इस तकनीक में बहुत छोटे ट्रांजिस्टर होते हैं जो मौजूदा तकनीकी प्रक्रियाओं की तुलना में बहुत अधिक सटीकता और अत्याधुनिक उपकरणों की आवश्यकता होती है। इसके निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री, जैसे कि हाई-प्रीसीजन मटेरियल और उन्नत पैटर्निंग तकनीक, चिप्स की निर्माण प्रक्रिया को और भी जटिल बनाती हैं।</div>
<div> </div>
<div><strong>भारत में 2एनएम चिप कब बनेगी?</strong></div>
<div> </div>
<div>भारत में अभी 2एनएम चिप नहीं बन रही, फिलहाल यह डिजाइन, टेस्टिंग में मजबूत हो रहा है</div>
<div>मैन्युफैक्चरिंग में आने में 5-7 साल लग सकते हैं।</div>
<div>अभी यह चिप केवल ताइवान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका में बन रही है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>गैजेट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 11:32:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत पहुंचे इटली के उप प्रधानमंत्री ताजानी, पीएम मोदी से करेंगे मुलाकात, इन मुद्दों पर होगी चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[इटली के डिप्टी पीएम और विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी बुधवार को भारत पहुंचे। इस वर्ष उनकी यह दूसरी भारत यात्रा है। वह दिल्ली व मुंबई में बैठकों के माध्यम से व्यापार, रक्षा, निवेश, एआई, अंतरिक्ष और शिक्षा सहित क्षेत्रों में भारत-इटली रणनीतिक सहयोग को मजबूत करेंगे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/italian-deputy-prime-minister-tajani-arrives-in-india-will-meet/article-135514"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/italy-deputy-prime-minister-met-s-jaishankar-discussed-taking-forward.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। इटली के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मामलों एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग मंत्री एंटोनियो ताजानी भारत और इटली के बीच रणनीतिक साझेदारी को गति प्रदान करने के मकसद से बुधवार को नयी दिल्ली पहुंचे। डिप्टी पीएम ताजानी इस साल दूसरी बार भारत के दौरे पर आये हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा, इटली के उप प्रधानमंत्री तथा विदेश मामलों एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग मंत्री एंटोनियो ताजानी का नयी दिल्ली पहुंचने पर हार्दिक स्वागत है। इस साल यह उनकी भारत की दूसरी यात्रा है। दिल्ली और मुंबई में उनके कार्यक्रम भारत-इटली रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेंगे।</p>
<p>डिप्टी पीएम ताजानी का यह दौरा द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए इटली की लगातार कोशिशों का हिस्सा है। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि वह बुधवार को यहां विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मिलेंगे और फिर गुरुवार को आधिकारिक कार्यक्रमों के लिए मुंबई जाएंगे। वह शुक्रवार को मुंबई से इटली के लिए रवाना होंगे।</p>
<p>डिप्टी पीएम ताजानी का यह दौरा 23 नवंबर को दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी के साथ हुई मुलाकात के बाद हो रहा है। उस दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, रक्षा, इनोवेशन, कृत्रिम बुद्धि (एआई), अंतरिक्ष और शिक्षा सहित कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने पर चर्चा की थी।</p>
<p>बैठक के बाद पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा था, प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी के साथ बहुत अच्छी बैठक हुई। भारत-इटली रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है, जिससे हमारे देशों के लोगों को बहुत फ़ायदा हो रहा है। उन्होंने एक अन्य पोस्ट में कहा, हमने व्यापार, निवेश, रक्षा, इनोवेशन, एआई, अंतरिक्ष और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में अपने सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा की। उन्होंने एक नयी पहल की भी घोषणा करते हुए कहा, भारत और इटली आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने में सहयोग के लिए एक संयुक्त पहल की घोषणा कर रहे हैं। यह एक जरूरी और सही समय पर उठाया गया कदम है, जो आतंकवाद और उसके समर्थक नेटवर्क के खिलाफ़ मानवता की लड़ाई को मजबूत करेगा।</p>
<p>गौरतलब है कि, भारत और इटली के बीच कूटनीतिक संबंध की शुरुआत 1947 में हुई थी और 2023 में दोनों देशों में अपने रिश्तों की 75वीं सालगिरह मनायी थी। इटली अभी जर्मनी, बेल्जियम और नीदरलैंड्स के बाद यूरोपियन यूनियन में भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Dec 2025 18:05:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>Google CEO सुंदर पिचाई का चौकानें वाला खुलासा, बोलें-AI की हर बात पर न करें आंख मूंदकर भरोसा, जानें क्यों ?</title>
                                    <description><![CDATA[गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने चेतावनी दी कि एआई पर पूरी तरह निर्भर होना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि भविष्य में एआई उनकी नौकरी भी ले सकता है। पिचाई के अनुसार, एआई जटिल काम खुद करने लगेगा, नई नौकरियां पैदा करेगा और कुछ को खत्म भी करेगा, इसलिए लोगों को अभी से सीखना जरूरी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/gadgets/google-ceo-sundar-pichais-shocking-revelation-dont-blindly-trust-everything/article-133104"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/sunder.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। आज के समय में शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति होगा जो कि एआई का इस्तेमाल नहीं करता होगा, चाहे वो पढ़ने के लिए बच्चा हो या फिर ऑफिस में काम करने वाला कर्मचारी। हर कोई एआई का इस्तेमाल जरूर करता है। इसी बीच गुगल के सीईओ सुंदर​ पिचाई एक  चौकाने वाला खुलासा किया है, जिसके बारे में जानकर शायद आपको भी धक्का लग जाए। दरअसल, सुंदर पिचाई ने कहा है कि, हमें आंख मूंदकर एआई भरोसा नहीं करना चाहिए। इतना ही नहीं, सुंदर पिचाई ने तो यहां तक कह दिया कि, हो सकता है आने वाले समय में  एआई मैरी नौकरी भी खा जाए। </p>
<p>इसके आगे उन्होंने कहा कि, आने वाले कुछ महीनों या सालों में एआई इतना तेज हो जाएगा कि, वो इंसानों की तरह हर जटिल काम भी खुद कर सकेगा। इसका मतलब ये है कि, आपको सिर्फ बोलना होगा और आपका काम हो जाएगा। अब सवाल ये सामने आता है कि, सुंदर पिचाई की ये बात अच्छी है या खराब? इसके आगे सुंदर पिचाई ने कहा कि, आने वाले समय में एआई नई नौकरियां भी बनाएगा और कुछ को खत्म भी कर देगा, इसलिए लोग जितना जल्दी इसके बारे में समझ जाए या सीख जाए उतना ही अच्छा है। </p>
<p>इसलिए सुंदर पिचाई ने कहा है कि, एआई हर काम को करने में काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है। अब देखने की बात ये है कि, क्या भविष्य में एआई इंसानों की नौकरियों का खाएगा या फिर नहीं? हर व्यक्ति में मन में एआई को लेकर ये सवाल एक बार तो जरूर उठता है। इसके आगे उन्होंने कहा कि, असली ताकत तो तब है जब इंसान और एआई दोनों साथ मिलकर एक साथ काम करें। क्योंकि ये आने वाला भविष्य है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>गैजेट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Nov 2025 18:43:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>भारत में लॉन्च हुआ स्वदेशी एआई चैटबॉट</title>
                                    <description><![CDATA[एआई की वैश्विक दौड़ में भारत ने बड़ा कदम बढ़ाते हुए काइवेक्स नाम का स्वदेशी एआई सर्च इंजन लॉन्च किया है। 100% भारतीय इंजीनियरों द्वारा विकसित यह डीप रिसर्च आधारित एआई असिस्टेंट पूरी तरह मुफ्त है। वेब पर उपलब्ध काइवेक्स जल्द ही ऐप रूप में भी आएगा और चैटजीपीटी जैसे अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म को चुनौती देगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/indigenous-ai-chatbot-launched-in-india/article-132362"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/11-(14).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत ने एआई की दौड़ में तेजी से आगे बढ़ने की ठान ली है। अब तक अमेरिका का दबदबा इस क्षेत्र में रहा है। चैटजीपीटी और ग्रोक जैसे बड़े एआई सर्च इंजन को टक्कर देने के लिए अब भारत का स्वदेशी इंजन आया है। इस एआई सर्च इंजन का नाम काइवेक्स है। काइवेक्स एक खास एआई असिस्टेंट है। यह डीप रिसर्च पर ध्यान देता है। कंपनी के खुद के लार्ज लैंग्वेज मॉडल से चलता है। यह सटीक और गहरे जवाब देता है। काइवेक्स पूरी तरह मुफ्त है। इसे इस्तेमाल करने के लिए कोई पैसा नहीं लगता। एजुकेशन, रिसर्च और कामकाज में सब इस्तेमाल कर सकते हैं। एआई को आम लोगों तक पहुंचाना इसका मकसद है। भारत में बने इस टूल को दुनिया भर में इस्तेमाल किया जा सकेगा।</p>
<p><strong>भारतीय इंजीनियरों ने बनाया</strong></p>
<p>काइवेक्स 100% भारतीय इंजीनियरों और रिसर्चरों ने बनाया है। इसे बनाने के लिए कोई विदेशी मदद नहीं ली गई। यह भारत की तकनीक की ताकत दिखाता है। भारतीय एआई एक्सपर्ट्स ने इसे तैयार किया। काइवेक्स को देश के बड़े शिक्षाविदों का समर्थन मिला है। आईआईटी दिल्ली के पूर्व डायरेक्टर प्रो. रामगोपाल राव, आईआईटी खड़गपुर के पूर्व डायरेक्टर प्रो. पी.पी. चक्रवर्ती और आईआईआईटी हैदराबाद के डायरेक्टर पी.जे. नारायणन से इसे समर्थन मिला है।</p>
<p><strong>काइवेक्स वेब पर उपलब्ध</strong></p>
<p>अभी काइवेक्स वेब पर उपलब्ध है। जल्द ही एंड्रॉयड और आईओएस ऐप आएंगे। ब्राउजर में भी जुड़ेगा। इससे ज्यादा लोग इस्तेमाल कर सकेंगे। यह भारत और दुनिया भर में पहुंचेगा। काइवेक्स भारत के स्टार्टअप जगत में नया मोड़ ला रहा है, क्योंकि डीप टेक में भारत की लीडरशिप बढ़ेगी।</p>
<p><strong>भविष्य के लिए बड़ी छलांग</strong></p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय बिजनेसमैन पर्ल कपूर काइवेक्स के फाउंडर और सीईओ हैं। उन्होंने कहा कि काइवेक्स भारत की भविष्य के लिए बड़ी छलांग है। हम रिसर्च और जानकारी खोजने का नया तरीका बना रहे हैं। वे भारत को एआई में लीडर बनाना चाहते हैं, सब इसका इस्तेमाल कर सकेंगे।</p>
<p><strong>चीन और अमेरिका के लिए चुनौती</strong></p>
<p>अक के क्षेत्र में अमेरिका और चीन का ही दबदबा रहा है। अमेरिका के पास पहले परप्लेक्सिटी, चैटजीपीटी और ग्रोक जैसे चैटबॉट हैं। जबकि चीन के पास भी डीपसीक जैसे तगड़े एआई चैटबॉट हैं। लिहाजा, दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा का दौर जारी है। लेकिन इसी बीच भारत की एंट्री होने से दोनों देशों को एक तीसरे प्लेयर से कड़ी टक्कर मिल सकती है।</p>
<p><strong>चैटजीपीटी की तरह ही फ्री में है यह चैटबॉट</strong></p>
<p>भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की दुनिया में एक बड़ा बदलाव आया है, जहां ओपन एआई ने अपने लोकप्रिय चैटजीपीटी गो सब्सक्रिप्शन को पूरी तरह फ्री कर दिया है। वहीं, ढी१स्र’ी७्र३८ एआई ने एयरटेल यूजर्स को एक साल का फ्री सब्सक्रिप्शन दिया था, जबकि मैटा एआई अप्रैल 2024 से व्हाट्स एप, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर फ्री उपलब्ध है। ऐसे में काइवेक्स भी बड़ी कंपनियों को टक्कर देने के लिए फ्री सुविधा ही दे रहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Nov 2025 11:42:01 +0530</pubDate>
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