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                <title>agriculture sector - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>agriculture sector RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद सस्ती होगी अमेरिकी दाल? कीमतों पर पड़ेगा बड़ा असर</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन ने "ऐतिहासिक" इंडिया-US ट्रेड डील की "मुख्य शर्तों" पर अपनी फैक्टशीट में बदलाव किया है, जिसमें यह दावा हटा दिया गया है कि नई दिल्ली "कुछ खास दालों" पर टैरिफ कम करेगी और $500 बिलियन की खरीद "कमिटमेंट" से जुड़े शब्दों में बदलाव किया गया है,]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/after-india-us-trade-deal-american-pulses-will-become-cheaper-there/article-142701"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)9.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली।  अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने तथाकथित “ऐतिहासिक” इंडिया-US ट्रेड डील से जुड़ी व्हाइट हाउस फैक्टशीट में अहम बदलाव किए हैं। अपडेटेड दस्तावेज़ में उन दावों को हटा दिया गया है जिनमें कहा गया था कि भारत “कुछ खास दालों” पर टैरिफ कम करेगा। साथ ही $500 बिलियन से अधिक अमेरिकी सामान खरीदने के “कमिटमेंट” शब्द को बदलकर “इरादा” कर दिया गया है।</p>
<p>पहले जारी फैक्टशीट में सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन (DDGs), लाल ज्वार, ट्री नट्स, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स के साथ “कुछ खास दालों” पर टैरिफ कटौती का उल्लेख था। संशोधित संस्करण में दालों का जिक्र पूरी तरह हटा दिया गया है। कृषि आयात भारत के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा है, क्योंकि देश दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है। किसानों के हितों की रक्षा के लिए इन श्रेणियों में ऊंचे टैरिफ लगाए जाते रहे हैं।</p>
<p>इसके अलावा, पहले के टेक्स्ट में भारत द्वारा $500 बिलियन से अधिक अमेरिकी ऊर्जा, ICT, कृषि और अन्य उत्पाद खरीदने का “वादा” बताया गया था। अब कृषि उत्पादों का उल्लेख हटाते हुए इसे केवल “इरादा” कहा गया है। डिजिटल सर्विसेज़ टैक्स हटाने संबंधी दावा भी संशोधित कर दिया गया है।</p>
<p>ये बदलाव कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की आलोचना के बाद सामने आए, जिन्होंने डील को “PR में लिपटा धोखा” बताया था। वहीं, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने दोहराया कि भारतीय किसानों और संवेदनशील सेक्टरों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है और डील “फेयर, बराबर और बैलेंस्ड” है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Feb 2026 11:17:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पीयूष गोयल का संसद को आश्वासन, कहा भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौता में खाद्य, कृषि क्षेत्र की संवेदनशीलता का रखा ध्यान </title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने संसद को आश्वस्त किया कि भारत–अमेरिका व्यापार समझौते में कृषि और दुग्ध जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के हित सुरक्षित रखे गए हैं, जिससे निर्यात और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/piyush-goyals-assurance-to-the-parliament-said-that-india-took/article-141934"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(9)3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते की जानकारी संसद के बाहर दिये जाने पर विपक्ष के कड़े विरोध के बाद बुधवार को सरकार ने संसद को आश्वस्त किया कि इस समझौते में देश के खाद्य एवं कृषि क्षेत्र की प्रमुख संवेदनशीलताओं का पूरा ध्यान रखा है।     वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने संसद के दोनों सदनों में दिये गये वक्तव्यों में कहा कि भारत समझौते में अपने संवेदनशील क्षेत्रों, विशेषकर कृषि और दुग्ध क्षेत्रों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने में सफल रहा है। उन्होंने कहा कि इसी तरह अमेरिका के भी कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जो उनके दृष्टिकोण से संवेदनशील हैं। उन्होंने कहा कि यह समझौता लघु एवं मध्यम उद्यमों, उद्यमियों, कुशल श्रमिकों और उद्योग के लिए नये अवसर खोलेगा, उन्नत प्रौद्योगिकियों तक पहुंच को सुगम बनाएगा और भारत के मेक इन इंडिया फॉर द विश्व, डिजाइन इन इंडिया फॉर द वल्र्ड और इन्नोवेट इन इंडिया फॉर द वल्र्ड के दृष्टिकोण को साकार करने में सहायक होगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पिछले वर्ष फरवरी की अमेरिका यात्रा के बाद से भारत और अमेरिका संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी द्विपक्षीय व्यापार समझौते को संपन्न करने के उद्देश्य से नियमित रूप से चर्चा करते रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए, दोनों पक्षों के कारों ने पिछले एक वर्ष में विभिन्न स्तरों पर गहन बातचीत की है। दोनों पक्षों के महत्वपूर्ण और विविध हितों को देखते हुए यह स्वाभाविक है कि दोनों पक्ष अपनी-अपनी अर्थव्यवस्थाओं के महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा करते हुए सर्वोत्तम संभव परिणाम सुनिश्चित करना चाहेंगे।</p>
<p>पीयूष गोयल ने कहा कि इन के दौरान लगभग एक वर्ष तक चले कई दौर के विचार-विमर्श के बाद, दोनों कार दल द्विपक्षीय व्यापार समझौते के कई क्षेत्रों को अंतिम रूप देने में सफल रहे हैं। पीएम मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो फरवरी को द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व के कई मुद्दों पर फोन पर चर्चा की। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने अमेरिका को किए जाने वाले भारतीय निर्यात पर टैरिफ की दर घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की।</p>
<p>वाणिज्य मंत्री ने कहा, मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि यह अमेरिका द्वारा कई प्रतिस्पर्धी देशों पर लगाये गये आयात कर से कम है, जिससे अमेरिकी बाजार में भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होगी। यह समझौता भारतीय निर्यातकों को, विशेष रूप से श्रम-प्रधान क्षेत्रों और विनिर्माण में, महत्वपूर्ण तुलनात्मक लाभ भी प्रदान करता है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक ढांचागत समझौता भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने और विकसित भारत 2047 की दिशा में हमारी यात्रा को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है तथा यह दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक देशों के बीच मजबूत जुड़ाव को भी दर्शाता है, जो स्वाभाविक साझेदार हैं और साझा समृद्धि के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।</p>
<p>वाणिज्य मंत्री ने कहा कि दोनों पक्ष व्यापार समझौते से संबंधित आवश्यक तकनीकी प्रक्रियाओं को पूरा करने और कागजी कार्यवाही को अंतिम रूप देने के लिए मिलकर काम करेंगे, ताकि इसकी पूरी क्षमता का शीघ्रता से लाभ उठाया जा सके। समझौते की विस्तृत रूपरेखा इन प्रक्रियाओं के समापन के पश्चात तुरंत घोषित की जायेगी।</p>
<p>पीयूष गोयल ने कहा, सदस्यों को भारत के ऊर्जा स्रोतों से संबंधित उन मुद्दों की जानकारी होगी, जो इस समझौते पर हुई चर्चाओं के दौरान उठाये गये हैं। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं, जैसा कि सरकार ने कई बार सार्वजनिक रूप से कहा है, कि 140 करोड़ भारतीयों की ऊर्जा आवश्यकताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। वस्तुनिष्ठ बाजार स्थितियों और बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्यों के अनुरूप ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना हमारी कार्यनीति का मूल आधार है। भारत की सभी कार्रवाइयां इसी बात को ध्यान में रखकर की जाती हैं। अत: मैं माननीय सदस्यों से इन मुद्दों को समुचित दृष्टिकोण से देखने का आग्रह करता हूं।</p>
<p>उन्होंने कहा, दोनों देशों के बीच भावी व्यापार अवसरों के संदर्भ में सदस्य इस बात को समझेंगे कि भारत और अमेरिका काफी हद तक एक-दूसरे की पूरक अर्थव्यवस्थाएं हैं। जैसे-जैसे भारत विकसित भारत के पथ पर अग्रसर हो रहा है, हमें ऊर्जा, उड्डयन, डेटा केंद्र, परमाणु ऊर्जा आदि सहित कई क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं को बढ़ाने की आवश्यकता होगी। अमेरिका इन क्षेत्रों में दुनिया का अग्रणी देश है, इसलिए हमारे लिए इन क्षेत्रों में व्यापार की संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित करना स्वाभाविक है, जिससे न केवल हमारी खरीद में बल्कि हमारे अपने निर्यात में भी विस्तार होगा। अत: हमारा अनुमान है कि तुलनात्मक लाभ के परिणामस्वरूप कई क्षेत्रों में भारत का निर्यात अमेरिका में भी काफी बढ़ेगा।</p>
<p>केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के साथ यह ढांचागत समझौता, जो आने वाले वर्षों में वैश्विक विकास और नवाचार को गति प्रदान करेगा, भारत की जनता एवं राष्ट्र के व्यापक हित में है। यह विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत दोनों को सशक्त बनाता है। सरकार देश के लिए प्रधानमंत्री के इस ²ष्टिकोण को साकार करने की दिशा में निरंतर कार्य करती रहेगी। </p>
<p>गौरतलब है कि, विपक्ष इस बात को लेकर हमलावर है कि संसद सत्र के दौरान इस समझौते के बारे में जानकारी संसद से बाहर सार्वजनिक की गयी। गोयल ने मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन में इस समझौते के बारे में जानकारी दी थी। इससे पहले विपक्ष के सदस्यों ने संसद के दोनों सदनों में सरकार से समझौते के बारे में वक्तव्य देने की मांग की थी।  </p>
<p>वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को फिर कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौता (एजेंसी) के दौरान भारत ने देश के खाद्य एवं कृषि क्षेत्र की प्रमुख संवेदनशीलताओं का पूरा ध्यान रखा है। पीयूष गोयल ने लोक सभा में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के संबंध में दोनों देशों की ओर से की गयी घोषणाओं पर अपने एक वक्तव्य में कहा कि भारतीय पक्ष अपने संवेदनशील क्षेत्रों, विशेषकर कृषि और दुग्ध क्षेत्रों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने में सफल रहा है। अमेरिकी पक्ष के भी कुछ ऐसे क्षेत्र हैं, जो उनके दृष्टिकोण से संवेदनशील हैं।  </p>
<p>गौरतलब है कि, पीयूष गोयल ने मंगलवार को संवाददाता सम्मेलन में भी कहा था कि अमेरिका के साथ होने वाले व्यापार समझौते में भारत कृषि क्षेत्र की संवदेनशीलता का ध्यान रखेगा। इस बारे में की गयी में यह स्पष्ट भी किया गया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता लघु एवं मध्यम उद्यमों, उद्यमियों, कुशल श्रमिकों और उद्योग के लिए नये अवसर खोलेगा, उन्नत प्रौद्योगिकियों तक पहुंच को सुगम बनाएगा और भारत के'मेक इन इंडिया फॉर द वल्र्ड, डिजाइन इन इंडिया फॉर द वल्र्ड और इन्नोवेट इन इंडिया फॉर द वल्र्ड के दृष्टिकोण को साकार करने में सहायक होगा।     </p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की फरवरी 2025 में अमेरिका यात्रा के बाद से भारत और अमेरिका एक संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी द्विपक्षीय व्यापार समझौते को संपन्न करने के उद्देश्य से नियमित रूप से चर्चा करते रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए, दोनों पक्षों के कारों ने पिछले एक वर्ष में विभिन्न स्तरों पर गहन बातचीत की है। दोनों पक्षों के महत्वपूर्ण और विविध हितों को देखते हुए यह स्वाभाविक है कि दोनों पक्ष अपनी-अपनी अर्थव्यवस्थाओं के महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा करते हुए सर्वोत्तम संभव परिणाम सुनिश्चित करना चाहेंगे।</p>
<p>पीयूष गोयल ने कहा कि इन (एजेंसी)ओं के दौरान लगभग एक वर्ष तक चले कई दौर के विचार-विमर्श के बाद, दोनों (एजेंसी)कार दल द्विपक्षीय व्यापार समझौते के कई क्षेत्रों को अंतिम रूप देने में सफल रहे हैं। दो फरवरी 2026 को पीएम मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व के कई मुद्दों पर फोन पर चर्चा की। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने अमेरिका को किए जाने वाले भारतीय निर्यात पर टैरिफ की दर घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की।</p>
<p>उन्होंने कहा, मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि यह अमेरिका द्वारा कई प्रतिस्पर्धी देशों पर लगाये गये आयात कर से कम है, जिससे अमेरिकी बाजार में भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होगी। यह समझौता भारतीय निर्यातकों को, विशेष रूप से श्रम-प्रधान क्षेत्रों और विनिर्माण में, महत्वपूर्ण तुलनात्मक लाभ भी प्रदान करता है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक ढांचागत समझौता भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने और विकसित भारत 2047 की दिशा में हमारी यात्रा को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है तथा यह दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक देशों के बीच मजबूत जुड़ाव को भी दर्शाता है, जो स्वाभाविक साझेदार हैं और साझा समृद्धि के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।</p>
<p>वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने कहा कि दोनों पक्ष व्यापार समझौते से संबंधित आवश्यक तकनीकी प्रक्रियाओं को पूरा करने और कागजी कार्यवाही को अंतिम रूप देने के लिए मिलकर काम करेंगे, ताकि इसकी पूरी क्षमता का शीघ्रता से लाभ उठाया जा सके। समझौते की विस्तृत रूपरेखा इन प्रक्रियाओं के समापन के पश्चात तुरंत घोषित की जायेगी।</p>
<p>उन्होंने कहा, सदस्यों को भारत के ऊर्जा स्रोतों से संबंधित उन मुद्दों की जानकारी होगी, जो इस समझौते पर हुई चर्चाओं के दौरान उठाये गये हैं। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं, जैसा कि सरकार ने कई बार सार्वजनिक रूप से कहा है, कि 140 करोड़ भारतीयों की ऊर्जा आवश्यकताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। वस्तुनिष्ठ बाजार स्थितियों और बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्यों के अनुरूप ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना हमारी कार्यनीति का मूल आधार है। भारत की सभी कार्रवाइयां इसी बात को ध्यान में रखकर की जाती हैं। अत: मैं माननीय सदस्यों से इन मुद्दों को समुचित दृष्टिकोण से देखने का आग्रह करता हूं।</p>
<p>पीयूष गोयल ने कहा, दोनों देशों के बीच भावी व्यापार अवसरों के संदर्भ में सदस्य इस बात को समझेंगे कि भारत और अमेरिका काफी हद तक एक-दूसरे की पूरक अर्थव्यवस्थाएं हैं। जैसे-जैसे भारत विकसित भारत के पथ पर अग्रसर हो रहा है, हमें ऊर्जा, उड्डयन, डेटा केंद्र, परमाणु ऊर्जा आदि सहित कई क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं को बढ़ाने की आवश्यकता होगी। अमेरिका इन क्षेत्रों में दुनिया का अग्रणी देश है, इसलिए हमारे लिए इन क्षेत्रों में व्यापार की संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित करना स्वाभाविक है, जिससे न केवल हमारी खरीद में बल्कि हमारे अपने निर्यात में भी विस्तार होगा। अत: हमारा अनुमान है कि तुलनात्मक लाभ के परिणामस्वरूप कई क्षेत्रों में भारत का निर्यात अमेरिका में भी काफी बढ़ेगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के साथ यह ढांचागत समझौता, जो आने वाले वर्षों में वैश्विक विकास और नवाचार को गति प्रदान करेगा, भारत की जनता एवं राष्ट्र के व्यापक हित में है। यह विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत दोनों को सशक्त बनाता है। हम अपने देश के लिए माननीय प्रधानमंत्री जी के इस दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में निरंतर कार्य करते रहेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 16:47:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कृषि क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है राजस्थान-गहलोत</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश के किसानों को पारंपरिक खेती के साथ ही आधुनिक कृषि पद्धति को भी अपनाने की जरूरत बताते हुए कहा है कि इससे उत्पादन में वृद्धि होगी एवं उपज की गुणवत्ता भी बढ़ेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/rajasthan-is-setting-new-dimensions-in-agriculture-sector-gehlot/article-50072"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/630-400-size53.png" alt=""></a><br /><p>उदयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश के किसानों को पारंपरिक खेती के साथ ही आधुनिक कृषि पद्धति को भी अपनाने की जरूरत बताते हुए कहा है कि इससे उत्पादन में वृद्धि होगी एवं उपज की गुणवत्ता भी बढ़ेगी। गहलोत सोमवार को यहां बलीचा स्थित गौण मण्डी परिसर में आयोजित संभाग स्तरीय किसान महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राजस्थान कृषि के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है। बाजरा, तिलहन एवं दलहन के उत्पादन में जहां राज्य नंबर वन है, वहीं दूध और ऊन के उत्पादन में भी अव्वल है।</p>
<p>गहलोत ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रत्येक संभाग में किसान महोत्सव आयोजन के जरिए किसानों को नई तकनीकों से अवगत कराया जा रहा है ताकि कृषि एवं कृषकों को इसका भरपूर लाभ मिले। उन्होंने कहा कि हमारी योजनाएं एवं वित्तीय प्रबंधन शानदार है और वर्ष 2030 तक राजस्थान को प्रत्येक क्षेत्र में नंबर वन राज्य बनाना हमारा लक्ष्य है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान आर्थिक विकास में देश में दूसरे स्थान पर है। उन्होंने कहा कि महंगाई राहत कैंपों में मिल रहे 10 योजनाओं के लाभ से आमजन को बड़ी राहत मिल रही है।</p>
<p>गहलोत ने कहा कि राज्य में पहली बार किसानों के लिए अलग से कृषि बजट पेश करने की शुरूआत की गई है। कृषक कल्याण कोष की राशि बढ़ाकर 7500 करोड़ रुपए कर दी गई है। राज्य में 42 हजार करोड़ रुपए की राशि से किसानों को अलग-अलग योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को प्रतिमाह 2000 यूनिट बिजली नि:शुल्क उपलब्ध करायी जा रही है। प्रदेश में कृषि उपज मण्डियों का जाल बिछाया जा रहा है जिनमें किसानों को उपज के अच्छे दाम मिल रहे हैं एवं व्यापारियों को व्यापार करने में आसानी हो गई है।</p>
<p>गहलोत ने कहा कि देश में राजस्थान एक मात्र राज्य है जहां लम्पी रोग से मृत गौवंश के मुआवजे के तौर पर पशुपालकों को 40-40 हजार रुपए की सहायता राशि दी गई है। हाल ही में 42 हजार पशुपालकों के खातों में 175 करोड़ रुपए की राशि डीबीटी की गई है। वहीं, मुख्यमंत्री कामधेनु पशु बीमा योजना के अंतर्गत दो दुधारू पशुओं का नि:शुल्क बीमा किया जा रहा है, जिसका प्रीमियम राज्य सरकार वहन कर रही है। राज्य सरकार की इन योजनाओं से पशुपालकों को संबल मिला है। उन्होंने कहा कि राज्य में 3000 हजार करोड़ रुपए की राशि से गौशालाओं को अनुदान दिया जा रहा है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कृषि शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न निर्णय लिए जा रहे हैं। गत साढ़े चार वर्ष में प्रदेश में 42 कृषि कॉलेज खोले गए हैं। कृषि अध्ययन में महिला शिक्षा को बढ़ावा देने हेतु छात्राओं को प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। कृषि विषय में अध्ययनरत सीनियर सैकण्डरी छात्राओं को 15 हजार रुपए, स्नातक एवं अधिस्नातक छात्राओं को 25 हजार रुपए एवं पीएचडी कर रही छात्राओं को 40 हजार रुपए प्रतिवर्ष प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>उदयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 26 Jun 2023 17:21:16 +0530</pubDate>
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