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                <title>pradhan mantri awas yojana - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>गरीब के आशियाने के सपने को दबंगों ने तोड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[पीएम आवास योजना के तहत बनाया जा रहा था मकान ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-poor-s-dream-of-a-home-was-shattered-by-the-bullies/article-99828"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/257rtrer-(2)9.png" alt=""></a><br /><p>भैंसरोडगढ़। ग्राम पंचायत बाडोलिया के ग्राम जावरा कला में गरीब पीड़ित महिला ममता बाई के प्रधानमंत्री आवास योजना की स्वीकृत राशि से बनाए जा रहे अधूरे मकान को गांव के ही कतिपय दबंगों ने काम को बीच में रूकवा दिया। जिससे पीड़ित लाचार महिला छोटे बच्चों और परिवार को हाड़कंपाने वाली सर्दी में ठिठुरने को मजबूर है। महिला को मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है। पीड़ित ममता बाई ने सभी प्रशासनिक अधिकारियों को जानकारी देने के बावजूद भी अधिकारी अनदेखा कर रहे है। कड़ाके की सर्दी में  महिला, मासूम बच्चे और परिवार खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर हो रहे। पूर्व में प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि से पीड़ित महिला ममता बाई वैष्णव का स्वीकृत मकान ग्राम पंचायत बाडोलिया के ग्राम जावरा कला में बनाने का पंचायत और सचिव ने सर्वे कर पास किया। जिस पर महिला ने छत नाप तक मकान बनाने के उपरांत गांव के ही कतिपय दबंगों ने महिला को परेशान करते हुए काम को रुकवा दिया। पीड़ित महिला सभी जगह गुहार लगा चुकी है लेकिन प्रशासन भी केवल औपचारिकता ही कर रहा है, जिसका खामियाजा महिला और उसका परिवार इस दंश को ठंड में झेलने को मजबूर है।</p>
<p><strong>परिजनों का दर्द  छलका</strong><br />पीड़ित महिला ममता बाई ने बताया कि मेरे मकान को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पूर्व में सर्वे रिपोर्ट दर्ज के आधार पर राशि देकर बनाया जा रहा था लेकिन अभी कुछ गांव के ही दबंगों ने नाजायज परेशान कर काम को रुकवा दिया।  मैंने सभी अधिकारियों तक को मेरी पीड़ा बताई लेकिन मेरी समस्या का समाधान आज तक नहीं हुआ । इस संबंध में पीड़ित ममता बाई के देवर छीतर वैष्णव ने बताया कि हमारी जमीन जिस पर मकान बन रहा है। पूर्व में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत स्वीकृत किया गया लेकिन अभी गांव के कुछ लोग हमें नाजायज परेशान कर काम को रुकवा दिया।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />शिकायत पर गंभीरता रखते हुए दोषियों के खिलाफ कानूनी प्रावधान के तहत कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>- महेश गगोरिया, एसडीएम रावतभाटा </strong></p>
<p>पीड़ित महिला की शिकायत पर मौके पर जाकर सर्वे रिपोर्ट बना उपखंड अधिकारी को दे दी गई है। नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>-नानालाल धाकड़ ,नायब तहसीलदार, रावतभाटा</strong></p>
<p>प्रार्थिया की शिकायत पर रिपोर्ट बनाकर उपखंड अधिकारी को भेज दी गई है।<br /><strong>-बरकत हुसैन, एएसआई रावतभाटा थाना     </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Jan 2025 18:48:36 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>गरीबों के सपनों के आशियाने का काम बीच में अटका</title>
                                    <description><![CDATA[पैसे के अभाव में मकान से वंचित हो रहे ग्रामीण।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/work-on-the-dream-house-of-the-poor-stuck-in-the-middle/article-97795"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/5554-(1)6.png" alt=""></a><br /><p>अरनेठा। प्रधानमंत्री आवास योजना की तीसरी किस्त में देरी से ग्रामीणों को अपने सपनों का आशियाना बनाने में देरी हो रही है। योजना के तहत 15 हजार की पहली और 45 हजार की दूसरी किस्त तो समय पर मिल जाती है। लेकिन 60 हजार की तीसरी किस्त में देरी हो रही है। ऐसे में ग्रामीण की तीसरी किस्त जारी में संशोधन करने की मांग की है। ताकि अपने अधूरे पड़े आवास का काम समय पर पूरा करवाया जा सके। आवास पूरा नहीं बनने के कारण गरीब रहने योग्य मकान भी तैयार नहीं करवा पा रहा। गौरतलब है कि पीएम आवास योजना के तहत निर्माण से पूर्व ही पहली किश्त के 15 हजार मिलते है। जबकि 45 हजार की दूसरी किस्त दासा लेवल बनने पर मिलती है। 60 हजार की  तीसरी किश्त आवास का छत निर्माण के बाद मिलता है। तीसरी किस्त में देरी होने पर आवास का काम अटक जाता है। </p>
<p><strong>लाभार्थियों का दर्द</strong><br />लाभार्थी पार्वती बाई उर्फ पारी बाई माली ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत आवास स्वीकृत की सूचना प्राप्त हुई थी तत्पश्चात आवश्यक दस्तावेज जमा करने पर प्रथम किस्त जारी हो गई जिससे आवास योजना कार्य प्रारंभ कर दिया गया। इसके बाद नींव से ऊपर दासा लेवल तक कार्य कर दिया गया । उसके बाद आवश्यक दस्तावेज जमा करवा दिए तो दूसरी किस्त जारी हो गई। दूसरी किस्त की प्राप्त राशि में आवास का कार्य छत लेवल से ऊपर हो गया है जो दूसरी किश्त राशि प्राप्त हुई थी। उसमें छत लेवल तक ही कार्य हो पाया हैं । दूसरी किस्त की संपूर्ण राशि समाप्त हो गई । ऐसे में  तीसरी किश्त आवास की छत बनने से पहले ही मिलनी चाहिए ताकि लाभार्थी उन पैसों से छत भी डलवाकर अपने आवास को रहने योग्य बना सके । लेकिन तीसरी किस्त की प्रक्रिया संपूर्ण आवास निर्माण के बाद जारी की जा रही है। जो कि गरीबों के हित में बिल्कुल भी नजर नहीं आ रहा है। समस्त जनप्रतिनिधियों ,प्रशासन एवं सरकार से आग्रह है मामले पर गहनता से अध्ययन कर तीसरी किस्त की राशि डालने के नियम में आवश्यक संशोधन करते हुए  प्रथम एवं द्वितीय प्रक्रिया की तरह अपनाते हुए आवास के छत बनाने से पूर्व  ही तीसरी किस्त डाल दी जावे ताकि गरीब का आवास का निमार्ण कार्य बीच में लटकाना बंद हो जाए। </p>
<p>इसी प्रकार अन्य लाभार्थी जगदीश रेगर ने बताया आवास योजना की प्रथम किस्त आते ही आवास निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया है। आवास निर्माण प्रगतिरत हैं। दूसरी किस्त की आवश्यकता है। तीसरी किस्त की राशि भी प्रथम किस्त एवं द्वितीय किस्त के नियम की तरह डालना आवश्यक है ताकि अन्य व्यक्तियों से उधार लेने की आवश्यकता नहीं पड़े। इसी प्रकार प्रभुलाल मालव ने बताया प्रधानमंत्री आवास योजना का कार्य प्रगति पर हैं। प्रथम किस्त आते ही कार्य प्रारंभ कर दिया था। दूसरी किस्त आने का इंतजार है। तीसरी किस्त के नियम में थोड़ा संशोधन की आवश्यकता है ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />इस प्रकार के मामले की मुझे लिखित में दिलवा दे । इस मामले को सरकार तक पहुंचा देंगे । <br /><strong>- रवि वर्मा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद बूंदी</strong></p>
<p>सभी प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निमार्णाधीन आवासों का निरीक्षण करना प्रारंभ कर दिया हैं । इस वर्ष अरनेठा में कुल 25 आवास स्वीकृत हुए हैं। प्रथम , द्वितीय एवं तृतीय लेवल की जानकारी रजिस्टर देखकर ही बता पाऊंगा। <br /><strong>- रमेश वर्मा , कनिष्ठ सहायक ग्राम पंचायत अरनेठा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Dec 2024 18:59:23 +0530</pubDate>
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                <title>तीन साल से ढाई हजार परिवारों के आशियाने का सपना अधूरा</title>
                                    <description><![CDATA[वर्तमान कच्चे मकान मौसम की परिस्थितियों से मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/the-dream-of-providing-homes-to-two-and-a-half-thousand-families-remained-unfulfilled-for-three-years/article-70837"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/transfer-(9)7.jpg" alt=""></a><br /><p>अरनेठा। कस्बे के ग्रामीणों को पिछले तीन साल से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ढाई हजार परिवारों को अपने आशियाने का सपना पूरा नहीं हो पा रहा है। जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण जरूरतमंद ग्रामीण कड़ाके की सर्दी, भीषण गर्मी और बरसात के मौसम में टीन टप्पर, केलूपोश और कच्चे मकानों में रहने को मजबूर है। देरी की वजह प्रधानमंत्री आवास योजना की नई टारगेट लिस्ट नही आने से इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीण पारी बाई माली और कांतिबाई जांगिड़ ने बताया कई सालों से सरकारों द्वारा चलाई जा रही प्रधानमंत्री आवास योजनाओं से लाभान्वित होने का इंतजार है। भूमिहीन, महिला मुखिया, विधवा केटेगिरी ,ओबीसी लिस्ट में 23 नंबर पर नाम होने के बाद भी प्रधानमंत्री आवास योजना का अभी तक भी लाभ प्राप्त नहीं हुआ है। पिछले 3 सालों से नए आवासों की नए टारगेट लिस्ट अभी तक नहीं है। सरकार जिस प्रकार से आवास योजना का जोर-शोर से प्रचार कर रही है। जमीनी स्तर पर उतनी सत्यता नजर नहीं आ रही है। पिछले तीन साल से लिस्ट नहीं आने का सीधा सीधा मतलब हैं। हजारों गरीब परिवारों का अपने आशियाने का सपना पूरा नहीं हो पाया है। लगातार पक्के मकान की मांग इसलिए की जा रही हैं को प्रकृति का समय में बदलाव हो गया हैं मौसम कभी भी बिगड़ जाता हैं। वर्तमान कच्चे मकान मौसम की इन परिस्थितियों से मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए गरीबों को पक्की छत की आवश्यकता पड़ रही हैं। </p>
<p><strong>घर के सपना पूरा होने का इंतजार कर रहे है ग्रामीण</strong><br />ओबीसी कैटेगरी की लिस्ट में 27 नंबर पर मेरा नाम है लेकिन पिछले 3 साल से नई टारगेट लिस्ट आने का इंतजार कर रहा हूं । अभी तक भी नई टारगेट लिस्ट नहीं आई है। इधर-उधर से जानकारों से जानकारी लेते हैं तो केवल आश्वासन ही प्राप्त होता हैं। <br /><strong>- लोकनाथ मालव, अरनेठा </strong></p>
<p>2011 में आवेदन किया था नाम नहीं आया उसके बाद फिर आवेदन किया। तब भी नाम नही आया। परिवार में 3 विवाहित बच्चे है।  ऐसे में आवास योजना लाभान्वित होना अति आवश्यक हैं। <br /><strong>- रामस्वरूप मेघवाल,अरनेठा </strong></p>
<p>मेरा 71 नंबर के आसपास एससी वाली लिस्ट में नाम हैं लेकिन नई टारगेट लिस्ट नहीं आने से अभी तक भी कार्य नहीं हो पाया हैं । अभी कच्चे मकान में ही निवास कर रहे हैं। सरकार से आग्रह हैं जल्द नई टारगेट लिस्ट भिजवाए ताकि पात्र परिवारों को लाभ प्राप्त हो सके । पिछले तीन साल से नई लिस्ट नहीं आने का मतलब जिले में हजारों परिवारों को पक्की छत नहीं मिल पाई हैं।<br /><strong>- महेंद्र महावर, अरनेठा </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong> <br />प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण का पूरे राजस्थान का इश्यू हैं। अभी लिस्ट नहीं आई हैं। जैसे ही लिस्ट आएगी अवगत करा दिया जाएगा।<br /><strong>- देवीलाल बलाई, खंड विकास अधिकारी पंचायत समिति केशवराय पाटन</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Feb 2024 19:54:01 +0530</pubDate>
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                <title>सैटेलाइट मैपिंग से भी गायब सेमलाबेह गांव</title>
                                    <description><![CDATA[आवास योजना के लिए आवेदन भी कर रखे हैं लेकिन लापरवाही से इस गांव का सेटेलाइट मैपिंग में भी कई जिक्र नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/semlabeh-village-missing-even-from-satellite-mapping/article-56929"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/satellite-mapping-s-bhi-gayab-semlabeh-gaanv...chandipur,-jhalawar-news-12-09-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>चंदीपुर। ग्राम पंचायत खेरखेड़ा के सेमलाबेह गांव में ग्रामीणों को आवास  योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों को कहना है कि 10-12 वर्षों से सेमलाबेह गांव के गरीब परिवार के लोग प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लेने के लिए दर दर भटक रहे है, लेकिन आज भी यहां के लोगों को पक्का मकान नसीब नही हो सका। सेमलाबेह गांव के लोग आज भी कच्चे टूटे फूटे मकान, प्लास्टिक की चादर बिछाकर यह परिवार अपनी जिंदगी गुजर बसर कर रहें है, इतना ही नहीं बारिश के मौसम में कच्ची दिवारे गिर जाती है, जिससे हादसे होने की संभावना बनी रहती है। गरीबी की मार झेल रहे सेमलाबेह गांव के लोगों के परिवारों का मजदूरी से ही गुजर बसर होता है लेकिन महंगाई की मार के चलते इन परिवारों को महज दो वक्त की रोटी मिल पाती है यही वजह है कि यह परिवार उम्र के इस पड़ाव पर भी अपना पक्का घर नहीं बना पा रहे हैं। </p>
<p><strong>सैटेलाइट मैपिंग में भी गायब है सेमलाबेह गांव</strong><br />लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन भी कर रखे हैं लेकिन लापरवाही से इस गांव का सेटेलाइट मैपिंग में भी कई जिक्र नहीं है। यही कारण है कि सेमलाबेह गांव का जियो टैगिंग भी नही हो पाती। यहीं कारण है कि आज भी सेमलाबेह गांव के लोग अपना पक्का घर बनाने का सपना आज तक भी हकीकत में नही बदल सके। वैसे तो सेमलाबेह गांव में 220 परिवार निवास करते है, यहां पूरे गांव में लोग मेहनत मजदूरी पर निर्भर है। </p>
<p>सेमलाबेह गांव में 10-12 साल बीत जाने के बाद भी किसी भी परिवार को आवास योजना का लाभ नहीं मिला। हमारे गांव का नाम आॅनलाइन में नही बता रहा है, इसको लेकर हमने कई बार शिकायत भी की लेकिन ध्यान नहीं दिया।  <br /><strong>- नन्नू राम भील ग्रामीण</strong></p>
<p>हमारे गांव में किसी भी परिवार को आवास नहीं मिलने के कारण गांव में कच्चे मकान हैं कच्ची दीवारों में की मिट्टी लगाते लगाते हमारे हाथों में छाले पड़ गए, लेकिन अभी तक किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। बरसात के मौसम में कच्ची दीवारें गिर जाती है, जिससे हादसे होने की संभावना बनी रहती है।  <br /><strong>- लीला बाई ग्रामीण </strong></p>
<p>हमारे गांव का नाम जियो टैगिंग में नहीं बता रहा है, इसको लेकर हमने उच्च अधिकारियों को कई बार अवगत करा दिया है, उसके बावजूद भी हमारे गांव का नाम जियो टैगिंग में नही आया और हमे आवास का लाभ नहीं मिला। ग्रामीणों की मांग है कि हमें आवास योजना का लाभ मिले। <br /><strong>- बद्रीलाल भील ग्रामीण</strong></p>
<p>इस गांव में 220 परिवार निवास करते है, जिसमे गरीब परिवार के लोग रहते है इस गांव का नाम आवास ऐप में नाम नहीं खुलने की वजह से किसी भी व्यक्ति का नाम पीएम आवास में नही जुड़ा है, इसको लेकर उच्च अधिकारियों को भी अवगत करवा रखा है। <br /><strong>- पवन कुमार पारेता </strong></p>
<p><strong>ग्राम रोजगार सहायक ग्राम पंचायत खेरखेड़ा</strong><br />मेपिंग में अगर गांव का नाम नहीं आ रहा है तो यह टेक्निकल प्रोब्लम है। 2011 में पीएम आवास की सूचियां आई थी, उस समय अगर इस गांव की मेपिंग नहीं हुई तो यह बड़ी प्रोब्लम है इसको में दिखावा लेता हूं। <br /><strong>- कालू राम मीणा, विकास अधिकारी पंचायत समिति मनोहरथाना</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Sep 2023 18:59:10 +0530</pubDate>
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                <title>घर बना तलघर, नहीं मिल रहा आवास का लाभ</title>
                                    <description><![CDATA[जिनका राजनीतिक लोगों से संपर्क रहता है, वह इन योजनाओं का लाभ उठा लेते है और वास्तविक पात्र व्यक्ति इन सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/home-made-basement--not-getting-the-benefit-of-housing/article-50256"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/630-400-size-की-कॉपी-(4)11.png" alt=""></a><br /><p>शाहाबाद। सरकार द्वारा कोई भी योजना इसलिए लागू की जाती है। जिससे शोषित एवं जो आधुनिक सुविधाओं से वंचित लोग हैं जो जरूरतमंद हैं तथा जिनके पास रहने के लिए मकान नहीं है, शौचालय नहीं है। ऐसे लोगों को  प्रधानमंत्री आवास योजना संचालित की गई। जिसमें सभी समुदाय के लोगों को लाभ मिले। इस उद्देश्य को लेकर इस योजना को चलाएं गया परंतु धरातल पर ऐसी योजनाओं का लाभ जो वास्तव में पात्र व्यक्ति हैं उनको नहीं मिल पाता और ऐसी योजनाओं का लाभ भी लोग ले जाते हैं। जिनका राजनीतिक लोगों से संपर्क रहता है, वह इन योजनाओं का लाभ उठा लेते है और वास्तविक पात्र व्यक्ति इन सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं। </p>
<p>उपखंड मुख्यालय शाहाबाद कस्बे में हसन मंसूरी जिसका मकान कच्चा मुख्य बाजार में है रोड ऊंची हो जाने से वह मकान अब तलघर बन चुका है। लगभग रोड से 5 फीट नीचे मकान रह गया। ऐसे में रोड का पानी मकान में न जाए इसके लिए मंसूरी द्वारा मुख्य दरवाजे पर एक पाट का टुकड़ा मुख्य दरवाजे पर लगाकर बरसात के पानी को घर के अंदर ना जाए उसको रोकने के लिए लगा रखा है। </p>
<p><strong>कई बार प्रधानमंत्री आवास योजना का भर चुका फार्म</strong><br />हसन मंसूरी ने बताया कि मैंने प्रधानमंत्री आवास योजना का फार्म तीन चार बार भर दिया है परंतु पीएम आवास योजना में नाम नहीं आता है।  मेरी आर्थिक स्थिति बहुत ही खराब है मजदूरी करके अपने परिवार का पालन पोषण करता हूं। ऐसे में तथा स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत शौचालय भी बना हुआ नहीं है। बरसात के दिनों में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मेरा घर एक गुफा की तरह बनकर रह गया मेरे पास इतना पैसा भी नहीं कि मकान को दोबारा बना सकूं। मैंने कई बार प्रधानमंत्री आवास योजना में आवेदन किया परंतु उसका लाभ मुझे अभी तक नहीं मिला। </p>
<p>मेरा मकान कच्चा है। वह भी रोड 5 फिट ऊंचा होने की वजह से नीचे रह गया। जिससे बारिश में मेरे कच्चे घर में पानी भरने की समस्या रहती है। कई बार फार्म भी भरा लेकिन आज तक मुझें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिला है। <br /><strong>- हसन मंसूरी, कस्बेवासी। </strong></p>
<p>प्रधानमंत्री आवास योजना में जो सूची बनी हुई है। उसी के अनुसार नाम आ रहे हैं। हसन मंसूरी का नाम उस लिस्ट में है या नहीं देखा जाएगा और यदि नहीं है तो आगामी जो प्रक्रिया होगी। वह आवेदक के द्वारा करवाई जाएगी। <br /><strong>- लोकेश माली, सरपंच, ग्राम पंचायत शाहाबाद। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 28 Jun 2023 14:42:30 +0530</pubDate>
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