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                <title>smoke - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>जहरीले धुएं को फिल्टर करेगी जिग-जैग तकनीक, सरकार ने ईंट-भट्टों में लगाना किया अनिवार्य </title>
                                    <description><![CDATA[प्रदूषण के कारण ब्रेन, किडनी व हृदय को खतरा होने के साथ ही मधुमेह की समस्या भी बढ़ जाती है। धुएं से आंखों को भी नुकसान पहुंचता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/zig-zag-technology-will-filter-toxic-smoke/article-105996"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer-(5)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । जिलेभर में ईंट-भट्टों से निकलने वाले धुएं से आबोहवा दूषित हो रही है। अब सभी ईंट-भट्टा संचालकों को एनसीआर की तरह जिग-जैग तकनीक अपनानी होगी, जिससे जहरीले धुएं की मात्रा को कम किया जा सके। जिग-जैक तकनीक अपनाने के लिए संचालकों को मार्च माह तक का समय दिया गया है। इसके बाद राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल कार्रवाई करेगा। हालांकि पहले सभी ईंट-भट्टा संचालकों से समझाइश की जाएगी। जिलेभर में स्थित सैकड़ों ईंट-भट्टे नियमों को अनदेखा कर जिग-जैग तकनीक के बगैर चल रहे हैं। इनसे निकलने वाले धुएं से आबोहवा खराब हो रही है। इसका असर शहर सहित आसपास के कस्बों व गांवों पर भी पड़ रहा है। </p>
<p><strong>कोटा जिले में 300 ईंट-भट्टे उगल रहे जहर</strong><br />पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर  ईंट-भट्टा संचालकों को फरवरी-2024 तक जिग-जैग तकनीक को अपनाने के लिए निर्देश दिए थे। बाद में इसकी मियाद को मार्च 2025 तक बढ़ा दिया है। इस समय प्रदेशभर में 2037 ईंट-भट्टे हैं, जिनमें से मात्र 267 ने ही धुआं बाहर निकालने के लिए जिग-जैग तकनीक को अपना रखा है। वहीं कोटा जिले में करीब 300 से अधिक ईंट भट्टे हैं, लेकिन कोई भी जिग जैग तकनीक से संचालित नहीं हो रहा है। ऐसे में अब मार्च माह में इन सभी ईंट-भट्टा संचालकों को इस प्रणाली को अपनाना होगा। इसके बाद प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर जांच की जाएगी। जांच में बिना जिग-जैग वाले ईंट-भट्टा के खिलाफ कार्रवाई होगी। </p>
<p><strong>यह होती है जिग-जैग तकनीक : </strong>जानकारी के अनुसार जिग-जैग तकनीक में चिमनी के भीतर ईंट को जिग-जैग तरीके से लगाया जाता है। इससे दहन की प्रक्रिया बेहतर होती है। कार्बन मोनो ऑक्साइड कम बनती है। इसमें चिमनी 14 से 27 मीटर ऊंची बनाई जाती है। इससे निकलने वाला धुंआ भी ऊपर चला जाता है। इसके चलते इंसानों सहित पर्यावरण को भी नुकसान कम होता है। वर्तमान में देश में चारों तरफ फैल रहे पर्यावरण प्रदूषण के दुष्प्रभाव इंसानों के शरीर पर नजर आ रहे हैं। प्रदूषण के कारण ब्रेन, किडनी व हृदय को खतरा होने के साथ ही मधुमेह की समस्या भी बढ़ जाती है। धुएं से आंखों को भी नुकसान पहुंचता है। इस कारण केन्द्र सरकार ने ईंट-भट्टों में जिग-जैग तकनीक अपनाने के निर्देश जारी किए हैं।</p>
<p><strong>यहां 100 से अधिक वायु प्रदूषण का लेवल</strong><br />जानकारी के अनुसार कोटा शहर में वायु प्रदूषण का स्तर अधिकांश समय 100 एक्यूआई से अधिक रहता है। प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर शहर में इसकी लगातार मॉनिटरिंग की जाती है। यहां पर सबसे ज्यादा प्रदूषण वाहनों के धुएं के कारण होता है। वहीं ईंट-भट्टों के धुएं को भी प्रदूषण फैलाने में जिम्मेदार माना गया है। ऐसे में अब ईंट-भट्टों में जिग-जैग तकनीक अपनाने के निर्देश जारी किए गए हैं। ताकि शहर सहित जिले में वायु प्रदूषण के स्तर में कमी लाई जा सके।</p>
<p>70- फीसदी कम होता है प्रदूषण<br />90- फीसदी सुधरती है ईंट की क्वालिटी<br />300- फीसदी कम होता है प्रदूषण<br />26- टन कोयला की खपत साधारण विधि से<br />16- टन कोयला की खपत जिग-जैग विधि से</p>
<p>अभी हाल ही हुई बैठक में जिग-जैग तकनीक वाले ईंट-भट्टे के सम्बंध में निर्देशित किया गया है। इसमें चिमनी का इस्तेमाल होता है। जिग-जैक तकनीक से प्रदूषण कम होता है। इसमें कार्बन कण नीचे बैठ जाते हैं और उनके हवा में मिक्स नहीं होने से पर्यावरण प्रदूषण कम होता है। वहीं अब नए लोगों को चिमनी वाले ईंट भट्टों के लिए प्रेरित करेंगे। <br /><strong>-योगिता सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण मंडल, कोटा</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Mar 2025 15:59:54 +0530</pubDate>
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                <title>अलर्ट: रोजाना 6 सिगरेट पीने को मजबूर हो रहे कोटावासी</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में एक्यूआई का लेवल 210 पर पहुंचा ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/alert--kota-residents-forced-to-smoke-6-cigarettes-daily/article-102060"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/untitled-design9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।  मौसम में बदलाव का दौर जारी है। ऐसे में कोटा शहर की आबो हवा इन दिनों दूषित हो रही है। शहर में शुक्रवार को  एयर क्वालिटी डंडेक्स (एक्यूआई)  210 दर्ज किया गया। यानी यहां की हवा इतनी प्रदूषित हो चुकी है कि रोजाना 6 सिगरेट पीने बराबर धुआं कोटावासियों के फेफड़ो में सांस के जरिए जा रहा है। इस समय वातावरण में इतना प्रदूषण व्याप्त हो रहा है कि बिना सिगरेट पीने वाले व्यक्ति की सांसों में उतना ही प्रदूषण घुल रहा है, जितना 6 सिगरेट पीने से धुआं शरीर में जाता है। इससे अब  शहरवासियों में विभिन्न घातक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारियों के अनुसार सर्दियों में एयर क्वालिटी की स्थिति बेहद खराब रहती है। इस समय मौसम में बदलाव के कारण हवा पूरी गति से नहीं चल रही और कोहरे की वजह से हवा में मौजूद प्रदूषण के कण वायुमंडल में नहीं जा पा रहे है। ऐसे में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ है।</p>
<p><strong>एक्यूआई का कौनसा स्तर कितनी सिगरेट पीने बराबर</strong><br />यदि वायु प्रदूषण के स्तर की तुलना सिगरेट के धुएं से करें तो आंकड़े चौंकाने वाले हैं। यदि एक्यूआई 500 या उससे अधिक है इसका मतलब है प्रदूषण का लेवल गंभीर स्तर पर पहुंच गया है और 30 से अधिक सिगरेट पीने के बराबर धुआं आपके शरीर में पहुंच रहा है। वहीं, 450-500 एक्यूआई 25-30 सिगरेट और 401-450 एक्यूआई16-20 सिगरेट पीने के बराबर है। इसके अलावा 301-400 लेवल पर 11-15 और 201-300 एक्यूआई पर शरीर में जो धुआं पहुंचता है वो 6-10 सिगरेट पीने के बराबर है। इसके अलावा 101-200 लेवल पर 3-5 और 51-100 एक्यूआई लेवल 1-2 सिगरेट पीने के बराबर है। 0-50 एक्यूआई लेवल को अच्छा माना जाता है। इस समय कोटा में एक्यूआई 210 है यानी 6 सिगरेट पीने बराबर धुआं हमारे शरीर में जा रहा है।</p>
<p><strong>प्रदूषण से कई बीमारियों का खतरा</strong><br />चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार वाहनों से निकलने वाले धुएं में अनगिनत नैनो पार्टिकल्स होते हैं, जिनके हवा के साथ शरीर में प्रवेश करने से कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। जिसमें  खांसी, सिर में दर्द, जी-मिचलाना, घबराहट होना, आंखों में जलन, दिल से संबंधित बीमारियां, दिमाग,  फेफड़े,  हृदय,  गुर्दे,  फेफड़े के कैंसर, सांस अटैक, दमा, एलर्जी सहित कई बीमारियों का खतरा बना रहता है। सड़कों पर बेधड़क दौड़ रहे खटारा वाहनों से निकलने वाला काला धुआं अपने पीछे गंभीर बीमारियां छोड़ रहा है, जिससे राहगीरों पर सांस के अटैक से लेकर आंखों में सूजन तक कई गंभीर बीमारियों का खतरा रहता है। इन खतरों से बचने के लिए व्यक्ति को मास्क का उपयोग करना चाहिए।</p>
<p><strong>ये हैं साफ हवा के दुश्मन</strong><br /><strong>ग्राउंड लेवल ओजोन:</strong> ग्राउंड लेवल ओजोन भी वायु प्रदूषक है। यह पृथ्वी के वायुमंडल में नाइट्रोजन ऑक्साइड और वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों के बीच सूरज की रोशनी में केमिकल रिएक्शन से बनता है। यह फोटोकेमिकल स्मॉग का एक बड़ा फैक्टर है और जो आंख, नाक और गले में जलन की वजह बन सकता है।<br /><strong>पार्टिकुलेट मैटर:</strong> यह कई चीजों का मिश्रण होता है। इनमें अकार्बनिक आयन, धातु यौगिक, मौलिक कार्बन, कार्बनिक यौगिक हो सकते हैं। पर्टिकुलेट मैटर दो तरह केपीएम-2.5 और पीएम-10.0 होते हैं। पीएम 2.5 वो सूक्ष्म कणों का समूह होता, जिनका व्यास 2.5 माइक्रोमीटर या इससे कम है। वहीं 10 माइक्रोमीटर या इससे कम डायमीटर वाले सूक्ष्म कण को पीएम-10 कहते हैं।<br /><strong>कार्बन मोनोऑक्साइड:</strong> यह एक रंग, गंध और स्वादहीन गैस है। यह गैस कार्बन वाले ईधन के जलने पर निकलती है। जैसे- वाहन, बिजली संयंत्र, आग, तेल या गैस से चलने वाली भट्टियां, गैस ओवन, चारकोल ग्रिल और लकड़ी के जलने पर यह निकलती है और सांस के जरिए शरीर में पहुंचती है।<br /><strong>सल्फर डाईऑक्साइड:</strong> सल्फर डाईऑक्साइड यानी रंगहीन और जहरीली गैस होती है। यह सल्फर और ऑक्सीजन से मिलकर बनती है। तेल या कोयला जलने पर यह गैस बनती है और वायुमंडल में जाकर हवा को दूषित करती है।</p>
<p> शहर में वायु प्रदूषण के कारण बुजुर्गो को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। सुबह के समय मार्निंग वॉक के दौरान भी सड़कों पर प्रदूषण होना चिंताजनक है। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार और जनप्रतिनिधियों को विशेष प्रयास करने चाहिए ताकि आमजन स्वच्छ हवा में सांस ले सकें। <br /><strong>-बलबीर कुमार, सीनियर सिटीजन</strong></p>
<p> वायु प्रदूषण का स्तर बीमारियों को बढ़ावा देता है। वाहनों के कारण शहर के चौराहों पर प्रदूषण का ज्यादा होता है। ऐसे में यहां से निकलने वाले लोगों को बीमारियों की संभावना अधिक होती है। सौ से ऊपर एक्यआई होना यानी कई सिगरेट पीने के बराबर धुआं शरीर में समा रहा है। <br /><strong>-डॉ. के. के. डंग, श्वास रोग विशेषज्ञ</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Jan 2025 16:02:35 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>रोजाना सांसों में घुल रहा 8 सिगरेट के बराबर का धुआं</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदूषण से फेफडे से लेकर ब्लड कैंसर तक का खतरा । 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/8-cigarette-equivalent-smoke-is-getting-into-the-breath-every-day/article-95573"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/rozana-sanso-me-ghul-rha-8-cigarette-k-brabr-ka-dhua...kota-news-22-11-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा की आबो हवा इन दिनों दूषित हो रही है। एयर डंडेक्स 240 पर पहुंच चुका है। हवा इतनी प्रदूषित हो चुकी है कि सड़कों पर चलने वाला व्यक्ति रोजाना करीब 8 से 10 सिगरेट पीने जितना नुकसान झेल रहा है। वातावरण में इतना पॉल्यूशन जमा हो गया  कि बिना सिगरेट पीने वाला व्यक्ति की सांसों में उतना ही प्रदूषण घुल रहा है, जितना दिनभर में एक सिगरेट का पूरा पैकेट पीने से धुआं शरीर में जाता है। इससे शहरवासियों पर फेफड़े से लेकर ब्लड कैंसर तक घातक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।  दरअसल, सर्दियां बढ़ने के साथ ही एयर क्वालिटी बेहद खराब होने लगी है। मौसम में बदलाव के कारण हवा पूरी गति से नहीं चल रही और कोहरे की वजह से हवा में मौजूद प्रदूषण के कण वायुमंडल में नहीं जा पा रहे और वह हवा के साथ आमजन की सांसों में जाकर शरीर को खतरनाक बीमारियों की ओर धकेल रहे हैं। विश्व दमा दिवस के मौके पर पेश है, नवज्योति की खास रिपोर्ट....</p>
<p><strong>आगामी तीन महीने बेहद खतरा</strong><br />मेडिकल कॉलेज में श्वांस रोड विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र ताखर बताते हैं, आगामी सर्दियों के तीन महीने एयर क्वालिटी के लिहाज से खतरनाक होंगे। सर्दियों में कोहरा बढ़ेगा, जिसके कारण वाहनों व उद्योगों से निकलने वाला धुआं व जहरीली गैसें वायुमंडल में नहीं जा पाती और प्रदूषण पार्टिकल्स  कोहरे में लिपटकर रहेंगे, जो हवा के साथ सांसों में घुलकर शरीर को खतरनाक बीमारियों की ओर धकेलते हैं। इन खतरों से बचने के लिए व्यक्ति को मास्क का उपयोग करना चाहिए।</p>
<p><strong>80 हजार से ज्यादा वाहन अवधि पार</strong><br />जिला परिवहन कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार कोटा जिले में कुल 5 लाख 69 हजार 607 वाहन पंजीकृत हैं। इनमें से करीब 80 हजार वाहन 15 साल की अवधि पार हैं। नियमों के अनुसार अवधि पार वाले वाहनों को रिन्यू नहीं करवाए जाने पर रजिस्ट्रेशन निरस्त किए जाने का प्रावधान है। लेकिन आरटीओ द्वारा ऐसे वाहनों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। </p>
<p><strong>गर्मियों की अपेक्षा सर्दियों में अधिक खतरा</strong><br />डॉ. ताखर बताते हैं, जब एक्यूआई 200 से ऊपर होता है तो 7 से 8 सिगरेट के बराबर का धुआं हवा में सांस लेने वाला हर व्यक्ति के शरीर में जाता है। इसलिए, हवा की गुणवत्ता सुधारना बेहद जरूरी है। इसके लिए पुराने कंडम वाहनों, उद्योगों से निकलने वाला धुआं को कम करने के प्रयास होने चाहिए। साथ ही कंट्रक्शन वर्क व सड़कों की नियमित सफाई हो ताकि, वाहनों के गुजरने के दौरान धूल  न उड़े। क्योंकि, इन नैनो पार्टिकल्स  से फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचता है। </p>
<p><strong>प्रदूषण से लीवर से कैंसर तक का खतरा</strong><br />चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, वाहनों से निकलने वाले धुएं में अनगिनत नैनो पार्टिकल्स होते हैं, जिनके हवा के साथ शरीर में प्रवेश करने से कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। जिसमें  खांसी, सिर में दर्द, जी-मिचलाना, घबराहट होना, आंखों में जलन, दिल से संबंधित बीमारियां, दिमाग, फेफड़े, हृदय, गुर्दे, फेफड़े के कैंसर, सांस अटैक, दमा, एलर्जी सहित कई बीमारियों का खतरा बना रहता है। </p>
<p><strong>सांस का अटैक से आंखों में सूजन तक बीमारियां</strong><br />सड़कों पर बेधड़क दौड़ रहे खटारा वाहनों से निकलने वाला काला धुआं अपने पीछे गंभीर बीमारियां छोड़ रहा है, जिससे राहगीरों पर सांस के अटैक से लेकर आंखों में सूजन तक कई गंभीर बीमारियों का खतरा रहता है। इसका सबसे ज्यादा खतरा सड़कों पर तैनात ट्रैफिक पुलिस के जवानों पर अधिक रहता है। इसके बावजूद यातायात पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती। </p>
<p><strong>सड़कों पर दौड़ रहे खटारा वाहन, उगल रहे काला धुआं</strong><br />शहर में ट्रैफिक पुलिस व परिवहन विभाग की नजरों के सामने खटारा वाहन दौड़ रहे हैं, जो डीजल का गहरा काला धुआं छोड़ रहे हैं। इनमें नगर निगम की सिटी बसें भी शामिल हैं। यह बसें शहर के प्रमुख मार्गों से गुजर रही है। जहां ट्रैफिक पुलिस के जवान तैनात रहते हैं, इसके बावजूद इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती। नाम न छापने की शर्त पर बस चालक ने बताया कि प्रदूषण जांच तो छोड़ों लंबे समय से इन बसों की सर्विस तक नहीं हुई है। इसके अलावा खटारा लोडिंग वाहन भी एयरोड्रम सर्किल, घोड़ा सर्किल, सीएडी व कोटाड़ी चौराहा सहित प्रमुख मार्गों से बेधड़क दौड़ रहे हैं। </p>
<p><strong>बचाव के उपाए</strong><br /><strong>बीमारियों से बचाव में मास्क कारगर </strong><br />प्रदूषण से होने वाली घातक बीमारियों से बचाव के लिए मास्क प्रभावशाली उपाए है। हवा में मौजूद प्रदूषण के कण मास्क के कारण सांस के साथ शरीर में नहीं जा पाते। विदेशों में मास्क पहनना लोगों की आदत में शामिल हैं। जबकि, भारत में कोविड के बाद लोगों ने मास्क का उपयोग करना लगभग बंद कर दिया। जबकि, यही मास्क खतरनाक बीमारियों से बचाता है। मास्क का उपयोग अनिवार्य होना चाहिए।</p>
<p><strong>सप्ताह में एक दिन नो कार </strong><br />शिक्षाविद् अजीम पठान कहते हैं, सप्ताह में एक दिन नो कार डे होना चाहिए। 1 लीटर पेट्रोल बर्न करने पर वाहन करीब 1 हजार लीटर कार्बनडाई ऑक्साइड धुएं के रूप में छोड़ता है, जो गत वर्ष के आंकड़ों के मुताबिक आरटीओ में रजिस्टर्ड  56 हजार कारों के प्रति एक लीटर ईधन के हिसाब से करोड़ों लीटर कार्बनडाई ऑक्साइड पर्यावरण में घुल जाता है। यदि एक दिन वाहनों के पहिए थमे तो 2.24 लाख लोगों को स्वच्छ ऑक्सीजन मिल सकती है। </p>
<p><strong>पब्लिक ट्रांसपोर्ट व वाहन पुलिंग  का हो उपयोग</strong><br />प्रशासन को शहर में ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि लोग अपनी गाड़ियां छोड़ पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अधिक उपयोग करें ताकि, अनावश्यक ज्यादा वाहन सड़कों पर न आएं। वहीं, वाहन पुलिंग के तहत कई लोग एक ही साधन से कार्यस्थल पर पहुंच सकते हैं। इससे न केवल ईधन की बचत होगी बल्कि प्रदूषण भी कम होगा और करोड़ों लीटर ऑक्सीजन भी बचेगा। सरकार को सरकारी कार्यालयों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों व मल्टी स्टोरी में ईवी चार्जिंग लगाना चाहिए। जिससे ईवी व्हीकल्स को बढ़ावा मिलेगा। काला छुआं छोड़ने वाले व अवधि पार वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। <br /><strong>- डॉ. राजेंद्र ताखर, श्वांस रोग विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेज कोटा</strong></p>
<p>यह बात सही है, शहर में पॉल्यूशन का स्तर बढ़ रहा है। पुराने वाहनों को बाहर करने के लिए कार्रवाई की जा रही है। वहीं, कंडम व काला धुआं छोड़ने वाले वाहनों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। सख्ती और बढ़ाई जाएगी।<br /><strong>- सुरेंद्र सिंह राजपुरोहित, जिला परिवहन अधिकारी, आरटीओ</strong></p>
<p>पॉल्यूशन फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं। पॉल्यूशन सर्टिफिकेट भी चैक करते हैं, जिनके पास नहीं मिलते, उनके चालान कर रहे हैं। प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। <br /><strong>- पूरण सिंह, ट्रैफिक इंस्पेक्टर, यातायात पुलिस</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Nov 2024 14:46:31 +0530</pubDate>
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                <title>कनाडा के जंगल की आग के धुएं एवं भीषण गर्मी से अमेरिकी बेहाल</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका में लोग कनाडा के जंगल में लगी आग के धुएं के कारण हानिकारक वायु गुणवत्ता और भीषण गर्मी का सामना कर रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/american-suffering-from-the-smoke-and-severe-heat-of-canadas/article-50348"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/aag-1-(2).png" alt=""></a><br /><p>लॉस एंजेल्स। अमेरिका में लोग कनाडा के जंगल में लगी आग के धुएं के कारण हानिकारक वायु गुणवत्ता और भीषण गर्मी का सामना कर रहे हैं। ट्रैकिंग सेवा आईक्यूएयरडॉटकॉम के अनुसार, कनाडा के जंगल की आग के धुएं के कारण लगभग आठ करोड 70 लाख लोगों को खराब वायु गुणवत्ता का खतरा है। डेट्रॉइट, शिकागो और मिनियापोलिस दुनिया के सबसे खराब वायु गुणवत्ता वाले शीर्ष चार शहरों में शामिल हैं।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रीय मौसम सेवा (एनडब्ल्यूएस) ने बुधवार को मिनेसोटा से लेकर दक्षिण में जॉर्जिया तक कम से कम 20 राज्यों के लिए वायु गुणवत्ता अलर्ट जारी किया। वायु गुणवत्ता का यह अलर्ट पूरे न्यूयॉर्क राज्य और न्यू जर्सी सहित पूर्वोत्तर तक भी फैल गया।</p>
<p>एनडब्ल्यूएस ने ट्वीट किया कि आज मिडवेस्ट के व्यापक हिस्से में धुएं का स्तर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होने की आशंका है। कनाडा में जंगल की आग का धुआं इस क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है।</p>
<p>एनडब्ल्यूएस ने सुझाव दिया कि अगर आपको बाहर रहना है, तो घर के अंदर लें धुएं को कम करने में मदद के लिए एन-95 मास्क का उपयोग करने पर विचार करें। अमेरिकी रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के अनुसार, जंगल की आग का धुआं और राख आंखों, नाक, गले और फेफड़ों में जलन पैदा कर सकता है, जिससे लोगों को खांसी और सांस लेने में कठिनाई हो सकती है।</p>
<p>धुएं से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका घर के अंदर रहना है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Jun 2023 14:34:51 +0530</pubDate>
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