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                <title>manual scavenging - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने की सफाई कर्मचारी आंदोलन के सदस्यों और मैला ढोने की प्रथा से जुड़े लोगों से मुलाकात</title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आज संसद स्थित कार्यालय पर सफाई कर्मचारी आंदोलन के सदस्यों और मैला ढोने की प्रथा से जुड़े लोगों से मुलाकात की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/leader-of-opposition-rahul-gandhi-met-members-of-the-safai/article-87223"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/photo-size-(3)7.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आज संसद स्थित कार्यालय पर <span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">सफाई कर्मचारी आंदोलन के सदस्यों और मैला ढोने की प्रथा से जुड़े लोगों से मुलाकात की।</span></p>
<p><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">कांग्रेस ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि "</span><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">आज नेता विपक्ष श्री राहुल गांंधी </span><span class="css-1jxf684 r-bcqeeo r-1ttztb7 r-qvutc0 r-poiln3">उनके संसद स्थित कार्यालय में सफाई कर्मचारी आंदोलन के सदस्यों और मैला ढोने की प्रथा से जुड़े लोगों ने मुलाकात की। मोदी सरकार दावा करती है कि मैला ढोने की प्रथा देश में खत्म हो चुकी है, लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ और है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि पिछले 5 साल में सीवर और सेप्‍ट‍िक टैंक की सफाई करते हुए 377 लोगों ने अपनी जान गंवा दी। सरकार को इनकी सुरक्षा और बेहतर जीवन की ओर ध्यान देने की जरूरत है और ये तभी संभव है जब सरकार सच को स्वीकार करेगी।"</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Aug 2024 18:50:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>सीवरेज सफाई में मानवीय उपयोग पर रोक, फिर भी हर साल 100 मौतें</title>
                                    <description><![CDATA[मैनुअल स्केवेंजर के रूप में रोजगार का निषेध और उनका पुनर्वास नियम 2013 के अनुसार किसी भी व्यक्ति को सीवर सफाई के लिए सीवर में प्रवेश की अनुमति नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/ban-on-human-use-in-sewerage-cleaning--yet-100-deaths-every-year/article-50413"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/630-400-size-(2)36.png" alt=""></a><br /><p>ब्यूरो/नवज्योति, जयपुर। मैनुअल स्केवेंजर के रूप में रोजगार का निषेध और उनका पुनर्वास कानून के तहत किसी भी व्यक्ति को सीवर सफाई के लिए सीवर में प्रवेश की अनुमति नहीं है। बिना सुरक्षा उपकरणों तथा आधुनिक संसाधनों के सीवर सफाई का कार्य नहीं करवाया जा सकता। फिर भी राजस्थान में सीवर चैंबर की सफाई करते हर साल 100 से अधिक मौतें हो रही है। जिला कलेक्टरों की अध्यक्षता में बनी रेस्पोंसिबल सेनिटेशन अथॉरिटी (आरएसए) भी इन मौतों पर रोक नहीं लगा पा रही है। राजस्थान देश का दूसरा राज्य है, जहां सर्वाधिक मौतें हो रही है। <br />सरकारी आंकड़ों और हकीकत में अंतर<br />शहरी क्षेत्रों में सीवर चैंबर की सफाई के दौरान चैंबर में फंसने या जहरीली गैस से राजस्थान में सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 150 से अधिक सफाईकर्मियों की मौतें हुई है, जबकि मौत के बाद सफाई आयोग में मुआवजे के लिए आने वाले आवेदनों की संख्या इससे कई गुणा अधिक है अर्थात पांच साल में 500 से अधिक मौतें हुई है। <br /><br /><strong>क्या है कानून</strong><br />मैनुअल स्केवेंजर के रूप में रोजगार का निषेध और उनका पुनर्वास नियम 2013 के अनुसार किसी भी व्यक्ति को सीवर सफाई के लिए सीवर में प्रवेश की अनुमति नहीं है। बिना सुरक्षा उपकरणों तथा आधुनिक संसाधनों के सीवर सफाई का कार्य नहीं करवाया जा सकता। सुरक्षा संबंधी उपकरण सुपरवाइजर के पास सीवर की सफाई प्रारंभ करने से पूर्व में उपलब्ध होने चाहिए और वह स्वयं भी साइट पर मौजूद रहे। हानिकारक गैस रिसाव होने की स्थिति में सुरक्षा उपकरण आदि की संपूर्ण व्यवस्था रहे। एजेंसी की ओर से जिन कर्मचारियों को सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई का कार्य सौपा गया है, उनकी जीवन बीमा पॉलिसी कम से कम दस लाख रुपए की हो, जिसके प्रीमियम का भुगतान नियोक्ता करेगा।<br /><br /><strong>उपयोग निषेध</strong><br />विभाग की ओर से सीवर सफाई कार्य में मानवीय उपयोग निषेध मानते हुए यह कार्य आधुनिक मशीनों एवं सुरक्षा उपकरणों के साथ किए जाने के संबंध में निकायों को 14 अक्टूबर 2015 के बाद दस पर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके है। इसमें सीवर सफाई के दौरान नियमित सफाई, अनुरक्षण, अधिकतम यंत्रीकरण, निर्धारित नियमों एवं मानक संचालन प्रक्रिया एवं सुरक्षा उपकरणों के साथ सेप्टिक टैंक और सीवर सफाई सुनिश्चित की जानी है, असुरक्षित सफाई करवाना कानूनी जुर्म है।<br /><br /><strong>मौतों पर रोक की योजना</strong><br />सफाई के दौरान हादसों पर रोक के लिए जिला कलेक्टरों को जिम्मेदारी दी है कि कोई भी व्यक्ति सेप्टिक टैंक और सीवर चैम्बर में उतरकर सफाई कार्य नहीं करें। केवल मशीनों एवं सुरक्षा उपकरणों से ही कार्य करवाया जाए। कलेक्टर की अध्यक्षता में आरएसए पहले से ही गठित है। स्वायत्त शासन विभाग ने 100 करोड़ की थ्री-इन-वन मशीनें उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पर काम शुरू कर दिया है।<br /><br /><strong>निदेशालय ने मांगी पालना रिपोर्ट</strong><br />डीएलबी निदेशक हृदेश कुमार शर्मा ने सभी निकायों से आदेशों की पालना रिपोर्ट निदेशालय को भेजने के निर्देश दिए है ताकि सीवर सफाई एवं सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान श्रमिकों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य का रखते हुए असमयक होने वाली दुर्घटनाओं से बचा जा सके।<br /><br />मुआवजे के लिए आयोग की ओर से कई प्रकरणों में लिखा गया है, लेकिन अधिकारी सुप्रीम कोर्ट और सरकार के निर्देशों के बाद भी रोक नहीं लगा पा रहे है। मौत के बाद पीड़ितों के परिजनों को मुआवजा भी नहीं मिल पाता है, लोग भटकते रहते हैं।<br />-दीपक डंडोडिया, उपाध्यक्ष, राज्य सफाई कर्मचारी आयोग </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Jun 2023 10:32:19 +0530</pubDate>
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