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                <title>अनदेखी: सातलखेड़ी में वर्षों से पेयजल टंकी की नहीं हुई सफाई</title>
                                    <description><![CDATA[टंकी के आसपास भी फैली हुई है गंदगी, देखरेख नहीं होने से परिसर में उगे झाड़-झंखाड़]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/neglect--drinking-water-tank-has-not-been-cleaned-for-years-in-satalkhedi/article-120044"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/882roer-(5)1.png" alt=""></a><br /><p>सातलखेड़ी। सातलखेड़ी में घर-घर पेयजल सप्लाई करने के लिए बनी पानी की टंकी की हालत काफी खराब है। इसके आसपास गंदगी के ढेर जमा हैं। जानकारी के अनुसार खान और गांव के बीच बनी इस टंकी पर किसी का ध्यान नहीं होने से दिनों-दिन इसकी हालत बिगड़ती जा रही है। कस्बे में इस पानी की टंकी को बने हुए करीब 25 से 30 साल हो गए हैं। देखरेख के अभाव में अब यह जर्जर होने लगी है। इस टंकी से पाइप लाइन के जरिए सातलखेड़ी के घरों में कनेक्शन दिए गए हैं। लेकिन इस टंकी के आसपास गंदगी का अंबार लगा हुआ है। इस टंकी के माध्यम से नई बस्ती, यादव मोहल्ला, वार्ड नम्बर 21, वार्ड नम्बर 10 व गांव सातलखेड़ी के आधे से ज्यादा घरों में जल वितरण किया जाता है। लेकिन इसकी व्यवस्थाओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। </p>
<p><strong>नहीं होती नियमित सफाई:</strong> एक ओर जहां पानी की टंकी दुर्दशा का शिकार हो रही है, वहीं दूसरी ओर साफ-सफाई नहीं होने से कई बार दूषित पेयजल होने की आशंका बनी रहती है। जिससे पेट संबंधी रोगों के साथ डायरिया जैसी जानलेवा बीमारी फैल सकती है। </p>
<p><strong>टंकी के आसपास जमा हो रही है गंदगी </strong><br />कस्बे में टंकी का निर्माण तो कर दिया गया है। लेकिन देखरेख के अभाव में टंकी के आसपास काफी गंदगी व झाड़-झंकाड़ का ढेर लगा हुआ है। इस टंी से प्रतिदिन जल सप्लाई की जाती है। जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर खराब असर पड़ने की आशंका बनी रहती है। वहीं गंदगी के कारण बारिश का पानी भी वहीं जमा हो रहा है। जिससे वायरल सहित अन्य मौसमी बीमारियां फैलन की आशंका भी बनी हुई है।  साथ ही टंकी से निकलने वाला पानी भी परिसर में ही जमा हो रहा है। जिससे आसपास कीचड़ फैला हुआ है। साथ ही टंकियों के आसपास घास भी हो रही है। पंचायत द्वारा नगर में स्वच्छता अभियान चलाया जाता है। लेकिन रोजाना की व्यवस्थाओं पर ध्यान नहीं दिया जाता। </p>
<p>समय-समय पर पानी की टंकी की सफाई करवाई जानी चाहिए। क्योंकि अधिकतर बीमारियों का कारण दूषित पानी पीना है। साथ ही परिसर में हो रही गंदगी को भी साफ करवाया जाना चाहिए। <br /><strong>-अजय वर्मा, उपभोक्ता, सातलखेड़ी</strong></p>
<p>सातलखेड़ी खान व गांव सातलखेड़ी के बीच में जो पानी की टंकी है, उसकी जल्द ही सफाई करवाई जाएगी। साथ ही परिसर में जो गंदगी हो रही है उसे भी साफ करवाया जाएगा। <br /><strong>-बच्चू सिंह मीणा, एईएन, जलदाय विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Jul 2025 15:34:30 +0530</pubDate>
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                <title>संकट में जेडीबी की 7 हजार छात्राओं की जान, कॉलेज में सड़ रहा सीवरेज, सांस लेना मुश्किल</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा संभाग का एकमात्र गर्ल्स कॉलेज जेडीबी में 7 हजार छात्राओं की जान संकट में है, यहां बालिकाएं गंभीर बीमारियों से लेकर जहरीले जीव-जंतुओं के खतरे की जद में है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/life-of-7-thousand-girl-students-of-jdb-in-danger/article-103108"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा संभाग का एकमात्र गर्ल्स कॉलेज जेडीबी में 7 हजार छात्राओं की जान संकट में है। यहां बालिकाएं गंभीर बीमारियों से लेकर जहरीले जीव-जंतुओं के खतरे की जद में  है। नगर निगम व केडीए की लापरवाही से कॉलेज परिसर की एक हैक्टेयर भूमि सीवरेज का तालाब बन गई। जिसमें पानी के सांप व घातक बीमारियों के मच्छर पनप रहे हैं। वहीं, झाड़-झंकाड़ों का जंगल बना हुआ है। जिसमें जहरीले जीव-जंतुओं की मौजूदगी होने से अनहोनी का डर बना रहता है। पानी भरा होने के कारण कॉलेज प्रशासन सफाई तक नहीं करवा पा रहा। दुर्गंध से छात्राओं का सांस लेना तक मुश्किल हो रहा है। दरअसल, जेडीबी कॉलेज की बाउंड्री से सटी आकाशवाणी व सरस्वती कॉलोनी का सीवरेज नाला कॉलेज कैम्पस से होता हुआ बारां रोड के मुख्य नाले में मिल रहा है। जिसकी बरसों से सफाई नहीं हुई। इससे आकाशवाणी व सरस्वती कॉलोनी का सीवरेज की निकासी नहीं हो रही और बारां रोड के मुख्य नाले  का गंदा पानी आगे जाने की जगह वापस लौटकर कॉलेज के नाले में आकर कैम्पस में फैल रहा है।  जिसकी वजह से कॉलेज की एक हैक्टयर भूमि सीवरेज का तालाब बन गया है। दुर्गंध से छात्राओं का सांस लेना मुश्किल हो रहा है। </p>
<p><strong>लाइब्रेरी व ज्ञानकेंद्र के पीछे सीवरेज का दलदल</strong><br />जेडीबी साइंस कॉलेज में ज्ञानकेंद्र व लाइब्रेरी के पीछे करीब एक हैक्टेयर भूमि है, जो इन दिनों सीवेज का तालाब में तब्दील हो चुकी है। जबकि, ज्ञानकेंद्र में कम्प्यूटर लैब, सेमीनार हॉल, आॅडिटोरियम है। जहां सांस्कृतिक कार्यक्रम सहित अन्य शैक्षणिक गतिविधियां होती है। लेकिन, सीवरेज के कारण दुर्गंध से छात्राओं व शिक्षकों का सांस लेना तक मुश्किल हो रहा है। वहीं, पानी जमा होने से लाइब्रेरी व ज्ञानकेंद्र की नींव में सीलन जम रही है। जिससे दीवार ढहने का खतरा बना रहता है। </p>
<p><strong>झाड़-झंकाडों का जंगल, जहरीले जंतुओं की मौजूदगी </strong><br />ज्ञानकेंद्र, लाइब्रेरी व जूलॉजी लैब के पीछे कैम्पस में झाड़ झाड़ियों का जंगल हो रहा है। जिसमें सांप, बिच्छु, गोयरा सहित अन्य जहरीले जीव जंतुओं की मौजूदगी बनी हुई है। जिससे लैब जाने वाली छात्राओं की जान संकट में रहती है। छात्राओं   ने बताया कि जूलॉजी लैब व ज्ञान केंद्र में कई बार सांप-गोयरा आ चुके हैं। कैम्पस में सीवरेज का पानी जमा होने के कारण कॉलेज प्रशासन सफाई नहीं करवा पा रहा। हालांकि, प्राचार्य द्वारा नगर निगम को नाले की सफाई  करवाने के लिए कई बार पत्र लिखे जा चुके हैं, इसके बावजूद सुनवाई नहीं की जा रही।</p>
<p><strong>क्या कहती हैं छात्राएं</strong><br /><strong>अनहोनी का रहता है डर</strong><br /> कैम्पस में गंदगी का ढेर लगा हुआ है। प्रेक्टिकल करने जाने के दौरान जूलॉजी लैब में सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है। वहीं, लैब के सामने नाले खुले पड़े हैं। जिसमें छात्राओं के गिरने व अनहोनी का डर बना रहता है। <br /><strong>-ऐशवर्या शेखावत, बीएससी सैकंड ईयर</strong></p>
<p><strong>मच्छरों की भरमार</strong><br /> ज्ञानकेंद्र के पीछे गंदगी का ढेर लगा हुआ है। सीवरेज की दुर्गंध से सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है। गंदे पानी में मच्छर पनप रहे हैं, जिससे लाइब्रेरी व कम्प्यूटर लैब में मच्छरो की भरमार हो रही है। जिसकी वजह से छात्राएं लाइब्रेरी तक नहीं जा पाती। <br /><strong>-आरती कुमारी, बीएससी प्रथम वर्ष</strong></p>
<p><strong>सीवरेज के पानी में पनप रहे सांप </strong><br />जूलॉजी लैब व ज्ञानकेंद्र के पीछे गंदा पानी जमा हो रहा है, जिसमें पानी वाले सांप पनप रहे हैं और झाड़ियों में छिपे जहरीले कीड़े लाइब्रेरी, कम्प्यूटर लैब व जूलॉजी लैब में घुस आते हैं। जिनके काटे जाने से हादसे का खतरा बना रहता है। नगर निगम को नाले की सफाई करवानी चाहिए। <br /><strong>-अंजली मीणा, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष, जेडीबी कॉलेज</strong></p>
<p><strong>सफाई हो तो बन सकते हैं खेल मैदान</strong><br />कैम्पस की एक हैक्टेयर जमीन की सफाई हो तो यहां खेलने के लिए खेल मैदान बन सकता है। इस जगह पर हैंडबॉल, खो-खो व तीरंदाजी के मैदान डवलप किए जा सकते हैं। कॉलेज प्रशासन भी मैदान बनवाना चाहता है लेकिन सीवरेज के तालाब के कारण यह काम नहीं हो पा रहा।<br /><strong>-एनम खान, बीएससी सैकंड ईयर </strong></p>
<p><strong>दीवारों में सीलन, करंट का खतरा </strong><br />जूलॉजी व ज्ञानकेंद्र में कम्प्यूटर लैब की दीवारों मेें सीलन रहने से बदबू रहती है। वहीं, पानी की नमी के कारण दीवारों पर लगे बिजली के बोर्ड में करंट का खतरा बना रहता है। वहीं, प्रेक्टिकल के कई सामान सिलन की वजह से खराब हो रहे हैं। गंदगी के कारण लैब में जाना दुश्वार हो रहा है।<br /><strong>-गुंजन सिंह, पलक वैष्णव, बीएससी प्रथम वर्ष</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />अभी तक मेरे पास इस संबंध में कोई शिकायत नहीं आई है। आपके द्वारा ही मामले का पता लगा है। मैं मौके पर जाकर देखूंगी और समाधान करवाएंगे। केडीए के संबंधित अधिकारी को भी मौके पर बुलवा लेंगे। यदि, उनके द्वारा हो सकता है तो उनसे करवाएंगे और नगर निगम से होता है तो हम  कर देंगे।<br /><strong>-मंजू मेहरा, महापौर नगर निगम कोटा उत्तर</strong></p>
<p>प्रिंसिपल द्वारा लिखे पत्र मुझे नहीं मिले हैं और न ही इस बारे में कोई जानकारी है। यदि, समस्या है तो सीधे फोन कर बात करनी चाहिए। समस्या संज्ञान में आएगी तो निश्चित ही समाधान करवाएंगे।<br /><strong>-अशोक त्यागी, आयुक्त नगर निगम कोटा उत्तर</strong></p>
<p><strong>ज्ञान केंद्र व लाइब्रेरी की दीवार गिरने का खतरा</strong><br />गत वर्ष केडीए ने स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत जेडीबी कैम्पस में लाखों की लागत से करीब 500 मीटर लंबा नाले का निर्माण करवाया था। जिसे पीछे से आकाशवाणी से व आगे से सरस्वती होते हुए बारां रोड के मुख्य नाले से जोड़ा गया। निर्माण के दौरान एक्सईएन ने नाले की ढलान पर ध्यान नहीं दिया। ऐसे में आकाशवाणी व सरस्वती कॉलोनी से आने वाला सीवरेज जेडीबी के नाले से होकर बारां रोड के मुख्य नाले में जाता है लेकिन बारां रोड नाले की ऊंचाई अधिक होने और चौक होने के कारण पानी वापस कॉलेज के नाले में आकर कैम्पस में फैल रहा है। समस्या को लेकर नगर निगम आयुक्त को कई बार पत्र लिखे लेकिन ध्यान नहीं दिया गया। नतीजन, कॉलेज परिसर में गंदगी का अम्बार लगा है। पानी जमा होने से सफाई भी नहीं करवा पा रहे। <br /><strong>-प्रो. अजय विक्रम सिंह चंदेल, प्राचार्य जेडीबी साइंस कॉलेज</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Feb 2025 16:27:28 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - अब जल्द पहुंचेगा बस्तियों में पीने का पानी </title>
                                    <description><![CDATA[वाल्व की सफाई करवाई, नवनिर्मित टंकी का निरीक्षण किया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/effect-of-news---drinking-water-will-reach-settlements-soon/article-97392"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(1)21.png" alt=""></a><br /><p>हरनावदाशाहजी। जल जीवन मिशन के तहत कस्बे की कई बस्तियों में अभी पीने के पानी की सप्लाई सुचारू रूप से शुरू नहीं हो पाई। बुधवार को ही हरनावदाशाहजी कस्बे और ग्रामीण क्षेत्र में पानी की समस्या को लेकर दैनिक नवज्योति में ''  नलों में कब आएगा पानी? इसकी कोई गारंटी नहीं'' शीर्षक से खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था। खबर प्रकाशित होने के बाद खबर का असर यह हुआ कि बुधवार को ही मौके पर जलदाय विभाग के कनिष्ठ अभियंता, कर्मचारी और जल जीवन मिशन के ठेकाकर्मी हरनावदाशाहजी कस्बे में पहुंचे। कनिष्ठ अभियंता ने तिलक स्कूल गली, कालापाठा सहित अन्य बस्तियों में पाइप लाइन जो जल जीवन मिशन के तहत डाली गई है उनका निरीक्षण कर दुरूस्त करवाया। जलदाय विभाग की टीम ने तिलक स्कूल गली में पाइप लाइन का एंडकेप खुला हुआ था। उसको पैक किया। कालापाठा बस्ती में वाल्व की सफाई करवाई गई। वहीं नवनिर्मित टंकी का निरीक्षण भी किया। उधर मौके पर ग्राम पंचायत के उपसरपंच संजय पारेता ने भी संबंधित ठेकेदार से जल्द कार्य पूरा करने के लिए निर्देशित किया।</p>
<p><strong> इधर, दीगोद जागीर में एक माह से ट्यूबवेल खराब</strong><br />वहीं समीपवर्ती ग्राम पंचायत दिगोद जागीर के कुम्हार मौहल्ले में पीने के पानी के लिए मात्र एक सरकारी ट्यूबवेल है जो भी पिछले एक माह से खराब पड़ी हुई है। ईश्वर प्रजापति ने बताया कि मौहल्ले वासियों को पीने के लिए कुओं से पानी लाना पड़ रहा है। ग्राम पचायत को भी अवगत करा दिया, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ। </p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />संबंधित ठेकेदार को कार्य जल्द पूरा करवाने के लिए निर्देशित कर दिया है। जहां जहां पर पानी की समस्या आ रही है। वहां पर जल्द समस्या का समाधान करवाया जाएगा। <br /><strong>-  संजय पारेता, उपसरपंच। </strong></p>
<p>क्षेत्र में तिलक स्कूल गली, कालापाठा सहित अन्य बस्तियों में पाइप लाइन जो जल जीवन मिशन के तहत डाली गई है, उनका निरीक्षण कर दुरूस्त करवाया गया। <br /><strong>- वीनस मालव, कनिष्ठ अभियंता, छीपाबडौद। </strong></p>
<p>जल जीवन मिशन के तहत कार्य प्रगति पर है। अमृतखेडी गांव में अभी पानी की पाइप लाइन डालना बाकी है। जल्द ही कस्बे की वंचित बस्तियों में पानी पहुंचाने के प्रयास जारी है। <br /><strong>- रवि गुप्ता, सहायक अभियंता, जलदाय विभाग, छीपाबडौद। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Dec 2024 13:15:48 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का - दो बंद कॉम्पलेक्स के ताले खुले, टॉयलेट की सफाई हुई</title>
                                    <description><![CDATA[कॉम्पलेक्स के बंद होने से लोगों को खुले में टॉयलेट जाना पड़ता था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-the-news---locks-of-two-closed-complexes-opened--toilets-cleaned/article-97089"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer13.png" alt=""></a><br /><p>भवानीमण्डी। दैनिक नवज्योति के समाचारों के बाद प्रशासन ने शनिवार को दो सुविधा कॉम्लेक्स के ताले खुलवा दिए। जबकि दो अन्य आधुनिक शौचालयों की भी सफाई करवाई है, लेकिन अभी शहर में छह कॉम्पलेक्स बंद और बदहाल हैं। जानकारी अनुसार नवज्योति टीम ने 6 दिसंबर को शहर में बंद आधुनिक शौचालयों को लेकर मुद्दा उठाया था जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया और दो सुविधा कॉम्पलेक्स के ताले खुलवाए दिए। भवानीमंडी शहर में बने सफाईकर्मियों के फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने, ठेके पर लगे सफाईकर्मियों के नाम हो रहे फजीर्वाड़े व बंद पड़े कॉम्पलेक्स की खबरों पर शनिवार को नगर पालिका प्रशासन ने हरकत की। पचपहाड़ और सरकारी कुएं के पास स्थित आधुनिक शौचालयों की सफाई कर यहां केयर टेकर भी लगाए गए। ये दोनों कॉम्पलेक्स नाम के ही आधुनिक है जबकि बदहाल अवस्था में थे। इधर सब्जीमंडी में बंद पडे कॉम्पलेक्स के ताले खुलवाकर चालू करवा दिया गया। सब्जी मंडी में प्रतिदिन सैंकडों महिलाओं की आवाजाही रहती है और महिला सब्जी विक्रताओं को यहां कई घंटे काम करना पडता है, लेकिन इस कॉम्पलेक्स के बंद होने से लोगों को खुले में टॉयलेट जाना पड़ता था। जिससे शर्मिंदगी महसूस होती है। शनिवार को कॉम्पलेक्स के ताले खोलकर सफाई की गई तो ग्रामीणों ने खुशी जाहिर की। </p>
<p><strong>अधिकारियों को देना होगा जवाब</strong><br />भवानीमंडी नगर पालिका के पास 133 स्थाई व 80-90 सफाईकर्मी विभिन्न प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से होने के बावजूद शहर की सफाई व्यवस्था बदहाल है। स्वच्छ भारत मिशन और अन्य कोष से लाखों रूपए खर्च करके बनाए गए सुविधा कॉम्पलेक्सों पर ताले लगे है। शनिवार को चार कॉम्पलेक्स चालू हालत में हो गए, लेकिन छह अभी भी बंद है। सरकारी धन के दुरूपयोग और सफाईकर्मियों के नाम हो रहे फजीर्वाड़े का अधिकारियों को जवाब देना होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Dec 2024 13:27:41 +0530</pubDate>
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                <title>कागजों में सफाईकर्मी, शौचालय बदहाल </title>
                                    <description><![CDATA[देखरेख के अभाव में ये गंदे और जर्जर हो चुके हैं।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/sweepers-only-on-paper--toilets-in-bad-condition/article-96976"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/9930400-sizee-(1)13.png" alt=""></a><br /><p>भवानीमंडी। भवानीमंडी नगर पालिका में सफाईकर्मियों के नाम पर प्लेसमेंट एजेंसियां नगर परिषद अधिकारियोें के साथ मिलकर किस तरह फर्जीवाडा कर रही है, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण शहर में बनाए गए कॉम्पलेक्स हैं। शहर में आमजन की सुविधा के लिए दस टॉयलेट कॉम्पलेक्स बनाए हैं लेकिन दो सौ से ज्यादा सफाईकर्मी होने के बावजूद आठ कॉम्पलेक्स बंद और बदहाल पड़े है। भवानीमंडी नगर पालिका के पास 133 स्थाई सफाईकर्मी है। जबकि 80-90 सफाईकर्मी विभिन्न प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से लगा रखे हैं। इसके बावजूद स्वच्छ भारत मिशन और अन्य कोष से लाखों रूपए खर्च करके बनाए गए सुविधा कॉम्पलेक्सों पर ताले लगे है। शहर के विभिन्न इलाकों में दस कॉम्पलेक्स बनाए गए है, लेकिन नगर पालिका इनमें से दो का ही संचालन कर रही है। जबकि अन्य पर कर्मचारी नहीं होने के कारण ताले लगे हैं। देखरेख के अभाव में ये गंदे और जर्जर हो चुके हैं।  </p>
<p><strong>ढाई गली पर एक सफाईकर्मी</strong><br />भवानीमंडी शहर की बसावट करीब एक से सवा वर्ग किलोमीटर के दायरे में है। 2011 की जनगणना के अनुसार यहां 8 हजार 333 परिवार निवास करते थे जिनकी आबादी 42 हजार 283 थी। एक अनुमान के मुताबिक देश की आबादी गत जनगणना के बाद 17 प्रतिशत बढ़ना बताया जा रहा है। इसी को आधार मान लें तो भवानीमंडी में वर्तमान में अनुमानित दस हजार परिवारों पर पचास हजार से अधिक जनसंख्या नहीं होगी। इनकी सफाई व्यवस्था को संभालने के लिए नगर परिषद के पास 133 स्थाई और 90 ठेका सफाईकर्मी तैनात है। यानी 40-45 मकानों की बस्ती पर एक सफाईकर्मी तैनात है। इसके बाबवजूद शहर में जगह जगह गंदगी के अंबार लगे है और कॉम्पलेक्स बंद। जिससे लोगों को सड़कों-बाजारों में औने कौने देखकर टॉयलेट करना पड़ता है। जबकि स्वच्छ भारत अभियान के तहत इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखकर सरकारों ने अच्छा खासा बजट नगर पालिका को उपलब्ध कराया है। </p>
<p><strong>अत्याधुनिक कॉम्लेक्स से कीमती सामान गायब</strong><br />स्वच्छ भारत मिशन के दौरान शहर में दो अत्याधुनिक वातानुकूलित कॉम्पलेक्स का निर्माण किया गया था, लेकिन इन कॉम्पलेक्सो के कीमती सामान गायब हो चुके हैं और अब बदहाल स्थिति में है। इनमें से एक का ही संचालन किया जा रहा है।  देखरेख केअभाव में गाडोलिया लुहार बस्ती सुलभ शौचालय, सब्जी मंडी सुलभ शौचालय, राजस्थान- एमपी बॉर्डर पर बना सुलभ शौचालय, सरकारी अस्पताल सुलभ शौचालय, कृषि उपजमण्डी सुलभ शौचालय, पचपहाड़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, इंदिरा रसोई वृद्धा आश्रम सुलभ शौचालय आदि कॉम्पलेक्स बंद पड़े है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />लापरवाह केयरटेकर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, जिनकी वजह से सुलभ शौचालय की दुर्दशा हो रही है।<br /><strong>- मनीष मीणा अधिशासी अधिकारी, भवानीमंडी नगर पालिका</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Dec 2024 16:02:02 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - खुशखबरी: फसलों के लिए चम्बल की नहरों में दौड़ेगा अमृत</title>
                                    <description><![CDATA[क्षतिग्रस्त नहरों की मरम्मत का कार्य भी किया गया, ताकि नहरों से पानी व्यर्थ नहीं बह सके।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/asar-khabar-ka---good-news--amrit-will-run-in-chambal-canals-for-crops/article-93269"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/4427rtrer-(11)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । फसलों के लिए नहरी पानी का इंतजार कर रहे किसानों के लिए खुशखबरी है। रबी फसल 2024-25 के लिए चंबल सिंचित क्षेत्र के कृषकों की मांग के अनुसार चंबल की दोनों नहरों में जलप्रवाह किया जाएगा। दायीं नहर में 19 अक्टूबर और बायीं नहर में 25 अक्टूबर से पानी छोड़ा जाएगा। इससे पूर्व पर सीएडी विभाग की ओर से नहरों और वितरिकाओं की मरम्मत और साफ-सफाई का कार्य करवाया गया। इसके लिए विभाग ने मशीनों का उपयोग किया और युद्ध स्तर पर सफाई का कार्य चलाया। इस दौरान क्षतिग्रस्त नहरों की मरम्मत का कार्य भी किया गया, ताकि नहरों से पानी व्यर्थ नहीं बह सके।</p>
<p><strong>नवज्योति ने उठाया मामला तो हरकत में आया विभाग</strong><br />चम्बल की नहरों की दुर्दशा के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में 10 अक्टूबर के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था। जिसमें बताया था कि दायीं व बायीं मुख्य नहर में आगामी दिनों में जल प्रवाह शुरू होने वाला है, लेकिन अभी तक सफाई का काम शुरू नहीं हो पाया है। वहीं नहरों की सेहत पूरी तरह से नहीं सुधर पाई है। शहरी क्षेत्र में मुख्य नहरों के धोरों की जमीन पर अतिक्रमण हो गया है। दायीं मुख्य नहर की किशनपुरा ब्रांच की करीब पांच किमी लम्बी नहर कचरे से अटी हुई है। लोगों ने इस नहर को कचरा पात्र बना दिया है। समाचार प्रकाशित होने के बाद सीएडी विभाग हरकत में आया और नहरों की मरम्मत और सफाई का कार्य करवाया। जेसीबी मशीनों के माध्यम से नहरों से काफी मात्रा में कचरा निकाला गया।  </p>
<p><strong>किसान मांग रहे थे नहरी पानी </strong><br />कोटा जिले सहित अन्य क्षेत्रों में रबी फसलों की बुवाई का कार्य गति पकड़ने लगा है। ऐसे में किसानों को नहरी पानी की जरूरत होने लगी थी। जिले के अधिकांश क्षेत्रों में तय समय पर रबी फसलों की बुवाई हो गई है। फसलों की बढ़वार अच्छी हो इसलिए नहरी पानी की दरकार थी। किसानों की जरूरत को देखते हुए सीएडी प्रशासन ने नहरी पानी छोड़ने का निर्णय किया है। अतिरिक्त क्षेत्रीय विकास आयुक्त सीएडी ममता कुमारी तिवारी ने बताया कि रबी फसल 2024- 25 के लिए चंबल सिंचित क्षेत्र के कृषकों की मांग के अनुसार संभागीय आयुक्त पदेन क्षेत्रीय विकास आयुक्त के निर्देशानुसार दायीं मुख्य नहर में 19 अक्टूबर एवं बायीं मुख्य नहर में 25 अक्टूबर से आवश्यकतानुसार जल प्रवाह किया जाएगा। </p>
<p>रबी फसलों की बुवाई होने के बाद नहरी पानी की जरूरत हो रही थी।  हर साल नहरों में कचरा होने से जलप्रवाह में बाधा आती है। अब सीएडी की ओर से नहरों की सफाई करवाने से टेल क्षेत्र के किसानों को समय पर नहरी पानी मिल सकेगा।   <br /><strong>-नेमीचंद नागर, किसान </strong></p>
<p>प्हले मनरेगा मजदूरों से नहरों की सफाई करवाई जा रही थी। बाद में जेसीबी मशीनें लगाकर व्यापक स्तर पर नहरों की सफाई का अभियान चलाया गया।  लोगों ने नहरों में काफी मात्रा में कचरा डाल रखा था। इस दौरान नहरों की मरम्मत भी करवाई गई है।  <br /><strong>-लखनलाल गुप्ता, अधीक्षण अभियंता, सीएडी कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Oct 2024 11:30:08 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नालों की नहीं हुई सही तरीके से सफाई, कॉलोनियों में भर रहा बारिश का पानी </title>
                                    <description><![CDATA[लाखों लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ता है। बारिश के तेज बहाव के चलते करतारपुरा नाले सहित अन्य स्थानों पर हादसे भी हो चुके है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/drain-were-not-cleaned--rain-water-was-filling/article-83919"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/2233-copy15.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शहर में मामूली बारिश में ही कॉलोनियों में पानी भर जाता है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण शहर में ड्रेनेज सिस्टम सही नहीं होना व सही तरीके से नालों की सफाई नहीं होना है। निगम प्रशासन की ओर से हर साल जयपुर शहर (नगर निगम ग्रेटर-हेरिटेज) के करीब 1200 छोटे-बड़े नालों पर करोड़ों रुपए खर्चा कर सफाई कराई जाती है, लेकिन अधिकारियों की अनदेखी के चलते सफाई सही नहीं होती। ऐसे में सड़क, कॉलोनी व बाजारों में पानी भर जाता है। वहीं जेडीए की ओर से बनाए गए अंडरपास व पुलिया के नीचे ड्रेनेज सिस्टम सही नहीं होने से पानी भरता है। इसके चलते लाखों लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ता है। बारिश के तेज बहाव के चलते करतारपुरा नाले सहित अन्य स्थानों पर हादसे भी हो चुके है।</p>
<p><strong>बारिश में सड़कों का काम शुरू</strong><br />नगर निगम और जेडीए प्रशासन की ओर से बारिश के दिनों में ही सड़कों का काम शुरू किया जाता है। कई कॉलोनियों में सड़कें बनाने के दौरान ही बारिश शुरू हो जाती है। इसके बाद वहां पर काम बंद कर दिया जाता है। ऐसे में बारिश का पानी भरने के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कॉलोनियों में बनी नालियों पर भी लोगों की ओर से पक्के निर्माण करने के कारण भी पानी की निकासी नहीं हो पाती। वहीं बारिश के कारण जयपुर शहर में यातायात जाम लग जाता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jul 2024 10:08:18 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ट्रेचिंग ग्राउंड से साफ होने लगा पुराने कचरे का पहाड़ </title>
                                    <description><![CDATA[ट्रेचिंग ग्राउंड में बरसों से जमा कचरे के पहाड़ का निस्तारण करने के लिए नगर निगम ने 16 करोड़ रुपए का टेंडर किया था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-mountain-of-old-garbage-started-clearing-from-the-trenching-ground/article-50464"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/treching-ground-s-saaf-hone-lga-purane-kachre-ka-pahad...kota-news-30-06-2023.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एक ओर जहां शहर से रोजाना निकलने वाले सैकड़ों टन कचरे को ट्रेचिंग ग्राउंड पहुंचाया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ पुराने बने कचरे के पहाड़ को भी साफ किया जा रहा है। जिससे हर साल गर्मी के मौसम में ट्रेचिंग ग्राउंड में लगने वाली आग इस बार नहीं लगी। शहर में नगर निगम कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण  द्वारा घरों से एकत्र कचरे और कचरा पाइंट पर एकत्र होने वाले कचरे को डम्परों के माध्यम से नांता स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड पहुंचाया जा रहा है। शहर से रोजाना करीब 450 टन से अधिक कचरा वहां जा रहा है। ऐसे में पिछले करीब 20 साल से अधिक समय से एकत्र हो रहे कचरे से ट्रेचिंग ग्राउंड में पहाड़ ख़ड़े हो गए थे। जिसमें हर साल गर्मी के मौसम में आग लगने की घटनाएं होती थी। उसके बाद उस आग को बुझाने के लिए दमकलों से पानी डालकर बुझाया जाता था। जिससे वहां से जहरीली गैसें निकलने से आस-पास के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इतना ही नहीं बरसात के समय कचरे के कारण वाहनों का ट्रेचिंग ग्राउंड में अंदर प्रवेश तक नहीं हो पा रहा था। </p>
<p><strong>निगम ने किया 16 करोड़ का टेंडर</strong><br />ट्रेचिंग ग्राउंड में बरसों से जमा कचरे के पहाड़ का निस्तारण करने के लिए नगर निगम ने 16 करोड़ रुपए का टेंडर किया था। पहले चरण में करीब 5 लाख घन क्यूविक मीटर कचरे का निस्तारण किया जाना है। संवेदक द्वारा बड़ी-बड़ी मशीनों के माध्यम से उस कचरे का निस्तारण किया जा रहा है। संवेदक द्वारा उस कचरे की छटनी कर उसे ट्रेचिंग ग्राउंड से साफ किया जा रहा है। </p>
<p><strong>महापौर व निगम अधिकारी कर रहे मॉनिटरिंग</strong><br />ट्रेचिंग ग्राउंड को नाता से शिफ्ट करने या उस कचरे के निस्तारण के लिए एनीटी ने भी निगम प्रशासन को कई बार नोटिस जारी किए थे। उसकी पालना में निगम ने इसके निस्तारण की प्रक्रिया शुरू की। वहीं स्थानीय लोगों की परेशानी को देखते हुए कुछ समय पहले पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल ने भी निगम कार्यालय पर प्रदर्शन किया था। उसके बाद निगम ने उस कचरे के निस्तारण की प्रक्रिया शुरू की थी।  संवेदक के माध्यम से किए जा रहे कचरे के निस्तारण की नगर निगम कोटा उत्तर के अधिकारियों के साथ ही महापौर भी लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं। वे अधिकारियों के साथ समय-समय पर ट्रेचिंग ग्राउंड का निस्तारण कर उस कचरे का शीघ्र निस्तारण के निर्देश जारी कर चुकी हैं। </p>
<p><strong>सीसी रोड बनाई, अंदर तक जा रहे वाहन</strong><br />नगर निगम की ओर से हाल ही में ट्रेचिंग ग्राउंड के अंदर सीसी रोड बनाई गई है। जिससे एक तो कचरा साफ किया जा रहा है। दूसरा बरसात के  समय में वाहनों को अंदर तक जाने में परेशानी भी नहीं होगी। पहले जहां कच्ची सड़क होने से बरसात में वाहन आगे तक नहीं जा पाते थे। जिससे बीच में ही कचरा डाल देते थे। ऐसे में वह कचरा बाहर तक आ जाता था और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। लेकिन सीसी रोड बनने से इस समस्या का भी समाधान हो गया और नया कचरा ट्रेचिंग ग्राउंड के अंदर तक जा रहा है। </p>
<p><strong>स्थानीय लोगों को मिली राहत</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर के मुख्य अभियंता प्रेम शंकर शर्मा ने बताया कि ट्रेचिंग ग्राउंड से लीगेसी वेस्ट का निस्तारण किया जा रहा है। काफी कचरा साफ हो गया है। जिससे इस बार गर्मी के सीजन में वहां कचरे में आग लगने की घटना नहीं हुई है। साथ ही स्थानीय लोगों को भी इससे राहत मिली है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />ट्रेचिंग ग्राउंड में बरसों से कचरे का ढेर लगा हुआ था। उसे लेकर एनजीटी का भी आदेश था। स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल के निर्देश पर ट्रेचिंग ग्राउंड के लीगेसी वेस्ट को साफ करने का टेंडर किया गया। एक साल में 5 लाख क्यूविक घन मीटर कचरा साफ करना है। लेकिन उसमें से आधी से ’यादा कचरा साफ हो गया है। जिससे पहले जहां कचरे के पहाड़ नजर आते थे वहां अब मैदान दिखने लगा है। शीघ्र ही पुराना  पूरा कचरा साफ हो जाएगा। उसके साथ ही नए आने वाले कचरे का भी निस्तारण किया जाएगा।  समय-समय पर ट्रेचिंग ग्राउंड जाकर कार्य की मॉनिटरिंग की जा रही है।<br /><strong>- मंजू मेहरा, महापौर नगर निगम कोटा उत्तर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Jun 2023 16:30:37 +0530</pubDate>
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